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Wednesday, March 18, 2026

प्रदेश के 62 विद्यालय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में होंगे अपग्रेड, समग्र शिक्षा के तहत 106 करोड़ बजट स्वीकृत

प्रदेश के 62 विद्यालय हाईस्कूल व इंटरमीडिएट में होंगे अपग्रेड, समग्र शिक्षा के तहत 106 करोड़ बजट स्वीकृत

जल्द ही शुरू किए जाएंगे विद्यालयों के निर्माण कार्य

लखनऊ। प्रदेश में माध्यमिक शिक्षा को और मजबूती देने के लिए समग्र शिक्षा के तहत 62 माध्यमिक विद्यालयों को अपग्रेड किया जाएगा। कक्षा आठ तक की पढ़ाई करा रहे 30 विद्यालय 10वीं तक और 10वीं तक की पढ़ाई करा रहे 32 विद्यालय 12वीं तक अपग्रेड किए जाएंगे। इसके लिए 106 करोड़ का बजट स्वीकृत कर दिया गया है।


जल्द ही इसका काम भी शुरू कर दिया जाएगा। इसमें प्रति हाईस्कूल की लागत 1.48 करोड़ और इंटर की 2.21 करोड़ है। इस तरह इन विद्यालयों की कुल लागत 106 करोड़ होगी। माध्यमिक शिक्षा विभाग इस राशि से इन विद्यालयों के लिए आवश्यक बिल्डिंग, क्लास रूम आदि का निर्माण कराएगा। साथ ही यहां पर आवश्यक मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी।



69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षण विसंगति पर कल होगी सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई

18 मार्च 2026
प्रयागराज । बेसिक शिक्षा परिषद की 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती से जुड़े आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के मामले में 19 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई प्रस्तावित है। यह सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता व जस्टिस एजी मसीह की बेंच में होगी। पीड़ित अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री कार्यालय में मुलाकात कर सरकार से याची लाभका प्रस्ताव सुनवाई की तिथि पर प्रस्तुत किए जाने की मांग की। अभ्यर्थियों को न्याय मिलने की उम्मीद जताई है।

पिछड़ा दलित संयुक्त मोर्चा के प्रदेश मीडिया प्रभारी राजेश चौधरी ने कहा कि पीड़ित अभ्यर्थी वर्ष 2020 से हाई कोर्ट में याचिका दायर कर याची लाभ' की मांग कर रहे हैं। 13 अगस्त 2024 को हाई कोर्ट की डबल बेंच ने भर्ती सूची को रद कर नई सूची बनाने का आदेश दिया था, जिसमें आरक्षण नियमावली के पालन के निर्देश दिए गए थे, लेकिन विभाग ने अनुपालन नहीं किया। 

अब प्रकरण पिछले 18 महीने से सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। मोर्चा पदाधिकारियों का आरोप है कि राज्य सरकार की ओर से पर्याप्त पैरवी न होने के कारण मामला लंबित है, जिससे अभ्यर्थियों की आर्थिक और सामाजिक स्थिति प्रभावित हो रही है। यदि सरकार 19 मार्च की सुनवाई में 'याची लाभ' का प्रस्ताव प्रस्तुत करती है, तो यह विवाद समाप्त हो सकता है।



69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति और सुप्रीम कोर्ट में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने घेरा शिक्षा निदेशालय

10 मार्च 2026
लखनऊ। 69000 शिक्षक भर्ती में नियुक्ति की मांग को लेकर अभ्यर्थियों ने सोमवार को बेसिक शिक्षा निदेशालय घेर लिया। बेसिक शिक्षा निदेशक से मिले आश्वासन के बाद भी असंतुष्ट अभ्यर्थियों ने धरना जारी रखा। बाद में पुलिस ने धरना दे रहे अभ्यर्थियों को बस से ईको गार्डेन पहुंचाया।


आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने 19 मार्च को होने वाली सुनवाई में प्रदेश सरकार की तरफ से प्रभावी पैरवी की मांग की। अभ्यर्थियों की तरफ से धनंजय गुप्ता ने कहा कि सरकार खुद ही जाकर नई डेट ले आती है। ऐसे में उन्हें अधिकारियों पर भरोसा नहीं है। धरने में राज बहादुर, हसीन, अनूप गुप्ता, बृजेश सिंह, श्यामलता सिंह शामिल थे। वहीं, पिछडा दलित संयुक्त मोर्चा की बैठक में अभ्यर्थियों ने फिर से याची लाभ देने की मांग उठाई। शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थियों के साथ ही 29334 गणित-विज्ञान भर्ती के अभ्यर्थी भी सोमवार को धरना देने पहुंचे।

इसलिए आक्रोश : 69 हजार शिक्षक भर्ती में आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद अभ्यर्थी लगातार नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। लेकिन मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।

Tuesday, March 17, 2026

अमृत उद्यान, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली का प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों व कार्यरत शिक्षकों का भ्रमण कराये जाने के सम्बन्ध में

अमृत उद्यान, राष्ट्रपति भवन, नई दिल्ली का प्रदेश के विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों व कार्यरत शिक्षकों का भ्रमण कराये जाने के सम्बन्ध में 



डीएलएड की स्क्रूटनी के लिए आवेदन का आज अंतिम मौका

डीएलएड की स्क्रूटनी के लिए आवेदन का आज अंतिम मौका 

17 मार्च 2026


डीएलएड की स्क्रूटनी को 14 मार्च तक करें आवेदन

6 मार्च 2026
प्रयागराज। डीएलएड के विभिन्न बैच के प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा के 25 फरवरी को घोषित परिणाम से असंतुष्ट प्रशिक्षु स्क्रूटनी के लिए 14 मार्च तक आवेदन कर सकते हैं। परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय के सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने सभी जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) के प्राचार्यों को निर्देशित किया है कि आवेदन पत्र की प्रति के साथ स्क्रूटनी फीस की मूल रसीद संलग्न कर 18 मार्च तक उपलब्ध कराएं। 

स्क्रूटनी के लिए प्रशिक्षुओं को प्रति विषय 150 रुपये फीस देनी होगी। डायट प्राचार्य एक से 15 मार्च तक आवेदन स्वीकार या अस्वीकार करेंगे। गौरतलब है कि 25 फरवरी को घोषित परिणाम में बड़ी संख्या में प्रशिक्षु फेल हो गए थे। सर्वाधिक 101279 (57 प्रतिशत) प्रशिक्षु डीएलएड 2024 के प्रथम सेमेस्टर में फेल थे।



डीएलएड परीक्षा की स्क्रूटनी के लिए आज से आवेदन, जानिए! कैसे और कहां करें आवेदन

प्रयागराज । डीएलएड प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर परीक्षा वर्ष अक्टूबर व नवंबर 2025 की स्क्रूटनी के लिए आनलाइन आवेदन शनिवार से किए जा सकेंगे। उत्तर प्रदेश पीएनपी सचिव अनिल भूषण चतुर्वेदी ने अंतिम तिथि 14 मार्च निर्धारित की है। आफलाइन आवेदन नहीं स्वीकार किए जाएंगे। प्रशिक्षण-2018, 2021 एवं 2023 बैच के अभ्यर्थी http://www.btcexam.in पर आवेदन करेंगे, जबकि 2019, 2022 एवं 2024 के अभ्यर्थियों को https://www.updeledexam.in के माध्यम से आवेदन करना होगा।


डीएलएड-2024 के प्रथम सेमेस्टर में आधे से अधिक परीक्षार्थी अनुत्तीर्ण

परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने परीक्षाओं का घोषित किया परिणाम

1.84 लाख परीक्षार्थियों में से 43 फीसदी उत्तीर्ण, 3525 अनुपस्थित, 1334 का रिजल्ट अपूर्ण

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने डीएलएड प्रशिक्षण के विभिन्न बैच का अक्तूबर एवं नवंबर-2025 में आयोजित प्रथम एवं तृतीय सेमेस्टर की परीक्षाओं का परिणाम बुधवार को घोषित कर दिया।

जारी परिणाम के अनुसार, वर्ष-2024 के प्रथम सेमेस्टर के कुल 1,84,576 परीक्षार्थियों में से 78,125 ही सफल हुए हैं। इनमें से 3525 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे। जबकि, 1334 परीक्षार्थियों का परिणाम अपूर्ण व 309 परीक्षार्थियों के परिणाम किसी कारण से रोके गए हैं।

इसी प्रकार, वर्ष 2017 के थर्ड सेमेस्टर का परिणाम शत प्रतिशत रहा। इसमें एक परीक्षार्थी ही पंजीकृत था, जो कि सफल रहा। वहीं, वर्ष-2018, 2019, 2021, 2022 व 2023 के भी परिणाम घोषित किए गए हैं। परीक्षार्थी अपना परिणाम विभागीय वेबसाइट पर ऑनलाइन देख सकते हैं।

जिन अभ्यर्थियों का परिणाम अपूर्ण है या रोका गया है, उनके प्रकरणों का परीक्षण किया जा रहा है। आवश्यक अभिलेखों एवं औपचारिकताओं की पूर्ति के बाद ऐसे मामलों का निस्तारण किया जाएगा।


स्कूल चलो अभियान से पहले विद्यालयों में पहुंचें किताबें, बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिए निर्देश

स्कूल चलो अभियान से पहले विद्यालयों में पहुंचें किताबें,  बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर दिए निर्देश


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में नया सत्र 2026-27 एक अप्रैल से शुरू हो रहा है। इससे पहले विद्यालयों के कील-कांटे दुरुस्त किए जा रहे हैं। साथ ही सभी आवश्यक व्यवस्थाएं भी पूरी की जा रही हैं। इस क्रम में सोमवार को बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी सीडीओ के साथ ऑनलाइन बैठक कर निर्देश दिए।


उन्होंने कहा कि किताबों की आपूर्ति जिला स्तर पर हो गई है। यह सुनिश्चित किया जाए कि स्कूल चलो अभियान (एक अप्रैल) से पहले किताबें विद्यालयों में उपलब्ध हों। ताकि पहले दिन से बच्चों की पढ़ाई शुरू हो सके। उन्होंने कहा कि स्कूल चलो अभियान का विस्तृत निर्देश जारी किया जा चुका है। इसके तहत बच्चों का नामांकन कराएं और यह सुनिश्चित करें कि कोई भी छात्र ड्राप आउट न हो।

अपर मुख्य सचिव ने निर्देश दिया कि आरटीई में जिन बच्चों को दो चरणों में निजी विद्यालयों में सीट मिली है, उनका दाखिला सुनिश्चित कराया जाए। तीसरे चरण के लिए व्यापक प्रचार-प्रसार कर ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराए जाएं। सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालयों की गुणवत्ता व प्रगति सुनिश्चित की जाए। समग्र शिक्षा में केजीबीवी, सामुदायिक सहभागिता, कंपोजिट ग्रांट, विभिन्न निर्माण कार्य आदि में तेजी लाई जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि डिजिटल क्लास को प्रभावी बनाने के लिए बजट जारी किया गया है। इसका बेहतर रूप से संचालन कराया जाए। सामुदायिक सहभागिता के लिए विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्यों के सहयोग से प्रशिक्षण किया जाए। केजीबीवी के खाली कार्मिकों के पदों को जल्द भरा जाए। वहीं उनके यहां विभिन्न सुविधाओं के लिए जारी राशि का समय से पूरा प्रयोग किया जाए। माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रोजेक्ट अलंकार के लिए जारी राशि का समय से प्रयोग करें।

