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Friday, May 23, 2025

RTI : प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों को ही 27 दिन का उपार्जित अवकाश, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों को नहीं मिलेगा उपार्जित अवकाश

RTI : प्रवक्ता और सहायक अध्यापकों को ही 27 दिन का उपार्जित अवकाश, प्रधानाचार्य और प्रधानाध्यापकों को नहीं मिलेगा उपार्जित अवकाश 



प्रयागराज । राजकीय इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य और राजकीय हाईस्कूल के प्रधानाध्यापक यदि विभागीय आदेशों का पालन करते हुए ग्रीष्मकालीन अवकाश में काम करते हैं तो उन्हें उपार्जित अवकाश नहीं मिलेगा। प्रवक्ता और सहायक अध्यापक (एलटी ग्रेड) को कुल 27 दिन का उपार्जित अवकाश देय है।


आईटीआई रोड अलीगढ़ के रविन्द्र कुमार पाल की ओर से 17 जुलाई 2023 को आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में शिक्षा निदेशालय ने उपार्जित अवकाश को लेकर तस्वीर साफ की है। 


शिक्षा निदेशक की ओर से उप शिक्षा निदेशक (सेवाएं-1) ने तकरीबन पौने दो साल बाद 19 मई 2025 को आरटीआई का जवाब दिया है। इसमें उपार्जित अवकाश जोड़ने का फार्मूला भी दिया गया है। 


उदाहरण के तौर पर यदि कोई प्रवक्ता या सहायक अध्यापक ग्रीष्मकालीन अवकाश में 21 दिन ड्यूटी करते हैं तो उन्हें 13 दिन का उपार्जित अवकाश मिलेगा। इसी प्रकार 15 दिन ड्यूटी करने पर नौ और दस दिन ड्यूटी पर छह दिन उपार्जित अवकाश मिलेगा। 


दरअसल, राजकीय माध्यमिक स्कूलों में समर कैंप के आदेश के बाद से ही शिक्षकों में उपार्जित अवकाश चर्चा में है। ऐसे समय में शिक्षा निदेशालय की ओर से आरटीआई में दिया गया जवाब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।


शिक्षकों की योग्यता तय होने तक मदरसों में नई भर्ती नहीं, सुप्रीम कोर्ट से कामिल व फाजिल की डिग्री असांविधानिक होने पर शासन ने लगाई रोक

शिक्षकों की योग्यता तय होने तक मदरसों में नई भर्ती नहीं, सुप्रीम कोर्ट से कामिल व फाजिल की डिग्री असांविधानिक होने पर शासन ने लगाई रोक


लखनऊ। मदरसों में शिक्षकों की अब नए सिरे से योग्यता तय की जाएगी। योग्यता तय होने तक मदरसों में शिक्षकों की नई नियुक्ति नहीं हो सकेगी। शासन ने शिक्षकों की नई भर्ती पर रोक लगा दी है।


उप्र. मदरसा शिक्षा परिषद से मान्यता प्राप्त प्रदेश में तहतानिया (कक्षा 1 से 5), फौकानिया (कक्षा 5 से 8) और आलिया (हाई स्कूल या इससे ऊपर) के करीब 16460 मदरसे हैं। इनमें सरकार से आर्थिक सहायता प्राप्त 560 मदरसे हैं। इन मदरसों में मुंशी-मौलवी (हाईस्कूल), आलिम (इंटर) की शिक्षा दी जा रही है। 


मदरसा बोर्ड की कामिल और फाजिल की डिग्री की यूजीसी से मान्यता न होने से सुप्रीम कोर्ट ने इन डिग्रियों को असांविधानिक घोषित कर दिया था। ऐसे में मदरसा शिक्षकों की योग्यता का नए सिरे से निर्धारण होना है। शिक्षकों की योग्यता का निर्धारण विषय व कक्षावार वर्गीकरण के आधार पर होगा। इसलिए शासन ने नई नियुक्ति पर रोक लगाई है। 


कार्यरत शिक्षकों को करेंगे प्रशिक्षित

अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक अंकित कुमार अग्रवाल ने बताया कि मदरसों में कार्यरत शिक्षक नए आदेश से प्रभावित नही होंगे। इन शिक्षकों का तहतानिया और फौकानिया में उपयोग किया जाएगा। कार्यरत शिक्षकों की विषयवार योग्यता को चिह्नित कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाएगा। उन्हें आधुनिक विषयों से जोड़ने के लिए ब्रिज कोर्स कराया जाएगा।


नई शिक्षा नीति के मुताबिक तय होगा पाठ्यक्रम

शिक्षकों की योग्यता के निर्धारण और पाठ्यक्रम तय करने के लिए अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक की अध्यक्षता में शासन स्तर पर कमेटी बनेगी। अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक ने बताया कि कमेटी योग्यता निर्धारित करने के साथ ही नई शिक्षा नीति के आधार पर पाठ्यक्रम के लिए अनिवार्य आधुनिक विषय तय करेगी।

Thursday, May 22, 2025

स्क्रूटनी के लिए यूपी बोर्ड को मिले 31194 आवेदन


यूपी बोर्ड स्क्रूटनी : 31 हजार से अधिक आवेदन मिले, हाईस्कूल के 5,495 व इंटर के 25,699 विद्यार्थियों ने किए आवेदन

सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में सन्निरीक्षा शुरु 15 जुलाई तक परिणाम

22 मई 2025
प्रयागराज। यूपी बोर्ड को स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) के लिए कुल 31,194 आवेदन मिले हैं। परीक्षा परिणाम से असंतुष्ट हाईस्कूल के 5,495 व इंटरमीडिएट के 25,699 परीक्षार्थियों ने आवेदन किए हैं। यूपी बोर्ड ने सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में स्क्रूटनी की प्रक्रिया शुरू करा दी है। 15 जुलाई तक परिणाम भी घोषित कर दिए जाएंगे।

स्क्रूटनी के लिए सर्वाधिक 12,317 आवेदन यूपी बोर्ड के प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय को मिले हैं। इनमें हाईस्कूल के 2,316 व इंटरमीडिएट के 10,001 अभ्यर्थियों के आवेदन शामिल हैं। वहीं, आवेदनों की संख्या के मामले में दूसरे नंबर पर वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय है, जहां हाईस्कूल के 1.200 व इंटरमीडिएट के 6,133 यानी कुल 7,333 अभ्यर्थियों ने आवेदन किए हैं।

वहीं, मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय को मिले कुल 5,297 आवेदनों में से हाईस्कूल के 845 व इंटरमीडिएट के 4,452, गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय को मिले 3,529 में से हाईस्कूल के 583 व इंटरमीडिएट के 2,946 और बरेली क्षेत्रीय कार्यालय को मिले 2,718 आवेदनों में से हाईस्कूल के 551 व इंटरमीडिएट के 2,167 परीक्षार्थियों के आवेदन शामिल हैं।

यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने स्पष्ट किया है कि स्क्रूटनी का तात्पर्य उत्तर पुस्तिकाओं का पुनर्मूल्यांकन नहीं है। सन्निरीक्षा कार्य में परीक्षार्थियों की उत्तर पुस्तिकाओं में यह देखा जाएगा कि अलग-अलग प्रश्नों में दिए गए अंकों का योग करने, उन्हें फॉरवर्ड करने या किसी प्रश्न अथवा उसके भाग पर अंक देने से छूट जाने की कोई त्रुटि तो नहीं हुई है।

