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Wednesday, September 10, 2025

टीईटी परीक्षा में आवेदन ही नहीं कर सकेंगे 50 हजार शिक्षक

टीईटी परीक्षा में आवेदन ही नहीं कर सकेंगे 50 हजार शिक्षक

लखनऊः सुप्रीम कोर्ट ने पहली से आठवीं कक्षा तक के शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) उत्तीर्ण करना अनिवार्य कर दिया है। शीर्ष न्यायालय के इस आदेश के बाद टीईटी पास नहीं कर पाने वाले शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। 

शिक्षक संगठनों का कहना है कि पांच श्रेणियों के शिक्षक टीईटी में आवेदन ही नहीं कर पाएंगे। वर्ष 2000 से पहले नियुक्त शिक्षक, स्नातक में कम 'अंक पाने वाले, बीएड उपाधिधारक, विशिष्ट बीटीसी के आधार पर नियुक्त, मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्त तथा डीपीएड व बीपीएड शिक्षक इसमें शामिल हैं।  प्रदेश के शिक्षक संगठन संयुक्त मोर्चा बनाकर सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग कर रहे हैं।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि कार्यरत कई शिक्षक न्यूनतम शैक्षिक योग्यता के अभाव में टीईटी के लिए आवेदन तक नहीं कर पा रहे हैं। टीईटी के लिए स्नातक और बीटीसी आवश्यक है, जबकि अनेक शिक्षक इस अर्हता को पूरा नहीं कर पाएंगे। कई शिक्षकों के स्नातक में 45 प्रतिशत अंक नहीं होने से भी आवेदन में दिक्कत आएगी। शिक्षक संगठनों का दावा है कि 50 हजार से अधिक कार्यरत शिक्षकों के पास टीईटी में बैठने की न्यूनतम योग्यता ही नहीं है। संगठन सरकार से हस्तक्षेप की अपील कर रहा है। नियम स्पष्ट है कि टीईटी के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक के साथ बीटीसी और स्नातक में कम से कम 45 प्रतिशत अंक की है।




लगभग दो लाख बेसिक शिक्षकों की नौकरियों पर खतरा, सरकार ढूंढ़ रही विकल्प, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक टीईटी उत्तीर्ण किए बिना कोई शिक्षक पात्र नहीं

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से टीईटी व्यवस्था के पहले से नियुक्त शिक्षकों पर संकट


लखनऊ : प्रदेश के परिषदीय स्कूलों में कार्यरत करीब 2 लाख शिक्षकों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। कारण बना है सुप्रीम कोर्ट का हालिया फैसला, जिसमें स्पष्ट किया गया है कि टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) उत्तीर्ण किए बिना कोई भी शिक्षक पात्र नहीं माना जा सकता। ऐसे में योगी सरकार ने शिक्षक संगठनों की चिंता के मद्देनजर शिक्षा विभाग को व्यावहारिक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशभर के कक्षा 1 से 8 तक परिषदीय स्कूलों के शिक्षकों के लिए है। दरअसल, 2 अगस्त 2010 को एनसीटीई ने गाइडलाइन जारी की थी। उसमें स्पष्ट किया गया था कि जो शिक्षक पहले से कार्यरत हैं या जिनकी भर्ती प्रक्रिया पहले से चल रही है, उन पर यह परीक्षा लागू नहीं होगी। लेकिन 3 अगस्त 2017 को केंद्र सरकार ने नया नियम जारी कर दिया और सभी राज्यों को जानकारी दी कि 2019 तक हर शिक्षक को टीईटी पास करना होगा।

इसके विरोध में कुछ शिक्षक सुप्रीम कोर्ट चले गए। इसी क्रम में 1 सितंबर 2025 को कोर्ट ने सभी शिक्षकों को दो साल में टीईटी परीक्षा पास करने का फैसला दिया है। इससे शिक्षकों में हड़कंप मचा हुआ है। यूपी में सरकारी प्राइमरी स्कूलों में कुल शिक्षकों की संख्या 3 लाख 38 हजार 590 है, जबकि उच्च प्राथमिक में 1 लाख 20 हजार 860 हैं यानी कुल शिक्षक 4 लाख 59 हजार 450 हैं, लेकिन निकाय, निजी, समाज कल्याण विभाग से संबद्ध आदि स्कूलों को मिलाकर संख्या दोगुनी तक पहुंच जाती है। शिक्षक संगठनों का कहना है कि करीब 1.80 लाख से 2 लाख शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित हो रहे हैं।

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने इस फैसले के खिलाफ आवाज उठाई है। संघ ने सीधे राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को ज्ञापन भेजते हुए अपील की है कि सेवारत शिक्षकों को टीईटी अनिवार्यता से छूट दी जाए और सरकार वार्ता के लिए आगे आए। कई अनुभवी अध्यापकों ने भी दो-दो दशकों से सेवा देने के बाद अचानक परीक्षा बाध्य करने के फैसले पर आपत्ति जताई है। कई जगह विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गए हैं।


सरकार की कार्रवाई पर टिकीं निगाहें

सरकार के लिए परिस्थिति सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि सामाजिक और मानवीय स्तर पर भी संवेदनशील है। ऐसे में सरकार को कोर्ट का फैसला और शिक्षकों के साथ भी न्यायोचित कदम उठाने की चुनौती है। लाखों शिक्षकों और परिवारों का भविष्य दांव पर है। सभी की नजरें अब राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

शिक्षा विभाग को कार्ययोजना बनाने के निर्देश

सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अध्ययन करा रही है। मामले को गंभीरता से लेते हुए बेसिक शिक्षा विभाग से ऐसे सभी शिक्षकों की विस्तृत सूची मांगी है, जो टीईटी नहीं पास कर सके हैं। इसके साथ ही निर्देश दिए गए है कि ऐसे शिक्षकों को अब टीईटी पास कराने की व्यावहारिक योजना बनाई जाए, ताकि उनकी सेवाएं बचाई जा सकें।




टीईटी अनिवार्यता से यूपी के 50 हजार से ज्यादा शिक्षक हो सकते हैं प्रभावित, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का अध्ययन करने में जुटा बेसिक शिक्षा विभाग

 लखनऊ: कक्षा एक से आठ तक के स्कूलों में शिक्षकों की नई भर्ती, पदोन्नति और सेवा जारी रखने के लिए अब टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश से शिक्षकों में बेचैनी बढ़ गई है। कई शिक्षकों को अपनी नौकरी बचाने और पदोन्नति पाने के लिए अनिवार्य रूप से टीईटी उत्तीर्ण करनी होगी। प्रदेश के 50 हजार से अधिक शिक्षकों की पदोन्नति पर इसका असर पड़ सकता है। फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अध्ययन कर रहा है।

सोमवार को आए इस आदेश के अनुसार जिन शिक्षकों की सेवा अवधि पांच साल से कम बची है, वे बिना टीईटी के सेवानिवृत्ति तक काम कर सकते हैं। लेकिन यदि वे पदोन्नति चाहते हैं, तो उन्हें टीईटी पास करना होगा। वहीं, जो शिक्षक आरटीई (शिक्षा का अधिकार अधिनियम) लागू होने से पहले नियुक्त हुए हैं और जिनकी सेवा अवधि पांच साल से अधिक बची है, उन्हें दो साल के भीतर टीईटी उत्तीर्ण करना होगा, अन्यथा उन्हें सेवा छोड़नी पड़ेगी।

प्रदेश में 1.30 लाख परिषदीय विद्यालय हैं। शिक्षक संघों के अनुसार करीब 30 हजार शिक्षक ऐसे हैं, जिनकी सेवा पांच से सात साल बची है और उन्हें टीईटी उत्तीर्ण करना अनिवार्य होगा। वहीं, पदोन्नति के लिए इंतजार कर रहे करीब 50 हजार शिक्षकों पर असर पड़ सकता है। महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अभी अध्ययन किया जा रहा है। इसका असर शिक्षकों के समायोजन या स्थानांतरण पर नहीं पड़ेगा। शिक्षकों की पदोन्नति पर असर पड़ सकता है।


सरकार से याचिका दाखिल करने की मांग

प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष निर्भय सिंह का कहना है कि शिक्षकों को किसी के बहकावे में न आकर टीईटी की तैयारी करनी चाहिए। दो साल में यूपीटीईटी और सीटीईटी पास करने के छह मौके मिलेंगे। इसमें केवल पास होना है। यह उन शिक्षकों के लिए भी अवसर है, जो टीईटी पास कर चुके हैं और पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, बीटीसी शिक्षक संघ के अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि 55 साल से अधिक उम्र वाले शिक्षकों के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना आसान नहीं होगा। शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को इससे छूट मिलनी चाहिए। प्रदेश सरकार से मांग है कि इस पर पुनः याचिका दाखिल करे।




टीईटी पर निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे शिक्षक और शिक्षक sangh 

सुप्रीम कोर्ट के वकील बोले-कई मुद्दे हैं जिन्हें आधार बनाकर पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे

शिक्षक संघ भी सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के विरुद्ध याचिका दायर करने की तैयारी में


नई दिल्ली: कक्षा एक से आठ तक को पढ़ाने वाले शिक्षकों के सेवा में बने रहने और प्रोन्नति के लिए टीईटी परीक्षा पास करने की अनिवार्यता के फैसले के खिलाफ शिक्षक सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि कई मुद्दे हैं जिन्हें आधार बनाकर फैसले पर पुनर्विचार करने का सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया जाएगा।

उत्तर प्रदेश के कुछ शिक्षकों की ओर से पेश सुप्रीम कोर्ट के वकील राकेश मिश्रा कहते हैं कि वे फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेंगे। उनके मुवक्किलों ने अर्जी दाखिल कर प्रोन्नति के लिए टीईटी पास करने की अनिवार्यता से छूट मांगी है। उनका कहना है कि नौकरी सिर्फ तीन-चार वर्ष की बची है, ऐसे में प्रोन्नति के लिए टीईटी पास करने की अनिवार्यता नहीं लगाई जाए। जबकि सुप्रीम कोर्ट का जो आदेश आया है उसमें प्रोन्नति के लिए तो टीईटी पास करना अनिवार्य है ही बल्कि नौकरी में बने रहने के लिए भी जरूरी है। इससे लंबे समय से नौकरी कर रहे देश भर के शिक्षकों के लिए नई मुश्किल खड़ी हो गई है। 


पुनर्विचार याचिका में यह आधार दिया जाएगा कि अगर कोर्ट को देशभर के लिए आदेश देना था तो उसे सभी राज्यों को नोटिस जारी करना चाहिए था और सभी राज्यों शिक्षकों के आंकड़े लेकर बहस सुननी चाहिए थी, जो नहीं सुनी गई। राकेश मिश्रा कहते हैं कि पुनर्विचार याचिका में कोर्ट से टीईटी पास करने के लिए तय दो वर्ष का समय भी बढ़ाने की मांग की जाएगी। नियम हर छह महीने में टीईटी कराने का है। कोर्ट इस समय को बढ़ा देता है तो शिक्षकों को ज्यादा मौका मिलेगा। ये फैसला सिर्फ सरकारी स्कूलों पर ही नहीं, बल्कि सहायता प्राप्त और गैर सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों पर भी लागू होता है।

