बेसिक शिक्षकों की पदोन्नति में नियमों का रोड़ा, सात नवंबर तक सूची जारी करने का है निर्देश, वरिष्ठता सूची को लेकर विवाद होना भी तय, असंतुष्ट शिक्षक ले सकते हैं न्यायालय की शरण
प्रयागराज : उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा परिषद के करीब 70,000 शिक्षकों की पदोन्नति की प्रक्रिया करीब दस साल के लंबे इंतजार के बाद शुरू हो गई है। सात नवंबर तक सूची जारी करने का निर्देश है। 23 अक्टूबर तक सभी जिलों में वरिष्ठता सूची जारी करने के लिए सचिव, बेसिक शिक्षा परिषद ने निर्देशित किया है, लेकन इसमें नियमों का रोड़ा आने वाला है। वरिष्ठता सूची को लेकर विवाद होना भी तय है। वजह है, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक ज्येष्ठता नियमावली 1991 के भाग आठ क (इसके अनुसार, यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति का कोई सरकारी सेवक आरक्षण या रोस्टर प्रणाली के आधार पर अपने सामान्य वर्ग के वरिष्ठ साथी से पहले पदोन्नत हो जाता है, तो उसे उस पद पर पारिमाणिक ज्येष्ठता प्राप्त होगी।) को विलोपित किए जाने वाला मई 2012 का आदेश। विभाग के शिक्षकों के अनुसार इस संशोधन वाले आदेश का पालन नहीं हो रहा है।
पदोन्नति में जिन बिंदुओं को लेकर असमंजस हैं, उनमें प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और जूनियर के सहायकों की वरिष्ठता सूची बनाने में नियमों के अनुपालन को लेकर है। 1981 की नियमावली के अनुसार संवर्ग में मौलिक नियुक्ति तिथि के आधार पर वरिष्ठता निर्धारित की जाएगी। यहां प्राथमिक के प्रधानाध्यापक व जूनियर के सहायक का संवर्ग अलग है या वहीं, अर्थात उनकी विभाग में प्रथम नियुक्ति को मौलिक नियुक्ति माना जाय या जूनियर सहायक और प्राथमिक हेड को अलग संवर्ग मानकर पदोन्नति तिथि को आधार माना जाए। यदि प्रथम नियुक्ति तिथि को आधार माना जाए तो पदोन्नति छोड़कर वर्षों बाद जूनियर में पदोन्नति से आने वाले या प्राथमिक का हेड बनने वाले अपने से पहले से जूनियर के कार्यरत या प्राथमिक के हेड पर कार्यरत से वरिष्ठ होंगे या कनिष्ठ, इसका विवाद है। आरक्षण से पदोन्नति प्राप्त करने वाले शिक्षकों को लेकर भी विवाद है।
No comments:
Write comments