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Sunday, October 4, 2026

युवाओं को डिजीलॉकर में मिलेगा कौशल प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र, फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगेगी लगाम, रोजगार मेलों में सत्यापन होगा आसान

युवाओं को डिजीलॉकर में मिलेगा कौशल प्रशिक्षण का प्रमाणपत्र, फर्जी प्रमाणपत्रों पर लगेगी लगाम, रोजगार मेलों में सत्यापन होगा आसान

लखनऊ। प्रदेश में रोजगार मेले में कौशल विकास का प्रशिक्षण प्राप्त युवाओं के प्रमाणपत्रों का अब मौके पर ही ऑनलाइन सत्यापन किया जा सकेगा। प्रमाणपत्रों को डिजीलॉकर व नेशनल एकेडमिक डिपॉजिटरी से जोड़ दिया गया है। अब भर्ती के समय प्रमाणपत्रों को मौके पर ही जांचा जा सकेगा। इससे गड़बड़ प्रमाणपत्र लाने वाले युवाओं को मौके पर ही पकड़ा जा सकेगा।


उप्र कौशल विकास मिशन की ओर से डिजिटल प्रमाणपत्र व्यवस्था के लिए संस्थागत पंजीकरण, प्रमाणपत्र का प्रारूप तैयार करने और पुराने अभिलेखों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने की प्रक्रिया पूरी कर ली है। नई कवायद से प्रशिक्षण पाने वाले युवा डिजीलॉकर से अपने प्रमाणपत्र डाउनलोड भी कर सकेंगे। साथ ही उन्हें कहीं भी जॉब के लिए उन्हें इसे लेकर भी जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

विभाग की ओर से रोजगार व प्रशिक्षण में पारदर्शिता के लिए यह कदम उठाया गया है। कहीं किसी भी तरह की गड़बड़ी न हो इसके लिए सभी प्रशिक्षण प्रदाता कंपनियों को भी सतर्क किया गया है। इसका अनुपालन सभी को कड़ाई से करने के लिए भी निर्देश दिया गया है।

28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी का इंतजार, 2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अब तक पालन नहीं

28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय में वापसी का इंतजार,  2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अब तक पालन नहीं


लखनऊ। प्रदेश में 28 हजार शिक्षामित्रों को मूल विद्यालय वापसी का इंतजार है। सिर्फ पांच जिलों में मात्र 2000 शिक्षामित्रों को ही इसका लाभ मिल सका है। आरोप है कि जनवरी 2025 में शासनादेश होने के बावजूद जिलों में अधिकारी मनमानी दिखा रहे हैं।


दरअसल, शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाया गया था। वर्ष 2017 में इनका समायोजन रद्द कर इन्हें दोबारा शिक्षामित्र बनाया गया। जून 2018 में शिक्षामित्रों की मूल विद्यालय वापसी की गई, मगर तमाम शिक्षामित्र छूट गए। उसके बाद शिक्षामित्रों ने लगभग सात साल तक संघर्ष किया और जनवरी 2025 में शासनादेश जारी कर इन्हें अपने मूल विद्यालय भेजने के आदेश दिए गए।

यह अपने निवास स्थान की जिन ग्राम पंचायतों में शिक्षामित्र पद पर रखे गए थे वहीं इन्हें वापस भेजा जाना है। सबसे अधिक कठिनाई वह महिला शिक्षामित्र उठा रही हैं जिन्हें शादी के बाद दूसरे जिले में जाना पड़ा। अब वह अपने मायके वाले जिले में लंबी दूरी नापकर पढ़ाने आती है या उन्हें मायके में ही रहना पड़ रहा है। अब तक सिर्फ बाराबंकी, लखनऊ, अंबेडकरनगर, चित्रकूट और बरेली में ही शिक्षामित्रों को लाभ मिल सका है और वह अपने मूल विद्यालय वापस आ चुके हैं। बाकी जिलों में शिक्षामित्र परेशान हैं।

उप्र प्राथमिक शिक्षामित्र संघ के व प्रदेश महामंत्री सुशील कुमार यादव के कहते हैं कि शासन की मंशा पर प्र अधिकारी पानी फेर रहे हैं। शासनादेश जारी होने के एक साल 10 महीने बाद भी शिक्षामित्र परेशान हैं।

Saturday, October 3, 2026

निजी विद्यालय के शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ रिट याचिका पोषणीय नहीं: हाईकोर्ट

निजी विद्यालय के शिक्षक की बर्खास्तगी के खिलाफ रिट याचिका पोषणीय नहीं: हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा-निजी संस्था के खिलाफ सार्वजनिक प्रकृति के कर्तव्य का पालन कराने के लिए ही जारी की जा सकती है रिट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि निजी ट्रस्ट की ओर से संचालित गैर-सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थान के कर्मचारियों की सेवाओं से जुड़े मामलों के लिए अनुच्छेद-226 के तहत रिट याचिका पोषणीय नहीं है। क्योंकि, यह मूलतः नियोक्ता और कर्मचारी के बीच संविदात्मक प्रकृति का निजी विवाद होता है।


इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने आजमगढ़ निवासी शिक्षिका नूतन राय की बर्खास्तगी को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी निजी संस्था के खिलाफ रिट जारी की जा सकती है। यदि उससे सार्वजनिक प्रकृति के कर्तव्य का पालन कराया जाना हो। लेकिन सेवा अनुबंध से उपजा विवाद पूरी तरह से निजी विवाद होने के कारण रिट अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

मामले में याची ने निजी शिक्षण संस्थान से अपनी सेवा समाप्त किए जाने को चुनौती दी थी। प्रतिवादियों ने प्रारंभिक आपत्ति उठाते हुए कहा कि संस्थान एक निजी ट्रस्ट है। संस्थान को सरकार से कोई सहायता या अनुदान नहीं मिलता।

याची ने अंडी मुक्ता सद्‌गुरु श्री मुक्ताजी वंदास स्वामी सुवर्ण जयंती महोत्सव स्मारक ट्रस्ट मामले का हवाला दिया। कहा कि सार्वजनिक कर्तव्य निभाने वाली निजी संस्था के खिलाफ रिट याचिका दायर की जा सकती है। वहीं, संस्थान ने सेंट मैरी एजुकेशन सोसाइटी, आर्मी वेलफेयर एजुकेशन सोसाइटी और दिलीप कुमार पांडे के मामलों का हवाला दिया। कहा कि जब सेवा शर्तें किसी वैधानिक प्रावधान से नियंत्रित न हों तो कर्मचारी को रिट के असाधारण अधिकार क्षेत्र का सहारा नहीं मिल सकता।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा भले ही सार्वजनिक महत्व का विषय हो, लेकिन इससे निजी शिक्षण संस्थान में नियोक्ता-कर्मचारी संबंध का प्रत्येक पहलू सार्वजनिक कानून के दायरे में नहीं आ जाता। यदि सेवा शर्तों को नियंत्रित करने वाला कोई वैधानिक ढांचा नहीं है तो संबंध अनुबंध पर आधारित रहेगा।

Friday, October 2, 2026

हाईस्कूल-इंटर के विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन का मौका

हाईस्कूल-इंटर के विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन का मौका


प्रयागराज। शैक्षिक सत्र 2026 27 के कक्षा-9 के विद्यार्थियों तथा परीक्षा वर्ष 2027 में कक्षा 10 और 12 के संस्थागत एवं - व्यक्तिगत विद्यार्थियों के शैक्षिक विवरण ऑनलाइन अपलोड करने की प्रक्रिया पूरी हो गई है। यूपी बोर्ड की ओर से अब विद्यार्थियों के विवरण की जांच और आवश्यक संशोधन के लिए समय निर्धारित किया गया है।

कक्षा-10 और 12 के विद्यार्थियों के विवरण की चेकलिस्ट परिषद के पोर्टल से प्राप्त कर संस्था के प्रधान द्वारा जांच की जाएगी। जांच के बाद किसी प्रकार का संशोधन आवश्यक होने पर विवरण को संशोधित और अपडेट किया जा सकेगा। इसके लिए एक से छह अक्तूबर की मध्यरात्रि 12 बजे तक का समय निर्धारित किया गया है।

वहीं, कक्षा-9 और 11 के विद्यार्थियों के विवरण की चेकलिस्ट भी परिषद के पोर्टल से प्राप्त कर संस्था के प्रधान को जांच करनी होगी। इनके विवरण में संशोधन एक से छह अक्तूबर 2026 तक प्रतिबंधित रहेगा।

हालांकि, विशेष रूप से पांच से आठ अक्तूबर की मध्यरात्रि 12 बजे तक कक्षा-9 और 11 के विद्यार्थियों के विवरण में संशोधन किया जा सकेगा। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने सभी संस्थानों को निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश दिए हैं।


स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

स्पेशल टीईटी में शामिल नहीं हो सकेंगे शिक्षामित्र, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिक्षामित्रों की याचिका खारिज कर दी,हाईकोर्ट ने कहा, स्पेशल टीईटी नई नियुक्ति पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं

नियमित शिक्षकों के लिए अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है स्पेशल टीईटी


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के शिक्षामित्रों को स्पेशल शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि स्पेशल टीईटी कोई नई भर्ती प्रक्रिया नहीं है, बल्कि सेवारत (इन-सर्विस) नियमित शिक्षकों के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार अनिवार्य योग्यता पूरी करने का एक विशेष अवसर है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने वसीम अहमद समेत 221 शिक्षामित्रों की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।

मामले के तथ्यों के अनुसार उत्तर प्रदेश शासन ने गत दो सितंबर को एक शासनादेश जारी किया था, जिसके तहत उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को स्पेशल टीईटी आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद आयोग ने गत तीन सितंबर को परीक्षा की अधिसूचना जारी की।

याची शिक्षामित्रों ने इस शासनादेश और अधिसूचना को चुनौती देते हुए तर्क दिया कि वे लगभग 26 वर्षों से परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में नियमित सहायक अध्यापकों की तरह ही शिक्षण कार्य कर रहे हैं। एनसीटीई की न्यूनतम अर्हता रखने के बावजूद उन्हें स्पेशल टीईटी से बाहर रखना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और 16 (अवसर की समानता) का उल्लंघन है। सुप्रीम कोर्ट ने सेवारत शिक्षकों को टीईटी पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया है, ऐसे में उन्हें भी अपनी सेवा सुरक्षा व भविष्य के लिए इस परीक्षा में बैठने का अवसर मिलना चाहिए।

आयोग व राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध करते हुए कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट के फैसलों (अंजुमन इशअत-ए-तालीम ट्रस्ट व समीक्षा याचिका आदेश) के अनुपालन में केवल उन इन-सर्विस शिक्षकों को छूट/अवसर दिया गया है, जिनकी नियुक्ति टीईटी अनिवार्य होने से पूर्व हो चुकी थी और जिनकी सेवा निरंतरता टीईटी पास करने पर निर्भर है।

शिक्षामित्र संविदा व्यवस्था के तहत कार्यरत हैं और वे नियमित इन-सर्विस शिक्षकों के समकक्ष नहीं हैं। जुलाई 2026 में आयोजित नियमित टीईटी परीक्षा में शिक्षामित्र आवेदन करने के लिए पात्र थे लेकिन उन्होंने उसमें भाग नहीं लिया। कोर्ट ने शिक्षामित्रों की दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि स्पेशल टीईटी किसी नई नियुक्ति, पद सृजन या पदोन्नति का माध्यम नहीं है। यह केवल उन सेवारत शिक्षकों के लिए एक संक्रांतिकालीन व्यवस्था है, जिनकी नौकरी बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने टीईटी पास करना अनिवार्य किया है। 

