प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों का मामला
एडेड विद्यालयों के 62 हजार माध्यमिक शिक्षकों की बहाल होगी सेवा सुरक्षा, शासन के विशेष सचिव ने आयोग के सचिव से मांगा संशोधन का प्रस्ताव
प्रयागराज। प्रदेश के 4512 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के तकरीबन 62 हजार प्रधानाचार्यों और शिक्षकों की सेवा सुरक्षा बहाल होगी। विशेष सचिव उच्च शिक्षा गिरिजेश कुमार त्यागी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के सचिव मनोज कुमार को छह फरवरी को पत्र लिखकर माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा-18 व 21 का समावेश चयन आयोग अधिनियम 2023 में करने के संबंध में प्रस्ताव मांगा है।
एडेड कॉलेजों के प्रधानाचार्यों और शिक्षकों का चयन पहले उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड से होता था, लेकिन नियोक्ता प्रबंधक होते हैं। चयन बोर्ड अधिनियम-1982 की धारा-21 में प्रधानाचार्य या शिक्षक पर कोई कार्रवाई करने या दंड देने से पहले प्रबंधक चयन बोर्ड से अनुमोदन लेने का प्रावधान था। चयन बोर्ड का विलय कर शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया गया है। 21 अगस्त 2023 को विधानसभा से पारित इस आयोग के विधेयक में इस प्रावधान को शामिल नहीं किया गया। यह व्यवस्था नहीं होने से पिछले ढाई साल में प्रदेशभर में प्रबंधक के मनमाने तरीके से प्रधानाचार्यों और शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई करने की शिकायतें बढ़ गईं।
माध्यमिक शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश अध्यक्ष एवं पूर्व एमएलसी सुरेश कुमार त्रिपाठी की अगुवाई में एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी और महामंत्री नरेन्द्र कुमार वर्मा ने 20 जनवरी को अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेनशर्मा से लखनऊ में मुलाकात कर इस प्रावधान को जोड़ने की मांग की थी। 28 जनवरी को उच्च शिक्षा विभाग के अफसरों के साथ हुई बैठक में उपमुख्यमंत्री/नेता सदन, विधान परिषद केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए थे कि उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 में सेवा-सुरक्षा संबंधी इण्टरमीडिएट शिक्षा अधिनियम 1921 की धारा 18-21 जोड़ने पर विचार किया जाए। इस पर विशेष सचिव नेचयन आयोग अधिनियम, 2023 में माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा-18 व 21 का समावेश करने के लिए विस्तृत एवं सुविचारित आख्या उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।
माध्यमिक शिक्षकों की सेवा और सुरक्षा की ओर कदम, अधिनियम में बदलाव की तैयारी
सेवा-सुरक्षा से संबंधित धाराएं जोड़ने पर मंथन, विशेष सचिव उच्च शिक्षा ने चयन आयोग से मांगी रिपोर्ट
लखनऊः प्रदेश के सहायताप्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों की सेवा-सुरक्षा से जुड़ी मांग पर अब सरकार ने गंभीर पहल शुरू कर दी है। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग अधिनियम, 2023 में अहम संशोधन पर मंथन चल रहा है, जिससे शिक्षकों की नौकरी को अधिक सुरक्षित और स्थिर बनाया जा सके। सरकार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड अधिनियम, 1982 की धारा 18 और 21 को नए अधिनियम में शामिल करने और धारा 11 (6) को हटाने पर विचार कर रही है। इसी क्रम में विशेष सचिव, उच्च शिक्षा विभाग ने चयन आयोग से पूरे मामले पर विस्तृत, तथ्यात्मक और नियमानुसार रिपोर्ट मांगी है।
शिक्षकों की भर्ती के लिए वर्ष 2023 में उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग गठन करते हुए माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड भंग कर दिया गया। इसमें माध्यमिक शिक्षकों के सेवा सुरक्षा और कार्यवाहक प्रधानाध्यापकों के वेतनमान से संबंधित अधिनियम की धारा 18 व 21 को शामिल नहीं किया गया। इसकी वजह से माध्यमिक शिक्षकों की सेवा सुरक्षा को लेकर समस्या आ रही थी। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी ने 20 जनवरी को इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा को पत्र लिखकर इसकी मांग रखी थी।
इसके बाद 28 जनवरी को उच्च शिक्षा विभाग के साथ हुई बैठक में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने निर्देश दिए कि इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921 की धारा 18 से 21 को नए चयन आयोग अधिनियम में जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जाए। इसी निर्देश के अनुपालन में विशेष सचिव उच्च शिक्षा गिरिजेश कुमार त्यागी ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा सेवा चयन आयोग के सचिव को पत्र लिखा है कि शिक्षक संघ की मांगों और उप मुख्यमंत्री के आदेशों के आलोक में पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट उपलब्ध कराई जाए, ताकि आगे आवश्यक निर्णय लिया जा सके।
प्रस्तावित बदलावों से न सिर्फ सेवा-सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि कार्यवाहक संस्था प्रधानों को पद के अनुरूप वेतन मिलने का रास्ता भी साफ होगा। नियमों में संशोधन होने से मनमाने निलंबन या सेवा समाप्ति पर प्रभावी कानूनी रोक लगेगी। यदि ये बदलाव लागू होते हैं, तो इससे प्रदेश के हजारों माध्यमिक शिक्षकों को सीधा लाभ मिलेगा।
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