यूपी में सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक तो निजी विद्यालयों में 50 प्रतिशत ही बन सकीं अपार आईडी
23 अप्रैल 2026
लखनऊ। यूपी में अब कोई भी बच्चा पढ़ाई के सिस्टम से बाहर नहीं रहेगा। उसकी पूरी शैक्षणिक जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दर्ज हो रही है। योगी सरकार के ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री, अपार प्लस (अपार+) मिशन के तहत हर छात्र को एक यूनिक आईडी दी जा रही है, जिससे उसकी पढ़ाई, उपस्थिति और प्रगति पर सीधी नजर रखी जा सकेगी। मतलब साफ है, न तो किसी बच्चे का रिकॉर्ड खोएगा और न ही कोई छात्र व्यवस्था से बाहर रह पाएगा। यह व्यवस्था सरकारी विद्यालयों के साथ साथ सहायता प्राप्त और निजी मान्यता प्राप्त स्कूलों में भी लागू की जा रही है।
2.68 करोड़ से अधिकबच्चों को जोड़ाः आगामी 30 जून तक चलने वाले इस मिशन में 4.24 करोड़ छात्रों को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से अब तक 2.68 करोड़ से अधिक बच्चों को शामिल कर 63 प्रतिशत से ज्यादा लक्ष्य हासिल किया जा चुका है। खास बात यह है कि सरकारी स्कूलों में 82 प्रतिशत से अधिक बच्चों को इस डिजिटल व्यवस्था से जोड़ दिया गया है। इससे शिक्षा को जमीनी स्तर तक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाने की दिशा में तेज प्रगति दिखाई दे रही है। इसमें सहायता प्राप्त विद्यालयों में 74.84 प्रतिशत, निजी विद्यालयों में 50.54 प्रतिशत और अन्य श्रेणियों में 46.97 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है।
विद्यार्थी की शैक्षणिक प्रोफाइल डिजिटली सुरक्षित रहेगी
अपार प्लस व्यवस्था के तहत प्रत्येक छात्र को एक यूनिक डिजिटल आईडी प्रदान की जा रही है, जिसके माध्यम से उसकी नामांकन, उपस्थिति, कक्षा प्रगति, परीक्षा परिणाम और उपलब्धियों सहित पूरी शैक्षणिक प्रोफाइल एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित रूप से दर्ज हो जाती है। आधार से लिंक होने के कारण यह आईडी छात्र की पहचान को प्रमाणित करती है और स्कूल परिवर्तन की स्थिति में उसका पूरा शैक्षणिक रिकॉर्ड स्वतः स्थानांतरित हो जाता है। इससे ड्रॉपआउट और फर्जी नामांकन की पहचान आसान होती है, वहीं सरकार को रियल-टाइम डाटा के आधार पर प्रभावी मॉनिटरिंग और नीति निर्माण में सहायता मिलती है।
30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए चलेगा विशेष अभियान, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी
13 अप्रैल 2026
नई दिल्ली। शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने छात्रों के लिए ‘APAAR ID’ (Automated Permanent Academic Account Registry) के निर्माण को लेकर राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सख्त निर्देश जारी किए हैं। सचिव संजय कुमार द्वारा जारी पत्र में 30 जून 2026 तक सभी छात्रों के लिए अपार आईडी का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने को कहा गया है।
पत्र के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक करीब 16.05 करोड़ छात्रों के अपार आईडी बनाए जा चुके हैं, जबकि कुल लक्ष्य 24.65 करोड़ है। यानी अब भी लगभग 8.6 करोड़ छात्रों की आईडी बननी बाकी है। मंत्रालय ने इस धीमी प्रगति पर चिंता जताते हुए डेटा-आधारित ‘अपार सैचुरेशन प्लान’ लागू करने का निर्देश दिया है।
इस योजना के तहत जिला स्तर पर विशेष फोकस के साथ कम प्रदर्शन वाले राज्यों/जिलों में लक्षित हस्तक्षेप किए जाएंगे। आधार से संबंधित समस्याएं, अभिभावकों की सहमति और तकनीकी बाधाओं को प्रमुख अड़चन माना गया है, जिन्हें शीघ्र दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
पत्र में यह भी कहा गया है कि जिन छात्रों के पास अभी तक अपार आईडी नहीं है, उनके अभिभावकों को स्कूलों में बुलाकर प्रक्रिया पूरी कराई जाए। इसके लिए 11 अप्रैल 2026 से 30 जून 2026 तक हर सप्ताह कम से कम एक दिन—विशेषकर शनिवार—को ‘सैचुरेशन कैंप’ आयोजित किए जाएंगे।
मंत्रालय ने राज्यों को सख्त लहजे में कहा है कि समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करते हुए राष्ट्रीय, राज्य और जिला स्तर पर नियमित समीक्षा की जाए। साथ ही हर सप्ताह प्रगति रिपोर्ट भेजना अनिवार्य किया गया है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत छात्रों के डिजिटल शैक्षिक रिकॉर्ड को एकीकृत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन जमीनी स्तर पर तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों का समाधान किए बिना लक्ष्य हासिल करना आसान नहीं होगा।
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