अब पीएसयू भी चला सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यालय, प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता नियमों में शिथिलीकरण
पहले से मान्यता प्राप्त कॉलेजों को नए विषय शुरु करने में भी राहत
लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसके तहत अब सीबीएसई की भांति स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), स्थानीय निकाय आदि को मान्यता देने में शामिल किया जाएगा। इससे कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से शिक्षा में निवेश बढ़ेगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा परिषद से तीन दिनों के अंदर इससे जुड़ा संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार की ओर से इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता मानकों में शिथिलीकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में दी गई संस्तुति की आख्या शासन को मिली थी।
इसके तहत वर्तमान में विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए उनका संचालन सोसाइटी, ट्रस्ट या पंजीकृत कंपनी के माध्यम से होना अनिवार्य है। अब सीबीएसई की तर्ज पर सांविधिक निकायों, स्वायत्त संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों को भी विद्यालय संचालन और मान्यता के दायरे में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा समिति ने भूमि संबंधी मानकों में भी लचीलापन देने की सिफारिश की है। 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त कर चल रहे विद्यालयों को वर्तमान संशाधनों की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे विद्यालयों को अतिरिक्त विषय या सेक्शन की मान्यता के लिए नए भूमि मानकों का पालन नहीं करना होगा। यदि विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष और प्रयोगशाला हैं तो अतिरिक्त भूमि की अनिवार्यता में छूट दी जाए।
साल भर खुला रहेगा ऑनलाइन पोर्टल
मान्यता आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाने की संस्तुति समिति ने की है। समिति ने मान्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पूरे साल खुला रखने की सिफारिश की है। इसमें आगामी परीक्षा वर्ष के लिए मान्यता पर विचार तभी होगा जब संबंधित विद्यालय का आवेदन सभी औपचारिकताओं के साथ 31 मई तक मिल जाए। 31 मई के बाद मिलने वाले आवेदनों पर अगले से अगले परीक्षा वर्ष के लिए विचार किया जाएगा।
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