जिन विद्यालयों को निपुण घोषित किया गया है। उनके लिए निपुण सम्मान समारोह आयोजित किया जाए। साथ ही अगले साल और अधिक विद्यालयों को निपुण बनाने के लिए प्रयास किए जाएं। बैठक में महानिदेशक स्कूल शिक्षा व बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी भी उपस्थित थे। 

29334 विज्ञान गणित सहायक शिक्षक भर्ती में रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष कटऑफ अंक की स्थिति स्पष्ट करने का हाईकोर्ट का निर्देश

29334 विज्ञान गणित सहायक शिक्षक भर्ती में रिक्त रह गई सीटों के सापेक्ष कटऑफ अंक की स्थिति स्पष्ट करने का हाईकोर्ट का निर्देश

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29334 विज्ञान गणित सहायक शिक्षक भर्ती में रिक्त रह गई सीटों और कटऑफ को लेकर दाखिल याचिका पर बेसिक शिक्षा परिषद के अधिवक्ता व याची अधिवक्ता को दो सप्ताह में स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। 


याचियों के अधिवक्ता संजय कुमार यादव के अनुसार 29000 सहायक शिक्षक भर्ती में सर्वोच्च न्यायालय ने 29 जनवरी 2025 को रिक्त रह गई सीटों पर याचियों को शामिल करने का आदेश दिया था। 


एडवोकेट संजय यादव का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने कटऑफ अंक के बारे में स्पष्ट किया है कि काउंसिलिंग प्रक्रिया के समय जिस जिले का न्यूनतम कटऑफ था, उससे अधिक अंक पाने वाले याचियों को ही नियुक्ति दी जाए।

एडेड संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारियों को मिली सौगात, ग्रेच्युटी राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक किए जाने का निर्णय

एडेड संस्थानों के शिक्षक-कर्मचारियों को मिली सौगात, ग्रेच्युटी राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक किए जाने का निर्णय

पहले 20 लाख थी ग्रेच्युटी की राशि, राजकीय विद्यालयों में पहले से लागू है व्यवस्था

लखनऊ। सरकार ने प्रदेश के 4500 से अधिक अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के सवा लाख से अधिक शिक्षकों व कर्मचारियों को बढ़ा तोहफा दिया है। उनकी ग्रेच्युटी राशि 20 लाख से बढ़ाकर 25 लाख तक किए जाने का निर्णय लिया गया है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में यह व्यवस्था पिछले साल से लागू है।

माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार एडेड विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता मूल वेतन का 50 फीसदी हो जाने पर ग्रेच्युटी की राशि 20 से बढ़ाकर अधिकतम 25 लाख किए जाने का निर्णय लिया गया है। विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि इसके लिए वित्त विभाग से सहमति मिल गई है।

पिछले साल ही प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों-कर्मचारियों को इसका लाभ दिया जा रहा है। इसके बाद से एडेड माध्यमिक विद्यालयों की ओर से इसके लिए मांग की जा रही थी। इस क्रम में यह निर्णय लिया गया है। वहीं सेवा के दौरान विकल्प देने पर व सेवा के दौरान निधन होने पर शिक्षकों-कर्मचारियों के परिजनों को ग्रेच्युटी नियमानुसार देने की व्यवस्था है।



Monday, March 16, 2026

यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर

यूपी बोर्ड में हिंदी की पढ़ाई का बदलेगा स्वरूप, रचनात्मक लेखन और अभिव्यक्ति पर रहेगा विशेष जोर

अगले वर्ष लागू होगा नया पाठ्यक्रम, भाषा के साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जुड़ेंगे विद्यार्थी


लखनऊ: उप्र माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) कक्षा नौ से 12 तक की हिंदी पढ़ाई का स्वरूप बदलने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित योजना के अनुसार वर्ष 2027 से हिंदी का नया पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा, जिसनें रचनात्मक लेखन, अभिव्यक्ति और भाषा के व्यावहारिक उपयोग पर विशेष जोर रहेगा। खास बात यह है कि जहां अन्य विषयों में एनसीईआरटी का पैटर्न अपनाया गया है, वहीं हिंदी के लिए प्रदेश की सामाजिक-सांस्कृतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पाठ्यक्रम तैयार किया जाता है। अब हिंदी के मौजूदा पाठ्यक्रम को और अधिक समृद्ध किए जाने की तैयारी है।


हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा वाला यह प्रदेश रहा भारतेंद हरिश्चंद्र, मुंशी प्रेमचंद, महावीर प्रसाद द्विवेदी, जयशंकर प्रसाद, महादेवी वर्मा, सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' और अज्ञेय जैसे कालजयी साहित्यकारों की विरासत वहां की पहचान रही है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश का हिंदी पाठ्‌यक्रम भी ततन ही समृद्ध और उच्च स्तर का होना चाहिए, जिससे विद्यार्थी हिंदी को रटने के बजाय उसकी गहराई को समझते हुए अप्नी सृजनात्मक क्षमता को विकसित कर सकें। परिषद के अनुसार हिंदी भाषी प्रदेश में विद्यार्थियों की भाषाई जरूरतें भी विशिष्ट हैं।

एनसीईआरटी की मैजूदा हिंदी पुस्तकों में कई बार प्रदेश के सामाजिक जीवन, लोक संस्कृति और स्थानीय संदर्भों को पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाता। इसी वजह से यूपी बोर्ड अपने स्तर पर हिंदी का ऐसा पाठ्यक्रम विकसित करता है, जो विद्यार्थियों को भाषा के साथ साथ अपनी सांस्कृतिक जड़ों से भी जोड़ सके। अगे हिंदी को केवल व्याकरण और पाठ्यपुस्तक तक सीमित नहीं रखा जाएगा प्रस्तावित पाठ्यक्रम में कविता लेखन, कहानी लेखन, निबंध, संवाद लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों को और अधिक महत्व देने की योजना है। इससे छात्र केवल परीक्ष पास करने तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि अपनी सोच, अनुभव और भावनाओं को प्रभात्री ढंग से व्यक्त करना भी सीखेंगे।

परिषद के सचिव भगवती सिंह के अनुसार इस दिशा में प्रारंभिक कवायद शुरू कर दी गई है। पाठ्यक्रम तैयर करने के लिए शिक्षा विशेषज्ञों और शिक्षाविदों से सुझाव लिए जा रहे हैं, ताकि इसे आधुनिक जरूरतों के अनुरूप बनाया जा सके। साथ ही हिंदी शिक्षण में नवाचार और व्यावहारिक उपयोगिता को भी प्रमुखता दी जाएगी। इससे प्रदेश के छात्र राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी लेखन और अभिव्यक्ति के क्षेत्र में मजबूत पहचान बना सकेंगे।

टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया

टीईटी की अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षक की पाती अभियान एक सप्ताह बढ़ाया गया

लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्यता के विरोध में चलाए जा रहे अभियान में काफी शिक्षक जुड़ रहे हैं। इसे देखते हुए महासंघ ने पाती लिखने के अभियान को एक सप्ताह बढ़ाने का निर्णय लिया है।

महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि आरटीई एक्ट 2009 तथा एनसीटीई की अधिसूचना 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों पर टीईटी की अनिवार्यता समाप्त किए जाने के लिए चलाए जा रहे शिक्षक की पाती अभियान में शिक्षकों की व्यापक सहभागिता हुई है। एक सप्ताह में प्रदेश के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश, नेता प्रतिपक्ष व मुख्यमंत्री को पोस्टकार्ड और ई-मेल से अपनी मांगों को भेजा है।

अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने शिक्षकों से अपील की है कि वे इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा दे। ताकि टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग को मजबूती मिल सके। उन्होंने कहा कि यह अभियान शिक्षक समाज के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों से जुड़ा हुआ विषय है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के मीडिया प्रभारी हरिशंकर राठौर ने बताया कि शिक्षक की पाती अभियान 9 से 15 मार्च तक घोषित था। शिक्षकों के उत्साह को देखते हुए अभियान को 16 मार्च से अगले एक सप्ताह तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। शिक्षकों की सेवा सम्मान को देखते हुए महासंघ में अब तक 23 संगठन जुड़कर संघर्ष कर रहे हैं। 




तीन लाख शिक्षकों ने टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में लिखी पाती

लखनऊ। देश भर में 8वीं कक्षा तक में पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने के विरोध में अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से पाती लिखने का अभियान जारी है। इसके तहत तीन दिन में सवा तीन लाख से ज्यादा शिक्षकों ने टीईटी से राहत देने के लिए राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखा है। 

महासंघ ने कहा है कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके साथ यह अन्यायपूर्ण निर्णय है। इससे उनको राहत दी जानी चाहिए। पूर्व में शिक्षा मंत्री ने इसके लिए सकारात्मक पहल की बात कही थी लेकिन आज तक केंद्र सरकार द्वारा इस पर कुछ नहीं किया गया। इससे देश भर के शिक्षकों में नाराजगी है। यदि जल्द इस पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो शिक्षक अपने आंदोलन को तेज करेंगे। 



टीईटी की अनिवार्यता को लेकर शिक्षकों ने लिखी राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व मुख्य न्यायाधीश को पाती

प्राथमिक शिक्षकों ने टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के खिलाफ अभियान शुरू किया। शिक्षकों ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, और अन्य को ई-मेल और पोस्टकार्ड भेजकर टीईटी को समाप्त करने की मांग की है।


लखनऊ। प्राथमिक शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) पास करने की अनिवार्य के खिलाफ सोमवार को प्रदेश भर के शिक्षकों ने शिक्षक पाती लिखने का अभियान शुरू किया। इसके तहत शिक्षकों द्वारा राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाई जा रही है।अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार को प्रदेश के करीब 1,07000 शिक्षकों ने पत्र भेजकर टेट से राहत देने की अपील की। महासंघ के प्रदेश संयोजक अनिल यादव ने बताया कि यह कार्यक्रम 15 मार्च तक अनवरत चलेगा।

आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं, उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। उन्होंने बताया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री से पूर्व में शिक्षकों का प्रतिनिधिमंडल मिला था और उन्होंने इस बारे में सकारात्मक आश्वासन भी दिया था लेकिन अभी तक इस दिशा में कोई सकारात्मक पहल केंद्र द्वारा नहीं किया गया है। इससे प्रदेश के एक लाख 86हजार शिक्षक उदास एवं हताश है। उन्होंने बताया कि एनसीटीई के गलत फैसले पूरे देश से 10 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इसमें सबसे अधिक यूपी के 1.86 लाख शिक्षक भी शामिल हैं। 


टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ शिक्षकों का अभियान आज से, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ की ओर से लिखी जाएगी पाती

लखनऊ। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के आह्वान पर सोमवार से एक सप्ताह तक प्रदेश व देश के शिक्षक पाती लिखने का अभियान चलाएंगे। राष्ट्रपति, मुख्य न्यायाधीश, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री व नेता विपक्ष को ई-मेल व पोस्टकार्ड लिखकर जबरन थोपे जा रहे टीईटी को समाप्त करने की गुहार लगाएंगे।

महासंघ ने कहा कि आरटीई लागू होने के पूर्व जो भी शिक्षक नियुक्त हैं उनके लिए टीईटी पास करना अनिवार्य करना पूर्णतया गलत व अन्यायपूर्ण है। बता दें कि टीईटी अनिवार्यता के विरोध में आंदोलन के लिए एक दर्जन शिक्षक संगठनों ने महासंघ का गठन किया है।


