DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Thursday, January 29, 2026

तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं – हाईकोर्ट, देखें कोर्ट ऑर्डर

तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं – हाईकोर्ट,  देखें कोर्ट ऑर्डर 


तदर्थ प्रधानाचार्यों को मिल चुके वेतन की वसूली नहीं लेकिन आगे नहीं मिलेगा

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश में कहा है कि तदर्थ और कार्यवाहक प्रधानाचार्यों को प्रधानाचार्य पद का वेतन देय नहीं है क्योंकि नए अधिनियम में कोई प्रावधान नहीं है।

 कोर्ट ने कहा कि 1982 के अधिनियम की धारा 18 में उल्लिखित पूर्व-शर्तों का पालन किया जाना अनिवार्य है। उन शर्तों के पूरा होने के बाद ही ऐसा तदर्थ पदोन्नत व्यक्ति प्रधानाचार्य के पद के वेतन का हकदार होगा। यह भी कहाकि पहले नियुक्त तदर्थ प्रधानाचार्यों से वेतन की वापसी न की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने इस मुद्दे को लेकर समिता सहित कई अन्य की याचिकाओं पर उठे कानूनी प्रश्न और संदर्भ का निस्तारण करते हुए दिया है।

सभी याचिकाएं निरस्त
कोर्ट ने याचिकाएं निस्तारित करते हुए निर्देश दिया कि संबंधित डीआईओएस हर मामले के तथ्य जांचेंगे। कोर्ट ने आगे कहा कि यदि रिक्ति अधिसूचित नहीं की गई थी तो ऐसा तदर्थ प्रधानाचार्य उस पद के वेतन का हकदार नहीं होगा। ऐसे मामले में कॉलेज इस निर्णय की तिथि से चार सप्ताह के भीतर रिक्ति को अधिसूचित करेगा।

नए नियम लागूः कोर्ट

 कोर्ट ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन नियमावली 2023  लागू हो गई है और 1982 का अधिनियम निरस्त कर दिया गया है। 2023 के अधिनियम में तदर्थ प्रधानाचार्यों के लिए कोई प्रावधान नहीं है। 1921 के अधिनियम और उसके नियमों के तहत तदर्थ प्रधानाचार्य को वेतन देने का कोई प्रावधान नहीं है इसलिए इसके कानूनी परिणाम लागू होंगे।


देखें कोर्ट ऑर्डर के कार्यकारी हिस्से 👇


No comments:
Write comments