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Tuesday, August 4, 2026

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन विद्युत लाइन क्यों?

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा - चार हजार स्कूलों के ऊपर हाईटेंशन लाइन क्यों? 


पॉवर कॉर्पोरेशन के एमडी को बनाया पक्षकार, स्कूल सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और एसओपी पर मांगी प्रगति रिपोर्ट, स्कूलों की सुरक्षा व आसपास ट्रैफिक जाम पर भी अदालत सख्त


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के करीब चार हजार स्कूलों के ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन बिजली लाइनों को बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मामला मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने पॉवर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश देते हुए अतिरिक्त महाधिवक्ता को आदेश दिया कि सक्षम प्राधिकारी को इसकी सूचना देकर अगली सुनवाई तक इस संबंध में उनका जवाब पेश करें।


न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की खंडपीठ ने यह आदेश गोमती रिवर बैंक रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन की जनहित याचिका पर दिया। न्यायमित्र ने अदालत को बताया कि कई मामलों में हाईटेंशन लाइनें स्कूल परिसरों पर गिर चुकी हैं जिससे बच्चों की जान खतरे में पड़ी। इस संबंध में हुए अध्ययन और अखबार में प्रकाशित खबरों का भी हवाला दिया गया। अदालत ने इसे गंभीर सार्वजनिक महत्व का विषय बताते हुए विस्तृत परीक्षण की जरूरत बताई। 


सुनवाई के दौरान डीसीपी ट्रैफिक लखनऊ ने स्कूलों में ट्रैफिक मार्शलों की तैनाती पर प्रारंभिक रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट के अनुसार सात स्कूलों की व्यवस्था अच्छी, पांच की औसत और पांच की खराब पाई गई। अदालत ने रिपोर्ट रिकॉर्ड पर लेते हुए शैक्षणिक संस्थानों की मदद से तैयार की जा रही मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) अगली सुनवाई तक पेश करने को कहा।

अदालत को यह भी बताया गया कि स्कूलों के आसपास ट्रैफिक नियंत्रण के लिए प्रवेश द्वारों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की योजना पर काम चल रहा है। अगली सुनवाई में कैमरों की संख्या और अनुमानित लागत का ब्योरा दिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई 18 अगस्त को होगी।

नाबालिगों की सुरक्षा पर अदालत गंभीर
सुनवाई के दौरान अदालत ने स्कूल बसों और वैन के संचालन को भी बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा माना। कोर्ट को बताया गया कि परिवहन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पुलिस सत्यापन में 2370 स्कूल वाहन चालकों में से 527 के खिलाफ मिशन भरोसा के तहत प्रतिकूल रिपोर्ट दर्ज मिली है। अदालत ने कहा कि यह नाबालिग बच्चों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा गंभीर विषय है। बार के कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जहां संभव हो, स्कूल वैन में महिला चालकों की नियुक्ति पर विचार किया जाए। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने अदालत को भरोसा दिलाया कि इस सुझाव पर सरकार आवश्यक विचार करेगी।

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