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Wednesday, September 21, 2022

समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों का हाल, भर्ती पर रोक, एक शिक्षक पर 158 बच्चों का जिम्मा

समाज कल्याण विभाग से संचालित स्कूलों का हाल, भर्ती पर रोक, एक शिक्षक पर 158 बच्चों का जिम्मा

प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग से मान्यता प्राप्त और समाज कल्याण विभाग से संचालित व अनुदानित प्रदेशभर के 489 स्कूलों में शिक्षक भर्ती पर रोक का खामियाजा छात्र-छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। निशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के अनुसार कक्षा एक से पांच तक के स्कूलों में प्रत्येक 30 बच्चे पर एक शिक्षक होना चाहिए। लेकिन यहां एक शिक्षक पर 158 बच्चों को पढ़ाने का जिम्मा है। एकल शिक्षक वाले स्कूलों में शिक्षकों को हेडमास्टर, टीचर, बाबू से लेकर चपरासी तक की जिम्मेदारी उठानी पड़ रही है।


अनु सचिव शासन अशोक कुमार यादव ने 11 मई को निदेशक समाज कल्याण विभाग को पत्र लिखकर इन स्कूलों में चयन के लिए जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति भंग कर दी थी। साथ ही छात्र-शिक्षक अनुपात को तार्किक बनाने के लिए समायोजन का अनुरोध किया था। जिन स्कूलों में 30 से कम छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं उन स्कूलों के छात्रों को बेसिक शिक्षा विभाग के निकटस्थ स्कूलों में प्रवेश दिलाकर यहां कार्यरत शिक्षकों को दूसरे स्कूलों में समायोजित करने को कहा था।

परिषदीय स्कूलों तक पक्की सड़क और नालियों को बनवाने की मांग

परिषदीय स्कूलों तक पक्की सड़क और नालियों को बनवाने की मांग



लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने ग्रामीण क्षेत्रों के सभी प्राथमिक, उच्च प्राथमिक व कंपोजिट विद्यालयों तक पक्की सड़कों का निर्माण व जलनिकासी की भी समुचित व्यवस्था करने की मांग की है।


 एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह व महामंत्री आशुतोष मिश्र ने मुख्यमंत्री व महानिदेशक स्कूल शिक्षा को इस संबंध में पत्र भेजा है। इसमें उन्होंने विद्यालयों में कायाकल्प योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में सड़क निर्माण व नालियों का निर्माण प्राथमिकता से कराने की मांग की है। 


जानिए कौन बना माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी?

जानिए कौन बना माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी?


लखनऊ। शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डॉ. महेंद्र देव को लंबी लड़ाई के बाद शासन ने अपर निदेशक पद पर प्रोन्नत कर दिया है। उनकी वरिष्ठता को लेकर विवाद था। अब पदोन्नति से वह माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के वरिष्ठतम अधिकारी हो जाएंगे। इससे भविष्य में निदेशक पद को लेकर होने वाली दावेदारी की तस्वीर भी बदल सकती है। 


डॉ. महेंद्र उत्तर प्रदेश शैक्षिक (सामान्य शिक्षा संवर्ग) सेवा समूह क के संयुक्त शिक्षा निदेशक व समकक्ष स्तर के अधिकारी थे। अब उन्हें अपर शिक्षा निदेशक / समकक्ष स्तर के पद पर पदोन्नति दी गई है। इसके साथ ही वह माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग के सबसे वरिष्ठ अधिकारी हो गए हैं। वह वर्तमान में अपर शिक्षा निदेशक (मा.) के पद पर प्रयागराज में तैनात हैं।

परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 63 हजार पद खाली, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री

परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 63 हजार पद खाली, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री 



लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने विधानसभा में विधायक प्रसन्न कुमार और मनोज कुमार पारस के एक सवाल के जवाब में बताया कि परिषदीय स्कूलों में करीब 63 हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। इनमें ग्रामीण स्कूलों में 51,112 और शहरी स्कूलों में 12, 149 पद खाली हैं।



 परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के 5,80,084 पद सृजित हैं। प्रदेश में अनुदेशक व शिक्षामित्र समेत कुल 6,28,915 शिक्षक कार्यरत हैं।


शासन को भेजा एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती का संशोधित परिणाम, नियुक्ति निदेशालय स्तर से होगी

शासन को भेजा एडेड जूनियर शिक्षक भर्ती का संशोधित परिणाम, नियुक्ति निदेशालय स्तर से होगी 


प्रयागराज । प्रदेश के 3049 सहायता प्राप्त जूनियर हाईस्कूलों में सहायक अध्यापक एवं प्रधानाध्यापक के 1897 पदों पर भर्ती के लिए सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से संशोधित परिणाम शासन को भेज दिया गया है।


सहायक अध्यापकों के 1507 पदों पर भर्ती के लिए लिखित परीक्षा में 42066 अभ्यर्थियों और प्रधानाध्यापक के 390 पदों पर भर्ती के लिए 1544 अभ्यर्थियों को सफल घोषित किया गया है। परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी एक साल से नियुक्ति मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उनकी नियुक्ति निदेशालय स्तर से की जानी है।

बीएड काउंसलिंग के आदेश का पत्र वायरल, रुहेलखंड विवि के कुलसचिव ने बताया फर्जी

बीएड काउंसलिंग के आदेश का पत्र वायरल, रुहेलखंड विवि के कुलसचिव ने बताया फर्जी


बरेली। बीएड प्रवेश परीक्षा का परिणाम घोषित होने के बाद अब काउंसलिंग का इंतजार है। मंगलवार को काउंसलिंग के लिए प्रमुख सचिव की ओर से रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव को संबोधित एक पत्र वायरल हुआ। इसमें 30 सितंबर से 31 अक्तूबर तक काउंसलिंग प्रक्रिया संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस पत्र को कुलसचिव ने फर्जी बताते हुए नकार दिया है।


मंगलवार को वायरल हुए पत्र में प्रमुख सचिव डॉ. सुधीर एम. बोवडे की ओर से रुहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलसचिव को संबोधित करते हुए कहा गया है कि रुहेलखंड विश्वविद्यालय की ओर से कराई गई संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा- 2022 की काउंसलिंग का संशोधित कार्यक्रम जारी किया गया है।


इसके तहत प्रथम चरण 30 सितंबर से 31 अक्तूबर तक चलेगा। अंतिम सत्र 10 अक्तूबर से शुरू होगा। सात से 15 नवंबर तक पूल काउंसलिंग होगी। 21 से 25 नवंबर तक डायरेक्ट काउंसलिंग की जाएगी। पत्र में इस कार्यक्रम के तहत ही काउंसलिंग शुरू करने की अनुमति प्रदान करने की बात कही गई है।


इस संबंध में कुलसचिव डॉ. राजीव कुमार का कहना है कि संबंधित पत्र के बारे में उन्हें कोई सूचना या जानकारी नहीं मिली है। काउंसलिंग के संबंध में शासनादेश अथवा दिशानिर्देश प्राप्त होते तो इसकी सूचना उन्हें प्राप्त होती पर यह पत्र तथ्यात्मक प्रतीत नहीं हो रहा।


