छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य का ख्याल रखेंगे शिक्षण संस्थान, यूजीसी ने बनाई नीति, संस्थानों में होगा मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र
इन केंद्रों में तैनात होंगे प्रोफेशनल विशेषज्ञ सौ छात्रों पर एक सहायक छात्र की तैनाती
नई दिल्ली: उच्च शिक्षण संस्थान अब छात्रों की पढ़ाई के साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य को भी परखेंगे। किसी छात्र की मानसिक स्थिति ठीक नहीं दिखी तो तुरंत इसे संस्थान में स्थापित मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र में भेंजेंगे, जहां पेशेवर विशेषज्ञ जांच व उपचार करेंगे। इसके लिए देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र स्थापित करने के लिए कहा गया है।
संस्थानों में छात्रों के आत्महत्या की बढ़ती घटनाओं व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में वृद्धि को देखते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर एकीकृत नीति तैयार की है। पिछले दिनों यूजीसी बोर्ड ने इसे मंजूरी दे दी। नीति के तहत उच्च शिक्षण संस्थानों को मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र बनाना होगा। इनमें प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों को तैनात करने होंगे। प्रत्येक पांच सौ छात्रों पर एक वरिष्ठ शिक्षक को बतौर
मॅटर एवं प्रत्येक सौ छात्रों पर एक सहायक छात्र की तैनाती करने को कहा है। यूजीसी ने संस्थानों को एक हेल्पलाइन नंबर भी स्थापित करने को कहा है। जहां छात्रों को चौबीसो घंटे मदद मिल सके। यूजीसी ने आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए संस्थानों को कार्ययोजना भी बनाने को कहा है। जिसमें अवसाद में दिखने पर या उससे ग्रसित होने की सूचना पर तुरंत प्रभावी कदम उठाए जा सकें। संस्थान के कर्मचारियों, शिक्षकों और छात्रों को प्रशिक्षित करने के भी सुझाव दिए हैं। यूजीसी ने संस्थानों को नीति पर तुरंत अमल करने एवं उससे जुड़े सुझाव देने को कहा है।
इसलिए कदम उठाने की पड़ी आवश्यकता
देश में 10.6% लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्या से पीड़ित
18 से 29 वर्ष के 7.3% युवा गंभीर समस्या से घिरे
देश में आत्महत्याओं में 7.6 प्रतिशत मामले छात्रों से जुड़े
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