जोर पकड़ रहा TET अनिवार्यता का विरोध, उत्तर प्रदेश में अब चरणबद्ध आंदोलन करेंगे अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ से जुड़े 20 संगठन

तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा।

नौ मार्च से ‘शिक्षक की पाती’ अभियान से होगी शुरुआत


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों ने चरणबद्ध आंदोलन का ऐलान किया है। अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने सभी संबद्ध संगठनों को साथ लेकर आंदोलन की रणनीति तैयार की है। महासंघ में कुल 20 संगठन जुड़े हुए हैं।

आंदोलन के पहले चरण में नौ मार्च से 15 मार्च तक ‘शिक्षक की पाती’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके माध्यम से शिक्षक अपनी बात केंद्र सरकार तक पहुंचाने का प्रयास करेंगे। दूसरे चरण में 13 अप्रैल को मशाल जुलूस निकाला जाएगा।

तीसरे चरण में तीन मई को लखनऊ में रैली आयोजित कर एकजुटता और ताकत का प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद चौथे चरण में संसद का घेराव करने की योजना है।

महासंघ के पदाधिकारियों का कहना है कि पहले से नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से मुक्त किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि जिन शिक्षकों की सेवा पांच वर्ष से अधिक हो चुकी है, उनके लिए सेवा में बने रहने या पदोन्नति हेतु टीईटी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा अनिवार्य किया गया है।






टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 23 शिक्षक संगठनों की 3 मई को लखनऊ कूच की तैयारी

लखनऊ । शिक्षकों ने टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ सड़क से सदन तक देशव्यापी आंदोलन की घोषणा कर दी है। इसके लिए लखनऊ में संयुक्त मोर्चा के सभी शिक्षक संगठनों ने मिलकर अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ बनाया है जिसमें उत्तर प्रदेश के कई शिक्षक संगठन सम्मिलित है।

ऑल इंडिया प्राइमरी टीचर्स फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार पाण्डेय के आह्वान पर हुई सभी शिक्षक संगठनों की बैठक में उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ, अटेवा, जूनियर शिक्षक संघ, विशिष्ट BTC शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन, उत्तर प्रदेश BTC शिक्षक संघ, TSCT सहित 23 शिक्षक संगठन सम्मिलित है और सभी संगठनों ने सर्वसहमति से TET अनिवार्यता के खिलाफ एकजुट होकर संघर्ष का ऐलान किया है।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडे ने एकजुट संघर्ष को शिक्षकों की सेवा शर्तों व सम्मान की लड़ाई बताया साथ ही उन्होंने कहा कि कोई नियम आदेश आने के बाद लागू होता है न कि पूर्व से। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को अव्यावहारिक एकतरफा बताया वही अटेवा प्रमुख विजय कुमार बंधु ने टीईटी अनिवार्यता को सरकार की तानाशाही बताकर गरीबों की शिक्षा पर कुठाराघात करार देते हुए निजीकरण को बढ़ावा करार दिया।

प्राथमिक शिक्षक संघ मीडिया प्रभारी हरि शंकर राठौर ने जानकारी दी कि टीईटी आंदोलन कों चार चरणों में करने का निर्णय लिया गया जिसमें 3 मई को प्रदेश के लाखों शिक्षक लखनऊ के ईको गॉर्डन में ऐतिहासिक विशाल धरना प्रदर्शन करेंगे और उसके बाद शाम को शिक्षक विधानसभा की ओर कूच करेंगे। इससे पहले दिनांक 9 मार्च से 15 मार्च तक शिक्षकों की पाती अभियान चलेगा व 13 अप्रैल कों सभी जिला मुख्यालयों पर सायं 4 बजे से विरोध प्रदर्शन कर मशाल जुलुस निकालते हुए जिलाधिकारी के माध्यम प्रधानमंत्री भारत सरकार कों ज्ञापन भेजा जायेगा।



टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में तीन मई को लखनऊ में रैली करेंगे शिक्षक, अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ तेज करेगा आंदोलन


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से राहत दिलाने के लिए शिक्षकों का आंदोलन तेज हो रहा है। इसके तहत गठित अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ ने तीन मई को राजधानी लखनऊ में रैली व विधानसभा तक मार्च करने की घोषणा की है।


महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा । कि इसके तहत पहले चरण में नौ से 15 मार्च के बीच शिक्षक की पाती लिखने का कार्यक्रम होगा। इसमें प्रदेश के सभी शिक्षक राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश, मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष को ई मेल, पोस्टकार्ड से टीईटी की अनिवार्यता के विरोध में पत्र लिखेंगे। इसके बाद 13 अप्रैल को जिला मुख्यालयों पर मशाल जुलूस निकालेंगे।

तब भी मांगे नहीं मानी गई तो तीन मई को राजधानी के ईको गार्डन में एकत्र होकर रैली करेंगे। साथ ही विधानसभा तक मार्च भी करेंगे। महासंघ के संयोजक अनिल यादव ने कहा कि यदि फिर भी इसका समाधान नहीं हुआ तो मानसून सत्र में दिल्ली में संसद भवन का शिक्षक घेराव करेंगे। जल्द ही इसके लिए एक बैठक फिर से राजधानी में सभी संगठनों की होगी।


धर्मेंद्र प्रधान के बयान से नाराजगी

शिक्षक-कर्मचारी नेताओं ने शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के उस बयान पर नाराजगी जताई है, जिसमें उन्होंने पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान शिक्षकों से कहा कि पहले आप मेरी सरकार बनाओ, फिर हम टीईटी की अनिवार्यता पर विचार करेंगे। महासंघ के राष्ट्रीय संयोजक सुशील कुमार पांडेय एवं विजय कुमार बंधु ने कहा कि केंद्रीय मंत्री द्वारा दिया गया यह बयान सौदेबाजी है।


महासंघ के समर्थन में आए कई संघ

अखिल भारतीय संयुक्त शिक्षक महासंघ के समर्थन में कई और शिक्षक संगठन आए हैं। महासंघ के प्रदेश महासचिव दिलीप चौहान ने बताया कि टीईटी की इस लड़ाई में उत्तर प्रदेश शिक्षामित्र संघ के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला, प्रशिक्षित स्नातक शिक्षक एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय सिंह, वैचारिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष ज्ञान प्रकाश सिंह, एससीएसटी टीचर्स संघ के प्रदेश महामंत्री वेद प्रकाश सरोज ने पत्र लिखकर समर्थन दिया है।

Sunday, March 15, 2026

पांच बीएसए और 4 बीईओ सहित यूपी के 9 शिक्षाधिकारी होंगे सम्मानित, इनोवेशन व शैक्षिक प्रशासन में अच्छे प्रयोग के लिए हुए चयनित

पांच बीएसए और 4 बीईओ सहित यूपी के 9 शिक्षाधिकारी होंगे सम्मानित, इनोवेशन व शैक्षिक प्रशासन में अच्छे प्रयोग के लिए हुए चयनित


लखनऊ। प्रदेश के नौ शिक्षा अधिकारी को उनके इनोवेशन व शैक्षिक प्रशासन में अच्छे प्रयोग के लिए सम्मानित किया जाएगा। इसमें सीतापुर के बीएसए अखिलेश प्रताप सिंह समेत नौ शिक्षा अधिकारी शामिल हैं।

अन्य अधिकारियों में कौशांबी के बीएसए डॉ. कमलेंद्र कुमार कुशवाहा, सोनभद्र के बीएसए मुकुल आनंद पांडेय व कन्नौज के बीएसए संदीप कुमार शामिल हैं। 

इसके साथ ही गौतमबुद्धनगर के बीईओ मोहम्मद राशिद, रामपुर की बीईओ बबीता सिंह, हरदोई के बीईओ डॉ. ब्रजेश कुमार त्रिपाठी, प्रयागराज के बीईओ क्षमा शंकर पांडेय व वाराणसी के बीईओ संजय कुमार यादव भी शामिल हैं।

बेसिक शिक्षा विभाग के संयुक्त सचिव वेद प्रकाश राय की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा) दिल्ली के प्रस्ताव के क्रम में शासन ने 2023-24 व 2025-26 के लिए संबंधित अधिकारियों को एनओसी की अनुमति दी है। उन्होंने इसकी जानकारी सभी संबंधित अधिकारियों को दी है।


RTE अंतर्गत प्रवेश हेतु तीसरे चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 मार्च तक, 27 मार्च को निकलेगी लॉटरी

RTE अंतर्गत प्रवेश हेतु तीसरे चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 मार्च तक, 27 मार्च को निकलेगी लॉटरी 


लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर व वंचित वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन का आखिरी चरण शुरू हो गया है। तीसरे चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन 25 मार्च तक किए जा सकेंगे जबकि लॉटरी 27 मार्च को होगी। 


पहले और दूसरे चरण में 1.56 लाख बच्चों को निजी विद्यालयों में सीट आवंटित की गई हैं। इनकी प्रवेश प्रक्रिया चल रही है। बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा है कि आरटीई से निजी विद्यालयों में सीट आवंटन की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन की जा रही है। 

बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि आरटीई के पहले दो चरणों में लखनऊ, कानपुर नगर, वाराणसी, आगरा, मुरादाबाद और बुलंदशहर आदि जिलों में सर्वाधिक सीटों का आवंटन हुआ है। 

Friday, March 13, 2026

मानव संपदा पोर्टल पर आठ जिलों के 16 शिक्षकों के नाम व अभिलेख एक जैसे, सभी लखनऊ तलब किए गए

मानव संपदा पोर्टल पर आठ जिलों के 16 शिक्षकों के नाम व अभिलेख एक जैसे, सभी लखनऊ तलब किए गए

गाजीपुर के तीन में से एक शिक्षक ने गुपचुप तरीके से दिया त्यागपत्र, दो भूमिगत


गाजीपुर। वाराणसी, गाजीपुर, जौनपुर और आजमगढ़ समेत आठ जिलों के एक प्रधानाध्यापक, दो प्रभारी प्रधानाध्यापक और 13 सहायक अध्यापकों के नाम व अभिलेख एक जैसे पाए जाने के बाद शिक्षा विभाग में खलबली मची है। शिक्षा निदेशक बेसिक ने संबंधित जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों और संबंधित शिक्षकों को पटल सहायकों के साथ 16 मार्च को लखनऊ तलब किया है।


उधर, विभागीय सूत्रों का कहना है कि शासन की ओर से सूची जारी होने ओर उसमें जिले के तीन शिक्षकों के नाम सामने आने के बाद एक ने गुपचुप त्याग पत्र दे दिया है जबकि दो अन्य भूमिगत हो गए हैं। शिक्षा निदेशक बेसिक प्रताप सिंह बघेल ने इस संबंध में नौ मार्च को पत्र जारी किया है।

 पत्र में उल्लेख है कि जनवरी में मानव संपदा पोर्टल पर जांच के बाद गाजीपुर में तीन, वाराणसी में दो, जौनपुर में दो, आजमगढ़ में पांच, रायबरेली, सुल्तानपुर, बस्ती और सीतापुर जिले से एक-एक समेत 16 शिक्षकों को चिह्नित किया गया है। इनकी एक से अधिक आईडी मानव संपदा पोर्टल पर सक्रिय पाई गई है।