पत्र में कई शाब्दिक त्रुटियां और संबोधन के साथ ही जो हस्ताक्षर किए गए हैं, वह भी गलत हैं। कुलसचिव के नाम के साथ दर्ज हस्ताक्षर भी उनके नहीं हैं।

स्कूलों में सफाई कर्मियों का प्रावधान नहीं, बच्चों से सफाई कराने के विपक्ष के आरोप पर सरकार ने दिया जवाब

स्कूलों में सफाई कर्मियों का प्रावधान नहीं

बच्चों से सफाई कराने के विपक्ष के आरोप पर सरकार ने दिया जवाब


लखनऊ। बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में बच्चों से सफाई कराने के मुद्दे पर विपक्ष ने मंगलवार को सरकार को घेरा। सरकार की ओर से बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार संदीप सिंह ने कहा कि स्कूलों में सफाई का कार्य ग्राम पंचायत के सफाई कर्मी ही करते हैं।





 वहां अलग से सफाई कर्मचारी तैनात करने का प्रावधान नहीं है। विधानसभा में प्रश्नकाल में सपा विधायक लालजी वर्मा ने आरोप लगाया कि ग्राम पंचायतों के सफाई कर्मियों को गांव में गौशाला की सफाई में लगा दिया है। ऐसे में जब गांव की सफाई नहीं हो रही है। तो स्कूलों की सफाई कैसे होगी।

मान्यता की नई शर्तों के विरोध में 23 को विद्यालय बंद रखेंगे प्रबंधक

मान्यता की नई शर्तों के विरोध में 23 को विद्यालय बंद रखेंगे प्रबंधक



लखनऊ। यूपी बोर्ड से प्रस्तावित विद्यालयों की नई मान्यता शर्तों का विरोध तेज हो गया है। स्ववित्तपोषित विद्यालय प्रबंधक महासंघ ने इन शर्तों के विरोध में 23 सितंबर को विद्यालय बंद करने का निर्णय किया है। 



महासंघ के अध्यक्ष हवलदार सिंह व महासचिव संतराम सिंह ने मुख्यमंत्री से प्रस्तावित बदलाव को वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नई मान्यता शर्तों के अनुसार शहर में 3000 वर्ग मीटर जमीन पूंजीपति ही खरीद सकते हैं। इन शर्तों से प्रदेश में यूपी बोर्ड के 95 फीसदी विद्यालय बंद हो जाएंगे। शिक्षकों का रोजगार छिनेगा और मध्यम आय वर्ग वाले परिवारों के बच्चे शिक्षा से वंचित हो जाएंगे। 

महासंघ ने अन्य सभी शिक्षकों व प्रबंधक संगठनों से भी विरोध में एकजुट होने का आह्वान किया है। ब्यूरो

परिषदीय शिक्षकों की नियुक्ति को फर्जी बताकर STF एवं BSA कार्यालय से जॉच कराने के नाम पर रंगदारी माँगने वाले गैंग का हुआ खुलासा।

परिषदीय शिक्षकों की नियुक्ति को फर्जी बताकर STF एवं BSA कार्यालय से जॉच कराने के नाम पर रंगदारी माँगने वाले गैंग का हुआ खुलासा।

शिक्षकों से रंगदारी मांगने पर शिक्षक समेत तीन गिरफ्तार


गोरखपुर। खुद को एसटीएफ कर्मचारी बताकर शिक्षकों से रंगदारी मांगने के आरोप में शिक्षक गिरधारी लाल जायसवाल समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। तीनों को कोर्ट में पेश किया, जहां से जेल भेजा गया। पूछताछ में पता चला कि तीनों खुद को एसटीएफ कर्मी बताकर शिक्षकों को फोन कर धमकी देते थे कि जांच में आपकी डिग्री फर्जी मिली है। जल्द ही बर्खास्त कर दिया जाएगा। इसी धमकी के सहारे वसूली भी करते थे।



Tuesday, September 20, 2022

यूपी बोर्ड की मान्यता के नियमों में में प्रस्तावित बदलाव पर हंगामा, सपा ने शिक्षा के बाजारीकरण का लगाया आरोप

यूपी बोर्ड की मान्यता के नियमों में में प्रस्तावित बदलाव पर हंगामा

विधान परिषद : सपा सदस्यों ने शिक्षा के बाजारीकरण का लगाया आरोप

नेता सदन  बोले गुणवत्ता सुधारने के लिए सरकार ले रही अहम फैसले


लखनऊ। विधान परिषद में सोमवार को यूपी बोर्ड की मान्यता के नियमों में प्रस्तावित संशोधनों पर सपा सदस्यों ने हंगामा किया। उन्होंने सरकार पर शिक्षा के बाजारीकरण का आरोप लगाया और अपना विरोध दर्ज कराते हुए वेल में आ गए। नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने मुख्य विपक्षी दल के आरोपों को नकारते हुए कहा कि भाजपा सरकार शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अहम फैसले ले रही है। मान्यता के नियमों में संशोधनों के लिए सुझाव व आपत्तियां मांगी गई हैं। इन पर विचार के बाद ही कोई अंतिम निर्णय लिया जाएगा।


सपा सदस्य आशुतोष सिन्हा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा सदन में उठाया। उन्होंने कहा कि माध्यमिक शिक्षा परिषद हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की मान्यता के नियमों में बदलाव कर रही है। शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के मानक तीन गुने किए जा रहे हैं, ताकि पूंजीपति और बड़ी कंपनियां ही स्कूल खोल पाएं। सपा के ही सदस्य डॉ. मान सिंह ने कहा कि सरकार शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं है।


सपा सदस्य लाल बिहारी यादव ने कहा कि मान्यता के लिए अभी तक विभिन्न तरह की सिक्योरिटीज के तौर पर 33 हजार रुपये ही लिया जाता था, जोकि अब 11 लाख रुपये किया जाना प्रस्तावित है। मध्यवर्गीय प्रबंधकों को स्कूल खोलने से रोकने की यह चाल है। कंपनियां स्कूल खोलेंगी तो महंगी फीस होने के कारण गरीबों के बच्चे उनमें दाखिला नहीं ले पाएंगे। इतना ही नहीं वित्तविहीन विद्यालयों में परीक्षा केंद्र न बनाने के लिए भी निर्देश दिए जा रहे हैं। एफसीआई के गोदामों में भी परीक्षा कराने की योजना बनाई जा रही है। इन विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को केंद्र व्यवस्थापक बनाने की व्यवस्था पहले ही खत्म कर दी गई है। 


नेता सदन केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत सीबीएसई की तर्ज पर यूपी बोर्ड को आगे बढ़ाया जा रहा है। शिक्षा में सुधार के लिए भाजपा की योगी सरकार प्रतिबद्ध है। इस पर लाल बिहारी यादव ने कहा कि मान्यता के लिए 11 लाख रुपये लेने से कौन सी गुणवत्ता बढ़ेगी। इसके बाद सपा के सभी सदस्य वेल में आकर नीचे बैठ गए। 


सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने सदन को व्यवस्थित रूप से चलाने की अपील की। करीब 10 मिनट बाद सपा सदस्य अपनी सीट पर लौटे तो नेता सदन ने कहा कि वे लोग अपनी आपत्तियां दे दें, उन पर भी विचार होगा। कहा कि डीएम को परीक्षा केंद्र के बाबत अभी सरकार ने कोई निर्देश नहीं दिए हैं। इस पर लाल बिहारी ने कहा कि वे मंगलवार को उस आदेश को सदन में उपलब्ध करा देंगे। 


चुनौती भरे लहजे में कहा कि अगर उनकी बात गलत निकली तो सदन से इस्तीफा दे देंगे। पहले की सरकारों में भी शिक्षक विधायकों से सुझाव न लिए जाने की बात आने पर लाल बिहारी ने कहा कि कम से कम अब तो इस खामी को दुरुस्त कर लिया जाए। इस पर केशव ने कहा कि लाल बिहारी यादव यूपी में पहले रहीं अपनी पार्टी की सरकारों पर तो कम से कम आरोप मढ़ने से बचें।


नए स्कूल खोलने से रोकना चाहती है सरकार: सपा

सपा ने विधान परिषद में सोमवार को यूपी बोर्ड की मान्यता के नियमों में प्रस्तावित संशोधन का विरोध किया। आशुतोष सिन्हा ने कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए यह मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्र में जमीन के मानक तीन गुने किए जा रहे हैं, ताकि पूंजीपति और बड़ी कंपनियां ही स्कूल खोल पाएं। 


सपा सदस्य लाल बिहारी यादव ने कहा कि मान्यता के लिए अभी तक विभिन्न तरह की सिक्योरिटीज के तौर पर 33 हजार रुपये लिया जाता था, जिसे 11 लाख रुपये किया जाना प्रस्तावित है। यह मध्यवर्गीय प्रबंधकों को स्कूल खोलने से रोकने की चाल है। कंपनियां स्कूल खोलेंगी तो अधिक फीस होने के कारण गरीबों के बच्चे उनमें दाखिला नहीं ले पाएंगे।



वित्तविहीन शिक्षकों की जिम्मेदारी उठाए सरकार

विधान परिषद में बसपा के सदस्य सुरेश कुमार त्रिपाठी और ध्रुव त्रिपाठी ने वित्तविहीन शिक्षकों के लिए सरकार से मदद देने और सेवा नियमावली लागू करने का मुद्दा कार्यस्थगन प्रस्ताव के जरिए उठाया। आकाश अग्रवाल ने कहा कि वित्तविहीन शिक्षकों की जिम्मेदारी प्रदेश सरकार को उठानी चाहिए।

राजकीय विद्यालयों में होगी 7471 शिक्षकों की भर्ती, माध्यमिक शिक्षा निदेशालय भेज चुका है लोक सेवा आयोग को अधियाचन

राजकीय विद्यालयों में होगी 7471 शिक्षकों की भर्ती


माध्यमिक शिक्षा निदेशालय भेज चुका है लोक सेवा आयोग को अधियाचन

ज्यादातर विषयों में सुलझ गया अर्हता का विवाद, कुछ में कार्यवाही जारी



राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता एवं सहायक अध्यापक (एलटी) भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे प्रतियोगियों के लिए यह खुश करने वाली खबर है। माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने प्रदेश भर में राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के रिक्त पदों का विवरण जुटाकर भर्ती के लिए अधियाचन उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को भेज दिया है। कुल 7471 पदों का अधियाचन भेजा गया है, जिसमें प्रवक्ता संवर्ग में 2215 और सहायक अध्यापक एलटी संवर्ग में 5256 पद हैं। यह सभी पद महिला और पुरुष दोनों श्रेणी के हैं।


इसमें कुछ विषयों में अर्हता का विवाद है, जिसमें से अधिकांश हल किए जा चुके हैं। शेष विषयों में कार्यवाही जारी है। प्रदेश में पुरुष एवं महिला दोनों संवर्गों को मिलाकर प्रदेश भर में सहायक अध्यापक के 19300 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 12294 कार्यरत हैं। रिक्त पदों की संख्या 7006 है। उप शिक्षा निदेशक एमपी सिंह के मुताबिक रिक्त पदों के सापेक्ष 5256 पद के लिए अधियाचन जिलों से प्राप्त हुआ है। इसी तरह प्रवक्ता के 9463 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 4134 पदों पर प्रवक्ता नियुक्त हैं। 


प्रदेश के राजकीय इंटर कालेजों में 5129 पद रिक्त हैं। प्रवक्ता संवर्ग में 2215 पदों पर अधियाचन निदेशालय को प्राप्त हुआ है। भर्ती विज्ञापन जारी करने के लिए अधियाचित पदों को लोक सेवा आयोग को भेजा जा चुका है। इसमें अर्हता को लेकर माध्यमिक शिक्षा विभाग के एक्ट-1993 में और एनसीटी एक्ट 2001 में थोड़ा अंतर है। 


उदाहरण के लिए माध्यमिक शिक्षा एक्ट के अनुसार एलटी वर्ग में हिंदी विषय के लिए स्नातक में हिंदी और इंटरमीडिएट में संस्कृत विषय होना चाहिए, जबकि एनसीटी एक्ट के मुताबिक स्नातक में हिंदी और संस्कृत दोनों होना चाहिए। इसी तरह कुछ और विषयों में अर्हता को लेकर विवाद है, जिसमें से अधिकांश को सुलझा लिया गया है, कुछ में कार्यवाही चल रही है।

डीएलएड प्रशिक्षण का नया सत्र शुरू नहीं और सीधे प्रवेश पर भी नहीं हो सका निर्णय

डीएलएड प्रशिक्षण का नया सत्र शुरू नहीं और सीधे प्रवेश पर भी नहीं हो सका निर्णय


प्रयागराज । डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) 2022 के नए सत्र की कक्षाएं शुरू नहीं सकी हैं। वहीं, अभी तक कॉलेजों में सीधे प्रवेश पर भी कोई निर्णय नहीं हुआ है। इससे सत्र का पिछड़ना तय है। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से डीएलएड 2022 प्रशिक्षण के लिए दो बार काउंसलिंग कराई गई। लेकिन इसके बाद भी सवा दो लाख सीटों के सापेक्ष लगभग 50 हजार ही सीटें भर पाईं। 


बताया जा रहा है कि कई कॉलेजों में तो एक भी अभ्यर्थी नहीं मिले हैं। ऐसे में सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर कॉलेजों में सीधे दाखिले का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। लेकिन  शासन की ओर से अब तक इस प्रस्ताव को मंजूरी नहीं मिली है। जबकि नए सत्र का प्रशिक्षण 14 सितंबर से होना था लेकिन अभी तक सत्र की शुरुआत नहीं हो सकी। 


सत्र विलंब से शुरू होने पर पाठ्यक्रम पूरा करने की चुनौती होगी। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने बताया कि नया सत्र 14 सितंबर से शुरू होना था लेकिन कॉलेजों में सीधे प्रवेश का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। ऐसे में नए सत्र का प्रशिक्षण शुरू नहीं हुआ है। 

