रायबरेली । अपनी मनमानी और चारित्रिक गतिविधियों के लिए समूचे प्रदेश में चर्चित रह चुके जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी गुरूशरण निरंजन ने शासनादेशों की खुलेआम धज्जियां उड़ा दी। बीएसए ने स्पष्ट शासनादेश होने के बावजूद भी कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालयों में कार्यरत दो चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों का तबादला कर दिया। यही नहीं बीएसए ने यह भी बताया कि डीएम के मौखिक निर्देश के कारण उन्हें यह नियम विरुद्ध कार्य करना पड़ा। फिलहाल बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात यह अधिकारी सरकार की किरकिरी कराने पर उतारू है।गौरतलब है कि राज्य परियोजना निदेशक सर्व शिक्षा अभियान ने चार नंबर 2015 को कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किये हैं। इन निर्देशों के बिन्दु संख्या चार के प्रस्तर 4.5 में कहा गया है कि ‘शासन के पत्रांक कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय/2-3/1961/2013-14 दिनांक: 29-07-2013 के बिन्दु संख्या आठ के प्रस्तर सात में कस्तूरबा गांधी विद्यालय में अपरिहार्य एवं अपवादजनक स्थिति में जिलाधिकारी की अनुमति के पश्चात स्थानान्तरण किये जाने के निर्देश प्रदान किये गये थे। उपर्युक्त व्यवस्था का दुरुपयोग परिलक्षित हो रहा है अत: सामान्यत: विद्यालयों में कार्यरत कार्मिकों का स्थानांतरण किसी भी स्थिति में नहीं किया जायेगा। उक्त प्रस्तर का अक्षरश: न पालन होने की स्थिति में स्थानान्तरण/समायोजन किये जाने पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी।’
इसके बावजूद केजीबीवी राही में कार्यरत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी उपेन्द्र बहादुर का स्थानान्तरण केजीबीवी डलमऊ और केजीबीवी डलमऊ के मनीष पाण्डेय का स्थानान्तरण केजीबीवी राही में बीएसए ने कर दिया है। विभागीय सूत्रों की मानें तो बीएसए ने जिलाधिकारी से कोई अनुमोदन नहीं लिया। हालांकि मौखिक रूप से डीएम ने ही स्थानान्तरण के लिए कहा था। शासनादेश के विपरीत स्थानान्तरण कैसे किया जा सकता है? पूरे मामले में सबसे हास्यास्पद जिलाधिकारी अनुज कुमार झा की वह टिप्पणी है जो उन्होंने शासनादेश को लेकर की है। श्री झा जैसे आईएएस अधिकारी से उस तरह की टिप्पणी की उम्मीद नहीं थी लेकिन हो सकता है कि उस टिप्पणी के पीछे वहां की ताकत हो जहां से स्थानान्तरित होकर वह आये हैं।
मैंने स्थानांतरण डीएम साहब के कहने पर किया है। इसमें सपा के एक एमएलसी का लेटरपैड लगा है। मुझे शासनादेश की कोई जानकारी नहीं है।- जीएस निरंजन, बीएसए रायबरेली।
शासनादेश में स्पष्ट है कि कस्तूरबा में कोई भी स्थानान्तरण या समायोजन नहीं होगा। कोई भी स्थानान्तरण नहीं कर सकता। बीएसए ने जो किया है वह जांच का विषय है। जांच कर कार्रवाई की जायेगी। । - महेन्द्र सिंह राणा, एडी बेसिक
रायबरेली। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी जीएस निरंजन ने कार्यभार ग्रहण करने के साथ ही पूरी बेसिक शिक्षा को विवादों के घेरे में खड़ा कर दिया। कभी सहायक वित्त एवं लेखाधिकारी को कमरे से हटाकर वार्डेनों की मीटिंग से उन्होंने चर्चा बटोरी तो कभी अपने बेतुके निर्देशों से। उत्तर प्रदेश में जिस जीएस निरंजन को सबसे विवादित और बिगड़ैल छवि का माना जाता है उसी को सरकार के आखिरी साल में बीएसए जैसे महत्वपूर्ण चार्ज दिया जाना अपने आप में चर्चा का विषय है। जबकि सपा सरकार के अब तक के कार्यकाल में इनको देवरिया और बहराइच के कृत्यों के कारण कोई चार्ज नहीं दिया गया था।
आश्चर्यजनक है इस संबंध में डीएम अनुज कुमार का बयान
स्थानान्तरण मेरी जानकारी में हुये हैं। डीएम नियुक्तिकर्तां है तो वह स्थानान्तरण भी कर सकता है। सब कुछ शासनादेश ही नहीं होता। - अनुज कुमार झा,जिलाधिकारी।
No comments:
Write comments