आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही युवा पीढ़ी - हाईकोर्ट
प्रवेश के समय सही जन्मतिथि दर्ज करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जल्द से जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी करे - हाईकोर्ट
बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में हुए पेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट स्कूलों में छात्रों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि आयु प्रमाणपत्रों में विसंगतियों के कारण युवा पीढ़ी पॉक्सो एक्ट के जाल में फंस रही है। लिहाजा, स्कूलों में प्रवेश के समय सही जन्मतिथि दर्ज करने के लिए बेसिक शिक्षा विभाग जल्द से जल्द विस्तृत दिशा निर्देश जारी करे।
सुनवाई के दौरान बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थ सारथी सेन शर्मा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट को प्रस्तावित गाइडलाइन की जानकारी दी।
प्रवेश के समय चार दस्तावेजों में से एक होगा जरूरी
अपर मुख्य सचिव ने कोर्ट को बताया कि 17 सितंबर व 21 अक्तूबर को हुई बैठकों में स्कूलों में बच्चों की जन्मतिथि दर्ज करने की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने के लिए गाइडलाइन का प्रारूप तैयार किया गया। इसमें जन्म व मृत्यु पंजीकरण से संबंधित प्रमाणपत्र उपलब्ध नहीं होने पर उत्तर प्रदेश निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार नियमावली, 2011 के नियम-9 के अनुसार निर्धारित चार दस्तावेजों में से किसी एक को आयु प्रमाण के रूप में स्वीकार करने का प्रस्ताव है।
इनमें अस्पताल या सहायक नर्स एवं मिडवाइफ के अभिलेख, आंगनबाड़ी का रिकॉर्ड, जन्म एवं मृत्यु संबंधी ग्राम पंजीयन व माता-पिता या अभिभावक की ओर से शपथपत्र के माध्यम से उम्र की घोषणा शामिल है। स्कूल में प्रवेश के समय छात्र की जन्मतिथि के साथ यह भी दर्ज किया जाएगा कि चार निर्धारित विकल्पों में से कौन-सा दस्तावेज प्रस्तुत किया गया है। संबंधित कॉलम के सामने कक्षा अध्यापक के हस्ताक्षर होंगे। यह व्यवस्था कक्षा एक के साथ अन्य कक्षाओं में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों पर भी लागू करने का प्रस्ताव है।
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