DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Monday, October 23, 2023

NIRF रैंकिंग में सुधार के लिए चयनित कॉलेजों में चलेंगे कौशल विकास से जुड़े कोर्स

NIRF रैंकिंग में सुधार के लिए चयनित कॉलेजों में चलेंगे कौशल विकास से जुड़े कोर्स

क्रिस्प संस्था ने प्रदेश के 25 महाविद्यालय किए चयनित, कौशल विकास कोर्स करने वाले छात्रों को स्टाइपेंड भी


लखनऊ। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों को राष्ट्रीय मूल्यांकन प्रत्यायन परिषद (नैक) व नेशनल इंस्टीट्यूशनल रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के लिए शासन की ओर से तैयार किया जा रहा है। इसी क्रम में क्रिस्प संस्था के माध्यम से दो दर्जन से अधिक कॉलेजों को एनआईआरएफ रैंकिंग में लाने के लिए चयनित किया गया है। इन कॉलेजों में कौशल अंतर्निहित डिग्री कोर्स शुरू किए जाएंगे।


प्रदेश में इस साल कई विश्वविद्यालयों ने नैक में अच्छी रैंकिंग पाई है। वहीं एनआईआरएफ में भी रैंक में सुधार आया है राज्यपाल के निर्देश पर लगातार विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों को नैक व एनआईआरएफ रैंकिंग के लिए प्रेरित व प्रशिक्षित किया जा रहा है। इसके लिए प्रदेश स्तरीय कार्यशालाओं का भी आयोजन किया जा रहा है। इसी क्रम में पिछले दिनों शासन ने क्रिस्प संस्था के साथ समझौता किया है।


उच्च शिक्षा विभाग ने निर्देश दिया है कि चयनित महाविद्यालय अपने यहां बीबीए रिटेल, बीबीए लॉजिस्टिक, बीबीए हेल्थकेयर व बीएससी टूरिज्म एंड हॉस्पिटलिटी में से किसी भी पाठ्यक्रम का चयन कर सकेंगे। यह चयन उपलब्ध संसाधनों, स्थानीय उद्योगों व विशेषज्ञता के आधार पर किया जाएगा। इसके माध्यम से विद्यार्थियों को उद्योगों के अनुसार तैयार किया जाएगा और उन्हें रोजगार के अवसर भी उपलब्ध कराए जाएंगे। 


खास यह कि इन कोर्स में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को हर साल दूसरे सेमेस्टर में इंटर्नशिप कराई जाएगी। यह इंटर्नशिप कोर्स से संबंधित क्षेत्र के उद्योगों में कराया जाएगा ताकि रिटेल के छात्र को रिटेल और लॉजिस्टिक की पढ़ाई करने वाले को लॉजिस्टिक का भौतिक अनुभव भी दिया जा सके। वहीं इंटर्नशिप के दौरान छात्रों को स्टाइपेंड भी दिया जाएगा।


शासन क्रिप्स के सहयोग से कॉलेजों व विश्वविद्यालयों को अच्छी रैंकिंग के लिए तैयार कर रहा है। इस तरह के कोर्स विद्यार्थियों के लिए काफी उपयोगी होंगे। इस साल कुछ कॉलेजों ने यह कोर्स शुरू किए हैं। अगले सत्र से सभी चयनित कॉलेजों में इन कोर्स को शुरू किया जाएगा। - गिरिजेश कुमार त्यागी, विशेष सचिव, उच्च शिक्षा

Sunday, October 22, 2023

बेसिक शिक्षा : परस्पर तबादले पर ऊहापोह से शिक्षक बेचैन, चुनाव ड्यूटी लगने से पहले तबादले करने की मांग

चुनाव ड्यूटी के फेर में न उलझ जाएं बेसिक शिक्षकों के पारस्परिक तबादले? 

बेसिक शिक्षकों को सता रही चिंता, फरवरी से चल रही प्रक्रिया

अब चुनाव ड्यूटी के लिए नाम मांगे जा रहे, देर हुई तो आएंगी कई दिक्कतें


लखनऊ : बेसिक शिक्षकों के पारस्परिक तबादलों की प्रक्रिया फरवरी से चल रही है। अब शिक्षकों को यह चिंता सता रही है कि जल्द रिलीविंग और नई जगह जॉइनिंग के आदेश न हुए तो फिर ये तबादले उलझ न जाएं। वजह है लोकसभा चुनाव ड्यूटी के लिए अभी से नाम मांगे जा रहे हैं। जल्द रिलीविंग के आदेश न हुए तो फिर उनको दूसरे जिले या ब्लॉक में चुनाव ड्यूटी के लिए जाना होगा।


बेसिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय तबादलों के साथ ही पारस्परिक अंतरजनपदीय और अंतःजनपदीय तबादलों की प्रक्रिया भी फरवरी में ही शुरू हो गई थी। तब से कई बार आवेदन और फिर जांच में प्रक्रिया उलझी रही। अब यह प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है। अब सिर्फ रिलीविंग और जॉइनिंग के आदेश होने हैं। आदेश न होने के पीछे यह वजह बताई जा रही है कि शासनादेश के अनुसार गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में ही तबादले हो सकते हैं। 


वहीं शिक्षकों का कहना है कि फरवरी से प्रक्रिया शुरू हुई थी। जैसे अंतरजनपदीय तबादले हुए वैसे ही पारस्परिक के आदेश भी गर्मियों की छुट्टियों में हो सकते थे। अब दिसंबर से सर्दियों की छुट्टियां होंगी। तब तक चुनाव ड्यूटी के लिए प्रशिक्षण की शुरुआत हो जाएगी। ऐसे में शिक्षकों के तबादले दूसरे जिले और ब्लॉक में हो जाएंगे तो उन्हें अपने पुराने वाले जिले या ब्लॉक में ड्यूटी करने जाना पड़ेगा। 


स्कूली शिक्षा के महानिदेशक विजय किरण आनंद का कहना है कि शासनादेश के अनुसार गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में ही तबादले हो सकते हैं। इस आदेश में शिथिलता के लिए शासन से अनुमति मांगी गई है। अनुमति मिलते ही समय रहते रिलीविंग और जॉइनिंग के आदेश कर दिए जाएंगे।




बेसिक शिक्षा : परस्पर तबादले पर ऊहापोह से शिक्षक बेचैन

चुनाव ड्यूटी लगने से पहले तबादले करने की मांग

शिक्षक महासंघ के साथ 25 अक्टूबर की वार्ता में उठेगा मुद्दा


लखनऊ। प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के हजारों शिक्षकों का जिले के अंदर और बाहर परस्पर तबादले का इंतजार खत्म नहीं हो रहा है। इधर, लोकसभा चुनाव की तैयारी भी शुरू हो गई है। शिक्षकों को डर है कि इस चुनाव की वजह से उनका तबादला फंस सकता है। उत्तर प्रदेश शिक्षक महासंघ के निदेशालय पर धरने के बाद अब 25 अक्तूबर को प्रस्तावित वार्ता में इसका मुद्दा उठेगा।


विभाग में एक से दूसरे जिले में और जिले के अंदर परस्पर तबादले की प्रक्रिया कई महीने से चल रही है। विभाग ने पहले इसकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए कई बार तिथि बढ़ाई और जब प्रक्रिया पूरी हो गई तो यह कहा कि तबादले शासनादेश के अनुसार गर्मी व जाड़े की छुट्टियों में किए जाएंगे। इससे नाराज शिक्षकों ने कई बार बेसिक शिक्षा निदेशालय पर धरना-प्रदर्शन भी किया।


अब शिक्षकों को यह डर सताने लगा है कि चुनाव ड्यूटी की तैयारी शुरू हो गई है। ऐसे में अगर दिसंबर में उनका तबादला होता है तो ड्यूटी के डाटा में भी बदलाव करना होगा। वहीं, अगर चुनाव आचार संहिता लग गई तो जाड़े की जगह गर्मी की छुट्टियों तक उनका मामला टल जाएगा। इसे लेकर वे काफी परेशान हैं। इसी तरह फरवरी से चल रही पदोन्नति की प्रक्रिया भी नहीं पूरी हो पाई है।


उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के उपाध्यक्ष निर्भय सिंह ने कहा कि विभाग को इन सारी समस्याओं को देखते हुए जिले के अंदर और बाहर के परस्पर तबादले जल्द से जल्द करने चाहिए। जिले के अंदर तबादला प्रक्रिया पूरी करने में सिर्फ एक दिन का समय लगना है। पर विभाग मौन साधे हुए है।


शासन में पहले 16 और अब 25 अक्तूबर को वार्ता प्रस्तावित है। इसमें परस्पर तबादले का मामला उठाएंगे। फरवरी से शिक्षकों की पदोन्नति प्रक्रिया चल रही है लेकिन अभी तक पूरी नहीं हुई। इस देरी के लिए एक भी बीएसए पर कार्रवाई नहीं हुई। अगर शिक्षक से कोई गलती होती है तो तुरंत कार्रवाई की जाती है। -डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा, अध्यक्ष, उप्र शिक्षक महासंघ

अब बेसिक शिक्षक / शिक्षिकाएं फोन, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए घर बैठे अपनी शिकायत या समस्या करा सकेंगे दर्ज, हरदोई बीएसए का शिक्षक हित में उम्दा नवाचार


अब बेसिक शिक्षक / शिक्षिकाएं फोन, ईमेल और व्हाट्सएप के जरिए घर बैठे अपनी शिकायत या समस्या करा सकेंगे दर्ज, हरदोई बीएसए का शिक्षक हित में उम्दा नवाचार

बायोमेट्रिक उपस्थिति के संबंध में मांगी गई जनसूचना का जवाब

बायोमेट्रिक उपस्थिति के संबंध में मांगी गई जनसूचना का जवाब



कक्षा-7 के पाठ्यक्रम में सिखों के गुरु को मिलेगा थोड़ा और विस्तार

कक्षा-7 के पाठ्यक्रम में सिखों के गुरु को मिलेगा थोड़ा और विस्तार


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा विभाग कक्षा सात के पाठ्यक्रम में सिखों के गुरु को विस्तार देगा। प्रदेश में 27 दिसंबर को साहिबजादा दिवस मनाने की घोषण के बाद सिखों के सभी दस गुरु के नाम के साथ उनके विषय में संक्षिप्त जानकारी कक्षा सात के पाठ्यक्रम में जोड़ी गई है, ताकि विद्यार्थी उनके बारे में जान सकें।


'हमारा इतिहास और नागरिक जीवन भाग-2' पुस्तक में पेज की संख्या नहीं बढ़ाने के कारण उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षा संस्थान ने 'इन्हें भी जानें' शीर्षक से सभी दस गुरु के विषय में संक्षिप्त जानकारी दी है। 


सिख संगठन ने पुस्तक में कम जानकारी होने और उसमें कुछ संशोधन की मांग महानिदेशक (डीजी) स्कूल शिक्षा से की थी। इसके बाद कुछ संशोधन के साथ थोड़ा विवरण बढ़ाकर एक ही पेज में समाहित कर पुस्तक तैयार की जा रही है।


राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य नवल किशोर के निर्देशन में कक्षा सात के विषय 'हमारा इतिहास और नागरिक जीवन भाग- 2' में सिख गुरु के संबंध में कुछ परिमार्जन किया जा रहा है। 


संस्थान की कार्यक्रम समन्वयक डा. दीप्ति मिश्रा ने बताया कि 27 दिसंबर को साहिबजादा दिवस मनाने की फरवरी 2021 में घोषणा के बाद मई 21 में इस पाठ्यपुस्तक में सभी दस गुरु के विषय में जानकारी पेज नंबर 79 पर जोड़ी गई।

पीएम-श्री स्कूलों से जुड़े शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के तबादलों से बचें, शिक्षा मंत्रालय ने पीएम-श्री स्कीम अपनाने वाले राज्यों को दिए निर्देश