उत्तर प्रदेश में प्राथमिक शिक्षक संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष राहुल पांडेय का कहना है कि इस फैसले के खिलाफ सभी शिक्षकों को संगठित होकर अगला कदम उठाना होगा। पांडेय कहते हैं कि शिक्षक संघ के बड़े नेता भी पुनर्विचार विचार दाखिल करने पर विचार कर रहे हैं। आल इंडिया बीटीसी शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल यादव कहते हैं कि शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करने के फैसले से देश में कार्यरत लाखों शिक्षकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। फैसले से उत्तर प्रदेश में ही दो-ढाई लाख शिक्षक प्रभावित होंगे। अगर किसी शिक्षक को प्राथमिक शिक्षक से जूनियर शिक्षक के रूप में प्रोन्नत होना है तो उसे अपर प्राइमरी टीईटी पास करना होगा।

शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य के आदेश को चुनौती देगा केरल

शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य के आदेश को चुनौती देगा केरल

केरल के शिक्षा मंत्री बोले- इस फैसले से केरल के लगभग 50 हजार शिक्षकों पर पड़ सकता है प्रतिकूल प्रभाव


तिरुअनंतपुरम ।  पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के विद्यार्थियों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) पास करने की अनिवार्यता संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश को केरल चुनौती देगा।

केरल के शिक्षा मंत्री वी. शिवनकुट्टी ने सोमवार को कहा कि राज्य सरकार सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के खिलाफ कानूनी कदम उठाएगी, जिसमें गैर-अल्पसंख्यक स्कूलों में पहली कक्षा से आठवीं कक्षा तक के सभी सेवारत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य कर दी गई है। 


सुप्रीम कोर्ट के एक सितंबर के आदेश में कहा गया है कि 2009 में शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम लागू होने से पहले नियुक्त शिक्षकों को भी सेवा में बने रहने और पदोन्नति के लिए अर्हता प्राप्त करने के लिए टीईटी उत्तीर्ण करना होगा।


टीईटी पास नहीं करने पर नौकरी चली जाएगी, टीईटी पास किए बिना प्रमोशन भी नहीं मिलेगा। शिवनकुट्टी के अनुसार, इस फैसले से केरल के लगभग 50 हजार शिक्षकों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यह आदेश अधिकांश शिक्षकों को प्रभावित करेगा, जिससे पदोन्नति व नियुक्तियां और अधिक जटिल हो जाएंगी। शिक्षक संघों ने चिंता जताते हुए कहा कि टीईटी को पिछली तारीख से लागू करना लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के साथ अन्याय है।

Tuesday, September 9, 2025

तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश नामंजूर करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द

तीसरे बच्चे के लिए मातृत्व अवकाश नामंजूर करने का आदेश हाईकोर्ट ने किया रद्द


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश अस्वीकार करने के बीएसए बिजनौर के आदेश को स्थापित विधि सिद्धांत के विपरीत होने के कारण रद्द कर दिया है। साथ ही उन्हें निर्धारित कानूनी प्रावधान के तहत मातृत्व अवकाश पर चार सप्ताह में नए सिरे से आदेश करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने अंशुल दत्त की याचिका पर अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी व बीएसए बिजनौर के वकील को सुनने के बाद याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।


 बीएसए ने यह कहते हुए याची के मातृत्व अवकाश की अर्जी निरस्त कर दी कि याची के दो जीवित बच्चे हैं इसलिए तीसरे बच्चे के जन्म के लिए मातृत्व अवकाश नहीं दिया जा सकता। अधिवक्ता मिथिलेश कुमार तिवारी के मुताबिक याची सहायक अध्यापिका है।

Monday, September 8, 2025

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा को टेट अनिवार्यता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिख मांगी छूट

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा को टेट अनिवार्यता के मुद्दे पर प्रधानमंत्री को पत्र लिख मांगी छूट 







सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग में 80 हजार दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए 5352 नियमित विशेष शिक्षकों की होगी नियुक्ति


बेसिक स्कूलों को मिलेंगे 5352 विशेष शिक्षक

 लखनऊः परिषदीय विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए 5,352 पदों पर विशेष शिक्षकों को आवश्यकता अनुसार रखा जाएगा। वर्तमान में संविदा पर 2200 शिक्षकों पर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने की जिम्मेदारी है।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में सात मार्च 2025 को रजनीश कुमार पांडेय व अन्य बनाम यूनियन आफ इंडिया व अन्य मामले में दिए गए आदेश के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने यह कदम उठाया है। आदेश के अनुसार हर राज्य को विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए स्वीकृत पदों की अधिसूचना जारी करनी होगी और नियुक्ति केवल योग्य व प्रशिक्षित शिक्षकों की ही की जाएगी।



सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार बेसिक शिक्षा विभाग में 80 हजार दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए 5352 नियमित विशेष शिक्षकों की होगी नियुक्ति


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में दिव्यांग बच्चों को पढ़ाने के लिए 5352 नियमित विशेष शिक्षकों को रखा जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने इसकी तैयारी कर ली है। बेसिक में लगभग 80 हजार दिव्यांग बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट में सात मार्च को रजनीश कुमार पांडेय व अन्य बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य मामले में दिए गए आदेश के बाद माध्यमिक व बेसिक शिक्षा विभाग ने यह निर्णय लिया है। जानकारी के अनुसार शासन को 9 सितंबर को इस मामले में एफिडेविट देना है। इसी क्रम में पहले माध्यमिक में 47 और अब बेसिक में 5352 विशेष शिक्षक रखने का निर्णय लिया गया है।

बेसिक शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव पर सहमति हुई है। अब आवश्यकता के अनुसार विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकेगी। विशेष श्रेणी के बच्चों में सीखने, बोलने, व्यवहार से संबंधित समस्या रहती है। इन्हें पढ़ाने के लिए विशिष्ट प्रशिक्षण प्राप्त विशेष शिक्षक होते हैं। 


अभी संविदा शिक्षकों के माध्यम से हो रही पढ़ाई : वर्तमान में एक निर्धारित मानदेय पर विशेष शिक्षकों से काम लिया जा रहा है। इसके लिए 2200 से अधिक संविदा शिक्षक तैनात हैं। जबकि अब इन पदों पर नियमित नियुक्ति की जाएगी। विभाग के अधिकारियों के अनुसार इसके लिए भेजे गए प्रस्ताव को उच्च स्तर पर मंजूरी मिल गई है।




राजकीय इंटर कॉलेजों में दिव्यांग बच्चों को मिलेंगे विशेष शिक्षक, कैबिनेट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के क्रम में 47 पद बदलने को दी मंजूरी

लखनऊ। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विशेष (दिव्यांग) बच्चों के लिए विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पालन में कैबिनेट ने वर्तमान पदों में से ही 47 पद विशेष शिक्षकों के रूप में बदलने को अनुमति दे दी है। इससे विभाग पर कोई अतिरिक्त भार नहीं आएगा।


माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में वर्तमान में 692 दिव्यांग विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। इसके सापेक्ष 311 विशेष शिक्षक सेवाप्रदाता के जरिये रखे गए हैं।

 नियमानुसार 15 विद्यार्थी पर एक शिक्षक की जरूरत है। इसे देखते हुए 47 पद विशेष शिक्षक के रूप में बदलने को सहमति दे दी गई है। इसके लिए भर्ती लोक सेवा आयोग से लिखित परीक्षा के आधार पर की जाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए स्नातक स्तर पर 50 फीसदी अंकों के साथ बीएड, विशेष शिक्षा (अक्षमता, दृष्टिहीन, मूकबधिर) में डिग्री वाले अभ्यर्थियों का चयन होगा। 

प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्र अनुदेशक देख रहे राहत की राह, मानदेय में बढ़ोतरी कर लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बढ़ेंगे कदम

प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्र अनुदेशक देख रहे राहत की राह, मानदेय में बढ़ोतरी कर लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में बढ़ेंगे कदम 


 लखनऊः प्रदेश के 1.68 लाख शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की उम्मीद बढ़ गई है। इनका मानदेय बढ़ाने के लिए उच्चस्तरीय कमेटी गठित की गई है। शिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आश्वस्त किया कि रिपोर्ट आने के बाद प्रदेश सरकार सकारात्मक फैसला लेगी। अब कमेटी की रिपोर्ट का सभी उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।

 प्रदेश में इस समय 1,43,450 शिक्षामित्र और 25,223 अनुदेशक कार्यरत हैं। शिक्षामित्रों को 10 हजार रुपये और अनुदेशकों को 9,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जाता है। इनमें से करीब 60 हजार शिक्षामित्र टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) उत्तीर्ण कर चुके हैं। इन शिक्षामित्रों को उम्मीद है कि उनकी योग्यता और मेहनत को देखते हुए सरकार मानदेय बढ़ाने का बड़ा निर्णय करेगी। 

इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के बेसिक स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए टीईटी की अनिवार्यता कर दी है। इस आदेश से बगैर टीईटी वाले शिक्षकों की चिंता बढ़ गई है। वे अपनी नौकरी और भविष्य को लेकर असमंजस में हैं। वहीं, टीईटी पास शिक्षामित्रों को भरोसा है कि योग्यता आधारित नीति के तहत उन्हें वरीयता और बेहतर मानदेय मिलेगा। सभी का मानना है कि सरकार कमेटी की रिपोर्ट के बाद जल्द ही ठोस निर्णय लेगी। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा बल्कि विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता भी सुदृढ़ होगी। विभागीय सूत्रों का कहना है कि जल्द ही सरकार मानदेय में बढ़ोतरी कर शिक्षामित्रों और अनुदेशकों की लंबे समय से चली आ रही मांग को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ा सकती है।



शिक्षक दिवस पर सीएम योगी का बड़ा ऐलान, शिक्षामित्र और अनुदेशकों का बढ़ेगा मानदेय


शिक्षक दिवस के मौके पर सीएम योगी ने बड़ा ऐलान किया है। दिवाली से पहले सीएम योगी ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को तोहफा दिया है। सीएम योगी ने ऐलान करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया जाएगा।


शिक्षक दिवस के मौके पर सीएम योगी ने बड़ा ऐलान किया है। दिवाली से पहले सीएम योगी ने शिक्षकों, शिक्षामित्रों और अनुदेशकों को तोहफा दिया है। सीएम योगी ने ऐलान करते हुए कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाया जाएगा। 

प्रदेश में शिक्षकों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। इसमें बेसिक माध्यमिक वित्त विभिन्न अशासकीय विद्यालयों के करीब 9 लाख शिक्षक लाभान्वित होंगे। इसके अलावा शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइयों को भी कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी। 

वहीं एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है जो शिक्षामित्र और अनुदेशकों के मानदेय बढ़ाने के बारे में जल्द ही अपनी संस्तुति देगी, उसी आधार पर सरकार मानदेय की घोषणा करेगी।

Sunday, September 7, 2025

महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों के लिए भी नियामक संस्था से मान्यता लेना अनिवार्य, उच्च शिक्षा विभाग का निर्देश

