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Sunday, October 25, 2026

अब 9वीं-12वीं तक के छात्र पढ़ेंगे AI, एनसीईआरटी ने तैयार किया नया मॉड्यूल

अब 9वीं-12वीं तक के छात्र पढ़ेंगे AI, एनसीईआरटी ने तैयार किया नया मॉड्यूल


नई दिल्ली। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने डिजिटल क्रांति के दौर में स्कूली बच्चों को तैयार करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। एनसीईआरटी ने 9वीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल (सीटी) थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का आसान मॉड्यूल तैयार किया है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के सहयोग से 109 पेज के पांच भागों में तैयार मॉड्यूल की खासियत यह है कि इसकी पढ़ाई के लिए छात्रों को पहले से कोडिंग या तकनीकी विषय की जानकारी होना जरूरी नहीं है।

एनसीईआरटी के निदेशक दिनेश सकलानी ने बताया, एआई के बारे में छात्रों को जानना बेहद जरूरी है। इसी मकसद से इस मॉड्यूल को शामिल किया जा रहा है। इसमें एआई सिर्फ तकनीकी विषय या कोडिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्रों को अपने आसपास की घटनाओं को देखने, पैटर्न पहचानने, सवाल पूछने, गलतियों की जांच करने और अपने विवेक से निर्णय लेना सिखाने की भी कोशिश की गई है।

सबसे पहले छात्रों को बताया जाएगा कि एआई हमारे जीवन में आ चुका है, इसमें मशीन कैसे उदाहरण के साथ समझाती हैं, एआई से कैसे निजी जिंदगी में खतरा है, अपनी निजी जानकारियों, जिम्मेदारी और अधिकार, आम जिंदगी में एआई टूल से काम करना आदि के बारे में उदाहरण सहित बताया गया है।


बताएंगे... एआई पर भरोसा कब करें:
नए मॉड्यूल का मकसद छात्रों को केवल एआई टूल का इस्तेमाल करना सिखाना नहीं, बल्कि यह समझाना भी है कि ये तकनीकें कैसे काम करती हैं। यह भी सिखाया जाएगा कि एआई जवाबों पर कब भरोसा करना चाहिए और इनका सुरक्षित व जिम्मेदार इस्तेमाल कैसे किया जाए।

बढ़ेगी सीखने की क्षमता:
एआई कोर्स के छात्रों को सिखाया जाएगा कि रोजमर्रा के जीवन की बड़ी समस्याओं को वैज्ञानिक तरीके से कैसे हल किया जाता है। इससे बच्चों के दिमाग के विकास के साथ-साथ उनके सोचने-समझने व कुछ नया करने की क्षमता को बल मिलेगा।

जहां डिजिटल पहुंच नहीं, वहां के छात्रों को भी मिलेगा फायदा:
इस मॉड्यूल को इस तरह तैयार किया गया है कि चाहे हाई-टेक प्राइवेट स्कूल हो या दूरदराज का ग्रामीण सरकारी स्कूल जहां कंप्यूटर और डिजिटल साधन उपलब्ध नहीं हैं, दोनों स्थानों के बच्चों को इसका लाभमिल सके। इसका उद्देश्य रटने के बजाय खेल-खेल में सीखने पर है। इसमें बच्चे आपस में परिचर्चा, मजेदार प्रयोगों, एक्टिविटी और खुद सोच-विचार करके एआई के मूल नियमों को आसानी से समझ सकेंगे।

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