यूपी बोर्ड परीक्षा वर्ष 2015 से 2020 तक जमा शुल्काय (कोष-पत्र ) (कक्षा 09 एवं कक्षा-11 रजिट्रेशन शुल्क एवं हाईस्कूल / इण्टरमीडिएट परीक्षा शुल्क) को कोषागार से सत्यापित कराते हुए उसकी सूची उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में।

यूपी बोर्ड परीक्षा वर्ष 2015 से 2020 तक जमा शुल्काय (कोष-पत्र ) (कक्षा 09 एवं कक्षा-11 रजिट्रेशन शुल्क एवं हाईस्कूल / इण्टरमीडिएट परीक्षा शुल्क) को कोषागार से सत्यापित कराते हुए उसकी सूची उपलब्ध कराये जाने के सम्बन्ध में।


प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लिपिक श्रेणी पदों पर चयन के सम्बन्ध में

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में लिपिक श्रेणी पदों पर चयन के सम्बन्ध में

अब नए साल में मिलेंगे सहायता प्राप्त माध्यमिक कालेजों को 4,512 लिपिक

लिपिकों के चयन की समय सारिणी बढ़ाकर हुई 16 जनवरी 2023

अभी भर्ती के लिए विद्यालयों के प्रबंधक नहीं भेज रहे थे रिक्त पद

प्रदेश के एडेड माध्यमिक विद्यालयों में ऑफलाइन ही होगी लिपिकों की भर्ती

शासन ने निदेशालय के ऑनलाइन भर्ती के प्रस्ताव में बताईं तकनीकी दिक्कतें



लखनऊ : प्रदेश के 4,512 सहायताप्राप्त (एडेड) माध्यमिक कालेजों को अब नए साल में लिपिक मिल सकेंगे। शासन ने लिपिकों का चयन आनलाइन के बजाय आफलाइन करने के निर्देश दिए हैं। समय सारिणी 16 दिसंबर से बढ़ाकर 16 जनवरी 2023 कर दी गई है। समय सारिणी में संशोधन करने की वजह प्रक्रिया का आफलाइन करना बताया जा रहा है, लेकिन हकीकत यह है कि भर्ती के लिए कालेजों के प्रबंधक रिक्त पदों का ब्योरा नहीं भेज रहे हैं, उन्हें रिक्त पद घोषित करने के लिए और समय दिया गया है।


सरकार एडेड माध्यमिक कालेजों में जुगाड़ से लिपिक बनने का रास्ता बंद कर चुकी है। इसके लिए अभ्यर्थियों को चरणवार कड़े इम्तिहान से गुजरना होगा । ये बदलाव कालेज प्रबंधकों को रास नहीं आया है। इसीलिए अब तक अधिकांश ने सभी रिक्त पदों का ब्योरा नहीं भेजा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के अनुसार करीब 1700 रिक्त पद घोषित किए गए हैं, जबकि विद्यालयों में खाली पद लगभग तीन हजार हैं। भर्ती के नियमों का शासनादेश 25 नवंबर 2021 को जारी हुआ और चार जुलाई को शासन ने चयन की समय सारिणी घोषित की थी। माध्यमिक शिक्षा ने 14 सितंबर को आनलाइन आवेदन लेने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा था। 


विशेष सचिव एसपी सिंह ने शिक्षा निदेशक को निर्देश दिया है कि कैबिनेट ने लिपिकों के चयन के लिए आवेदनपत्र आफलाइन माध्यम से लिए जाने पर मुहर लगाया है। ऐसे में अब आनलाइन आवेदन नहीं लिए जाएंगे। यह भी लिखा कि आनलाइन माध्यम से आवेदन लेने में कठिनाइयां सामने आएंगी। इसमें समस्या यह भी है कि अलग संस्थाओं के लिए लिपिकों का चयन होना है इसमें कोई एकीकृत व्यवस्था नहीं है। 


प्रस्ताव में चयन के लिए एक माह की समय बढ़ाने का अनुरोध स्वीकार करके चयन अब 16 जनवरी 2023 तक कराने का निर्देश दिया गया है। अपर निदेशक माध्यमिक शिक्षा डा. महेंद्र देव ने बताया कि सोमवार से जिलों में भर्ती के लिए विज्ञापन जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग लखनऊ की प्रारंभिक पात्रता परीक्षा (पीईटी) अनिवार्य है। इसमें 50 प्रतिशत अंक पाने वाले अभ्यर्थी ही लिपिक बन सकेंगे। कालेज प्रबंधक की अध्यक्षता में गठित पांच सदस्यीय चयन समिति साक्षात्कार लेगी ।


UPTET 2022 Notification: आने वाला है यूपीटीईटी का नोटिफिकेशन, जानें कब और कैसे कर पाएंगे चेक

UPTET  2022  Notification: आने वाला है यूपीटीईटी का नोटिफिकेशन, जानें कब और कैसे कर पाएंगे चेक

UPTET 2022 Notification: यूपीटीईटी का नोटिफिकेशन इसी महीने जारी होगा.

UPTET 2022 Notification: UPTET का नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाना है. बता दें कि नोटिफिकेशन अधिकारिक वेबसाइट updeled.gov.in पर रिलीज किया जाएगा.


यूपीटीईटी नोटिफिकेशन का इंतजार कर रहे उम्मीदवारों के लिए बढ़िया खबर है. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा बोर्ड की ओर से अब यूपी शिक्षक पात्रता परीक्षा, UPTET का नोटिफिकेशन जल्द ही जारी किया जाना है.


 बता दें कि नोटिफिकेशन अधिकारिक वेबसाइट updeled.gov.in पर रिलीज किया जाएगा. इसके साथ ही परीक्षा के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी.
रिपोर्ट में अनुमान लगाया जा रहा है कि सितंबर माह के अंत तक यूपीटीईटी का नोटिफिकेशन जारी किया जा सकता है. ऐसे में उम्मीदवारों को आधिकारिक वेबसाइट updeled.gov.in पर नजर बनाए रखनी चाहिए. वहीं परीक्षा के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों की बात करें तो 18 से 35 वर्ष तक के उम्मीदवारों को इसके लिए आवेदन करने का मौका दिया जा सकता है.



शैक्षिक योग्यता में बीएड, बीटीसी आदि डिग्री अनिवार्य की जा सकती है. पूरी डिटेल उम्मीदवार नोटिफिकेशन से चेक कर सकेंगे. वहीं परीक्षा के पैटर्न की बात करें तो इसके तहत कुल 2 पेपर होते हैं. जिसमें कक्षा एक से 5वीं तक के लिए पेपर 1 एवं कक्षा 6वीं से 8वीं तक के लिए पेपर 2 होता है. प्रत्येक पेपर में 150 प्रश्न इतने ही अंको के पूछे जाते हैं. साथ ही इस में नेगेटिव मार्किंग भी नहीं होती है.