महाविद्यालयों के पाठ्यक्रमों के लिए भी नियामक संस्था से मान्यता लेना अनिवार्य

श्रीराम स्वरुप मेमोरियल विवि के मामले के बाद उच्च शिक्षा विभाग का निर्देश

सभी राज्य विवि व उच्च शिक्षा निदेशक को पत्र जारी कर अनुपालन के लिए कहा


लखनऊ। श्रीराम स्वरूप मेमोरियल विश्वविद्यालय, बाराबंकी में लॉ पाठ्यक्रम की मान्यता को लेकर हुए बवाल के बाद उच्च शिक्षा विभाग सक्रिय हो गया है। विभाग ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने संबद्ध कॉलेजों में चल रहे पाठ्यक्रमों के लिए नियामक संस्थाओं से मान्यता जरूर लें। ऐसा न करने पर उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव गिरिजेश कुमार त्यागी की ओर से जारी पत्र में कहा गया है कि प्रदेश के महाविद्यालयों में चल रहे विधि पाठ्यक्रम को बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) से मान्यता लिया जाना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त भी महाविद्यालयों में ऐसे पाठ्यक्रम चल रहे हैं, जिनको नियामक संस्थाओं से मान्यता लिया जाना आवश्यक है।


विशेष सचिव ने सभी राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपति व निदेशक उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर कहा है कि वे अपने स्तर से यह सुनिश्चित करें कि प्रदेश के सभी महाविद्यालयों में चल रहे विभिन्न पाठ्यक्रमों को संबंधित नियामक संस्थाओं से मान्यता ले ली गई है।

यदि किसी महाविद्यालय द्वारा बिना नियामक संस्थाओं से मान्यता लिए पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं तो उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

बता दें कि कई बार विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों में बीएड, विधि, कृषि, फार्मेसी जैसे कोर्सों की अस्थायी मान्यता ली जाती है। इसके बाद यह कोर्स चलते रहते हैं। जबकि इन कोसों की स्थायी मान्यता क्रमशः नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन, बार काउंसिल ऑफ इंडिया, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद व फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया जैसी नियामक संस्थानों से लेना अनिवार्य होता है। अब इसे लेकर सख्ती की जाएगी।

Saturday, September 6, 2025

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से सम्बद्ध प्राइमरी के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय त्रैमास नियमित वेतनादि के भुगतान हेतु धनावंटन के सम्बन्ध में।

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से सम्बद्ध प्राइमरी (बालिग 1 के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय त्रैमास (सितम् 1/5 देय अक्टूबर 2025, अक्टूबर 2025 देय नवम्बर 2025 एवं नवम्बर 2025 देय दिसम्बर 2025) के नियमित वेतनादि के भुगतान हेतु धनावंटन के सम्बन्ध में।



अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से सम्बद्ध प्राइमरी (बालक) प्रभाग के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय त्रैमास नियमित वेतनादि के भुगतान हेतु धनावंटन के सम्बन्ध में

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों से सम्बद्ध प्राइमरी (बालक) प्रभाग के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय त्रैमास (सितम्बर 2025 देय अक्टूबर 2025, अक्टूबर 2025 देय नवम्बर 2025 एवं नवम्बर 2025 देय दिसम्बर 2025) के नियमित वेतनादि के भुगतान हेतु धनावंटन के सम्बन्ध में

NIRF Ranking 2025: एनआईआरआफ रैंकिंग जारी, यहां देखें कैटेगरी वाइज सभी टॉप कॉलेज की लिस्ट

शिक्षा के शिखर को छूने के लिए तैयार उत्तर प्रदेश,  NIRF 2025 रैंकिंग में प्रदेश के कई संस्थानों ने टाप 100 में जगह बनाई लेकिन सुधार की राह लंबी

रैंकिंग संस्थानों के लिए ताकत और कमजोरी जानने का आईना

प्रदेश में बीएचयू और एएमयू टॉप पर, कालेज की श्रेणी में मायूसी


लखनऊ: देशभर में उच्च शिक्षा संस्थानों की राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआइआरएफ-2025) में उत्तर प्रदेश ने शानदार उपस्थिति दर्ज कराई है। कुल मिलाकर कई श्रेणियों में यूपी के संस्थान टाप 100 और टाप 50 में जगह बनाने में सफल रहे हैं। हालांकि, कुछ श्रेणी में प्रदेश के संस्थान पीछे रहे हैं, जैसे कि टाप 100 कालेजों की सूची में उत्तर प्रदेश का एक भी कालेज शामिल नहीं हो पाया। राज्य विश्वविद्यालयों को भी अभी सुधार करने की जरूरत है।


जारी रैंकिंग में स्किल यूनिवर्सिटी श्रेणी में भी प्रदेश का कोई संस्थान टाप तीन में नहीं पहुंच पाया। निजी विश्वविद्यालयों और इंजीनियरिंग संस्थानों में भले ही कुछ नाम उभरे हों, लेकिन कई सरकारी विश्वविद्यालय और कालेज अब भी पिछड़ेपन की जद में हैं। यूपी की राजर्षि टंडन ओपन यूनिवर्सिटी, प्रयागराज को टाप तीन ओपन यूनिवर्सिटी में स्थान मिला है। 

एनआइआरएफ रैंकिंग को शिक्षा जगत में एक तरह का राष्ट्रीय स्कोरकार्ड माना जाता है। छात्रों के लिए यह तय करना आसान होता है कि किस संस्थान में पढ़ाई करने पर उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, बेहतर रिसर्च माहौल और प्लेसमेंट मिलेगा। संस्थानों के लिए यह रैंकिंग एक आईना है, जिससे वे अपनी कमजोरियों और ताकत को समझकर सुधार कर सकते हैं। डा0 एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जेपी पांडेय का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यह रैंकिंग भारत के 9 शिक्षा संस्थानों की साख और पहचान बढ़ाती है। 


प्रदेश की बड़ी उपलब्धियां

ओवरआल रैंकिंग में आइआइटी कानपुर (5वां स्थान) और बीएचयू (10वां स्थान) ने प्रदेश का मान बढ़ाया।

विश्वविद्यालय श्रेणी में बीएचयू (6वां) व एएमयू अलीगढ़ (10वां) टाप 10 में ।

प्रबंधन संस्थानों में आइआइएम लखनऊ (5वां स्थान) ने चमक बिखेरी।

मेडिकल शिक्षा में एसजीपीजीआइ लखनऊ (5वां), बीएचयू (6वां) व केजीएमयू लखनऊ (8वां) टाप 10 में।

कृषि शिक्षा क्षेत्र में बीएचयू (4वां स्थान) और इंडियन वेटनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट बरेली (5वां स्थान) ने प्रदेश को राष्ट्रीय पहचान दिलाई।




NIRF Ranking 2025: एनआईआरआफ रैंकिंग जारी, यहां देखें कैटेगरी वाइज सभी टॉप कॉलेज की लिस्ट

एनआईआरआफ रैंकिंग 2025 जारी हो गई है। उम्मीदवार यहां 16 कैटेगरी के सभी टॉप कॉलेज की लिस्ट देख सकते हैं। हर बार की तरह इस बार इंजीनियरिंग में आईआईटी मद्रास ने टॉप किया है जबकि कॉलेज की लिस्ट में हिंदू यूनिवर्सिटी ने टॉप किया है। आप यहां पूरी डिटेल्स देख सकते हैं।

NIRF Ranking 2025
🔴 ओपन यूनिवर्सिटी में इग्नू ने प्राप्त किया पहला स्थान।
🔴 16 कैटेगरी के टॉप कॉलेज की लिस्ट यहां देखें।
🔴 इस बार 17वीं कैटेगरी को भी जोड़ा गया है।


नई दिल्ली: छात्रों की सहूलियत के लिए शुरू की गई एनआईआरएफ ( नेशनल इंस्टीट्यूट रैंकिंग फ्रेमवर्क) की इंडिया रैंकिंग-2025 में आईआईटी मद्रास एक बार फिर देश का सर्वश्रेष्ठ उच्च शिक्षण संस्थान बना है। उसने लगातार सातवें वर्ष यह जगह बनाई है। वहीं देश भर के उच्च शिक्षण संस्थानों की ओवरआल कैटेगरी में आईआईएससी बेंगलुरु ने दूसरे व आईआईटी बॉम्बे ने तीसरे स्थान पर जगह बनाई है। वहीं ओवरआल कैटेगरी के टॉप-10 में छह संस्थान दिल्ली, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड के है। इनमें आईआईटी दिल्ली (चौथा स्थान), आईआईटी कानपुर (पांचवां स्थान), आईआईटी रुड़की ( सातवां स्थान), एम्स दिल्ली (आठवां स्थान), जेएनयू ( नौवां स्थान) व बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ( दसवां स्थान) शामिल है।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने गुरुवार को उच्च शिक्षण संस्थानों की इंडिया रैंकिंग-2025 को घोषित किया। इस बार यह रैंकिंग 17 कैटेगरी में जारी की गई है। इनमें नई कैटेगरी सतत विकास लक्ष्य बनाई गई है। रैंकिंग में इस बार देश के 14163 उच्च शिक्षण संस्थानों से हिस्सा लिया था। इनमें सबसे अधिक 5268 संस्थान अकेले दक्षिण के थे। वहीं इनमें पश्चिम भारत के 4702 संस्थान, उत्तर भारत के 2304 संस्थान और पूर्वी भारत के 1889 संस्थान शामिल थे।


केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने एनआईआरएफ की इंडिया रैंकिंग -2025 को जारी करने के दौरान इनमें उच्च शिक्षण संस्थानों की और भागीदारी को बढ़ाने का सुझाव दिया। साथ ही इसे अगले वर्ष तक 15 हजार तक पहुंचाने का लक्ष्य दिया। गौरतलब है कि उच्च शिक्षण संस्थानों की इस रैंकिंग के पीछे मुख्य उद्देश्य छात्रों को दाखिले के दौरान किसी भी तरह के भटकाव से बचाना है। साथ ही संस्थानों के बीच एक प्रतिस्पर्धी माहौल बनाना है।


इस बार इन 17 कैटेगरी में जारी की गई रैंकिंग
ओवरआल विश्वविद्यालय
कालेज
शोध संस्थान
इनोवेशन
राज्य विश्वविद्यालय
मुक्त विश्वविद्यालय
स्किल विश्वविद्यालय
सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी)
इंजीनियरिंग
मैनेजमेंट
फार्मेसी
कानून
मेडिकल
डेंटल
आर्किटेक्ट एंड प्लानिंग एग्रीकल्चर एंड एलाइड सेक्टर


इन मानकों के आधार पर तैयार की गई रैंकिंग
छात्रों की संख्या, छात्र-शिक्षक रेशियो, पीएचडी वाले शिक्षकों की संख्या, वित्तीय प्रबंधन, ऑनलाइन शिक्षा, एनईपी की सिफारिशों को अपनाना ( जिनमें कभी भी बीच में पढ़ाई छोड़ने व शामिल होने का सुविधा, भारत ज्ञान परंपरा और भारतीय भाषा में शिक्षा), शोध पत्रों का प्रकाशन, शोध प्रोजेक्ट, पेटेंट, प्लेसमेंट, परीक्षा पैटर्न, पीएचडी छात्रों की संख्या, विविधताओं को प्रोत्साहन ( महिलाओं को पढ़ाने में प्राथमिकता, दिव्यांगजनों के लिए जरूरी सुविधाएं, पिछड़े व गरीब बच्चों को प्रोत्साहित करना) व संस्थानों को लेकर आम धारणा। आदि।


ओवरआल कैटेगरी
आईआईटी मद्रास
आईआईएससी बेंगलुरु
आईआईटी बॉम्बे
आईआईटी दिल्ली
आईआईटी कानपुर
आईआईटी खड़गपुर
आईआईटी रुड़की
एम्स दिल्ली
जेएनयू,
 बीएचयू