इन 16 शिक्षकों को बुलाया गया

गाजीपुर की अनिता शुक्ला, हेडमास्टर, दिग्विजय कुमार राय, हेडमास्टर श्रीकांत सिंह, वाराणसी के रवि प्रकाश मिश्रा, श्रीकांत सिंह, आजमगढ़ के रवि प्रकाश मिश्रा, सज्जन कुमार, जयशंकर यादव, मनोज कुमार, दिग्विजय कुमार राय, सज्जन कुमार, जौनपुर के धीरेंद्र कुमार यादव, जयशंकर यादव, धीरेंद्र कुमार यादव, बस्ती के मनोज कुमार व सीतापुर के यूपीएस कोक्नामाउ कंपोजिट स्कूल की प्रभारी हेडमास्टर अनिता शुक्ला का नाम शामिल है।

Wednesday, March 11, 2026

शिक्षामित्रों के नियमितीकरण पर दो माह में निर्णय लेंः हाईकोर्ट

शिक्षामित्रों के नियमितीकरण पर दो माह में निर्णय लेंः हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने 115 शिक्षा मित्रों की याचिका पर दिया आदेश


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को शिक्षामित्रों की सेवा नियमित करने के मामले में निर्णय लेने का निदेश दवा को कोर्ट ने यह आदेश जाग्गों, श्रीपाल केस में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के आधार पर दिया है। कोर्ट ने कहा कि 115 याची प्रत्यावेदन । तीन सप्ताह में अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा को दें और अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा दो माह में विचार कर सहायक अध्यापक पद पर नियमितीकरण मामले में फैसला लें।


 यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने तेज बहादुर मौर्य और 114 अन्य शिक्षा मित्रों की याचिका निस्तारित कर दिया है। याचियों के अधिवक्ता सत्येंद्र चंद्र त्रिपाठी के अनुसार याची बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षा मित्र के रूप में वर्षों से कार्यरत हैं। लंबी सेवा को देखते हुए उन्हें सहायक अध्यापक के रूप में नियमित करने की मांग की गई।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के 11 जून 2025 के आदेश के अनुसार याची नियमित किए जाने के हकदार हैं। सरकार की ओर से कहा गया कि हाईकोर्ट ऐसे ही मामले में विशेष अपील खारिज कर चुका है। यह सरकार का नीतिगत मामला है इसमें कोर्ट को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। याची के अधिवक्ता ने कहा कि बदली परिस्थितियों और सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के आलोक में याची नियमित होने के हकदार हैं, इसलिए उनके मामले में विचार किया जाना चाहिए। इस पर कोर्ट ने सरकार को याचियों के मामले में दो माह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

कोर्ट ऑर्डर 👇


राज्य विश्वविद्यालयों, एडेड व स्वावित्तपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों और परिजनों को मिलेगा पांच लाख तक का सालाना कैशलेस उपचार, कैबिनेट की मंजूरी

राज्य विश्वविद्यालयों, एडेड व स्वावित्तपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों और परिजनों को मिलेगा पांच लाख तक का सालाना कैशलेस उपचार, कैबिनेट की मंजूरी 

10 मार्च 2026
लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों को बड़ी राहत देते हुए चिकित्सा प्रतिपूर्ति व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। राज्य विश्वविद्यालयों, अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों व स्वावित्तपोषित डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों और कर्मचारियों और परिजनों को पांच लाख तक का सालाना कैशलेस उपचार मिलेगा। इनमें नियमित पाठ्यक्रमों के साथ-साथ स्वावित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों व कर्मियों को भी इसका लाभ मिलेगा। 

योजना के तहत प्रति शिक्षक लगभग 2479 रुपये का प्रीमियम खर्च आएगा। इस व्यवस्था से प्रदेश के 1.28 लाख से अधिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलने का अनुमान है। इसके लिए राज्य सरकार पर करीब 31.92 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

सरकार की इस पहल के तहत निजी अस्पतालों को भी योजना से जोड़ा जाएगा, ताकि शिक्षकों और कर्मचारियों को इलाज के लिए अधिक विकल्प मिल सकें और उन्हें समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध हो सकें।





अब उच्च शिक्षा विभाग के शिक्षकों को भी मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा, आज की कैबिनेट में मिल सकती है स्वीकृति 

09 मार्च 2026
लखनऊ: करीब एक माह बाद मंगलवार को लोक भवन में कैबिनेट की बैठक होने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में आवास, स्टांप, औद्योगिक विकास, ऊर्जा, परिवहन, शिक्षा आदि विभागों के 27 से अधिक प्रस्तावों को स्वीकृति मिल सकती है। 


प्रदेश सरकार बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभागों के बाद अब उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले अशासकीय सहायताप्राप्त महाविद्यालयों में कार्यरत नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षक, स्ववित्तपोषित मान्यताप्राप्त महाविद्यालयों के शिक्षकों व राज्य विश्वविद्यालयों में कार्यरत नियमित और स्ववित्तपोषित पाठ्यक्रमों के शिक्षकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने जा रही है। मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिल सकती है।

Tuesday, March 10, 2026

500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में लगेगा आधार कैंप, प्रदेश के करीब पौने चार करोड़ बच्चों का आधार अपडेट करने की कवायद

500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूलों में लगेगा आधार कैंप, प्रदेश के करीब पौने चार करोड़ बच्चों का आधार अपडेट करने की कवायद


लखनऊ। आधार कार्ड में अनिवार्य बायोमीट्रिक अपडेट के लिए भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) 500 से अधिक विद्यार्थियों वाले स्कूल-कॉलेजों में कैंप लगाएगा। इसके लिए करीब डेढ़ लाख शिक्षण संस्थान चिह्नित किए गए हैं।


पांच व 15 साल की उम्र पर आधार कार्ड बायोमीट्रिक अपडेट करवाना अनिवार्य है। ये सुविधा यूआईडीएआई निशुल्क दे रहा है। इसके बावजूद प्रदेश के 2.64 लाख स्कूलों के करीब पौने चार करोड़ विद्यार्थियों का आधार अपडेट बाकी है। अभी तक यूआईडीएआई करीब एक लाख ऐसे शिक्षण संस्थानों में कैंप लगवा रहा था, जहां विद्यार्थियों की संख्या एक हजार या इससे अधिक है। अब इसमें बदलाव करते हुए संस्थानों में विद्यार्थियों की न्यूनतम संख्या पांच सौ तय की गई है।


आधार केंद्र जाकर खुद भी करा सकते हैं अपडेट यूआईडीएआई के अफसरों ने लोगों से अपील की है कि वह अपने बच्चों के आधार केंद्रों पर जाकर अपडेट करवाएं। इसके लिए उनको कोई भुगतान नहीं करना होगा।

Monday, March 9, 2026

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात, जल्द मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात,  जल्द मानदेय बढ़ाने की घोषणा भी की

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों को साड़ी-यूनिफॉर्म, बीमा और आयुष्मान कार्ड की सौगात दी। डीबीटी के जरिये कुल 38.49 करोड़ रुपये की धनराशि सीधे उनके खातों में भेजी गई। सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने का वादा भी किया।


सीएम ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को साड़ी-यूनिफॉर्म के लिए डीबीटी के माध्यम से 29.59 करोड़ रुपये की धनराशि स्थानांतरित की। उन्होंने मंच पर नेहा दुबे, मानसी साहू, पूनम तिवारी, मनोरमा मिश्रा को साड़ी भेंट की तो सेवा मित्र आकांक्षा (ब्यूटीशियन) और रत्ना भारती को यूनिफॉर्म सौंपी। इसके अलावा बीमा प्रीमियम की 8.90 करोड़ रुपये की धनराशि भी स्थानांतरित की। 

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, मिनी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को सामाजिक सुरक्षा देने के लिए उन्हें प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना से जोड़ा। इसके तहत 18 से 50 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं की मृत्यु होने पर परिजनों को 2 लाख रुपये मिला है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 436 रुपये है।

वहीं 18 से 59 वर्ष आयु वर्ग की पात्र कार्यकर्ताओं को प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना के अंतर्गत दुर्घटना में मृत्यु या पूर्ण स्थायी विकलांगता होने पर 2 लाख रुपये तथा आंशिक स्थायी विकलांगता पर 1 लाख रुपये का बीमा कवर मिलता है, जिसका वार्षिक प्रीमियम 20 रुपये है। इसके अलावा सीएम ने पांच आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं गुड़िया सिंह, प्रियंका सिंह, सुधा अवस्थी, उमा सिंह और लालावती को मंच पर बुलाकर आयुष्मान कार्ड प्रदान किए। 

अलविदा (रमजान के अंतिम शुक्रवार) पर अवकाश घोषित करने की मांग

अलविदा (रमजान के अंतिम शुक्रवार) पर अवकाश घोषित करने की मांग

लखनऊ। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने मुख्यमंत्री से अलविदा का 20 मार्च को अवकाश घोषित करने की मांग की है। संघ ने कहा है कि रमजान का अंतिम शुक्रवार अलविदा 20 मार्च 2026 को पड़ रहा है। पूर्व के वर्षों में रमजान माह के अंतिम शुक्रवार को अलविदा का अवकाश घोषित किया जाता रहा है। किंतु बेसिक के कैलेंडर में यह अवकाश अब नहीं है। 


20 मार्च को रमजान का अंतिम शुक्रवार पर अवकाश की मांग 

उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाईस्कूल (पूर्व मान्यता) शिक्षक संघ, उत्तर प्रदेश ने मुख्यमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर 20 मार्च 2026 को “अलविदा जुमे” के अवसर पर अवकाश घोषित करने की मांग की है। 

शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय मणि त्रिपाठी, प्रदेश कोषाध्यक्ष मज़हर मुहम्मद खां और प्रदेश महामंत्री अरुणेन्द्र कुमार वर्मा के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र में कहा गया है कि इस वर्ष रमजान माह का अंतिम शुक्रवार यानी 20 मार्च 2026 को “अलविदा जुमे” का दिन पड़ रहा है। परंपरागत रूप से इस दिन अवकाश घोषित किया जाता रहा है, लेकिन इस बार बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा जारी अवकाश तालिका में इस दिन को शामिल नहीं किया गया है। इसी आधार पर संघ ने सरकार से अनुरोध किया है कि इस दिन के महत्व को देखते हुए इसे अवकाश घोषित किया जाए।



स्कूल चलो अभियान' में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों पर भी रहेगी नजर

स्कूल चलो अभियान' में पढ़ाई बीच में छोड़ने वाले बच्चों पर भी रहेगी नजर


 लखनऊ । प्रदेश में कोई भी बच्चा पढ़ाई से वंचित न रहे, इसके लिए इस बार 'स्कूल चलो अभियान' को और अधिक व्यापक रूप से चलाने की तैयारी की जा रही है। अपर मुख्य सचिव बेसिक और माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने अधिकारियों और शिक्षकों को निर्देश दिए हैं कि अप्रैल से शुरू होने वाले अभियान में सिर्फ नए बच्चों के नामांकन पर ही नहीं, बल्कि एक कक्षा उत्तीर्ण कर अगली कक्षा में प्रवेश लेने की बजाय पढ़ाई छोड़ने वाले (ड्राप आउट) बच्चों पर भी नजर रखी जाए। 


अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों से संकल्प लेने को कहा कि कोई भी बालक या बालिका शिक्षा से बाहर न रहे। शैक्षणिक सत्र 2025-26 के अनुसार प्रदेश में प्राथमिक स्तर (कक्षा एक से पांच) पर नामांकन दर 90.9 प्रतिशत है, जबकि ड्रापआउट दर करीब 1.9 प्रतिशत है।

