इंटरमीडिएट एक्ट बनेगा एडेड स्कूलों के शिक्षकों का सुरक्षा कवच
लखनऊ । एडेड विद्यालयों में प्रबन्धन अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इंटरमीडिएट एक्ट की उप धारा-3 क ही उनका सुरक्षा कवच बनकर उनकी सेवा को महफूज रखेगा। शासन ने उक्त धारा का स्मरण दिलाते हुए शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियमों में सेवा सुरक्षा का अलग से प्रावधान करने की मांग को औचित्यहीन करार दिया है। इस संबंध में शासन ने सोमवार को सभी जिलों के डीआईओएस को आदेश भेज दिया है। शासन ने कहा है कि एक्ट की उप धारा-3 (क) ही शिक्षकों का सेवा कवच है, जिसे दरकिनार करना प्रबंधतंत्र और डीआईओएस के लिए बहुत मुश्किल होगा
डीआईओएस द्वारा मामले को लटकाना उत्पीड़नः इस धारा के तहत कोई भी प्रबंधतंत्र बिना जिला विद्यालय निरीक्षक के पूर्व अनुमोदन या अनुमति के प्रबंधतंत्र किसी भी शिक्षक के विरुद्ध कोई दंडित कार्यवाही नहीं कर सकता। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है। न उसकी सेवा समाप्त कर सकता है और न ही नोटिस तक दे सकता है।
प्रबंधन की मनमानी और एडेड शिक्षकों के उत्पीड़न पर लगेगी रोक, शासन ने सभी डीआईओएस को भेजा निर्देश, कहा- धारा 16 का करें पालन
लखनऊ। अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक विद्यालयों के प्रबंधक अब शिक्षकों का उत्पीड़न नहीं कर सकेंगे। इसके लिए शासन ने नए शिक्षा सेवा चयन आयोग में शामिल धारा-3 का उल्लेख करते हुए सभी डीआईओएस को इसके तहत आवश्यक कार्रवाई का निर्देश दिया है।
प्रदेश में समय-समय पर जिलों से शिक्षकों की सेवा समाप्ति आदि की शिकायतें माध्यमिक शिक्षा निदेशक व शासन को मिलती रही हैं। माध्यमिक शिक्षक संघों के अनुसार अलग-अलग प्रबंधनों ने तीन सौ से अधिक शिक्षकों को बाहर का रास्ता दिखाने का दावा किया है।
पिछले दिनों विधान मंडल में भी सदस्यों ने इससे जुड़ा मामला उठाया था। साथ ही सदस्यों ने इस पर रोक लगाने की भी मांग की थी। इसका संज्ञान लेते हुए शासन ने कहा है कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा के लिए इंटरमीडिएट एक्स 1921 की धारा 16 (छ) की उपधारा 3 (क) के तहत कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश हैं।
इसके तहत कोई भी प्रबंध तंत्र बिना डीआईओएस के पूर्व अनुमति के किसी भी शिक्षक के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं कर सकता है। न ही किसी शिक्षक को हटा सकता है, न उनकी सेवा समाप्त कर सकता है।
अब प्रबंधन पर भी सख्ती होगी। अगर शासन को शिकायत मिली तो डीआईओएस की जिम्मेदारी तय की जा सकती है। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) के ओम प्रकाश त्रिपाठी ने इस नियम का सख्ती से पालन कराने की मांग की है।
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