माध्यमिक : वर्ष 2000 के पूर्व नियुक्त तदर्थ शिक्षक एवं वर्ष 2000 के पश्चात नियुक्त तदर्थ शिक्षक के संबंध में।

माध्यमिक : वर्ष 2000 के पूर्व नियुक्त तदर्थ शिक्षक एवं वर्ष 2000 के पश्चात नियुक्त तदर्थ शिक्षक के संबंध में।


Monday, September 19, 2022

अपने स्कूल को निपुण बनाएंगे SRG, ARP और संकुल शिक्षक

अपने स्कूल को निपुण बनाएंगे SRG, ARP और संकुल शिक्षक


बेसिक शिक्षा विभाग के एसआरजी, एआरपी और संकुल शिक्षक अपने विद्यालय को निपुण विद्यालय बनाएंगे। विभाग ने निगरानी टीमों में शामिल इन शिक्षकों को पहले अपने विद्यालय के बच्चों को एक साल में निपुण बनाने के निर्देश दिए हैं, ताकि तय लक्ष्य के अनुसार उनके स्कूलों में पठन-पाठन दुरुस्त हो सके और इनके स्कूल दूसरों के लिए नजीर बन सकें।


कक्षा कक्ष प्रक्रियाओं व अन्य कार्यक्रमों की बेहतर निगरानी के लिए नई चेक लिस्ट जारी की जाएगी। न्याय पंचायत स्तर पर शिक्षक संकुल के सदस्यों  और ARP और SRG द्वारा अपने विद्यालयों को आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित करने के लिए  उन्मुखीकरण कार्यक्रम तय बिंदुओं पर होगा।


अभी तक इनसे विभाग द्वारा सूचनाओं के आदान-प्रदान का ही काम लिया जाता रहा है, लेकिन अब यह शिक्षक तय मानक के अनुसार अपने-अपने विद्यालय के बच्चों को सबसे पहले निपुण बनाएंगे, जिससे दूसरे विद्यालय और शिक्षक भी प्रेरित होंगे। इनको गतिविधि आधारित पढ़ाई करानी होगी। इसके लिए उन्हें पूरी योजना समझा दी गई है।

अभिभावक और शिक्षक मिलकर यूपी को बनाएं निपुण प्रदेश : बेसिक शिक्षा मंत्री

अभिभावक और शिक्षक  मिलकर यूपी को बनाएं निपुण प्रदेश : बेसिक शिक्षा मंत्री


लखनऊ : बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह ने कहा है कि निपुण भारत मिशन के तहत अब निपुण प्रदेश बनाना है। शिक्षक अभिभावक मिलकर इस अभियान पर तेजी से जुटें। यूपी ने पहल करते हुए कक्षा चार व पांच में भी बुनियादी शिक्षा का कार्यक्रम शुरू किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से बातचीत करें और उन्हें छात्रों के ज्ञान अर्जन की स्थिति बताएं, ताकि अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा पर बेहतर तरीके से ध्यान दें।


बेसिक शिक्षा मंत्री ने रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में निपुण भारत मिशन के अंतर्गत कक्षा चार व पाँच के लिए बुनियादी साक्षरता व संख्या ज्ञान कार्यक्रम, शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए कहा कि शिक्षकों के प्रशिक्षण के लिए विभाग की और से विभिन्न तरह के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री बच्चों को अच्छे ढंग से शिक्षा दिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत रहते हैं और सभी सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए भी प्रयास कर रहे हैं। 


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने कहा कि निपुण भारत मिशन के तहत निरंतर कार्य किया जा रहा है। मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से संबंधित प्रशिक्षण आदि की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि मिशन को सफल बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका है राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत देश में निपुण भारत कार्यक्रम संचालित है। कक्षा एक से कक्षा तीन तक के लिए बुनियादी शिक्षा पर शिक्षण कार्य सभी स्कूलों में किया जा रहा है। इसी क्रम में प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन के साथ मिलकर कक्षा चार व पांच के बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा पर आधारित उपचारात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। 


विभाग की ओर से प्रदेश के सभी जिलों में कार्यक्रम संचालित होंगे। कक्षा चार पांच के सभी शिक्षकों को प्रथम एजूकेशन फाउंडेशन की ओर से दो दिनी ब्लाक स्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। यहां आमजन में जागरूकता लाने के लिए बालिका शिक्षा पर आधारित सांस्कृतिक दल के माध्यम से एक लघु नाटक प्रस्तुत भी प्रस्तुत किया गया।


 मंत्री ने शिक्षक निर्देशिका का विमोचन किया। इसमें स्कूल में की जाने वाली सभी गतिविधियों की जानकारी दी गई है। उन्होंने पांच मास्टर ट्रेनर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया साथ ही सरस्वती वंदना प्रस्तुत करने वाली पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोसाईगंज की बालिकाओं को सम्मानित किया। संयुक्त बेसिक शिक्षा निदेशक गणेश कुमार, उपनिदेशक पवन सचान सहित अन्य विभागीय अधिकारी व शिक्षक शिक्षिकाएं आदि उपस्थित थे।



बच्चों की शैक्षिक प्रगति अभिभावकों से साझा करें शिक्षक, बोले बेसिक शिक्षा मंत्री


लखनऊ। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री संदीप सिंह ने कहा कि शिक्षक बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करने के साथ ही निपुण भारत मिशन को सफल बनाएं। अभिभावकों को बच्चों की शिक्षा अर्जन की स्थिति की जानकारी भी दें। इससे अभिभावक भी बच्चों की शिक्षा पर ध्यान दे सकेंगे। वे रविवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में निपुण भारत मिशन के तहत आयोजित साक्षरता व संख्या ज्ञान और शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम में बोल रहे थे।


उन्होंने कहा कि निपुण भारत मिशन के तहत यूपी को निपुण प्रदेश बनाने के लिए हम सबको मेहनत करना है। इस क्रम में विभाग शिक्षकों के प्रशिक्षण पर विशेष ध्यान दे रहा है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने कहा कि इस मिशन को सफल बनाने में शिक्षकों की अहम भूमिका है। मिशन के तहत ही कक्षा 4 व 5 के बच्चों के लिए बुनियादी शिक्षा पर आधारित उपचारात्मक शिक्षण के लिए शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया जा रहा है। मंत्री ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय गोसाईगंज लखनऊ की बालिकाओं को भी सम्मानित किया गया।



अभिभावकों से भी समन्वय करें शिक्षक: संदीप सिंह


लखनऊ  । बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने शिक्षकों का आह्वान करते हुए कहा है कि शिक्षक बच्चों के अभिभावकों से बातचीत करते हुए उनकी प्रगति की जानकारी दें। इससे अभिभावकों का जुड़ाव बढ़ेगा और वे बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देंगे।

श्री सिंह ने रविवार को कक्षा चार व पांच की बुनियादी शिक्षा और संख्या ज्ञान कार्यक्रम व शिक्षक प्रशिक्षण के कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि हम यूपी को सबसे पहले निपुण प्रदेश बनाएंगे।