प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी

प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर रखे जायेंगे एक काउंसलर, पहले चरण में राजकीय और अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में व्यवस्था लागू होगी

वित्तविहीन महाविद्यालयों, निजी विश्वविद्यालयों में भी रखे जाएंगे

34 करोड़ रुपये का प्रावधान स्वास्थ्य नीति के तहत


प्रयागराज। प्रदेश के उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रत्येक 100 विद्यार्थियों पर एक काउंसलर रखे जाएंगे। मानसिक स्वास्थ्य नीति के तहत सरकार ने बजट में 34 करोड़ रुपये का प्रावधान भी किया है। पहले चरण में 216 राजकीय और 330 अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में इसे लागू किया जाएगा और उसके बाद वित्तविहीन महाविद्यालयों में काउंसलर की व्यवस्था की जाएगी। काउंसलर को निश्चित मानदेय दिया जाएगा।


सुकदेव साहा बनाम आंध्र प्रदेश राज्य (2025) में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में प्रत्येक छात्र के लिए प्रमाणित काउंसलर, मनोवैज्ञानिक अथवा बाह्य विशेषज्ञ की उपलब्धता सुनिश्चित कराने के लिए उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी कवायद शुरू कर दी है। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. बीएल शर्मा ने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य नीति का उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की सुरक्षा, संवर्धन और गरिमापूर्ण जीवन की गारंटी है ताकि शैक्षिक संस्थानों में हर छात्र समावेशी, सुरक्षित और सहयोगी वातावरण में तनावमुक्त, आत्मनिर्भर एवं सकारात्मक रूप से विकसित हो सके।

काउंसलर की नियुक्ति से त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा एवं आकस्मिक सहायता तो मिलेगी ही उत्पीड़न, भेदभाव, रैगिंग, यौन हिंसा और असंवेदनशील व्यवहार के खिलाफ गोपनीय शिकायत और सहयोग की व्यवस्था भी होगी। अभिभावकों के लिए जागरूकता, साक्षरता व जीवन कौशल शिक्षा का समावेश भी करेंगे जिससे वे बच्चों पर अनुचित दबाव न डालें तथा मानसिक संकट को समझ सकें। सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां, करियर काउसलिंग एवं व्यक्तित्व विकास के माध्यम से छात्रों में आत्मविश्वास, सामर्थ्य व सकारात्मक मानसिकता का निर्माण होगा।



खास-खास

त्वरित मानसिक स्वास्थ्य सेवा, अस्पताल व आत्महत्या रोकथाम हेल्पलाइन के लिए लिखित प्रोटोकॉल, टेली एवं मानस जैसे नंबर हर कक्षा, हॉस्टल, अन्य स्थलों एवं वेबसाइट पर प्रमुखता से लिखना होगा।

सभी शिक्षक, गैर-शिक्षक स्टाफ के लिए मानसिक स्वास्थ्य पर साल में कम-से-कम दो बार प्रशिक्षण-मनोवैज्ञानिक फर्स्ट एड, चेतावनी संकेत पहचान आदि की व्यवस्था।

नियमित रूप से छात्रों व अभिभावकों दोनों के लिए पाठ्येतर गतिविधियां (खेल, कला, व्यक्तित्व विकास) व संरचित करियर काउंसलिग।

हॉस्टलों व आवासीय संस्थानों में छेड़छाड़, ड्रग्स, उत्पीड़न, टेम्पर-प्रूफ पंखे, छत/बालकनी की पहुंच नियंत्रित करने जैसे उपाय होंगे।

एससी, एसटी, ओबीसी, दिव्यांग व अन्य संवेदनशील छात्रों के लिए विशेष ध्यान, सहयोग व गैर भेदभावपूर्ण वातावरण, क्रियाशील आंतरिक शिकायत समिति/एंटी रैगिंग सेल।

Sunday, March 8, 2026

RTE : दूसरे चरण में आए 1.02 लाख आवेदन, 9 मार्च को लॉटरी, 11 मार्च तक प्रवेश

RTE : दूसरे चरण में आए 1.02 लाख आवेदन, 9 मार्च को लॉटरी, 11 मार्च तक प्रवेश

8 मार्च 2026
लखनऊ। प्रदेश में आरटीई के तहत निजी स्कूलों की 25 प्रतिशत सीटों पर गरीब परिवारों के बच्चों के दाखिले की प्रक्रिया जारी है। पहले चरण में करीब 2.61 लाख आवेदन आए थे, जिनमें से 96 हजार बच्चों को सीटें आवंटित की गई थीं। वहीं, दूसरे चरण के लिए अब तक 1.02 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं। शनिवार को इसकी अंतिम तिथि थी। इस चरण के लिए 9 मार्च को लॉटरी निकाली जाएगी। जिन बच्चों को सीटें मिलेंगी, उन्हें निजी स्कूल 11 मार्च तक प्रवेश देंगे। 

जिलों की बात करें तो सबसे अधिक 5949 आवेदन लखनऊ में आए हैं। इसके बाद आगरा (4509), बुलंदशहर (4502), कानपुर नगर (3617) और बिजनौर (3228) का स्थान है। वहीं, सबसे कम आवेदन श्रावस्ती, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और बलरामपुर में मिले हैं। समग्र शिक्षा के उपनिदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि आरटीई प्रवेश का तीसरा और अंतिम चरण 12 से 25 मार्च तक चलेगा। 27 मार्च को लॉटरी निकलेगी और 29 मार्च तक प्रवेश पूरा कराया जाएगा। 




प्राइवेट स्कूलों में 'फ्री' एडमिशन का मौका, आरटीई के तहत आवेदन का दूसरा चरण है शुरू, जानें पूरा शेड्यूल

22 फरवरी 2026
लखनऊ । उत्तर प्रदेश के प्राइवेट स्कूलों में निशुल्क शिक्षा पाने का सपना देख रहे बच्चों और उनके अभिभावकों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर फिर से सामने आया है। शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत दूसरे चरण की प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है।

शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के बच्चों को निजी स्कूलों में दाखिला दिलाने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार ने दूसरे चरण का बिगुल फूंक दिया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए द्वितीय चरण के ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शनिवार, 21 फरवरी से आधिकारिक तौर पर प्रारंभ हो गई है। इस चरण का उद्देश्य उन बच्चों को कवर करना है जो पहले चरण में आवेदन करने से चूक गए थे या जिन्हें सीट आवंटित नहीं हो सकी थी।

पहले चरण का प्रदर्शन: लखनऊ अव्वल शिक्षा विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पहले चरण में प्रदेश भर से कुल 2,61,501 बच्चों ने निजी विद्यालयों में दाखिले के लिए रुचि दिखाई थी। व्यापक स्तर पर हुई स्क्रूटनी और बीते बुधवार को जिला स्तर पर निकाली गई पारदर्शी लॉटरी के माध्यम से 96,000 बच्चों को सीटें आवंटित की जा चुकी हैं।

जिलों की स्थिति देखें तो राजधानी लखनऊ 18,107 आवेदनों के साथ पहले स्थान पर रहा। वाराणसी 17,476 आवेदनों के साथ दूसरे, आगरा 13,627 आवेदनों के साथ तीसरे और कानपुर नगर 13,546 आवेदनों के साथ चौथे स्थान पर रहा। इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि शहरी क्षेत्रों में आरटीई के प्रति जागरूकता काफी अधिक है।

महानिदेशक के सख्त निर्देश: प्रतिदिन होगी समीक्षा स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी ने इस अभियान को लेकर अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने कहा है कि दूसरे चरण में अधिक से अधिक पात्र बच्चों को जोड़ने के लिए ब्लाक और ग्राम पंचायत स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाए। अधिकारियों को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि प्राप्त होने वाले आवेदनों के सत्यापन (Verification) का कार्य लटकाया न जाए। सत्यापन का कार्य अब प्रतिदिन पूर्ण किया जाएगा और इसकी राज्य स्तर से रोजाना समीक्षा की जाएगी।


कैसे करें आवेदन और क्या है पात्रता? 
दूसरे चरण के तहत अभिभावक आरटीई के आधिकारिक वेब पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र अनिवार्य दस्तावेज हैं। यह योजना उन परिवारों के लिए संजीवनी है जिनकी वार्षिक आय सीमा शासन द्वारा निर्धारित मानक के भीतर है। दूसरे चरण की लॉटरी प्रक्रिया मार्च में आयोजित होने की संभावना है।

सरकार की इस पहल का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से वंचित न रहे। प्राइवेट स्कूलों में 25 प्रतिशत आरक्षित सीटों पर होने वाले इन दाखिलों से सामाजिक समानता को भी बढ़ावा मिल रहा है।





RTE के पहले चरण में आए 2.61 लाख आवेदन, लखनऊ 18107 के साथ टॉप पर, आज खुलेगी लाटरी, इसके बाद होंगे प्रवेश

18 फरवरी 2026
लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस साल पहले चरण में ही रिकॉर्ड आवेदन हुए। दो से 16 फरवरी तक हुए आवेदन में 2.61 लाख से ज्यादा आवेदन हुए हैं। जबकि पिछले साल पहले चरण में 1.32 लाख आवेदन हुए थे।

प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों में आरटीई की 6.80 लाख सीटों के सापेक्ष दो से 16 फरवरी तक सत्र 2026-27 के लिए आवेदन हुए हैं। पहले चरण की आवेदन प्रक्रिया समाप्त होने पर कुल 261501 आवेदन हुए हैं। साथ ही बीएसए के द्वारा इनका सत्यापन भी कर दिया गया है। अब 18 फरवरी को लॉटरी करके प्रवेश प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी।

पहले चरण में लखनऊ 18107 आवेदन के साथ टॉप पर है। इसके अलावा वाराणसी में 17476, आगरा में 13627, कानपुर नगर में 13546, बुलंदशहर में 10831, मेरठ में 9145, मुरादाबाद में 9028, अलीगढ़ में 8567, प्रयागराज में 7173 व हाथरस में 7074 आवेदन हुए हैं। जबकि सबसे कम श्रावस्ती में 125, चित्रकूट में 211, हमीरपुर में 220, बस्ती में 369, कानपुर देहात में 485, महोबा में 486 व कन्नौज में 495 आवेदन ही हुए हैं। समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने बताया कि इस साल रिकॉर्ड आवेदन हुए हैं।




UP RTE : पहले चरण में ही रिकॉर्ड 2.25 लाख आवेदन

पिछले साल से ज्यादा प्रवेश का लक्ष्य, लखनऊ व बनारस में 15 हजार से ज्यादा आवेदन

14 फरवरी 2026
लखनऊ। प्रदेश में निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत इस साल पहले चरण में ही रिकॉर्ड आवेदन होते दिख रहे हैं। दो फरवरी से शुरू हुए आवेदन में अब तक दो लाख से ज्यादा आवेदन हो चुके हैं जबकि आवेदन का आखिरी दिन 16 फरवरी है। जबकि पिछले साल पहले चरण में 1.32 लाख आवेदन हुए थे।


