DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, June 21, 2026

वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

वित्तीय अनियमितताओं और भ्रष्टाचार मामले में सीतापुर जिले की बेहटा ब्लॉक की बीईओ विभा सचान निलंबित

जांच में असहयोग के आरोप सिद्ध


सीतापुर। बेहटा की बीईओ विभा सचान को शासन ने भ्रष्टाचार के मामले में शनिवार को निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में वह सहायक शिक्षा निदेशक बेसिक कार्यालय लखनऊ से संबद्ध रहेंगी।

प्रयागराज निवासी विकास कुशवाहा ने विभा सचान पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। शासन ने संस्कृत पाठशाला निरीक्षक प्रयागराज को मामले की जांच सौंपी थी। जांच के दौरान बीईओ ने जांचकर्ता को अभिलेख उपलब्ध कराए। इसमें सामान की खरीदारी के बिल व जीएसटी बिल थे। बहराइच से खरीदे गए सामान के हाथ से बने हुए बिल भी दिए गए। इन पर जीएसटी भी नहीं दिया गया था। इससे भ्रष्टाचार की पुष्टि हुई।

इसके बाद निरीक्षक ने भ्रष्टाचार करने वाले विद्यालयों की जांच की। कंपोजिट विद्यालय शाहपुर में 12 मई को पांच शिक्षक, एक अनुदेशक व एक शिक्षामित्र अनुपस्थित मिले। जूनियर हाईस्कूल शेखनापुर 10.55 बजे पर बंद मिला। प्रधानाध्यापक व अध्यापक गैरहाजिर मिले। विद्यालय देखकर ऐसा लगा कि यहां पढ़ाई होती ही नहीं है।

प्राथमिक विद्यालय चंदीभानपुर की मिड डे मील पंजिका का किसी अधिकारी ने अवलोकन तक नहीं किया। इन विद्यालयों के शिक्षक स्कूल से नदारद थे लेकिन वह बीआरसी में बीईओ के आसपास टहलते मिले। इससे शिकायत की पुष्टि हुई। इस संबंध में बीईओ को नोटिस दिया गया। इसके बाद भी बीईओ ने कोई जवाब नहीं दिया। शासन ने इस मामले में बीईओ की संलिप्तता उजागर होने पर निलंबित कर दिया है।

बीएसए डॉ. गोरखनाथ पटेल ने बताया कि बीईओ विभा सचान को निलंबित कर दिया गया है। जल्द ही वहां पर नए बीईओ की तैनाती की जाएगी।


यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध एनसीईआरटी की पुस्तकें कराएगा, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 36 विषयों की पुस्तकें हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी होंगी मुद्रित

यूपी बोर्ड अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध एनसीईआरटी की पुस्तकें कराएगा, हाईस्कूल व इंटरमीडिएट के 36 विषयों की पुस्तकें हिंदी के साथ अंग्रेजी माध्यम में भी होंगी मुद्रित

21 जून 2026
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने शैक्षिक सत्र 2027-28 से विद्यार्थियों को बड़ी सुविधा देने का निर्णय लिया है। अब हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी व परिषद की तरफ से विकसित पुस्तकें हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी माध्यम में भी उपलब्ध कराई जाएंगी।

सचिव भगवती सिंह ने जारी आदेश में कहा है कि हाईस्कूल (कक्षा नौ व 10) के अंग्रेजी, विज्ञान, गणित और सामाजिक विज्ञान व इंटरमीडिएट (कक्षा 11 व 12) के अंग्रेजी, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, व्यवसाय अध्ययन, लेखाशास्त्र, मनोविज्ञान और गृहविज्ञान समेत कुल 36 विषयों की 70 एनसीईआरटी आधारित और 12 परिषद विकसित पुस्तकों को प्रदेश के विद्यालयों में उपलब्ध कराया जाएगा।

अब तक परिषद की पुस्तकें मुख्य रूप से हिंदी माध्यम में ही मुद्रित होती थीं। इस वजह से अंग्रेजी माध्यम के छात्रों को अध्ययन सामग्री के लिए बाजार से महंगी पुस्तकें खरीदनी पड़ती थीं। नई व्यवस्था लागू होने के बाद अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों को भी सस्ती दरों पर पाठ्यपुस्तकें मिलेंगी।

परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि आगामी शैक्षिक सत्र के लिए पुस्तक विक्रेताओं व संस्थाओं को निर्धारित नियमों और शर्तों के तहत डीलरशिप प्रदान की जाएगी, जिससे पुस्तकों की उपलब्धता प्रदेशभर में सुनिश्चित की जा सके।




अब अंग्रेजी में भी मिलेंगी यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी की किताबें, प्रदेश के लगभग ढाई लाख विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ

21 मई 2026
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बड़ी राहत देने की तैयारी की है। लंबे समय बाद यूपी बोर्ड अब अंग्रेजी माध्यम के छात्रों के लिए एनसीईआरटी आधारित पाठ्य पुस्तकों का प्रकाशन अंग्रेजी भाषा में कराने जा रहा है। इस फैसले से प्रदेश के करीब ढाई लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है।


अब तक यूपी बोर्ड में अंग्रेजी माध्यम से अध्ययन करने वाले छात्र-छात्राओं को पढ़ाई के दौरान सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों की उपलब्धता को लेकर होती थी। विद्यालयों में पढ़ाई अंग्रेजी माध्यम से होती थी, लेकिन किताबें प्रायः हिंदी माध्यम में ही उपलब्ध कराई जाती थीं। ऐसे में विद्यार्थियों को बाजार से महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदनी पड़ती थीं।

नई व्यवस्था लागू होने के बाद विद्यार्थियों को कम कीमत पर अंग्रेजी माध्यम की एनसीईआरटी पुस्तकें आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। हर वर्ष 50 से 52 लाख छात्र-छात्राएं पंजीकरण कराते हैं। इनमें एक लाख से अधिक विद्यार्थी अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई करते हैं। परिषद ने इन्हीं छात्रों की जरूरत को देखते हुए शैक्षिक सत्र 2026-27 से अंग्रेजी माध्यम की पुस्तकों के प्रकाशन की तैयारी शुरू की है।

परिषद के अनुसार कक्षा नौ, 10, 11 और 12 के विभिन्न विषयों की एनसीईआरटी पाठ्य पुस्तकें प्रदेश के राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्त विहीन मान्यता प्राप्त विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी। खास बात यह है कि ये पुस्तकें बाजार में उपलब्ध निजी प्रकाशकों की पुस्तकों की तुलना में काफी सस्ती होंगी।

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा। अभी तक सीबीएसई पैटर्न की अंग्रेजी माध्यम की किताबें निजी बाजार में महंगे दामों पर मिलती थीं, जिसके कारण कई छात्र पूरी पुस्तकें खरीदने में सक्षम नहीं हो पाते थे। यूपी बोर्ड की ओर से कम कीमत पर पुस्तकें उपलब्ध कराए जाने से छात्रों का आर्थिक बोझ कम होगा।


अभी तक हिंदी माध्यम की पुस्तकों का ही प्रकाशन कराया जाता था, लेकिन अंग्रेजी माध्यम के विद्यार्थियों की समस्याओं को देखते हुए अब अंग्रेजी भाषा में भी एनसीईआरटी पुस्तकों का प्रकाशन कराया जाएगा। इससे छात्रों को अध्ययन सामग्री प्राप्त करने में काफी सुविधा होगी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा। -भगवती सिंह, सचिव, उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद

Saturday, June 20, 2026

यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित, छह से 20 सितंबर तक किया जा सकेगा विवरणों में संशोधन

यूपी बोर्ड: पांच अगस्त तक कक्षा 9 व 11 में होगा प्रवेश, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने जारी किया पंजीकरण कार्यक्रम

यूपी बोर्ड : नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 सितंबर निर्धारित,  छह से 20 सितंबर तक किया जा सकेगा विवरणों में संशोधन


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए कक्षा नौवीं और 11वीं के अग्रिम पंजीकरण की समय-सारिणी जारी की है। इसके साथ ही वर्ष 2027 की कृषि भाग-एक परीक्षा में शामिल होने वाले 11वीं के छात्रों का भी पंजीकरण किया जाएगा। यह प्रक्रिया परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर ऑनलाइन पूरी की जाएगी।

कक्षा नौवीं और 11वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि पांच अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। हाईस्कूल कंपार्टमेंट या पुनरीक्षण परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्रों के लिए 11वीं में प्रवेश की अंतिम तिथि 20 अगस्त 2026 नियत है। संस्था को 25 अगस्त तक छात्रों का अग्रिम पंजीकरण शुल्क (प्रति छात्र 40 रुपये) कोषागार में जमा करना होगा। जमा शुल्क की जानकारी और छात्रों का शैक्षिक विवरण भी इसी तिथि तक वेबसाइट पर अपलोड करना होगा।

