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Wednesday, July 14, 2021

अगले सत्र से शुरू होगी चार वर्षीय स्नातक की पढ़ाई, त्रिवर्षीय स्नातक कोर्स में नए सत्र से ही लागू हो जाएगी नई शिक्षा नीति

अगले सत्र से शुरू होगी चार वर्षीय स्नातक की पढ़ाई, त्रिवर्षीय स्नातक कोर्स में नए सत्र से ही लागू हो जाएगी नई शिक्षा नीति, शासनादेश जारी


स्नातक में दो साल तक पढ़ना होगा कौशल विकास, नई शिक्षा नीति के तहत सत्र 2021-22 से लागू होगी व्यवस्था, प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह विषय की पढ़ाई, खबर पढ़े सबसे नीचे

राज्य मुख्यालय : प्रमुख संवाददाता शासन ने प्रदेश के सभी राज्य एवं निजी विश्वविद्यालयों में संचालित तीन विषय वाले सभी त्रिवर्षीय पाठ्यक्रमों में अगले सत्र (2021- 22 ) से ही नई शिक्षा नीति लागू करने का आदेश दिया है। चार वर्षीय स्नातक (शोध) सहित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों में सीबीसीएस आधारित नया पाठ्यक्रम शैक्षिक सत्र 2022 - 23 से लागू किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग ने मंगलवार को इस संबंध में शासनादेश जारी किया। बीए व बीएससी आनर्स तथा एकल विषय स्नातक में भी सीबीसीएस (च्वायस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम) आधारित नया पाठ्यक्रम शैक्षिक सत्र 2022-23 से लागू होगा। इसी तरह पीएचडी कार्यक्रम में नई व्यवस्था भी सत्र 2022-23 से लागू होगी।


नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक प्रथम वर्ष उत्तीर्ण करने पर सर्टिफिकेट, दो वर्ष पर डिप्लोमा, तीन वर्ष पर स्नातक डिग्री तथा चार वर्ष पर स्नातक शोध सहित डिग्री और पांच वर्ष पर स्नातकोत्तर डिग्री मिलेगी। स्नातक स्तर के प्रत्येक विद्यार्थी को तीन वर्षों के छह सेमेस्टर में से प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह विषयों का कोर्स करना अनिवार्य करना होगा। इन छह विषयों के पाठ्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। हर सह विषय के कोर्स को 40 अंकों के साथ विद्यार्थी को उत्तीर्ण करना होगा ।

ऐसे चुने जाएंगे मेजर और माइनर पेपर

शासनादेश के अनुसार छात्र को प्रवेश के समय कला, विज्ञान एवं वाणिज्य में से संकाय को चुनना होगा। चुने हुए संकाय से दो मुख्य यानी मेजर विषय लेने होंगे। यह संकाय छात्र को अपना संकाय कहा जाएगा। पहले से छठें सेमेस्टर तक इसकी पढ़ाई होगी।

तीसरे मेजर विषय का चुनाव किसी भी संकाय से कर सकेगा। छात्र द्वितीय या तृतीय वर्ष में मुख्य विषय को बदल सकेंगे। माइनर इलेक्टिव पेपर छात्रों को किसी भी चौथे विषय यानी पहले से चुने गए तीन मुख्य विषयों से अलग लेना होगा।


स्नातक में दो साल तक पढ़ना होगा कौशल विकास, नई शिक्षा नीति के तहत सत्र 2021-22 से लागू होगी व्यवस्था, प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह विषय की पढ़ाई

लखनऊ : सत्र 2021-22 से लागू की जाने वाली नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक में दो साल तक कौशल विकास का कोर्स भी पढ़ना होगा। यह कोर्स कुल 12 क्रेडिट का होगा। प्रदेश सरकार ने नई शिक्षा के तहत किए जाने वाले प्रावधानों के बारे में विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिया है। इसमें यह व्यवस्था दी गई है कि स्नातक स्तर पर प्रत्येक विद्यार्थी को प्रथम दो वर्षो (चार) सेमेस्टर्स ) के प्रत्येक सेमेस्टर में तीन क्रेडिट का एक कौशल विकास कोर्स करना होगा। इस तरह चार सेमेस्टर में यह कुल 12 क्रेडिट का होगा। इसी तरह स्नातक स्तर के प्रत्येक विद्यार्थी को तीन वर्षो (छह सेमेस्टर्स ) के प्रत्येक सेमेस्टर में एक सह विषय की पढ़ाई करनी होगी । सभी छह सह विषयों का पाठ्यक्रम उत्तर प्रदेश राज्य उच्च शिक्षा परिषद की वेबसाइट पर उपलब्ध करा दिया गया है।

जानकारी के अनुसार विद्यार्थी को हर सह विषय को 40 प्रतिशत अंकों के साथ उत्तीर्ण करना होगा। विद्यार्थी की ग्रेड शीट पर इनके प्राप्तांकों पर आधारित ग्रेड तो अंकित होंगे लेकिन ध्यान रखने वाली बात यह है कि उन्हें सीजीपीए की गणना में शामिल नहीं किया जाएगा।


एक वर्षीय सर्टिफिकेट कोर्स 46 क्रेडिट स्कोर पर

क्रेडिट संबंधी सभी कार्य राज्य स्तरीय 'एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट' के माध्यम से किए जाएंगे। विद्यार्थी न्यूनतम 46 क्रेडिट अर्जित करने पर एक वर्षीय सर्टिफिकेट, न्यूनतम 92 क्रेडिट अर्जित करने पर द्विवर्षीय डिप्लोमा तथा न्यूनतम 132 क्रेडिट अर्जित करने पर त्रिवर्षीय स्नातक डिग्री ले सकता है। इससे आगे विद्यार्थी 184 क्रेडिट पर चार वर्षीय स्नातक (शोध सहित), न्यूनतम 232 क्रेडिट पर स्नातकोत्तर डिग्री तथा न्यूनतम 248 क्रेडिट पर पीजीडीआर ले सकता है।

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