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Friday, February 27, 2026

यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई, माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

पाठ्यपुस्तकों का निर्धारण यूपी बोर्ड का अधिकार क्षेत्र –हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने निस्तारित की राजीव प्रकाशन की याचिका

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में यह टिप्पणी की है कि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद (बोर्ड ऑफ हाई स्कूल एंड इंटरमीडिएट एजुकेशन) प्रयागराज की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में आता है। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी एवं न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मैसर्स राजीव प्रकाशन की याचिका निस्तारित करते हुए दिया है।

याची ने सचिव माध्यमिक शिक्षा परिषद के एक आदेश को चुनौती देते हुए यह याचिका दाखिल की थी। कोर्ट ने याचिका को इसी मुद्दे पर 2014 में दिए गए एक पुराने फैसले के आधार पर निस्तारित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि उक्त निर्णय में कहा गया था कि विवादित आदेश में किसी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है क्योंकि हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के अध्ययन के लिए पाठ्यपुस्तकें निर्धारित करना संबंधित प्राधिकारी की शक्ति और अधिकार क्षेत्र में है। यदि याची यूपी अधिनियम संख्या 7, 1979 या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो राज्य के अधिकारी उसमें परिकल्पित कार्रवाई का सहारा लेने के लिए हमेशा स्वतंत्र हैं।

याची अधिनियम या किसी अन्य कानून के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तो उन्हें ऐसी किताबें प्रकाशित करने या खुले बाजार में बेचने से नहीं रोका जा सकता जो परिषद की निर्धारित पाठ्यपुस्तकें नहीं हैं। भले ही ऐसी पुस्तकें परिषद की पाठ्यपुस्तकों के स्तर की न हों या उनकी कीमत बहुत अधिक हो, याची को अपने विपणन प्रयासों के परिणाम स्वयं भुगतने होंगे।

कोर्ट ने आगे कहा कि हमने 15 अप्रैल 2014 के निर्णय का अवलोकन किया है और हमारा मानना है कि याचिका में उठाया गया मुद्दा पूरी तरह से उसी निर्णय के अंतर्गत आता है। तदनुसार इस याचिका को उन्हीं शर्तों के साथ निस्तारित किया जाता है।




यूपी बोर्ड सख्त: 3 अधिकृत प्रकाशकों की किताबें ही मान्य, नकली और महंगी पुस्तकों पर होगी कार्रवाई

माध्यमिक स्कूलों में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना यूपी बोर्ड का काम : हाईकोर्ट

किताबें छापकर खुले बाजार में बेचने पर कोई रोक नहीं है। कोर्ट ने इसी मामले में मेसर्स मित्तल बुक डिपो केस के फैसले को लागू करते हुए याचिका निस्तारित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति नीरज तिवारी तथा न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने मेसर्स राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व दो अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है। याचिका में परिषद के सचिव की आठ जनवरी 2026 की विज्ञप्ति व 31 जनवरी 2026 के संशोधन को चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया है।

बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के लोगो-नाम का उपयोग वर्जित
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि किसी को भी यूपी बोर्ड अथवा एनसीईआरटी के नाम व लोगो के उपयोग का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि न्यायालय ने सिर्फ इतना भर कहा है कि बोर्ड किसी को किताब छापने से नहीं रोक सकता (यदि यह कानून न तोड़े), लेकिन स्कूल में क्या पढ़ाया जाएगा, यह तय करना बोर्ड का काम है। किसी भी अनधिकृत प्रकाशक को एनसीईआरटी या यूपी बोर्ड के नाम/लोगो का उपयोग कर पुस्तकें छापने का अधिकार नहीं है। ऐसा करना कापीराइट अधिनियम और यूपी एक्ट संख्या सात (1979) का उल्लंघन है।

 सचिव के अनुसार, यह तथ्य भ्रामक है कि निर्धारित पुस्तकों तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। बोर्ड ने कहा है कि शैक्षिक सत्र 2026-27 के लिए केवल तीन मुद्रकों मेसर्स पायनियर प्रिंटर्स एंड पब्लिशर्स आगरा, मेसर्स पीतम्बरा बुक्स प्राइवेट लिमिटेड बिजौली झांसी और मेसर्स सिंघल एजेंसीज, लखनऊ को ही अधिकृत किया गया है। इसके अतिरिक्त किसी भी निजी प्रकाशक की पुस्तक 'पाठ्यपुस्तक' के रूप में अधिकृत नहीं है।



हाईकोर्ट में याचिकाएं खारिज, विद्यालयों में पढ़ाई जाएंगी यूपी बोर्ड की NCERT पाठ्यक्रम आधारित पाठ्यपुस्तकें

प्रयागराज : यूपी बोर्ड से अधिकृत प्रकाशकों के माध्यम से मुद्रित कराई गईं कक्षा नौ से 12 तक की पाठ्‌यपुस्तकों से नए शैक्षिक सत्र अप्रैल से पढाई कराए जाने में अब कोई अड़चन नहीं है। तीन अधिकृत प्रकाशकों की पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य कोई किताबें/गाइड बुक न पढ़ाए जाने की यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह की विज्ञप्ति के विरुद्ध दाखिल याचिकाएं हाई कोर्ट से खारिज हो गईं। यूपी बोर्ड ने अपनी 12 तथा एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम पर आधारित 36 विषयों की 70 पाठ्यपुस्तकें मुद्रित करने वाले प्रकाशकों की सूची जारी की है।

इन प्रकाशकों की किताबें फरवरी के प्रारंभ में जनपदों में निर्धारित पुस्तक विक्रेताओं के यहां उपलब्ध करा दी गई हैं। बोर्ड सचिव ने आठ जनवरी को जारी विज्ञप्ति में कहा था कि प्रदेश के सभी राजकीय, एडेड व स्ववित्तपोषित हाईस्कूल व इंटरमीडिएट (कक्षा नौ से 12 तक) विद्यालयों में यूपी बोर्ड से अधिकृत प्रकाशकों से मुद्रित पाठ्यपुस्तकों के अलावा अन्य कोई पाठ्यपुस्तक प्रचलित नहीं की जाएगी। 

विद्यार्थियों को अधिक मूल्य/अनधिकृत पाठ्यपुस्तकें/गाइड बुक आदि खरीदने पढ़ने के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा। बोर्ड सचिव के अनुसार इस संबंध में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने राजीव प्रकाशन एंड कंपनी व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य व अन्य याचिका को इस आशय से निस्तारित कर दिया गया कि माध्यमिक शिक्षा परिषद उत्तर प्रदेश (यूपी बोर्ड) की आठ जनवरी की विज्ञप्ति में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं पाया गया। यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई अनधिकृत प्रकाशक किसी संबंधित कानून का उल्लंघन करते पाया गया तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्यावाही सुनिश्चित की जाएगी।

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