वेबसाइट पर अपलोड किए गए विवरणों की जांच के लिए 26 अगस्त से पांच सितंबर 2026 तक का समय दिया गया है। इस अवधि में कोई नया विवरण अपलोड नहीं किया जा सकेगा। विवरणों में छह सितंबर से 20 सितंबर, 2026 तक संशोधन किया जा सकता है। इस संशोधन अवधि में भी नए छात्रों का विवरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। पंजीकरण शुल्क और प्रक्रिया पंजीकरण शुल्क प्रति छात्र चालीस रुपये निर्धारित है। यह शुल्क चालान के माध्यम से कोषागार में एकमुश्त जमा करना होगा।  संस्था के प्रधानों को जमा शुल्क की सूचना और छात्रों के शैक्षिक विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने होंगे। यह कार्य 25 अगस्त, 2026 की मध्यरात्रि तक पूरा करना अनिवार्य है। 


विवरणों की शुद्धता और अंतिम जमा : छात्रों के शैक्षिक विवरणों जैसे नाम, माता-पिता का नाम, जन्मतिथि, लिंग, विषय और फोटो की जांच महत्वपूर्ण है। कक्षाध्यापक और प्रधानाचार्य को विद्यालय के अभिलेखों के अनुसार इनकी भली-भांति जांच करनी होगी।

किसी भी त्रुटि या विसंगति के लिए कक्षाध्यापक या प्रधानाचार्य ही उत्तरदायी होंगे। पंजीकृत अभ्यर्थियों की फोटोयुक्त नामावली और कोषपत्र की एक प्रति 30 सितंबर, 2026 तक जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में जमा करनी होगी। यह प्रतियां परिषद के क्षेत्रीय कार्यालयों को भेजी जाएंगी।


लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त, शिकायत पर कराई गई जांच के बाद PNP ने उठाए सख्त कदम

लेखपाल व अन्य नौकरी संग किया डीएलएड-बीटीसी प्रमाणपत्र निरस्त, शिकायत पर कराई गई जांच के बाद PNP ने उठाए सख्त कदम


प्रयागराज : प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए आवश्यक डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) / बीटीसी प्रशिक्षण के साथ कहीं और रेगुलर पढ़ाई या कोई नौकरी नहीं की जा सकती, लेकिन छह जिलों में ऐसा किए जाने का मामला सामने आया है। ऐसे अभ्यर्थियों को प्रदान किया गया डीएलएड/बीटीसी प्रमाणपत्र उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) ने शिकायत की जांच कराने के बाद निरस्त कर दिया है।


डीएलएड प्रशिक्षण दो वर्षीय रेगुलर पढ़ाई का डिप्लोमा कार्यक्रम है। इसमें अभ्यर्थियों की निर्धारित प्रशिक्षण संस्थान (जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान यानी डायट/निजी प्रशिक्षण संस्थान) में नियमित उपस्थिति अनिवार्य है। इसके विपरीत कुछ अभ्यर्थियों ने सरकारी कार्यालयों में किसी न किसी पद पर सेवा देते हुए डीएलएड/बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रशिक्षण पूर्ण हो जाने के कई वर्ष बाद कुछ अभ्यर्थियों के विरुद्ध पीएनपी कार्यालय में अलग-अलग शिकायतें की गईं, जिसकी तत्कालीन पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने जांच कराई। इसमें एक प्रकरण एटा जिले का है। 


एटा के अभ्यर्थी ने लेखपाल के पद पर कार्यरत रहते हुए वर्ष 2014 बैच में बीटीसी प्रशिक्षण प्राप्त किया। इसी तरह वर्ष 2013 के बैच में बीटीसी प्रशिक्षण के समय गाजीपुर के एक अभ्यर्थी अनुदेशक के रूप में कार्यरत रहे। इसके अतिरिक्त चंदौली के अभ्यर्थी ने बीटीसी प्रशिक्षण बैच 2015 के दौरान चिकित्सा विभाग में डाटा आपरेटर के पद पर ड्यूटी की, जबकि कौशांबी के अभ्यर्थी ने पंचायत सहायक के रूप में कार्यरत रहने के दौरान डीएलएड प्रशिक्षण बैच-2022 पूरा किया। मेरठ और कासगंज में भी ऐसे मामले सामने आए हैं। शिकायत सही मिलने पर पीएनपी ने इनके प्रमाणपत्र निरस्त कर सूचना संबंधित प्रशिक्षण संस्थानों को भेजी है।

Friday, June 19, 2026

राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ व हरित विद्यालयों की रैंकिंग जारी, यूपी के 11 स्कूलों में छह परिषदीय दो केजीबीवी, दो अन्य श्रेणी और एक निजी विद्यालय को मिला स्थान, देखें नाम

स्वच्छ व हरित विद्यालयों की राष्ट्रीय सूची में छाए यूपी के परिषदीय विद्यालय,  बेसिक शिक्षा विभाग के 9 स्कूलों ने बनाई पहचान

19 जून 2026
लखनऊ। उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के लिए गौरव का विषय है कि विभाग द्वारा संचालित नौ परिषदीय विद्यालयों ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराई है। विभिन्न शैक्षिक मानकों, नवाचारों, सामुदायिक सहभागिता, विद्यालयी वातावरण और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के आधार पर तैयार राष्ट्रीय सूची में इन विद्यालयों को स्थान मिला है। इस उपलब्धि को प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में हो रहे सकारात्मक बदलाव और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के प्रयासों का परिणाम माना जा रहा है। 

राष्ट्रीय सूची में शामिल विद्यालयों में जनपद संभल का प्राथमिक विद्यालय इटायला माफी (रैंक 12), पीलीभीत का प्राथमिक विद्यालय चौखापुर (रैंक 25), चित्रकूट का पीएमश्री कन्या गढ़छपा (रैंक 27), बरेली का प्राथमिक विद्यालय सहजनी (रैंक 29), रायबरेली का प्राथमिक विद्यालय दौलरा, महाराजगंज (रैंक 51), बदायूं का कम्पोजिट विद्यालय आमगांव (रैंक 36), सहारनपुर का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबदौला (रैंक 55), श्रावस्ती की केजीबीवी हरिहरपुर रानी (रैंक 9) तथा जालौन की केजीबीवी कोंच (रैंक 14) शामिल हैं।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार यह सफलता निपुण भारत मिशन, पीएमश्री विद्यालयों की पहल, बेहतर अधिगम परिणाम, डिजिटल नवाचार तथा विद्यालयों में विकसित सकारात्मक शैक्षिक वातावरण का प्रतिफल है। प्रदेश सरकार द्वारा विद्यालयों में आधारभूत सुविधाओं, स्मार्ट कक्षाओं, पुस्तकालयों और शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं, जिनका असर अब राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई देने लगा है। 

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने इसे परिषदीय विद्यालयों, शिक्षकों, विद्यार्थियों और अभिभावकों की सामूहिक सफलता बताया है। माना जा रहा है कि इन विद्यालयों की उपलब्धियां अन्य विद्यालयों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनेंगी और प्रदेश में गुणवत्तापूर्ण बुनियादी शिक्षा को नई दिशा देंगी।



राष्ट्रीय स्तर पर स्वच्छ व हरित विद्यालयों की रैंकिंग जारी, यूपी के 11 स्कूलों में छह परिषदीय दो केजीबीवी, दो अन्य श्रेणी और एक निजी विद्यालय को मिला स्थान, देखें नाम 

17 जून 2026
लखनऊ। केंद्रीय स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा संचालित स्वच्छ व हरित विद्यालय रेटिंग (एसएचवीआर) 2025-26 में यूपी के 11 विद्यालयों को जगह मिली है। इनमें 6 परिषदीय विद्यालय और 2 कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त रैंकिंग में दो अन्य श्रेणी के विद्यालय और एक निजी विद्यालय को भी जगह मिली है।


प्रदेश के बेसिक विद्यालयों ने स्वच्छता, हरित परिसर और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर यह उपलब्धि पाई है। साथ ही देश भर के निजी स्कूलों को भी कड़ी टक्कर दी है। प्रतियोगिता के तहत राज्य स्तर पर चयनित शीर्ष 20 विद्यालयों को राष्ट्रीय स्तर के मूल्यांकन के लिए भेजा गया था। इनमें से 11 विद्यालयों ने राष्ट्रीय सूची में स्थान बनाया।

प्रतियोगिता में देशभर से कुल 191 विद्यालयों का चयन किया गया है। बेसिक शिक्षा विभाग ने राज्य स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले 20 विद्यालयों को जल्द सम्मानित करने का निर्णय लिया है। ताकि अन्य विद्यालय भी स्वच्छता और हरित परिसर के क्षेत्र में प्रेरणा ले सकें।

अपर निदेशक बेसिक श्याम किशोर तिवारी ने कहा कि यह सफलता प्रदेश के शिक्षकों, विद्यार्थियों, विद्यालय प्रबंधन समितियों के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। विद्यालयों में स्वच्छता, हरियाली और आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने के लिए लगातार काम किया जा रहा है।