शिक्षामित्रों की नियुक्ति का स्वरूप और विधिक दर्जा नियमित सहायक अध्यापकों से पूरी तरह भिन्न है। असमान वर्गों को एक समान नहीं माना जा सकता इसलिए सेवारत शिक्षकों के लिए विशेष परीक्षा कराना अनुच्छेद 14 या 16 का उल्लंघन नहीं है। राज्य सरकार ने शासनादेश सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत जारी किया है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के दायरे को हाईकोर्ट अपनी मर्जी से नहीं बढ़ा सकता।

... तो खटखटा सकते हैं न्यायालय का दरवाजा

कोर्ट ने इसी मुद्दे पर प्रतीक मिश्र व दो अन्य की याचिका पर उनके अधिवक्ता अग्निहोत्री कुमार त्रिपाठी व सरकारी वकील को सुनने के बाद याचिका खारिज करते हुए याचियों को यह छूट दी है कि भविष्य में भर्ती प्रक्रिया के दौरान राज्य सरकार स्पेशल टीईटी प्राप्त शिक्षकों को नियमों के विरुद्ध कोई अनुचित वरीयता या आरक्षण देती है, तो वे उसके खिलाफ न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं।



विभागीय  TET  में बैठने की मांग को लेकर दायर शिक्षामित्रों की याचिका खारिज, देखें हाईकोर्ट ऑर्डर

01 अक्टूबर 2026





शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर देने की मांग के लिए दाखिल याचिका पर फैसला सुरक्षित

25 सितंबर 2026
प्रयागराज । इलाहाबाद हाईकोर्ट में परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा में आवेदन का अवसर दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर गुरुवार को निर्णय सुरक्षित कर लिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद दिया।

वसीम अहमद एवं 220 अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान याचियों की ओर से अधिवक्ता जेन अब्बास ने शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल किए जाने के मुद्दे पर कहा कि परिषदीय विद्यालयों में शिक्षामित्र लंबे समय से शिक्षण कार्य कर रहे हैं और बड़ी संख्या में शिक्षामित्रों का करीब 26 वर्षों से बतौर शिक्षक शिक्षण कार्य के साथ निर्वाचन कार्य, चुनाव ड्यूटी, एसआईआर, जनगणना, मतगणना, बालगणना, विद्यालय संचालन प्रभार, सरकार द्वाराजैन अब्बास आयोजित विभिन्न परीक्षाओं में कक्ष निरिक्षक ड्यूटी, गुणवत्ता संवर्धन के लिए विभाग द्वारा कराए जाने वाले समस्त प्रशिक्षण अध्यापक के समान अनुभव है।

इसके बाद भी विशेष टीईटी में आवेदन के अवसर को लेकर शिक्षामित्रों के साथ अलग व्यवहार किया जा रहा है जबकि अन्य श्रेणियों में कार्यरत शिक्षकों एवं विशेष शिक्षकों को परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया गया है। यह भी तर्क रखा गया कि शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भविष्य में शिक्षण कार्य जारी रखने के लिए टीईटी की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। ऐसे में लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में कार्यरत शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में अवसर दिया जाना आवश्यक है।



विशेष टीईटी में योग्यता में छूट को दी चुनौती, आज हाईकोर्ट में सुनवाई

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। हाईकोर्ट में बीटीसी (डीएलएड), बीएड एवं दूरस्थ बीटीसी पास प्रतीक मिश्रा एवं दो अन्य अभ्यर्थियों ने विशेष टीईटी के लिए निर्धारित योग्यता में छूट को चुनौती दी है। याचिका में दो सितंबर के उस सरकारी आदेश को चुनौती दी गई है, जिसमें राज्य सरकार ने सेवारत शिक्षकों की टीईटी योग्यता संबंधी शर्त को शिथिल कर दिया है। 

सुप्रीम कोर्ट ने एक सितंबर 2025 को अंजुमन इशात-ए-तलीम ट्रस्ट बनाम महाराष्ट्र राज्य एवं अन्य मामले में फैसला सुनाया था कि सेवारत शिक्षकों को दो साल के अंदर टीईटी पास करना अनिवार्य है। पुनर्विचार याचिका में सुप्रीम कोर्ट ने दो वर्ष की छूट को तीन वर्ष कर दिया है। इस तरह से सेवारत शिक्षकों को एक सितंबर 2028 के पूर्व टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। याचियों का आरोप है कि राज्य सरकार के आदेश से सुप्रीम कोर्ट के फैसले एवं आरटीई एक्ट 2009 की मूल भावना का उल्लंघन हो रहा है। इस मामले की सुनवाई 16 सितंबर को होगी।



विशेष टीईटी में मौके पाने की जद्दोजहद में हाईकोर्ट पहुंचे शिक्षामित्र, आज सुनवाई 

हाईकोर्ट में कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों ने दायर की याचिका

सरकार ने टीईटी में केवल सेवारत एवं विशेष शिक्षकों से मांगे आवेदन

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से सेवारत एवं विशेष शिक्षकों के लिए कराई जा रही विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अवसर देने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों ने हाईकोर्ट में याचिकाएं की है। कुमारी गुलाबी एवं 126 अन्य शिक्षामित्रों का कहना है कि उन्हें भी स्पेशल टीईटी में बैठने का अवसर दिया जाए, ताकि वे नियमित शिक्षक बनने की प्रक्रिया में आगे बढ़ सकें।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि शिक्षामित्र कोई नए अभ्यर्थी नहीं हैं, बल्कि वे लंबे समय से परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। ऐसे में उनकी योग्यता, सेवाकाल और अनुभव को नजर अंदाज कर विशेष टीईटी से बाहर रखना उचित नहीं है। सोमवार को इस मामले की सुनवाई के बाद अब इसे 16 सितंबर को प्रतीक मिश्रा व तीन अन्य की याचिका के साथ सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया गया है।


स्पेशल TET में शामिल होने की मांग को लेकर शिक्षामित्रों की दो याचिकाएं हाईकोर्ट में दायर

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में शिक्षामित्रों को 'स्पेशल TET' (विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर इलाहाबाद उच्च न्यायालय में दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। शिक्षामित्रों की इस पहल से परीक्षा में शामिल होने की उम्मीद लगाए बैठे अभ्यर्थियों की नजरें अब अदालत के आगामी फैसलों पर टिक गई हैं।


शिक्षामित्रों द्वारा दायर याचिकाओं और उनकी स्थिति का विवरण निम्न प्रकार है:


Writ A 14346/2026 (प्रतीक मिश्रा व अन्य): इस याचिका पर 10 सितंबर 2026 को प्रारंभिक सुनवाई संपन्न हो चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने इसकी अगली सुनवाई की तिथि 16 सितंबर 2026 तय की है।

Writ A 14495/2026 (कुमारी गुलाबी व अन्य): शिक्षामित्रों द्वारा राहत की मांग को लेकर दाखिल की गई इस दूसरी याचिका पर आज 14 सितंबर 2026 को उच्च न्यायालय की पीठ में सुनवाई होनी तय हुई है।

इन दोनों ही याचिकाओं के माध्यम से शिक्षामित्रों ने माननीय न्यायालय से प्रार्थना (Prayer) की है कि उन्हें भी स्पेशल TET परीक्षा में शामिल होने का अवसर दिया जाए। 14 और 16 सितंबर को होने वाली सुनवाई के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि अदालत शिक्षामित्रों को इस परीक्षा में बैठने की अनुमति देती है या नहीं।


Thursday, October 1, 2026

मंदिरों के विध्वंस से लेकर सिख गुरुओं के संघर्ष तक और रामराज्य भी पढ़ेंगे छात्र, NCERT सामाजिक विज्ञान की नई किताब में काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास भी जानेंगे

मंदिरों के विध्वंस से लेकर सिख गुरुओं के संघर्ष तक और रामराज्य भी पढ़ेंगे छात्र, NCERT सामाजिक विज्ञान की नई किताब में काशी विश्वनाथ मंदिर का इतिहास भी जानेंगे

नई दिल्ली। एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसायटी इंडिया एंड बियॉन्ड' पार्ट-2 में मध्यकालीन भारत के इतिहास को 'प्रतिरोध और दृढ़ता' के नजरिये से रखा गया है। किताब में मंदिरों के विध्वंस और पुनर्निर्माण, विभिन्न क्षेत्रीय शक्तियों के प्रतिरोध, सिख गुरुओं के साथ मुगल सत्ता के टकराव और शासन की भारतीय परंपराओं का उल्लेख है। 

वहीं, 'रामराज्य', 'सत्यमेव जयते' और सुप्रीम कोर्ट के आदर्श वाक्य जैसे विषयों को आधुनिक शासन से जोड़ा गया है। पवित्र स्थलों' से जुड़े हिस्से में काशी विश्वनाथ मंदिर के इतिहास का उल्लेख करते हुए किताब बताती है कि मंदिर को अलग-अलग दौर में क्षति पहुंची और उसका पुनर्निर्माण भी हुआ। किताब के अनुसार, अकबर के शासनकाल में टोडर मल और राजा मान सिंह से जुड़े संरक्षण के बाद मंदिर का पुनर्निर्माण हुआ, जबकि बाद में औरंगजेब के शासनकाल में इसे फिर नष्ट किया गया। वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर का निर्माण 1780 में अहिल्याबाई होल्कर ने कराया। इसी हिस्से में मंदिरों पर हमलों को ऐतिहासिक संदर्भ में रखा गया है।

मथुरा-वृंदावन में मंदिरों के पुनर्निर्माण का जिक्र : किताब में मंदिरों के संरक्षण और पुनर्निर्माण के उदाहरण भी दिए गए हैं। इसके तहत अहिल्याबाई होल्कर के काशी विश्वनाथ मंदिर के साथ वृंदावन के गोविंद देवजी मंदिर के संरक्षण का उल्लेख है। बुंदेला शासक वीर सिंह द्वारा मथुरा में केशव देव मंदिर के निर्माण को संरक्षण देने की बात भी कही गई है। किताब के अनुसार 16वीं शताब्दी के बाद मंदिरों की वास्तुकला और उनके स्थान में भी बदलाव दिखाई देता है। कई मंदिर अपेक्षाकृत कम दिखाई देने वाली जगहों और संकरी गलियों में बनाए गए। 



बच्चे पढ़ेंगे सुशासन के राजदंड सेंगोल के बारे में, नौवीं की नई किताब में नया भारत, संसद से लेकर चोल राजवंश तक... लिज्जत पापड़ की कहानी भी

नई दिल्ली। जिस सेंगोल को लेकर नए संसद भवन के उद्घाटन के वक्त सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए थे, वही सेंगोल अब नौवीं कक्षा के बच्चों को सुशासन का पाठ पढ़ाएगा। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने सामाजिक विज्ञान की नई किताब ‘अंडरस्टैंडिंग सोसायटी : इंडिया एंड बियॉन्ड’ में सेंगोल को शासन और सुशासन के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में जगह दी है। यह किताब मंगलवार से बाजार में उपलब्ध हो गई है।