यूपी बोर्ड स्क्रूटनी के दौरान संदिग्ध पाई जाने वाली उत्तर पुस्तिकाओं की फोरेंसिक जांच कराएगा। सन्निरिक्षित उत्तर पुस्तिकाओं में पूर्व में दिए गए अंकों में ओवर राइटिंग, स्याही में भिन्नता की स्थिति या अमूल्यांकित प्रश्नोत्तर की आख्या अंकित करते हुए यदि अंकों में वृद्धि बताई जाती है तो विषय विशेषज्ञों से गहन जांच कराई जाएगी और प्रकरण संदिग्ध होने की स्थिति में उसकी फोरेंसिक जांच भी होगी।



स्क्रूटनी के लिए यूपी बोर्ड को मिले 31194 आवेदन

22 मई 2025
प्रयागराज । यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के परिणाम से असंतुष्ट 31194 छात्र-छात्राओं ने स्क्रूटनी (सन्निरीक्षा) के लिए ऑनलाइन आवेदन किया है। बोर्ड की वेबसाइट www.upmsp.edu.in पर 19 मई तक आवेदन मांगे गए थे। 

सर्वाधिक 23 जिलों वाले प्रयागराज क्षेत्रीय कार्यालय को स्क्रूटनी के सबसे अधिक 12317 आवेदन मिले हैं। इनमें हाईस्कूल के 2316, जबकि इंटरमीडिएट के 10001 परीक्षार्थी शामिल हैं। सबसे कम बरेली क्षेत्रीय कार्यालय से 2718 आवेदन प्राप्त हुए हैं। सभी प्रकरणों का निस्तारण करते हुए उसका परिणाम 15 जुलाई तक घोषित होना है।



पिछले तीन साल के आंकड़ों पर गौर करें तो इस साल स्क्रूटनी के सर्वाधिक आवेदन मिले हैं। 2024 में 29555 (हाईस्कूल 4748 व इंटर 24807), जबकि 2023 में कुल 24557 (हाईस्कूल 3903 व इंटर 20654) परीक्षार्थियों ने स्क्रूटनी के लिए आवेदन किया था।




यूपी बोर्ड परीक्षा स्क्रूटनी के लिए 19 मई तक कर सकेंगे आवेदन

26 अप्रैल 2025
प्रयागराज, माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की परीक्षा 2025 का परिणाम शुक्रवार को जारी कर दिया गया। स्क्रूटनी के लिए परीक्षार्थी 19 मई तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से जारी सूचना के अनुसार आवेदन के लिए परीक्षार्थी को पांच सौ रुपये प्रति प्रश्नपत्र की दर से लिखित और प्रयोगात्मक के लिए अलग-अलग शुल्क जमा करना होगा।


स्क्रूटनी से जुड़ी जानकारी बोर्ड की वेबसाइट upmsp.edu.in पर उपलब्ध है। इच्छुक अभ्यर्थी आवेदित विषयों के लिए निर्धारित शुल्क चालान के माध्यम से राजकीय कोषागार में जमा करेंगे। इसके बाद ऑनलाइन भरे स्क्रूटनी आवेदन के विवरणों को डाउनलोड कर उसके प्रिंट आउट के साथ स्क्रूटनी के लिए शुल्क के मूल चालान पत्र को उसके सत्यापन के लिए संलग्न कर उसे रजिस्टर्ड डाक से परिषद के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को निर्धारित तिथि 19 मई तक भेज दें। छात्र-छात्राएं आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर स्क्रूटिनी के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। ध्यान रहे, आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।


सजातीय शिक्षक, शिक्षिकाओं व शिक्षामित्रों के साथ गोपनीय बैठक कर सरकार के खिलाफ भड़काने के आरोप में हाथरस की बीईओ सस्पेंड

सजातीय शिक्षक, शिक्षिकाओं व शिक्षामित्रों के साथ गोपनीय बैठक कर सरकार के खिलाफ भड़काने के आरोप में हाथरस की बीईओ सस्पेंड

 
तत्कालीन बीईओ सहपऊ पर है सजातीय शिक्षक, शिक्षिकाओं व शिक्षामित्रों के साथ गोपनीय बैठक कर भड़काने का आरोप

 डीएम के आदेश पर एसडीएम व तहसीलदार द्वारा की गई छापेमारी में सामने आई थी हकीकत

जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत के आधार पर शासन स्तर से हुई कार्रवाई 


हाथरस। शिक्षक, शिक्षामित्रों को सरकार के खिलाफ भड़काने के मामले में तत्कालीन सहपऊ की खण्ड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ शासन ने निलंबन की कार्रवाई की है। बीईओ पर सजातीय शिक्षक, शिक्षिकाओं व शिक्षामित्रों के साथ एक गेस्ट हाउस में गोपनीय बैठक कर सरकार के खिलाफ भड़काने का आरोप है। इस मामले में डीएम के आदेश पर एसडीएम व तहसीलदार द्वारा की गई छापेमारी के दौरान हकीकत आई सामने आई थी।


अब शासन ने जिला पंचायत अध्यक्ष की शिकायत के बाद एक्शन लिया है। फिलहाल सादाबाद विकास खंड में तैनात पूनम चौधरी पूर्व में विकास खंड सहपऊ में तैनात रहीं। सहपऊ में तैनाती के दौरान पूनम चौधरी ने स्कूल के समय में बिना किसी उच्चाधिकारी की अनुमति के सादाबाद-सलेमपुर रोड स्थित गेस्ट हाउस में स्वजातीय शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं शिक्षामित्रों को बुलाकर एक गोपनीय बैठक का आयोजन किया गया। 


आरोप है कि इस बैठक में सरकार के विरूद्ध भड़काने का कार्य किया जा रहा था। इसकी सूचना किसी ने जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा उपाध्याय को दी थी। उन्होंने तुरन्त फोन पर डीएम को बताया। डीएम के आदेश पर एसडीएम सादाबाद व तहसीलदार संयुक्त रूप से छापा मारने के लिए पहुंच गए। अधिकारियों को देख वहां पर मौजूद शिक्षक-शिक्षिकाएं एवं शिक्षामित्र इधर भागने लगे। 


इस पूरे मामले को लेकर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. विनोद कुमार उपाध्याय ने मुख्यमंत्री के नाम जिला पंचायत अध्यक्ष सीमा रामवीर उपाध्याय को शिकायत पत्र दिया, जिसे जिला पंचायत अध्यक्ष ने शासन को भेज दिया। इस मामले को लेकर अब शासन ने बीईओ पूनम चौधरी के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है। इस मामले की जांच के लिए मण्डलीय उप शिक्षा निदेशक मुरादाबाद मण्डल को नामित किया गया है। पूनम चौधरी को निलंबन अवधि में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान हाथरस के प्राचार्य के कार्यालय में सम्बद्ध किया गया है।

देश के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में लगेगा एक सप्ताह का भारतीय भाषा समर कैंप

देश के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में लगेगा एक सप्ताह का भारतीय भाषा समर कैंप 


नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि देश के सभी सरकारी, सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों में एक हफ्ते का भारतीय भाषा समर कैंप लगाया जाएगा। अपनी तरह के पहले भारतीय भाषा समर कैंप में छात्रों को मातृभाषा के साथ दो से तीन अन्य भाषाओं को सीखने का मौका मिलेगा। एक हफ्ते के इस कैंप के समापन पर सभी छात्रों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा।


