जिले के 377 परिषदीय शिक्षकों के पदावनति की समीक्षा होगी। इसके लिए गुरुवार को बीएसए और एससीएसटी संवर्ग के शिक्षकों में आम सहमति बनी। सिटी मजिस्ट्रेट के दिशा-निर्देश पर बीएसए ने जांच समिति की मौजूदगी में संगठन के प्रतिनिधि मंडल के साथ मामले की सुनवाई की। विस्तार से चर्चा के बाद बीएसए ने शिक्षकों को पदावनति प्रक्रिया का फिर से परीक्षण कराने का आश्वासन दिया। इसके बाद शिक्षकों का चल रहा धरना समाप्त हो गया। पदावनति की सूची जारी होने के बाद से ही उत्तर प्रदेशीय अनुसूचित जाति- अनुसूचित जनजाति बेसिक शिक्षक महासंघ ने विरोध शुरू कर दिया था। उनका आरोप है कि विभाग ने मनमाना ढंग से शिक्षकों की पदावनति कर दी है। इसके चलते अनुसूचित जाति और जन जाति के शिक्षकों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। धरना-प्रदर्शन के माध्यम से वह नियमानुसार पदावनति की प्रक्रिया पूरी करने के लिए लगातार दबाव बनाए हुए थे। बुधवार की शाम तो धरनारत शिक्षकों की बीएसए के साथ नोंकझोंक भी हो गई। शिक्षकों ने कुछ देर के लिए दफ्तर में तालाबंदी भी कर दिया था। मौके पर पहुंचे सिटी मजिस्ट्रेट ने सुनवाई के लिए समिति गठित कर दी थी। अंतत: सुनवाई के बाद समिति ने पदावनति 377 शिक्षकों की सूची की फिर से समीक्षा कराने का निर्णय लिया है। बीएसए ओम प्रकाश यादव के अनुसार न्यायालय के आदेश पर नियमानुसार ही पदावनति की गई है। इसके बाद भी अगर शिक्षकों को आपत्ति है तो परीक्षण के दौरान उसका भी निस्तारण सुनिश्चित कर लिया जाएगा। हालांकि, आम सहमति बनने के बाद डा. राम विलास भारती के नेतृत्व में पदावनत शिक्षकों ने कार्यालय परिसर में ही बैठक की। उन्होंने चेतावनी दिया कि अगर अब भी उनकी मांगों पर विचार नहीं हुआ तो संगठन आरपार की लड़ाई को बाध्य होगा। वहीं, शिक्षकों के र्दुव्यवहार से आहत बीएसए ने डीएम और एसएसपी से सुरक्षा की गुहार लगाई थी। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने बीएसए कार्यालय में सुरक्षा बल तैनात कर दिया था।
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