किताब में लिखा गया है कि 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेंगोल को नए संसद भवन में स्थापित किया। इसे धर्मसम्मत शासन चिह्न के रूप में इस्तेमाल करने की परंपरा चोल राजवंश के दौर में शुरू हुई थी। किताब में बताया गया है कि 15 अगस्त 1947 की आधी रात को आजादी के मौके पर प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने शैव परंपरा के संतों से सेंगोल ग्रहण किया था। छात्रों से कहा गया है कि वे ऐतिहासिक तस्वीरों के जरिये सेंगोल की यात्रा के बारे में और जानकारी जुटाएं।


किताब में शासन और लोकनीति वाले अध्याय में भारत के शासकीय प्रतीकों की जड़ों को समझाया गया है। इसी हिस्से में राष्ट्रीय आदर्श वाक्य ‘सत्यमेव जयते’ को मुंडक उपनिषद से और सर्वोच्च न्यायालय के ध्येय वाक्य ‘यतो धर्मस्ततो जयः’ को महाभारत से जोड़ा गया है। किताब का तर्क है कि ये प्रतीक केवल सजावटी नहीं हैं, बल्कि उन मूल्यों और आदर्शों के वाहक हैं जो संस्थाओं को सुशासन की जिम्मेदारी के साथ सौंपे गए हैं।


सुशासन की सात शाखाएं

अध्याय में सुशासन को एक पेड़ के रूप में दिखाया गया है, जिसकी सात शाखाएं भागीदारी, कानून का राज, जवाबदेही, पारदर्शिता, प्रभावशीलता, संवेदनशीलता और समावेशिता हैं। पेड़ के नीचे खड़े नागरिकों के साथ संदेश दिया गया है कि सुशासन सरकार और नागरिकों की साझेदारी है।


प्रस्तावना में ही दिशा साफ

किताब की दिशा उसकी प्रस्तावना से ही स्पष्ट है। एनसीईआरटी निदेशक दिनेश प्रसाद सकलानी के हस्ताक्षर से सितंबर 2026 में लिखी प्रस्तावना में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ऐसी शिक्षा व्यवस्था की कल्पना करती है जो भारत की सभ्यतागत बुद्धिमत्ता, मूल्यों और नैतिक परंपराओं में गहराई से रची-बसी हो। किताब में भारतीय ज्ञान, परंपरा और साझा विरासत के तत्वों को समकालीन सरोकारों से जोड़ा गया है।


सत्ता की जगह शासन

भूमिका में एनसीईआरटी ने खुद माना है कि पहले इसमें सत्ता विषय पर अध्याय प्रस्तावित था, जिसकी जगह अब ‘शासन और लोकनीति’ अध्याय रखा गया है। ‘भारत और विश्व : भाग एक’ वाला अध्याय अब दसवीं कक्षा में खिसका दिया गया है। इसके पीछे पढ़ाई को अधिक सुसंगत रखने और बच्चों पर कठिन विचारों का बोझ न डालने को कारण बताया गया है।


आयकर की दरें भी पढ़ेंगे बच्चे

निजी वित्त प्रबंधन वाले अध्याय में बच्चे अब आयकर की दरें भी पढ़ेंगे। इसमें नई कर व्यवस्था की पूरी तालिका दी गई है।


लिज्जत पापड़ की कथा से स्टार्टअप तक

उद्यमिता के अध्याय में दो देसी कहानियां दी गई हैं। इनमें लिज्जत पापड़ की कहानी 1959 से शुरू होती है, जब मुंबई की एक चॉल की सात गृहिणियों ने 80 रुपये और उधार के सामान से काम शुरू किया। किताब के अनुसार इस सहकारी संस्था में 2023 तक 45,000 से ज्यादा महिला सदस्य, 83 शाखाएं और 1,600 करोड़ रुपये का सालाना कारोबार था।




पहले भ्रष्टाचार का पाठ, अब किया गया है सिर्फ न्यायपालिका का बखान, NCERT की नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान किताब में बदली तस्वीर, विवाद वाले तथ्य अब पूरी तरह हटाए गए


नई दिल्ली। जिस अध्याय को सुप्रीम कोर्ट ने न्यायपालिका पर विवादित टिप्पणी के चलते देशभर से वापस मंगवा लिया था, वह अब बदले हुए रूप में स्कूलों तक पहुंच चुका है। नई किताब में अदालतों की कमजोरियों और चुनौतियों के बजाय न्यायपालिका के ढांचे, अधिकार क्षेत्र और डिजिटल पहलों को प्रमुखता दी गई है।

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड’ के संशोधित संस्करण में ‘द ज्यूडिशियरी इन अवर सोसाइटी’ अध्याय को पूरी तरह बदल दिया गया है। पिछले संस्करण में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार, लंबित मुकदमों के भारी बोझ, पहाड़ और जजों की कमी जैसे मुद्दों को शामिल किया गया था, लेकिन नए पाठ से ये विवादित हिस्से पूरी तरह हटा दिए गए हैं।


26 फरवरी को किताब देशभर से वापस मंगाई गई थी। फरवरी 2026 में आठवीं कक्षा की इसी किताब के न्यायपालिका वाले अध्याय में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ शीर्षक से एक हिस्सा सामने आया था। इसमें अदालतों के सामने मौजूद चुनौतियों में विभिन्न स्तरों पर भ्रष्टाचार और लंबित मामलों के भारी बोझ का उल्लेख किया गया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने इसका स्वतः संज्ञान लिया था। 26 फरवरी को अदालत ने किताब को तत्काल देशभर से वापस लेने का आदेश दिया। इसके बाद एनसीईआरटी को बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी और पूरी किताब वापस लेनी पड़ी। केंद्र ने समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित की, जिसके बाद अध्याय को बदल दिया गया।


सिर्फ ढांचे, अधिकार क्षेत्र और डिजिटल पहलों पर जोर

नए अध्याय में न्यायपालिका के ढांचे, अधिकार क्षेत्र और डिजिटल पहलों को बताया गया है। वहीं भ्रष्टाचार, मुकदमों का बोझ, पहाड़ और जजों की कमी जैसे मुद्दे, जिन पर पिछला विवाद खड़ा हुआ था, नए पाठ से पूरी तरह बाहर हैं।


नए पाठ में क्या है

नया अध्याय मार्टिन लूथर किंग जूनियर के इस कथन से शुरू होता है कि कहीं भी अन्याय हर जगह के न्याय के लिए खतरा है। इसके बाद संविधान की प्रस्तावना में न्याय के वादे, अदालतों के पिरामिड, सर्वोच्च न्यायालय की 33 जमा एक की संख्या, जजों की योग्यता और सेवानिवृत्ति की उम्र को समझाया गया है। अनुच्छेद 142 की पूर्ण न्याय वाली शक्ति का भी ब्योरा दिया गया है। अध्याय में बार-बार यह बताया गया है कि न्यायपालिका विधायिका और कार्यपालिका से स्वतंत्र है।


सरकार का श्रेय, इतिहास की चूक

किताब में आजादी के बाद औपनिवेशिक दौर के सैकड़ों कानूनों को भेदभावपूर्ण बताया गया है और कहा गया है कि सरकार ने ऐसे 500 से ज्यादा कानून रद्द किए। उदाहरण के रूप में 1871 का आपराधिक जनजाति कानून दिया गया है।


मुकदमों का बोझ, पर बिना आंकड़े

देश की अदालतों में करोड़ों मुकदमे लंबित हैं, लेकिन नए अध्याय में इसका कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है। समस्या केवल संकेत के रूप में सामने आती है। डिजिटल पहलों वाले हिस्से में ई-फाइलिंग, हाइब्रिड सुनवाई, सीधा प्रसारण और राष्ट्रीय न्यायिक डेटा ग्रिड का उल्लेख किया गया है। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य द्वार पर लगी वर्चुअल जस्टिस क्लॉक को पारदर्शिता और जवाबदेही की मिसाल बताया गया है।

अभ्यास प्रश्नों में बच्चों से कहा गया है कि वे स्वयं को विधायिका या कार्यपालिका का हिस्सा मानकर मुकदमों की बड़ी संख्या से निपटने के नए उपाय सुझाएं।


नियुक्ति में कॉलेजियम का जिक्र नहीं

जजों की नियुक्ति वाले हिस्से में किताब केवल संविधान के प्रावधानों को दोहराती है। उसके मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय के जज राष्ट्रपति नियुक्त करते हैं। उच्च न्यायालय के जज राष्ट्रपति द्वारा मुख्य न्यायाधीश, राज्यपाल और संबंधित उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श के बाद नियुक्त किए जाते हैं। इस हिस्से में कॉलेजियम प्रणाली का कोई जिक्र नहीं किया गया है।

Wednesday, September 30, 2026

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

विशेष टीईटी पर प्रधानाध्यापक असमंजस में, प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को सिर्फ प्राइमरी टीईटी का विकल्प

पदोन्नति के लिए उच्च प्राथमिक टीईटी की पात्रता पर सवाल

 लखनऊ : विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर कुछ शिक्षकों में असमंजस की स्थिति है। खासकर प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के सामने यह सवाल खड़ा हो गया है कि उन्हें प्राथमिक स्तर की टीईटी देनी है या उच्च प्राथमिक स्तर की। आवेदन की अंतिम तिथि चार अक्टूबर है और परीक्षा तीन नवंबर को होनी है। ऐसे में शिक्षक संगठनों ने बेसिक शिक्षा विभाग से तत्काल स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है।

उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी अधिसूचना में प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी का विकल्प दिया गया है। इससे प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापक असमंजस में हैं। उनका कहना है कि उनका पद उच्च प्राथमिक विद्यालय के सहायक अध्यापक के समकक्ष माना जाता है। ऐसे में उन्हें उच्च प्राथमिक स्तर की टीईटी में आवेदन का अवसर क्यों नहीं दिया जा रहा है?