उन्होंने कहा कि निपुण भारत मिशन की सफलता शिक्षकों के ऊपर निर्भर है । हम सभी को मेहनत से काम करना है। इस मौके में उन्होंने शिक्षक निर्देशिका का विमोचन करते हुए पांच मास्टर ट्रेनर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरण आनंद ने कहा कि निपुण भारत मिशन के तहत विभिन्न गतिविधियों से संबंधित प्रशिक्षण आदि की जानकारी दी जा रही है। कक्षा एक से कक्षा तीन तक के लिए बुनियादी शिक्षा पर शिक्षण कार्य सभी स्कूलों में किया जा रहा है। प्रथम एजुकेशन फाउंडेशन के साथ मिल कर यूपी सरकार बुनियादी शिक्षा पर आधारित प्रशिक्षण देने जा रही है।

Sunday, September 18, 2022

संविदा अनुदेशकों की कार्यावधि में बदलाव को चुनौती, यूपी सरकार से जवाब तलब

संविदा अनुदेशकों की कार्यावधि में बदलाव को चुनौती, यूपी सरकार से जवाब तलब



प्रयागराज ।  इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशकों की संविदा अवधि में किए गए संशोधन संबंधी शासनादेश की वैधता के खिलाफ याचिका पर राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा है।


 यह आदेश न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव ने महराजगंज के राकेश पटेल की याचिका को विचारणीय मानते हुए दिया है। याचिका के अनुसार अभी तक 11 माह की संविदा पर अनुदेशकों की संविदा नियुक्ति की जाती थी। शासनादेश जारी कर इस अवधि में 15 दिन की बढ़ोतरी कर दी गई है। अब 11 माह 15 दिन की संविदा अवधि कर दी गई है, लेकिन इसमें शर्त जोड़ दी गई है कि सर्दियों की छुट्टी 31 दिसम्बर 2022 से 14 जनवरी 23 तक का मानदेय नहीं मिलेगा।


 15 जून 2022 के शासनादेश को याचिका में चुनौती दी गई है। याचिका की अगली सुनवाई एक नवंबर को होगी।



HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD
Court No. - 33
Case :- WRIT - A No. - 13513 of 2022

Petitioner :- Rakesh Patel And 2 Others
Respondent :- State Of U.P. And 3 Others
Counsel for Petitioner :- Durga Tiwari,
Counsel for Respondent :- C.S.C.,Durga Singh, Bipin Bihari Pandey
Hon'ble Ashutosh Srivastava,J.

Heard Ms. Durga Tiwari, learned counsel for the petitioners, learned Standing Counsel for State-respondents, Shri Durga Singh, learned counsel for respondent No. 3 and Shri Bipin Bihari Pandey, learned counsel for respondent No. 4.

The challenge laid in this writ petition is to the Government Order dated 15.6.2022 issued by the respondent No. 2-Special Secretary, Government of U.P., Lucknow and to the letter dated 4.7.2022 issued by the respondent No. 3.

It is contended on behalf of the petitioners that petitioners were appointed as Subject Teachers under the contract which commenced from 1.7.2022 to 31.5.2023. By the impugned Government Order, the contract period has been re-determined and it is operating from 16.6.2022 to 31.5.2023.

The grievance raised is that the winter vacation for the period 31.12.2022 to 14.1.2013 has now been excluded from the contract period and the petitioner would not be entitled to get honorarium for the said period which according to the petitioners is unwarranted.
Matter requires consideration.

All the respondents are grated four weeks' time to file counter affidavit. One week thereafter is granted to the petitioner to file rejoinder affidavit.
List this case on 1.11.2022.


Order Date :- 15.9.2022
Ravi Prakash
(Ashutosh Srivastava, J.)

यूपी बोर्ड : ब्लाक के खराब विद्यालय छटेंगे, अच्छे ही बनेंगे परीक्षा केंद्र

यूपी बोर्ड : ब्लाक के खराब विद्यालय छटेंगे, अच्छे ही बनेंगे परीक्षा केंद्र

प्रयागराज पंजीकरण : की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शासन ने यूपी बोर्ड की वर्ष 2023 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा के केंद्र बनाने के लिए ब्लाक स्तर पर स्थित अच्छे विद्यालयों की रिपोर्ट मांगी है। जिला विद्यालय निरीक्षकों को भेजे पत्र में ब्लाक स्तर पर स्थित राजकीय इंटर कालेज, राजकीय हाईस्कूल एवं अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों की अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।


शासन से पूर्व में सभी डीआइओएस को भेजे पत्र में डीएम के माध्यम से ब्लाक स्तर के उन विद्यालयों को छांटने निर्देश दिए थे, जिनकी छवि अच्छी नहीं है। ऐसे विद्यालयों को परीक्षा केंद्रों की सूची से बाहर किया जाना है। वर्ष 2023 की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी गई है। बोर्ड सचिव सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने बोर्ड परीक्षा में सम्मिलित होने वाले छात्र छात्राओं के आवेदन प्रधानाचार्यों के माध्यम से पूरे करा लिए हैं।

यूपी बोर्ड : 10वीं-12वीं के फॉर्म भरने का एक और मौका

यूपी बोर्ड : 10वीं-12वीं के फॉर्म भरने का एक और मौका

यूपी बोर्ड: दसवीं और बारहवीं की इंप्रूवमेंट, कंपार्टमेंट और स्कूटनी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थी एक अक्टूबर तक अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा फार्म भर सकेंगे 


प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने दसवीं और बाहरवीं की इंप्रूवमेंट, कंपार्टमेंट और स्कूटनी परीक्षा में शामिल विद्यार्थियों के लिए अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा फार्म भरने की तिथि घोषित कर दी है। विद्यार्थी एक अक्तूबर तक अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा फार्म भर सकते हैं। कोषागार में जमा शुल्क का चालान और अग्रिम पंजीकरण आवेदन परिषद की वेबसाइट पर तीन अक्तूबर तक अपलोड करना होगा।


माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिब्यकांत शुक्ल के मुताबिक यूपी बोर्ड परीक्षा 2022 की हाईस्कूल की कंपार्टमेंट और इंप्रूवमेंट परीक्षा तथा स्कूटनी परिणाम में उत्तीर्ण परीक्षार्थियों के कक्षा 11 में प्रवेश को लेकर अग्रिम पंजीकरण कराए जाने के लिए तिथि निर्धारित की गई है। साथ ही बोर्ड परीक्षा 2022 के दसवीं और बारहवीं की कंपार्टमेंट और स्कूटनी परीक्षा में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों को 2023 की बोर्ड परीक्षा में आवेदन पत्र भरे जाने के लिए अवसर दिया गया है। ये विद्यार्थी एक अक्तूबर तक प्रवेश के लिए अग्रिम पंजीकरण और परीक्षा शुल्क जमा कर सकते हैं। 


 
प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने वर्ष 2022 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट परीक्षा तथा स्क्रूटनी परिणाम में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों के 2023 की बोर्ड परीक्षा के आवेदन पत्र भरने के लिए एक और मौका दिया है। सचिव दिब्यकांत शुक्ल की ओर से शनिवार को जारी विज्ञप्ति के अनुसार कोषगार में परीक्षा शुल्क एक अक्तूबर तक जमा होंगे। 