पीएम-श्री स्कूलों से जुड़े शिक्षकों व प्रधानाचार्यों के तबादलों से बचें

शिक्षा मंत्रालय ने पीएम-श्री स्कीम अपनाने वाले राज्यों को दिए निर्देश

स्कीम के तहत प्रत्येक ब्लाक के एक सरकारी स्कूल किया जाना है अपग्रेड


नई दिल्ली : देशभर में पीएम श्री ( पीएम स्कूल फार राइजिंग इंडिया) के तहत चयनित सरकारी स्कूलों के अपग्रेडेशन का काम जब तेजी से चल रहा है, ऐसे समय में केंद्र सरकार ने इन स्कूलों से जुड़े शिक्षकों और प्रधानाचार्यों के तबादलों को लेकर राज्यों को सख्त हिदायत दी है। साथ ही कहा है कि ऐसे तबादलों से बचें। बहुत अनिवार्य होने पर ही ऐसे कदम उठाएं, अन्यथा सुधार से जुड़ी सारी कोशिशें बेकार हो जाएंगी। वहीं इसके जरिये जिन लक्ष्यों को हासिल करने की उम्मीद की गई है, उनमें भी देरी होगी।


शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों को यह निर्देश ऐसे समय दिया है, जब कई राज्यों में इस तरह के तबादले देखने को मिल रहे हैं। इससे प्रशिक्षण का कार्य प्रभावित हो रहा है। आगे चलकर इस मुहिम के लिए और भी जोखिम की संभावना थी, क्योंकि प्रशिक्षण के बाद यदि इन स्कूलों के प्रधानाचार्यों व शिक्षकों सहित स्कीम से जुड़े अ को हटा दिया गया तो नए सिरे से फिर से पूरी कवायद करनी पड़ेगी।


वर्तमान समय में इस स्कीम के तहत चयनित सरकारी स्कूलों के शिक्षकों, प्रधानाचार्यों को नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) की सिफारिशों के तहत विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके साथ ही उन्हें आइआइटी, आइआइएम जैसे संस्थानों से भी प्रशिक्षण दिलाने की तैयारी है।  गौरतलब है कि पीएम- श्री के तहत देश के प्रत्येक ब्लाक से दो स्कूलों का चयन किया जाना है। इनमें एक प्राइमरी और दूसरा मिडिल यानी छठवीं से आठवीं स्तर तक का होगा। इन्हें अपग्रेडेशन के लिए शिक्षा मंत्रालय की ओर से प्रत्येक स्कूल को दो-दो करोड़ रुपये दिए जाएंगे। पहली खेप में देशभर से चयनित 6260 स्कूलों को इसकी पहली किस्त दी जा चुकी है। साथ ही उन्होंने काम भी शुरू कर दिया है।


पीएम- श्री के दूसरे चरण के स्कूलों का भी जल्द हो सकता है एलान: नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता सुधारने और उसका एक मानक तय करने के लिए शुरू की गई पीएम- श्री स्कीम के तहत दूसरे चरण के लिए चयनित स्कूलों का जल्द ही एलान किया जा सकता है। इसे लेकर मंत्रालय ने कवायद तेज कर दी है। 


माना जा रहा है कि नवंबर तक यह प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। इस स्कीम के तहत देशभर में 14,500 सरकारी स्कूलों को एक माडल स्कूल के रूप में तैयार किया जाना है। पहली खेप में करीब 6260 स्कूलों के चयन के बाद करीब 8240 स्कूलों का अभी चयन होना है। इस स्कीम के तहत स्कूलों के चयन के मानक भी काफी सख्त रखे गए हैं। माना जा रहा है कि इन स्कूलों  को देखकर राज्य अपने बाकी सभी स्कूलों को भी तैयार करेंगे। अब तक स्कूलों को लेकर कोई स्टैंडर्ड नहीं था। 




पीएम- श्री स्कूलों को आइआइटी- आइआइएम भी निखारेंगे

पीएम- श्री स्कीम की पहली खेप में चयनित 6260 स्कूलों को अपग्रेड करने की योजना पर भी कार्य किया गया शुरू

 
नई दिल्ली । पीएम- श्री (पीएम- स्कूल फार राइजिंग इंडिया) के तहत सरकारी स्कूलों को गढ़ने का जो सपना देखा गया था, उसे जमीन पर उतारने में अब आइआइटी- आइआइएम जैसे शैक्षणिक संस्थान भी हाथ बटाएंगे। इन स्कूलों में गणित व विज्ञान पढ़ाने वाले शिक्षकों को विशेष प्रशिक्षण देंगे। साथ ही उनके लिए लीडरशिप से जुड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाएंगे। इसे लेकर देशभर के आइआइटी और आइआइएम के साथ चर्चा हो चुकी है। माड्यूल तैयार किया जा रहा है। इससे पीएम श्री में चयनित आसपास के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों को प्रशिक्षण देना शुरू कर देंगे।


शिक्षा मंत्रालय ने इसके साथ ही पीएम- श्री स्कीम में पहली खेप में चयनित देश भर के 6260 स्कूलों को तेजी से अपग्रेड करने की अन्य योजना पर भी काम शुरू किया है। इन स्कूलों के सभी शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, चाहे वे किसी विषय के हों। इसके तहत प्रत्येक जिले से पीएम श्री के लिए चयनित स्कूलों से एक - एक प्रधानाचार्य को मास्टर ट्रेनर बनाया जाएगा, जो अपने जिले के स्कूलों में पढ़ाने वाले प्रधानाचार्यों व शिक्षकों को प्रशिक्षित करेंगे। शिक्षा मंत्रालय ने एनसीईआरटी के साथ मिलकर इस प्रशिक्षण की शुरूआत की है। यह तीन दिन का होगा। मंत्रालय ने राज्यों के साथ मिलकर क्षेत्रीय प्रशिक्षण की भी योजना बनाई है।


इन चयनित स्कूलों के शिक्षकों और प्रधानाचार्यों को विशेष प्रशिक्षण देने के पीछे मुख्य मकसद इन्हें इन स्कूलों के उद्देश्यों से परिचित कराना है। साथ ही नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में जिन सुधारों की सिफारिश की गई है, उसे बेहतर तरीके से लागू करना है। इसके साथ ही बच्चों की प्रतिभा को शुरुआती स्तर पर ही पहचान कर उन्हें नई ऊंचाई देने जैसी पहलों के लिए भी तैयार करना है। शिक्षा मंत्रालय ने मास्टर ट्रेनर के रूप में सभी जिलों से एक-एक प्रधानाचार्यों को प्रशिक्षित करने का अभियान शुरू किया है।

Saturday, October 21, 2023

फिट इंडिया क्विज 2023 में लक्ष्य बीस हजार, पंजीकृत हुए मात्र 511 स्कूल

फिट इंडिया क्विज 2023 में लक्ष्य बीस हजार, पंजीकृत हुए मात्र 511 स्कूल 


प्रयागराज। फिट इंडिया क्विज 2023 में अधिक से अधिक क लिए  विद्यालयों और विद्यार्थियों की प्रतिभागिता सुनिश्चित कराने प्रदेश के 20 हजार विद्यालयों के पंजीकरण का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, लेकिन 16 अक्तूबर तक मात्र 511 स्कूलों का ही पंजीकरण हुआ है। वहीं, पंजीयन की अंतिम तिथि 31 अक्तूबर है। 

इस स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र लिख है। निर्देश दिया है कि फिट इंडिया क्विज 2023 के लिए निर्धारित प्रति छात्र 100 रुपये पंजीकरण शुल्क का भुगतान स्कूल क्रीड़ा कोष से किया जाए। 


क्विज का व्यापक प्रचार प्रसार कर के अधिकाधिक संख्या में विद्यालयों एवं विद्यार्थियों का पंजीकरण कराकर लक्ष्य को समय से पूरा करें। पंजीयन में किसी भी प्रकार की समस्या के लिए एनटीए हेल्प लाइन नंबर 011-40759000, 69227700 पर संपर्क किया जा सकता है। 

Friday, October 20, 2023

35 ARP जांच के घेरे में, विद्या समीक्षा केन्द्र द्वारा लिए गए फीडबैक से हुआ खुलासा

35 ARP जांच के घेरे में, विद्या समीक्षा केन्द्र द्वारा लिए गए फीडबैक से हुआ खुलासा

गुरुजी बने ARP तो अपने ही साथियों से मांगने लगे घूस, विद्या समीक्षा केंद्र पर 35 एआरपी की हुई शिकायत, महानिदेशक, स्कूल शिक्षा ने शुरू की जांच



लखनऊ । परिषदीय स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए शिक्षकों के बौच से ही एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (एआरपी) बनाए गए अध्यापक अब उनसे घूस मांग रहे हैं। कभी खुद अनुपस्थित होने या अन्य कारणों से घूस मांगे जाने से प्रताड़ित हुए ये शिक्षक अधिकारी बनते ही सब कुछ भूल गए। अब ये अपने ही साथियों से अनुचित मांग कर रहे हैं। विद्या समीक्षा केंद्र के माध्यम से शिक्षकों से लिए गए फीडबैक में यह जानकारी सामने आई है। पूरे प्रदेश से ऐसे 35 एआरपी के खिलाफ कई तरह की शिकायतें की गई हैं।


महानिदेशक, स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद की ओर से जिन एआरपी के खिलाफ शिक्षकों ने शिकायत की है, उनकी गोपनीय जांच शुरू करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच में आरोप सही पाए जाने पर इनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए प्रत्येक ब्लाक में पांच-पांच शिक्षकों को एआरपी बनाया गया है। इन एआरपी का कार्य हर महीने अपने ब्लाक के 20 स्कूलों का दौरा कर शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने में मदद करना है। हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान व सामाजिक विज्ञान विषय पढ़ाने में आ रही दिक्कतों का समाधान करना भी इन्हीं के जिम्मे है । शिक्षकों की मदद के लिए भेजे गए ये एआरपी अब उन्हें प्रताड़ित करने लगे हैं।


ऐसी ही शिकायतें लगभग सभी जिलों से आ रही हैं। विद्या समीक्षा केंद्र की टीम के माध्यम से महीने भर में लगभग सभी परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों से फीडबैक लिया गया है।

CUET ने डुबो दी प्रवेश की लुटिया, सत्र तो पिछड़ा ही, बड़ी संख्या में खाली रह गईं स्नातक की सीटें

CUET ने डुबो दी प्रवेश की लुटिया, आज अंतिम मौका

सत्र तो पिछड़ा ही, बड़ी संख्या में खाली रह गईं स्नातक की सीटें

पंजीकरण की अनिवार्यता हटाने के बाद भी नहीं सुधरी स्थिति


प्रयागराज ।  सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) ने इस बार इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि ) और संघटक महाविद्यालयों में प्रवेश की लुटिया डुबो दी। इविवि ने तो वक्त रहते स्थिति संभाल ली, लेकिन कॉलेजों में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। 20 अक्तूबर को प्रवेश की अंतिम तिथि है।


सीयूईटी का परिणाम इस बार काफी देर से आया, जिसकी वजह से प्रवेश भी देर से शुरू हुए। सीयूईटी का परिणाम आने के बाद इविवि ने अभ्यर्थियों के लिए पंजीकरण अनिवार्य कर दिया और यह शर्त रख दी कि बिना पंजीकरण के अभ्यर्थी इविवि एवं संघटक महाविद्यालयों में प्रवेश नहीं ले सकेंगे। सीयूईटी में शामिल बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया ही नहीं।


कॉलेजों में जब प्रवेश शुरू हुआ तो पंजीकृत अभ्यर्थियों की संख्या काफी कम थी। कॉलेजों को बीए, बीएससी, बीकॉम में प्रवेश के लिए अभ्यर्थी ही नहीं मिल रहे थे। ऐसे में इविवि की एकेडमिक काउंसिल को पंजीकरण की अनिवार्यता हटानी पड़ी। यहां तक उन अभ्यर्थियों को भी कॉलेज में प्रवेश की अनुमति दे दी गई, जो सीयूईटी में शामिल ही नहीं हुए थे।


हालांकि, इसके बाद भी बहुत सुधार नहीं हुआ। बीकॉम और बीएससी में तो प्रवेश के लिए अभ्यर्थी पहुंचे, लेकिन बीए में अब भी ज्यादातर सीटें खाली पड़ी हैं। सीएमपी डिग्री कॉलेज, एडीसी, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय, आर्य कन्या डिग्री कॉलेज में तो बीए की 50 फीसदी से अधिक सीटें खाली हैं। राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय और श्याम प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय में तो बीए की 70 से 80 फीसदी तक सीटें खाली हैं। 


इविवि के प्रवेश प्रकोष्ठ ने संघटक महाविद्यालयों में स्नातक प्रवेश की अंतिम तिथि 20 अक्तूबर निर्धारित की थी। शुक्रवार को कॉलेजों में प्रवेश का अंतिम दिन होगा और इसके बाद दाखिले की प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी।