 शिक्षकों का तर्क है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक कक्षा एक से आठ तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए वर्तमान पद पर बने रहने को संबंधित स्तर की टीईटी और पदोन्नति के लिए उच्च स्तर की टीईटी जरूरी है। ऐसे में प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों के लिए केवल प्राथमिक टीईटी का विकल्प रखने से पदोन्नति की पात्रता प्रभावित हो सकती है। कंपोजिट विद्यालयों में कार्यरत प्राथमिक संवर्ग के प्रधानाध्यापकों की स्थिति भी इसी तरह की है। शिक्षकों की मांग है कि उन्हें दोनों स्तर की टीईटी में आवेदन की अनुमति दी जाए, ताकि वर्तमान पद की पात्रता के साथ भविष्य की पदोन्नति का रास्ता भी खुला रहे। आवेदन की अंतिम तिथि से पहले स्पष्ट निर्देश जारी करने व आवश्यक पर संशोधित अधिसूचना जारी करने की मांग की है।



पद समकक्ष तो जूनियर TET देने का मौका क्यों नहीं? प्राइमरी और अपर प्राइमरी स्कूल से कंपोजिट स्कूल में तैनात शिक्षक परेशान

प्राइमरी और अपर प्राइमरी के शिक्षकों के लिए अलग-अलग होनी है स्पेशल टीईटी की परीक्षा


लखनऊः विशेष शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) के आवेदन को लेकर बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में तैनात शिक्षकों के सामने असमंजस की स्थिति बन गई है। सबसे अधिक परेशानी प्राथमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों और कंपोजिट स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों को हो रही है, क्योंकि उन्हें समझ नहीं आ रहा कि वे प्राथमिक स्तर की टीईटी दें या उच्च प्राथमिक (जूनियर) स्तर की।


क्या है विवाद?: बेसिक शिक्षा विभाग के कैडर स्ट्रक्चर के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय में सहायक अध्यापक का पहला प्रमोशन 'प्राथमिक का हेडमास्टर' या 'जूनियर का सहायक अध्यापक' के तौर पर होता है। दोनों पद समान वेतनमान और समकक्ष है, जबकि अगला प्रमोशन जूनियर विद्यालय के प्रधानाध्यापक के तौर पर होता है।

अब शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि जब प्राथमिक हेडमास्टर का पद जूनियर के सहायक अध्यापक के समकक्ष है, तो उन्हें केवल प्राथमिक टीईटी का ही विकल्प क्यों दिया जा रहा है? उन्हें उच्च प्राथमिक (जूनियर) टीईटी में भी मौका मिलना चाहिए। कंपोजिट स्कूलों में प्राथमिक हेडमास्टरों का पद 'मानव संपदा पोर्टल' पर प्रधानाध्यापक/जूनियर सहायक अध्यापक दर्ज है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत वर्तमान पद पर बने रहने और भविष्य में पदोन्नति पाने के लिए संबंधित और उच्च स्तर की टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य है। शिक्षकों का कहना है कि यदि उन्हें अभी सिर्फ प्राथमिक टीईटी का विकल्प मिला, तो कल को जूनियर स्तर पर होने वाली पदोन्नति की पात्रता पर संकट खड़ा हो जाएगा।


स्पष्ट गाइडलाइन की मांगः शिक्षकों को दोनों स्तरों (प्राथमिक और उच्च प्राथमिक) की टीईटी में आवेदन करने की छूट दी जाए। कंपोजिट विद्यालयों के शिक्षकों और प्राथमिक प्रधानाध्यापकों के संबंध में संशोधित अधिसूचना व स्पष्ट निर्देश जारी किए जाए।

Tuesday, September 29, 2026

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश, 11508 शिक्षक भर्ती का मामला

शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में मांगी व्यवस्था और आदेश,  11508 शिक्षक भर्ती का मामला
 
29 सितंबर 2026
प्रयागराज । नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक और कंपोजिट स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने के मामले में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने बेसिक शिक्षा विभाग से सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में अब तक की गई कार्यवाही के बारे में पूछताछ की है। चयन आयोग के उपसचिव डॉ. संजय कुमार सिंह ने 24 सितंबर को अपर मुख्य सचिव माध्यमिक एवं बेसिक शिक्षा पार्थसारथी सेनशर्मा को इस संबंध में पत्र लिखा है।

चयन आयोग का कहना है कि 15 सितंबर को सहायक अध्यापकों के 11508 पदों पर भर्ती का विज्ञापन जारी होने के बाद बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने 17 सितंबर को यह अवगत कराया है कि उच्चतम न्यायालय के 25 जुलाई 2017 के आदेश के अनुपालन में शिक्षामित्रों को 68500 एवं 69000 सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में उनके प्रत्येक अध्यापन वर्ष के लिए 2.5 अंक, अधिकतम 25 अंक तक (जो भी कम हो) का भारांक तथा आयु में छूट प्रदान की गयी है।

उच्चतम न्यायालय ने राम शरण मौर्या के मामले में 18 नवंबर 2020 को शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान करने के आदेश दिए हैं। सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी के पत्र के संबंध में चयन आयोग ने लिखा है कि इस भर्ती में शिक्षामित्रों को आयु सीमा में 60 वर्ष तक छूट प्रदान की गयी है। हालांकि शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम 2023 की धारा 30 में उल्लिखित है कि अध्यापकों या अनुदेशकों के चयन के संबंध में बेसिक शिक्षा अधिनियम 1972 के नियमों, विनियमों या परिनियमों में किसी बात के प्रतिकूल होते हुए भी चयन आयोग का अधिनियम प्रभावी होगा। आयोग के अधिनियम एवं विनियमावली में मात्र लिखित परीक्षा के आधार पर अभ्यर्थियों के चयन की व्यवस्था है।

वहीं आयोग को यह सूचना नहीं दी गई है कि उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के आदेश के क्रम में शिक्षामित्रों को आगामी भर्ती में एक अवसर प्रदान करने संबंधी राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी किसी आदेश का उल्लेख नहीं है, जिससे यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के क्रम में राज्य सरकार या बेसिक शिक्षा विभाग ने क्या निर्णय लिया व शिक्षामित्रों को भारांक किस प्रकार दिए जाने की व्यवस्था तय की गयी है। लिहाजा बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से जारी दिशा-निर्देशों से आयोग को अवगत कराएं ताकि चयन प्रक्रिया की कार्यवाही सम्पादित की जा सके।



टीईटी पास शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, प्रदेश में टीईटी पास 75 हजार शिक्षामित्रों को मिलेगा लाभ

26 सितम्बर 2026
प्रयागराज। शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण शिक्षामित्रों को परिषदीय स्कूलों में सहायक अध्यापक भर्ती में भारांक (वेटेज) दिए जाने की सौगात मिल सकती है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से शुक्रवार को शासन को पत्र भी भेज दिया गया है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के 2020 के आदेश का हवाला देते हुए भारांक दिए जाने की अनुमति मांगी है।

वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जनपदों के परिषदीय स्कूलों में 1,43,470 शिक्षामित्र कार्यरत हैं जिसमें 75 हजार से ज्यादा ऐसे शिक्षामित्र हैं जिन्होंने टीईटी पास कर ली है। भारांक मिलने से सहायक अध्यापक भर्ती प्रक्रिया में इन्हें सीधे तौर पर बड़ी राहत मिलेगी। दरअसल, प्रदेश सरकार पिछली दो भर्तियों 68,500 और 69,000 में भारांक दे चुकी है। इसमें काम के अनुभव के हिसाब से प्रतिवर्ष 2.5 अंक या अधिकतम 25 अंक का भारांक मिले थे। उप्र शिक्षा सेवा चयन आयोग के उप सचिव संजय सिंह का कहना है कि शासन स्तर से अनुमति मिलने का इंतजार है।

2017 में निरस्त हो गया था शिक्षामित्रों का समायोजन
उप्र शिक्षामित्र संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष वसीम अहमद कहते हैं कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बगैर टीईटी पास प्रदेश भर के शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द कर दिया गया था और उन्हें 10 हजार रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलने लगा था। इसमें 1.37 हजार शिक्षामित्र शामिल थे।

स्पेशल टीईटी में शामिल होने की कर रहे मांग
कुछ महीने पहले ही परिषदीय स्कूलों के सहायक अध्यापकों के लिए टीईटी की अनिवार्यता की बात कही गई थी। बाद में सरकार ने सहायक अध्यापकों की सहूलियत के लिए स्पेशल टीईटी कराए जाने की घोषणा की थी। अब प्रदेश भर के ऐसे शिक्षामित्र भी इस स्पेशल टीईटी में आवेदन करने का मौका मांग रहे हैं जो अभी टीईटी पास नहीं हैं।




शिक्षक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी, बेसिक शिक्षा विभाग ने शिक्षा सेवा चयन आयोग को लिखा पत्र

चयन आयोग ने गठित की चार सदस्यीय कमेटी, मांगी रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षामित्रों को भारांक देने का दिया था आदेश

आज होने वाली चयन आयोग की बैठक में हो सकता है निर्णय

22 सितंबर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक देने की तैयारी है।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद भर्ती के विज्ञापन में भारांक का जिक्र नहीं होने संबंधी समाचार प्रकाशित होने के बाद अफसर बैकफुट पर हैं। बेसिक शिक्षा परिषद के सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को पत्र लिखकर उच्चतम न्यायालय के 18 नवंबर 2020 के उस आदेश की जानकारी दी है, जिसमें शिक्षामित्रों को आगामी शिक्षक भर्ती में एक अतिरिक्त अवसर प्रदान किए जाने के आदेश पारित दिए गए थे।


सचिव का पत्र मिलने के बाद इस मामले में निर्णय लेने के लिए चयन आयोग ने चार सदस्यीय कमेटी गठित की है। माना जा रहा है कि मंगलवार को होने वाली आयोग की बैठक में इस पर भी विचार किया जाएगा। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर शिक्षामित्रों को भारांक देने की उम्मीद जगी है क्योंकि भारांक नहीं मिलने पर शिक्षामित्र कोर्ट में अवमानना याचिका दायर कर सकते हैं और ऐसा होने पर पूरी भर्ती ही फंस जाएगी। शासन स्तर पर भी शिक्षामित्रों के भारांक की अनदेखी, नियमावली में संशोधन और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को आरक्षण नहीं देने पर विचार हो रहा है। शासन में भी इसी सप्ताह इन मुद्दों पर बैठक होने की उम्मीद है।


अधियाचन भेजते समय नहीं दी आदेश की सूचना

इस पूरे मामले में बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही सामने आई है। 11508 सहायक अध्यापक के पदों पर चयन एवं नियुक्ति के लिए बेसिक शिक्षा निदेशक ने 17 मई को चयन आयोग को अधियाचन भेजा था। उसके चार महीने बाद 15 सितंबर को चयन आयोग ने भर्ती का विज्ञापन जारी किया गया। वैसे तो बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को अधियाचन के साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश की सूचना देनी चाहिए थी लेकिन ऐसा नहीं हुआ। यही नहीं अधियाचन भेजने के चार महीने बाद तक बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों को इस आदेश की सूचना देने की चिंता नहीं हुई। भर्ती विज्ञापन जारी होने के बाद जब शिक्षामित्रों को भारांक नहीं देने का समाचार प्रकाशित हुआ तब जाकर बेसिक के अफसर नींद से जागे और उच्चतम न्यायालय के आदेश की सूचना भेजी।



नियमावली में संशोधन नहीं, खत्म कर दी मेरिट,  प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती का मामला

बेसिक शिक्षा परिषद की नियमावली में एकेडमिक मेरिट मौजूद, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के विज्ञापन में नहीं है जिक्र

18 सितम्बर 2026
प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में 11508 सहायक अध्यापक भर्ती में नियमावली संशोधन की अड़चन आ सकती है। बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में अभी भी 40 प्रतिशत शैक्षिक मेरिट का प्रावधान है जिसे हटाए बगैर उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने केवल लिखित परीक्षा के आधार पर चयन का विज्ञापन जारी कर दिया है। भर्ती के विज्ञापन में चयन पूरी तरह 360 अंकों की लिखित परीक्षा (120 बहुविकल्पीय प्रश्न) की मेरिट पर करने की बात लिखी है। शैक्षिक योग्यता (हाईस्कूल, इंटर, स्नातक प्रशिक्षण) के अंकों को मेरिट में शामिल नहीं किया गया है। अंक समान होने की स्थिति में सिर्फ स्नातक, प्रशिक्षण प्रतिशत व उम्र को आधार बनाया है।