राष्ट्रीय रैंकिंग में इन विद्यालयों को मिली जगह

संभल का प्राथमिक विद्यालय इटालिया माफी (रैंक 12), पीलीभीत का प्राथमिक विद्यालय चोखापुर (रैंक 25), चित्रकूट का पीएमश्री कन्या गंछापा (रैंक 27), बरेली का प्राथमिक विद्यालय सहजनी (रैंक 29), बदायूं का कंपोजिट विद्यालय आमगांव (रैंक 36) और सहारनपुर का उच्च प्राथमिक विद्यालय कुतुबपुर लबदौला (रैंक 55) शामिल है। वहीं, श्रावस्ती का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय हरिहरपुर रानी (रैंक 9) व जालौन का कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय कोंच (रैंक 14) को भी जगह मिली है। रैंकिंग में प्रयागराज का एयरफोर्स स्कूल मनौरी (रैंक 31) और वाराणसी का जवाहर नवोदय विद्यालय, गजोखर (रैंक 46) भी है। वहीं, निजी विद्यालय श्रेणी में मेरठ के दयावती मोदी अकादमी-1 (रैंक 4) ने स्थान पाया है।


परिषदीय विद्यालयों में हो रहा संसाधनों का प्रभावी इस्तेमाल :

एसएचवीआर रेटिंग में विद्यालयों का मूल्यांकन स्वच्छता, जल संरक्षण, ऊर्जा दक्षता, अपशिष्ट प्रबंधन, हरित परिसर और सामुदायिक सहभागिता जैसे मानकों पर किया गया है। इनमें परिषदीय विद्यालयों ने संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल और जनभागीदारी के बल पर उत्कृष्ट परिणाम हासिल किया है। इन विद्यालयों में स्वच्छता अभियान, पौधरोपण, जल संरक्षण और कायाकल्प जैसी पहल का सकारात्मक प्रभाव राष्ट्रीय स्तर पर दिखा है। इससे विभाग भी उत्साहित है।

केवल शिक्षकों के लिए 'विशेष टीईटी' सरकार के लिए चुनौती, सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से मांगी है सूचना

केवल शिक्षकों के लिए 'विशेष टीईटी' सरकार के लिए चुनौती, बेरोजगारों या शिक्षामित्रों को बाहर रखने पर विवाद होना तय, गाइडलाइन बनी बाधा

पहले उर्दू की विशेष टीईटी को एनसीटीई ने गलत माना था

सरकार ने विशेष टीईटी के लिए निदेशक से मांगी है सूचना


प्रयागराज । चुनावी साल में सेवारत परिषदीय शिक्षकों को तोहफा देते हुए प्रदेश सरकार विशेष टीईटी कराने पर विचार कर रही है लेकिन इसे कराना चुनौतीपूर्ण साबित होगा। सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर 2025 और उसके बाद के फैसलों के बाद सरकार यह कदम उठाने जा रही है ताकि हजारों शिक्षकों की सेवा बनी रहे। सर्वोच्च न्यायालय ने दो टूक कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व से कार्यरत शिक्षकों को भी टीईटी करना अनिवार्य है।


इस बीच महत्वपूर्ण कानूनी सवाल है कि क्या आरटीई के तहत टीईटी में बैठने के पात्र योग्य अभ्यर्थियों को विशेष टीईटी के आवेदन से वंचित किया जा सकता है। राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) ने अपने दिशा-निर्देशों में स्पष्ट किया है कि टीईटी सभी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता रखने वाले पात्र अभ्यर्थियों के लिए खुला होना चाहिए। परीक्षा का आयोजन केंद्र और राज्य सरकारें करेंगी, पर एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का पालन अनिवार्य है। इसमें पारदर्शिता, सुरक्षा और समान अवसर पर विशेष बल दिया गया।

सरकार यदि विशेष टीईटी से शिक्षामित्र और अन्य पात्र अभ्यर्थियों (नए युवा उम्मीदवारों) को पूरी तरह बाहर रखती है तो यह आरटीई एक्ट 2009 का उल्लंघन होगा क्योंकि एनसीटीई टीईटी को सभी योग्य व्यक्तियों के लिए न्यूनतम बेंचमार्क मानती हैं, न कि केवल इन-सर्विस शिक्षकों तक सीमित है। उधर शिक्षामित्र भी अपनी लंबी सेवा का हवाला देते हुए लंबे समय से विभागीय टीईटी की मांग कर रहे हैं।

वर्ष 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार ने हिंदी, उर्दू और संस्कृत की भाषा टीईटी कराई थी जिसमें एनसीटीई के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए निबंधात्मक प्रश्न तक पूछे गए थे। उर्दू उत्तीर्ण लगभग छह हजार बेरोजगारों को नौकरी भी दे दी थी। उक्त भाषा टीईटी को नूतन ठाकुर ने जनहित याचिका में चुनौती दी थी। जिसमें उत्तर प्रदेश सरकार ने कहा था कि वह भविष्य में एनसीटीई के दिशा-निर्देशों के अनुसार ही टीईटी आयोजित करेगी, जिस पर उच्च न्यायालय ने नियुक्त हो चुके शिक्षक शिक्षिकाओं को राहत प्रदान कर दी थी।

इस तरह से भाषा टीईटी को निरस्त तो नहीं किया गया लेकिन सरकार को उच्च न्यायालय ने ऐसी गलती न दोहराने की हिदायत दी थी। ऐसे में विशेष टीईटी कराना सरकार के लिए अग्निपरीक्षा साबित होगी।

1701 माध्यमिक विद्यालयों में नए सत्र से शुरू होगी व्यावसायिक शिक्षा, एजेंसियों के माध्यम से दिया जाएगा प्रशिक्षण

1701 माध्यमिक विद्यालयों में नए सत्र से शुरू होगी व्यावसायिक शिक्षा, एजेंसियों के माध्यम से दिया जाएगा प्रशिक्षण

पर्यटन, रिटेल, आईटी, कृषि जैसे क्षेत्रों की दी जाएगी जानकारी

18 जून 2026
लखनऊ। प्रदेश के 1701 माध्यमिक विद्यालयों में नए सत्र 2026-27 से व्यावसायिक शिक्षा शुरू होगी। इसका उद्देश्य युवाओं को पढ़ाई के साथ रोजगार व स्वरोजगार के लिए तैयार करना है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत कक्षा नौ से छात्रों को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा।

इसमें 731 राजकीय और 970 अशासकीय सहायता प्राप्त विद्यालय शामिल हैं। हर विद्यालय में दो-दो ट्रेड की पढ़ाई और प्रशिक्षण अनिवार्य होगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने विद्यालयों को ट्रेड आवंटित कर दिए हैं। व्यावसायिक प्रशिक्षक और व्यावसायिक समन्वयक की तैनाती प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

 महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने कक्षा नौ में कम से कम 25 छात्रों का प्रवेश सुनिश्चित करने को कहा है। विद्यालयों की समय सारिणी में व्यावसायिक विषयों के व्याख्यान निर्धारित होंगे। पंडित सुंदर लाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान, भोपाल प्रशिक्षक उपलब्ध कराएगा। कुल 3402 प्रशिक्षक तैनात होंगे, जिन्हें 15 हजार रुपये प्रति माह अधिकतम दस महीने मिलेंगे। व्यावसायिक समन्वयक को 20 हजार रुपये प्रति माह 11 महीने तक दिए जाएंगे।

एक वोकेशनल ट्रेनर अधिकतम एक विद्यालय में व्याख्यान देगा। एक ट्रेनर को एक से अधिक विद्यालय में एक से अधिक ट्रेड के लिए अनुबंधित नहीं किया गया है।


इन क्षेत्रों की पढ़ाई व प्रशिक्षण
योजना के तहत पर्यटन व हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, आईटी, बीएफएसआई, मैनेजमेंट एंड इंटरप्रेन्योरशिप व प्रोफेशनल स्किल, एग्रीकल्चर, ब्यूटी एंड वेलनेस आदि प्रमुख क्षेत्र हैं। इनमें फूड एंड बेवरेज सर्विस असिस्टेंट, रिटेल स्टोर ऑपरेशन असिस्टेंट, डोमेस्टिक डाटा एंट्री ऑपरेटर, माइक्रोफाइनेंस एक्जीक्यूटिव, ऑफिस असिस्टेंट, सोलैनेशियस क्रॉप कल्टीवेटर, असिस्टेंट ब्यूटी थेरेपिस्ट आदि जॉब रोल शामिल हैं।

उद्योगों का भ्रमण भी कराएंगे 
चयनित व्यावसायिक प्रशिक्षण भागीदार को उद्योगों के भ्रमण और गेस्ट लेक्चर के लिए अलग से बजट मिलेगा। उद्योगों के भ्रमण से युवाओं को वास्तविक व व्यावहारिक जानकारी मिल सकेगी। छात्रों की अलग से उपस्थिति पंजिका बनेगी, जिसकी जांच प्रधानाचार्य करेंगे। जिला विद्यालय निरीक्षक भी ट्रेडों के संचालन और पढ़ाई का मासिक निरीक्षण करेंगे।




यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी 

23 मई 2026
लखनऊ। यूपी के 1701 माध्यमिक स्कूलों में दूसरे चरण में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू की जाएगी। इसमें 971 अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक और बाकी राजकीय माध्यमिक स्कूल होंगे। यहां कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थियों को पढ़ाई कराई जाएगी। 17 विभिन्न ट्रेड में व्यावसायिक शिक्षा दी जाएगी।

यूपी बोर्ड कक्षा 9 से कक्षा 12 तक के विद्यार्थी इन 17 विभिन्न ट्रेड में से कोई भी मनपसंद ट्रेड वैकल्पिक विषय के रूप में चुनेंगे और व्यावसायिक प्रशिक्षकों की मदद से इन्हें ट्रेनिंग व पढ़ाई की सुविधा दी जाएगी। जुलाई से इन स्कूलों में व्यावसायिक शिक्षा की पढ़ाई शुरू होगी। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ रोजगार व स्वरोजगार की शिक्षा भी मिल सकेगी।

ये पढ़ाया जाएगा
विद्यार्थियों को माइक्रोफाइनेंस एग्जीक्यूटिव, असिस्टेंट ब्यूटी वेलनेस कंसल्टेंट, ब्यूटी थेरेपिस्ट, कंज्यूमर एनर्जी मीटर टेक्नीशियन टेक्नीशियन, जैम, जैली व केचअप प्रोसेसिंग टेक्नीशियन, फोर व्हीलर सर्विस, सिलाई मशीन ऑपरेटर, डेयरी वर्कर, सोलैनेसी क्रॉप कल्टीवेटर, डोमेस्टिक डाटा इंट्री ऑपरेटर, फिजिकल एजुकेशन असिस्टेंट।



माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ाई के साथ मिलेगी हुनर की शिक्षा, विद्यार्थियों का होगा कौशल विकास

जून के प्रथम सप्ताह से तैयारी

 14 मई 2026
लखनऊराजधानी समेत प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब पढ़ाई के साथ विद्यार्थियों को हुनर का ज्ञान भी दिया जाएगा। उत्तर प्रदेश कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग के सहयोग से विद्यालयों में कौशल विकास की विशेष पाठशाला शुरू करने की तैयारी की जा रही है। जून के प्रथम सप्ताह से इसकी शुरुआत होने की संभावना है। इसके तहत विद्यार्थियों को पारंपरिक शिक्षा के साथ ही निश्शुल्क तकनीकी और रोजगारपरक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा, जिससे वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें।


कौशल विकास मिशन की ओर से माध्यमिक शिक्षा विभाग को भेजे गए प्रस्ताव में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने और विद्यालय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित करने का अनुरोध किया गया है। योजना के अनुसार छात्र-छात्राओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विभिन्न ट्रेडों में प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। इससे वह पढ़ाई के साथ रोजगार से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी भी हासिल कर सकेंगे। तीन महीने से लेकर एक साल तक के कोर्स की पढ़ाई होंगी। हाईस्कूल और इंटर के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। भारतीयों की इच्छा के एन यूरोप प्रवेश दिया जाएगा। हर ट्रेड में 30 विद्यार्थियों का ही प्रवेश होगा।

इन ट्रेडों में मिलेगा प्रशिक्षण :
इलेक्ट्रिशियन, फिटर, वेल्डर, प्लंबर, कंप्यूटर आपरेटर एवं प्रोग्रामिंग असिस्टेंट, डाटा एंट्री आपरेटर, फैशन डिजाइनिंग, ब्यूटी एंड वेलनेस, सिलाई एवं कढ़ाई,


मोबाइल रिपेयरिंग, आटोमोबाइल सर्विस टेक्नीशियन, रेफ्रिजरेशन एवं एयर कंडीशनिंग, हेल्थकेयर असिस्टेंट, होटल मैनेजमेंट एवं फूड प्रोडक्शन, हाउसकीपिंग, रिटेल सेल्स एसोसिएट, सीसीटीवी एवं सिक्योरिटी सिस्टम इंस्टालेशन, ग्राफिक डिजाइनिंग, वेब डिजाइनिंग, डिजिटल मार्केटिंग, टैली एवं अकाउंटिंग, कृषि आधारित प्रशिक्षण, डेयरी एवं पशुपालन, ड्रोन टेक्नोलाजी एवं संचालन, सोलर पैनल टेक्नीशियन, ई-रिक्शा एवं ईवी रिपेयरिंग, फर्नीचर एवं बढ़ई का कार्य, पेंटिंग एवं पालिशिंग, फायर एंड सेफ्टी मैनेजमेंट।


विद्यालय स्तर पर कौशल विकास की शुरुआत होने से विद्यार्थी कम उम्र में ही रोजगारपरक शिक्षा से जुड़ सकेंगे। इस मिशन का लक्ष्य युवाओं को गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाना है। माध्यमिक शिक्षा के अलावा अल्प संख्यक कल्याण विभाग, महिला कल्याण व नगर विकास समेत 13 विभागों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। –पुलकित खरे, मिशन निदेशक


आइसीटी लैब संचालन प्रशिक्षण 16 को
राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में स्थापित आइसीटी लैब उपकरणों के सुचारु संचालन को लेकर 16 मई निशागंज के राजकीय इंटर कालेज एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। यह प्रशिक्षण मंडल के छह जनपदों के 129 प्रधानाचार्यों को दिया जाएगा। मंडलीय विज्ञान प्रगति अधिकारी डा. दिनेश कुमार ने बताया कि प्रशिक्षण आईसीटी लैब सेवा द्वारा दो सत्रों में आयोजित होगा। सुबह 11 बजे से से दोपहर एक बजे व द्वितीय सत्र तीन से शाम पांच बजे तक चलेगा।

माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित परीक्षा वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य हेतु परीक्षकों इत्यादि के पारिश्रमिक देयकों एवं यात्रा व्यय का भुगतान हेतु बजट आवंटन किये जाने के सम्बन्ध में।

यूपी बोर्ड : 10वीं और 12वीं परीक्षा में कक्ष निरीक्षकों के पारिश्रमिक और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए 87 करोड़ रुपये का बजट जारी

प्रयागराज। यूपी बोर्ड ने हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 87 करोड़ रुपये का बजट जारी किया है। यह धनराशि कक्ष निरीक्षकों के पारिश्रमिक और उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए आवंटित की गई है। 

बोर्ड के वित्त व लेखाधिकारी विक्रम सिंह की ओर से जारी आदेश के अनुसार परीक्षा केंद्रों व संकलन केंद्रों पर नियुक्त केंद्र व्यवस्थापकों, अतिरिक्त केंद्र व्यवस्थापकों, कक्ष निरीक्षकों, लिपिकों, बंडल वाहकों, अग्रसारण अधिकारियों और अन्य कर्मचारियों के पारिश्रमिक भुगतान के लिए 27.86 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। 

उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य के लिए परीक्षकों, मुख्य नियंत्रक, उप नियंत्रक व अन्य कर्मियों के पारिश्रमिक और यात्रा व्यय के लिए 58.88 करोड रुपये का बजट जारी किया है। इसमें करीब 2.33 करोड़ रुपये यात्रा व्यय और 56.54 करोड़ रुपये की धनराशि सभी जिलों के जिला विद्यालय निरीक्षकों को केंद्रवार भुगतान के लिए भेजी गई है। बोर्ड ने निर्देश दिए है कि आवंटित धनराशि का उपयोग केवल निर्धारित मदों में ही किया जाए। 


माध्यमिक शिक्षा परिषद्, उत्तर प्रदेश द्वारा आयोजित परीक्षा वर्ष 2026 की हाईस्कूल एवं इण्टरमीडिएट की परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन कार्य हेतु परीक्षकों इत्यादि के पारिश्रमिक देयकों एवं यात्रा व्यय का भुगतान हेतु बजट आवंटन किये जाने के सम्बन्ध में।


यूपी बोर्ड की वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए संस्थागत परीक्षार्थियों के आवेदन, शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी

यूपी बोर्ड की वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए संस्थागत परीक्षार्थियों के आवेदन, शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी


प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश (UPMSP) ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए संस्थागत परीक्षार्थियों के आवेदन, शुल्क जमा करने तथा ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की विस्तृत समय-सारिणी जारी कर दी है। परिषद सचिव द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्यों को निर्धारित तिथियों के भीतर छात्रों का पंजीकरण एवं परीक्षा संबंधी कार्यवाही पूर्ण करनी होगी।