इसमें छात्रों को अपनी भाषा में चंद्रयान उत्सव, एशियन गेम्स, कोविड प्रबंधन, भारत-मदर ऑफ डेमोक्रेसी, नारी शक्ति, जी-20 को पढ़ने का मौका मिलेगा।


प्रधान ने सोमवार को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत एनसीईआरटी की तैयार भारतीय भाषाओं के 26 नए प्राइमर लांच किए। उन्होंने कहा कि एनईपी में कुल 122 प्राइमर का उल्लेख किया गया है। अभी तक 117 प्राइमर तैयार हो चुके हैं। बाकी भी जल्द होंगे। प्रधान ने कहा कि एक हफ्ते के इस भारतीय भाषा समर कैंप का मकसद छात्रों को मातृभाषा के साथ अन्य भाषाओं को सीखने के प्रति जागरूक करना है। छात्र खेलकूद और सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से भाषा पर अपनी पकड़ पक्की करेंगे।


भाषा देश की सांस्कृतिक विविधता को जोड़ने का एक जरिया भी बनेगी। इसमें वर्चुअल टूर, लोकगीत, नृत्य, कहानी सुनाना, संवाद अभ्यास और भाषा प्रतियोगिताएं भी होंगी। एक हफ्ते के समर कैंप में प्रतिदिन चार घंटे की इंडोर-आउटडोर गतिविधि होगी। इस प्रकार बच्चों को कुल 28 घंटे भाषा सीखने का मौका मिलेगा। कैंप के अंत में छात्रों को प्रमाणपत्र दिया जाएगा।

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता/सहायक अध्यापक (पुरूष/महिला) के वार्षिक स्थानान्तरण नीति के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2025-26 में ऑनलाइन स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध

राजकीय माध्यमिक विद्यालय के तबादलों में भी माइनस मार्किंग, शासन ने ऑनलाइन तबादले का जारी किया निर्देश भारांक

माध्यमिक शिक्षा विभाग के विशेष सचिव उमेश चंद्र की ओर से जारी

31 मार्च 2022 के बाद नियुक्त शिक्षक योग्य नहीं होंगे


लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के वार्षिक तबादला नीति के तहत ऑनलाइन तबादला प्रक्रिया के लिए शासन ने निर्देश जारी कर दिया है। इसमें शिक्षकों के तबादले के लिए भारांक जारी करने के साथ ही माइनस मार्किंग भी लागू की गई है। लघु दंड पाने वाले शिक्षक के पांच नंबर और पिछले तीन साल में वृहद दंड पाने पर 10 नंबर काटे (नकारात्मक) जाएंगे।

शासन के अनुसार दिव्यांग होने पर आवेदक को 20 नंबर, पति-पत्नी के राजकीय सेवा में होने पर 20 नंबर, गंभीर रूप से खुद के बीमार होने या बच्चों के दिव्यांग होने पर 15 नंबर, सेवानिवृत्ति के दो साल से कम होने पर 15 नंबर, पहली नियुक्ति की तिथि से दस साल की सेवा पर अधिकतम 20 नंबर दिए जाएंगे। तबादले अधिकतम 10 फीसदी तक ही किए जाएंगे। तबादला की प्रक्रिया 15 जून तक पूरी कर ली जाएगी।

तबादला नीति में कहा गया है कि उन्हीं विद्यालयों में रिक्तियां प्रदर्शित की जाएंगी, जहां पर तीन या तीन से कम सहायक अध्यापक हैं। इंटर स्तर के विद्यालयों में तीन सहायक अध्यापक और तीन प्रवक्ता से कम शिक्षक कार्यरत हैं। इससे अधिक होने पर विद्यालयों में रिक्तियां नहीं दिखाई जाएंगी। जबकि आकांक्षी जिलों में सभी रिक्तियां प्रदर्शित की जाएंगी।

उन्होंने कहा है कि तबादले ऑनलाइन आवेदन लेकर किए जाएंगे। इच्छुक शिक्षक खाली पदों के लिए प्रदेश के 10 विद्यालयों की वरीयता देंगे। 31 मार्च 2022 के बाद नियुक्त शिक्षक ऑनलाइन तबादले के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे। राजकीय बालिका इंटर व हाईस्कूल के लिए केवल महिला अभ्यर्थी ही आवेदन कर सकेंगी। एक ही पद पर एक से अधिक आवेदकों का गुणांक समान होने पर अधिकतम आयु वाले आवेदकों को वरीयता दी जाएगी।



राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में प्रवक्ता/सहायक अध्यापक (पुरूष/महिला) के वार्षिक स्थानान्तरण नीति के अन्तर्गत स्थानान्तरण सत्र 2025-26 में ऑनलाइन स्थानान्तरण किये जाने के सम्बन्ध


प्रदेश में अब हर सेमेस्टर में छात्रवृत्ति देने की तैयारी, तकनीकी कारणों से नहीं होंगे लाभ से वंचित, सभी वर्गों के छात्रों के लिए होगी समान नीति, साल भर छात्र कर सकेंगे आवेदन

प्रदेश में अब हर सेमेस्टर में छात्रवृत्ति देने की तैयारी, तकनीकी कारणों से नहीं होंगे लाभ से वंचित, सभी वर्गों के छात्रों के लिए होगी समान नीति, साल भर छात्र कर सकेंगे आवेदन

तीनों विभागों के मंत्रियों ने किया मंथन


लखनऊ। प्रदेश में अब हर सेमेस्टर में छात्रवृत्ति देने की योजना है। इतना ही नहीं अगर किसी छात्र की तकनीकी कारणों से छात्रवृत्ति रुकती है तो उसे दुबारा मौका मिलेगा।

मंगलवार को अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर, पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप, समाज कल्याण राज्य मंत्री असीम अरुण और अल्प संख्यक कल्याण राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी के सामने भागीदारी भवन में प्रस्तुतीकरण दिया गया।


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर छात्रवृत्ति की व्यवस्था में सुधार के लिए 6 सदस्यीय टीम का गठन किया गया, जिसने यह प्रस्तुतीकरण तैयार किया था। अभी साल में एक बार छात्रवृत्ति मिलती है। तय हुआ कि वार्षिक सिस्टम को हटाते हुए छात्रवृत्ति को भविष्य में सेमेस्टर आधारित बनाया जाएगा।

तकनीकी कारणों से अगर किसी बच्चे की छात्रवृत्ति रुक जाती है तो उसे पुनः मौका दिया जाएगा। उसे लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा। इसके अलावा आधुनिक तकनीक आधारित पोर्टल विकसित किया जाएगा, जिसमें मोबाइल एप नोटिफिकेशन आदि की सुविधा मिलेगी। ताकि, आवेदन में कोई कमी होने पर तत्काल जानकारी मिल सके और अपडेट भी भेजा जा सके।

सभी वर्गों के छात्रों के लिए एक समान नीति व प्रक्रिया बनाई जाएगी। फर्जी छात्रों की समस्या से निपटने और छात्रवृत्ति योजना के दुरुपयोग को रोकने के लिए बायोमीट्रिक हाजिरी की व्यवस्था लागू होगी। योजना में बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। सभी पात्र छात्रों को योजना का लाभ मिलेगा।

साल भर छात्र कर सकेंगे आवेदन : बैठक में चर्चा हुई कि छात्रवृत्ति के पोर्टल को पूरे वर्ष बंद न किया जाए। बैठक में यह भी तय हुआ कि तीनों विभागों के निदेशकों की एक संयुक्त टीम बनाई जाएगी, जो एकसाथ बैठ कर पेश आ रही दिक्कतों को दूर करेगी।