यह व्यवस्था सेवा नियमावली के विपरीत है। नियमावली में हाईस्कूल, इंटर, स्नातक और डीएलएड (बीटीसी) / प्रशिक्षण के अंकों को (दस-दस कुल 40 प्रतिशत) वेटेज (भारांक) गुणवत्ता बिंदुओं के रूप में जोड़ा जाता है, जबकि सहायक शिक्षक भर्ती परीक्षा के अंकों को 60 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। जानकारों की मानें तो नियमावली में बिना संशोधन चयन का आधार बदलना नियम विरुद्ध है। यदि लिखित परीक्षा के आधार पर भर्ती करनी थी तो पहले सरकार को कैबिनेट से नियमावली में 26वां संशोधन कर शैक्षिक मेरिट समाप्त करनी चाहिए थी और चयन का आधार पूर्णतया लिखित परीक्षा करना चाहिए था।

2017 से 2019 तक नियमावली में हुए छह संशोधन

बेसिक शिक्षा (शिक्षक) सेवा नियमावली 1981 में 2017 से 2019 तक हुए 20वें से 25वें संशोधनों में एटीआरई परीक्षा, बीएड योग्यता और अपेंडिक्स में कई बदलाव किए गए थे, लेकिन शैक्षिक मेरिट का प्रावधान आज भी कायम है। एकेडमिक मेरिट के आधार पर ही 68500 और 69000 सहायक अध्यापकों की भर्ती की गई थी। यदि चयन प्रक्रिया बदलना है तो नियमावली में संशोधन अनिवार्य है, अन्यथा भर्ती प्रक्रिया में विधिक अड़चन आ सकती है।

चयन की प्रक्रिया परीक्षा लेने वाली संस्था (उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग) ही तय करती है। ऐसे में 11508 भर्ती का जो विज्ञापन जारी हुआ है वह नियम संगत है। - डॉ. संजय कुमार सिंह, पीआरओ चयन आयोग



11508 भर्ती में शिक्षामित्रों को नहीं मिलेगा भारांक, चयन आयोग के विज्ञापन में जिक्र नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने भारांक देने का दिया था आदेश

16 सितंबर 2026
प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों में साढ़े सात साल बाद शुरू हुई 11508 सहायक अध्यापकों की भर्ती से प्रदेश के लगभग 1.42 लाख शिक्षामित्रों को निराशा हाथ लगी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग की ओर से जारी विज्ञापन में शिक्षामित्रों को सेवानिवृत्ति की आयु (60 साल) तक आवेदन के लिए अर्ह माना है, लेकिन भारांक का कोई जिक्र नहीं है। राम शरण मौर्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 18 नवंबर 2020 को आदेश दिया था कि शिक्षामित्रों को अगली चयन प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा करने का एक और अवसर प्रदान किया जाएगा।


शीर्ष अदालत ने यह राज्य सरकार के विवेक पर छोड़ा था कि इस अवसर का लाभ शिक्षामित्र किस प्रकार और किन प्रक्रियाओं व्यवस्थाओं के तहत उठा सकेंगे। यही नहीं 69000 शिक्षक भर्ती के कटऑफ विवाद के मामले में सरकार ने 12 जून 2020 को दाखिल इंटरक्यूलेटरी एप्लीकेशन में सुप्रीम कोर्ट को यह जानकारी दी थी कि उस समय शिक्षकों के रिक्त 51112 पदों की भर्ती में शिक्षामित्रों के हितों का ध्यान रखा जाएगा।

इससे पहले जुलाई 2017 में 1.37 लाख शिक्षामित्रों के सहायक अध्यापक पद पर समायोजन निरस्त होने शिक्षामित्रों को अनुभव के आधार पर दस से 25 अंक तक का भारांक मिला था।

15 हजार शिक्षामित्रों को ही मिली नौकरी

बिना टीईटी सहायक अध्यापक पद पर समायोजित 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2017 में निरस्त कर दिया था। शीर्ष अदालत के आदेश पर प्रदेश सरकार ने 68500 और 69000 भर्ती में शिक्षामित्रों को भारांक दिया था। क्रमशः लगभग सात और आठ हजार शिक्षामित्रों को ही नौकरी मिल सकी थी।

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव

सरकार बनी तो पुरानी पेंशन बहाल करेंगे, वित्तविहीन शिक्षकों को मानदेय और शिक्षामित्रों को बनायेंगे शिक्षक, बोले अखिलेश यादव 

लखनऊ। सपा अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश सपा मुख्यालय पर विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक चुनाव की तैयारी को लेकर पार्टी विधायकों और प्रत्याशियों के साथ बैठक की। इस बैठक के बाद अखिलेश यादव ने प्रेस कांफ्रेंस की, जिसमें सपा के प्रत्याशियों को जिताने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रदेश में समाजवादी सरकार बनने जा रही है। कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी नेताजी के समय से शिक्षकों के लिए काम करती रही है।


अखिलेश ने कहा कि जब भी मौका मिला, समाजवादी पार्टी ने शिक्षकों के हित में फैसले लिए। वित्तविहीन शिक्षकों के लिए बजट में मानदेय के लिए व्यवस्था करेंगे। शिक्षकों की सेवा सुरक्षा और तदर्थ प्रधानाचार्यों के वेतन संबंधी धारा 12,18 व 21 को बहाल किया जाएगा। आधुनिक मदरसा शिक्षकों का वेतन बहाल किया जाएगा। संस्कृत विद्यालयों की समस्याओं का समाधान होगा। 

शिक्षामित्रों को शिक्षक बनाकर सम्मान देने का काम किया जाएगा। डिग्री कॉलेजों में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करेंगे। अनुदेशक, रोजगार और आंगनबाड़ी की समस्याओं का समाधान करेंगे।

Monday, September 28, 2026

यूपी में 7867 उच्च शिक्षण संस्थान नैक मूल्यांकन से दूर, 8021 उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल 154 का नैक मूल्यांकन

यूपी में 7867 उच्च शिक्षण संस्थान नैक मूल्यांकन से दूर, 8021 उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल 154 का नैक मूल्यांकन

नैक की नई प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं संस्थान

 लखनऊ: प्रदेश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता की जांच करने वाली राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) की पहुंच अधिकांश संस्थानों तक नहीं हो सकी है। यूपी के 8021 उच्च शिक्षण संस्थानों में केवल 154 संस्थान नैक से मूल्यांकित हैं, जिससे 7867 संस्थान अभी नैक के मूल्यांकन से बाहर हैं। बड़ी संख्या में संस्थान मूल्यांकन की प्रक्रिया में शामिल होने के इंतजार में हैं। नैक ने पुरानी ग्रेड आधारित व्यवस्था को बदल दिया है, लेकिन नई प्रक्रिया अभी शुरू नहीं हुई है।


24 राज्य विश्वविद्यालयों और एक डीम्ड विश्वविद्यालय में 13 संस्थान नैक से मान्यता प्राप्त हैं। निजी विश्वविद्यालयों में 52 में 11 संस्थान नैक से मूल्यांकित हैं और 41 अभी इस प्रक्रिया से बाहर हैं। महाविद्यालयों की संख्या अधिक है, और सरकारी, सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित महाविद्यालयों की बड़ी संख्या के कारण नैक मूल्यांकन का दायरा बढ़ाना चुनौतीपूर्ण है। 

उच्च शिक्षा के अधिकांश संस्थानों के पास नैक के निर्धारित मानकों पर बाहरी मूल्यांकन का प्रमाण नहीं है। नैक में संस्थान की पढ़ाई, शिक्षण व्यवस्था, शोध, आधारभूत सुविधाएं, विद्यार्थियों को मिलने वाली सुविधाएं, प्रशासन और अन्य शैक्षिक गतिविधियों का मूल्यांकन किया जाता है। इससे संस्थान को अपनी कमियों और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों की पहचान करने में मदद मिलती है।

डीएलएड में एक विषय में तीन बार फेल अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन होगा समाप्त, परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अभ्यर्थी कर रहे पुनर्परीक्षा की मांग

डीएलएड में एक विषय में तीन बार फेल अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन होगा समाप्त, परिषदीय स्कूलों में शिक्षक भर्ती से पहले अभ्यर्थी कर रहे पुनर्परीक्षा की मांग


प्रयागराज। नगर क्षेत्र के परिषदीय स्कूलों में 11,508 पदों पर शिक्षक भर्ती से पहले डीएलएड करने वाले कई अभ्यर्थी पुनर्परीक्षा की अनुमति मांग रहे हैं। वहीं, परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव राजेंद्र प्रताप ने एक विषय में तीन बार अनुत्तीर्ण अभ्यर्थियों का अभ्यर्थन समाप्त करने के निर्देश दिए हैं।


उन्होंने कहा कि दो बार सेमेस्टर बैक वाले अभ्यर्थियों को भी परीक्षा में शामिल होने का अवसर नहीं मिलेगा। कार्यालय के चक्कर लगाने से नियमों में बदलाव संभव नहीं है। सचिव ने बताया कि यह आदेश डीएलएड प्रशिक्षण के नियमों के अनुरूप है।

उच्च न्यायालय के आदेश पर नियम का पालन किया जा रहा है। उच्च न्यायालय ने 20 फरवरी 2026 को इस संबंध में आदेश दिया था।

कक्षा एक और दो के बच्चे भी सीखेंगे संस्कृत का मौलिक ज्ञान, एससीईआरटी तैयार कर रहा इसके लिए अलग मॉड्यूल

कक्षा एक और दो के बच्चे भी सीखेंगे संस्कृत का मौलिक ज्ञान,  एससीईआरटी तैयार कर रहा इसके लिए अलग मॉड्यूल

बैगलेस डे में होगी पढ़ाई

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में कक्षा एक व दो के बच्चों को भी संस्कृत का मौलिक ज्ञान दिया जाएगा। अतिरिक्त कक्षाओं व बैगलेस डे में इन्हें संस्कृत का पढ़ने में कठिनाई न हो। इसके आधारभूत ज्ञान दिया जाएगा जिससे इन्हें कक्षा तीन से विषय के रूप में संस्कृत पढ़ने में कठिनाई न  हो इसके लिए राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) ने तैयारी पूरी कर ली है।


परिषदीय स्कूलों में कक्षा तीन से पांच तक के बच्चों को संस्कृत पढ़ाई जाती है। संस्कृत के कठिन पाठ उन्हें समझाने में शिक्षकों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। ऐसे में अब कक्षा एक-दो के बच्चों को शैक्षिक सत्र 2027-28 से संस्कृत की समझ विकसित की जाएगी। एससीईआरटी के संयुक्त निदेशक डॉ. पवन सचान ने बताया कि मौलिक ज्ञान उन्हें मौखिक रूप से पढ़ाया जाएगा। इसकी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कक्षा एक-दो के बच्चों को संस्कृत में गिनती, फलों व वस्तुओं के नाम सहित आधारभूत ज्ञान दिया जाएगा। इसका मॉडयूल तैयार कर शिक्षकों को मुहैया कराया जाएगा।

Sunday, September 27, 2026

सड़कों पर बेरोजगार, बेसिक शिक्षको के 27713 रिक्त पद दबाए बैठे हैं अधिकारी

सड़कों पर बेरोजगार, बेसिक शिक्षको के 27713 रिक्त पद दबाए बैठे हैं अधिकारी

प्रयागराज। परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में सात साल बाद आई भर्ती में पदों की संख्या को लेकर लाखों बेरोजगारों में असंतोष पनप रहा है। एक तरफ डीएलएड और टीईटी पास बेरोजगार पदों की संख्या बढ़ाकर कम से कम 60 हजार करने को लेकर आंदोलन कर रहे हैं तो दूसरी तरफ बेसिक शिक्षा विभाग के अफसर हजारों रिक्त पद दबाए बैठे हैं।


 बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने नगर क्षेत्र के स्कूलों में सहायक अध्यापकों के केवल 11,508 रिक्त पदों की सूचना उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को भेजी है।

आठ साल पहले शुरू हुई 68,500 सहायक अध्यापक भर्ती में रिक्त 27,713 पदों पर चयन की कार्रवाई दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 33/30 कटऑफ विवाद को खारिज करते हुए अगस्त 2024 के अंत में बेसिक शिक्षा विभाग को दो महीने में रिक्त 27,713 पदों पर नए सिरे से भर्ती शुरू करने के आदेश दिए थे। 

इस बीच शिक्षामित्र, बीटीसी और डीएलएड अभ्यर्थियों ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका कर दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने पहले विशेष अनुज्ञा याचिका खारिज की। उसके बाद दाखिल क्यूरेटिव पेटीशन को पांच न्यायाधीशों की पीठ ने सात अक्तूबर 2025 को खारिज कर दी थी। 

उसके बाद से 27713 पदों पर भर्ती को लेकर कोई अड़चन नहीं बची है। इसके बावजूद अधिकारियों ने इन पदों की सूचना चयन आयोग को नहीं भेजी।

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य

लखनऊः राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब विकास कार्य किसी तय भारांक के आधार पर नहीं, बल्कि स्कूल की वास्तविक जरूरत देखकर तय होंगे। शासन ने प्रोजेक्ट अलंकार में लागू भारांक आधारित प्राथमिकता व्यवस्था खत्म कर दी है। 


नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक स्कूल की जरूरत का आकलन कर जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को भेजेंगे। इससे जरूरी कामों के प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले सरल होने की उम्मीद है।

 डीआइओएस प्रस्ताव के आधार पर संबंधित कार्यदायी संस्था से एस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा। समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य और डीआइओएस सदस्य सचिव होंगे।

माध्यमिक विद्यालयों के नामांकन में भिन्नता को सही कराने के सम्बन्ध में।

माध्यमिक विद्यालयों के नामांकन में भिन्नता को सही कराने के सम्बन्ध में।


Saturday, September 26, 2026

माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी, मांगी गई जानकारी

माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी, मांगी गई जानकारी


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त, अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत, स्ववित्तपोषित माध्यमिक तथा स्ववित्तपोषित संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की तैयारी शुरू हो गई है। इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा अनुभाग-8 की ओर से महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र भेजकर आवश्यक सूचनाएं तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

अनु सचिव रचना जायसवाल की ओर से 24 सितंबर 2026 को जारी पत्र में कहा गया है कि यह प्रकरण शीघ्र ही मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तुत किया जाना प्रस्तावित है। शासन ने कैशलेस चिकित्सा सुविधा के लिए प्रति कार्मिक अनुमानित 3,000 रुपये वार्षिक प्रीमियम की दर से संभावित वार्षिक वित्तीय व्ययभार की जानकारी मांगी है।

शासन ने संबंधित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की पात्र अनुमानित संख्या तथा उनके आधार पर अनुमानित वार्षिक व्ययभार निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराने को कहा है। यह सूचना शासन को उसी दिन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

प्रस्ताव लागू होने पर संबंधित शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ मिल सकेगा। फिलहाल यह मामला मंत्रिपरिषद के समक्ष प्रस्तावित है, इसलिए सुविधा लागू होने की अंतिम स्थिति मंत्रिपरिषद के निर्णय के बाद स्पष्ट होगी।


बारिश के बीच शिक्षक-कर्मचारियों का पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

बारिश के बीच शिक्षक-कर्मचारियों का पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में प्रदर्शन

26 सितम्बर 2026
लखनऊ। लगातार बारिश के बावजूद शुक्रवार को अटेवा की महारैली में बड़ी संख्या में शिक्षक और कर्मचारी ईको गार्डन पहुंचे। पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी की अनिवार्यता खत्म करने और निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों ने जोरदार नारेबाजी की। प्रदेश के विभिन्न जिलों से से आए आए कर्मचारियों ने बारिश के बीच अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। एनएमओपीएस के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि टीईटी अनिवार्यता, एनपीएस और निजीकरण स्वीकार नहीं किया जाएगा। मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो तीन माह बाद लखनऊ में 'डेरा डालो घेरा डालो' आंदोलन के तहत क्रमिक अनशन किया जाएगा। महारैली में विभिन्न कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारी मौजूद रहे। 




पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी से राहत के लिए अटेवा की रैली आज 

25 सितंबर 2026
लखनऊ। अटेवा पेंशन बचाओ मंच द्वारा 25 सितंबर को पुरानी पेंशन बहाली, टीईटी से राहत के लिए लखनऊ के ईको गार्डेन में रैली की जा रही है। इसमें प्रदेश भर के शिक्षक-कर्मचारी शामिल होंगे। विभिन्न शिक्षक कर्मचारी, अधिकारी संगठनों ने रैली का समर्थन किया है।

अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बन्धु ने कहा कि कई सालों से प्रदेश में शिक्षकों और कर्मचारियों द्वारा पुरानी पेंशन की बहाली की मांग की जा रही है। क्योंकि एनपीएस या यूपीएस से शिक्षको, कर्मचारियों का कोई लाभ नहीं है। सामाजिक सुरक्षा यदि कोई है तो पुरानी पेंशन ही है। इसके साथ ही निजीकरण, टीईटी की अनिवार्यता की समाप्ति की मांग की जा रही है। किंतु सरकार द्वारा कोई निर्णय न लेने के कारण इस रैली के माध्यम से शिक्षक-कर्मचारी मुख्यमंत्री से निवेदन करेंगे।

अटेवा के प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि अटेवा के संघर्ष के कारण ही राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाल हो चुकी है। इसलिए कल होने वाली रैली में सभी शिक्षक-कर्मचारी एकजुट होकर एकता का परिचय देते हुए सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली की गुहार करेगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महासंघ के महामंत्री अशोक कुमार ने कहा कि सभी शिक्षक और कर्मचारी अटेवा की इस रैली में शामिल होकर सरकार से पुरानी पेंशन की मांग करें।



पुरानी पेंशन बहाली के लिए 25 को होगी रैली, अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने की तैयारियां तेज

अटेवा की अगुवाई में हुई बैठक में बनी रणनीति

14 सितम्बर 2026
लखनऊ। अटेवा पेंशन बचाओ मंच ने 25 सितंबर को लखनऊ में होने वाली रैली की तैयारियों के सिलसिले में रविवार को स्व. डॉ. रामाशीष स्मृति भवन पारा में बैठक की। इसमें रैली की सफलता के लिए पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा निर्देश दिए गए।


अटेवा के प्रदेश अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने कहा कि पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति और टीईटी की अनिवार्यता की समाप्ति के लिए होने वाली इस रैली से प्रदेश के शिक्षकों, कर्मचारियों की पुरानी पेंशन बहाली, निजीकरण की समाप्ति और टेट की अनिवार्यता का रास्ता साफ होगा। प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने सभी शिक्षक, कर्मचारी संगठनों का आह्वान किया कि पुरानी पेंशन बहाली की लड़ाई हम सब की लड़ाई है। इसलिए 25 सितंबर को सभी संघ इस लड़ाई में अटेवा का साथ दें। 

प्रभारी डॉ. राजेश कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, हिमाचल प्रदेश में बहाल हो चुकी है, अब उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली का समय आ गया है। बैठक को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य महासंघ के अशोक कुमार, अटेवा के प्रदेशीय उपाध्यक्ष चंद्रहास सिंह, राकेश रमन, ओमप्रकाश कन्नौजिया और जनार्दन शुक्ला ने भी संबोधित किया।

हर जिले में बनाएं स्कूल वाहन सुरक्षा समिति : हाईकोर्ट

हर जिले में बनाएं स्कूल वाहन सुरक्षा समिति : हाईकोर्ट 

कोर्ट ने हर जिले की स्कूल वाहन सुरक्षा समिति की नियमित बैठक कराने के भी दिए निर्देश

डीएम एक माह में देंगे अनुपालन रिपोर्ट, सीबीएसई व आइसीएसई को भी बनाया जाए पक्षकार

लखनऊ : स्कूली बच्चों की सुरक्षा को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश सरकार को सख्त निर्देश दिए हैं कि हर जिले में जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों को नियमित रूप से सक्रिय किया जाए और सभी स्कूलों में स्कूल परिवहन सुरक्षा समितियों का गठन कराया जाए। कोर्ट ने कहा कि मोटर वाहन नियमों में स्कूली वाहनों की सुरक्षा के लिए विस्तृत प्रविधान पहले से मौजूद हैं, लेकिन इनका प्रभावी पालन कराया जाना जरूरी है।


न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ ने यह आदेश गोमतीनगर रिवर बैंक रेजिडेंट्स एसोसिएशन के सचिव गिरधर गोपाल की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। कोर्ट ने मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह जिला स्कूल वाहन सुरक्षा समितियों की नियमित बैठकें सुनिश्चित करें और प्रत्येक स्कूल में गठित होने वाली परिवहन सुरक्षा समितियों के गठन तथा उनके कामकाज की निगरानी के लिए आवश्यक आदेश जारी करें।

सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि उत्तर प्रदेश मोटर वाहन नियमावली के अध्याय 9-ए में स्कूली बच्चों के परिवहन और उनकी सुरक्षा के लिए विशेष प्रविधान किए गए हैं। नियम 222-ए के तहत सार्वजनिक स्थानों पर स्कूली बच्चों को ले जाने वाले परिवहन वाहनों के लिए निर्धारित परमिट जरूरी है। स्कूल बसों और निजी बसों के लिए नियम 222-बी में अलग व्यवस्था की गई है। अधिकांश स्कूल वैन के पास आवश्यक परमिट नहीं हैं। 

हाई कोर्ट ने जिलाधिकारियों को समितियों के गठन और उनके दायित्वों के निर्वहन की निगरानी का निर्देश दिया है। प्रत्येक जिले के जिलाधिकारी को एक माह में आदेश के अनुपालन की जानकारी देनी होगी। इसके आधार पर सभी जिलों की रिपोर्ट संकलित कर सरकारी अधिवक्ता अनुपालन हलफनामा दाखिल करेंगे। कोर्ट ने सीबीएसई और आइसीएसई को भी मामले में पक्षकार बनाने का निर्देश दिया है, ताकि उनके संबद्ध स्कूलों में भी सुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे, चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

अब मोबाइल की लत छुड़ाएंगे,  चुने जाएंगे टॉप-5 स्टूडेंट रीडर, परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र और किताबें पढ़ने पर दिया जाएगा जोर

लखनऊ। बच्चों में मोबाइल के अत्यधिक प्रयोग की आदत कम करने और पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग नया कदम उठाएगा। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में अब टॉप-5 स्टूडेंट रीडर चुने जाएंगे। इसके अलावा हर विद्यालय में 'रीडर ऑफ द वीक' भी चुना जाएगा। स्कूलों में समाचार पत्र और प्रेरक पुस्तकें पढ़ने के लिए विद्यार्थियों को प्रोत्साहित किया जाएगा।


बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को दस खरब डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की समीक्षा बैठक हुई। इसमें उन्होंने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए खेल, आत्मरक्षा, कला और क्राफ्ट जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। विद्यार्थियों को इन गतिविधियों में दक्ष बनाने के लिए प्रोफेशनल कोच की मदद ली जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों की छात्राओं को खेलों में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में प्रतिभाग कराया जाएगा।

अधिकारियों ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में समाचार पत्र खरीदने के लिए बजट उपलब्ध कराया जा रहा है। अब यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विद्यार्थी नियमित रूप से समाचार पत्र और किताबें पढ़ें। बैठक में बताया गया कि 25,790 प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम स्थापित किए जा चुके हैं।

मंत्री ने इनके प्रभावी उपयोग के लिए निगरानी तंत्र मजबूत करने के निर्देश दिए। छात्रों के संज्ञानात्मक, सामाजिक-भावनात्मक और शारीरिक विकास की निगरानी के लिए समग्र प्रगति पत्र लागू किया गया है, जिसे अपार आईडी और प्रेरणा पोर्टल से जोड़ा जा रहा है।

पॉक्सो पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू, राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, स्कूलों में विस्तार से दी जाएगी अधिनियम की जानकारी

पॉक्सो पर विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी अभियान शुरू,  राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की पहल, स्कूलों में विस्तार से दी जाएगी अधिनियम की जानकारी


लखनऊ। उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण ने शुक्रवार से लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पॉक्सो) के प्रति विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए प्रदेशव्यापी विशेष अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को पॉक्सो के विधिक प्रावधानों, अधिकारों, दायित्वों और उल्लंघन के कानूनी परिणामों की जानकारी देना है। 


अभियान सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश व राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ के नेतृत्व और इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश व उप्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मुख्य संरक्षक न्यायमूर्ति अरुण भंसाली एवं वरिष्ठ न्यायाधीश व कार्यपालक अध्यक्ष न्यायमूर्ति अरिंदम सिन्हा के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। 


अभियान के तहत विद्यार्थियों, विशेषकर किशोरों व युवाओं को बताया जा रहा है कि कानून में 18 वर्ष से कम आयु के प्रत्येक व्यक्ति को बच्चा माना गया है और उसकी सहमति को कानूनी मान्यता नहीं है। 

सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड गायब होने पर नियुक्ति को अमान्य घोषित नहीं कर सकते, शिक्षकों ने नियुक्ति को अमान्य घोषित करने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड गायब होने पर नियुक्ति को अमान्य घोषित नहीं कर सकते,  शिक्षकों ने नियुक्ति को अमान्य घोषित करने पर हाईकोर्ट में दी थी चुनौती

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि केवल सरकारी कार्यालय से रिकॉर्ड या फाइल न मिलने के आधार पर किसी की नियुक्ति को अमान्य या फर्जी घोषित नहीं किया जा सकता। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने बिना पक्ष सुने वेतन रोकने के आदेश को रद्द कर दिया।


यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने मऊ के रजनीश उपाध्याय और 14 अन्य सहायक शिक्षकों की याचिका पर दिया है। याची शिक्षक समाज कल्याण विभाग से सहायता प्राप्त विद्यालयों में कार्यरत थे। इनकी नियुक्तियां 2010 से 2016 के दौरान नियमानुसार अनुमोदन प्राप्त कर की गई थीं। हालांकि, बाद में 2014 में जांच में बीएसए कार्यालय में अनुमोदन संबंधी दस्तावेज नहीं मिले तो विभाग ने जुलाई 2025 में नियुक्तियों को फर्जी बताकर वेतन रोकने और कानूनी कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया।

इसके खिलाफ शिक्षकों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अधिवक्ता ने दलील दी कि 2018 में याचियों की नियुक्ति के संबंध में जांच की गई थी, जिसमें गड़बड़ी नहीं पाई गई थी। दर्ज एफआईआर में भी पुलिस ने एफआर लगा दी थी। बीएसए ने शिक्षकों का पक्ष सुने बिना नियुक्ति रद्द कर दी है। राज्य की ओर से कहा गया कि अनुमोदन को कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। इससे साबित होता है कि गलत तथ्य पेश कर अनुमोदन प्राप्त किया गया।

कोर्ट ने पाया कि मामले में पूर्व में की गई जांच और पुलिस विवेचना में शिक्षकों को पहले ही क्लीनचिट मिल चुकी थी। इसके बावजूद न कोई नया साक्ष्य प्रस्तुत किया गया और न ही शिक्षकों को सुनवाई का मौका दिया गया। एक एकतरफा कार्रवाई कर दी गई। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना। कहा कि फाइलों के न मिलने के लिए सीधे तौर पर कर्मचारियों को दोषी ठहराना अनुचित है।

Friday, September 25, 2026

मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में अनिश्चितकालीन संविदा नियुक्ति कर्मचारियों का शोषण : हाईकोर्ट, कहा-नियमित भर्ती करे सरकार

मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में अनिश्चितकालीन संविदा नियुक्ति कर्मचारियों का शोषण : हाईकोर्ट, कहा-नियमित भर्ती करे सरकार

महानिदेशक से खाली पड़े प्रोफेसरों के पदों का मांगा ब्योरा, कोर्ट ने कहा-नियमित भर्ती करे सरकार


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सरकारी मेडिकल और नर्सिंग कॉलेजों में नियमित भर्ती किए बिना सालों से संविदा के चलाने की व्यवस्था को गंभीरता से लिया है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने कहा कि बिना किसी वैधानिक ढांचे के संविदा कर्मचारियों को अनिश्चितकाल तक बनाए रखना उनके शोषण की संभावना को बढ़ाता है, जो न्याय व संविधान की भावना के खिलाफ है।


इस प्रकार की तदर्थ और संविदा प्रथा समानता के अधिकार का सीधा उल्लंघन करती है।

बदायूं निवासी याची श्रीनिवासन की प्रिंसिपल-सह-प्रोफेसर के रूप में संविदा आधार पर नियुक्ति हुई थी। तीन जून 2025 के आदेश से उनकी नियुक्ति को इस आधार पर रद्द कर दिया गया कि संविदा को तीन वर्ष से अधिक के लिए लिए नहीं बढ़ाया जा सकता है। याची ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी।

कोर्ट के आदेश के अनुपालन में चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण विभाग के महानिदेशक की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने पाया कि पूरे प्रदेश में 500 से अधिक पद संविदा के आधार पर भरे गए हैं। महज दो से तीन प्रतिशत पद ही नियमित हैं। इसके अलावा 25 प्रतिशत मेडिकल व नर्सिंग कॉलेजों का संचालन कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चल रहा है।

इस गंभीर स्थिति पर संज्ञान लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को अंतरिम परमादेश जारी कर कहा है कि नियमित चयनों के लिए प्रस्तावित 'उत्तर प्रदेश नर्सिंग कॉलेज, शिक्षक, सेवा नियमावली, 2026' के ड्राफ्ट को जल्द से जल्द मंजूरी दी जाए। साथ ही तत्काल अधिसूचित किया जाए ताकि जल्द से जल्द पारदर्शी एवं नियमित भर्तियां शुरू की जा सकें।

कोर्ट ने अगली सुनवाई 13 अक्तूबर 2026 तय करते हुए चिकित्सा शिक्षा विभाग से विस्तृत ब्योरा मांगा है। महानिदेशक को अगले हलफनामे में राज्य के सभी मेडिकल कॉलेजों में खाली पड़े प्रोफेसरों के पदों का ब्योरा, विभागाध्यक्षों के रूप में काम कर रहे असिस्टेंट या एसोसिएट प्रोफेसरों की जानकारी, भर्ती के लिए भेजे गए अधियाचन और जारी विज्ञापनों की वर्तमान स्थिति पेश करने का आदेश दिया गया है।


कंपोजिट विद्यालयों का हुआ विस्तार 225 से बढ़कर 24605 हुए, बालवाटिका से लेकर कक्षा 8 तक की शिक्षा एक कैंपस में

कंपोजिट विद्यालयों का हुआ विस्तार 225 से बढ़कर 24605 हुए, बालवाटिका से लेकर कक्षा 8 तक की शिक्षा एक कैंपस में


लखनऊ। प्रदेश में बालवाटिका से कक्षा आठ तक एक ही परिसर में शिक्षा उपलब्ध कराने वाले कंपोजिट विद्यालयों का तेजी से विस्तार हुआ है। वर्ष 2017-18 में 225 विद्यालयों से शुरू हुई योजना 2025-26 में बढ़कर 24605 विद्यालयों तक पहुंच गई है।


 इन विद्यालयों में निशुल्क शिक्षा के साथ आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास, डिजिटल पुस्तकालय और खेलकूद जैसी सुविधाओं का भी विस्तार किया जा रहा है। एक ही परिसर में शिक्षा की सुविधा से बच्चों का ड्रॉपआउट कम करने में भी मदद मिल रही है। 

बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संदीप सिंह ने कहा कि सरकारी विद्यालयों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। वहीं, महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने बताया कि करीब 30 करोड़ रुपये की लागत से 150 सीएम मॉडल कंपोजिट विद्यालय विकसित किए जा रहे हैं।

Wednesday, September 23, 2026

नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर प्रबंधकों ने पैसे मांगे तो जाना पड़ेगा जेल, सीएम योगी का ऐलान

नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर प्रबंधकों ने पैसे मांगे तो जाना पड़ेगा जेल, सीएम योगी का ऐलान 


लखनऊ : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में चयनित शिक्षकों को नियुक्ति के बाद कार्यभार ग्रहण कराने के नाम पर पैसे मांगने वालों को जेल जाना पड़ेगा। 


मंगलवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित नियुक्ति पत्र वितरण समारोह में स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी प्रधानाचार्य, प्रधानाध्यापक, प्रवक्ता या सहायक अध्यापक को कार्यभार ग्रहण करने में अनावश्यक परेशानी नहीं होनी चाहिए। किसी प्रबंधक को कोई समस्या है तो वह शासन को बताए, लेकिन नियुक्ति के बाद किसी भी स्तर पर लेनदेन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

समारोह में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित 3567 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। इनमें 319 प्रधानाचार्य, 258 प्रधानाध्यापक, 618 प्रवक्ता (पीजीटी) और 2372 सहायक अध्यापक (टीजीटी) शामिल रहे। 

मुख्यमंत्री ने 12 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे। कहा कि चार दिनों में तीन बड़े नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रमों के जरिये 5297 युवाओं को सरकारी सेवा से जोड़ा गया है। पिछले नौ वर्षों में करीब साढ़े नौ लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी जा चुकी है। अगले छह माह में एक लाख और सरकारी नौकरियां देने का लक्ष्य है। 

एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं

एडेड संस्कृत विद्यालयों में कौन करेगा भर्ती आखिर? तीन साल पहले चयन बोर्ड समाप्त, नए आयोग को अधिकार नहीं

सरकार ने 2018 में शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था अधिकार

2022 से संविदा शिक्षकों के सहारे संस्कृत स्कूलों में पढ़ाई

प्रयागराज। संस्कृत अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए एक तरफ तो सरकार ने प्रत्येक विद्यार्थी को छात्रवृत्ति देने जैसी योजना शुरू की है, वहीं संस्कृत अध्यापन को लेकर कोई ठोस पहल होती नजर नहीं आ रही है। प्रदेश के 403 सहायता प्राप्त संस्कृत महाविद्यालय और 570 माध्यमिक संस्कृत विद्यालयों में रिक्त सहायक अध्यापकों के 1300 से अधिक पदों पर चयन के लिए अब तक किसी भर्ती संस्था को अधिकृत नहीं किया जा सका है।