प्रदेश के 68 हजार निजी विद्यालयों में आरटीई के 6.80 लाख सीटों के सापेक्ष दो फरवरी से सत्र 2026-27 के लिए आवेदन शुरू हुए हैं। शनिवार देर शाम तक 2.25 लाख से अधिक आवेदन हो चुके हैं। जबकि अभी दो चरण और बाकी हैं। इसे लेकर बेसिक शिक्षा विभाग भी उत्साहित है। इसके साथ ही प्रतिदिन आने वाले आवेदनों का बीएसए द्वारा सत्यापन भी उसी दिन किया जा रहा है।

इसमें मिलने वाली कमियों को दुरुस्त भी कराया जा रहा है। ताकि निर्धारित समय के अनुसार 18 फरवरी को लाटरी जारी की जा सके। अब तक के आंकड़ों के अनुसार 15899 आवेदन के साथ लखनऊ टॉप पर है। जबकि इसके साथ ही 15494 आवेदन वाराणसी, 11980 आगरा, 11418 कानपुर नगर, 9393 बुलंदशहर, 7759 मुरादाबाद, 7560 अलीगढ़, 7542 मेरठ, 6275 हाथरस व 5883 आवेदन प्रयागराज में हुए हैं।

समग्र शिक्षा के उप निदेशक डॉ. मुकेश कुमार सिंह ने कहा कि अभी आखिर के दो दिनों में आवेदन की संख्या और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस साल प्रवेश आवेदन शुरू होने से पहले जिलों में व्यापक प्रचार-प्रसार किया गया है ओर लोगों में जागरूकता भी बढ़ रही है। इसका लाभआर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों को मिलेगा। हम इस बार रिकॉर्ड आवेदन के लिए भी पूरा प्रयास करेंगे।


यहां हुए हैं कम आवेदन

श्रावस्ती 110, चित्रकूट 159, हमीरपुर 175, बस्ती 297, कानपुर देहात 384, कन्नौज 404, महोबा 405, औरैया 462, संतकबीरनगर 476, बहराइच 505, बलरामपुर 582, देवरिया 619, प्रतापगढ़ 690, गोंडा 739

Saturday, March 7, 2026

आंध्र और कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा

आंध्र और कर्नाटक में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा

25% हैं राज्य की आबादी में 15 साल से कम उम्र के बच्चे

12 लाख छात्रों के लिए की जाएगी 'एआई ट्यूटर' की व्यवस्था


अमरावती/बेंगलुरु । आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में राज्य सरकारों ने नाबालिगों के सोशल मीडिया का इस्तेमाल करने पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। आंध्र प्रदेश में 13 साल, जबकि कर्नाटक में 16 साल से कम उम्म्र के बच्चे सोशल मीडिया नहीं चला सकेंगे। आंध्र प्रदेश ने 90 दिन (तीन माह) के भीतर नियम लागू करने की बात कही है, वहीं कर्नाटक ने अभी प्रतिबंध लागू होने की तारीख स्पष्ट नहीं की है। प्रतिबंध लागू होने पर ये दोनों राज्य ऐसा करने वाले देश के पहले राज्य बन जाएंगे।


शुक्रवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने विधानसभा में बजट भाषण के दौरान कहा कि बच्चों पर मोबाइल का इस्तेमाल करने से होने वाले बुरे असर को रोकने के मकसद से प्रतिबंध लागू किया जाएगा। उन्होंने स्कूलों, कॉलेजों और विश्ववविद्यालयों में ड्रग्स का इस्तेमाल को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की भी बात कही। सिद्धरमैया ने कहा कि छात्रों के स्वास्थ्य और भविष्य निर्माण की चिंता के साथ सरकार जागरूकता कार्यक्रमों के अलावा स्कूल-कॉलेजों में काउंसिलिंग सेंटर भी स्थापित करेगी। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रतिबंध कबसे लागू होगा।

दूसरी ओर, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य में 13 साल से कम उम्र के बच्चों बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्रतिबंधित होगा। कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि प्रदेश में 13 साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया का इस्तेमाल नहीं कर सकें। उन्होंने बताया कि 90 दिन के भीतर प्रदेश में यह प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

उम्र 16 वर्ष तक करने पर चल रहा विचारः आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि राज्य सरकार इस पहलू पर विचार कर रही है कि आयुसीमा 13 ही रखी जाए या इसे बढ़ाकर 16 वर्ष किया जाए। बताया कि तीन माह में अंतिम निर्णय होते ही प्रतिबंध लागू हो जाएगा।

जल्द तैयार होगी विशेष योजना
कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने एक सवाल के जवाब में बताया कि स्कूलों, कॉलेजों और घरों में बच्चों के सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर रोक को लेकर नियमावली बनाई जाएगी। कहा कि इसे लेकर एक विशेष योजना बनाई जा रही है। अंतिम रूप दिए जाते ही इसकी जानकारी दी जाएगी।

संसद में भी जताई जा चुकी चिंताः जनवरी जनवरी में संसद में पेश किए गए केंद्र सरकार के आर्थिक सर्वे में भी बच्चों में बढ़ रही डिजिटल लत को लेकर चिंता जताई गई थी।



एआई एआई डिजिटल डिजिटल ट्यूटर ट्यू

बेंगलुरु। शिक्षा में एआई तकनीक के इस्तेमाल को लेकर मुख्यमंत्री ने कहा कि आईआईटी धारवाड़ की मदद से 'सेल्फ लर्निंग डिजिटल ट्यूटर' सुविधा दी जाएगी। कक्षा आठ से 12वीं तक के करीब 12.28 लाख छात्रों को इसका लाभ मिलेगा। इस पर सरकार पांच करोड़ रुपये खर्च करेगी।


एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत दुनिया का सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है। देश में 75 करोड़ मोबाइल फोन हैं, जबकि एक अरब के करीब इंटरनेट उपयोगकर्ता है। मेटा के लिहाज से भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। यहां फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप के उपयोगकर्ताओं की संख्या दुनिया में सबसे अधिक है।


समान रूप से लागू होनियम : मेटा

नई दिल्ली। कर्नाटक द्वारा 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध की घोषणा के बाद, मेटा ने शुक्रवार को कहा कि इस तरह के प्रतिबंधों से किशोर कम सुरक्षित, और अनियमित साइटों की ओर जा सकते हैं। ऐसा कोई भी निर्णय लेने से पहले सरकारों को सावधानी बरतनी चाहिए। मेटा ने कहा कि वह प्रतिबंधों का पालन करेगी। मेटा ने कहा कि किशोर हर हफ्ते 40 ऐप इस्तेमाल करते है, इसलिए कुछ चुनिंदा कंपनियों को निशाना बनाने से उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होगी।


दुनियाभर में कई देश कस रहे नकेल
कहा-कहां लगाम

ऑस्ट्रेलिया: पिछले साल दिसंबर में ऑस्ट्रेलिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया।

फ्रांसः इस साल जनवरी में 15 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का कानून पारित हो गया।

स्पेनः स्पेन सरकार ने भी हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए ऐसे ही प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा है। इस पर जल्द फैसला लिया जाएगा।

ब्रिटेन: वर्तमान में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए प्रतिबंध पर जनता की राय चल रही है।

नार्वे: यहां पर 15 साल से कम उम्र वालों के लिए सोशल मीडिया बैन का प्रस्ताव पेश किया गया है, जल्द ही कानून बनने की उम्मीद है।

अमेरिका: वर्जीनिया और फ्लोरिडा राज्यों ने एक घंटे की समयसीमा तय की है। 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है।

डेनमार्क: डेनमार्क में 15 साल से कम उम्र पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि माता-पिता की अनुमति से 13 साल तक के बच्चे कुछ ऐप चला सकेंगे

चीन: यहां माइनर मोड प्रोग्राम लागू है, जो उम्र के हिसाब से स्क्रीन टाइम और ऐप के इस्तेमाल को सीमित करता है।


इंटरनेट और डेटा केंद्र सरकार के आईटी मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आते हैं, इसलिए कर्नाटक सरकार को भारत के डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट 2023 के साथ इस राज्य-स्तरीय बैन को जोड़ना होगा। इससे पहले, राज्य सरकार विधानसभा में एक नया विधेयक पेश करेगी या मौजूदा आईटी नियमों में

Friday, March 6, 2026

विश्वविद्यालय-कॉलेजों के छात्रों का आयुष्मान हेल्थ अकाउंट बनेगा, अपलोड होगी मेडिकल हिस्ट्री

विश्वविद्यालय-कॉलेजों के छात्रों का आयुष्मान हेल्थ अकाउंट बनेगा, अपलोड होगी मेडिकल हिस्ट्री


विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में आयुष्मान भारत डिजिटल हेल्थ मिशन (एबीडीएम) के तहत सभी विद्यार्थियों का आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (एबीएचए) बनाया जाएगा। हॉस्पिटल मैनेजमेंट इनफॉर्मेशन सिस्टम (एचआईएमएस) से सभी विद्यार्थियों का हेल्थ अकाउंट जुड़ेगा। फिर विद्यार्थी संस्थान की क्लीनिक से लेकर किसी भी बड़े अस्पताल में दिखाने जाएंगे तो पूरी मेडिकल हिस्ट्री एक क्लिक पर डॉक्टर देख सकेंगे।


विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) की ओर से चलाए जा रहे एबीडीएम के तहत विद्यार्थियों का हेल्थ अकाउंट बनाकर उनके उपचार व पैथोलॉजी जांच से जुड़ा ब्योरा ऑनलाइन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। जिससे अगर वह किसी भी डॉक्टर को दिखाने जाएं तो हेल्थ अकाउंट की मदद से उनके पिछले उपचार का ब्योरा आसानी से मिल सके और उसे आगे अपडेट किया जा सके। जिससे छात्रों को उपचार व पैथोलॉजी जांच से संबंधित रिकॉर्ड के दस्तावेज रखने की जरूरत न पड़े।

यही नहीं एचआईएमएस के तहत ई-सुश्रुत क्लीनिक की मदद से उन्हें चिकित्सीय परामर्श आसानी से दिलाया जा सके। ई-सुश्रुत क्लीनिक की मदद से छोटे क्लीनिकों में ओपीडी सेवा के लिए ऑनलाइन अपॉइंटमेंट आसानी से दिलाया जा सके।


हर संस्थान में नियुक्त होगा नोडल अधिकारी

प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान एबीडीएम के एचआईएमएस को लागू करेगा। वह स्वास्थ्य सेवाओं के बेहतर ढंग से उपयोग के लिए एक नोडल अधिकारी तैनात करेगा। जिसकी देखरेख में यह कार्य किया जाएगा। एनएचए ने सी-डैक के साथ मिलकर एचआईएमएस तैयार किया है, जिसका नाम ई-सुश्रुत क्लीनिक है। यह एक प्लग एंड प्ले सॉल्यूशन है। https://ehmis-lite.in पर पंजीकरण कराकर इस प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।

इंस्पायर अवार्ड में यूपी के 7173 विद्यार्थियों के आइडिया चयनित, छात्रों को मॉडल बनाने के लिए मिलेंगे 10-10 हजार रुपये

इंस्पायर अवार्ड में यूपी के 7173 विद्यार्थियों के आइडिया चयनित, छात्रों को मॉडल बनाने के लिए मिलेंगे 10-10 हजार रुपये

