DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Monday, May 24, 2021

यूजीसी के इस फरमान का विवि शिक्षकों ने शुरू किया विरोध

यूजीसी के इस फरमान का विवि शिक्षकों ने शुरू किया विरोध


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा जारी उस नोटिस का डीयू के शिक्षक संगठनों ने विरोध किया है जिसमें कहा गया है कि ऑनलाइन माध्यम से कुल पाठ्यक्रम के 40 फीसदी हिस्से का शिक्षण होगा। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ का कहना है कि यूजीसी का यह निर्णय भेदभाव पूर्ण है। इसे स्वीकारा नहीं जा सकता। इससे असमानता बढ़ेगी।


शिक्षक संगठन एकेडमिक फॉर एक्शन एंड डेवलेपमेंट के पदाधिकारी और पूर्व कार्यकारी समिति के सदस्य राजेश झा का कहना है कि अधिकांश छात्रों के पास बुनियादी ढांचे और उपकरणों की कमी के कारण ऑन-कैंपस कक्षाओं के प्रतिस्थापन के रूप में ऑनलाइन कक्षाएं संभव नहीं है। हमारे पास एससी, एसटी, ओबीसी, ईडब्ल्यूएस, पीडब्ल्यूडी और पूर्वोत्तर और जम्मू, कश्मीर आदि दूरस्थ क्षेत्रों से आने वाले तीन चौथाई छात्र हैं, जिनके पास इंटरनेट की सुविधा नहीं है।


उन्होंने नेशनल सैम्पल सर्वे (2014) का हवाला देते हुए कहा कि भारत में केवल 27 प्रतिशत घरों में ही कुछ ऐसे सदस्य हैं जिनकी इंटरनेट तक पहुंच है। स्मार्टफोन होना मतलब डिजिटल माध्यम तक पहुंच होना नहीं है। प्रभावी रूप से केवल 12.5 प्रतिशत परिवारों के पास कंप्यूटिंग डिवाइस पर घर पर इंटरनेट है। डेटा भी एक राज्य से दूसरे राज्य में भिन्न हैं। उदाहरण के लिए, नमूना सर्वेक्षण कहता है कि आंध्र प्रदेश में 30 प्रतिशत ग्रामीण घरों में इंटरनेट की पहुंच है, लेकिन केवल 2 प्रतिशत लोगों के पास घर पर प्रभावी इंटरनेट का उपयोग होने की संभावना है यानी कंप्यूटिंग डिवाइस के साथ ऑनलाइन क्लास को नियमित करने से शिक्षण की गुणवत्ता के साथ-साथ शिक्षकों के वर्कलोड या कार्यभार में भी कमी आएगी।

उनका कहना है कि महामारी और लॉकडाउन के चुनौतीपूर्ण समय के दौरान जब पूरी दुनिया इस संकट से समाधान प्रदान करने के लिए वैज्ञानिकों और डॉक्टरों के प्रयास की सराहना कर रही है यूजीसी छात्रों के लिए कक्षा शिक्षण और व्यावहारिक प्रशिक्षण को समाप्त करने पर आमादा है। इससे पहले भी कई मानदंडों को बदल दिया गया था ताकि अधिक से अधिक विश्वविद्यालय 100 फीसदी ऑनलाइन डिग्री प्रदान कर सकें। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि कोविड 2.0 के कंधों पर रख कर फंड-कट और शिक्षकों की नौकरी काटी जा रही है।


तदर्थ शिक्षकों की नौकरी में आएगी कमी
राजेश झा का कहना है कि डीयू में कुल शिक्षकों की आधी संख्या तदर्थ शिक्षकों की है। जब 40 फीसदी ऑनलाइन पढ़ाई होगी तो इनकी अस्थायी नौकरी प्रभावित होगी। हम इन तदर्थ शिक्षकों के समायोजन की मांग करते हैं। उनको नौकरी से हटाने का समर्थन नहीं कर सकते हैं।

No comments:
Write comments