पिछले साल भी सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश लेने के कारण सत्र पिछड़ गया था सत्र लगातार प्रभावित होने के कारण इविवि की एकेडमिक काउंसलिंग में यह चर्चा भी हो गई कि अगले साल से स्नातक प्रवेश सीयूईटी के माध्यम से लिया जाए या नहीं। सीयूईटी के माध्यम से प्रवेश लेने पर इविवि को दोहरा नुकसान हुआ है। सत्र तो पिछड़ा ही है, बड़ी संख्या में सीटें भी खाली रह गई हैं।



अभ्यर्थी न मिलने से महाविद्यालयों के सामने खड़ा हुआ आर्थिक संकट

सेल्फ फाइनेंस मोड में पाठ्यक्रमों के संचालन को लेकर बढ़ी चुनौती

रेगुलर मोड के पाठ्यक्रमों के लिए भी महाविद्यालयों को नहीं मिले छात्र


प्रयागराज । इलाहाबाद विश्वविद्यालय (विधि) के संघटक महाविद्यालयों में 20 अक्तूबर को स्नातक प्रवेश की अंतिम तिथि निर्धारित की गई है और ज्यादातर कॉलेजों में बीए की 50 फीसदी से अधिक सीटें अब भी खाली पड़ी है। अभ्यर्थी न मिलने के कारण कॉलेजों के सामने आर्थिक संकट भी बढ़ गया है और इसका असर भविष्य में भी देखने को मिलेगा।


इविवि ने इस बार बीए, बीएससी बीकॉम जैसे रेगुलर पाठ्यक्रमों की फीस में भी चार गुना बढ़ोतरी की है। प्रवेश कम होने के पीछे फीस वृद्धि को भी कारण माना जा रहा है। इविवि के संघटक महाविद्यालयों में बीए का पाठ्यक्रम रेगुलर मोड में र संचालित किया जाता है और सबसे र कम प्रवेश बीए में ही हुए हैं। इविवि के ज्यादातर संघटक कॉलेजों में बीए आधे से अधिक सीटें खाली हैं। 


हालांकि, रेगुलर मोड़ के पाठ्यक्रमों में छात्रों से मिलने वाली फीस का तकरीबन 70 फीसदी हिस्सा इविवि के पास चला जाता है और बाकी 30 फीसदी के माध्यम से कॉलेजों को इंफ्रास्ट्रक्चर, सफाई, बिजली, पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। वहीं, सेल्फ फाइनेंस मोड में संचालित पाठ्यक्रमों में आने वाली फीस का ज्यादातर हिस्सा कॉलेज के पास ही रहता है और कुछ हिस्सा इविवि को दिया जाता है।


सेल्फ फाइनेंस मोड के पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए फैकल्टी से लेकर लैब तक की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी कॉलेजों पर ही होती है। कई कॉलेडों में बीकॉम और बीएससी सेल्फ फाइनेंस मोड में ही चल रहे हैं और इस बार बीकॉम एवं बीएससी भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं। ऐसे में कॉलेजों के लिए सेल्फ फाइनेंस मोड में पाठ्यक्रमों का संचालन कर पाना किसी चुनौती से कम नहीं होगा।


सीएमपी डिग्री कॉलेज में बीए की 3600 सीटें हैं, जिनमें से दो हजार सीटें अब भी खाली है, जबकि 20 अक्तूबर को स्नातक प्रवेश की अंतिम तिथि है। वहीं, श्याम प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय में बीए की 60 फीसदी से अधिक सीटें खाली पड़ी हैं। वहां भी 20 अक्तूबर तक ही प्रवेश लिए जाने हैं। अन्य कॉलेजों में भी प्रवेश की हालत काफी खराब है।


 इविवि के संघटक राजर्षि टंडन महिला महाविद्यालय में बीए की 500 सीटें, बीकॉम की 60 सीटें और पीजी की दो विषयों में 100 सीटें हैं। बीए रेगुलर मोड में है, जबकि बीकॉम और पीजी का संचालन सेल्फ फाइनेंस मोड में किया जाता है। इन पाठ्यक्रमों में अब तक 20 से 30 फीसदी सीटें ही भर सकी हैं। कॉलेज की प्राचार्य प्रो. रंजना त्रिपाठी का कहना है कि सीयूईटी और रजिस्ट्रेशन की अनिवार्यता हटाने के बाद भी प्रवेश के लिए अभ्यर्थी नहीं आ रहे हैं।


तकरीबन सभी कॉलेजों में यही स्थिति है चुनौती सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है। इसका असर भविष्य में भी देखने को मिलेगा। आने वाले समय में जब प्रथम वर्ष के विद्यार्थी द्वितीय वर्ष और उसके बाद तृतीय वर्ष में जाएंगे, तब भी स्नातक की सीटें खाली ही रहेंगी और पर्याप्त संख्या में विद्यार्थी उपलब्ध न होने के कारण आर्थिक संकट बना रहेगा।




पीसीएस मुख्य परीक्षा में विषय हटने से भी घटी बीए की मांग

कभी आईएएस-पीसीएस को लक्ष्य बनाकर बीए में लिए जाते थे दाखिले

परंपरागत विषयों के प्रति कम हुई रुचि, बुलाने पर भी नहीं आ रहे अभ्यर्थी


प्रयागराज ।  इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि ) में इस बार बीए की 15 फीसदी सीटें खाली रह गई। कॉलेजों में हालत और खराब है। संघटक महाविद्यालयों में तो 50 फीसदी तक सीटें खाली पड़ी हैं। इसके पीछे कई कारण माने जा रहे हैं, जिनमें से एक कारण पीसीएस मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषयों को हटाए जाना है।


इविवि के संघटक इलाहाबाद डिग्री कॉलेज, ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज, श्यामा प्रसाद मुखर्जी महाविद्यालय एवं अन्य कॉलेजों में बीए में दाखिले की खिड़की सभी के लिए खोल दी गई है। यहां तक कि कुछ कॉलेजों में तो उन अभ्यर्थियों को भी प्रवेश दिए जा रहे हैं, जो सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्स टेस्ट में शामिल ही नहीं हुए।


यह हालत उन कॉलेजों की है, जहां छात्र इसी सपने के साथ दाखिला लेते हैं कि यहां से आईएएस या पीसीएस अफसर बनकर निकलेंगे। स्नातक और खासतौर पर बीए में टाखिला लेने वाले छात्र स्नातक की तीन साल की पढ़ाई के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करते हैं और अहंता पूरी होते ही आईएएस एवं पीसीएस की परीक्षा देना शुरू कर देते हैं।


इविवि में मध्यकालीन एवं आधुनिक इतिहास विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. योगेश्वर तिवारी भी मानते हैं कि पीसीएस मुख्य परीक्षा से वैकल्पिक विषयों को हटा दिए जाने से छात्रों का बीए के प्रति रुझान कम हुआ है। प्रो. तिवारी बताते हैं कि वर्ष 1921 से पहले आईसीएस की परीक्षा लंदन में हुआ करती थी। 1921 में पहली बार परीक्षा इलाहाबाद में हुई। 21 अभ्यर्थियों का चयन हुआ, जिसमें 11 अभ्यर्थी इविवि के छात्र थे और बाकी 10 अभ्यर्थी देश के अन्य हिस्सों से चयनित हुए थे।


प्रो. तिवारी का कहना है कि आजादी के बाद भी चयन की यही परंपरा कायम रही और यहां स्नातक में दाखिले सिर्फ आईएएस या पीसीएस में चयन के लिए होते थे। शिक्षक भी उच्च कोटि के थे। वर्तमान में भी इविवि को उच्च कोटि के कई शिक्षक मिले हैं, लेकिन अब पीसीएस परीक्षा में विषयों का कोई काम ही नहीं रह गया। ऐसे में केवल पीसीएस की तैयारी के लिए बीए में दाखिला लेने वाले अभ्यर्थी अब यहां क्यों आएंगे।


इविवि के पूर्व डीन प्रो. एके श्रीवास्तव मानते हैं कि वर्तमान में बीए का स्कोप कम हुआ है। परंपरागत विषयों की मांग घट रही है। वर्तमान जरूरतों के हिसाब से नए-नए पाठ्यक्रम शुरू हो रहे हैं। इन सबके बीच पीसीएस से वैकल्पिक विषय हटाए जाने के बार बीए का थोड़ा बहुत स्कोप भी कम होता जा रहा है।



जहां लगती थीं लंबी कतारें वहां अब बुलाकर दे रहे प्रवेश

सीटें भरने के लिए किनारे किए गए नियम, इविवि के कई कॉलेजों में सीधे दाखिले के खुले रास्ते


प्रयागराज । इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि ) के जिन कॉलेजों में कभी दाखिले के लिए लंबी कतारें लगतीं थीं, वहां अभ्यर्थियों को अब बुलाकर प्रवेश दिए जा रहे हैं। कई कॉलेजों ने तो ऐसे अभ्यर्थियों को भी दाखिला देना शुरू कर दिया है, जो सेंट्रल यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (सीयूईटी) में शामिल ही नहीं हुए। कॉलेजों में दशकों बाद प्रवेश की स्थित इतनी खराब है।


इलाहाबाद डिग्री कॉलेज (एडीसी) के प्राचार्य प्रो. अतुल कुमार सिंह के अनुसार जो अभ्यर्थी सीयूईटी में शामिल हुए थे, लेकिन इविवि में अपना पंजीकरण नहीं कराया, वे प्रवेश के लिए कॉलेज की वेबसाइट पर अपना पंजीकरण करा लें। वहीं, जो अभ्यर्थी सीयूईटी में शामिल नहीं हुए थे, वे भी प्रवेश के लिए अपना पंजीकरण कॉलेज की वेबसाइट पर करा लें।


वहीं, श्यामा प्रसाद मुखर्जी राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. शुभा श्रीवास्तव के अनुसार जो अभ्यर्थी सीयूईटी में शामिल हुए या नहीं हुए, वे बीए, बीकॉम बीएससी प्रथम वर्ष में प्रवेश के लिए 16 अक्तूबर को सुबह 11 से अपराह्न दो बजे के बीच महाविद्यालय में संपर्क करें। अभ्यर्थियों को ऑफलाइन प्रवेश दिए जाएंगे। राजर्षि टंडन गर्ल्स डिग्री कॉलेज और हमीदिया गर्ल्स डिग्री कॉलेज में भी सीयूईटी में शामिल न होने वाली छात्राओं को प्रवेश दिए जाएंगे।


इससे पूर्व कॉलेजों में सिर्फ उन्हीं अभ्यर्थियों को प्रवेश दिए जा रहे थे, जो सीयूईटी में शामिल हुए थे और उन्होंने इविवि में अपना पंजीकरण कराया था। इस अनिवार्यता के कारण कॉलेजों को प्रवेश के लिए अभ्यर्थी नहीं मिले और आधी से अधिक सीटें खाली रह गई। हालांकि, इस अनिवार्यता को समाप्त किए जाने के बाद भी प्रवेश की गति बहुत तेज नहीं हुई है, लेकिन कुछ सीटें भरने की उम्मीद जगी है।


इविवि में वर्ष 1986 से प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले की प्रक्रिया शुरू हुई थी और इसी के बाद कॉलेजों में भी प्रवेश परीक्षा के माध्यम से दाखिले होने लगे, लेकिन प्रवेश की स्थिति पिछले दो वर्षों से बिगड़ी है और उसी वक्त से सोयूईटी के माध्यम से दाखिले शुरू हुए हैं। सीयूईटी का परिणाम देर से आने के कारण इविवि और इसके संघटक कॉलेजों में सत्र लगातार पिछड़ रहा है।


अगर यही हालात रहे तो अगले साल भी कॉलेजों को इसी समस्या से जूझना पड़ सकता है। यही वजह है कि पिछले दिनों हुई इविवि की एकेडमिक काउंसलिंग की बैठक में यहां तक चर्चा हो गई कि इविवि एवं संघटक कॉलेजों में अगले साल से सीयूईटी के माध्यम से स्नातक में दाखिले लिए जाएं या विश्वविद्यालय पूर्व की भांति अपने स्तर से प्रवेश परीक्षा कराए। हालांकि, इस पर अभी कोई निर्णय नहीं हुआ है।

Thursday, October 19, 2023

शिक्षामित्रों ने नियमित करने के लिए भरी हुंकार, शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि के लिए शासन बनाएगा कमेटी, शासन से मिले आश्वासन के बाद खत्म किया प्रदर्शन


लखनऊ। शिक्षामित्रों के सड़क पर उतरने के बाद उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ की प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. एमकेएस सुंदरम के साथ बुधवार को वार्ता हुई। इसमें शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि समेत अन्य मांगों पर सकारात्मक कार्यवाही के लिए शासन स्तर पर एक कमेटी के गठन पर सहमति बनी। देर रात बेसिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने इससे संबंधित आदेश भी जारी कर दिया।


शिक्षा मित्र संघ के प्रदेश मानदेय काफी कम अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि प्रमुख सचिव ने माना कि शिक्षामित्रों को दिया जाने वाला मानदेय काफी कम है। इतने कम मानदेय में किसी का भी परिवार चलाना संभव नहीं है। ऐसे में इसमें वृद्धि होनी चाहिए और शासन इस पर सकारात्मक निर्णय लेगा। उन्होंने यह भी कहा कि इतने कम मानदेय के बाद भी शिक्षामित्रों का पीएफ क्यों नहीं कटता है?