विश्वविद्यालय कैटेगरी
आईआईएससी बेंगलुरु जेएनयू
मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन, मणिपाल
जामिया मिलिया इस्लामिया, दिल्ली
दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली
बीएचयू वाराणसी
बिरला इंस्टीट्यूट आफ टेक्नालाजी, पिलानी
अमृता विश्व विद्यापीठम, कोयंबटूर
जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़।

इंजीनियरिंग कैटेगरी
आईआईटी मद्रास
आईआईटी दिल्ली
आईआईटी बॉम्बे
आईआईटी कानपुर
आईआईटी खड़गपुर
आईआईटी रुड़की
आईआईटी हैदराबाद
आईआईटी गुवाहाटी
एनआईटी तिरुचिपल्ली
आईआईटी बीएचयू वाराणसी

कॉलेज कैटेगरी
हिंदू कॉलेज
मिरांडा कॉलेज
हंस राज कॉलेज
सेंट स्टीफन कॉलेज ( सभी दिल्ली के)
राम कृष्ण मिशन कॉलेज कोलकाता
आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज, दिल्ली
सेंट जेवियर्स कॉलेज कोलकाता
पीएचजीआर कृष्णामल वुमेन कॉलेज कोयंबटूर
पीएसजी कॉलेज ऑफ आर्ट एंड साइंस कोयंबटूर।

मैनेजमेट कैटेगरी
आईआईएम अहमदाबाद,
आईआईएम बेंगलुरु
आईआईएम कोज्जिकोड
आइआइटी दिल्ली
आईआईएम लखनऊ

मुक्त विश्वविद्यालय कैटेगरी
पहले स्थान पर इग्नू दिल्ली, दूसरे स्थान पर कर्नाटक राज्य मुक्त विश्वविद्यालय मैसूर और तीसरे स्थान पर यूपी राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय प्रयागराज।

एसडीजी इंस्टीट्यूट कैटेगरी
पहले स्थान पर आइआइटी मद्रास, दूसरे स्थान पर इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट दिल्ली व तीसरे स्थान पर जामिया मिलिया इस्लामिया।

पुरानी पेंशन बहाली के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों ने किया उपवास

पुरानी पेंशन बहाली के लिए शिक्षकों और कर्मचारियों ने किया उपवास

कहा, सुप्रीम कोर्ट के टीईटी से जुड़े निर्णयों से शिक्षकों में काफी तनाव


लखनऊ। शिक्षक दिवस पर शुक्रवार को देश भर में शिक्षकों व कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन के लिए उपवास किया। । साथ ही हाल ही में शिक्षकों के लिए टीईटी से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर अपना डर भी जताया है।

एनएमओपीएस के आह्वान पर पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण की समाप्ति के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु के नेतृत्व में उपवास कर केंद्र सरकार से पुरानी पेंशन बहाली की मांग की। 

लखनऊ में आयोजित उपवास में बंधु ने कहा कि एक तरफ सरकार शिक्षक व कर्मचारियों को पेंशन देने को तैयार नहीं है। फिर उसका सम्मान झूठा है। अर्द्धसैनिक बल को पेंशन विहीन रहना पड़ रहा है। वहीं दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट के टेट के निर्णय से शिक्षक तनाव में हैं।

चिकित्सा व स्वास्थ्य महासंघ के महासचिव अशोक कुमार ने कहा कि पुरानी पेंशन की बहाली और निजीकरण के खिलाफ लड़ाई जारी है। 25 नवंबर को दिल्ली में होने वाली रैली में सभी स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल होंगे। उपवास में नीलमणि राव, नरेंद्र कुमार, डॉ. नीरजपति त्रिपाठी, डॉ. कमल उसरी, राकेश वर्मा, डॉ. राजेश कुमार, विक्रमादित्य मौर्य आदि शामिल थे। 




पुरानी पेंशन के लिए शिक्षक दिवस पर करेंगे उपवास

लखनऊ। एनएमओपीएस के आह्वान पर शिक्षक दिवस पर पूरे देश का शिक्षक व कर्मचारी सरकार से पुरानी पेंशन की बहाली की मांग करेगा। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने बताया कि पूरे देश का शिक्षक 5 सितंबर को पुरानी पेंशन की बहाली के लिए उपवास करेगा।


सरकार से देश का शिक्षक व कर्मचारी लगातार पुरानी पेंशन बहाली की मांग कर रहा है। किंतु सरकार पुरानी पेंशन बहाल न कर यूपीएस का झुनझुना थमा दिया है। शिक्षकों को मजबूर होकर उपवास करना पड़ रहा है। इसलिए सरकार शिक्षक की बुढ़ापे की लाठी पुरानी पेंशन बहाल करे। संगठन के राष्ट्रीय सचिव व प्रदेश महामंत्री डॉ. नीरजपति त्रिपाठी ने कहा कि सरकार हठधर्मिता छोड़ पुरानी पेंशन बहाल करे। 


संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि उपवास कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए पूरे देश में संवाद व बैठकें चल रही हैं। उन्होंने कहा कि देश का अर्द्धसैनिक बल हो या फिर सफाई कर्मचारी या फिर अधिकारी, सभी चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द पुरानी पेंशन बहाल करे। क्योंकि एनपीएस में सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। 

एमबीबीएस सत्र शुरू, मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों का टोटा, उत्तर प्रदेश के सभी कॉलेजों में करीब 50 फीसदी शिक्षकों के पद खाली

एमबीबीएस सत्र शुरू, मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों का टोटा, उत्तर प्रदेश के सभी कॉलेजों में करीब 50 फीसदी शिक्षकों के पद खाली

सभी कॉलेजों में निरंतर चल रहे हैं साक्षात्कार, फिर भी भरे नहीं जा सके पद


लखनऊ। प्रदेश के चिकित्सीय संस्थानों एवं मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सक शिक्षकों के औसतन 50 फीसदी पद खाली हैं। हालात यह हैं कि लखनऊ के डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में 37, केजीएमयू में 20 और जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज कानपुर में भी 16 पद खाली हैं।

ऐसे ही बड़े शहरों में स्थित मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में रिक्त पदों की वजह सिर्फ शिक्षकों के नाम न आने और नाम वापस लेने की प्रवृत्ति है। दरअसल, चयनित शिक्षक साक्षात्कार के बाद पद ग्रहण ही नहीं करते। यही वजह है कि करीब 50 फीसदी सीटें खाली हैं। ऐसे में सरकार के लिए मेडिकल शिक्षकों की भारी कमी को पूरा करना चुनौती बना हुआ है।


भर्ती प्रक्रिया में देरी

प्रदेश के 13 राजकीय मेडिकल कॉलेजों में चिकित्सक शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया पिछले तीन साल से जारी है। इसके बावजूद शिक्षकों के पद भरे नहीं जा सके हैं। प्रदेश सरकार ने हर मेडिकल कॉलेज में 27 विभागों के गठन के आदेश दिए हैं। इनमें प्रत्येक विभाग में प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर व असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति की जानी है। इसके लिए कुल 645 पद सृजित किए गए हैं।

इनमें अब तक 135 पद ही भरे जा सके हैं। डॉ. राम मनोहर लोहिया संस्थान में 440 में से 165 पद खाली हैं। इसी तरह केजीएमयू में 403 में से 67 और एसजीपीजीआई में भी करीब 50 फीसदी सीटें खाली हैं।


निजी प्रैक्टिस पर रोक, वेतन कम और तबादला बना मुसीबत
कई शिक्षकों ने बताया कि अनुबंध पर रखे जाने वाले चिकित्सकों को प्राइवेट प्रैक्टिस पर छूट है। स्थायी नियुक्त चिकित्सकों को निजी प्रैक्टिस (बाहर मरीज देखने) पर रोक है। असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में काम करने वाले चिकित्सकों को मासिक करीब 1.20 लाख रुपये वेतनमान मिलता है, जो प्राइवेट अस्पतालों की अपेक्षा काफी कम है। यही वजह है कि तीन साल सेवा करने के बाद भी चिकित्सक नौकरी छोड़ देते हैं।

“कई बार सही मिलान न होने की यह बड़ी वजह बन जाती है”
कई मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों ने बताया कि चिकित्सक शिक्षकों के न आने की बड़ी वजह यह है कि कई बार उनका विषय का मिलान विभाग से नहीं हो पाता। उदाहरण के लिए, रेडियोलॉजी व रेडियो डायग्नोसिस, फॉरेंसिक मेडिसिन व मेडिकल जूरिस्प्रूडेंस, नेत्र रोग व ऑप्थैल्मोलॉजी आदि का अलग विभाग है। इस वजह से कई बार नियुक्ति की प्रक्रिया में देरी हो जाती है।

खाली पदों को लेकर विवि को आदेश
जहां भी पद खाली हैं, उसका विज्ञापन जारी कर दिया गया है। राजकीय मेडिकल कॉलेजों में खाली पदों को विश्वविद्यालयों के जरिए पूरा किया जाएगा। जहां भी रिक्त पद रहेंगे, वहां एडहॉक आधार पर नियुक्ति की जाएगी। इसके लिए विवि को आदेशित किया गया है।


“साक्षात्कार की चल रही निरंतर प्रक्रिया के बावजूद शिक्षकों की कमी बनी हुई है। सभी कॉलेजों में साक्षात्कार की प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही रिक्त पदों को भर लिया जाएगा। जहां भी पद खाली हैं, वहां एडहॉक शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। जब तक नए पदों पर नियुक्ति नहीं हो जाती, एडहॉक से काम चलता रहेगा।”  ब्रजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री

नौ लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और उनके परिवारीजन को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा, सीएम योगी ने की शिक्षक दिवस पर बड़ी घोषणा

नौ लाख शिक्षकों, शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और उनके परिवारीजन को मिलेगी कैशलेस इलाज की सुविधा,  सीएम योगी ने की शिक्षक दिवस पर बड़ी घोषणा

81 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार, 10 शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने किया सम्मानित

शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ेगा, योगी ने कहा समिति का गठन कर चुके

शिक्षकों के साथ रसोइयों को भी कैशलेस इलाज का लाभ, प्रक्रिया जल्द पूरी करने का आदेश


लखनऊशिक्षक दिवस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश के नौ लाख से अधिक शिक्षकों और उनके परिवारीजन को कैशलेस इलाज की सुविधा दिए जाने की घोषणा की है। इनमें बेसिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षकों के साथ शिक्षामित्र, अनुदेशक और रसोइयां भी शामिल होंगे। मुख्यमंत्री ने शिक्षा अधिकारियों को इसकी प्रक्रिया जल्द पूरी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों और अनुदेशकों का मानदेय बढ़ाने पर विचार के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की गई है। समिति की रिपोर्ट आते ही कार्य के अनुरूप मानदेय देने का प्रयास किया जाएगा।


लोक भवन सभागार में शुक्रवार को आयोजित शिक्षक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने बेसिक शिक्षा के 66 और माध्यमिक शिक्षा के 15 शिक्षकों सहित कुल 81 शिक्षकों को राज्य शिक्षक पुरस्कार प्रदान किए। 10 शिक्षकों को मुख्यमंत्री ने स्वयं सम्मानित किया, जबकि अन्य को शिक्षा मंत्रियों ने पुरस्कृत किया। पुरस्कार स्वरूप शिक्षकों को 25 हजार रुपये का चेक, सरस्वती प्रतिमा और शाल प्रदान किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ लोग स्कूलों के विलय और बाल वाटिका के बारे में दुष्प्रचार कर रहे थे, लेकिन कई प्रधानाचार्यों और शिक्षकों ने मेहनत और नवाचार से सरकारी विद्यालयों को कान्वेंट या पब्लिक स्कूल को टक्कर देने लायक बना दिया है। उन्होंने सुलतानपुर, वाराणसी और अन्य जिलों के उदाहरण भी दिए।