विज्ञप्ति के अनुसार कक्षा 10 एवं 12 में अध्ययनरत छात्रों के प्रवेश एवं परीक्षा शुल्क प्राप्त करने की अंतिम तिथि 5 अगस्त 2026 निर्धारित की गई है। इसके बाद विद्यालयों को छात्रों से प्राप्त शुल्क को 10 अगस्त 2026 तक एकमुश्त चालान के माध्यम से कोषागार में जमा करना होगा।

विद्यालयों द्वारा छात्रों के शैक्षिक विवरण एवं परीक्षा शुल्क संबंधी सूचना परिषद की वेबसाइट upmsp.edu.in पर 16 अगस्त 2026 तक ऑनलाइन अपलोड की जाएगी। विलंब की स्थिति में प्रति छात्र 100 रुपये विलंब शुल्क के साथ भी आवेदन स्वीकार किए जाएंगे, जिसकी अंतिम तिथि 16 अगस्त 2026 निर्धारित है।

परिषद ने 21 अगस्त से 31 अगस्त 2026 तक छात्रों के विवरणों की जांच (चेकलिस्ट सत्यापन) की अवधि निर्धारित की है। यदि किसी छात्र के नाम, माता-पिता के नाम, जन्मतिथि, विषय या अन्य विवरण में त्रुटि पाई जाती है तो उसका संशोधन 1 सितंबर से 10 सितंबर 2026 तक किया जा सकेगा।

विज्ञप्ति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि संस्थागत छात्रों की अंतिम फोटोयुक्त नामावली एवं संबंधित अभिलेखों को जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में 30 सितंबर 2026 तक जमा करना अनिवार्य होगा।

🔴 प्रमुख तिथियां एक नजर में

◾प्रवेश एवं परीक्षा शुल्क प्राप्त करने की अंतिम तिथि – 5 अगस्त 2026

◾शुल्क कोषागार में जमा करने की अंतिम तिथि – 10 अगस्त 2026

◾ऑनलाइन विवरण अपलोड करने की अंतिम तिथि – 16 अगस्त 2026

◾चेकलिस्ट सत्यापन अवधि – 21 से 31 अगस्त 2026

◾त्रुटि संशोधन अवधि – 1 से 10 सितंबर 2026

◾फोटोयुक्त नामावली जमा करने की अंतिम तिथि – 30 सितंबर 2026


परीक्षा शुल्क भी घोषित

परिषद ने वर्ष 2027 की परीक्षाओं के लिए हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के संस्थागत तथा व्यक्तिगत परीक्षार्थियों का परीक्षा शुल्क भी निर्धारित कर दिया है। संस्थागत हाईस्कूल परीक्षार्थियों के लिए शुल्क 500 रुपये, जबकि संस्थागत इंटरमीडिएट परीक्षार्थियों के लिए 600 रुपये निर्धारित किया गया है। व्यक्तिगत परीक्षार्थियों के लिए शुल्क अलग-अलग श्रेणियों के अनुसार निर्धारित रहेगा।

परिषद ने सभी प्रधानाचार्यों को निर्देश दिए हैं कि छात्रों के शैक्षिक विवरण पूरी तरह सत्यापित कर ही वेबसाइट पर अपलोड किए जाएं, क्योंकि किसी भी त्रुटि के लिए संबंधित विद्यालय प्रशासन उत्तरदायी होगा। इससे वर्ष 2027 की बोर्ड परीक्षाओं की तैयारियों को समयबद्ध एवं पारदर्शी बनाने में सहायता मिलेगी।


Thursday, June 18, 2026

यूपी बोर्ड का बड़ा एक्शन – 465 गैर-सरकारी स्कूलों की मान्यता पूरी तरह और हमेशा के लिए समाप्त, एडमिशन पर भी लगाई रोक, जानिए क्यों?

शैक्षणिक गतिविधियों में निष्क्रिय 465 विद्यालयों की मान्यता रद्द, माध्यमिक शिक्षा परिषद ने स्ववित्तपोषित स्कूलों की मान्यता पर की कार्रवाई

लगातार दो वर्ष तक कोई भी छात्र परीक्षा में सम्मिलित न होने पर मान्यता समाप्ति के सम्बन्ध में

यूपी बोर्ड का बड़ा एक्शन – 465 गैर-सरकारी स्कूलों की मान्यता पूरी तरह और हमेशा के लिए समाप्त, एडमिशन पर भी लगाई रोक, जानिए क्यों? 


प्रयागराज । उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UP Board) ने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और कड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। बोर्ड ने राज्य भर के 465 गैर-सरकारी स्कूलों की मान्यता को पूरी तरह और हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है। यह कार्रवाई उन स्कूलों के खिलाफ हुई है जो केवल कागजों पर या नाममात्र के लिए चल रहे थे, लेकिन धरातल पर वहां न तो नियमित कक्षाएं लग रही थीं और न ही कोई छात्र पढ़ाई कर रहा था। बोर्ड के इस कड़े कदम के बाद पूरे उत्तर प्रदेश के शिक्षा जगत और स्कूल संचालकों के बीच हड़कंप मच गया है।

क्या है मान्यता रद्द होने का असली कारण?

यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि यह सख्त फैसला 'इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम-1921' के नियमों और विनियमों के तहत लिया गया है। इस अधिनियम के नियम 11(d) में यह साफ प्रावधान है कि यदि हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर के किसी भी मान्यता प्राप्त विद्यालय में लगातार दो वर्षों तक एक भी छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं होता है, या वहां कक्षाएं संचालित नहीं की जाती हैं, तो उस स्कूल की मान्यता 'स्वतः समाप्त' समझी जाएगी।

समीक्षा के दौरान पाया गया कि इन 465 स्कूलों में पिछले दो शैक्षणिक सत्रों—सत्र 2024-25 और सत्र 2025-26 के दौरान नामांकन पूरी तरह शून्य रहा। इन दो सालों में इन स्कूलों का एक भी छात्र यूपी बोर्ड की 10वीं या 12वीं की मुख्य परीक्षा में शामिल होने नहीं पहुंचा। इसके बाद बोर्ड ने यह निष्कर्ष निकाला कि ये स्कूल पूरी तरह से बंद हैं और इन्हें मान्यता जारी रखने का कोई हक नहीं है।

प्रभावित विद्यालयों की संख्या

आगरा के 12, फिरोजाबाद के नौ, शिकोहाबाद का एक, मैनपुरी के 10, एटा के 18, मथुरा के 11, अलीगढ़ के 14, हाथरस के पांच, कासगंज के तीन, बुलंदशहर के चार, गाजियाबाद के छह, गौतमबुद्धनगर के दो, मेरठ के पांच, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, रामपुर, लखीमपुर खीरी, कानपुर देहात, झांसी, ललितपुर जिले के एक- एक स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा मुरादाबाद के नौ, अमरोहा के छह, बिजनौर के तीन, संभल के पांच, बरेली के दो, बदायूं के पांच, शाहजहांपुर के तीन, सीतापुर के दो, हरदोई के 14, लखनऊ के 15, उन्नाव के दो, रायबरेली के पांच, कानपुर नगर के 19, फर्रुखाबाद के तीन, इटावा के पांच, कन्नौज के नौ, औरैया के तीन, जालौन के तीन, चित्रकूट के दो, प्रतापगढ़ के 10, फतेहपुर के 13, कौशाम्बी के 11, सुल्तानपुर के आठ, अयोध्या के आठ, बाराबंकी के दो, अंबेडकरनगर के नौ, अमेठी के दो, बहराइच, हमीरपुर, बांदा, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, चंदौली और भदोही जिले के एक- एक स्कूल शामिल हैं। इसके अलावा बस्ती के पांच, संतकबीर नगर के 12, गोरखपुर के आठ, देवरिया के पांच, कुशीनगर के तीन, आजमगढ़ के 16, मऊ के 15, बलिया के 10, जौनपुर के 10, गाजीपुर के 47, वाराणसी के चार, मिर्जापुर के छह और सोनभद्र के तीन समेत कुल 265 विद्यालय शामिल हैं।

मान्यता समाप्ति के नियम और प्रावधान

इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 के तहत गठित परिषद विनियमों के अध्याय सात में संस्थाओं को मान्यता देने संबंधी प्रावधान हैं। इसी के विनियम 11 (ढ़) के अनुसार, यदि कोई हाईस्कूल या इंटरमीडिएट नवीन (वन टाइम) या इंटरमीडिएट नवीन वर्ग की मान्यता प्राप्त विद्यालय से लगातार दो शैक्षिक सत्रों तक कोई छात्र परीक्षा में शामिल नहीं होता है या कक्षाएं संचालित नहीं की जाती हैं, तो उस विद्यालय की प्रदत्त मान्यता स्वतः समाप्त समझी जाएगी।


Wednesday, June 17, 2026

प्रयागराज : NPS के अंतर्गत नियुक्ति तिथि से नियमित कटौती प्रारंभ होने तक के लंबित अंशदान के संबंध में निर्देश

प्रयागराज : NPS के अंतर्गत नियुक्ति तिथि से नियमित कटौती प्रारंभ होने तक के लंबित अंशदान के संबंध में निर्देश