उन्होंने शिक्षामित्रों के मूल विद्यालय में वापसी, मृतक शिक्षामित्रों के परिजनों को मुआवजे पर भी सकारात्मक कार्यवाही का आश्वासन दिया। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि प्रमुख सचिव ने जल्द ही कमेटी का गठन कर बैठक कराने का आश्वासन दिया है। इसके बाद हम अपना धरना स्थगित करते हैं। अगर जल्द सकारात्मक कार्यवाही नहीं शुरू हुई तो दोबारा आंदोलन करेंगे।


शिक्षामित्रों ने नियमित करने के लिए भरी हुंकार, शिक्षामित्रों के मानदेय वृद्धि के लिए शासन बनाएगा कमेटी, शासन से मिले आश्वासन के बाद खत्म किया प्रदर्शन

🆕 अपडेट 19 अक्टूबर

समिति का होगा गठन
संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि बेसिक शिक्षा प्रमुख सचिव, सचिव और निदेशक से वार्ता हुई है। उन्होंने लिखित आश्वासन दिया है कि मांगों को लेकर जल्द ही शासन स्तर पर एक समिति का गठन किया जाएगा। यह समिति प्रस्ताव बना कर मुख्यमंत्री जी को सौंपेगी।

लखनऊ : नियमितीकरण की मांग को लेकर बुधवार को प्रदेश भर से आए शिक्षामित्रों ने ईको गार्डेन में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के बैनर तले शिक्षा मित्रों ने नियमित किए जाने के साथ ही समान कार्य, समान वेतन की मांग की। मंच से नेताओं और धरने में आए शिक्षामित्रों ने  वादे याद दिलाए। शिक्षामित्रों का प्रदर्शन देर रात प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा से आश्वासन मिलने के बाद समाप्त हुआ।


दोपहर में शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर पुलिस प्रमुख सचिव से वार्ता गई लेकिन बात नहीं हो सकी। नाराज शिक्षामित्रों ने शाम को ईको गार्डेन के सामने सड़क जाम कर दिया। महिला शिक्षामित्र सड़क पर बैठ गईं। इससे गीता पल्ली, कैलाशपुरी, कानपुर रोड, बंगाल बाजार आने-जाने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा।


 पुलिस के समझाने के बावजूद शिक्षा मित्र नहीं हटे। इधर ईको गार्डेन के सामने सड़क पर शिक्षा मित्र नारेबाजी करते रहे। इस दौरान शिक्षा मित्रों और स्थानीय लोगो के बीच नोकझोंक हुई। पुलिस को जेल रोड पर वाहनों का डायवर्जन करना पड़ा।


दबाव बढ़ा तो पुलिस ने प्रमुख सचिव से बात की। देर शाम पुलिस शिक्षामित्रों के प्रतिनिधिमंडल को लेकर सचिवालय स्थित प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा एमकेएस सुंदरम के कार्यालय पहुंची। यहां से सचिव और निदेशक की मौजूदगी में वार्ता हुई।


लखनऊ। शासन की ओर से कमेटी बनाने के आश्वासन देने से पहले दिन में प्रदेश भर से जुटे शिक्षा मित्रों ने नियमितिकरण की मांग को लेकर लखनऊ में सड़क जाम कर प्रदर्शन किया। दो बार वार्ता के लिए गए प्रतिनिधिमंडल की प्रमुख सचिव से मुलाकात न होने से नाराज शिक्षा मित्र करीब ढाई घंटे तक ईको गार्डन के पास सड़क जाम किए रहे। देर शाम प्रमुख सचिव से आश्वासन मिलने के बाद उन्होंने प्रदर्शन खत्म किया।


उप्र प्राथमिक शिक्षक मित्र संघ के बैनर तले विभिन्न जिलों से आए शिक्षा मित्र ईको गार्डन में इकट्ठे हुए वे नियमितिकरण की मांग को लेकर आरपार की लड़ाई के मूड में थे। उन्होंने दो बजे तक बात न कराने पर विधान भवन का घेराव करने की चेतावनी दी। दोपहर करीब 12 बजे संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला की अगुवाई में प्रतिनिधिमंडल को वार्ता कराने के लिए ले जाया गया। करीब दो घंटे इंतजार करने के बाद प्रतिनिधिमंडल प्रमुख सचिव से बिना मिले लौट आया। अधिकारी चार बजे दोबारा प्रतिनिधिमंडल को वार्ता कराने के लिए गए, लेकिन प्रमुख सचिव से मुलाकात नहीं हुई। शाम साढ़े पांच बजे वार्ता हुई। इस दौरान मिले आश्वासन के बाद शिक्षा मित्रों ने प्रदर्शन समाप्त कर दिया।



अभी तक इको गार्डन में ही मौजूद हैं प्रदर्शनकारी शिक्षामित्र, शासन के साथ बातचीत का लगातार दौर जारी



शिक्षामित्रों का धरना प्रदर्शन समाप्त करने के लिए शासन स्तर से कमेटी गठित कर नियमानुसार कार्यवाही करने का आश्वासन



लखनऊ में शिक्षामित्रों का विधानसभा कूच का फैसला टला, प्रमुख सचिव से बातचीत करने पहुंचे शिक्षामित्र प्रदेश अध्यक्ष


लखनऊ में ईको गार्डन पर प्रदर्शन कर रहे 75 जिलों से पहुंचे शिक्षा मित्रों ने बुधवार शाम को विधानसभा की ओर कूच करने निकले लेकिन बाद में उनका फैसला टल गया।


लखनऊ में इको गार्डन में प्रदेश भर से आए शिक्षामित्रों ने नियमितिकरण की मांग को लेकर धरना दिया। शिक्षामित्रो का कहना है यह मेरी अंतिम लड़ाई है और सरकार ने हमारी मांगे नहीं सुनी तो हम लोग विधान भवन का घेराव करेंगे शिक्षामित्रो दो बजे तक का अल्टीमेटम दिया है। प्रदेश के सम्पूर्ण शिक्षा मित्र इस रैली में अपनी चट्टानी एकता का परिचय देते हुए अपनी समस्या को सरकार तक पहुंचाने के लिये अपनी मांगों के समर्थन में लखनऊ में उपस्थित हुए।


लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक मित्र संघ के भगवान पर इको गार्डन में प्रदेश भर से आए शिक्षामित्रों ने नियमितिकरण की मांग को लेकर धरना दिया। शिक्षामित्रो का कहना है यह मेरी अंतिम लड़ाई है और सरकार ने हमारी मांगे नहीं सुनी तो हम लोग विधान भवन का घेराव करेंगे शिक्षामित्रो दो बजे तक का अल्टीमेटम दिया है।


प्रदेश के सम्पूर्ण शिक्षा मित्र इस रैली में अपनी चट्टानी एकता का परिचय देते हुए अपनी समस्या को सरकार तक पहुंचाने के लिये अपनी मांगों के समर्थन में लखनऊ में उपस्थित हुए। प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने प्रदेश सरकार से विनम्र निवेदन के साथ अनुरोध किया कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों से अपनी आजीविका चलाने में आ रही समस्या के निराकरण हेतु शिक्षा मित्र के मुख्यमंत्री से अनुरोध करने हेतु उपस्थित हुए हैं।


इस समय अपने परिवार के भविष्य को सुरक्षित करने हेतु आए शिक्षा मित्रों को मुख्यमंत्री अपना आर्शीवाद प्रदान करते हुए इनका भविष्य सुरक्षित करना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो शिक्षा मित्र अब शांत नहीं बैठेगा और संघर्ष अनवरत जारी रहेगा। यदि निस्तारण प्रदेश सरकार द्वारा शीघ्र नहीं किया गया तो आगे इससे भी बड़ा आन्दोलन संविदा से नियमिती करण हेतु संविदा कर्मियों के द्वारा किया जायेगा।



उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला का कहना है कि शिक्षामित्र लगभग 25 वर्षों से शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. शिक्षा विभाग ने उनको जो भी दायित्व सौंपा उसे पूरी तन्मयता के साथ निभा रहे हैं. इसके बावजूद प्रदेश सरकार उनके साथ किए गए वादों को अभी तक पूरा नहीं कर पाई है. उन्होंने कहा कि अव्वल तो शिक्षामित्रों को विनियमितीकरण का लाभ दिया जाए. विनयमितीकरण का लाभ न दिए जाने तक समान कार्य सामान वेतन के आधार पर वेतन दिया जाए।


आज का यह धरना वार्ता के लिए आयोजित किया गया है. हमारी वार्ता मुख्यमंत्री जी से हो रही है. यदि हमारी मांगें मानी गईं तो ठीक, अगर मांगें पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन की दिशा में आगे बढ़ेंगे. शिव कुमार शुक्ला ने बताया कि सरकार से हमारी कई बार वार्ता हो चुकी है. आश्वासन के अनुसार हम लगातार उनके दिशा निर्देशों का पालन कर रहे हैं. इसके बावजूद आज तक कोई साकारात्मक कदम नहीं उठाया गया है. शिवकुमार शुक्ला का कहना है कि राजस्थान, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, देहरादून, दिल्ली में संविदा कर्मचारियों को नियमित किया है. इसके अलावा नियमित ने किए जाने की दशा में उनको नियमितीकरण के बराबर वेतन दिया जा रहा है. अगर शिक्षामित्रों को नियमितीकरण के समान कार्य समान वेतन दिया जाए तो हमारे परिवार का भविष्य बच जाएगा.