सभी बोडों के इंटर पास विज्ञान मेधावियों को इंस्पायर स्कालरशिप के जरिए मिलेंगे 80 हजार रुपये

सभी बोडों के इंटर पास विज्ञान मेधावियों को इंस्पायर स्कालरशिप के जरिए मिलेंगे 80 हजार रुपये

इंटरमीडिएट पास करने वाले छात्र-छात्राओं के लिए मौका

इंस्पायर स्कालरशिप योजना के तहत चयनित हो सकते छात्र


लखनऊ । वर्ष 2024-25 में सभी बोडों के इंटर पास छात्र-छात्राओं को विज्ञान संकाय में उच्च शिक्षा ग्रहण के लिए इंस्पायर स्कालरशिप योजना के तहत अस्सी हजार रुपये की धनराशि शासन स्तर से मिलेगी। इसके लिए छात्र-छात्राओं को आनलाइन आवेदन करना होगा।


भारत सरकार की तरफ से विज्ञान संकाय में मेधावियों को उच्च शिक्षा ग्रहण करने के लिए इंस्पायर स्कालरशिप योजना की शुरूआत की है। इंस्पायर स्कालरशिप योजना से इंजीनियर, मेडिकल, पीजी करने, रिसर्च आफ इनोवेशन यानि अनुसंधान और नवाचार करने के लिए मौका दिया जायेगा।


इसके लिए आनलाइन आवेदन करने के बाद वरीयता के आधार पर चयन किया जाएगा। वहीं कक्षा छह से दसवीं तक विज्ञान के मॉडल के प्रदर्शन पर दस हजार रुपये छात्र-छात्राओं को दिए जाएंगे। इससे उन्हें अध्ययन करने में आसानी होगी।


इन विषयों के अध्ययन पर मिलेग लाभ: इंटर पास करने पर छात्र-छात्राओं को इन विषयों के अध्ययन पर इंस्पायर स्कालरशिप योजना का लाभ मिलेगा। इनमें फिजिक्स, बायोकेमिस्ट्री, मैथ, जुलाजी, इलेक्ट्रानिक, माइक्रोबायोलाजी आदि विषयों के अध्ययन के लिए सरकार की तरफ इंस्पायर स्कालरशिप योजना की शुरूआत की गई है। इससे छात्रों को लाभ मिलेगा।

Wednesday, May 21, 2025

शिक्षामित्रों ने भी समर कैंप को लेकर खोला मोर्चा, ग्रीष्मावकाश के बजाय जुलाई में आयोजन की मांग

शिक्षामित्रों ने भी समर कैंप को लेकर खोला मोर्चा, ग्रीष्मावकाश के बजाय जुलाई में आयोजन की मांग 

 
20 मई 2025
लखनऊ । परिषदीय स्कूलों में शुरू समर कैम्प को लेकर अब शिक्षामित्रों ने भी मोर्चा खोल दिया है। उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ ने स्कूल शिक्षा महानिदेशक को पत्र भेजकर समर कैम्प का आयोजन ग्रीष्मावकाश के दौरान न करके जुलाई में कराने की मांग की है। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष शिवकुमार शुक्ला ने स्कूल शिक्षा महानिदेशक को लिखे पत्र में कहा है कि शिक्षामित्रों को वर्ष में एक साथ अधिक दिन के लिए ग्रीष्म कालीन अवकाश ही मिलता है, इसमें महिला बहनों को अपने ससुराल / मायके में बच्चों के पास जाना होता है जो कि एक जटिल समस्या है।

साथ ही पुरुष साथियों को भी इसी अवकाश में अपना पारिवारिक कार्य करना रहता है। चूंकि समर कैम्प का संचालन इसी अवकाश अवधि में होना है। इसमें संशोधन किया जाना नितान्त आवश्यक है। भीषण गर्मी को देखते हुए बच्चों अथवा शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, शिक्षकों के हित को ध्यान में रखते हुए समर कैम्प का संचालन जुलाई में कराया जाना सुनिश्चित किया जाए, जिससे पूरे मनोयोग से समर कैम्प का संचालन हो सके। यह भी कहा है कि कि जिन चयनित विद्यालयों में समर कैम्प का संचालन होना है, विद्यालय की व्यवस्था अथवा रखरखाव के लिए प्रधानाध्यापक, प्रभारी प्रधानाध्यापक की उपस्थिति संचालन अवधि में होना सुनिश्चित किया जाए। संचालन प्रक्रिया में जो शिक्षा मित्र भाई-बहन स्वेच्छा से संचालन करना चाहते हैं, उन्हीं को लगाया जाए। साथ ही शिक्षामित्रों की समस्याओं पर भी विचार करके उनकी ड्यूटी लगायी जाए।



अब समर कैंप के विरोध में उतरे शिक्षामित्र और अनुदेशक, आयोजन को बताया अव्यावहारिक, स्थगित करने की मांग, मुख्य संगठनों ने मुद्दे पर साधी चुप्पी

बच्चों के साथ ही शिक्षामित्र अनुदेशकों के स्वास्थ्य की  चिंता की मांग

17 मई 2025
लखनऊ। प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) व सेल्फ फाइनेंस माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप को लेकर मिली राहत के बाद अब बेसिक विद्यालयों में समर कैंप के आयोजन का विरोध बढ़ गया है। गर्मी की छुट्टियों में समर कैंप आयोजन करने का शिक्षामित्रों व अनुदेशकों ने विरोध किया है।

विभिन्न शिक्षक व शिक्षामित्र संगठनों ने भीषण गर्मी व सुविधाओं के अभाव में समर कैंप का आयोजन को अव्यावहारिक बताया है। उन्होंने कहा कि यह छोटे बच्चों के स्वास्थ्य के साथ-साथ शिक्षामित्रों व अनुदेशकों के साथ भी खिलवाड़ है। 21 मई से प्रस्तावित समर कैंप में शिक्षामित्रों-अनुदेशकों की ही ड्यूटी लगाना, उनके साथ सौतेला व्यवहार है।


जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के मनोज मौर्य ने कहा कि पहले से ही गर्मी की वजह से बहुत कम बच्चे स्कूल आ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र में बिजली बहुत कम आती है। वहीं विद्यालयों में संसाधन भी नहीं हैं। हर जूनियर विद्यालय में अनुदेशक भी नहीं हैं। शिक्षक शिक्षामित्र उत्थान समिति के प्रदेश सचिव उबैद अहमद सिद्दीकी ने शिक्षामित्रों को ही समर कैंप के आयोजन में लगाने का विरोध किया है।

आदर्श शिक्षामित्र वेलफेयर एसोसिएशन के राम सागर ने कहा कि विभाग यह बताए कि क्या शिक्षामित्र-अनुदेशकों को लू नहीं लगती है। उनके स्वास्थ्य के लिए कौन जिम्मेदार होगा। बता दें कि परिषदीय विद्यालयों में 21 मई से 15 जून के बीच विद्यालयों में समर कैंप का आयोजन किया जाएगा। विभाग ने इसके लिए शिक्षामित्र अनुदेशकों को ही तैनात करने का निर्देश दिया है। उन्हें इस अवधि के लिए 6000 रुपये मानदेय व 2000 रुपये स्टेशनरी खर्च के लिए विद्यालय को दिए जाएंगे।


