सपा नेता की सिफारिशी चिट्ठी पर शासनादेश के विरुद्ध संविदा पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के किये गये तबादले को खबर छपने के बाद बीएसए ने वापस ले लिया है। डीएम और नेता का हवाला देकर बीएसए ने जो तबादले किये थे उन्हें निरस्त कर दिये हैं। अपने कार्यों से आये दिन चर्चा में रहने वाले बीएसए का यह दूसरा कारनामा है जब उन्होंने पहले आदेश बनाया और बाद में उसे निरस्त कर दिया। सूत्र बताते हैं कि बीएसए ने जिलाधिकारी की मंत्रणा के बाद स्थानान्तरण निरस्त करने का कदम उठाया है। फिलहाल विभाग में बीएसए की थू-थू हो रही है। गौरतलब है कि जिलाबेसिक शिक्षा अधिकारी गुरूशरण निरंजन ने कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में तैनात दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का तबादला कर दिया था। डलमऊ के केजीबीवी में तैनात मनीष पाण्डेय को राही और राही में तैनात उपेन्द्र बहादुर को डलमऊ बीएसए ने बीती चार अगस्त को स्थानान्तरित किया था। जबकि शासनादेश में स्पष्ट उल्लिखित है कि कस्तूरबा में न तो स्थानान्तरण होगा और न ही समायोजन। इस स्थानान्तरण में हैरानी वाली बात यह थी कि जिलाधिकारी अनुज कुमार झा भी इस स्थानान्तरण के पक्षधर थे। उन्होंने भी अपने बयान में कहा था कि सब कुछ शासनादेश ही नहीं होता। ‘डेली न्यूज़ ऐक्टिविस्ट’ ने अपने शुक्रवार के अंक में ‘बीएसए ने खुले आम उड़ायी शासनादेश की धज्जियां’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर छपने के बाद विभाग में हड़कम्प मच गया। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस निरंजन ने बैक डेट में तबादलों को निरस्त कर दिया। अपने निरस्तीकरण के आदेश में बीएसए ने शासनादेश का बकायदे हवाला दिया है और दोनों चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पूर्ववत तैनात रहकर कार्य करने के निर्देश दिये हैं। बीएसए से जब इस सम्बन्ध में पूछा गया तो उन्होंने कहाकि बाबुओं ने करा लिया है मुझे शासनादेश की जानकारी नहीं थी। अब सवाल यह है कि जिस अधिकारी को शासनादेश के बारे में नहीं पता वह जिले में बेसिक शिक्षा का क्या नेतृत्व करेगा? यहां यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व बीएसए ने डीसी बालिका शिक्षा को हटाने का आदेश बनवाया था और जब मीडिया तक बात पहुंची तो फिर उसे फाड़कर फेंक दिया। जिला बेसिक शिक्षाधिकारी की कार्यशैली पूरे विभाग में चर्चा का विषय बनी हुयी है।
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