दोपहर ठीक 12 बजे। आदर्श प्राथमिक विद्यालय के एक कक्षा में बच्चे पढ़ रहे थे। शिक्षिका बच्चों को पढ़ा रही थीं। दैनिक जागरण की टीम को देख वह ठिठक गईं। तुरंत कक्षा से बाहर निकल आयीं। दूसरी कक्षा कहां है? के सवाल पर वह गंभीर हुईं। मन की टीस जुबान पर आ गई। प्रधानाध्यापक के रूप में वह अकेले शिक्षक तैनात हैं। एक ही कमरे में सभी बच्चों को पढ़ाती हैं। शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नहीं है। आदर्श ही नहीं महानगर के झारखंडी और झुंगिया स्थित परिषदीय प्राथमिक विद्यालय भी एक शिक्षक के भरोसे हैं। आदर्श विद्यालय तो नगर शिक्षा अधिकारी कार्यालय के परिसर में ही है। इसके बाद भी विभाग की नजर नहीं है। अब यह न स्कूल आदर्श रह गया है और न व्यवस्था। प्रधानाध्यापक सरोज पांडेय बताती हैं, उनकी तबीयत अक्सर खराब रहती है। ऐसे में पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बीटीसी प्रशिक्षु आते हैं, तो कुछ सहूलियत मिल जाती है। पिछले साल से ही एक और शिक्षक की मांग कर रही हैं, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं है। एक साथ कक्षा पांच तक के बच्चों को कैसे पढ़ाती हैं? के सवाल पर उन्होंने कहा कि श्यामपट्ट पर एक तरफ कक्षा एक और दो के छात्रों को पढ़ाती हूं। जब तक वह कुछ लिखते हैं, तो दूसरी तरफ 3, 4 और 5 के छात्रों के सवाल हल करती हूं। क्या करूं, सहूलियत के लिए सबको एक साथ पढ़ाना पड़ता है। यही नहीं रजिस्टर भी दुरुस्त करना होता है। जिला प्रशासन ने तो उन्हें बीएलओ का सुपरवाइजर भी बना दिया है। ऐसे में छुट्टी के बाद वह कार्य भी देखना पड़ता है। उन्होंने बताया कि कुल 84 बच्चों का नामांकन हैं। औसत 30 बच्चे पढ़ने आते हैं। आज भी 20 बच्चे आए हैं। उन्हें अकेले संभालना मुश्किल हो रहा है।आदर्श प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाती प्रधानाध्यापक सरोज पांडेय।जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ओम प्रकाश यादव के अनुसार एक वर्ष के अंदर 15 सौ शिक्षकों की तैनाती की गई है। जल्द ही 400 और शिक्षकों की नियुक्ति होनी है। अगले माह से समस्त एकल विद्यालय समाप्त हो जाएंगे। हालांकि, अब भी दो दर्जन विद्यालय एकल हैं। उनपर विभाग का पूरा ध्यान है।
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