मुख्य संगठनों ने शिक्षामित्रों के मुद्दे पर साधी चुप्पी

शिक्षामित्रों के हक-हुकूक आदि की मांग उठाने व उनका नेतृत्व करने वाले प्रदेश में दो मुख्य संगठन हैं। इसमें उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षामित्र संघ व उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ है। किंतु इन दोनों संगठनों ने सिर्फ शिक्षामित्रों-अनुदेशकों के भरोसे ही समर कैंप के आयोजन को लेकर कोई बयान तक नहीं जारी किया। उनकी लड़ाई लड़ना तो दूर की बात है।

Tuesday, May 20, 2025

10336 बाल श्रमिकों की हुई पहचान, 12426 बच्चों को मिला शिक्षा का मौका

10336 बाल श्रमिकों की हुई पहचान, 12426 बच्चों को मिला शिक्षा का मौका


लखनऊ। यूपी सरकार साल 2027 तक प्रदेश को बालश्रम से मुक्त करने की तैयारी में है। इसके लिए जागरूकता से लेकर शिक्षा और पुनर्वासन तक, हर स्तर पर ठोस प्रयास किए जा रहे हैं। बाल श्रम निषेध दिवस के अवसर पर 12 जून को प्रदेश में विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाने का भी प्रस्ताव है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों के समन्वय से जागरूकता अभियान को धार दी जाएगी। 


प्रदेश से बालश्रम को खत्म करने के लिए सरकार की ओर से 10336 बाल श्रमिकों की पहचान की जा चुकी है। वर्ष 2017-18 से 2024-25 तक 12426 बाल श्रमिकों का शैक्षिक पुनर्वासन कराया गया है। इसके अलावा 1089 परिवारों को आर्थिक मदद भी दी गई है। 


योगी सरकार द्वारा संचालित 'बाल श्रमिक विद्या योजना' के अंतर्गत 2000 कामकाजी बच्चों को स्कूल में दाखिला दिलाकर आर्थिक सहायता भी दिलाई गई। श्रम कल्याण परिषद के माध्यम से संगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए आठ कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इसके लिए सरकार ने 40 करोड़ रुपये की कॉर्पस निधि उपलब्ध कराई है। वर्ष 2024-25 में अब तक 309 श्रमिकों को 1.32 करोड़ रुपये की सहायता देकर राहत पहुंचाई जा चुकी है।

11,350 ग्राम पंचायतों में बनेगी डिजिटल लाइब्रेरी, प्रत्येक लाइब्रेरी की स्थापना पर चार-चार लाख रुपये होंगे खर्च

11,350  ग्राम पंचायतों में बनेगी डिजिटल लाइब्रेरी, प्रत्येक लाइब्रेरी की स्थापना पर चार-चार लाख रुपये होंगे खर्च 

नेशनल बुक्स ट्रस्ट के माध्यम से लेंगे ई बुक्स


लखनऊ । प्रदेश में 11350 ग्राम पंचायतों में डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा दी जाएगी। प्रत्येक लाइब्रेरी की स्थापना पर चार-चार लाख रुपये खर्च होंगे। पहले चरण में कुल 454 करोड़ रुपये खर्च कर इन डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में छात्रों को पंचायत भवन में अपने बाल साहित्य, साहित्यिक व प्रेरणादायक पुस्तकों के साथ-साथ अपने कोर्स व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए ई-बुक्स पढ़ने की सुविधा मिलेगी। पंचायतीराज विभाग नेशनल बुक्स ट्रस्ट की मदद से ई बुक्स खरीदेगा।


ऐसे पंचायत भवन जहां पर दो-दो कमरे और एक हॉल है, वहां पहले चरण में डिजिटल लाइब्रेरी की स्थापना की जा रही है। फिलहाल अलग-अलग कमेटियों का गठन कर लाइब्रेरी स्थापना का कार्य शुरू कर दिया गया है। डिजिटल लाइब्रेरी के लिए कंप्यूटर, फर्नीचर व ई बुक्स इत्यादि की खरीद के लिए कमेटियां बनाई गई हैं। जिनकी देखरेख में यह कार्य किया जाएगा। 


निदेशक पंचायतीराज की अध्यक्षता में 10 सदस्यीय पुस्तक चयन समिति का गठन किया गया है। जिसमें महानिदेशक, स्कूल शिक्षा व बेसिक शिक्षा निदेशक की ओर से नामित एक-एक शिक्षाधिकारी, बाल साहित्य लेखक, प्रतिष्ठित सामान्य लेखक, शिक्षाविद् और नेशल बुक्स ट्रस्ट का एक नामित सदस्य इत्यादि शामिल किए गए हैं। ऐसे ही कंप्यूटर व फर्नीचर की खरीद के लिए भी कमेटी बनी है, जिसकी देखरेख में ही खरीददारी होगी।

Monday, May 19, 2025

मानदेय पर ब्लॉक स्तर पर करियर काउंसलर नियुक्त करने की तैयारी

मानदेय पर ब्लॉक स्तर पर करियर काउंसलर नियुक्त करने की तैयारी 

● ऑन साइट करियर परामर्श सत्र का आयोजन होगा


लखनऊ, छात्रों के भविष्य निर्माण के लिए अब ब्लॉक स्तर पर करियर काउंसलर्स नियुक्त किए जाएंगे। मानदेय पर नियुक्त होने वाले ये करियर काउंसलर्स, ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले माध्यमिक विद्यालयों में नियमित रूप से ऑन साइट कैरियर परामर्श सत्र का आयोजन करेंगे। सत्र के दौरान छात्रों को रुचि आधारित मार्गदर्शन देने के साथ-साथ, लक्ष्य निर्धारण तथा व्यावसायिक अवसरों की समझ भी विकसित के जाएगी।


यही नहीं करियर काउंसलर शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यालय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर छात्रों के संपूर्ण कैरियर विकास को नई दिशा प्रदान करने में सहयोगी बनेंगे। 


प्रदेश में यूनिसेफ के सहयोग से विद्यार्थियों के भविष्य निर्धारण के लिए सशक्त करियर काउंसलिंग कार्यक्रम का संचालन शुरू किया गया है, जिसका उद्देश्य माध्यमिक विद्यालयों के छात्रों में करियर जागरूकता, आत्मविश्वास, क्षमता पहचान तथा दीर्घकालिक योजना विकसित करना है।


 इस पहल को और सशक्त बनाने के उद्देश्य से अब ब्लॉक स्तर पर भी कैरियर काउंसलर्स की नियुक्ति शुरू की जा रही है ताकि ब्लाक स्तर पर भी ये काउंसलर्स छात्रों को उनके भविष्य का ताना-बाना बुनने के लिए प्रेरित कर सकें। राज्य सरकार की यह पहल छात्र-केंद्रित शिक्षा सुधार कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।



सरकार की इस कार्यक्रम को व्यापक रूप देने की योजना

सरकार की ओर से इस कार्यक्रम को और व्यापक रूप देने की योजना है ताकि प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालयों में कैरियर क्लब, कैरियर हब, अभिभावक शिक्षक बैठकें और कैरियर मेलों का आयोजन किया जा सके। इसको लेकर शिक्षक संदर्शिका व विद्यार्थी गतिविधि पुस्तिका भी तैयार की गई हैं, जिसे मुद्रण उपरांत विद्यालयों में वितरित किया जाएगा। 


