निजी विश्वविद्यालयों के शैक्षणिक कैलेंडर से डिग्री तक जांच दायरे में, उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित 11 समितियां करेंगी जांच
निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा कार्यक्रमों और नकल रोकने के उपायों की होगी पडताल
खेल मैदान, खेल सुविधाएं, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन होगा
7 जून 2026
लखनऊ : प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों में शैक्षिक गुणवत्ता, परीक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज की व्यापक जांच होगी। इसके लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में गठित समितियां विश्वविद्यालयों का निरीक्षण करेंगी। जांच उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की ओर से कराई जा रही है। निरीक्षण के दौरान यह देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय राज्य सरकार के साझा (कामन) शैक्षणिक कैलेंडर का पालन कर रहे हैं या नहीं। सेमेस्टर और शैक्षणिक सत्र की शुरुआत और समाप्ति, परीक्षा कार्यक्रम और अवकाश की तिथियों का मिलान किया जाएगा। यह भी जांचा जाएगा कि शैक्षणिक कैलेंडर छात्रों और कर्मचारियों को समय पर उपलब्ध कराया गया था या नहीं।
परिषद की ओर से गठित समितियां निजी विश्वविद्यालयों की वार्षिक और गतिविधि रिपोर्ट की भी समीक्षा करेंगी। वाद-विवाद प्रतियोगिता, क्विज, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद और अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों की जानकारी जुटाई जाएगी। एनएसएस और एनसीसी इकाइयों की स्थापना, छात्र नामांकन और उनके कार्यक्रमों की भी जांच होगी। निरीक्षण के दौरान खेल मैदान, खेल सुविधाएं, आडिटोरियम, सेमिनार हाल और छात्र क्लबों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।
छात्रों और उनके प्रतिनिधियों से बातचीत कर यह भी जाना जाएगा कि उन्हें पर्याप्त सुविधाएं मिल रही हैं या नहीं और उनकी गतिविधियों में भागीदारी कितनी है। परीक्षाओं में नकल रोकने के लिए किए गए इंतजामों की भी समीक्षा होगी। सीसीटीवी निगरानी, शोध में नकल रोकने के लिए प्लेजरिज्म डिटेक्शन साफ्टवेयर और अन्य तकनीकी व्यवस्थाओं की जांच की जाएगी। प्रवेश प्रक्रिया, प्रवेश तिथियों और परीक्षा कार्यक्रमों को भी राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुरूप परखा जाएगा। समितियां विश्वविद्यालयों द्वारा जारी डिग्री और प्रमाणपत्रों के प्रारूप, सुरक्षा फीचर और नामकरण की भी जांच करेंगी। राज्य सरकार को भेजे जाने वाले वार्षिक प्रतिवेदन, छात्र संख्या, वित्तीय विवरण और अन्य सूचनाओं का सत्यापन किया जाएगा। यह देखा जाएगा कि सभी जानकारी निर्धारित प्रारूप में भेजी गई है या नहीं।
समिति देखेगी- विश्वविद्यालय तय मानकों के अनुसार संचालित हो रहे या नहीं?
27 मई 2026
लखनऊ: सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद अब प्रदेश के निजी विश्वविद्यालयों की जमीन, भवन और वित्तीय व्यवस्था की गहन जांच होगी। 52 निजी विश्वविद्यालयों की पड़ताल के लिए उच्च शिक्षा परिषद की ओर से गठित समिति यह जांचेगी कि संस्थान तय मानकों के अनुसार चल रहे हैं या नहीं। जमीन की वैधता से लेकर भवन क्षेत्रफल, नक्शे, लोन और भू-उपयोग तक हर पहलू की बारीकी से जांच की जाएगी। कुछ निजी विश्वविद्यालयों के मानकों के विपरीत संचालित होने की शिकायतें हैं। पुष्टि होने पर संबंधित विश्वविद्यालय पर कार्रवाई भी होगी।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी मामले में 20 नवंबर 2025 को दिए गए आदेश के बाद यह कार्रवाई शुरू की जा रही है। इसमें सबसे पहले विश्वविद्यालयों की जमीन से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल होगी। टाइटल डीड, म्यूटेशन रिकार्ड, भूमि उपयोग प्रमाणपत्र और साइट प्लान की जांच की जाएगी। यह देखा जाएगा कि जमीन एक ही स्थान पर लगातार जुड़ी हुई हो और अलग-अलग टुकड़ों में न बंटी हो।
नियम के अनुसार शहरी क्षेत्र में कम से कम 20 एकड़ और ग्रामीण क्षेत्र में 50 एकड़ जमीन होना जरूरी है। समिति यह भी जांचेगी कि जमीन विश्वविद्यालय या उसकी प्रायोजक संस्था के नाम दर्ज है या नहीं। जमीन का उपयोग केवल शैक्षणिक कार्यों के लिए हो रहा है या नहीं, इसकी भी पड़ताल होगी।
कैंपस में शैक्षणिक भवन छात्रावास और खेल मैदान जैसी सुविधाएं ही संचालित होंगी। किसी भी प्रकार के व्यावसायिक उपयोग पर नजर रखी जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि विश्वविद्यालय की जमीन या भवन किसी बैंक या मान्यताप्राप्त वित्तीय संस्था के पास गिरवी रखे गए हैं या नहीं। इसके लिए मार्गेज डीड और ऋण स्वीकृति पत्रों की जांच होगी। यह भी देखा जाएगा कि लिया गया ऋण केवल विश्वविद्यालय के विकास कार्यों में ही खर्च किया गया हो। निजी व्यक्ति या कंपनी के पक्ष में किसी तरह का चार्ज या गिरवी स्वीकार नहीं होगा।
24 हजार वर्गमीटर चाहिए कारपेट एरिया
विश्वविद्यालय भवनों के स्वीकृत नक्शे, पूर्णता प्रमाणपत्र और आक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की भी जांच की जाएगी। साइट प्लान और भूमि रिकार्ड का मिलान कर यह देखा जाएगा कि भवन उसी जमीन पर बने हैं जो विश्वविद्यालय के नाम दर्ज है। आर्किटेक्चरल ड्राइंग और प प्रमाणित माप रिपोर्ट के आधार पर यह भी सत्यापित किया जाएगा कि विश्वविद्यालय का कुल कारपेट एरिया कम से कम 24 हजार वर्गमीटर है या नहीं।
नाम बदलने के विवाद से खुली जांच की राह
आयशा जैन बनाम एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा का मामला एक छात्रा की ओर से दाखिल याचिका से शुरू हुआ था। इस प्रकरण में आरोप लगाया गया था कि सभी वैध दस्तावेज देने के बाद भी विश्वविद्यालय ने रिकार्ड में नाम बदलने से इनकार कर दिया। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माना कि मामला केवल एक छात्रा तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी विश्वविद्यालयों की कार्यप्रणाली से जुड़ा बड़ा मुद्दा है। इसके बाद अदालत ने देशभर के निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना, नियमों और संचालन की व्यापक जांच कराने के निर्देश दिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से पूछा है कि निजी विश्वविद्यालय किन कानूनों और परिस्थितियों में स्थापित किए गए। साथ ही यह भी जानकारी मांगी गई है कि उन्हें जमीन, रियायतें और अन्य किस प्रकार की सुविधाएं दी गई।
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