इस्तीफा कर्मचारी का हक, कूलिंग पीरियड सुरक्षा कवच, हाईकोर्ट ने शिक्षक की वेतन सहित बहाली का दिया आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आननफानन इस्तीफा देना कदाचार नहीं है। इसे कर्मचारी के विरुद्ध हथियार के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। स्वीकार होने के पहले कर्मचारी इस्तीफा वापस ले सकता है। यही कारण है कि सेवा नियमावली में कूलिंग पीरियड का प्रावधान है, ताकि कर्मचारी अपना मन बदल सके। यह महज औपचारिकता नहीं, कर्मचारी का सुरक्षा कवच है।
इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने वाराणसी के जामिया अरबिया मतलौल उलूम प्रबंध समिति की स्पेशल अपील खारिज कर दी। साथ ही शिक्षक को 15 दिन में बकाये के ब्याज सहित भुगतान कर सेवा में बहाल करने का आदेश दिया है।
मदरसा शिक्षक मोहम्मद उस्मान गनी ने पारिवारिक कारणों से इस्तीफा दिया था पर बाद में आरोप लगाया कि उनसे अनुशासनात्मक कार्रवाई का डर दिखाकर जबरन इस्तीफा लिया गया था। इस दलील पर हाईकोर्ट की एकल पीठ ने याचिका स्वीकार कर ली थी।
इस आदेश के खिलाफ प्रबंधन ने स्पेशल अपील दाखिल की। दलील दी कि शिक्षक का इस्तीफा मंजूर कर लिया गया था। ऐसे में अब उनकी बहाली अनुचित होगी। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया। कहा कि यह प्रबंध समिति का अड़ियल रवैया है। एकल पीठ ने मामले में सहानुभूतिपूर्वक विचार करने के लिए कहा था, लेकिन प्रबंधन ने बहाली के बजाय कर्मचारी को कानूनी लड़ाई में उलझाए रखने का रास्ता चुना। यह कूलिंग पीरियड के प्रावधान का अपमान है।
जब तथ्य और हालत स्पष्ट हो तो मामले की बार-बार प्रबंधन के पास पुनर्विचार के लिए भेजना न्याय की प्रकिया में देरी और कर्मचारी के उत्पीड़न का कारण बनता है। -इलाहाबाद हाईकोर्ट
क्या है कूलिंग पीरियड का नियम
यूपी गैर-सरकारी अरबी और फारसी मदरसा मान्यता, प्रशासन और सेवा नियमावली 2016 के विनियम 15 (2) के मुताबिक इस्तीफे के बाद तीन महीने का समय और सुनवाई का अवसर इसलिए दिया जाता है, ताकि कर्मचारी ठंडे दिमाग से अपने इस्तीफे पर विचार कर सके। यदि इस दौरान कर्मचारी कहता है कि उसने दबाव में इस्तीफा दिया था तो उसका कानूनी मूल्य शून्य हो जाता है। प्रबंधन जबरन इस्तीफा स्वीकार नहीं कर सकता।
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