उन्होंने बताया कि आपरेशन कायाकल्प के तहत प्रदेश के 1.36 लाख विद्यालयों को 19 बुनियादी सुविधाओं से जोड़ा गया है। वहीं प्रोजेक्ट अलंकार के जरिये अब तक 2100 विद्यालयों को नए भवन और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया गया है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रदेश में 5000 से अधिक बाल वाटिकाएं शुरू हो चुकी हैं, जिनमें 25 हजार से अधिक बच्चों ने शिक्षा की शुरुआत कर दी है। इन्हें मुख्यमंत्री पोषण मिशन और आंगनबाड़ी केंद्रों से भी जोड़ा जा रहा है। बच्चों को पौष्टिक व स्वादिस्ट भोजन उपलब्ध कराया जाएगा ताकि उनमें सीखने की रुचि बढ़े। उन्होंने कहा कि अब सीसीटीवी निगरानी में परीक्षाएं कराई जाती हैं और 56 लाख विद्यार्थियों के परिणाम एक महीने के भीतर घोषित किए जाते हैं।


आज यूपी बोर्ड का विद्यार्थी किसी भी बोर्ड से कमतर नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ था। अब बड़े सुधार हुए हैं, लेकिन कुछ लोग नकारात्मक माहौल बनाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे अपनी तुलना किसी नौकरशाह या नेता से न करें और शिक्षा सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाएं। समारोह को बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह व माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने भी संबोधित किया। अपर मुख्य सचिव बेसिक व माध्यमिक का भी दायित्व संभाल रहे मुख्य सचिव दीपक कुमार और महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

Friday, September 5, 2025

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय त्रैमास के वेतनादि के भुगतान हेतु धनावंटन के सम्बन्ध में।

अशासकीय सहायता प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को वित्तीय वर्ष 2025-26 के तृतीय त्रैमास (सितम्बर 2025 देय अक्टूबर 2025, अक्टूबर 2025 देय नवम्बर 2025, नवम्बर 2025 देय दिसम्बर 2025) के वेतनादि के भुगतान हेतु धनावंटन के सम्बन्ध में।



विवि और महाविद्यालयों के शिक्षकों को पांच साल से सम्मान का इंतजार, 2019 में दिए गए थे उच्च शिक्षा में पुरस्कार, 2020-21 में घोषणा के बाद भी नहीं दिया गया सम्मान

विवि और महाविद्यालयों के शिक्षकों को पांच साल से सम्मान का इंतजार, 2019 में दिए गए थे उच्च शिक्षा में पुरस्कार, 2020-21 में घोषणा के बाद भी नहीं दिया गया सम्मान


लखनऊ। हर साल पांच सितंबर को बेसिक व माध्यमिक शिक्षकों को राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक सम्मान से नवाजा जाता है, लेकिन विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के हजारों शिक्षकों को पांच साल से शिक्षक सम्मान का इंतजार है। उच्च शिक्षा विभाग ने बिना कारण बताए पांच साल से शिक्षक दिवस पर इनको सम्मानित नहीं कर रहा है।

बेसिक व माध्यमिक की ही तरह पहले उच्च शिक्षा विभाग हर साल विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों को शिक्षक दिवस पर पुरस्कृत करता था। आखिरी बार 2019 में ये पुरस्कार दिए गए थे। 2020-21 में शिक्षक पुरस्कार की घोषणा तो हुई लेकिन पुरस्कार दिया नहीं जा सका। इस सूची में शामिल कई शिक्षक सेवानिवृत्त भी हो गएbहैं। इन शिक्षकों ने कई बार विभाग से इस संबंध में पत्राचार भी किया है। इसके बाद कोविड का दौर शुरू हो गया। इससे सारी गतिविधियां ठप हो गईं और बाद में विभाग बिना कोई कारण बताए शिक्षक पुरस्कार नहीं प्रदान कर रहा है।


विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के हजारों शिक्षक इससे जुड़ी आवश्यक तैयारी करके इंतजार ही कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार इसके लिए विभाग में भी संपर्क किया लेकिन अपेक्षित जानकारी नहीं मिली।

उप्र. विवि महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (फुफुक्टा) के संयुक्त मंत्री डॉ. गांगेय दीक्षित ने कहा कि शिक्षक सम्मान से अपने शैक्षिक कार्य को बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन मिलता था। काफी संख्या में शिक्षक हर साल इसके लिए आवश्यक तैयारी करके रखते हैं लेकिन बाद में उन्हें निराशा हाथ लगती है। उन्होंने उच्च शिक्षा विभाग से इसे फिर शुरू करने की मांग की है।


अभी प्रदेश के आठ मंडलों में ही क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के कार्यालय हैं। अब हर मंडल में कार्यालय खोले जा रहे हैं। इनके सक्रिय होने के बाद शिक्षकों से आवेदन लेकर बेहतर तरीके से प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जल्द ही अच्छे शिक्षकों का चयन कर उनको सम्मानित किया जाएगा। - योगेंद्र उपाध्याय, उच्च शिक्षा मंत्री


शिक्षकों को सम्मानित किए जाने से प्रोत्साहन मिलता था। इसको बिना कारण रोक दिया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। इसे तुरंत शुरू किया जाए। वर्ष 2020-2021 में जिन शिक्षकों के नाम की घोषणा की गई थी, उनको भी सम्मान दिया जाना चाहिए था। -डॉ. मनोज पांडेय, अध्यक्ष, लुआक्टा



शिक्षकश्री व सरस्वती सम्मान दिए जाते थे

उच्च शिक्षा विभाग राजकीय विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों के शिक्षकों को शिक्षकश्री व सरस्वती सम्मान देता था। शिक्षकश्री में आवेदन लेकर शोध आदि शैक्षिक काम के आधार पर तीन शिक्षक विश्वविद्यालयों व तीन कॉलेजों से चयनित होते थे। इनको 1.50-1.50 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र व शॉल देकर सम्मानित किया जाता था। सरस्वती सम्मान में एक विश्वविद्यालय व दो कॉलेज के शिक्षकों का चयन होता था। इनको तीन-तीन लाख रुपये व अन्य चीजें दी जाती थीं। दोनों श्रेणी में चयनित शिक्षकों को दो साल का सेवा विस्तार भी मिलता था।

Thursday, September 4, 2025

विवि और एडेड डिग्री कॉलेज शिक्षकों को नोशनल वेतन वृद्धि का लाभ, 30 जून व 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों को मिलेगा लाभ

विवि और एडेड डिग्री कॉलेज शिक्षकों को नोशनल वेतन वृद्धि का लाभ, 30 जून व 31 दिसंबर को रिटायर होने वाले शिक्षकों व कर्मचारियों को मिलेगा लाभ


लखनऊ। राज्य विवि और अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों और शिक्षणेतर कर्मियों को भी एक नोशनल वेतन वृद्धि (काल्पनिक वेतन वृद्धि) का लाभ दिया जाएगा। जो शिक्षक व कर्मी 30 जून या 31 दिसंबर को रिटायर होंगे उनकी पेंशन तथा ग्रेच्युटी की गणना एक नोशनल वेतन वृद्धि के साथ की जाएगी।


इस संबंध में उच्च शिक्षा विभाग की विशेष सचिव निधि श्रीवास्तव ने शासनादेश जारी कर दिया है। उन्होंने सभी राज्य विवि व निदेशक उच्च शिक्षा को पत्र भेजकर इसका पालन करने को कहा है। अब तक किसी शिक्षक की सेवानिवृत्ति की तिथि 30 जून या 31 दिसंबर है और उसके ठीक अगले दिन यानी एक जुलाई व एक जनवरी को उसकी वेतन वृद्धि होनी हो तो इसका लाभ उन्हें नहीं मिल पाता था।

अब यह लाभ उन्हें नोशनल वेतन वृद्धि के रूप में मिलेगा। जिन कर्मियों ने एक जनवरी 2006 के बाद और शासनादेश जारी होने से पहले 30 जून को रिटायरमेंट ले लिया है वे भी लाभ के दायरे में आएंगे। हालांकि, उन्हें सिर्फ तात्कालिक लाभ मिलेगा एरियर नहीं मिलेगा।

यही नियम एक जनवरी 2016 के बाद रिटायर हुए उन कर्मियों पर भी लागू होगा जिनकी रिटायरमेंट तिथि 30 जून या 31 दिसंबर रही और उनकी वेतनवृद्धि एक जुलाई या एक जनवरी को तय थी। यह आदेश एक जनवरी 2006 से लागू वेतन नि समिति (2008) की संस्तुति के आधार पर लागू किया गया है। उच्च शिक्षा में लागू होने से हजारों शिक्षकों को लाभ मिलेगा।

अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन की नारी शिक्षा मे अनुपम पहल, काॅलेज में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को 30,000 रुपये छात्रवृति

अजीम प्रेमजी फाउण्डेशन की नारी शिक्षा मे अनुपम पहल, काॅलेज में प्रवेश लेने वाली छात्राओं को 30,000 रुपये छात्रवृति


शर्त केवल 10th व 12th सरकारी स्कूल से पास हों

इस सत्र मे कालेज मे नियमित प्रवेश ले लिया हो।नियमित प्रवेश आवश्यक है।

आवेदन 10 सितम्बर 2025 से प्रारंभ 

विस्तृत सूचना के लिए संलग्न पोस्टर/ब्रोशर देखे...