समग्र शिक्षा के अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कान्त पाण्डेय कहते हैं कि इस दिशा में ‘पंख पोर्टल’ की स्थापना की गई है, जहां विद्यार्थी अपनी नामांकन संख्या से लॉगिन कर 500 से अधिक कैरियर विकल्पों, कॉलेज प्रवेश प्रक्रिया, एवं छात्रवृत्ति योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

यूपी बोर्ड की इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए 19 मई से आवेदन, 10 जून की मध्यरात्रि तक स्वीकार किए जाएंगे आवेदन, बाद में घोषित की जाएगी परीक्षा तिथि, हाईस्कूल के अर्ह परीक्षार्थी इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट और इंटर के परीक्षार्थी दे सकेंगे कंपार्टमेंट परीक्षा

एक विषय में फेल छात्रों के लिए अंतिम मौका, इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन की अंतिम तिथि है 10 जून

लखनऊ। यूपी बोर्ड हाईस्कूल इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट और इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए परीक्षार्थियों के पास आवेदन का मौका सिर्फ दो दिनों तक है। 10 जून के बाद कोई आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे और तिथि भी नहीं बढ़ेगी। आवेदन के लिए माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर जाना होगा। हाईस्कूल इंप्रूवमेंट के लिए एक विषय में फेल छात्र व कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए दो विषयों में फेल छात्र किसी एक विषय के लिए ही आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए परीक्षा शुल्क 256.50 रुपये जमा करना होगा।

12वीं के छात्र विषयवार इस तरह दे सकेंगे परीक्षा
इंटरमीडिएट कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए मानविकी, वैज्ञानिक एवं वाणिज्य वर्ग के परीक्षार्थी किसी एक विषय में, कृषि भाग एक और भाग दो में निर्धारित विषयों में से किसी एक के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा व्यावसायिक वर्ग के ट्रेड विषय के किसी एक प्रश्नपत्र में फेल परीक्षार्थी कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने के लिए पात्र माने जाएंगे। इसके लिए परीक्षा शुल्क 306 रुपये देना होगा।

आवेदन की प्रति जमा करना अनिवार्य
परीक्षा शुल्क कोषागार में चालान के माध्यम से परिषद के मानक मद में जमा करना होगा। इसके बाद जमा शुल्क के चालान की मूल प्रति हाईस्कूल इम्प्रूवमेंट व कंपार्टमेंट परीक्षा व इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट परीक्षा के ऑनलाइन भरे गए आवेदन की प्रति को लगाना होगा। इसके बाद आवेदन की निर्धारित अंतिम तिथि 10 जून से तीन दिनों के अंदर जमा करना होगा।

परीक्षार्थी इसका रखें ध्यान 
हाईस्कूल परीक्षा में इम्प्रूवमेंट व कंपार्टमेंट परीक्षा के लिखित व प्रयोगात्मक प्रोजेक्ट (आंतरिक मूल्यांकन) व इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट परीक्षा के लिखित व प्रयोगात्मक दोनों भागों में अनुत्तीर्ण रहे परीक्षार्थियों को दोनों भागों की परीक्षा में शामिल होना होगा।



एक विषय में फेल होने वाले छात्रों को मौका,  इंप्रूवमेंट-कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए आवेदन शुरू, 19 मई से 10 जून तक लिए जाएंगे ऑनलाइन आवेदन


यूपी बोर्ड की इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए 19 मई से आवेदन, 10 जून की मध्यरात्रि तक स्वीकार किए जाएंगे आवेदन

बाद में घोषित की जाएगी परीक्षा तिथि, हाईस्कूल के अर्ह परीक्षार्थी इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट और इंटर के परीक्षार्थी दे सकेंगे कंपार्टमेंट परीक्षा


प्रयागराज। यूपी बोर्ड की वर्ष 2025 की हाईस्कूल परीक्षा में इंप्रूवमेंट व परीक्षा के लिए अर्ह परीक्षार्थियों के लिए 19 मई से ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। आवेदन 10 जून की मध्यरात्रि 12 बजे तक स्वीकार किए जाएंगे। माध्यमिक शिक्षा परिषद की आधिकारिक वेबसाइट upmsp.edu.in पर आवेदन किए जाने हैं। यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने अनुसार परीक्षा तिथि बाद में घोषित की जाएगी।


सचिव ने बताया कि हाईस्कूल में इंप्रूवमेंट परीक्षा के तहत परीक्षार्थी अपने अनुत्तीर्ण हुए एक विषय और कंपार्टमेंट परीक्षा के तहत परीक्षार्थी अपने अनुत्तीर्ण हुए दो विषयों में से किसी एक विषय की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं।


परीक्षा शुल्क 256 रुपये निर्धारित है। वहीं, इंटरमीडिएट में मानविकी, विज्ञान और वाणिज्य वर्ग के परीक्षार्थी किसी एक विषय में, कृषि भाग-1 और भाग-2 में निर्धारित विषयों में से किसी एक प्रश्नपत्र में और व्यावसायिक वर्ग के ट्रेड विषय के किसी एक प्रश्नपत्र में अनुतीर्ण परीक्षार्थी कंपार्टमेंट परीक्षा में शामिल होने के लिए अर्ह माने जाएंगे। परीक्षा शुल्क 306 रुपये निर्धारित है।


निर्धारित परीक्षा शुल्क को कोषागार में चालान के माध्यम से माध्यमिक शिक्षा परिषद, उत्तर प्रदेश के निर्धारित मानक मद में जमाकर चालान की मूल प्रति के साथ हाईस्कूल इंपूवमेंट/कंपार्टमेंट परीक्षा और इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट परीक्षा के ऑनलाइन भरे गए आवेदन की प्रति को डाउनलोड करके 13 जून तक परिषद के संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजना अनिवार्य होगा।



लिखित व प्रयोगात्मक दोनों भागों की परीक्षा में हो सकते हैं शामिल 
हाईस्कूल परीक्षा में इंप्रूवमेंट/कंपार्टमेंट परीक्षा के लिखित और प्रयोगात्मक/प्रोजेक्ट (आंतरिक मूल्यांकन) और इंटरमीडिएट की कंपार्टमेंट परीक्षा के लिखित व प्रयोगात्मक दोनों भागों में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थियों को दोनों भागों की परीक्षा में शामिल होना होगा। किसी विषय के दोनों में से किसी एक भाग में अनुत्तीर्ण व दूसरे भाग में उत्तीर्ण परीक्षार्थी केवल अनुत्तीर्ण भाग में या अगर चाहें तो अनुत्तीर्ण और उत्तीर्ण दोनों भागों की परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। लिखित व प्रयोगात्मक परीक्षाओं की तिथियों की सूचना बाद में अलग से जारी की जाएगी।



हाईस्कूल में इंप्रूवमेंट के लिए 2.81 लाख परीक्षार्थी अर्ह: 
हाईस्कूल की इंप्रूवमेंट परीक्षा के लिए कुल दो लाख 81 हजार 473 परीक्षार्थी और कंपार्टमेंट परीक्षा के लिए 291 परीक्षार्थी अर्ह हैं। क्षेत्रीय कार्यालयवार आंकड़े देखें तो हाईस्कूल में इंप्रूवमेंट व कंपार्टमेंट के लिए मेरठ क्षेत्रीय कार्यालय में क्रमशः 53,959 व 44, बरेली में 40,073 व आठ, प्रयागराज में 76,672 व 92, वाराणसी में 67,447 व 123 और गोरखपुर क्षेत्रीय कार्यालय में 43,322 व 24 परीक्षार्थी अहे हैं।