तीन से दस अक्तूबर तक शुल्क विवरण और आवेदन पत्र वेबसाइट पर अपलोड किए जाएंगे। इसी प्रकार वर्ष 2022 की हाईस्कूल कंपार्टमेंट/इंप्रूवमेंट परीक्षा तथा स्क्रूटनी परिणाम में सफलपरीक्षार्थियों के 11वीं में प्रवेश लेकर अग्रिम पंजीकरण कराने का भी मौका दिया है। 11वीं के परीक्षा शुल्क भी एक अक्तूबर तक जमा होंगे।

यूपी मांगेगा तो छात्रों को परिवहन भत्ता देगी केंद्र सरकार,

यूपी मांगेगा तो छात्रों को परिवहन भत्ता देगी केंद्र सरकार, 

माध्यमिक स्तर पर परीक्षण के बाद प्रदेश सरकार लेगी इस पर निर्णय

प्राथमिक स्तर पर स्कूलों की पर्याप्त संख्या के चलते नहीं हुई मांग



केंद्र सरकार बेसिक व माध्यमिक स्तर पर छात्र-छात्राओं को सुदूर विद्यालयों में पढ़ने जाने के लिए परिवहन भत्ता भी देती है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि यदि यूपी से छात्रों के भत्ते की डिमांड आएगी तो केंद्र उसका भुगतान करेगा। हालांकि, यूपी में बेसिक शिक्षा के परिषदीय स्कूलों की पर्याप्त संख्या होने के कारण अभी यह भत्ता नहीं लिया जाता। वहीं, समग्र शिक्षा में माध्यमिक स्तर से कोई डिमांड बनती नहीं है। ऐसे में अब प्रदेश में मानकों के परीक्षण के बाद जरूरत के अनुसार भत्ते की डिमांड तैयार की जाएगी।


छात्रों के यात्रा भत्ते की उक्त बात शुक्रवार को दिल्ली में केंद्रीय शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में आयोजित प्रदेश के शिक्षा मंत्रियों व अधिकारियों की बैठक में उठी। वहां मौजूद रहे अधिकारियों के अनुसार केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने बताया कि छात्रों 500 रुपये परिवहन भत्ता केंद्र द्वारा दिए जाने की व्यवस्था है। लेकिन यूपी से इसे कभी नहीं मांगा गया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि केंद्र निर्धारित से ज्यादा दूरी पर स्थित विद्यालयों तक आवागमन के लिए बच्चों को यात्रा भत्ता देता है।


चूंकि प्रदेश में 300 की न्यूनतम आबादी व एक किलोमीटर के दायरे में प्राथमिक स्कूल और 800 की आबादी पर तीन किलोमीटर में जूनियर हाईस्कूल का मानक पूरा है। इसलिए यहां यात्रा भत्ता मांगने का औचित्य ही नहीं। वहीं समग्र शिक्षा में 5 किलोमीटर पर सरकारी हाईस्कूल व 7 किलोमीटर की परिधि में सरकारी इंटर कॉलेज का मानक अभी पूरा नहीं है। ऐसे में यहां भत्ते पर विचार की गुंजाइश है। वहीं, कुछ अधिकारियों का जोर भत्ते के बजाय स्कूल खोलने पर है। साथ ही सहायता प्राप्त विद्यालयों को भी नजरंदाज न करने की बात कही जा रही है। इसी पर अब योजना का अध्ययन कर मानकों के अनुसार राशि की मांग करने की बात कही जा रही है। 


इसके अलावा बैठक में पीएम श्री योजना के तहत हर ब्लॉक में दो-दो यानी 2000 विद्यालय भी खोलने पर चर्चा की गई। बैठक में माध्यमिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) गुलाब देवी, बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह और व्यावसायिक शिक्षा एवं कौशल विकास राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कपिल देव अग्रवाल मौजूद थे।  

गैर मान्यता प्राप्त ही नहीं, अनुदानित मदरसों में भी स्थिति खराब

गैर मान्यता प्राप्त ही नहीं, अनुदानित मदरसों में भी स्थिति खराब

डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने कहा, मदरसों में हो रहा बच्चों के भविष्य से खिलवाड़


लखनऊ। गैर मान्यता प्राप्त ही नहीं बल्कि मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों का भी बुरा हाल है। यहां भी बच्चों को सही शिक्षा नहीं मिल पा रही है। इस बाबत बाल संरक्षण आयोग की सदस्य की जांच में स्थिति ठीक नहीं मिली थी। उन्होंने कहा था कि इन मदरसों का पूरा ढांचा बदलने की जरूरत है।



वर्तमान में प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे चल रहा है। इसे लेकर जहां विरोध के स्वर उठ रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि यह सर्वे मदरसों के बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। उधर, अनुदानित मदरसों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। प्रदेश में कुल 16,500 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। इनमें से 558 अनुदानित और 7,442 आधुनिक मदरसे हैं। इनमें 19 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं।


बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी के मुताबिक उन्होंने कुशीनगर देवरिया महराजगंज आदि में मदरसों का निरीक्षण किया तो पाया अनुदानित मदरसों में भी अध्यापकों का शैक्षिक स्तर निम्न है। दसवीं पास शिक्षक दसवीं को और इंटर पास शिक्षक इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है। आधुनिक मदरसों में विषय विशेषज्ञ तनख्वाह गणित, विज्ञान आदि विषयों के लेते हैं, पर वे सिर्फ दीनी तालीम देते हैं। गणित पढ़ाने वाले अध्यापक सात का पहाड़ा तक नहीं सुना पाया। सामाजिक विषय के अध्यापक पाठ्यक्रम की किताब का नाम तक नहीं बता पाए। इतिहास पढ़ाने का दावा करने वालों को यह तक नहीं पता कि वर्ष 1919 में देश में कौन सा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था। ऐसे में इन मदरसों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां भी पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत है।


वहीं, गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के निरीक्षण में अध्यापक अपना आधार कार्ड तक नहीं दिखा सके। वे कौन है, कहां से आए हैं, यह पता चलना ही चाहिए। इन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सर्वे और सही नीतियों का बनना बेहद जरूरी है। अहम बात यह है कि मदरसों में उन बच्चों को ले जाया जाता है, जिनका नामांकन उस क्षेत्र की प्राइमरी पाठशाला में होता है।


इसलिए पड़ी सर्वे की आवश्यकता

27 मई 2022 को लखनऊ के गोसाईगंज शिवलर स्थित सुफ्फामदीन तुल उलमा मदरसे में विद्यार्थियों के पैरों में बेड़ियां डाली गई थीं। वहां एक छात्र किसी तरह से भाग निकला और गांव अपने गांव पहुंचकर बताया कि उसे वहां रॉड से पीटा जाता था। इस मामले में संज्ञान लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मदरसे की जांच करवाई। इसमें वह मदरसा गैर मान्यता प्राप्त निकला। इस पर दो जून 2022 को आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक विभाग को पत्र लिखा। 