लखनऊः भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की इंस्पायर अवार्ड मानक योजना 2025-26 में उत्तर प्रदेश के 7173 विद्यार्थियों के इनोवेशन आइडिया का चयन किया गया है। चयनित विद्यार्थियों को अपने वैज्ञानिक आइडिया पर माडल या प्रोजेक्ट तैयार करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से 10-10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि सीधे बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। विद्यालयों के प्रधानाचार्यों और इंस्पायर अवार्ड मानक प्रभारी शिक्षकों को निर्देश दिया गया है कि चयनित विद्यार्थियों के बैंक खाते सक्रिय रखें। यदि किसी छात्र के खाते में केवाईसी या अन्य औपचारिकताएं लंबित हैं तो उन्हें तुरंत पूरा कराया जाए, ताकि प्रोत्साहन राशि के हस्तांतरण में किसी प्रकार की बाधा न आए।

इस योजना में प्रदेश के सभी 18 मंडलों में से लखनऊ मंडल सबसे आगे रहा है। लखनऊ जिले से सर्वाधिक 370 विद्यार्थियों के आइडिया चयनित हुए हैं, जबकि मंडल स्तर पर लखनऊ मंडल से कुल 906 प्रोजेक्ट चयनित हुए हैं। जिला स्तर पर दूसरे स्थान पर प्रयागराज है, जहां 216 विद्यार्थियों के आइडिया का चयन हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक चयनित बाल वैज्ञानिक को अपने माडल तैयार करने के लिए 10 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि सीधे विद्यार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाएगी।


स्कूलों में वैज्ञानिक सोच को मिलेगा बढ़ावा

इंस्पायर अवार्ड मानक योजना का उद्देश्य स्कूल स्तर पर विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भावना को बढ़ावा देना है। इस योजना के तहत कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों ने अपने नए वैज्ञानिक विचार या समस्या के समाधान से जुड़े आइडिया को प्रस्तुत किया था। इसमें से श्रेष्ठ आइडिया का चुनाव किया गया। चयनित विद्यार्थियों को आर्थिक सहायता देकर उनके आइडिया को माडल के रूप में विकसित करने का अवसर दिया जाएगा। इस बार चयनित विद्यालयों में बेसिक शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के बच्चों ने भी स्थान बनाया है। निजी विद्यालयों के बच्चों के आइडिया का भी चयन हुआ है।




इंस्पायर अवॉर्ड में यूपी के 7173 मेधावी चयनित, 
लखनऊ पहले, प्रयागराज दूसरे स्थान पर रहा 




प्रयागराज। केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से संचालित इंस्पायर अवार्ड मानक योजना के तहत चयनित प्रतिभाओं की सूची जारी कर दी गई है। इस वर्ष उत्तर प्रदेश से कुल 7173 मेधावी छात्र-रत्राओं का चयन हुआ है जिन्होंने अपने मौलिक वैज्ञानिक विचारों और नवाचारी मॉडल के आधार पर यह उपलब्धि हासिल की। 


जनपदवार सूची में लखनऊ 370 स्थान पर रहा, जबकि प्रयागराज 216 छात्रों के चयन के साथ और कानपुर तीसरे स्थान पर है। कानपुर के 14 छात्रओं चयन हुआ है। प्रतापगढ़ के 121, कौशाम्बी के 48 बच्चों का चयन हुआ है। वहीं आगरा के 119, अलीके, गोरखपुर के 112, मुरादाबाद के 145, मेरठ के 117, वाराणसी 191 तथा बरेली के 129 छात्रों का चयन हुआ है। 

यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों को वैज्ञानिक सोच को दर्शाती है, बल्कि प्रदेश में नवाचार और अनुसंधान के बढ़ते माहौल की भी पुष्टि करती है। विज्ञान क्लब के समन्वयक डॉ. लालजी यादव ने बताया कि योजना के अंतर्गत 12वीं तक के विद्यार्थियों का चयन उनके मौलिक और रचनात्मक वैज्ञानिक विचारों के आधार पर किया गया है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने और उन्हें अनुसंधान के क्षेत्र में आगे चढ़ने के लिए प्रेरित करता है।

Wednesday, March 4, 2026

एडेड विद्यालयों के प्रबंधक शिक्षकों पर सीधे नहीं कर सकेंगे कार्रवाई, शिक्षकों के हित में शासन ने लिया अहम फैसला

इंटरमीडिएट एक्ट बनेगा एडेड स्कूलों के शिक्षकों का सुरक्षा कवच

एडेड विद्यालयों के प्रबंधक शिक्षकों पर सीधे नहीं कर सकेंगे कार्रवाई, शिक्षकों के हित में शासन ने लिया अहम फैसला


लखनऊ । एडेड विद्यालयों में प्रबन्धन अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इंटरमीडिएट एक्ट की उप धारा-3 क ही उनका सुरक्षा कवच बनकर उनकी सेवा को महफूज रखेगा। शासन ने उक्त धारा का स्मरण दिलाते हुए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियमों में सेवा सुरक्षा का अलग से प्रावधान करने की मांग को औचित्यहीन करार दिया है। इस संबंध में शासन ने सोमवार को सभी जिलों के डीआईओएस को आदेश भेज दिया है। शासन ने कहा है कि एक्ट की उप धारा-3 (क) ही शिक्षकों का सेवा कवच है, जिसे दरकिनार करना प्रबंधतंत्र और डीआईओएस के लिए बहुत मुश्किल होगा

डीआईओएस द्वारा मामले को लटकाना उत्पीड़नः इस धारा के तहत कोई भी प्रबंधतंत्र बिना जिला विद्यालय निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन या अनुमति के प्रबंधतंत्र किसी भी शिक्षक के विरुद्ध कोई दंडित कार्यवाही नहीं कर सकता। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है। न उसकी सेवा समाप्त कर सकता है और न ही नोटिस तक दे सकता है।




प्रबंधन की मनमानी और एडेड शिक्षकों के उत्पीड़न पर लगेगी रोक, शासन ने सभी डीआईओएस को भेजा निर्देश, कहा- धारा 16 का करें पालन


लखनऊ। अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इसके लिए शासन ने नए शिक्षा सेवा चयन आयोग में शामिल धारा-3 का उल्लेख करते हुए सभी डीआईओएस को इसके तहत आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।


प्रदेश में समय-समय पर जिलों से शिक्षकों की सेवा समाप्ति आदि की शिकायतें माध्यमिक शिक्षा निदेशक व शासन को मिलती रही हैं। माध्यमिक शिक्षक संघों के अनुसार अलग-अलग प्रबंधनों ने तीन सौ से अधिक शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाने का दावा किया है। 

पिछले दिनों विधान मंडल में भी सदस्यों ने इससे जुड़ा मामला उठाया था। साथ ही सदस्यों ने इस पर रोक लगाने की भी मांग की थी। इसका संज्ञान लेते हुए शासन ने कहा है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए इंटरमीडिएट एक्स 1921 की धारा 16 (छ) की उपधारा 3 (क) के तहत कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश हैं।

 इसके तहत कोई भी प्रबंध तंत्र बिना डीआईओएस के पूर्व अनुमति के किसी भी शिक्षक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता है। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है, न उनकी सेवा समाप्त कर सकता है। 

अब प्रबंधन पर भी सख्ती होगी। अगर शासन को शिकायत मिली तो डीआईओएस की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के ओम प्रकाश त्रिपाठी ने इस नियम का सख्ती से पालन कराने की मांग की है। 

Tuesday, March 3, 2026

यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा का मौका, पांच में से एक विषय में अंक सुधार परीक्षा की सुविधा देगा बोर्ड

यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट में पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा का मौका, पांच में से एक विषय में अंक सुधार परीक्षा की सुविधा देगा बोर्ड

25,76,082 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं इस बार इंटरमीडिएट की परीक्षा के लिए

सीबीएसई और सीआईएससीई में दो-दो विषयों में है व्यवस्था

यूपी बोर्ड ने पहले से दे रखी है एक विषय में कंपार्टमेंट की सुविधा


प्रयागराज । यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में पंजीकृत 25,76,082 छात्र-छात्राओं को पहली बार इंप्रूवमेंट परीक्षा देने का मौका मिलेगा। यूपी बोर्ड ने इसी साल से इंटर के पांच विषयों में से एक विषय में इंप्रूवमेंट परीक्षा शुरू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इस पर औपचारिक सहमति भी मिल चुकी है और अप्रैल अंत में परिणाम घोषित होने के बाद इसके आवेदन लिए जाएंगे। यह व्यवस्था केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) और काउंसिल फॉर द इंडियन स्कूल सर्टिफिकेट एग्जामिनेशन (सीआईएससीई) में पहले से लागू है। इन दोनों बोर्ड के परीक्षार्थी दो-दो विषयों में इंप्रूवमेंट दे सकते हैं।


कई बार ऐसा होता है कि तबीयत खराब होने, पारिवारिक सामाजिकया अन्य कारणों से परीक्षार्थी किसी विषय में पास तो हो जाते हैं लेकिन उसे बहुत कम नंबर मिलते हैं। इसका असर उसकी आगे की पढ़ाई और कॅरियर पर भी पड़ता है। ऐसे में बड़ी संख्या में ऐसे परीक्षार्थी होते हैं जो अंकसुधार (इंप्रूवमेंट) परीक्षा देना चाहते हैं लेकिन यूपी बोर्ड में ऐसी व्यवस्था ही नहीं थी। इसी समस्या को दूर करने के लिए बोर्ड की ओर से इस साल इंटर के परीक्षार्थियों के लिए भी इंप्रूवमेंट की व्यवस्था शुरू करने का प्रस्ताव भेजा गया है। इस पर सैद्धांतिक सहमति भी मिल चुकी है।

सचिव भगवती सिंह का कहना है कि शासन से मंजूरी मिलने पर इंटर में इंप्रूवमेंट की व्यवस्था लागू की जाएगी। यूपी बोर्ड ने 2020 से इंटर में कम्पार्टमेंट की व्यवस्था लागू की थी। इसके तहत इंटर का कोई छात्र यदि एक विषय में फेल है तो कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर पास हो सकता है। उससे पहले एक विषय में फेल इंटर के परीक्षार्थियों को दोबारा से सभी पांच विषयों की परीक्षा देनी होती थी। हाईस्कूल में इंप्रूवमेंट/कंपार्टमेंट की सुविधा पहले से लागू है।

Monday, March 2, 2026

होली अवकाश अवधि में परीक्षा संबंधी कार्यों के सुचारू संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में

होली अवकाश में मु्ख्यालय नहीं छोड़ेंगे यूपी बोर्ड परीक्षा ड्यूटी में लगे अधिकारी-कर्मचारी, DIOS को सख्त निर्देश

मुख्यालय छोड़ने पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने दिए कार्रवाई के निर्देश

जिला विद्यालय निरीक्षकों से प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है


प्रयागराज। यूपी बोर्ड 2026 की संचालित हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट परीक्षाओं को लेकर होली अवकाश अवधि में भी सख्ती बरती जाएगी। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को निर्देश जारी करते हुए प्रश्नपत्रों की सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा है। कहा है कि एक मार्च से 4 मार्च तक होली अवकाश के दौरान परीक्षा कार्य से जुड़े कोई भी अधिकारी या कर्मचारी बिना सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे।

जेडी की अनुमति के बिना नहीं जाएंगे मुख्यालय के बाहर
उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिला स्तर के अधिकारी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक (जेडी) की अनुमति के बिना मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे, जबकि संयुक्त एवं अपर शिक्षा निदेशक स्तर के अधिकारी शिक्षा निदेशक की अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। आदेश का उल्लंघन करने पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