लखनऊ में बुधवार को प्रदेश भर के शिक्षामित्र का बड़ा प्रदर्शन हुआ। ईको गार्डन में प्रदेश भर के शिक्षामित्रों का हुजूम उमड़ा। नियमितीकरण समेत तमाम मांगो को लेकर शिक्षा मित्र लंबे समय से गुहार लगा रहे हैं। 


उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के तत्वावधान में शिक्षामित्रों ने स्थायीकरण की माँग को लेकर राजधानी के ईको गार्डन में धरना दिया। शिक्षामित्रों ने अपनी मांगों को लेकर जमकर विरोध जताया। उन्होंने कहा कि सपा सरकार ने हमें स्थायी किया था उसके बाद योगी सरकार के समय सरकार ने हमारी मदद नहीं की जिसके कारण हमें कोर्ट से निराश होना पढ़ा। उसके बाद से योगी सरकार शिक्षामित्रों के लिए कुछ नहीं कर रही है। शिक्षामित्रों ने योगी सरकार से उन्हें स्थायी करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आज हमारे सामने घर चलाने की दिक्कतें आ रही हैं।


राजधानी के इको गार्डन में एकत्र हुए शिक्षामित्र

बुधवार को बड़ी संख्या में शिक्षामित्र राजधानी के इको गार्डन में एकत्र हुए और अपनी मांगों को लेकर धरना दिया। शिक्षामित्र नेहा सिंह ने बताया कि हम लगातार शिक्षामित्रों के स्थायीकरण की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार इसे अनदेखी कर रही है।


शिक्षामित्र कई सालों से शिक्षण कार्य में लगे हैं उसके बाद भी सरकार इनकी ओर ध्यान नहीं दे रही है। अगर सरकार का यही रवैया रहा तो हम लोगों के सामने भारी दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी।

यूपी बोर्ड : पुराने अंकपत्रों में संशोधन और नए प्रकरण लटकाए, जून में जिलों में कैंप लगवाकर निपटाए थे लंबित मामले

यूपी बोर्ड : पुराने अंकपत्रों में संशोधन और नए प्रकरण लटकाए, जून में जिलों में कैंप लगवाकर निपटाए थे लंबित मामले



प्रयागराज : यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के अंकपत्र / प्रमाणपत्र में त्रुटि संशोधन के 38 वर्ष तक पुराने मामलों को निस्तारित कराकर छात्र - छात्राओं को बड़ी राहत तो दी, लेकिन इसके बाद क्षेत्रीय कार्यालयों में त्रुटि संशोधन की रफ्तार फिर धीमी पड़ गई। 


सचिव दिव्यकांत शुक्ल ने छह जून के बाद त्रुटि संशोधन के मामलों की क्षेत्रीय कार्यालयों प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली और मेरठ से रिपोर्ट मांगी तो प्रकरण लंबित होते देख नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रकरणों को तेजी से निपटाएं, अन्यथा जिम्मेदारी तय करते हुए कार्रवाई की जाएगी। 


क्षेत्रीय कार्यालयों ने अंकपत्र / प्रमाणपत्र में नाम, स्पेलिंग, माता-पिता के नाम आदि में त्रुटि संशोधन के लिए जिलों से जरूरी साक्ष्य जुटाने के बाद संशोधित अंकपत्र प्रिंट कराकर विद्यालय भेजने में तेजी तो दिखाई, लेकिन उसके बाद आने वाले मामलों का निस्तारण उपेक्षित हो गया। 


छह जून के बाद आए प्रकरणों की संख्या एक सप्ताह पहले 14,900 पहुंच गई थी। इस स्थिति पर बोर्ड सचिव ने क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर सचिवों के साथ वर्चुअल मीटिंग में कहा था कि मामले लंबित रखकर छात्र - छात्राओं से क्षेत्रीय कार्यालयों की परिक्रमा न लगवाई जाए।


इसके बाद निस्तारण ने फिर रफ्तार पकड़ी और करीब नौ हजार मामले निस्तारित कर दिए गए। सभी क्षेत्रीय कार्यालयों में अभी भी करीब साढ़े पांच हजार प्रकरण लंबित हैं, जिनका निस्तारण कर संशोधित अंकपत्र निर्गत करने के निर्देश दिए गए हैं। 


बोर्ड पुराने आवेदनों का निस्तारण कर बैकलाग खत्म करने के साथ त्रुटि संशोधन व्यवस्था को आनलाइन करने की तैयारी में है, जिससे उसकी आनलाइन निगरानी भी की जा सकेगी। इससे छात्र- छात्राओं को क्षेत्रीय कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।


शासन की हरी झंडी के बाद संस्कृत विद्यालयों में डिप्लोमा कोर्स को मान्यता, नए संस्कृत विद्यालयों को मान्यता भी मिली

शासन की हरी झंडी के बाद संस्कृत विद्यालयों में डिप्लोमा कोर्स को मान्यता,  नए संस्कृत विद्यालयों को मान्यता भी मिली



लखनऊ। प्रदेश के संस्कृत इंटर कॉलेज में पढ़ रहे विद्यार्थियों को रोजगार से जोड़ने के लिए शासन ने चार डिप्लोमा कोर्स शुरू करने को हरी झंडी दी थी। इसी क्रम में बुधवार को माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की मान्यता समिति ने आठ विद्यालयों में पुरोहित, व्यावहारिक ज्योतिष, व्यावहारिक वास्तुशास्त्र व योगा पर डिप्लोमा कोर्स चलाने की मान्यता दी है। इसमें प्रवेश नए सत्र में एक जुलाई से होंगे।


इनमें 30-30 सीटों पर प्रवेश होंगे। यह डिप्लोमा कोर्स दो सेमेस्टर और एक साल के होंगे। इसी क्रम में प्रदेश में सात नए विद्यालयों को भी नए सत्र से पठन-पाठन शुरू करने की मान्यता दी गई। परिषद के सचिव आरके तिवारी ने बताया कि कुछ आवेदन अपूर्ण थे, उन्हें पूर्ण करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।


उन्होंने बताया कि परिषद की ओर से प्रतिभा खोज परीक्षा का आयोजन कर प्रदेश भर के 90 छात्र-छात्राओं का चयन किया है। इनको एक हजार महीना छात्रवृत्ति दी जाएगी जो सीधे उनके बैंक खातों मे भेजी जाएगी। 


बैठक में अध्यक्ष संस्कृत भारती न्यास जेपी सिंह, एमएलसी श्रीचन्द्र शर्मा, डॉ. ब्रजभूषण ओझा सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय वाराणसी, उप निरीक्षक संस्कृत पाठशाला, उप शिक्षा निदेशक संस्कृत आदि उपस्थित थे।

72वें दिन भी जारी रहा 69 हजार शिक्षक भर्ती में एक नंबर से चूके अभ्यर्थियों का धरना

72वें दिन भी जारी रहा 69 हजार शिक्षक भर्ती में एक नंबर से चूके अभ्यर्थियों का धरना


लखनऊ। 69,000 शिक्षक भर्ती में S एक नंबर से नियुक्ति से वंचित अभ्यर्थियों का ईको गार्डेन में 72वें दिन भी धरना जारी रहा। अभ्यर्थियों ने शैक्षिक परिभाषा के गलत पाए गए एक सवाल के स्थान पर एक अंक बढ़ाते हुए मेरिट जारी करने की मांग कर रहे हैं।


 बुधवार को हुए धरना-प्रदर्शन में अभ्यर्थियों ने कहा कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया गया था। इस दौरान उनकी मांगों पर आश्वासन दिया गया था किंतु अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 



लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में एक नंबर से नियुक्ति से वंचित रहे अभ्यर्थियों का धरना ईको गार्डेन में 72 वें दिन भी जारी रहा। बुधवार को हुए धरना-प्रदर्शन में अभ्यर्थियों ने कहा कि कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया गया था। इस दौरान उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। 


वहीं, 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों ने बुधवार को भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी को भी मामले से अवगत कराया। अभ्यर्थी शिव शंकर, राजन जायसवाल, प्रदीप कुमार कमल, मालू सिंह चौधरी ने बताया कि इसमें विभागीय अधिकारियों की ओर से किस तरह से गड़बड़ी की गई है। ब्यूरो

फर्स्ट फेज कॉलेज आवंटन वाले 6557 अभ्यर्थियों ने ने डीएलएड में नहीं लिया प्रवेश

 फर्स्ट फेज कॉलेज आवंटन वाले 6557 अभ्यर्थियों ने  ने डीएलएड में नहीं लिया प्रवेश



🆕 अपडेट 19 अक्टूबर 2023 
प्रयागराज : डीएलएड प्रशिक्षण 2023 में प्रवेश के लिए फर्स्ट फेज कॉलेज आवंटन वाले 6557 अभ्यर्थियों ने दाखिला नहीं लिया। प्रथम चरण के चार राउंड के बाद छह अक्तूबर तक जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 9435 व निजी कॉलेजों की 89005 सीटें आवंटित की गई थी। 


परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय ने प्रवेश लेने वाले अभ्यर्थियों की सूचना 17 अक्तूबर तक ऑनलाइन मांगी थी। प्रवेश की रिपोर्ट के मुताबिक डायट में 8041 व निजी कॉलेजों में 81842 कुल 91883 अभ्यर्थियों ने ही प्रवेश लिया।



16 अक्टूबर 2023
डीएलएड प्रवेश को दूसरे चरण की काउंसिलिंग 26 अक्टूबर से


प्रयागराज। डीएलएड प्रशिक्षण 2023 में प्रवेश के लिए दूसरे चरण की काउंसिलिंग 26 अक्तूबर से शुरू होगी। प्रथम चरण के चारों राउंड के बाद जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) की 9435 व निजी कॉलेजों की 89005 कुल 98440 आवंटित सीटों की प्रवेश संबंधी सूचना परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की वेबसाइट पर 17 अक्तूबर तक अपलोड की जाएगी। 


दूसरे चरण में एनआईसी के पोर्टल के जरिए 26 अक्तूबर से 10 नवंबर तक संस्था आवंटन होगा। दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया 20 नवंबर तक पूरी होगी। प्रशिक्षण 21 नवंबर से शुरू होगा। पहले चरण में प्रदेशभर के 67 डायट की 10600 सीटों में से 9435 जबकि 2974 निजी कॉलेजों की 222750 सीटों में से 89005 सीटें आवंटित हो चुकी हैं।

Wednesday, October 18, 2023

सूबे की राजधानी में आज शिक्षामित्रों का विशाल धरना, अपने हक और अधिकारों की मांग के लिए उठाएंगे आवाज

सूबे की राजधानी में आज शिक्षामित्रों का विशाल धरना, अपने हक और अधिकारों की मांग के लिए उठाएंगे आवाज


🆕 अपडेट 18 अक्टूबर 2023
आज 18 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में विशाल धरना प्रदर्शन किया जाएगा। जिसमें प्रदेश भर से शिक्षा मित्र इकट्ठा होंगे। 

उत्तर प्रदेश का शिक्षामित्र एक बार फिर लखनऊ के इको गार्डन में आज फिर धरना प्रदर्शन करने की है। धरना प्रदर्शन को सफल बनाने के लिए शिक्षामित्रों की बैठकों का दौर समाप्त  होने के बाद आज इसकी अग्नि परीक्षा है। 


उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के अनुसार शिक्षामित्र की प्रमुख मांगों में नियमितीकरण की मांग  प्रमुख है। संगठन का शिक्षामित्र साथियों का मान सम्मान वापस दिलाने के लिए कार्य कर रही है। संगठन ने  शिक्षामित्र से अपील की कोई भी साथी निराश ना हो। प्रदेश संगठन संघर्ष में कोई कमी नहीं छोड़ेगा। ‌


शिक्षामित्र की प्रमुख मांग में समान कार्य के लिए समान वेतन, अध्यापक को मिलने वाली सुविधा शिक्षामित्रों को भी मिले, मेडिकल अवकाश आदि शामिल है।  



पूरे प्रदेश से आए शिक्षामित्र अपने हक और अधिकारों के लिए कल लखनऊ में अपनी मांगों को लेकर भरेंगे हुंकार


उत्तर प्रदेश में 18 अक्टूबर को पूरे प्रदेश के शिक्षा मित्र राजधानी लखनऊ के लिए आज शाम को निकल रहे है कई जिलों से जो दूर दराज के है वहाँ से निकल चुके हैं।


18 अक्टूबर को ईको गार्डन में हुंकार भरेंगे शिक्षामित्र

लखनऊ। पूर्व माध्यमिक विद्यालय पिनवट में उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र के ब्लाक सरोजनीनगर की बैठक को संबोधित करते हुए प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव ने कहा कि 18 अक्टूबर को लखनऊ के इको गार्डन में उत्तर प्रदेश के लाखों शिक्षामित्र अपने हक व अधिकार को पाने के लिए विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे। शिक्षामित्र पिछले 23 वर्षों से प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य कर रहे हैं.


