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Sunday, July 10, 2022

Shiksha Samagam : NEP 2020 के तहत छात्र आधारित होगी नई शिक्षा व्यवस्था, बनारस से तीन सूत्री निष्कर्ष जारी

शिक्षाविदों के सुझाव से तय होगी से राष्ट्रीय शिक्षा नीति की दिशा

29 जुलाई को लागू हुए पूरे हो जाएंगे दो साल, यूजीसी को ऑनलाइन सुझाव देंगे शिक्षाविद



● शिक्षाविदों के प्रमुख सुझाव

डिजिटल यूनिवर्सिटी का प्रारूप तैयार करना
रिसर्च इनोवेशन हब के रूप में भारत को विकसित करना
सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के समाधान पर काम करना
गुरु-शिष्य परंपरा के आधार पर शिक्षा प्रणाली को विकसित करना
मल्टी मॉडल एनकेशन एकेडमिक बैंक आफ क्रेडिट, मल्टीप्लाई एंट्री एक्जिट, स्किल डेवलपमेंट स्टूडेंट फर्स्ट
नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों का पुनर्निर्माण
जलवायु परिवर्तन और वेस्ट टू बेस्ट मॉडल पर तकनीक निर्माण करना


वाराणसी। शिक्षा मंत्रालय की ओर से लागू राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर काशी में तीन दिन तक चले मंथन के बाद इसमें कुछ नए अध्याय भी जुड़ सकते हैं।

अखिल भारतीय शिक्षा समागम में शामिल हुए देश भर से राज्य, केंद्रीय विश्वविद्यालयों के कुलपति, आईआईटी नि देशक सहित 600 से अधिक शिक्षाविदों का सुझाव इसमें मुख्य आधार बनेगा। यूजीसी की ओर से समागम में नौ विषयों पर बहस के साथ ही शिक्षा नीति को लेकर शिक्षाविदों ने अपना सुझाव भी दिया है। अब इसके बाद समागम को लेकर ऑनलाइन सुझाव भी मांगे गए हैं। इसके आधार पर यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय शिक्षा नीति को लेकर कुछ और भी अहम फैसला ले सकते हैं।



Shiksha Samagam :  NEP 2020 के तहत छात्र आधारित होगी नई शिक्षा व्यवस्था, बनारस से तीन सूत्री निष्कर्ष जारी


काशी में चल रहे तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम के समापन पर हुई। कार्यक्रम के बाद जारी होने वाले ‘बनारस मेनिफेस्टो’ (घोषणापत्र) को रोककर इसकी जगह तीन सूत्री निष्कर्ष जारी किया गया।



Shiksha Samagam : बदलते भारत की शिक्षा व्यवस्था भी अब बदली हुई होगी। यह छात्रों को किसी ढर्रे पर जबरन चलाने वाली नहीं होगी बल्कि छात्रों को उनकी जरूरत के हिसाब से शिक्षित करेगी। शिक्षण व्यवस्था के केंद्र में अब छात्र होंगे। यह घोषणा शनिवार को काशी में चल रहे तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम के समापन पर हुई। कार्यक्रम के बाद जारी होने वाले ‘बनारस मेनिफेस्टो’ (घोषणापत्र) को रोककर इसकी जगह तीन सूत्री निष्कर्ष जारी किया गया।



शिक्षा समागम में तीन दिनों तक देश के 350 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के प्रमुखों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के आलोक में बदलती शिक्षा व्यवस्था पर चर्चा की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समागम का उद्घाटन करते हुए ‘लैब टू लैंड’ शिक्षा व्यवस्था पर जोर दिया था। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान, राज्यमंत्री अन्नपूर्णा देवी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, यूजीसी अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार और सचिव प्रो. रजनीश जैन की मौजूदगी में शिक्षा जगत के विद्वानों ने 9 तकनीकी सहित कुल 11 सत्रों में नई शिक्षा व्यवस्था के सभी पहलुओं पर मंथन किया।



केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को मीडिया से बातचीत में बनारस मेनिफेस्टो की जगह तीन सूत्री निष्कर्ष जारी किया। 


इनमें पहला और सबसे महत्वपूर्ण छात्र आधारित शिक्षा व्यवस्था है। 

दूसरे निष्कर्ष के रूप में सर्वविद्या की राजधानी काशी से देश की शिक्षा व्यवस्था में बाह्य नहीं बल्कि आमूलचूल परिवर्तन का निर्णय हुआ। 

तीसरा निष्कर्ष भविष्य में जॉब सीकर नहीं बल्कि जॉब क्रिएटर युवा पीढ़ी तैयार करना है। 


उन्होंने तीन दिवसीय कार्यक्रम को शिक्षा जगत का पहला बड़ा सम्मेलन करार दिया। घोषणा की कि ऐसे आयोजन को जल्द ही स्थायी किया जाएगा।


डिजिटल यूनिवर्सिटी अगले साल से
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने यह भी ऐलान किया कि 2023 तक डिजिटल यूनिवर्सिटी की शुरुआत हो जाएगी। दूरस्थ और डिलिटल शिक्षा पर उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने शिक्षा चैनलों के विस्तार के लिए एक हजार करोड़ रुपये की धनराशि जारी की है। इससे 200 नए चैनल बनाने हैं और 34 पुराने चैनलों को बढ़ाकर 60 करना है। तब शिक्षा संबंधी कुल चैनलों की संख्या 260 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि समागम में आए सभी शिक्षाविदों के लिए एक डिजिटल फीडबैक सिस्टम भी तैयार किया गया है।

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