Tuesday, June 16, 2026

फर्जीवाड़ा करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर गिरेगी गाज, उच्च शिक्षा विभाग की गति अपेक्षाकृत धीमी, नए सत्र में 11 कमेटियों का किया गया गठन

फर्जीवाड़ा करने वाले निजी विश्वविद्यालयों पर गिरेगी गाज, उच्च शिक्षा विभाग की गति अपेक्षाकृत धीमी, नए सत्र में 11 कमेटियों का किया गया गठन

दो साल में दो निजी विवि पर हुई कार्रवाई, 

15 जून 2026
लखनऊ। प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में छात्रों को बेहतर सुविधाएं देने व आर्थिक शोषण आदि से बचाने के लिए यहां की सुविधाओं की जांच की कवायद शुरू की गई है। इसके तहत अब तक दो विवि में कमियां मिलने पर कार्रवाई की गई है। वर्तमान सत्र में मंडलायुक्त व डीएम की अध्यक्षता वाली 11 कमेटियों को जिलों में जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश उच्च शिक्षा परिषद ने दिया है।

प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों की संख्या बढ़कर 53 हो गई है। पिछले साल जेएस विश्वविद्यालय शिकोहाबाद में निर्धारित सीट से ज्यादा प्रवेश लेने और फर्जी डिग्री मामले में कड़ी कार्रवाई की गई है। इस विश्वविद्यालय की मान्यता समाप्त की गई है। मामला अभी कोर्ट में चल रहा है। मोनाड यूनिवर्सिटी, हापुड़ में फर्जी डिग्री-मार्क्सशीट मामले में प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की है। वहीं उच्च शिक्षा विभाग की ओर से भी इसकी मान्यता रद्द करने की कार्रवाई की जा रही है। बाराबंकी में एक निजी विश्वविद्यालय में हुए बवाल के बाद प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों की भवन, भूमि, सुविधा, गुणवत्ता, डिग्री आदि से जुड़ी जांच कराने का निर्णय लिया गया।

उच्च शिक्षा विभाग ने पिछले महीने प्रदेश में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में 11 समितियों का गठन किया है। इनको संबंधित मंडल के निजी विश्वविद्यालयों की जांच करने का दायित्व दिया गया है। इसमें संबंधित जिले के डीएम द्वारा नामित उप जिलाधिकारी, राज्य विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी व कुलसचिव, संबंधित मंडल के क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी आदि शामिल होंगे। उच्च शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव शकील अहमद सिद्दीकी ने इन कमेटियों को जल्द रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। 


यह प्रमुख चीजें जांचनी होंगी : जमीन, बिल्डिंग, साइट प्लान रिकॉर्ड के साथ, स्पांसर बॉडी, संस्थापक व पैटर्न, चांसलर, प्रो. चांसलर, वाइस चांसलर, प्रो. वीसी, रजिस्ट्रार, वित्त अधिकारी, स्टेच्यूटरी बॉडी, इसकी बैठकें, ऑडिट फाइनेंशियल स्टेटमेंट, बैंक एकाउंट स्टेटमेंट, एफडी, खरीद, एसेट स्टॉक वेरीफिकेशन, लाइब्रेरी में हुई खरीद, लाइब्रेरी बजट, यूनिवर्सिटी कैलेंडर परीक्षा व पढ़ाई, एसएसएस-एनसीसी गतिविधि, वार्षिक रिपोर्ट, यूजीसी, एआईसीटीई, एनसीटीई, बीसीआई आदि संस्थाओं के एप्रूवल, एडमिशन पॉलिसी, एक्रीडिटेशन, रैंकिंग, स्टूडेंट ग्रिवांस आदि से जुड़ी चीजें जांचनी हैं।




निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर से डिग्री तक जांच दायरे में, उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित 11 समितियां करेंगी जांच

निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्यक्रमों और नकल रोकने के उपायों की होगी पडताल

खेल मैदान, खेल सुविधाएं, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन होगा


7 जून 2026
 लखनऊप्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज की व्यापक जांच होगी। इसके लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समितियां विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करेंगी। जांच उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के साझा (कामन) शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कर रहे हैं या नहीं। सेमेस्टर और शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और समाप्ति, परीक्षा कार्यक्रम और अवकाश की तिथियों का मिलान किया जाएगा। यह भी जांचा जाएगा कि शैक्षणिक कैलेंडर छात्रों और कर्मचारियों को समय पर उपलब्ध कराया गया था या नहीं।

परिषद की ओर से गठित समितियां निजी विश्वविद्यालयों की वार्षिक और गतिविधि रिपोर्ट की भी समीक्षा करेंगी। वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाएगी। एनएसएस और एनसीसी इकाइयों की स्थापना, छात्र नामांकन और उनके कार्यक्रमों की भी जांच होगी। निरीक्षण के दौरान खेल मैदान, खेल सुविधाएं, आडिटोरियम, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह भी जाना जाएगा कि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और उनकी गतिविधियों में भागीदारी कितनी है। परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामों की भी समीक्षा होगी। सीसीटीवी निगरानी, शोध में नकल रोकने के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन साफ्टवेयर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश तिथियों और परीक्षा कार्यक्रमों को भी राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परखा जाएगा। समितियां विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्री और प्रमाणपत्रों के प्रारूप, सुरक्षा फीचर और नामकरण की भी जांच करेंगी। राज्य सरकार को भेजे जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन, छात्र संख्या, वित्तीय विवरण और अन्य सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि सभी जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजी गई है या नहीं।




प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन और भवनों की होगी जांच, सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच समिति गठित की

समिति देखेगी- विश्वविद्यालय तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे या नहीं?

27 मई 2026
लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन, भवन और वित्तीय व्यवस्था की गहन जांच होगी। 52 निजी विश्वविद्यालयों की पड़ताल के लिए उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित समिति यह जांचेगी कि संस्थान तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जमीन की वैधता से लेकर भवन क्षेत्रफल, नक्शे, लोन और भू-उपयोग तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। कुछ निजी विश्वविद्यालयों के मानकों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें हैं। पुष्टि होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पर कार्रवाई भी होगी।


सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में 20 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। टाइटल डीड, म्यूटेशन रिकार्ड, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और साइट प्लान की जांच की जाएगी।  यह देखा जाएगा कि जमीन एक ही स्थान पर लगातार जुड़ी हुई हो और अलग-अलग टुकड़ों में न बंटी हो।

नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में कम से कम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन होना जरूरी है। समिति यह भी जांचेगी कि जमीन विश्वविद्यालय या उसकी प्रायोजक संस्था के नाम दर्ज है या नहीं। जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल होगी।

कैंपस में शैक्षणिक भवन छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं ही संचालित होंगी। किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर नजर रखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय की जमीन या भवन किसी बैंक या मान्यताप्राप्त वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखे गए हैं या नहीं। इसके लिए मार्गेज डीड और ऋण स्वीकृति पत्रों की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि लिया गया ऋण केवल विश्वविद्यालय के विकास कार्यों में ही खर्च किया गया हो। निजी व्यक्ति या कंपनी के पक्ष में किसी तरह का चार्ज या गिरवी स्वीकार नहीं होगा। 


24 हजार वर्गमीटर चाहिए कारपेट एरिया 
विश्वविद्यालय भवनों के स्वीकृत नक्शे, पूर्णता प्रमाणपत्र और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। साइट प्लान और भूमि रिकार्ड का मिलान कर यह देखा जाएगा कि भवन उसी जमीन पर बने हैं जो विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है। आर्किटेक्चरल ड्राइंग और प प्रमाणित माप रिपोर्ट के आधार पर यह भी सत्यापित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय का कुल कारपेट एरिया कम से कम 24 हजार वर्गमीटर है या नहीं।


नाम बदलने के विवाद से खुली जांच की राह
आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का मामला एक छात्रा की ओर से दाखिल याचिका से शुरू हुआ था। इस प्रकरण में आरोप लगाया गया था कि सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी विश्वविद्यालय ने रिकार्ड में नाम बदलने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमों और संचालन की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पूछा है कि निजी विश्वविद्यालय किन कानूनों और परिस्थितियों में स्थापित किए गए। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि उन्हें जमीन, रियायतें और अन्य किस प्रकार की सुविधाएं दी गई।


Monday, June 15, 2026

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों में अगले सत्र से प्री-प्राइमरी से 12वीं तक यूपी बोर्ड से होगी पढ़ाई, हर जिले में होंगे दो कंपोजिट विद्यालय, 150 में से 86 का निर्माण शुरू

मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालयों में अगले सत्र से प्री-प्राइमरी से 12वीं तक यूपी बोर्ड से होगी पढ़ाई, हर जिले में होंगे दो कंपोजिट विद्यालय, 150 में से 86 का निर्माण शुरू

