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Saturday, July 16, 2022

आपूर्ति के मुकाबले स्कूलों में बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहीं निशुल्क किताबें, विद्यालयों तक पहुंचाने की परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित नहीं

आपूर्ति के मुकाबले स्कूलों में बच्चों तक नहीं पहुंच पा रहीं निशुल्क किताबें, विद्यालयों तक पहुंचाने की परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित नहीं 


लखनऊ। परिषदीय स्कूलों के बच्चों को निशुल्क किताबें बांटने के लिए जिलों में जो आपूर्ति की जा रही है, उसके मुकाबले वितरण की रफ्तार धीमी है। स्थिति यह है कि प्रदेश के 54 जिलों में 75 लाख किताबों की आपूर्ति कर दी गई है, लेकिन इनका वितरण बच्चों में ज्यादा नहीं हो पाया है। जिले के अंदर विद्यालयों तक किताबें पहुंचाने की परिवहन व्यवस्था तक भी सुनिश्चित नहीं हो पाई है। 


दरअसल, जिलों में किताबें पहुंचने के बाद उनका सत्यापन होगा। इसके बाद ट्रांसपोर्ट का टेंडर करके फिर किताबें स्कूलों तक भेजी जाएंगी। लेकिन इसमें लापरवाही हो रही है। उदाहरण के तौर लखनऊ में अभी सिर्फ कक्षा तीन के कुछ विषय की ही लगभग 1 लाख 6 हजार किताबें पहुंची हैं और वह भी निरालानगर के विद्यालय में ही कुछ बच्चों को बांटी गई हैं। यानी बाकी किताबों का वितरण होना है। अभी अन्य कक्षाओं की किताबों की तो जिले में सप्लाई ही नहीं हुई है।



10 करोड़ किताबें देने का लक्ष्य, 70 लाख ही बांट पाए, परिषदीय स्कूलों में किताबों के निशुल्क वितरण का हाल

26 जिलों में किताबें अब तक पहुंची ही नहीं,  विभाग का दावा - तय समय में पूरा होगा वितरण लक्ष्य



लखनऊ। परिषदीय स्कूलों में 10 करोड़ किताबों के निशुल्क वितरण लक्ष्य की तुलना में अब तक सिर्फ 70 लाख पुस्तकों का ही वितरण हो सका है। यही नहीं 26 जिलों में किताबें पहुंची ही नहीं। जिन जिलों में किताबें पहुंची भी हैं, वे अपर्याप्त हैं। कहीं एक-दो विषय तो कहीं दो तीन विषयों की किताबें पहुंची हैं, जबकि बेसिक शिक्षा विभाग ने 7 जून से 90 दिनों के भीतर वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। 


विभाग की ओर तय मियाद में से एक महीना से अधिक बीत गया है, लेकिन अब तक दस फीसदी से भी कम किताबों का वितरण हुआ है। ऐसे में बाकी दो महीने में वितरण लक्ष्य को हासिल करना विभाग के लिए चुनौती होगी। स्कूलों में स्थिति यह है कि जहां किताबें नहीं पहुंचीं, वहां पुरानी किताबों से पढ़ाया जा रहा है। 


पाठ्य पुस्तक अधिकारी श्याम किशोर तिवारी कहते हैं कि पुस्तक वितरण का काम धीरे-धीरे तेजी पकड़ रहा है। शुरुआत में प्रकाशक तय करके जिलों से ऑर्डर दिलाए गए। उसी हिसाब से प्रकाशकों ने पुस्तकें छापनी शुरू की हैं। उन्होंने तय समय में किताबों के वितरण लक्ष्य को पूरा करने का दावा करते हुए कहा कि इसकी लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।

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