 लेकिन अल्प मानदेय के चलते हुए अपने परिवार का पालन पोषण करने, बच्चों की शिक्षा व्यवस्था, बुजुर्ग मां-बाप की दवाई व इलाज नहीं करा पा रहे हैं जिसके कारण अवसाद में आकर आत्महत्या जैसे आत्मघाती कदम उठा रहे हैं पिछले 6 वर्षों में सरकार द्वारा शिक्षामित्र का मानदेय भी नहीं बढ़ाया गया है


शिक्षामित्र को समान कार्य समान वेतन व स्थाईकरण की मांग को लेकर पूरे प्रदेश के शिक्षामित्र 18 अक्टूबर को धरना प्रदर्शन करेंगे और सरकार से अपनी मांग पूरी करने के लिए एकत्रित होंगे बैठक को प्रदेश सचिव आनंद सिंह यादव, ब्लॉक अध्यक्ष सरोजनी नगर हरिनाम सिंह, सतीश कुमार एसपी सिंह, सुभाष चंद्र, सुदामा लोधी हरिपाल दिनेश कुमार प्रदीप श्रीवास्तव संजय सिंह अर्चना यादव आदि पदाधिकारियों ने भी संबोधित किया



शिक्षा मित्र 18 अक्टूबर को दिखायेंगे ताकत


लखनऊ। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने अपनी पांच सूत्री मांगों को लेकर 18 अक्तूबर को राजधानी के इको गार्डेन में प्रदेशव्यापी रैली करने की घोषणा की है। संगठन के मंत्री कौशल कुमार सिंह ने बताया कि राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों की समस्यायों के निराकरण के लिए तमाम वार्ताओं के बाद भी अब तक कोई समाधान नहीं निकाला है।


समायोजन व वेतन वृद्धि के लिए शिक्षामित्र 18 अक्तूबर को राजधानी में एक बार फिर दिखाएंगे दम


लखनऊ। शिक्षामित्रों के समायोजन, वेतन वृद्धि आदि मांगों को लेकर अभी तक कोई कार्यवाही न किए जाने से अन्य मांगों को लेकर शिक्षामित्र, उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के बैनर तले 18 अक्तूबर को राजधानी में एक बार फिर दम दिखाएंगे। 


ईको गार्डेन में रैली आयोजित होगी। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि उनमें काफी नाराजगी है। साथ ही  इसी के साथ शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी, महिला शिक्षामित्रों को उनके ससुराल के पास तैनाती, टीईटी पास शिक्षामित्रों को नियमों में शिथिलता देते हुए सहायक अध्यापक बनाने का मुद्दा उठाएंगे।

नए पाठ्यक्रम का रोडमैप तैयार दो चरणों में होगा लागू

नए पाठ्यक्रम का रोडमैप तैयार दो चरणों में होगा लागू : केंद्रीय शिक्षा मंत्री 

• शिक्षा मंत्री बोले- अगले शैक्षणिक सत्र से इस पर अमल शुरू 

• पहले आएगा तीसरी, चौथी, पांचवीं, छठी, नौवीं व 11वीं का पाठ्यक्रम


नई दिल्ली । नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत तैयार किए जा रहे नए पाठ्यक्रम को स्कूली शिक्षा में बड़े गेमचेंजर के रूप में देखा जा रहा है। यह कब से और कैसे लागू होगा, इसको लेकर लोगों में काफी उत्सुकता है। 


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्कूलों में इसके अमल का पूरा रोडमैप सामने रखा। उन्होंने बताया कि वैसे तो अगले शैक्षणिक सत्र यानी 2024-25 से अमल शुरू हो जाएगा। यह दो चरणों में लागू होगा। पहले चरण में इसे छह कक्षाओं तीसरी, चौथी, पांचवीं छठी, नौवीं और ग्यारहवीं में लागू किया जाएगा। दूसरे चरण में 2025 - 26 के शैक्षणिक सत्र में इसे बाकी चार कक्षाओं सातवीं, आठवीं, दसवीं और बारहवीं में लागू किया जाएगा।


उन्होंने कहा कि पाठ्यक्रम तैयार किया जा रहा है। अगले दो वर्षों में इसे पूरी तरह से लागू कर दिया जाएगा। नए पाठ्यक्रम को लागू करने की शुरूआत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से होगी । इसे राज्य भी लागू कर सकते हैं।


नए पाठ्यक्रम के तैयार होते ही राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) तुरंत ही इसे राज्यों के राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) को भेज देगा। बड़ी संख्या में पुस्तकें तैयार करने के सवाल पर प्रधान ने कहा कि एनसीईआरटी यह काम हर साल करती है। नई पाठ्यपुस्तकें तैयार करने में कोई दिक्कत नहीं आएगी। 

बनेगी नवाचार सेल, वैज्ञानिक सोच बढ़ाने के लिए CBSE स्कूलों में होगा गठन

बनेगी नवाचार सेल, वैज्ञानिक सोच बढ़ाने के लिए CBSE स्कूलों में होगा गठन



लखनऊ। हर छात्र के पास दिमाग होता है और उनके दिमाग में कई आइडिया आते हैं। ऐसे ही आइडिया को धरातल पर उतारे और बच्चों में वैज्ञानिक सोच का विस्तार करने लिए सभी विद्यालयों में स्कूल इनोवेशन यानी नवाचार सेल (एसआईसी) का गठन किया जाएगा। 


अभी तक विश्वविद्यालय और महाविद्यालय स्तर पर इनोवेशन सेल बनायी जा रही थीं लेकिन अब स्कूलों में इनोवेशन सेल बनने से न सिर्फ नए आइडिया सामने आएंगे बल्कि छात्र- छात्राओं की सोच का विकास भी होगा ।


 केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में एसआईसी गठन का सर्कुलर जारी कर दिया गया है। छात्र-छात्राओं की शुरुआती सोच को बड़ा मंच और आकार देने के उद्देश्य से एसआईसी का गठन किया जा रहा है। बोर्ड की इस पहल से देश भर के नए-नए आइडिया सामने आएंगे।


बढ़ेगी बच्चों की सोच और स्कूलों को क्रेडिट अंक

एसआईसी के गठन से बच्चों की सोच का दायरा बढ़ेगा।  अभी तक कुछ स्कूलों में इनोवेशन पर काम हो रहा था लेकिन बोर्ड के एसआईसी गठन के निर्णय से इनोवेशन को मजबूती मिलेगी। एक्टिविटी कराने वाले विद्यालयों को स्कूल इनोवेशन क्रेडिट अंक भी मिलेंगे। स्टार रेटिंग भी दी जाएगी।



CBSE स्कूलों में गठित होगी इनोवेशन सेल, नवाचार को लगेंगे पंख


केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के स्कूलों में स्कूल इनोवेशन सेल गठित की जाएगी। विद्यार्थियों के नवाचार को बढ़ावा देने और उनके अंदर वैज्ञानिक सोच विकसित करने के उद्देश्य से सीबीएसई ने यह पहल की है। 


इसको लेकर बोर्ड ने सभी स्कूलों को निर्देश भेज दिया है। इससे जहां विद्यार्थियों के नए-नए आइडिया को मंच मिलेगा, वहीं नवाचार को पेटेंट कराने की राह भी आसान होगी। बोर्ड के निर्देश के बाद से ही यूपी के सभी स्कूलों में सेल गठित करने की कवायद शुरू हो गई है।


स्कूल इनोवेशन सेल के अंतर्गत समय-समय पर स्कूलों में गतिविधियां आयोजित की जाएगी। इसके लिए पूरे साल का एक कैलेंडर बनाया गया है। गतिविधियां आयोजित करने वाली स्कूल इनोवेशन सेल को छात्र-छात्राओं में उद्यमिता विकसित करने के लिए सीबीएसई की यह सकारात्मक पहल है। इससे जहां विद्यार्थियों के अंदर नए-नए नवाचार करने की भावना विकसित होगी, वहीं उन्हें आगे बढ़ने का भी अवसर उपलब्ध होगा। विद्यालयीय स्तर पर बोर्ड द्वारा इस तरह की पहली बार पहल की जा रही है।


क्रेडिट अंक भी दिए जाएंगे। क्रेडिट प्वाइंट से बड़े पैमाने पर स्टार रेटिंग मिलेगी। उच्च स्टार रेटिंग वाली सेल को शीर्ष रूप में स्वीकार किया जाएगा। इसके अलावा स्टार्टअप से जुड़ीं गतिविधियां भी स्कूलों में आयोजित की जाएंगी। इसके अलावा स्कूलों में इनोवेशन वाल का भी गठन होगा ।

शिक्षकों को रास नहीं आ रही ऑनलाइन छुट्टी लेने की व्यवस्था, आधे से अधिक यानी शिक्षक और कर्मचारियों ने ऑनलाइन अवकाश के लिए नहीं किया एक भी आवेदन


शिक्षकों को रास नहीं आ रही ऑनलाइन छुट्टी लेने की व्यवस्था

आधे से अधिक यानी शिक्षक और शिक्षणेतर कर्मचारियों ने ऑनलाइन अवकाश के लिए नहीं किया एक भी आवेदन



प्रयागराज। सूबे के सहायता प्राप्त अशासकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों को ऑनलाइन छुट्टी लेने की व्यवस्था रास नहीं आ रही है। शासन की तरफ से 31 मार्च 2023 से की व्यवस्था शुरू की गई ऑनलाइन अवकाश लेने थी। 15 अप्रैल को
ऑफलाइन अवकाश लेने की व्यवस्था पूरी तरह से बंद कर दी गई। 


मानव संपदा पोर्टल के आंकड़ों पर नजर डालें तो प्रदेश के 4512 एडेड कॉलेजों में आधे से अधिक यानी करीब 2359 शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मचारियों ने ऑनलाइन अवकाश के लिए एक भी आवेदन नहीं किया है। 


इसको देखते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, मंडलीय उपशिक्षा निदेशक और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र भेजकर स्पष्टीकरण मांगा है। डीडीआर आरएन विश्वकर्मा ने बताया कि डीआईओएस को निर्देश दिया गया है कि पोर्टल के माध्यम से ही अवकाश स्वीकृत करें। जिन विद्यालयों में लापरवाही मिले वहां के प्रधानाचार्य का वेतन रोकते हुए शासन के आदेश का पालन किया जाए। 


ऑनलाइन छुट्टी में पीछे दस जिलों के एडेड कॉलेज

प्रयागराज : प्रदेश के सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को ऑनलाइन अवकाश की व्यवस्था रास नहीं आ रही। शासन ने 31 मार्च 2023 को ऑनलाइन अवकाश के आदेश जारी किए थे। 15 अप्रैल 2023 के बाद ऑफलाइन अवकाश की व्यवस्था समाप्त हो गई। 


हालांकि मानव संपदा पोर्टल के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के 4512 एडेड कॉलेजों में से आधे से अधिक यानि 2359 में शिक्षकों एवं कार्मिकों ने ऑनलाइन अवकाश के लिए एक भी आवेदन नहीं किया है।


महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, मंडलीय उप शिक्षा निदेशक और जिला विद्यालय निरीक्षकों को पांच अक्तूबर को पत्र लिखकर स्पष्टीकरण मांगा है। इस मामले में प्रयागराज के मंडलीय उप शिक्षा निदेशक आरएन विश्वकर्मा का कहना है कि डीआईओएस को निर्देशित किया गया है कि पोर्टल के माध्यम से ही अवकाश स्वीकृति की व्यवस्था सुनिश्चित करें। जिन विद्यालयों में लापरवाही मिले वहां के प्रधानाचार्य का वेतन रोकते हुए शासनादेश का अनुपालन कराएं।


टॉप पर जौनपुर, सूची में प्रयागराज-प्रतापगढ़

ऑनलाइन अवकाश लेने के मामले में दस सर्वाधिक खराब जिलों में सबसे ऊपर जौनपुर का नाम है। जौनपुर के 134 स्कूलों के शिक्षकों-कार्मिकों ने मानव संपदा पोर्टल से छुट्टी नहीं ली। वाराणसी के 113, आजमगढ़ 108, प्रतापगढ़ 105 व देवरिया के 100 स्कूलों का यही रिकॉर्ड है। बलिया के 99, गोरखपुर 90, गाजीपुर 87, प्रयागराज 86 व मेरठ के 75 स्कूलों के शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने ऑनलाइन माध्यम से अवकाश नहीं लिया है।

निजी मेडिकल कॉलेज डकार रहे करोड़ों रुपये का इंटर्नशिप भत्ता

निजी मेडिकल कॉलेज डकार रहे करोड़ों रुपये का इंटर्नशिप भत्ता

डीएम की सर्वे रिपोर्ट: कुछ कॉलेज आधा-अधूरा दे रहे, कुछ देते ही नहीं

12,000 रुपये प्रति माह भत्ता देने का है आदेश सभी कॉलेजों को

कॉलेजों को पाबंद करेगा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय



लखनऊ। प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेज महंगी फीस ही नहीं लेते बल्कि करोड़ों रुपये का इंटर्नशिप भत्ता भी डकार जा रहे हैं। यह खुलासा हुआ है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग की आंतरिक जांच रिपोर्ट में अब चिकित्सा शिक्षा विभाग कॉलेजों को भत्ता देने के लिए पाबंद करने की तैयारी में है।


