राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब जरूरत देखकर तय होंगे विकास कार्य
लखनऊः राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में अब विकास कार्य किसी तय भारांक के आधार पर नहीं, बल्कि स्कूल की वास्तविक जरूरत देखकर तय होंगे। शासन ने प्रोजेक्ट अलंकार में लागू भारांक आधारित प्राथमिकता व्यवस्था खत्म कर दी है।
नई व्यवस्था में प्रधानाचार्य या प्रधानाध्यापक स्कूल की जरूरत का आकलन कर जर्जर भवन के पुनर्निर्माण, मरम्मत और अन्य सुविधाओं के लिए प्रस्ताव सीधे जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआइओएस) को भेजेंगे। इससे जरूरी कामों के प्रस्ताव तैयार करने और उन्हें मंजूरी मिलने की प्रक्रिया पहले के मुकाबले सरल होने की उम्मीद है।
डीआइओएस प्रस्ताव के आधार पर संबंधित कार्यदायी संस्था से एस्टीमेट तैयार कराएंगे। इसके बाद प्रस्ताव जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली जिला स्तरीय समिति के सामने रखा जाएगा। समिति में जिलाधिकारी अध्यक्ष, मुख्य विकास अधिकारी उपाध्यक्ष, लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता तकनीकी सदस्य और डीआइओएस सदस्य सचिव होंगे।
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