19 मई से करें इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट के लिए आवेदन


प्रयागराज । यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 में इम्प्रूवमेंट और कम्पार्टमेंट के लिए अर्ह छात्र-छात्राओं से 19 मई से दस जून तक ऑनलाइन आवेदन लिए जाएंगे। हाईस्कूल में एक विषय में फेल 2,81,473 विद्यार्थी इम्प्रूवमेंट परीक्षा देकर अपने अंक बढ़वा सकते हैं, जबकि दो विषय में फेल 291 छात्र किसी एक विषय में कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर पास हो सकते हैं। वहीं इंटरमीडिएट में एक विषय में फेल छात्र कम्पार्टमेंट परीक्षा देकर पास हो सकते हैं। हाईस्कूल में इम्प्रूवमेंट तथा कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिए शुल्क 256.50 निर्धारित है।

वहीं इंटरमीडिएट कम्पार्टमेंट परीक्षा में मानविकी, वैज्ञानिक एवं वाणिज्य वर्ग से सम्मिलित परीक्षार्थी किसी एक विषय में, कृषि भाग-1 एवं भाग-2 में निर्धारित विषयों में से किसी एक प्रश्नपत्र में एवं व्यावसायिक वर्ग के ट्रेड विषय के किसी एक प्रश्नपत्र में अनुत्तीर्ण परीक्षार्थी कम्पार्टमेंट परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए अर्ह हैं। इनके लिए परीक्षा शुल्क 306 रुपये निर्धारित है। परीक्षा शुल्क कोषागार में चालान के माध्यम से यूपी बोर्ड के मानक मद में जमाकर शुल्क की मूल प्रति के साथ ऑनलाइन भरे गए आवेदन की प्रति की हार्डकॉपी के साथ 13 जून तक संबंधित क्षेत्रीय कार्यालय को रजिस्टर्ड डाक के माध्यम से भेजना अनिवार्य है। 

यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार हाईस्कूल परीक्षा में इम्प्रूवमेंट/कम्पार्टमेंट परीक्षा लिखित तथा प्रयोगात्मक/प्रोजेक्ट (आन्तरिक मूल्यांकन) एवं इंटरमीडिएट की कम्पार्टमेंट परीक्षा के लिखित एवं प्रयोगात्मक दोनों भागों में अनुत्तीर्ण रहे परीक्षार्थियों को दोनों भागों की परीक्षा में सम्मिलित होना होगा। किसी विषय के दोनों में से किसी एक भाग में अनुत्तीर्ण तथा दूसरे भाग में उत्तीर्ण परीक्षार्थी केवल अनुत्तीर्ण भाग में अथवा यदि चाहें तो अनुत्तीर्ण तथा उत्तीर्ण दोनों भागों की परीक्षा में सम्मिलित हो सकते हैं। इनकी लिखित एवं प्रयोगात्मक परीक्षाओं की तिथियों की सूचना बाद में दी जाएगी।

Sunday, May 18, 2025

लंबा हो रहा बेसिक शिक्षकों के म्यूचुअल ट्रांसफर का इंतजार, बढ़ रही तारीख पर तारीख, डेढ़ महीने में आवेदनों का सत्यापन नहीं कर पाए BSA

लंबा हो रहा बेसिक शिक्षकों के म्यूचुअल ट्रांसफर का इंतजार, बढ़ रही तारीख पर तारीख, डेढ़ महीने में आवेदनों का सत्यापन नहीं कर पाए BSA


18 मई 2025
लखनऊ । बेसिक शिक्षकों के अंतरजनपदीय (जिले के वाहर) म्यूचुअल तवादलों के लिए 1 अप्रैल से और अंतःजनपदीय (जिले के अंदर) म्यूचुअल तवादलों के लिए 2 अप्रैल से आवेदन की शुरुआत हुई थी। तव से डेढ़ महीने वीत गए। तारीख पर तारीख वढ़ती जा रही है लेकिन जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) अभी तक इन आवेदनों का सत्यापन नहीं कर पाए हैं। अव गर्मी की छुट्टियां भी शुरू होने जा रही हैं। शिक्षकों को यह आशंका सता रही है कि कहीं ऐसा न हो कि तवादले फिर सर्दी की छुट्टियों तक न टल जाएं।


पहले भी डेढ़ साल चली प्रक्रिया :
शासनादेश के अनुसार वेसिक शिक्षकों के म्यूचुअल तवादले साल में दो वार होंगे। इनके लिए साल में कभी भी प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। तवादले गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों में किए जाएंगे। इसके वावजूद वेसिक शिक्षा विभाग पहले तो प्रक्रिया देर से शुरू करता है। उसके बाद प्रक्रिया इतनी लंबी चलती है कि तवादले होने में एक-डेढ़ साल लग जाता है। इससे पहले भी डेढ़ साल में तवादले हो पाए थे।


कई बार बढ़ी तारीख: इस वार भी दिसंबर और जनवरी में शासन ने तवादला नीति जारी कर दी। उसके वाद मार्च में वेसिक शिक्षा परिषद ने टाइम टेवल जारी किया। अप्रैल से आवेदन शुरू हो गए। पहले तो आवेदन की तारीख ही कई वार बढ़ाई गई। उसके बाद कई वीएसए ने मांग की कि सत्यापन पूरा नहीं हो सका है, इसलिए तारीख वढ़ाई जाए। उनके अनुरोध पर कई वार तारीख वढ़ाई जा चुकी है लेकिन अभी तक सभी वीएसए सत्यापन पूरा नहीं कर पाए हैं।

सोमवार से पेयर बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। एनआईसी ने तैयारी कर ली है। कुछ जिलों में सत्यापन नहीं हुआ था। वह भी अब पूरा हो गया है। - कंचन वर्मा, महानिदेशक-स्कूल शिक्षा


शिक्षकों से अपेक्षा तो अधिकारियों से क्यों नहीं?

प्राथमिक शिक्षक संघ लखनऊ के अध्यक्ष निर्भय सिंह कहते हैं कि साल में दो बार तबादलों का प्रावधान है लेकिन एक बार प्रक्रिया पूरी होने में ही साल भर से ज्यादा बीत जाता है। शिक्षकों की ओर से एक बार भी तारीख बढ़ाने की मांग नहीं की गई है। फिर अधिकारी समय पर क्यों नहीं तबादले पूरे कर पाते, यह समझ से परे है। प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक असोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनय कुमार सिंह का कहना है कि शिक्षकों से यह अपेक्षा की जाती है कि हर काम तय समय पर पूरा करें। ऐसा न करने पर उनको सजा भी दी जाती है। ऐसे में अधिकारियों से भी यह अपेक्षा होनी चाहिए कि वे भी समय से काम पूरा करें।



परस्पर तबादले में 30 से अधिक जिलों में नहीं हो पाया सत्यापन

15 मई 2025
लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को परस्पर तबादले के लिए अब भी 30 से अधिक जिलों में आवेदन पत्रों का सत्यापन नहीं हुआ है। एक से दूसरे जिले में हुए 31 हजार से अधिक आवेदन में से मात्र दस फीसदी और जिले के अंदर हुए 39859 आवेदन में से 15 फीसदी आवेदनों का ही सत्यापन हो सका है।

विभाग के आला अधिकारियों का बीएसए के ऊपर कोई असर नहीं पड़ रहा है। वे अपनी ही गति से प्रक्रिया का संचालन कर रहे हैं। इससे शिक्षकों में काफी ज्यादा नाराजगी बढ़ रही है।