प्रदेश के 35 राजकीय व स्वशासी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 3,828 और 31 निजी मेडिकल कॉलेजों में 4,900 सीटें हैं। एमबीबीएस पूरा करने के बाद छात्रों को 12 माह का इंटर्नशिप करना होता है। हर छात्र को प्रतिमाह 12 हजार रुपये इंटर्नशिप भत्ता देने का नियम है। इसके बाद भी प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेज इंटर्नशिप भत्ता नहीं दे रहे हैं। 


लगातार मिल रही शिकायतों के बाद चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय ने कॉलेजवार सर्वे कराया सर्वे रिपोर्ट चौकाने वाली है। रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश के 10 निजी मेडिकल कॉलेज एक भी छात्र को इंटर्नशिप भत्ता नहीं दे रहे हैं। चार मेडिकल कॉलेज प्रतिमाह 10 हजार रुपये की दर से भत्ता दे रहे हैं। अन्य में कोई तीन हजार तो कोई सात हजार रुपया प्रतिमाह दे रहा है। भत्ता नहीं देने वाले कॉलेजों में एमबीबीएस की न्यूनतम 150 सीटें हैं। यानी वे हर साल करीब दो करोड़ 16 लाख रुपया छात्रों के हिस्से का डकार जा रहे हैं।


क्या हैं नियम

सरकारी कॉलेजों में पहले 7500 रुपया प्रतिमाह इंटर्नशिप भत्ता दिया जाता था। छात्रों के विरोध के बाद पांच जनवरी 2021 को इसे बढ़ाकर 12 हजार रुपया प्रतिमाह किया गया। इतना ही नहीं निजी कॉलेजों के साथ ही विदेशी से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भी अब इंटर्नशिप भत्ता देने का निर्देश दिया गया है।


बिना भत्ता 12 से 16 घंटे की ड्यूटी का आरोप

निजी कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई करने वाले छात्रों का आरोप है कि एक तरफ उन्हें भत्ता नहीं मिल रहा है तो दूसरी तरफ 12 से 16 घंटे ड्यूटी भी करनी पड़ती है। नाम नहीं छापने की शर्त पर छात्रों ने बताया कि यदि वे इंटर्नशिप भत्ता मांगते हैं तो उसके एवज में दूसरे शुल्क बढ़ा दिए जाते हैं। कुछ छात्रों ने तो यह भी बताया कि जो कॉलेज आधा अधूरा भत्ता दे रहे हैं, वे खाते से निकलवाकर वापस ले लेते हैं।


मेडिकल कॉलेजों को 12 हजार रुपया इंटर्नशिप भत्ता देने का निर्देश है। कुछ कॉलेजों के भत्ता नहीं देने की बात सामने आई है। वे किन परिस्थितियों में भत्ता नहीं दे रहे हैं, इसकी पड़ताल कराई जा रही है। – किंजल सिंह, डीजीएमई

यूपी बोर्ड : 10वीं-12वीं में घटे 3.76 लाख विद्यार्थी, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के लिए 55,08,206 पंजीकरण

यूपी बोर्ड : 10वीं-12वीं में घटे 3.76 लाख विद्यार्थी, हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के लिए 55,08,206 पंजीकरण
 
2023 की तुलना में 2024 की बोर्ड परीक्षा में कमी

● पिछले साल 58,84,634 विद्यार्थियों का था रजिस्ट्रेशन


प्रयागराज : यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2024 के लिए छात्र-छात्राओं की संख्या में 3,76,428 की कमी आई है। फरवरी 2024 में प्रस्तावित बोर्ड परीक्षा के लिए 10वीं-12वीं में 55,08,206 विद्यार्थियों का पंजीकरण हुआ था। जबकि पिछले साल 58,84,634 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। बोर्ड ने कक्षा नौ से 12 तक के छात्र-छात्राओं के ऑनलाइन पंजीकरण के लिए दस अक्तूबर तक मौका दिया था।

छात्र संख्या में कमी का एक बड़ा कारण पिछले सालों में परीक्षा के दौरान बरती जा रही सख्ती है। इसके चलते नकल के सहारे बोर्ड परीक्षा में पास होने की प्रवृत्ति वाले अभ्यर्थियों ने दूरी बनाई है। कक्षा नौ व 11 में 52,83,757 विद्यार्थियों ने अग्रिम पंजीकरण कराया है। गौरतलब है कि 2022 की हाईस्कूल व इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के लिए क्रमश 27,81,645 व 24,10,971 कुल 51,92,616 विद्यार्थियों ने पंजीकरण कराया था। बोर्ड ने परीक्षा की तैयारियां भी तेज कर दी है। परीक्षा केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया चल रही है।

Tuesday, October 17, 2023

1.38 लाख विद्यार्थियों को वजीफे का इंतजार, 6 माह बाद भी संस्कृत के छात्रों को नहीं मिली छात्रवृत्ति, शासनादेश जारी नहीं, नही छात्रवृत्ति की राशि का निर्धारण हुआ

प्रदेश सरकार ने फरवरी में प्रस्तुत बजट में किया था प्रावधान

1.38 लाख विद्यार्थियों को वजीफे का इंतजार, 6 माह बाद भी संस्कृत के छात्रों को नहीं मिली छात्रवृत्ति, शासनादेश जारी नहीं, नही छात्रवृत्ति की राशि का निर्धारण हुआ


प्रयागराज । प्रदेश में संचालित राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों व महाविद्यालयों में देववाणी का अध्ययन कर रहे विद्यार्थियों को आधा सत्र बीतने के बावजूद छात्रवृत्ति नहीं मिल सकी है। प्रदेश सरकार ने तकरीबन 1.38 पूर्व मध्यमा (9 व 10 ) लाख विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति के लिए फरवरी में प्रस्तुत बजट में 10 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया था। लेकिन आचार्य (स्नातकोत्तर) न तो अब तक शासनादेश जारी हो सका और न ही यह तय हो सका है कि किस कक्षा के विद्यार्थी को कितनी राशि शास्त्री, आचार्य व शिक्षा प्रदान की जाएगी।


वर्तमान में प्रथम (कक्षा छह ) से लेकर स्नातकोत्तर (आचार्य) स्तर तक की कक्षाओं में तकरीबन 1.38 लाख छात्र-छात्राएं संस्कृत की पढ़ाई कर रहे हैं। पहले प्रदेशभर में पूर्व मध्यमा के 125, उत्तर मध्यमा के 90, शास्त्री के 48 व आचार्य के मात्र 25 विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति दी जाती थी। लेकिन संस्कृत शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए सभी छात्र-छात्राओं को वजीफा देने का निर्णय लिया गया है।


छात्रवृत्ति बजट में हो सकती है वृद्धि

संस्कृत पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति के लिए बजट में 10 करोड़ का प्रावधान किया गया था। सूत्रों के अनुसार सभी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने के लिए निर्धारित 10 करोड़ की राशि बढ़ाई जा सकती है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेन्द्र देव की ओर से शासन को संस्कृत पढ़ने वाले सभी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति देने के लिए 1.31 अरब का प्रस्ताव भेजा गया था। छात्रवृत्ति विद्यार्थियों की मेधा के अनुरूप देने की बात कही गई थी।



ब्रिज कोर्स के लिए भटक रहे 69000 शिक्षक भर्ती अंतर्गत नियुक्त शिक्षक

ब्रिज कोर्स के लिए भटक रहे 69000 शिक्षक भर्ती अंतर्गत नियुक्त शिक्षक


लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्त हुए बीएड डिग्रीधारक शिक्षकों को छह महान था। कई बार की मांग के बावजूद शिक्षा विभाग इन्हें ब्रिज कोर्स नहीं करा रहा है। ऐसे में ये शिक्षक भटक रहे हैं कि कहीं उनकी नौकरी में कोई दिक्कत न आ जाए। इनकी संख्या लगभग 20 हजार बताई जा रही है। 


पिछले दिनों सुप्रीम कोर्ट ने बेसिक शिक्षक भर्ती के लिए बीएड की डिग्री को अमान्य कर दिया था कि बनने के बाद बीटीसी (अब डीएलएड) को अहंता ही मान्य है। ऐसे में बिना ब्रिज कोर्स के नौकरी कर रहे एडरिकों को डर सता रहा है। इससे पहले बीएड से भर्ती होने वाले शिक्षकों को छह माह का ब्रिज कोर्स कराया जाता था। वे कई बार विभाग में पत्राचार कर चुके हैं। 


पिछले दिनों बेसिक शिक्षा परिषद ने हाईकोर्ट में चल रहे केस का हवाला देते हुए ब्रिज कोर्स कराने में असमर्थता जताई थी। ऐसे में इन शिक्षकों पर देहरा पड़ा है। क्यों कोर्ट में चल रहे केस में भी अगर मेरिट में कोई बदलाव होता है तो इसका असर भी उन पर पड़ सकता है। 

माध्यमिक शिक्षकों और कर्मचारियों के संबद्धिकरण पर DGSE की निगाह, सभी डीआइओएस को कार्यवाई का निर्देश

माध्यमिक शिक्षकों और कर्मचारियों के संबद्धिकरण पर DGSE की निगाह, सभी डीआइओएस को कार्यवाई का निर्देश 


लखनऊ। माध्यमिक विद्यालय में तैनात शिक्षकों- कर्मचारियों के मूल तैनाती से इतर दूसरे कार्यालय विद्यालयों में संबद्ध करने का मामला शासन के संज्ञान में आया है। इनको जिला मंडल मुख्य कार्यालय से संबद्ध किया गया है। 


शासन ने न सभी डीआईओएस को इस पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। महानिदेशक स्कूल शिवा विजय किरन आनंद ने सभी डीआईओएस को निर्देश दिया जाए कि प्रशासनिक विद्यालय चलाने की आवश्यकता के कारण तैनात किए गए शिक्षकों को छोड़कर अन्य सभी शिक्षक कर्मचारियों की संबद्धता समाप्त की जाए। जिला मुख्यालय मंडल कार्यालय में संबद्ध शिक्षक- कर्मचारियों को तुरंत कार्यमुक्त किया जाए।



हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों से मांगा जवाब, मदरसों को किस आधार पर दी जा रही सरकारी मदद? सरकारी धन से धार्मिक शिक्षा पर जनहित याचिका का मामला

हाईकोर्ट ने केंद्र व राज्य सरकारों से मांगा जवाब, मदरसों को किस आधार पर दी जा रही सरकारी मदद? सरकारी धन से धार्मिक शिक्षा पर जनहित याचिका का मामला 



लखनऊ  । उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने केंद्र व राज्य सरकार से पूछा है कि मदरसों को किन योजनाओं के तहत सरकारी सहायता दी जाती है। न्यायालय ने तीन सप्ताह में शपथ पत्र दाखिल करने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद होगी।


यह आदेश न्यायमूर्ति एआर मसूदी व न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ला की खंडपीठ ने 'सरकारी धन से धार्मिक शिक्षा का मामला' शीर्षक से स्वतः संज्ञान द्वारा दर्ज जनहित याचिका पर पारित किया है। न्यायालय ने सुनवाई में सहयोग के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर को न्याय मित्र भी नियुक्त किया है। न्यायालय ने राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग को तीन सप्ताह का समय देते हुए उन निरीक्षण आख्या और पत्राचार को रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया है जिनके अनुसार सरकारी धन से मदरसों में धार्मिक शिक्षा से बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन होता है।


दरअसल, सेवा सम्बंधी एक मामले की सुनवाई में पीठ ने केंद्र व राज्य सरकार से पूछा था कि सरकारी खर्चे पर या वित्त पोषण से मजहबी शिक्षा कैसे दी जा रही है। बाल संरक्षण आयोग ने मामले में शपथ पत्र देकर कहा कि मदरसों में बच्चों को मिलने वाली शिक्षा समुचित और व्यापक नहीं है और इसके अभाव में मदरसों में शिक्षा के अधिकार कानून का उल्लंघन हो रहा है।

डीएलएड का बढ़ रहा क्रेज, कॉलेजों की संबद्धता के लिए 20 अक्ततूबर तक करें आवेदन

डीएलएड का बढ़ रहा क्रेज, कॉलेजों की संबद्धता के लिए 20 अक्ततूबर तक करें आवेदन


प्रयागराज । प्राथमिक शिक्षक भर्ती में डीएलएड डिग्री धारकों को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत के बाद डीएलएड प्रशिक्षण को लेकर प्रतियोगियों में उत्साह बढ़ने लगा है। डीएलएड प्रशिक्षण की मांग अचानक बढ़ने लगी है। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय से संबद्धता के लिए राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई से मान्यता प्राप्त निजी डीएलएड कॉलेज 20 अक्तूबर तक आवेदन कर सकते हैं।


परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी की ओर से जारी सूचना के अनुसार जिला स्तरीय समिति स्थलीय निरीक्षण के बाद परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय को 22 नवंबर तक अपनी रिपोर्ट भेजेगी। 12 दिसंबर तक राज्य स्तरीय समिति की बैठक होगी। इसके बाद 10 जनवरी तक शासन स्तर से निर्णय होगा। 31 जनवरी 2024 तक संबद्धता आदेश जारी होगा। 

Monday, October 16, 2023

यूपी की शैक्षणिक सामग्री पूरे देश में मुख्य सामग्री के रूप में जानी जाए, NGO पार्टनर मीट कार्यक्रम में बोले DGS विजय किरण आनंद

यूपी की शैक्षणिक सामग्री पूरे देश में मुख्य सामग्री के रूप में जानी जाए... NGO पार्टनर मीट कार्यक्रम में बोले DGS विजय किरण आनंद


उत्तर प्रदेश में शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए लखनऊ में एक दिवसीय एन.जी.ओ.पार्टनरशिप मीट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 20 संस्थाओं ने भाग लिया और अपने कार्यों की प्रस्तुति की। इसका मुख्य उद्देश्य था शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग और समझौते को मजबूत करके बच्चों को गुणवत्ता से शिक्षा प्रदान करना। इसके साथ ही, शिक्षा विभाग ने बेहतर प्रयासों को साझा किया और संयुक्त प्रयास करने का वादा किया।


लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य में शिक्षा को बढ़ावा देने तथा तकनीकी शिक्षण के माध्यम से बच्चों के बेहतर विकास के लिए लखनऊ में एक दिवसीय एन.जी.ओ.पार्टनरशिप मीट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में 20 संस्थाओं ने सहभागिता कर अपने कार्यों की प्रस्तुति प्रदान की। विभिन्न संस्था से आए साथियों ने अपने कार्यों की प्रदर्शनी लगाकर उनकी उपलब्धियों को साझा किया।


एन.जी.ओ.पार्टनरशिप मीट कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य था शिक्षा के क्षेत्र में साथी संगठनों के बीच सहयोग और समझौते को मजबूत करके बच्चों को गुणवत्ता से शिक्षा प्राप्त कराने के लिए संयुक्त प्रयास करना था। कार्यक्रम में माध्यमिक शिक्षा विभाग के कर्मचारियों ने शिक्षा के क्षेत्र में बेहतर प्रयासों को साझा किया। 


शिक्षा विभाग ने शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रतिबंधों के समाधान के लिए साथी संस्थाओं के साथ सहयोग करने का वादा किया और माध्यमिक शिक्षा विभाग के साथ मिलकर विभिन्न शिक्षा संबंधित मुद्दों पर विचार-विमर्श किया और उनका समाधान निकालने की दिशा निर्देश दिया किया।


कार्यक्रमों में मौजूद सभी संगठनों के कार्यों की सराहना करते हुए महानिदेशक स्कूल शिक्षा, उत्तर प्रदेश विजय किरण आनंद कहा की , "सभी साथी संस्थाओं को कार्यक्रमों के माध्यम से लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए एक साथ मिलकर कार्य करने की आवश्यकता है। ज्यादातर संस्थाओं के पास बेहतर सामग्री मौजूद है, जिससे हम बच्चों को अच्छी शिक्षा देकर निपुण बना सकते है। हम सभी को मिलकर नए तरह के शिक्षण सामग्री बनाने पर बल देना चाहिए। हमारा सपना और संकल्प है उत्तर प्रदेश का शैक्षणिक सामग्री पुरे देश में मुख्य सामग्री के रूप में जाना जाए।"


राज्य परियोजना निदेशक (आई.ए.एस), समग्र शिक्षा (माध्यमिक) रुपेश कुमार ने कहा, "राज्य में संस्था द्वारा किए जा रहें सराहनीय है और संस्था के विभिन्न शिक्षण सहायक सामग्री तथा नई तकनीकों के माध्यम से बच्चों को आधुनिकीकरण की ओर अग्रसर किया जा रहा है। इससे आने वाले समय में हम बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान कर सकेंगे।"


कार्यक्रम में उपस्थित सभी संस्था साथियों को धन्यवाद ज्ञापन करते हुए एजुकेट गर्ल्स संस्था के स्टेट ऑपरेशन्स लीड नीतिन झा ने कहा, 'हम सभी बच्चों के विकास के लिए अथक प्रयासों से बच्चों को स्कूल से जोड़कर नए भारत के निर्माण में अपना सहयोग प्रदान कर सकते है। बच्चों के सपनों को साकार करने के लिए एकजुट जो कर काम कर सकते है।'


इस कार्यक्रम में विष्णु कांत पांडेय (अपर राज्य परियोजना निदेशक), सांत्वना तिवारी (संयुक्त निदेशक), शिवलाल (संयुक्त निदेशक), भगवत पटेल (संयुक्त निदेशक), दीपचंद (उप निदेशक), प्रेमचंद्र यादव (उप शिक्षा निदेशक), प्रतिमा सिंह सहायक निदेशक, एजुकेट गर्ल्स से अलका सिंह, आदित्य एवं टीम के अन्य सदस्यों ने प्रतिभाग किया।

भारत-नेपाल सीमा पर स्कूल होंगे उच्चीकृत, यूपी सरकार राजमार्गों के करीब स्थित विद्यालयों को उच्चीकृत करने की योजना पर कार्य कर रही

भारत-नेपाल सीमा पर स्कूल होंगे उच्चीकृत, यूपी सरकार राजमार्गों के करीब स्थित विद्यालयों को उच्चीकृत करने की योजना पर कार्य कर रही 



लखनऊ : प्रदेश सरकार राजमार्गों के करीब स्थित विद्यालयों को उच्चीकृत करने की योजना पर कार्य कर रही है। इसके तहत बहुउद्देशीय हब के करीब स्थित विद्यालयों के साथ ही भारत-नेपाल सीमा के मुख्य मार्गों पर स्थित विद्यालय को भी उच्चीकृत किया जाएगा।


 हाल ही में बेसिक शिक्ष विभाग की समीक्षा बैठक में ऐसे कुल 16 विद्यालयों को उच्चीकृत करने के प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ने सहमति दी है। इसे मूर्त रूप देने में 8.50 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। सीएम योगी ने 57 जिलों में अत्याधुनिक सुविधायुक्त मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालय की शुरुआत करने के भी निर्देश दिए हैं।


बेसिक शिक्षा विभाग के प्रस्ताव के तहत अंतरराज्यीय मार्ग पर कुल नै विद्यालयों को उच्चीकृत किए जाने की योजना है। इस पर 3.71 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। वहीं, भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सत विद्यालयों पर 4.73 करोड़ रुपये व्यय होंगे। इन विद्यालयों में छात्रों को कंप्यूटर लैब, स्मार्ट क्लास, माड्यूलर साइंस लैब, रोबोटिक्स एवं मशीन लर्निंग लैब, वाईफाई कैंपस जैसी सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इसके अलावा 24 घंटे सुरक्षा व्यवस्था के लिए सुरक्षाकर्मी एवं सफाईकर्मी भी तैनात किया जाएंगे। 


प्रस्ताव के अनुसार, जिन जिलों में विद्यालयों को उच्चीकृत किया जाएगा, वहाँ जिलाधिकारी की अध्यक्षता में योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा, निगरानी का दायित्व भी जिलाधिकारी का ही होगा।

69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिक शिक्षा मंत्री का आवास, पुलिस से तीखी नोकझोंक, पकड़कर ईको गार्डन पहुंचाए गए

69000 शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों ने घेरा बेसिक शिक्षा मंत्री का आवास, पुलिस से तीखी नोकझोंक, पकड़कर ईको गार्डन पहुंचाए गए



लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों ने रविवार को बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह के आवास का घेराव किया। इस दौरान उनकी पुलिस कर्मियों से तीखी नोकझोंक हुई। 


पुलिस ने उन्हें पकड़कर बस से ईको गार्डेन भेज दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि पुलिस ने कहा कि आज छुट्टी का दिन है, आज आपकी कोई बात नहीं सुनी जाएगी।


प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने आरोप लगाया कि भर्ती में 19000 सीटों पर आरक्षण का घोटाला हुआ है। इसके सापेक्ष निकाली गई 6800 की लिस्ट हाईकोर्ट ने रद्द कर दी। 


ऐसे में सरकार अब हाईकोर्ट में आरक्षण के मुद्दे को निस्तारित कराने में कोई दिलचस्पी नहीं ले रही। इससे आरक्षण प्रभावित अभ्यर्थियों को न्याय नहीं मिल पा रहा है। यही वजह है कि मंत्री संदीप सिंह से न्याय मांगने आए थे।

Sunday, October 15, 2023

बैक पेपर आने पर भी मिलेगी अगली कक्षा में छात्रवृत्ति, समाज कल्याण ने सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को भेजे निर्देश

बैक पेपर आने पर भी मिलेगी अगली कक्षा में छात्रवृत्ति, समाज कल्याण ने सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को भेजे निर्देश


लखनऊ। प्रदेश में छात्रों को बैक पेपर आने पर भी अगली कक्षा में प्रवेश मिलने पर छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई होगी। इसके लिए समाज कल्याण विभाग ने सभी जिलास्तरीय अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। 


इसमें कहा गया है कि किसी भी पाठ्यक्रम समूह में छात्र के वार्षिक परीक्षा में असफल रहने की स्थिति में उसकी छात्रवृत्ति का नवीनीकरण नहीं हो सकेगा। संबंधित छात्र को तब तक अपना खर्च स्वयं वहन करना होगा, जब तक वह अगली कक्षा में प्रोन्नत नहीं हो जाता है। 


अगर विवि या संस्था नियमों के तहत छात्र को अगली कक्षा में प्रोन्नत करती है, चाहे वह निचली कक्षा में वास्तविक रूप से पास न हुआ हो और निचली कक्षा में दोबारा परीक्षा देनी हो, तो भी वह उस कक्षा में छात्रवृत्ति पाने का हकदार होगा, जिस कक्षा में उसे प्रोन्नत किया गया है। 

मानव संपदा पोर्टल के जरिए ऐडेड माध्यमिक शिक्षकों के वेतन और एरियर की प्रक्रिया हुई ऑनलाइन

मानव संपदा पोर्टल के जरिए ऐडेड माध्यमिक शिक्षकों के वेतन और एरियर की प्रक्रिया हुई ऑनलाइन


प्रयागराज । प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों व कर्मचारियों के वेतन और एरियर भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी गई है। मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन भुगतान होने पर शिक्षकों को समय से वेतन व एरियर मिलेगा और हर महीने स्कूलों से वेतन बिल जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय तक पहुंचाने की भागदौड़ खत्म हो जाएगी।


अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार ने भुगतान में बदलाव संबंधी आदेश 29 सितंबर को महानिदेशक स्कूल शिक्षा विजय किरन आनंद को क्रियान्वयन के लिए भेजा है। स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों-कर्मियों का वेतन बिल प्रधानाचार्य या प्रबंधक के हस्ताक्षर से हर महीने की 24-25 तारीख तक मानव संपदा पोर्टल के जरिए भेजा जाएगा। डीआईओएस स्तर से 26 से 29 तारीख तक बिल लॉक किया जाएगा।


15 दिन में होगा एरियर का भुगतान

वेतनवृद्धि, प्रोन्नति वेतनमान, चयन वेतनमान, समयमान वेतनमान, पदोन्नति, ग्रेड वेतन, मातृत्व अवकाश, चिकित्सा अवकाश, डीए, निलंबन अवधि का वेतन या एरियर, प्रथम नियुक्ति के बाद शैक्षिक प्रमाणपत्रों के सत्यापन में देरी होने के कारण एरियर का भुगतान 15 दिन में होगा। इस संबंध में प्रबंधतंत्र से प्रस्ताव प्राप्त होने के 15 दिन के अंदर ऑनलाइन भुगतान की कार्रवाई होगी।