इसमें कहा गया कि प्रदेश में काफी मदरसे विधि विरुद्ध संचालित हैं। कुछ में बच्चों के शारीरिक, मानसिक व लैंगिक शोषण का प्रकरण भी संज्ञान में आया है। ऐसे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की निगरानी किसी भी विभाग द्वारा नहीं हो पाती है। नतीजतन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे गुणवत्तापरक शिक्षा, सुदृढ़ स्वास्थ्य, सर्वांगीण विकास से वंचित हो रहे हैं। लिहाजा प्रदेश के सभी जिलों में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। माना जा रहा है कि इस पत्र को संज्ञान में लेते हुए सर्वे कराया जा रहा है।


मदरसों के सर्वे से किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। सर्वे इसलिए किया जा रहा है कि मदरसों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके। इन्हें योग्य बनाया जा सके। -धर्मपाल सिंह, मंत्री अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

Saturday, September 17, 2022

43 स्कूलों के भवन तैयार अगले साल से होंगे गुलजार, मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत बनवाए गए हैं इंटर कॉलेज

43 स्कूलों के भवन तैयार अगले साल से होंगे गुलजार
 

● मुख्यमंत्री की घोषणा के तहत बनवाए गए हैं इंटर कॉलेज

● स्कूलों में फर्नीचर के लिए 2.15 करोड़ रुपये का बजट जारी



प्रयागराज : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के तहत प्रदेश के 30 जिलों में 43 इंटर कॉलेजों के भवन बनकर तैयार हैं। कार्यदायी संस्थाओं ने इन्हें माध्यमिक शिक्षा विभाग के सुपुर्द कर दिया है। पूरी उम्मीद है कि 2023-24 सत्र से ये स्कूल गुलजार हो जाएंगे यानि पठन-पाठन शुरू हो जाएगा। स्कूलों में फर्नीचर और उपकरण वगैरह लगाने के लिए 2.15 करोड़ रुपये जारी हो गए हैं।

शिक्षा निदेशालय में वित्त नियंत्रक (माध्यमिक) बीआर प्रसाद ने आठ सितंबर को प्रत्येक स्कूल के लिए पांच-पांच लाख रुपये का बजट जारी किया है। जिला विद्यालय निरीक्षकों के वित्त एवं लेखाधिकारियों को खरीद के संबंध में गाइडलाइन भी भेजी है।

बदायूं में सर्वाधिक चार, उन्नाव में तीन स्कूल तैयार प्रयागराज। 43 विद्यालयों में बदायूं में सर्वाधिक चार और उन्नाव में तीन स्कूल बने हैं। संभल, लखीमपुर, कुशीनगर, जौनपुर, रायबरेली, प्रतापगढ़, देवरिया और गोंडा में दो-दो विद्यालयों का निर्माण हुआ है। इसके अलावा मेरठ, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, आगरा, बरेली, कानपुर देहात, ललितपुर, प्रयागराज, अयोध्या, महाराजगंज, सहारनपुर, अमेठी, शामली, फिरोजाबाद, बुलंदशहर, बलिया, संतकबीरनगर, बहराइच, कासगंज व हरदोई में एक-एक स्कूल बने हैं।

दो साल बाद स्कूल में शुरू हो सकेगी पढ़ाई

प्रयागराज : इन 43 स्कूलों की घोषणा तीन-चार साल पहले की गई थी। कक्षा 6 से 12 तक के प्रत्येक स्कूल के निर्माण के लिए 2.77 करोड़ रुपये को मंजूरी मिली थी। लेकिन बजट आवंटन में देरी समेत अन्य कारणों से पठन-पाठन समय से शुरू नहीं हो सका। समग्र शिक्षा अभियान के विनय कुमार ने बताया कि प्रयागराज के देवघाट कोरांव में राजकीय इंटर कॉलेज की घोषणा 2018 में हुई थी। यहां पढ़ाई-लिखाई 2020-21 सत्र से शुरू होनी थी। लेकिन अब 2023-24 से स्कूल खुलने की उम्मीद है।

आंगनबाड़ी केंद्रों को जनप्रतिनिधि व अधिकारी गोद लें : सीएम योगी

आंगनबाड़ी केंद्रों को जनप्रतिनिधि व अधिकारी गोद लें : सीएम योगी

मुख्यमंत्री ने किया 700 आंगनबाड़ी केंद्रों का लोकार्पण व शिलान्यास


जानिए एप को

•'सहयोग' एप - आंगनबाड़ी कार्यक्रम की निगरानी की जा सकेगी।

• ' बाल पिटारा' एप - इसमें तीन से छह वर्ष तक की आयु के बच्चों की परवरिश की जानकारी के साथ ही ई - बुक्स, वीडियो एवं आडियो हैं।


लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रीय पोषण माह के अवसर पर शुक्रवार को जनप्रतिनिधियों एवं अधिकारियों से आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि समाज के सक्षम तबके के लोग आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेकर वहां की बुनियादी सुविधाएं ठीक करवाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले से बहुत अधिक सुधार हुआ है। पहले नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में यूपी फिसड्डी होता था। पांच वर्षों के अथक परिश्रम की बदौलत आज एनीमिया में यूपी का औसत राष्ट्रीय औसत से भी अच्छा है। शिशु व मातृ मृत्यु दर भी कम करने में सफलता मिली है।



राष्ट्रीय पोषण माह के मौके पर लोक भवन में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने 700 आंगनबाड़ी केंद्रों का लोकार्पण व शिलान्यास किया। उन्होंने 'सक्षम' एवं 'सशक्त आंगनबाड़ी' पुस्तिका का विमोचन किया। मुख्यमंत्री ने 'सहयोग' एवं 'बाल पिटारा' एप का भी शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने छह वर्ष तक की आयु के बच्चों के लिए 'दुलार' कार्यक्रम भी शुरू किया है। इसमें बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा, उनकी देखभाल व सुरक्षा के बारे में जानकारी फोन काल के माध्यम से दी जाएगी। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के आंगनबाड़ी केंद्रों में 1.70 करोड़ बच्चे पंजीकृत हैं। इनकी नींव मजबूत करने की जिम्मेदारी हम सबकी है। बचपन व वर्तमान सुरक्षित है तो देश का भविष्य सुरक्षित रहेगा। मुख्यमंत्री ने पोषण माह को राष्ट्रीय कार्यक्रम बनाने के लिए प्रधानमंत्री और आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेने का अभियान संचालित कराने के लिए राज्यपाल का आभार जताया। कहा कि पहले पोषण मिशन एक मकड़जाल था। पोंटी चड्ढा की कंपनी की ओर इशारा करते हुए कहा कि पहले जो लोग शराब बेचते थे, वे ही पोषण का पोषाहार भी बेच रहे थे। हमने यह काम महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया। 60 हजार से अधिक महिला स्वयंसेवी समूहों से जुड़ी बहनों को इससे जोड़ा गया है। उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से मोबाइल फोन पर सारी सूचनाएं अपलोड करने की आदत डालने की अपील की। कहा कि बहुत अच्छा करने के बाद भी हम डाटा के मामले में पिछड़ जाते हैं।