स्ट्रांग रूम की सतत निगरानी के निर्देश 
परीक्षा केंद्रों पर प्रश्नपत्रों की अभेद सुरक्षा बनाए रखने के लिए स्ट्रांग रूम की सतत निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी प्रकार की सुरक्षा चूक होने पर तत्काल मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक एवं परिषद मुख्यालय को सूचना देना अनिवार्य होगा। लापरवाही पाए जाने पर केंद्र व्यवस्थापक व संबंधित प्रभारी अधिकारी के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई प्रस्तावित की जाएगी।

24 घंटे अधिकारी व कर्मचारी फोन सक्रिय रखेंगे 
इसके अतिरिक्त सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को मोबाइल फोन 24×7 सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। संपर्क न होने की स्थिति को घोर लापरवाही माना जाएगा। अवकाश अवधि में स्ट्रांग रूम का आकस्मिक निरीक्षण भी सुनिश्चित किया जाएगा, जिसमें सीसीटीवी व्यवस्था, सुरक्षा एवं तैनात कर्मियों की उपस्थिति की गहन जांच की जाएगी।

गृह जनपद जाने के लिए शिक्षकों ने मांगी अनुमति
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षाएं होली अवधि में स्थगित रहेंगी, लेकिन परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूमों में रखे प्रश्नपत्रों की सुरक्षा विभाग और यूपी बोर्ड की प्राथमिकता है। ऐसे में माध्यमिक शिक्षा निदेशक डाॅ. महेंद्र देव ने होली अवकाश अवधि में परीक्षा संबंधी कार्यों के सुचारु संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में जिला विद्यालय निरीक्षकों के लिए निर्देश जारी किए हैं।

शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है
कहा है कि अवकाश अवधि में वह (डीआइओएस) तथा परीक्षा कार्य से जुड़े अधीनस्थ अधिकारी/कर्मचारी बिना मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अनुमति के मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। इसके विरोध में राजकीय शिक्षक संघ उत्तर प्रदेश की ओर से होली अवकाश के दौरान परीक्षा ड्यूटी में लगे शिक्षकों को उनके गृह जनपद जाने की अनुमति देने की मांग की गई है। इसके लिए शिक्षा निदेशक को पत्र भेजा गया है।

पत्र में क्या मांग की गई?
पत्र में राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय एवं महामंत्री अरुण यादव ने बताया है कि 18 फरवरी से संचालित यूपी बोर्ड की वर्ष 2026 की परीक्षा के बीच एक मार्च से चार मार्च तक होली अवकाश निर्धारित है। आरोप है कि इस अवधि में परीक्षा कार्य में लगे शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं को गृह जनपद जाने में प्रशासनिक स्तर पर बाधाएं उत्पन्न की जा रही हैं। 

त्योहार पर स्वजन करते हैं उनकी प्रतीक्षा...
कहा गया है कि परीक्षा केंद्रों के स्ट्रांग रूम में सुरक्षित प्रश्नपत्रों की जिम्मेदारी केंद्र व्यवस्थापक, वाह्य केंद्र व्यवस्थापक, स्टैटिक मजिस्ट्रेट तथा तैनात पुलिस कर्मियों की होती है, न कि सामान्य ड्यूटी में लगे शिक्षकों की। ऐसे में शिक्षकों को अवकाश में घर जाने से रोका जाना उचित नहीं है। अनेक शिक्षक अपने गृह जनपद से दूर अन्य जिलों में कार्यरत हैं। त्योहार के अवसर पर परिवार के लोग उनकी प्रतीक्षा करते हैं। ऐसे में उनके घर न पहुंचने से उनके घर में होली का पर्व फीका हो जाएगा।


होली अवकाश अवधि में परीक्षा संबंधी कार्यों के सुचारू संचालन एवं सुरक्षा व्यवस्था के संबंध में


Sunday, March 1, 2026

छुट्टी, वेतनमान सब ऑनलाइन, फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग के काम पेंडिंग, ऑनलाइन सिस्टम तो लागू कर दिया, लेकिन महीनों तक लटकाए रहते हैं जिला और ब्लॉक स्तर के अफसर

छुट्टी, वेतनमान सब ऑनलाइन, फिर भी बेसिक शिक्षा विभाग के काम पेंडिंग,  ऑनलाइन सिस्टम तो लागू कर दिया, लेकिन महीनों तक लटकाए रहते हैं जिला और ब्लॉक स्तर के अफसर


केस-1
बाराबंकी के हरख ब्लॉक में शिक्षकों की छुट्टियों के 84 आवेदन पेडिग है। उन्होंने ऑनलाइन आवेदन किया, लेकिन बीईओ कार्यालय से अप्रूव नहीं हुए है। पूरे जिले में सभी 15 ब्लॉक और नगर क्षेत्र मिलाकर 804 आवेदन पेंडिंग है।

केस-2
करीब छह महीने पहले शिक्षकों को फडामेंटल लिट्रेसी ऐड न्युमिरेसी का प्रशिक्षण दिया गया था। इस प्रशिक्षण के लिए उनको 750 रुपये भत्ता दिया जाना था। यह भत्ता भी ऑनलाइन उनके खाते मे आना था, लेकिन अब तक नही आया।

ये दो उदाहरण शिक्षा विभाग में ऑनलाइन कामों की रफ्तार का आइना है। इसके अलावा भी कई काम ऐसे हैं जो ऑनलाइन होते हैं और पेंडेंसी खत्म होने के साथ ही काम की रफ्तार बढ़ने के दावे किए जाते हैं। हकीकत ये है कि सामान्य भत्तों से लेकर एनओसी और छुट्टियों का अप्रूवल तक लंबे समय तक फंसा रहता है। व्यवस्था ऑनलाइन होने के बावजूद शिक्षकों को विभाग के चक्कर काटने पड़ते हैं। ऐसे में रिश्वत की मांग तक के आरोप लगते हैं।


छुट्टियां लटकाने पर चेतावनीः छुट्टियों के अप्रूवल की ही बात करें तो सीसीएल, अर्जित अवकाश, आकस्मिक अवकाश, चिकित्सीय अवकास सहित सभी तरह की छुट्टियां ऑनलाइन ही अप्रूव की जाती हैं। बाराबंकी का मामला तो इसलिए सामने आ गया कि वहां के बीएसए ने खुद सभी बीएसए को पत्र लिखा। इसमें उन्होंने लिखा है कि काफी अधिक मात्रा में छुट्टियों के आवेदन लंबित हैं। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि है कि तत्काल इनको अग्रसारित करें, अन्यथा की स्थिति में समस्त जिम्मेदारी आपकी होगी। शिक्षकों का आरोप है कि हर जिले में यही हाल है।

चयन वेतनमान लंबितः चयन वेतनमान भी ऑनलाइन लगना होता है, लेकिन नवंबर से अब तक ज्यादातर जिलों में अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षक चयन वेतनमान के इंतजार में हैं। इसको लेकर राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ, यूनाइटेड टीचर्स असोसिएशन सहित कई शिक्षक संगठनों ने अधिकारियों से शिकायत की। डीजी से लेकर कई जिलों के बीएसए तक ने इस पर पत्र लिखकर चयन वेतनमान की प्रक्रिया जल्द पूरी करने के निर्देश भी दिए, लेकिन उसके बावजूद ब्लॉक स्तर के अधिकारी इसको लटकाए हुए हैं। शिक्षकों की शिकायत है कि इसके लिए भी शिक्षकों से तीन हजार रुपये से लेकर पांच हजार रुपये तक की मांग की जाती है।


'जिम्मेदारी तय हो'

शिक्षको का आरोप है कि विभाग ने ऑनलाइन व्यवस्था तो कर दी, लेकिन अफसरों और कर्मचारियों के रवैये में कोई बदलाव नहीं आया, ऑफलाइन जितने ही लंबे समय तक काम लटके रहते है। प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुशील कुमार सिंह का कहना है कि ऑनलाइन व्यवस्था के बावजूद शिक्षको को कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के अध्यक्ष विनय कुमार सिंह कहते है कि अफसरों का रवैया नहीं बदलेगा, तब तक ऑनलाइन व्यवस्था का कोई फायदा नहीं। उच्च अधिकारियों को पेडिंग कामों की लगातार समीक्षा करनी चाहिए और अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करनी चाहिए।


ये काम ऑनलाइन

जीपीएफ से अडवास भुगतान, सभी प्रकार की एनओसी, चयन वेतनमान, प्रोन्नत वेतनमान, नया वेतन भुगतान, नोटिस का स्पष्टीकरण, मानव संपदा पोर्टल पर सशेधन, वेतन वैरिएशन पर संशोधन, अन्य सशोधन ऑनलाइन किए जाने की व्यवस्था विभाग ने की है।


जो भी ऑनलाइन काम होने है, वे बिना विलंब के तुरंत होने चाहिए। इस बारे में लगातार निर्देश दिए जा रहे है। इसकी समीक्षा भी की जाती है। चयन वेतनमान शिक्षकों को समय पर मिले, इसकी लगातार समीक्षा करके निर्देश भी दिए जा रहे हैं। - मोनिका रानी, डीजी-स्कूल शिक्षा


(साभार : नवभारत टाइम्स)

अप्रैल 2026 से एआई की पढ़ाई करेंगे स्कूल के बच्चे

अप्रैल 2026 से एआई की पढ़ाई करेंगे स्कूल के बच्चे


नई दिल्ली । अप्रैल से शुरू हो रहे अगले शैक्षणिक सत्र में तीसरी से आठवीं कक्षा के बच्चों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का पाठ्यक्रम शुरू किया जा सकता है। स्कूली शिक्षा सचिव संजय कुमार ने कहा कि अप्रैल से शुरू होने वाले शैक्षणिक सत्र में तीसरी कक्षा से कंपटीशनल थिंकिंग और एआई का पाठ्यक्रम शुरू कराने का प्रयास है।


जैसे छात्रों को भाषाई ज्ञान और अंक ज्ञान शुरू से दिया जाता है, उसमें एआई को राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत जोड़ना है। तीसरी से आठवीं कक्षा तक एआई की शुरुआती पढ़ाई के बाद नौवीं से बारहवीं तक इसे इलेक्टिव कोर्स के तौर पर छात्र पढ़ सकते हैं।

शिक्षा मंत्रालय ने तीसरी से आठवीं कक्षा तक तुरंत यह पाठ्यक्रम शुरू करने की मंशा जताने के साथ उच्चस्तर पर एआई पाठ्यक्रम को अद्यतन करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं।

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में UTA निकालेगा मशाल जुलूस, 5 से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस

टीईटी अनिवार्यता के विरोध में UTA निकालेगा मशाल जुलूस, 5 से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में निकालेंगे मशाल जुलूस


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य किए जाने को लेकर शिक्षकों का विरोध तेज हो रहा है। यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने प्रदेशव्यापी आंदोलन की घोषणा की है। इसमें 15 दिनों तक लगातार प्रदेश भर में मशाल जुलूस निकाला जाएगा। यह कार्यक्रम पांच से 20 मार्च तक हर दिन पांच जिलों में होगा।


प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने सभी जिलाध्यक्ष व महामंत्री के साथ शनिवार को हुई ऑनलाइन बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जुलाई 2011 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से राहत देने की मांग उठाएंगे। बैठक में वीपी बघेल, संजय सिंह, भानुप्रताप सिंह, आशुतोष वर्मा, ओमजी पोरवाल, केके शर्मा, जया शर्मा, अखिलेश सिंह गुंजन, देवकुमार मिश्रा आदि उपस्थित थे।