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Thursday, July 9, 2020

ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई



ऑनलाइन पढ़ाई के लिए भी तो चाहिए किताब, यूपी बोर्ड के छात्रों की बगैर किताबों के शुरू होने जा रही ऑनलाइन पढ़ाई


यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं।...
जेएनएन, मेरठ। यूपी बोर्ड के छात्रों की ऑनलाइन पढ़ाई बगैर किताबों के शुरू होने जा रही है। एनसीईआरटी के पैटर्न पर यूपी बोर्ड की किताबें लागू तो कर दी गई, लेकिन ये अभी छात्रों के पास नहीं पहुंची हैं। प्रकाशकों के पास किताबों का स्टॉक भरा पड़ा है, लेकिन मांग न होने की वजह से विक्रेता किताबें नहीं उठा रहे हैं। हालात तो ये हैं कि बहुत से प्रकाशक किताबों से रायल्टी तक नहीं निकाल पा रहे।

प्रदेश में यूपी बोर्ड की एनसीईआरटी पैटर्न की किताबों के प्रकाशन के लिए चार प्रकाशक अधिकृत किए गए हैं। इनमें रवि आफसेट प्रिटर्स एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा, राजीव प्रकाशन प्रयागराज, आलोक प्रिटर्स आगरा और काका संस नोएडा हैं। मेरठ के बहुत से प्रकाशक यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें व एनसीईआरटी से इतर किताबें प्रकाशित करते हैं। प्रकाशकों पर कोविड का व्यापक असर पड़ा है। मार्च में प्रकाशकों ने किताबें छाप दीं, लेकिन इस समय तक मुश्किल से 20 फीसद ही विक्रेताओं के पास पहुंच पाई। ये कहते हैं प्रकाशक


मार्च में किताबें सप्लाई कर दी थीं। बच्चे किताब नहीं खरीद रहे हैं, जिस वजह से दुकानदार किताब लेने को तैयार नहीं है। पिछले साल के मुकाबले मांग शून्य है। दुकान और प्रकाशक दोनों जगह स्टाक भरे हैं। पूरे प्रदेश की यही स्थिति है। इस साल रायल्टी भी नहीं निकाल पा रहे हैं। यह रायल्टी बोर्ड के माध्यम से एनसीईआरटी को जाती है। अतुल जैन, डायरेक्टर, रवि आफसेट प्रिटर एंड पब्लिशर्स प्राइवेट लिमिटेड आगरा 


करीब 25 फीसद किताबें ही मार्केट में सप्लाई हुई थीं। 75 फीसद स्टॉक गोदाम में है। स्कूल कब खुलेंगे पता नहीं। यूपी बोर्ड में छात्रों के पास किताबें नहीं होंगी तो वे क्या पढ़ेंगे। बच्चों को प्रोत्साहित करें। किताबें खरीदें, स्वयं अध्ययन करें। अजय रस्तोगी, डायरेक्टर, चित्रा प्रकाशन, मेरठ 


यूपी बोर्ड की संदर्भ किताबें प्रकाशित करते हैं। इस बार मांग शून्य है। बच्चे किताब नहीं खरीद पा रहे हैं। जब तक स्कूल नहीं खुलेंगे, किताबों की मांग नहीं आएगी। सौरभ जैन, डायरेक्टर, विद्या प्रकाशन मेरठ 


किताबों की बिक्री के लिए विकल्प देना होगा। स्कूल के अंदर स्टाल लगा दिए जाएं, सेक्शन वाइज कक्षा में किताबें रख दी जाएं। अभिभावक को बुलाकर किताबें दी जा सकती हैं। मोहित जैन, नगीन प्रकाशन, मेरठ 


80 फीसद पुस्तक विक्रेताओं के पास जा चुकी हैं। लेकिन ये बच्चों तक नहीं पहुंची हैं। अगर अप्रैल में किताबें उपलब्ध करा दी जाती तो बहुत अच्छा रहता। यूपी बोर्ड में ऑनलाइन पढ़ाई तभी होगी जब हाथ में किताब हो। कोरोना की वजह से किताबों की बिक्री की सरकार ने अनुमति नहीं दी। अजय रस्तोगी, रीडर्स च्वाइस, मेरठ


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