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Monday, June 22, 2026

तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

तंबाकू मुक्त बनेंगे स्कूल, गुटखा का पाउच मिलने पर मिलेगा नोटिस, स्कूल की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' चिह्नीकरण आवश्यक

आसपास की दुकानों पर गुटखा तंबाकू की बिक्री बंद कराने के लिए उठाने होंगे कदम

प्रयागराज । केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2047 तक 'नशा मुक्त भारत' का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान अभियान चलाने का निर्णय लिया है। यह अभियान प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक के साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भी चलाया जाना है। सभी परिसर तंबाकू मुक्त बनाने का लक्ष्य है। 


इस दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग ने कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। प्रत्येक स्कूल परिसर में तंबाकू, गुटखा खाने, बीड़ी, सिगरेट के प्रयोग पर रोक रहेगी। इन सब चीजों के पाउच भी यदि परिसर में मिल गए तो शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों, प्रधानाचार्यों से जवाब तलब होगा। परिसर में यदि कहीं पर पूर्व में पान गुटखा की पीक के निशान हों तो उन्हें तत्काल प्रभाव से हटवाने का दायित्व भी प्रधानाध्यापकों या इंचार्ज प्रधानाध्यापकों पर है। 

ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालय खुलने पर अधिकारियों की टीम स्कूलों का निरीक्षण करके वास्तविक स्थिति देखेगी। स्कूलों में हर छह महीने में कम से कम एक तंबाकू नियंत्रण गतिविधि कराई जाएगी। इन गतिविधियों की निगरानी के लिए नोडल नियुक्त करते हुए उनके नाम, मोबाइल नंबर और तंबाकू मुक्त क्षेत्र का बोर्ड लगवाया जाएगा।  सभी शिक्षण संस्थाओं में मुख्य द्वार के पास बोर्ड या वाल पेंटिंग कराई जाए, जिसमें तंबाकू मुक्त शिक्षण संस्थान का उल्लेख हो।

 इसकी रोकथाम के लिए नामित नोडल का नाम और मोबाइल नंबर भी अंकित होना आवश्यक है। परिसर के भीतर तंबाकू उपयोग का कोई सबूत नहीं होना चाहिए। परिसर में तंबाकू के नुकसान बताने वाले पोस्टर लगवाने के साथ संस्थान की आचार संहिता का उल्लेख किया जाए। शिक्षण संस्थान की चहारदीवारी के 100 गज के दायरे का 'यलो लाइन' का चिह्नीकरण आवश्यक है। इस 100 गज के दायरे में यदि तंबाकू आदि की बिक्री वाली दुकानें हों तो उन्हें हटवाना होगा या फिर दुकानों पर ऐसे पदार्थ की बिक्री बंद करानी होगी। 

संस्थान के नोडल अपने स्तर पर नियमों के उल्लंघन पर सांकेतिक जुर्माना या सुधारात्मक संदेश देने वाली कोई कार्रवाई कर सकते हैं। इस संबंध में डीआइओएस संतोष कुमार राय का कहना है कि यह सब विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के मन मस्तिष्क को तंबाकू से होने वाले दुष्प्रभाव से बचाने के लिए किया जा रहा है। इससे स्वास्थ्य के साथ आर्थिक, सामाजिक एवं पर्यावरण पर गलत प्रभाव पड़ता है। इसी परिप्रेक्ष में शिक्षा मंत्रालय ने तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान से जुडे राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत की है।

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