सरकार ने 28 मार्च 2018 को उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद (संस्थानों के प्रधानों, अध्यापकों एवं संस्थानों के अन्य कर्मचारियों की नियुक्ति एवं सेवा शर्ते) विनियमावली-2009 में संशोधन के बाद सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों में शिक्षकों के चयन का अधिकार उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड को दिया था। 


2019 में माध्यमिक शिक्षा विभाग ने संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों में 1282 शिक्षकों की नियुक्ति का अधियाचन भेजा था। इसी  प्रकार महाविद्यालयों में शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग को दी गई थी। इन दोनों ही संस्थाओं का 2023 में गठित उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग में विलय हो चुका है। 

हालांकि नए आयोग को संस्कृत शिक्षकों की नियुक्ति की जिम्मेदारी नहीं मिली है। ऐसे में सवाल है कि एडेड संस्कृत
कॉलेजों में नियमित शिक्षकों का चयन किस माध्यम से होगा। नियमित शिक्षकों की नियुक्ति में देरी के कारण ही संस्कृत विद्यालयों एवं महाविद्यालयों में संविदा पर शिक्षकों का चयन हो रहा है।

बढ़ावा देने के लिए सहायता प्राप्त संस्कृत संस्थाओं में नियमित शिक्षकों की नियुक्ति होनी चाहिए। - सुरेश कुमार त्रिपाठी पूर्व एमएलसी व प्रदेश अध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ।

Monday, September 21, 2026

माध्यमिक विद्यालयों में लगेगी युवा संसद, मंत्री और सांसद बनेंगे विद्यार्थी, राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत होगा पंजीकरण

माध्यमिक विद्यालयों में लगेगी युवा संसद,  मंत्री और सांसद बनेंगे विद्यार्थी, राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत होगा पंजीकरण

21 सितंबर 2026
प्रयागराज। माध्यमिक विद्यालयों में युवा संसद प्रतियोगिता कराई जाएगी। इसमें विद्यार्थी मंत्री, सांसद और विपक्ष की भूमिका निभाएंगे। विपक्ष के विद्यार्थी सामाजिक मुद्दे पर सवाल उठाएंगे। मंत्री व सांसद बने विद्यार्थी उसका जवाब देंगे। अध्यक्ष की भूमिका में रहने वाले विद्यार्थी सदर की कार्रवाई संचालित करेंगे। विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव मिलेगा।

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने डीआईओएस को नोडल अधिकारी नामित किया है। विद्यालयों को राष्ट्रीय युवा संसद योजना के तहत पोर्टल पर किशोर सभा के तहत पंजीकरण कराना होगा। एक सप्ताह तक विद्यार्थियों को प्रतियोगिता का अभ्यास कराया जाएगा ताकि वह बेहतर ढंग से प्रश्न पूछ सकें। विद्यार्थी सवालों का बेहतर जवाब दे सकें।

सदन की कार्रवाई संचालित करने की प्रक्रिया शिक्षक विद्यार्थियों को बताएंगे। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों तर्क-वितर्क करने की समझ विकसित होगी। अभिव्यक्ति कौशल में भी निखार आएगा। 



विद्यालयों में लगेगी संसद पक्ष-विपक्ष की भूमिका में होंगे छात्र, कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे

9 सितम्बर 2026
लखनऊ। प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में अब युवा संसद प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसमें कक्षा छह से दस तक के छात्र-छात्राएं देश-प्रदेश और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर चर्चा करेंगे। वे सदन में अपना पक्ष रखने के साथ विपक्ष को भी घेरेंगे। 50 से 55 विद्यार्थियों वाले सदन में छात्रों को ही अध्यक्ष, मंत्री, विपक्ष के नेता और अन्य भूमिकाएं दी जाएंगी। उन्हें संसदीय कार्यवाही के संचालन, सवाल पूछने, जवाब देने, चर्चा करने और प्रस्ताव रखने का पूर्वाभ्यास कराया जाएगा।


युवा संसद के जरिये विद्यार्थियों को संसद और संसदीय प्रक्रियाओं के साथ लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था की जानकारी दी जाएगी। इससे उनमें लोकतांत्रिक मूल्यों, अनुशासन और दूसरों के विचारों के प्रति सम्मान की भावना विकसित करने पर जोर रहेगा। युवा संसद के लिए राज्य स्तर पर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) और जिला स्तर पर डीआईओएस को नोडल बनाया गया है। एससीईआरटी आयोजन के लिए मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराएगा।


विवादरहित विषयों पर होगी चर्चा : युवा संसद में सामाजिक न्याय, सामाजिक सुधार, आर्थिक विकास, सांप्रदायिक सद्भाव, शिक्षा, स्वास्थ्य, छात्र अनुशासन, कल्याणकारी योजनाएं, स्वच्छता, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और ग्रामीण विकास जैसे विवादरहित विषयों पर चर्चा होगी। किसी राजनीतिक दल या वर्तमान अथवा पूर्व नेता पर टिप्पणी नहीं की जाएगी। कार्यक्रम में शिष्टाचार और अनुशासन का विशेष ध्यान होगा।


डीआईओएस विद्यालयों को निर्देश देने के साथ आयोजन का पर्यवेक्षण करेंगे। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने निर्देश दिए हैं कि युवा संसद विद्यालय या छात्रों की सुविधा वाले स्थल पर हो। आयोजन एक घंटे से अधिक का नहीं होगा। छात्रों को वास्तविक संसदीय कार्यप्रणाली का अनुभव कराने पर विशेष जोर रहेगा। कार्यक्रम में सांसद, पूर्व सांसद, विधायक, पूर्व विधायक या एमएलसी को मुख्य अतिथि बनाया जा सकता है। वे विद्यार्थियों को संसदीय कार्यप्रणाली की जानकारी देंगे। 

Sunday, September 20, 2026

उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक का आदेश

शिक्षा सेवा चयन आयोग से चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराने के निर्देश देते हुए 21 सितंबर तक मांगी रिपोर्ट

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को अब संबंधित संस्थाओं में कार्यभार ग्रहण कराया जाएगा। शिक्षा निदेशक माध्यमिक ने इस संबंध में संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।

आदेश के अनुसार आयोग से प्राप्त पैनल के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों के प्रकरणों का नियमानुसार परीक्षण कर उन्हें कार्यभार ग्रहण कराने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। चयन के बाद संस्था आवंटन और कार्यभार ग्रहण की प्रक्रिया शिक्षा निदेशालय के स्तर से पूरी की जाएगी।

इस आदेश से आयोग की ओर से चयनित होकर पैनल में शामिल अभ्यर्थियों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया का अगला चरण स्पष्ट हो गया है। संबंधित अभ्यर्थियों को पैनल और विभागीय निर्देशों के अनुसार निर्धारित संस्था में कार्यभार ग्रहण करना होगा।


उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के द्वारा भेजे जा रहे पैनल में अंकित चयनित अभ्यर्थियों को कार्यभार ग्रहण कराये जाने के सम्बन्ध में शिक्षा निदेशक माध्यमिक का आदेश 


प्रदेश में 14429 स्मार्ट स्कूल के लिए 300 करोड़ रुपये जारी

प्रदेश में 14429 स्मार्ट स्कूल के लिए 300 करोड़ रुपये जारी 

लखनऊ। प्रदेश कैबिनेट की मंजूरी के बाद 14429 परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने के लिए 300 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। शुक्रवार को शासनादेश जारी होने के बाद कार्य जल्द शुरू होंगे। प्रत्येक विद्यालय को 2.07 लाख रुपये मिलेंगे।

 बेसिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अवधेश कुमार तिवारी के आदेशानुसार, श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड कार्यदायी संस्था है। स्मार्ट क्लास में 65 इंच का इंटरेक्टिव फ्लैट पैनल, पावर बैकअप और ऑडियो-विजुअल सामग्री होगी। कक्षा एक से पांच तक का पूरा डिजिटल कंटेंट भी इसमें शामिल है। 

लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (ई-दीक्षा व ई-विद्या), इंटरेक्टिव वीडियो और सिक्योरिटी सॉफ्टवेयर भी उपलब्ध रहेंगे। शिक्षकों के लिए ट्रेनिंग मॉड्यूल भी इन स्कूलों में रहेगा। इन स्मार्ट क्लास के संचालन व समस्या समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। 



14429 प्राथमिक स्कूल बनेंगे स्मार्ट, परिषदीय विद्यालयों में ऑडियो-विजुअल माध्यम से हो सकेगी पढ़ाई, बेसिक शिक्षा विभाग 300 करोड़ के प्रस्ताव को कैबिनेट की हरी झंडी


लखनऊ। प्रदेश के 14429 परिषदीय प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा। बेसिक शिक्षा विभाग इस परियोजना पर 300 करोड़ रुपये खर्च करेगा। हर स्कूल में 2.07 लाख रुपये से डिजिटल संसाधन लगाए जाएंगे। बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को मंगलवार को कैबिनेट ने हरी झंडी दे दी।


प्रस्ताव के अनुसार परिषदीय विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल में तब्दील कर बच्चों को रोचक ढंग से पढ़ाई कराई जाएगी। स्कूलों में स्कूलों में स्मार्ट क्लास स्थापित होने से ऑडियो-विजुअल से छात्र बेहतर ढंग से पढ़ाई कर सकेंगे। वह कठिन से कठिन पाठ को आसानी से समझ सकेंगे। विद्यालयों में स्मार्ट क्लास स्थापित करने के लिए श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड को कार्यदायी संस्था नामित किया गया है। 

संस्था विद्यालयों में 65 इंच की इंटरैक्टिव फ्लैट पैनल, ओपीएस स्लॉट, पॉवर बैकअप सिस्टम, ऑडियो-विजुअल सहायक सामग्री, कक्षा एक से पांच तक के पूरे पाठ्यक्रम का डिजिटल कंटेंट, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जिसमें ई-दीक्षा व ई-विद्या भी मौजूद रहेंगी, की सुविधा विकसित करेगी। स्मार्ट क्लास का क्रय व क्रियान्वयन एकीकृत मॉडल के रूप में किया जाएगा। इसमें हार्डवेयर, साफ्टवेयर और पाठ्यक्रम आधारित डिजिटल कंटेंट उपलब्ध रहेगा।


बनाई गई समिति : बेसिक व माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा ने बताया कि अपर राज्य परियोजना निदेशक समग्र शिक्षा, संयुक्त शिक्षा निदेशक बेसिक (कैंप कार्यालय) व बेसिक शिक्षा के वित्त नियंत्रक की एक समिति गठित की गई है। जो परियोजना के निविदा, चयन, संचालन आदि का काम देखेगी। स्मार्ट क्लास को बेहतर ढंग से स्थापित करने, उसके संचालन और किसी भी तरह की समस्या के समाधान के लिए राज्य स्तरीय प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट भी स्थापित की जाएगी। नोडल एजेंसी श्रीट्रॉन इंडिया लिमिटेड हेल्प डेस्क, डिवाइस मैनेजमेंट सिस्टम और व्यापक अनुरक्षण की व्यवस्था करेगी।