🔴 पोर्टल लिंक 👇

https://azimpremjifoundation.org

Wednesday, September 3, 2025

बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य हुई तो कई प्राइवेट कॉलेजों की खुल जाएगी पोल, कई स्ववित्त पोषित कॉलेजों में प्रवेश के बाद सीधे परीक्षा के वक्त नजर आते हैं विद्यार्थी

बायोमीट्रिक हाजिरी अनिवार्य हुई तो कई प्राइवेट कॉलेजों की खुल जाएगी पोल, कई स्ववित्त पोषित कॉलेजों में प्रवेश के बाद सीधे परीक्षा के वक्त नजर आते हैं विद्यार्थी


प्रयागराज। प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) राज्य विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों में सामूहिक नकल रोकने के लिए कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने विश्वविद्यालयों व महाविद्यालयों में विद्यार्थियों की 75 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि इससे कम उपस्थिति होने पर परीक्षा फार्म भरने और परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं दी जाएगी।


कॉलेजों में सीसीटीवी कैमरे लगवाने के निर्देश दिए गए हैं। कहा गया है कि यदि उपस्थिति बायोमीट्रिक प्रणाली से उपलब्ध हो तो बेहतर होगा। अगर महाविद्यालयों में बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था हो जाती है तो ऐसे कॉलेजों की पोल खुल जाएगी जहां काफी संख्या में विद्यार्थी पंजीकृत हैं लेकिन उनकी उपस्थिति सिर्फ परीक्षा के समय नजर आती है।


प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और कौशाम्बी में राज्य विवि से संबद्ध 739 महाविद्यालय हैं। इनमें 28 महाविद्यालय राजकीय व एडेड हैं और बाकी 711 महाविद्यालय स्ववित्त पोषित हैं। राज्य विवि के सूत्रों का कहना है कि केवल 20 फीसदी कॉलेज ऐसे हैं, जहां 75 फीसदी उपस्थित का मानक पूरा हो रहा है। 80 फीसदी महाविद्यालयों में इसे सुनिश्चित करने की जरूरत है। ऐसे कॉलेजों में विद्यार्थियों की 75 फीसदी उपस्थिति सिर्फ कागजों में दर्ज होती है। कई स्ववित्त पोषित कॉलेजों में प्रवेश के बाद विद्यार्थी सीधे परीक्षा के वक्त नजर आते हैं। राज्यपाल के दिशा-निर्देश के बाद राज्य विवि के कुलपति प्रो. अखिलेश कुमार सिंह ने ऐसे कॉलेजों में 75 फीसदी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए टीम गठित की गई है। टीम ने कॉलेजों का निरीक्षण भी शुरू कर दिया है।

वहीं, जानकारों का मानना है कि महाविद्यालयों में जब तक बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था अनिवार्य नहीं की जाती, तब तक सुधार नहीं होगा। विश्वविद्यालय की ओर से कॉलेजों में विद्यार्थियों को बायोमीट्रिक हाजिरी सुनिश्चित करने के लिए कोई दिशा निर्देश जारी नहीं किए गए हैं।

उच्च शिक्षा निदेशालय ने भी इस बारे में कोई निर्देश नहीं दिए हैं। उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमित भारद्वाज का कहना है कि स्ववित्त पोषित कॉलेजों पर निदेशालय का कोई नियंत्रण नहीं है। बायोमीट्रिक उपस्थित पर निर्णय राज्य विवि ही ले सकता है।

मेडिकल कॉलेज में 79 फीसदी आरक्षण का शासनादेश रद्द करने के खिलाफ सरकार की अपील पर फैसला सुरक्षित

हाईकोर्ट ने सरकार से पूछा एकल पीठ के फैसले में क्या है कमी

मेडिकल कॉलेज में 79 फीसदी आरक्षण का शासनादेश रद्द करने के खिलाफ सरकार की अपील पर फैसला सुरक्षित

याची अभ्यर्थी की पास के मेडिकल कॉलेज में काउंसिलिंग कराने का दिया मौखिक निर्देश


03 सितंबर 2025
लखनऊ। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने राज्य सरकार की अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन व सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 79 फीसदी आरक्षण के संबंध में पारित शासनादेशों को रद्द करने के एकल पीठ के फैसले के खिलाफ दाखिल विशेष अपील पर मंगलवार को सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया है।

न्यायमूर्ति राजन रॉय व न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष राज्य सरकार की अपील पर सुनवाई हुई। अपील पर सुनवाई करते हुए, हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा कि उक्त निर्णय में क्या कमी है? राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता जेएन माथुर ने दलील दी कि एकल पीठ के फैसले से इन चारों मेडिकल कालेजों में दाखिलों के लिए फिर से काउंसिलिंग करनी पड़ेगी।

इससे प्रदेश के अन्य जिलों के मेडिकल कॉलेजों में दाखिलों के लिए हो रही काउंसिलिंग पर भी असर पड़ेगा। कहा कि नई काउंसिलिंग से पहले से सीट पाए अभ्यर्थी बाहर हो जाएंगे। अन्य मेडिकल कॉलेजों में काउंसिलिंग पूरी होने की वजह से उनके पास विकल्प भी नहीं बचेंगे।

उधर, याची अभ्यर्थी के अधिवक्ता मोतीलाल यादव ने एकल पीठ के फैसले को आरक्षण के कानूनी प्रावधानों के तहत कहकर इस पर पूरी तरह से अमल किए जाने का तर्क दिया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित कर लिया। हालांकि, याची के अधिवक्ता के मुताबिक शुरुआत में याचिका दाखिल करने वाली अभ्यर्थी सबरा अहमद को अंबेडकरनगर या पास के किसी मेडिकल कॉलेज में काउंसिलिंग में शामिल करने पर गौर करने का मौखिक निर्देश भी दिया है।




यूपी : एमबीबीएस में 23 की जगह 78% दे दिया था एससी-एसटी को आरक्षण, पिछड़ों को 13 तो सामान्य के हिस्से आई सिर्फ नौ फीसदी सीटें

01 सितंबर 2025
लखनऊ। प्रदेश में 4 राजकीय मेडिकल कॉलेज कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर में अनुसूचित जाति एवं जनजाति को 23 के बजाय 78 फीसदी आरक्षण दिया गया है। अति पिछड़े वर्ग को 13 फीसदी और सामान्य का हिस्सा सिर्फ नौ फीसदी है। निर्बल आय वर्ग (ईडब्ल्यूएस) का कोटा नहीं लागू है। ऐसे में हाईकोर्ट ने नीट 2025 की काउंसिलिंग रद्द करने का आदेश दिया है। हालांकि अब चिकित्सा शिक्षा विभाग दोबारा अपील की तैयारी में जुटा है।

प्रदेश में अनुसूचित जाति को 21, जनजाति को 2, अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 और ईडब्ल्यूएस को 10 फीसदी आरक्षण देने की व्यवस्था है। मेडिकल कॉलेजों का निर्माण अलग अलग समय पर हुआ है। कन्नौज, अंबेडकर नगर, जालौन और सहारनपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के निर्माण के वक्त समाज कल्याण विभाग की ओर से स्पेशल कंपोनेंट के तहत 70 फीसदी बजट दिया गया। जबकि 30 फीसदी बजट सामान्य था। उस वक्त इस बजट से हॉस्टल, प्रेक्षागृह सहित अन्य संसाधनों का निर्माण कराया गया। हाईकोर्ट में दाखिल की गई याचिका में बताया गया कि इन कॉलेजों के दाखिला लेने वाले छात्रों में हॉस्टल में 70 फीसदी अनुसूचित जाति एवं जनजाति के बच्चों को आरक्षण दिया जाना था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की लापरवाही से इसकी गलत व्याख्या की गई।

एमबीबीएस की सीटों पर अनुसूचित जाति के 21 फीसदी और जनजाति के दो फीसदी को मिलाकर कुल 23 फीसदी की जगह 78 फीसदी आरक्षण दे दिया गया। यह व्यवस्था कई साल से चल रही है। इस वर्ष की काउंसिलिंग में भी इसी व्यवस्था के तहत सीटों आवंटित की गई हैं। ऐसे में हाईकोर्ट ने काउंसिलिंग ही रद्द कर दिया है। 



यूपी : हाईकोर्ट ने NEET-2025 के तहत दाखिले में निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण का शासनादेश किया निरस्त, अंबेडकरनगर, कन्नौज, सहारनपुर और जालौन मेडिकल कॉलेज के प्रवेश रद्द

50 फीसदी आरक्षण सीमा नहीं लांघ सकते – हाईकोर्ट 


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने नीट- 2025 परीक्षा के तहत कन्नौज, सहारनपुर, अंबेडकरनगर और जालौन के सरकारी मेडिकल कॉलेजों की सीटों को नए सिरे से भरने का आदेश दिया है। साथ ही यूपी सरकार के विशेष आरक्षण शासनादेश को निरस्त करते हुए राज्य सरकार को आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत दाखिला देने को कहा है। अदालत में मेडिकल कॉलेजों की सीटें भरने के लिए निर्धारित सीमा से अधिक आरक्षण देने के शासनादेशों को चुनौती दी गई थी।

न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ ने यह फैसला नीट-2025 की अभ्यर्थी सबरा अहमद की याचिका पर दिया है। याची ने अंबेडकरनगर, कन्नौज, जालौन और सहारनपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश के लिए आरक्षण की स्वीकृत सीमा का मुद्दा उठाकर चुनौती दी थी। याची का कहना था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने अनुसूचित जाति, जनजाति और ओबीसी अभ्यर्थियों को शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण देने के लिए आरक्षण अधिनियम 2006 बनाया था। इस अधिनियम के तहत मेडिकल कॉलेजों में हुए दाखिलों में अधिनियम में दी गई आरक्षण की निर्धारित सीमा 50 फीसदी का उल्लंघन करके सीटें भरी गई। यानी शासनादेश जारी कर 50 फीसदी से अधिक आरक्षण दिया गया। यह कानून की मंशा के खिलाफ था। वहीं, राज्य सरकार की ओर से याचिका का विरोध किया गया। 



अदालत ने कहा- राज्य सरकार का आदेश आरक्षण अधिनियम के खिलाफ : 
कोर्ट ने कहा कि आरक्षण की सीमा तय करने वाला राज्य सरकार का आदेश साफ तौर पर आरक्षण अधिनियम 2006 के खिलाफ है। कोर्ट ने कहा कि सरकार आरक्षण की तय सीमा 50 फीसदी के नियम का बगैर किसी कानूनी प्राधिकार के उल्लंघन नहीं कर सकती। ऐसे में इन शासनादेशों को तर्कसंगत नहीं ठहराया जा सकता है। इस टिप्पणी के साथ कोर्ट ने आरक्षण सीमा का उल्लंघन करने वाले 2010 से 2015 के बीच जारी छह शासनादेशों को रद्द कर दिया।

आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत नए सिरे से भरी जाएंगी सीटें अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि इन चारों मेडिकल कॉलेजों की सीटें आरक्षण अधिनियम 2006 के अनुसार भरी जाएं। सीटें भरने की सूचना पर कोर्ट ने चिकित्सा शिक्षा विभाग को आरक्षण अधिनियम 2006 के तहत इन सीटों को नए सिरे से भरने की कार्यवाही करने का निर्देश दिया। 


चारों कॉलेजों की 340 सीटें होंगी प्रभावित 
हाईकोर्ट के आदेश के बाद चारों कॉलेजों की 340 सीटों के दाखिले प्रभावित हो सकते हैं। हर कॉलेज में कुल 85 सीटें हैं। इनमें सात जनरल वर्ग के लिए, एससी वर्ग के लिए 62, एसटी वर्ग के लिए 5 व ओबीसी वर्ग के लिए 11 सीटें हैं।


दूसरे चरण की काउंसिलिंग में सीटों का वितरण बदलेगा चिकित्सा शिक्षा एवं प्रशिक्षण महानिदेशालय ने देर रात अपनी वेबसाइट पर हाईकोर्ट के फैसले की जानकारी दी है। यह भी कहा है कि दूसरे चरण की सीट मैट्रिक्स बदल सकती है। इस बारे में जल्द ही वेबसाइट पर सूचना दी जाएगी।


प्रदेश के सभी कॉलेजों पर पड़ सकता है असर
लखनऊ। प्रदेश में आठ अगस्त से शुरू हुई पहले चरण की काउंसिलिंग 28 अगस्त को पूरी हो चुकी है। दूसरे चरण की प्रकिया शुरू हो गई है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों की आरक्षित श्रेणी की सीटें प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में कुछ छात्रों के कॉलेज आवंटन प्रभावित होंगे।

छह लाख पात्र छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर योगी सरकार सख्त, 14 अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि, एक बाबू सस्पेंड, मुख्यमंत्री ने 100 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश

छह लाख पात्र छात्रों को शुल्क भरपाई न होने पर योगी सरकार सख्त, 14 अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि, एक बाबू सस्पेंड, मुख्यमंत्री ने 100 से ज्यादा अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई का दिया आदेश, कई विश्वविद्यालयों के नोडल, आईटीआई के 8 जेडी भी कार्रवाई की जद में


लखनऊ। प्रदेश में छह लाख पात्र छात्रों को पिछले साल की शुल्क भरपाई न होने पर सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। अयोध्या, बहराइच, रायबरेली व सीतापुर समेत 14 जिलों के समाज कल्याण अधिकारियों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है। सबसे ज्यादा गड़बड़ी वाले जिला बरेली के बाबू प्रमोद जोशी को निलंबित कर दिया गया है।

सीएम योगी आदित्यनाथ ने 100 से ज्यादा अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए हैं। इसमें कई विश्वविद्यालयों के नोडल अधिकारी और आईटीआई के आठ मंडलों के संयुक्त निदेशक भी शामिल हैं।

प्रदेश सरकार ढाई लाख रुपये तक सालाना आय वाले एससी-एसटी छात्रों और दो लाख रुपये तक आय वाले अन्य वर्गों के छात्रों को छात्रवृत्ति के साथ शुल्क की भरपाई करती है। वर्ष 2024-25 में शिक्षण संस्थानों, विश्वविद्यालयों और अधिकारियों की लापरवाही से सभी वर्गों के करीब 6 लाख पात्र छात्र योजना का लाभ नहीं पा सके। कहीं लापरवाह अधिकारियों ने डाटा लॉक नहीं किया तो कहीं शिक्षण संस्थानों और विश्वविद्यालयों ने ऑनलाइन आवेदन आगे ही नहीं बढ़ाए।


इन जिलों के समाज कल्याण बाबुओं को भी प्रतिकूल प्रविष्टि

विपिन कुमार व प्रवीन माहेश्वरी (अलीगढ़), विष्णु चंद्र वर्मा व भूपेंद्र सिंह (औरेया), विकास श्रीवास्तव (अयोध्या), मसीह उल्लाह अंसारी व नवनीत आर्या (बहराइच), विकास पाठक (बलिया), अंकित कुमार (बिजनौर), सारांश श्रीवास्तव (गौतमबुद्धनगर), संजीव शर्मा (गाजियाबाद), जितेंद्र कुमार (कन्नौज), मनोज कुमार व अनूप कुमार (प्रतापगढ़), आशीष पांडे (रायबरेली), सुरेश गौतम व अरुण वर्मा (सीतापुर), उत्तम कुमार (वाराणसी)।


ये भी आए कार्रवाई की जद में 
सीएम ने इस मामले में लापरवाही करने वाले राज्य विश्वविद्यालयों, केंद्रीय विवि, संबद्धता देने वाली एजेंसियों और निजी विश्वविद्यालयों के 66 नोडल अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई के लिए सक्षम स्तर से कार्रवाई कराने के भी निर्देश दिए हैं। 14 राज्य विश्वविद्यालयों और 19 निजी विश्वविद्यालयों को कठोर चेतावनी जारी की जा रही है। 

आयुष विभाग के दो नोडल अधिकारियों पर भी कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा आयुष विवि गोरखपुर, स्टेट मेडिकल फैकल्टी, अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी, राम मनोहर लोहिया संस्थान, एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नीकल यूनिवर्सिटी, मदन मोहन मालवीय प्राविधिक विवि के छात्रवृत्ति के नोडल अधिकारियों पर भी कार्रवाई के निर्देश दे दिए हैं। गोरखपुर, आगरा, वाराणसी, अलीगढ़, लखनऊ, चित्रकूट, अयोध्या और सहारनपुर के आईटीआई के संयुक्त निदेशकों पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।



इन्हें प्रतिकूल प्रविष्टि

मामले में अलीगढ़ की जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, औरेया की समाज कल्याण अधिकारी इंदिरा सिंह, अयोध्या के रणविजय सिंह, बहराइच के रमाशंकर, बलिया के तत्कालीन समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव, बरेली के सुधांशु शेखर, बिजनौर के जागेश्वर सिंह, गौतमबुद्धनगर के सतीश कुमार, गाजियाबाद के वेद प्रकाश मिश्रा, कन्नौज के सत्य प्रकाश सिंह, प्रतापगढ़ के नागेंद्र मौर्य, रायबरेली की सृष्टि अवस्थी, सीतापुर के हर्ष मवार और वाराणसी के जिला समाज कल्याण अधिकारी गिरीश दुबे को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई है


बरेली में सबसे ज्यादा 40 संस्थानों के 1600 विद्यार्थी प्रभावित

बरेली में सबसे ज्यादा 40 शिक्षण संस्थानों के 1600 पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ नहीं मिला। इसलिए वहां के बाबू प्रमोद जोशी को सस्पेंड करने का निर्णय लिया गया। बाराबंकी के समाज कल्याण बाबू प्रभात सिंह, हापुड़ के दीपक, झांसी के मनोज वर्मा और प्रयागराज के रामचंद्र यादव को कठोर चेतावनी जारी की गई है।


कार्रवाई की जद में आए एक अधिकारी अब आईआरएस

कार्रवाई की जद में आए बलिया के तत्कालीन जिला समाज कल्याण अधिकारी दीपक श्रीवास्तव अब विभाग छोड़ चुके हैं। उनका भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में चयन हो चुका है। उनके खिलाफ कार्रवाई के लिए विधिक राय लेकर संबंधित अधिकारियों को पत्र भेजा जाएगा

Tuesday, September 2, 2025

निरीक्षण में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को लेकर जाना बीईओ को पड़ा भारी, हरदोई की बीईओ निलंबित

निरीक्षण में अन्य विद्यालयों के शिक्षकों को लेकर जाना बीईओ को पड़ा भारी, हरदोई की बीईओ निलंबित 




निरीक्षण में अध्यापकों को साथ ले जाने पर बीईओ को आरोपपत्र, बीएसए ने कोथावां बीईओ से तीन दिन में साक्ष्य सहित मांगा जवाब

जवाब न आने और संतोषजनक न होने पर कार्रवाई प्रस्तावित किए जाने की चेतावनी


हरदोई। निरीक्षण के समय अध्यापकों को साथ ले जाने पर बेसिक शिक्षा विभाग के निदेशक ने नाराजगी जाहिर की। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वीपी सिंह ने कोथावां की बीईओ को आरोप पत्र जारी किया है। तीन दिन में जवाब मांगा है। चेतावनी दी कि जवाब न मिलने और संतोषजनक न होने पर विभागीय कार्रवाई प्रस्तावित कर दी जाएगी।

बीएसए ने बृहस्पतिवार को जारी आरोप पत्र में कहा कि कोथावां की खंड शिक्षा अधिकारी प्रभावती स्कूलों के निरीक्षण में दो अध्यापकों को भी साथ ले जाती हैं। इसका वीडियो भी उपलब्ध है। कोथावां निवासी अतुल कुमार ने अध्यापकों को निरीक्षण में साथ ले जाने की शिकायत भी बेसिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव से दर्ज कराई है। बताया कि वीडियो का अवलोकन किया गया।

 बीईओ प्रभावती अपने साथ कोथावां के उच्च प्राथमिक विद्यालय नयागांव के इंचार्ज प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार और उच्च प्राथमिक विद्यालय छिपुलिया के इंचार्ज प्रधानाध्यापक विवेक कुमार को निरीक्षण और कार्यालय में साथ रखती हैं। दोनों इंचार्ज प्रधानाध्यापक अपने विद्यालय में उपस्थित नहीं होते हैं। वीडियो में इसकी पुष्टि हुई है जिसमें प्राथमिक विद्यालय इकरी के निरीक्षण के समय दोनों अध्यापक बीईओ के साथ दिखाई दे रहे हैं।

बताया कि उच्च प्राथमिक विद्यालय नयागांव में 61 छात्र और छिपुलिया में 75 छात्र पंजीकृत हैं। उन विद्यालयों में न तो शिक्षक और न ही अनुदेशक तैनात हैं। दोनों विद्यालय एकल होने के बाद भी इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को साथ रखना और बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया गया है।



स्कूल छोड़ बीईओ के साथ घूमने वाले दो प्रभारी प्रधानाध्यापक निलंबित, बीएसए ने की कार्रवाई, संडीला बीईओ जांच अधिकारी नामित


हरदोई। कोथावां की खंड शिक्षा अधिकारी के कार्यालय और निरीक्षण में साथ रहने वाले दोनों इंचार्ज प्रधानाध्यापकों को निलंबित कर दिया गया है।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने दोनों को निलंबित करते हुए संडीला ब्लॉक संसाधन केंद्र से संबद्ध किया है। संडीला के खंड शिक्षा अधिकारी को जांच अधिकारी नामित किया गया है।

बीएसए विजय प्रताप सिंह ने बताया कि कोथावां की खंड शिक्षा अधिकारी प्रभावती के साथ निरीक्षण और कार्यालय में इंचार्ज प्रधानाध्यापक के रहने की पुष्टि हुई जिससे एकल शिक्षक विद्यालय होने के कारण उच्च प्राथमिक विद्यालय नयागांव और छिपुलिया बंद रहते थे।

इंचार्ज प्रधानाध्यापकों की गैरहाजिरी से बच्चों के भविष्य के साथ भी खिलवाड़ किया गया। बताया कि नयागांव के इंचार्ज प्रधानाध्यापक मुकेश कुमार और छिपुलिया के इंचार्ज प्रधानाध्यापक विवेक कुमार को निलंबित किया गया है। दोनों को संडीला बीआरसी से संबद्ध करते हुए बीईओ संडीला से कहा गया कि दोनों शिक्षकों को तीन दिन के अंदर आरोप पत्र प्राप्त कराएंगे।


राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे खान एकेडमी के गणित सुधार कार्यक्रम में व्यावहारिक दिक्कतें, समस्याओं को लेकर समाधान की मांग

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में चल रहे खान एकेडमी के गणित सुधार कार्यक्रम में व्यावहारिक दिक्कतें, समस्याओं को लेकर समाधान की मांग

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में विभागीय समिति बनाने की मांग

कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए चलाए जा कार्यक्रम


 लखनऊ : प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए चलाए जा रहे गणित सुधार कार्यक्रम में छात्रों और शिक्षकों को धरातल पर कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। राजकीय शिक्षक संघ ने अपर राज्य परियोजना निदेशक, समग्र शिक्षा (माध्यमिक) को पत्र लिखकर इन समस्याओं के समाधान के लिए विभागीय समिति गठित करने की मांग की है।


संघ शिक्षक का कहना है कि अधिकांश छात्र-छात्राओं के पास अपना मोबाइल फोन नहीं है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाले इन बच्चों के अभिभावक मजदूरी के लिए जाते समय फोन अपने साथ ले जाते हैं। कई अभिभावकों के पास स्मार्टफोन और इंटरनेट की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में छात्र इस कार्यक्रम का लाभ नहीं उठा पा रहे हैं। 


शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुनील भड़ाना का कहना है कि खान अकेडमी का एप छात्रों के लिए जटिल है। बार-बार लागिन आइडी और पासवर्ड डालने की समस्या उन्हें हतोत्साहित करती है। वेबसाइट पर मौजूद सामग्री छात्रों को प्रभावशाली और पाठ्यक्रम स्तर के अनुरूप नहीं लगती। इसी कारण वे उत्साह से इसमें भाग नहीं लेते। 