प्री-प्राइमरी से 12वीं तक शिक्षा के लिए होंगी आधुनिक सुविधाएं


लखनऊः प्रदेश में स्थापित किए जा रहे मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालयों में प्री-नर्सरी से लेकर 12वीं तक की पढ़ाई यूपी बोर्ड पाठ्यक्रम के आधार पर होगी। इन विद्यालयों में अंग्रेजी माध्यम से भी शिक्षा दी जाएगी। सभी वर्गों और पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को यहां प्रवेश का अवसर मिलेगा। अगले सत्र से इन विद्यालयों में पठन-पाठन शुरू करने की तैयारी है।


प्रदेश में कुल 150 मुख्यमंत्री माडल कंपोजिट विद्यालय बनाए जाने हैं। इनमें से 126 विद्यालयों के निर्माण के लिए धनराशि जारी की जा चुकी है जबकि 86 विद्यालयों में निर्माण कार्य शुरू हो गया है। कई विद्यालयों का लगभग 80 प्रतिशत निर्माण पूरा हो चुका है। पांच से 10 एकड़ भूमि पर बनने वाले इन विद्यालयों के निर्माण पर करीब 4,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे। प्रत्येक जिले में दो विद्यालय स्थापित किए जाएंगे। एक विद्यालय के निर्माण पर लगभग 25 से 30 करोड़ रुपये की लागत आएगी।

प्रत्येक विद्यालय में लगभग 1,500 विद्यार्थियों के अध्ययन की व्यवस्था होगी। इन विद्यालयों में शिक्षकों की तैनाती बेसिक और माध्यमिक शिक्षा विभागों से स्थानांतरण के माध्यम से की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर नए पद भी सृजित किए जाएंगे। यहां विज्ञान, गणित, वाणिज्य और कला वर्ग की पढ़ाई के साथ ड्रीम लैब, स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, एआइ और रोबोटिक्स लैब, भाषा प्रयोगशाला तथा कौशल विकास केंद्र जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

विभागीय अधिकारियों के अनुसार विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए इन विद्यालयों में ओपेन जिम, रनिंग ट्रैक, वालीबाल, बैडमिंटन और हाकी कोर्ट, इंडोर प्ले एरिया, योग केंद्र, मिनी स्टेडियम और खेल के मैदान भी विकसित हो रहे हैं।

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षिकाओं को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (CCL) पाने का हक, दिल्ली हाईकोर्ट का ऐतिहासिक faisala


दिल्ली हाई कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में कहा है कि निजी स्कूलों में कार्यरत महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव (सीसीएल) का अधिकार है। यह फैसला संविधान के अनुच्छेद 21 और दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 के तहत शिक्षकों के समान अधिकारों को मान्यता देता है।


नई दिल्ली। कामकाजी महिलाओं के हक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि अब निजी स्कूलों में पढ़ाने वाली महिला शिक्षकों को भी सरकारी स्कूलों की तरह चाइल्ड केयर लीव पाने की हकदार होंगी।


महिला शिक्षकों के चाइल्ड केयर लीव (बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश या सीसीएल) का रास्ता खोलते हुए मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय व न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ आदेश दिया है कि सरकारी ही नहीं, निजी स्कूलों में पढ़ा रहे शिक्षक भी अपने बच्चों की देखभाल के लिए अवकाश पाने के हकदार हैं। पीठ ने कहा कि सीसीएल एक खास तरह की छुट्टी है जो बच्चे के विकास के लिए दी जाती है।

एक शिक्षिका की अपील याचिका पर निर्णय सुनाते हुए हाई कोर्ट ने एकल पीठ के निर्णय को रद कर दिया। एकल पीठ ने निजी स्कूल की शिक्षिका को सीसीएल को उसका अधिकार मानने से इन्कार कर दिया था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 (मौलिक अधिकार) के तहत प्रत्येक कर्मी को अपने बच्चे की देखभाल के लिए विशेष श्रेणी में दिए जाने वाले इस अवकाश को प्राप्त करने का अधिकार है। इसे संस्थान खारिज नहीं कर सकता। खासतौर पर शिक्षण के क्षेत्र में यह अधिकार सरकारी स्कूलों के बराबर मान्यता रखता है।

पीठ ने कहा कि दिल्ली स्कूल शिक्षा अधिनियम-1973 की धारा-10 के तहत सरकारी स्कूल के बराबर ही निजी स्कूल के कर्मचारी को परिभाषित किया गया है। इसके तहत वेतनमान, भत्ते, चिकित्सा सुविधाएं, पेंशन, प्रोविडेंट फंड आदि समान रूप से देने का प्रविधान है। ऐसे में सीसीएल भी पाना प्रत्येक कर्मचारी का अधिकार है।

याचिका में शिक्षिका ने 12वीं में पढ़ने वाले अपने बच्चे के मानसिक स्वास्थ्य का हवाला देते हुए एक महीने की सीसीएल मांगी थी। शिक्षिका का कहना था कि उनका बेटा पिछले कुछ समय से दबाव का सामना कर रहा है। ऐसे में उसकी मदद के लिए उसे छूट्टी दी जाए, लेकिन स्कूल प्रबंधन ने ऐसा कोई प्रविधान न होने का हवाला देते हुए मांग को खारिज कर दिया था। इसके बाद शिक्षिका ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ से राहत न मिलने पर अपील याचिका दायर की थी।

डीएलएड-2021 बैच के द्वितीय सेमेस्टर की बैक परीक्षा परिणाम में गणित के अंक प्रदर्शित न होने व परिणाम रोकने के मामले में PNP से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

डीएलएड-2021 बैच के द्वितीय सेमेस्टर की बैक परीक्षा परिणाम में गणित के अंक प्रदर्शित न होने व परिणाम रोकने के मामले में PNP से हाईकोर्ट ने मांगा जवाब

डीएलएड-2021 बैच की प्रयागराज निवासी व चार अन्य की याचिका पर कोर्ट ने मांगी जानकारी


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि डीएलएड-2021 बैच के द्वितीय सेमेस्टर की बैक परीक्षा परिणाम में गणित के अंक प्रदर्शित नहीं करने और परिणाम रोकने के मामले में परीक्षा नियामक प्राधिकारी (पीएनपी) अपना पक्ष रखें। अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होगी।


यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभश्याम शमशेरी की एकल पीठ ने प्रयागराज की राधिका और चार अन्य की याचिका पर दिया है। अधिवक्ता ने दलील दी कि याची बैच के हैं। इन्होंने चार अप्रैल 2025 को द्वितीय सेमेस्टर की बैंक परीक्षा में भाग लिया था।

परीक्षा के बाद पीएनपी ने अधिकांश का परिणाम जारी कर दिया पर कुछ अभ्यर्थियों की अंकतालिका में गणित के अंक अंकित नहीं किए। इससे उनका द्वितीय सेमेस्टर का परिणाम रिजेक्ट दिख रहा।

अभ्यर्थी डीएलएड चतुर्थ सेमेस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण कर चुके हैं पर द्वितीय में बैक पेपर के परिणाम में इस त्रुटि से अंतिम परिणाम भी प्रभावित हो गया है।

Sunday, June 14, 2026

सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना में अब तक 3.5 लाख का डाटा एकत्र

सीएम शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना में अब तक 3.5 लाख का डाटा एकत्र

इलाज का खर्च निर्धारित सीमा तक सीधे योजना के माध्यम से वहन किया जाएगा


लखनऊ। प्रदेश के शिक्षकों और शिक्षा विभाग के कर्मचारियों के लिए सरकार जल्द ही मुख्यमंत्री शिक्षक कैशलेस चिकित्सा योजना शुरू करने जा रही है। इसके तहत पात्र शिक्षकों-कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को सालाना पांच लाख तक के कैशलेस उपचार की सुविधा मिलेगी। इसके लिए बनाए गए ऑनलाइन पोर्टल का ट्रायल शुरू कर दिया गया है। 


स्टेट हेल्थ एजेंसी (साचीज़) द्वारा विकसित डेटा कलेक्शन पोर्टल से कर्मचारियों और उनके आश्रितों का विवरण जुटाया जा रहा है। अब तक 3.5 लाख से अधिक पात्र शिक्षकों-कर्मचारियों का डाटा संकलित किया गया है। उन्होंने बताया कि डेटा सही होने से कार्ड जारी करने की प्रक्रिया तेज होगी। अधिक से अधिक लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल सकेगा।

साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा ने बताया कि योजना के औपचारिक शुभारंभ से पहले विभाग पात्र कर्मचारियों का डेटा एकत्र करने और उसे त्रुटिरहित बनाने में जुटा है। 

नई शिक्षक भर्ती से पहले शिक्षकों को मिले गृह जिले में तैनाती, PSPSA की मांग

नई शिक्षक भर्ती से पहले शिक्षकों को मिले गृह जिले में तैनाती, PSPSA की मांग 


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने प्रदेश में नई शिक्षक भर्ती से पहले वर्तमान में काम कर रहे परिषदीय शिक्षकों को गृह जिले में तैनाती की मांग की है। इसके लिए एसोसिएशन ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजा है।

एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा है कि प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत हजारों शिक्षक-शिक्षिकाएं 20 साल से अधिक से अपने गृह जिले से काफी दूर सेवा दे रहे हैं। उसमें उन्हें काफी व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ हा है।

सरकार परिषदीय विद्यालयों में खाली पदों के सापेक्ष नए शिक्षकों की भर्ती करने का विचार कर रही है। ऐसे में इससे पहले वर्तमान कार्यरत शिक्षकों के तबादले नहीं किए गए तो जिलों में पद भरने से ये अनुभवी शिक्षक अपने गृह जिला जाने के अवसर से हमेशा के लिए वंचित हो जाएंगे। ऐसे में शिक्षकों को एक से दूसरे जिले में तबादले का अवसर दिया जाए। 


केंद्रीय विद्यालयों कक्षा छह और कक्षा नौ में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य

केंद्रीय विद्यालयों कक्षा छह और कक्षा नौ में संस्कृत का एक सेक्शन अनिवार्य


नई दिल्ली। केंद्रीय विद्यालय संगठन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से सभी केंद्रीय विद्यालयों में कक्षा छह और कक्षा नौ में संस्कृत का कम से कम एक सेक्शन अनिवार्य रूप से संचालित करने का निर्णय लिया है। 


शिक्षा मंत्रालय के अधीन कार्यरत केंद्रीय विद्यालय संगठन द्वारा 29 मई को जारी परिपत्र में कहा गया है कि सभी विद्यालयों को तीसरी भाषा (आर-3) के चयन की प्रक्रिया छात्रों और अभिभावकों से पूरी कर लेनी चाहिए। नए प्रावधान के अनुसार, तीसरी भाषा के रूप में छात्र संस्कृत या अपने राज्य/क्षेत्र की किसी अनुसूचित भाषा का चयन कर सकते हैं। यह भाषा पहली भाषा (हिंदी) व दूसरी (अंग्रेजी) से अलग होगी।

Saturday, June 13, 2026

इंडिया बेस्ट टीचर अवार्ड के लिए आवेदन शुरू, अंतिम तिथि 31 जुलाई, शिव नादर फाउंडेशन ऑक्सफोर्ड विवि के साथ मिलकर देगा अवार्ड

इंडिया बेस्ट टीचर अवार्ड के लिए आवेदन शुरू, अंतिम तिथि 31 जुलाई, शिव नादर फाउंडेशन ऑक्सफोर्ड विवि के साथ मिलकर देगा अवार्ड

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने आवेदन बढ़ाने के दिए निर्देश


लखनऊ। शिव नादर फाउंडेशन और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय का सेड बिजनेस स्कूल मिलकर इंडिया बेस्ट टीचर अवार्ड देगा। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। सभी राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त और स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित की गई है। 


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने प्रदेश के शिक्षकों से अधिक आवेदन के लिए सभी जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) को पत्र भेजा है। विभाग के संयुक्त निदेशक विवेक नौटियाल ने यह जानकारी दी। पुरस्कार आठ श्रेणियों में प्रदान किया जाएगा। इनमें व्यवसाय अध्ययन, उद्यमशीलता, कंप्यूटर विज्ञान, अंग्रेजी, पर्यावरणीय विज्ञान, भूगोल, गणित और भौतिक विज्ञान शामिल हैं। आवेदन के लिए कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा। विद्यालय के प्रधानाचार्य व प्रधानाध्यापक नियमित शिक्षकों का नामांकन कर सकते हैं। वे अधिकतम दो श्रेष्ठ शिक्षकों को नामांकित कर सकेंगे।


चयन प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जाएगी। चयनित शिक्षकों को सेड बिजनेस स्कूल में एक हफ्ते के व्यक्तिगत कार्यक्रम के लिए छात्रवृत्ति मिलेगी। यह कार्यक्रम शिक्षा और वैश्विक शिक्षाशास्त्र के नेतृत्व पर केंद्रित होगा। विजेता 16 शिक्षकों को शिक्षण कौशल सुधारने के लिए पांच-छह सप्ताह का ऑनलाइन शिक्षण कार्यक्रम भी मिलेगा। डीआईओएस को निर्देश दिए गए हैं कि वे शिक्षकों को व्हाट्सएप समूह और ईमेल से 31 जुलाई तक आवेदन करने के लिए प्रेरित करें। 

वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया होगी आसान, यूपी बोर्ड ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा, ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा

वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया होगी आसान, यूपी बोर्ड ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा, ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा

12 जून 2026
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वित्त विहीन विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इन संशोधनों का उद्देश्य भूमि मानकों में लचीलापन लाना और मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाना है। इस प्रस्ताव को परिषद के सचिव भगवती सिंह ने शासन को भेज दिया है। 

भूमि और स्वामित्व नियमों में बदलाव : प्रस्तावित विनियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 3000 वर्गमीटर भूमि का मानक बरकरार है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह 6000 वर्गमीटर है।  हालांकि, 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त संस्थाओं के लिए क्षेत्रफल पुराने मानक के अनुसार ही रहेगा। इंटरमीडिएट नवीन वर्ग या अतिरिक्त विषय की मान्यता के लिए अतिरिक्त कक्षा कक्ष और प्रयोगशाला आवश्यक होगी।

विद्यालय समिति, ट्रस्ट या कंपनी के अतिरिक्त अब सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय भी विद्यालय चला सकेंगे। विद्यालयों को 30 वर्ष की पंजीकृत लीज डीड पर भी मान्यता दी जा सकेगी।


आवेदन प्रक्रिया और शुल्क में सरलीकरण

मान्यता आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा। इससे संस्थान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति होने पर किसी भी समय आवेदन कर सकेंगे। पहले आवेदन की समय सीमा 31 मई तक निर्धारित थी। विलंब शुल्क 20,000 रुपये का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। राजकीय कोषागार में जमा शुल्क का कोष पत्र चालू वित्तीय वर्ष का होना आवश्यक नहीं है। पूर्व के वित्तीय वर्ष का कोष पत्र भी मान्य होगा। यह कदम अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 13 अप्रैल 2026 को हुई बैठक के निर्देशों के बाद उठाया गया है। बैठक में भूमि मानकों में लचीलापन लाने पर जोर दिया गया था। साथ ही मान्यता आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल को पूरे वर्ष खोले रखने का सुझाव दिया गया है। संस्थागत स्वामित्व के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराने पर भी विचार हुआ। प्रस्तावित संशोधनों से पुराने भूमि मानकों पर मान्यता प्राप्त विद्यालयों की अवरुद्ध उच्चीकरण प्रक्रिया बहाल हो सकेगी। इससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। परिषद विनियमों के अध्याय-सात के कई विनियमों में संशोधन किया जाना अपेक्षित है।




अब पीएसयू भी चला सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यालय, प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता नियमों में शिथिलीकरण

पहले से मान्यता प्राप्त कॉलेजों को नए विषय शुरु करने में भी राहत

3 जून 2026
लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसके तहत अब सीबीएसई की भांति स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), स्थानीय निकाय आदि को मान्यता देने में शामिल किया जाएगा। इससे कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से शिक्षा में निवेश बढ़ेगा।


माध्यमिक शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा परिषद से तीन दिनों के अंदर इससे जुड़ा संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार की ओर से इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता मानकों में शिथिलीकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में दी गई संस्तुति की आख्या शासन को मिली थी।


इसके तहत वर्तमान में विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए उनका संचालन सोसाइटी, ट्रस्ट या पंजीकृत कंपनी के माध्यम से होना अनिवार्य है। अब सीबीएसई की तर्ज पर सांविधिक निकायों, स्वायत्त संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों को भी विद्यालय संचालन और मान्यता के दायरे में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।


इसके अलावा समिति ने भूमि संबंधी मानकों में भी लचीलापन देने की सिफारिश की है। 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त कर चल रहे विद्यालयों को वर्तमान संशाधनों की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे विद्यालयों को अतिरिक्त विषय या सेक्शन की मान्यता के लिए नए भूमि मानकों का पालन नहीं करना होगा। यदि विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष और प्रयोगशाला हैं तो अतिरिक्त भूमि की अनिवार्यता में छूट दी जाए।


साल भर खुला रहेगा ऑनलाइन पोर्टल

मान्यता आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाने की संस्तुति समिति ने की है। समिति ने मान्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पूरे साल खुला रखने की सिफारिश की है। इसमें आगामी परीक्षा वर्ष के लिए मान्यता पर विचार तभी होगा जब संबंधित विद्यालय का आवेदन सभी औपचारिकताओं के साथ 31 मई तक मिल जाए। 31 मई के बाद मिलने वाले आवेदनों पर अगले से अगले परीक्षा वर्ष के लिए विचार किया जाएगा।