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Sunday, September 18, 2022

गैर मान्यता प्राप्त ही नहीं, अनुदानित मदरसों में भी स्थिति खराब

गैर मान्यता प्राप्त ही नहीं, अनुदानित मदरसों में भी स्थिति खराब


डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने कहा, मदरसों में हो रहा बच्चों के भविष्य से खिलवाड़


लखनऊ। गैर मान्यता प्राप्त ही नहीं बल्कि मान्यता प्राप्त व अनुदानित मदरसों का भी बुरा हाल है। यहां भी बच्चों को सही शिक्षा नहीं मिल पा रही है। इस बाबत बाल संरक्षण आयोग की सदस्य की जांच में स्थिति ठीक नहीं मिली थी। उन्होंने कहा था कि इन मदरसों का पूरा ढांचा बदलने की जरूरत है।



वर्तमान में प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे चल रहा है। इसे लेकर जहां विरोध के स्वर उठ रहे हैं, वहीं सरकार का कहना है कि यह सर्वे मदरसों के बच्चों का भविष्य बेहतर बनाने के लिए किया जा रहा है। उधर, अनुदानित मदरसों की स्थिति भी कुछ ठीक नहीं है। प्रदेश में कुल 16,500 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं। इनमें से 558 अनुदानित और 7,442 आधुनिक मदरसे हैं। इनमें 19 लाख से ज्यादा बच्चे पढ़ रहे हैं।


बाल संरक्षण आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी के मुताबिक उन्होंने कुशीनगर देवरिया महराजगंज आदि में मदरसों का निरीक्षण किया तो पाया अनुदानित मदरसों में भी अध्यापकों का शैक्षिक स्तर निम्न है। दसवीं पास शिक्षक दसवीं को और इंटर पास शिक्षक इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को पढ़ा रहा है। आधुनिक मदरसों में विषय विशेषज्ञ तनख्वाह गणित, विज्ञान आदि विषयों के लेते हैं, पर वे सिर्फ दीनी तालीम देते हैं। गणित पढ़ाने वाले अध्यापक सात का पहाड़ा तक नहीं सुना पाया। सामाजिक विषय के अध्यापक पाठ्यक्रम की किताब का नाम तक नहीं बता पाए। इतिहास पढ़ाने का दावा करने वालों को यह तक नहीं पता कि वर्ष 1919 में देश में कौन सा बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम हुआ था। ऐसे में इन मदरसों की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है। यहां भी पूरा सिस्टम बदलने की जरूरत है।


वहीं, गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के निरीक्षण में अध्यापक अपना आधार कार्ड तक नहीं दिखा सके। वे कौन है, कहां से आए हैं, यह पता चलना ही चाहिए। इन बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए सर्वे और सही नीतियों का बनना बेहद जरूरी है। अहम बात यह है कि मदरसों में उन बच्चों को ले जाया जाता है, जिनका नामांकन उस क्षेत्र की प्राइमरी पाठशाला में होता है।


इसलिए पड़ी सर्वे की आवश्यकता

27 मई 2022 को लखनऊ के गोसाईगंज शिवलर स्थित सुफ्फामदीन तुल उलमा मदरसे में विद्यार्थियों के पैरों में बेड़ियां डाली गई थीं। वहां एक छात्र किसी तरह से भाग निकला और गांव अपने गांव पहुंचकर बताया कि उसे वहां रॉड से पीटा जाता था। इस मामले में संज्ञान लेते हुए बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने मदरसे की जांच करवाई। इसमें वह मदरसा गैर मान्यता प्राप्त निकला। इस पर दो जून 2022 को आयोग की सदस्य डॉ. सुचिता चतुर्वेदी ने प्रमुख सचिव अल्पसंख्यक विभाग को पत्र लिखा। 


इसमें कहा गया कि प्रदेश में काफी मदरसे विधि विरुद्ध संचालित हैं। कुछ में बच्चों के शारीरिक, मानसिक व लैंगिक शोषण का प्रकरण भी संज्ञान में आया है। ऐसे गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की निगरानी किसी भी विभाग द्वारा नहीं हो पाती है। नतीजतन मदरसों में पढ़ने वाले बच्चे गुणवत्तापरक शिक्षा, सुदृढ़ स्वास्थ्य, सर्वांगीण विकास से वंचित हो रहे हैं। लिहाजा प्रदेश के सभी जिलों में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे कराते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई की जाए। माना जा रहा है कि इस पत्र को संज्ञान में लेते हुए सर्वे कराया जा रहा है।


मदरसों के सर्वे से किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। सर्वे इसलिए किया जा रहा है कि मदरसों के बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल किया जा सके। इन्हें योग्य बनाया जा सके। -धर्मपाल सिंह, मंत्री अल्पसंख्यक कल्याण विभाग

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