स्कूल की मान्यता रद्द होने पर शिक्षक अन्य स्कूलों में समायोजन का दावा नहीं कर सकते : हाईकोर्ट
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि स्कूल की मान्यता रद्द होने पर कार्यरत शिक्षक और कर्मचारी किसी अन्य संस्थान में समायोजन या स्थानांतरण का दावा नहीं कर सकते। यह टिप्पणी करते हुए कोर्ट ने स्कूल की मान्यता रद्द होने पर समायोजन की मांग को लेकर कर्मचारियों की ओर से दायर याचिका का निस्तारण कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने चंद्र प्रकाश सिंह और चार अन्य की याचिका पर दिया है।
गोरखपुर के बाबा सूर्य नारायण दास लघु माध्यमिक विद्यालय का भवन और खेल मैदान ग्राम सभा की भूमि पर होने के चलते वर्ष 2018 में इसकी मान्यता रद्द कर दी गई थी। शिक्षकों व कर्मचारियों ने अन्य सहायता प्राप्त स्कूलों में समायोजित करने और उनका रुका हुआ वेतन जारी करने की मांग की। संबंधित अधिकारियों ने कोई सुनवाई नहीं की तो उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि ऐसे ही अन्य मामलों में शिक्षकों को समायोजित किया गया है। ऐसे में समानता के आधार पर उन्हें भी समायोजित किया जाना चाहिए। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि किसी एक मामले में हुई अवैधता या गलती दूसरे व्यक्ति को वैसा ही लाभपाने का कानूनी अधिकार नहीं देती। नियमानुसार मान्यता रद्द होने की स्थिति में शिक्षकों के स्थानांतरण या समायोजन का कोई प्रावधान नहीं है।
हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को जारी किया निर्देश : हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव (बेसिक शिक्षा) उप्र को निर्देश दिया है कि वह सर्कुलर जारी करें कि मान्यता खो चुके स्कूलों के शिक्षकों का समायोजन कोई निहित अधिकार नहीं है। स्कूलों की मान्यता रद्द होने के बाद शिक्षकों को अन्य स्कूलों में समायोजित करने के मामलों की जांच करने को कहा गया है। साथ ही कहा है कि कोई समायोजन नियमों के विरुद्ध पाया जाता है तो कानून के अनुसार आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की जाए।
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