संघ ने सुझाव दिया है कि इस कार्यक्रम को छात्रों के लिए सरल, रोचक और वैकल्पिक बनाया जाए, ताकि उन पर दबाव न पड़े। संघ ने मांग की है कि ग्रामीण क्षेत्रों के गणित और विज्ञान शिक्षकों एवं प्रधानाचार्यों को शामिल करते हुए प्रदेश स्तर पर एक समिति बनाई जाए, जो जमीनी कठिनाइयों का अध्ययन कर समाधान प्रस्तुत करे। 

परिषदीय स्कूलों के विलय मामले की अगली सुनवाई अब 22 सितंबर को, हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों की यथास्थिति बहाल रखने का दिया था आदेश

परिषदीय स्कूलों के विलय मामले की अगली सुनवाई अब 22 सितंबर को, हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों की यथास्थिति बहाल रखने का दिया था आदेश

02 सितंबर 2025
लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अगली सुनवाई 22 सितंबर को नियत की है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ ने सोमवार को यह आदेश मामले में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध विशेष अपीलों पर दिया हैं। यह जानकारी राज्य सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता शैलेंद्र कुमार सिंह ने दी।

बीती 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने विलय प्रक्रिया में उजागर हुई स्पष्ट अनियमितताओं के मद्देनजर सीतापुर के स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह अंतरिम आदेश देते समय अदालत ने स्कूलों के विलय की सरकार की नीति और इस पर अमल करने की मेरिट पर कुछ नहीं किया है। पहली विशेष अपील सीतापुर के पांच बच्चों ने और दूसरी भी वहीं के 17 बच्चों ने अभिभावकों के जरिये दाखिल की है। इनमें स्कूलों के विलय में एकल पीठ द्वारा 7 जुलाई को दिए गए फैसले को चुनौती देकर रद्द करने का आग्रह किया गया है।

दरअसल यह फैसला सीतापुर के प्राथमिक व उच्च प्रथामिक स्कूलों में पढ़ने वाले 51 बच्चों समेत एक अन्य याचिका पर दिया था। जिसमें बेसिक शिक्षा विभाग के 16 जून के उस आदेश को चुनौती देते हुए रद्द करने का आग्रह किया था, जिसके तहत प्राथमिक विद्यालयों के बच्चों की संख्या के आधार पर उच्च प्राथमिक या कंपोजिट स्कूलों में विलय करने का प्रावधान किया गया है।




हाईकोर्ट में बोली यूपी सरकार– एक किलोमीटर से अधिक दूरी के स्कूलों का नहीं होगा विलय, सीतापुर में स्कूलों की पेयरिंग पर यथास्थिति अगली सुनवाई 01 सितंबर तक बरकरार रखने के आदेश

22 अगस्त 2025
लखनऊ। प्रदेश के सरकारी स्कूलों के मर्जर (विलय) को लेकर चल रही कवायद पर आज लखनऊ हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। अदालत ने साफ कहा कि राज्य सरकार को अब तक हुए सभी आदेशों और निर्णयों को रिकॉर्ड पर लाना होगा, जिससे अदालत पूरे मामले की गहराई से पड़ताल कर सके। कोर्ट ने साथ ही यह भी निर्देश दिया कि सीतापुर ज़िले के स्कूलों के संबंध में वर्तमान स्थिति को यथावत बनाए रखा जा, यानी वहां फिलहाल कोई नया बदलाव लागू नहीं होगा। 


यूपी में हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में गुरूवार को स्कूलों की पेयरिंग के मामले में सुनवायी हुी। याची पक्ष की ओर से उपस्थित अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने बताया कि सीतापुर में स्कूलों की पेयरिंग पर यथास्थिति अगली सुनवाई तक बरकरार रखने के आदेश न्यायालय ने दिए हैं।

वहीं राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को अवगत कराया गया है कि एक किलोमीटर से कम दूरी वाले तथा जिन स्कूलों में 50 से अधिक बच्चे हैं, उनकी पेयरिंग नहीं की जाएगी। इस पर मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सरकार को इस सम्बंध में पारित आदेश को रिकॉर्ड पर लाने का आदेश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितम्बर को होगी।


सीतापुर में प्राइमरी स्कूलों के विलय पर रोक

यूपी में अभिभावकों और बच्चों को बड़ी राहत देते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने सीतापुर जनपद में प्राथमिक स्कूलों के विलय पर रोक लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया था। 

न्यायालय ने कहा कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से हलफनामे के साथ दाखिल रिकॉर्ड में स्पष्ट तौर पर कुछ विसंगतियां पाई गई हैं। लिहाजा अगली सुनवाई तक सीतापुर जनपद के संबंध में चल रही कार्रवाई पर यथास्थिति बनाए रखी जाए। न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 21 अगस्त की तिथि तय करते हुए अपील करने वालों को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था।



यह आदेश मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली व न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ ने सीतापुर के स्कूली बच्चों की ओर से उनके अभिभावकों द्वारा दाखिल दो विशेष अपीलों पर एक साथ सुनवाई करते हुए पारित किया था। अपीलों में एकल पीठ के 7 जुलाई के उस आदेश को चुनौती दी गई है जिसमें स्कूलों का विलय करने के विरुद्ध दाखिल याचिकाओं को खारिज कर दिया गया था





हाईकोर्ट में परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में सुनवाई आज, अनियमितताओं के मद्देनजर हाईकोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों की यथास्थिति बहाल रखने का दिया था आदेश


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय स्कूलों के विलय मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में 21 अगस्त को सुनवाई होगी। मुख्य न्यायमूर्ति की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष विशेष अपीलें सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को सूचीबद्ध हैं।

बीती 24 जुलाई को हाईकोर्ट ने विलय प्रक्रिया में उजागर हुई स्पष्ट अनियमितताओं के मद्देनजर सीतापुर के स्कूलों के विलय पर यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि यह अंतरिम आदेश देते समय अदालत ने स्कूलों के विलय या मर्जर की सरकार की नीति और इसपर अमल करने की मेरिट पर कुछ नहीं किया है।


मुख्य न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की खंडपीठ के समक्ष 24 जुलाई को विशेष अपीलों पर राज्य सरकार व  बेसिक शिक्षा विभाग के अधिवक्ताओं ने बहस की थी। अदालत के सामने सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश किए गए विलय के कुछ दस्तावेजों अनियमितताएं सामने आईं थीं।

राज्य सरकार की ओर से इनका स्पष्टीकरण देने का समय मांगा गया था। जिनके मद्देनजर कोर्ट ने सीतापुर जिले में स्कूलों की विलय/पेयरिंग प्रक्रिया पर 21 अगस्त तक मौजूदा स्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया था। अदालत ने अपीलकर्ताओं को राज्य सरकार द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब पेश करने को अगली सुनवाई तक का समय दिया था। 

Monday, September 1, 2025

केंद्रीय विद्यालयों में सीटीईटी अनिवार्य, एलटी भर्ती में छूट, प्रतियोगी पहुंचे हाईकोर्ट, राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी से छूट पर विवाद बढ़ा

केंद्रीय विद्यालयों में सीटीईटी अनिवार्य, एलटी भर्ती में छूट, प्रतियोगी पहुंचे हाईकोर्ट, राजकीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक भर्ती में टीईटी से छूट पर विवाद बढ़ा


कोर्ट ने पूछा, भर्ती नौ-दस के लिए या छह से आठ भी पढ़वाएंगे 


प्रयागराज । राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (एनसीटीई) की गाइडलाइन के अनुसार सहायक अध्यापक भर्ती के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) अनिवार्य होने के बावजूद उत्तर प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में एलटी ग्रेड (सहायक अध्यापक) भर्ती में टीईटी से छूट देने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

इस मामले में अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों से सवाल किया है कि एलटी ग्रेड शिक्षकों से केवल कक्षा नी और दस के बच्चों को पढ़वाएंगे या फिर ये शिक्षक कक्षा छह से आठ तक के विद्यार्थियों को भी पढ़ाएंगे।   


एनसीटीई की गाइडलाइन जारी होने के बाद केंद्रीय विद्यालय संगठन ने टीजीटी (सहायक अध्यापक) भर्ती के लिए उच्च प्राथमिक स्तर की केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (सीटीईटी) को अनिवार्य कर दिया था क्योंकि टीजीटी शिक्षक ही कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को भी पढ़ाते हैं। हालांकि यूपी के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। 2018 में जब उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने एलटी ग्रेड भर्ती जारी की थी तो उस समय भी टीईटी अनिवार्य किए जाने का मामला उठा था लेकिन तब अफसरों ने हाईकोर्ट में यह कहकर मामला रफा-दफा कर दिया था कि एलटी ग्रेड शिक्षकों से कक्षा छह से आठ तक के बच्चों को नहीं पढ़वाया जाएगा।

जबकि हकीकत इसके उलट है। राजकीय विद्यालयों में छह से 12 तक की कक्षाएं संचालित होती हैं। प्रवक्ता कक्षा 11 और 12 के बच्चों को पढ़ाते हैं और एलटी ग्रेड शिक्षक कक्षा छह से दस तक की कक्षाएं लेते हैं। यही कारण है कि हाईकोर्ट में याचिका करने वाले अभ्यर्थियों ने यह मुद्दा उठाया है कि लोक सेवा आयोग की ओर से 28 जुलाई को जारी विज्ञापन में यह स्पष्ट नहीं है कि भर्ती केवल कक्षा नौ-दस के शिक्षकों के लिए है या फिर कक्षा 6-8 के लिए भी है। हाईकोर्ट ने 26 अगस्त को प्रमुख सचिव (माध्यमिक शिक्षा) को निर्देशित किया है कि वे इस विषय पर दो हफ्तों में काउंटर एफिडेविट दाखिल करें। इस मामले की अगली सुनवाई 11 सितम्बर को होगी

मांग : शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों को भी मिले पुरानी पेंशन, 38 जिलों में अभी भी नहीं जारी हुआ आदेश

मांग : शिक्षामित्र से शिक्षक बनने वालों को भी मिले पुरानी पेंशन, 38 जिलों में अभी भी नहीं जारी हुआ आदेश


लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों में 28 मार्च 2005 से पूर्व जिन शिक्षामित्रों की नियुक्ति हुई थी, जो शासन के विभिन्न शासनादेश का अनुपालन करते हुए समय समय पर हुई विभिन्न शिक्षक भर्तियों से शिक्षक बन गए है। उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ ने इन सभी की पूर्व सेवा (शिक्षामित्र) को जोड़ते हुए पुरानी पेंशन देने की मांग की है।


यह मांग रविवार को संघ की लखनऊ में हुई प्रांतीय कोर कमेटी की बैठक में उठाई गई। संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव ने कहा की प्रदेश के 37 से अधिक जिला बेसिक शिक्षा अधिकारियों द्वारा आवेदन के लिए आदेश तो जारी किए गए, लेकिन शासन से स्पष्ट आदेश नहीं होने से शेष 38 बीएसए आदेश नहीं जारी कर रहे हैं।

उन्होंने कहा की प्रदेश के 1.48 लाख शिक्षामित्रों को पुनः नई नियमावली बनाकर शिक्षक का स्थाई दर्जा दिया जाए। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष एकसाद अली, धर्मेंद्र यादव, रश्मिकान्त द्विवेदी, सचिव फारुख अहमद, श्याम शंकर यादव, आदि उपस्थित थे।