वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता प्रक्रिया होगी आसान, यूपी बोर्ड ने नियमों में संशोधन का प्रस्ताव शासन को भेजा, ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा
12 जून 2026
प्रयागराज। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वित्त विहीन विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इन संशोधनों का उद्देश्य भूमि मानकों में लचीलापन लाना और मान्यता प्रक्रिया को सरल बनाना है। इस प्रस्ताव को परिषद के सचिव भगवती सिंह ने शासन को भेज दिया है।
भूमि और स्वामित्व नियमों में बदलाव : प्रस्तावित विनियमों के अनुसार, शहरी क्षेत्रों में न्यूनतम 3000 वर्गमीटर भूमि का मानक बरकरार है। ग्रामीण क्षेत्रों के लिए यह 6000 वर्गमीटर है। हालांकि, 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त संस्थाओं के लिए क्षेत्रफल पुराने मानक के अनुसार ही रहेगा। इंटरमीडिएट नवीन वर्ग या अतिरिक्त विषय की मान्यता के लिए अतिरिक्त कक्षा कक्ष और प्रयोगशाला आवश्यक होगी।
विद्यालय समिति, ट्रस्ट या कंपनी के अतिरिक्त अब सांविधिक निकाय, स्वायत्तशासी निकाय, सार्वजनिक उपक्रम और स्थानीय निकाय भी विद्यालय चला सकेंगे। विद्यालयों को 30 वर्ष की पंजीकृत लीज डीड पर भी मान्यता दी जा सकेगी।
आवेदन प्रक्रिया और शुल्क में सरलीकरण
मान्यता आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल अब पूरे वर्ष संचालित रहेगा। इससे संस्थान अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति होने पर किसी भी समय आवेदन कर सकेंगे। पहले आवेदन की समय सीमा 31 मई तक निर्धारित थी। विलंब शुल्क 20,000 रुपये का प्रावधान भी समाप्त कर दिया गया है। राजकीय कोषागार में जमा शुल्क का कोष पत्र चालू वित्तीय वर्ष का होना आवश्यक नहीं है। पूर्व के वित्तीय वर्ष का कोष पत्र भी मान्य होगा। यह कदम अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 13 अप्रैल 2026 को हुई बैठक के निर्देशों के बाद उठाया गया है। बैठक में भूमि मानकों में लचीलापन लाने पर जोर दिया गया था। साथ ही मान्यता आवेदन के लिए ऑनलाइन पोर्टल को पूरे वर्ष खोले रखने का सुझाव दिया गया है। संस्थागत स्वामित्व के लिए अधिक विकल्प उपलब्ध कराने पर भी विचार हुआ। प्रस्तावित संशोधनों से पुराने भूमि मानकों पर मान्यता प्राप्त विद्यालयों की अवरुद्ध उच्चीकरण प्रक्रिया बहाल हो सकेगी। इससे कारोबार सुगमता को बढ़ावा मिलेगा। परिषद विनियमों के अध्याय-सात के कई विनियमों में संशोधन किया जाना अपेक्षित है।
अब पीएसयू भी चला सकेंगे यूपी बोर्ड के विद्यालय, प्रदेश में वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता नियमों में शिथिलीकरण
पहले से मान्यता प्राप्त कॉलेजों को नए विषय शुरु करने में भी राहत
3 जून 2026
लखनऊ। प्रदेश में वित्तविहीन माध्यमिक विद्यालयों की मान्यता संबंधी नियमावली में बड़े बदलाव की तैयारी है। इसके तहत अब सीबीएसई की भांति स्वायत्त निकाय, सार्वजनिक उपक्रम (पीएसयू), स्थानीय निकाय आदि को मान्यता देने में शामिल किया जाएगा। इससे कार्पोरेट सोशल रिस्पांसबिलिटी (सीएसआर) के माध्यम से शिक्षा में निवेश बढ़ेगा।
माध्यमिक शिक्षा विभाग ने माध्यमिक शिक्षा परिषद से तीन दिनों के अंदर इससे जुड़ा संशोधित प्रस्ताव भेजने को कहा है। माध्यमिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव संजय कुमार की ओर से इससे संबंधित निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा है कि वित्तविहीन विद्यालयों की मान्यता मानकों में शिथिलीकरण को लेकर अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई समिति की बैठक में दी गई संस्तुति की आख्या शासन को मिली थी।
इसके तहत वर्तमान में विद्यालयों को मान्यता प्राप्त करने के लिए उनका संचालन सोसाइटी, ट्रस्ट या पंजीकृत कंपनी के माध्यम से होना अनिवार्य है। अब सीबीएसई की तर्ज पर सांविधिक निकायों, स्वायत्त संस्थाओं, सार्वजनिक उपक्रमों और स्थानीय निकायों को भी विद्यालय संचालन और मान्यता के दायरे में शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
इसके अलावा समिति ने भूमि संबंधी मानकों में भी लचीलापन देने की सिफारिश की है। 26 दिसंबर 2022 से पहले मान्यता प्राप्त कर चल रहे विद्यालयों को वर्तमान संशाधनों की श्रेणी में रखा जाएगा। ऐसे विद्यालयों को अतिरिक्त विषय या सेक्शन की मान्यता के लिए नए भूमि मानकों का पालन नहीं करना होगा। यदि विद्यालय में अतिरिक्त कक्ष और प्रयोगशाला हैं तो अतिरिक्त भूमि की अनिवार्यता में छूट दी जाए।
साल भर खुला रहेगा ऑनलाइन पोर्टल
मान्यता आवेदन प्रक्रिया को भी सरल बनाने की संस्तुति समिति ने की है। समिति ने मान्यता के लिए ऑनलाइन पोर्टल पूरे साल खुला रखने की सिफारिश की है। इसमें आगामी परीक्षा वर्ष के लिए मान्यता पर विचार तभी होगा जब संबंधित विद्यालय का आवेदन सभी औपचारिकताओं के साथ 31 मई तक मिल जाए। 31 मई के बाद मिलने वाले आवेदनों पर अगले से अगले परीक्षा वर्ष के लिए विचार किया जाएगा।
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