प्रक्रिया पूरी करने में न निकल जाए समय
 उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के निर्भय सिंह ने कहा कि शिक्षक यह सवाल उठा रहे हैं कि जाड़े की छुट्टियों की ही तरह गर्मी की छुट्टियां भी प्रक्रिया पूरी करने में ही न निकल जाएं। क्योंकि प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 20 मई से गर्मी की छुट्टियां शुरू हो रही हैं।

विभाग ने गर्मी की छुट्टियों में शिक्षकों को कार्यमुक्त व कार्यभार ग्रहण कराने का आदेश दिया था। किंतु जिस गति से प्रक्रिया चल रही है, वह समय से पूरी होती नहीं दिख रही है।




अंतर व अंतः जनपदीय पारस्परिक तबादले में लग सकता है समय, रजिस्ट्रेशन फॉर्म के सत्यापन की कल अंतिम तिथि, केवल पांच से छह फीसदी हुआ काम


12 मई 2025
प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों व शिक्षिकाओं के शैक्षिक सत्र 2024-25 के तहत अंतरजनपदीय एवं अंतः जनपदीय तबादले की प्रक्रिया में देर हो सकती है। रजिस्ट्रेशन फॉर्म के ऑनलाइन सत्यापन की अंतिम तिथि 13 मई है, लेकिन अब तक महज पांच से छह फीसदी रजिस्ट्रेशन फॉर्म का सत्यापन हो सका है।

सचिव बेसिक शिक्षा परिषद ने सभी जिला विद्यालय निरीक्षकों को पत्र जारी कर हुए सचेत किया है कि किसी भी सूरत में ऑनलाइन सत्यापन की प्रक्रिया 13 मई तक पूरी कर ली जाए। अंतरजनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में 31,015 के मुकाबले महज 1913 (छह फीसदी) और अंतः जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण में 39,859 के मुकाबले केवल 2009 (पांच फीसदी) रजिस्ट्रेशन फॉर्म ही सत्यापित किए गए हैं। 

सचिव ने कहा है कि यह स्थिति अत्यंत दयनीय है। स्पष्ट है कि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अपने कार्यों में शिथिलता बरते रहे हैं। सचिव ने पत्र के माध्यम से यह भी कहा कि बेसिक शिक्षा अधिकारियों के अनुरोध पर पूर्व में कई बार समयावधि बढ़ाई जा चुकी है। जबकि, शासनादेश में निहित प्रावधानों के अनुरूप ग्रीष्मावकाश में कार्यमुक्त व कार्यभार ग्रहण कराए जाने की कार्यवाही भी की जानी है। सचिव ने स्पष्ट किया है कि समयावधि बढ़ाया जाना किसी भी दशा में संभव नहीं होगा। 


प्रयागराज। बेसिक शिक्षा परिषद के अधीन संचालित विद्यालयों में कार्यरत शिक्षकों के शैक्षिक सत्र 2024-25 में अंतर जनपदीय एवं अन्तः जनपदीय पारस्परिक स्थानांतरण के सत्यापन में लापरवाही पर सचिव सुरेन्द्र कुमार तिवारी ने सख्ती की है। सचिव ने सभी बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर तय समय में सत्यापन की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए हैं। पूर्व में 13 मई तक रजिस्ट्रेशन पत्रों के ऑनलाइन सत्यापन की समय सीमा तय की गई थी। हालांकि अब तक अंतर जनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण में 31015 आवेदन के सापेक्ष मात्र 1913 तथा अन्तः जनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण में 39859 आवेदन के सापेक्ष मात्र 2009 ही सत्यापित किए गए हैं।

साफ है कि कुल 70874 आवेदन में से 3922 (5.53 प्रतिशत) का ही सत्यापन हो सका है। उक्त स्थिति को अत्यन्त दयनीय बताते हुए सचिव ने बीएसए के स्तर से कार्यों में शिथिलता बरतने पर नाराजगी जताई है। लिखा है कि पूर्व में बीएसए के अनुरोध पर कई बार समयावधि बढ़ाई जा चुकी है तथा शासनादेश के अनुसार ग्रीष्मावकाश में कार्यमुक्ति एवं कार्यभार ग्रहण कराने की कार्यवाही भी की जानी है। 

लिहाजा अधिकारियों को सचेत करते हुए निर्देशित किया है कि अंतर जनपदीय एवं अन्तः जनपदीय पारस्परिक स्थानान्तरण के संबंध में जारी समय सारिणी के अनुसार निर्धारित समयावधि में सभी कार्यवाही पूर्ण कराना सुनिश्चित करें। सचिव ने साफ किया है कि किसी भी दशा में समयावधि बढ़ाया जाना सम्भव नहीं होगा।


अगले शैक्षिक सत्र से कक्षा चार में एनसीईआरटी की किताबें, बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए की जाएगी कस्टमाइज

अगले शैक्षिक सत्र से कक्षा चार में एनसीईआरटी की किताबें, बेसिक शिक्षा परिषद के विद्यालयों के लिए की जाएगी कस्टमाइज

कक्षा तीन में इसी सत्र के लागू किया गया एनसीईआरटी पाठ्यक्रम


प्रयागराज : बेसिक शिक्षा परिषद के प्राथमिक व उच्च प्राथमिक के 1.57 लाख विद्यालयों में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) का पाठ्यक्रम चरणबद्ध लागू किया जा रहा है। शैक्षिक सत्र 2025-26 से कक्षा तीन में एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम को उत्तर प्रदेश के संदर्भमें कस्टमाइज करके लागू कर दिया गया है। 


अगले शैक्षिक सत्र से कक्षा चार में एनसीईआरटी का पाठ्यक्रम लागू किया जाएगा। इसके लिए अभी अंग्रेजी माध्यम की कुछ पाठ्यपुस्तकें प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज किए जाने के लिए प्राप्त हो गई हैं। हिंदी माध्यम के दो विषयों की पुस्तकें अभी आई हैं।


प्रदेश भर में 1.11 लाख परिषदीय प्राथमिक और करीब 45 हजार उच्च प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। कक्षा तीन के विद्यार्थी एनसीईआरटी आधारित पाठ्यपुस्तक से पढ़ेंगे। जिलों में पुस्तकें पहुंच गई हैं। सभी स्कूलों में जल्द पहुंचाई जाएंगी। इसके अलावा अगले सत्र से कक्षा चार में एनसीईआरटी पाठ्यक्रम को लागू करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। 


इसके लिए गणित, हिंदी, हमारा अद्भुत संसार (सामाजिक विषय) और उर्दू की एनसीईआरटी की पुस्तकों को राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य नवल किशोर के निर्देशन में विशेषज्ञों के माध्यम से उत्तर प्रदेश के अनुकूल (कस्टमाइज) बनाया जाएगा। इसी तरह अंग्रेजी की पुस्तक को आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान के प्राचार्य स्कंद शुक्ल के निर्देशन में कस्टमाइज किया जाएगा।


अंग्रेजी माध्यम के कक्षा चार के विषयों की पाठ्यपुस्तकें कस्टमाइज किए जाने के लिए आई हैं। हिंदी माध्यम के विद्यालयों के लिए अभी सिर्फ हिंदी व सामाजिक विषय की पाठ्यपुस्तक प्राप्त हुई है। पाठ्यपुस्तकों को कस्टमाइज किए जाने के बाद एससीईआरटी को भेजा जाएगा, ताकि परीक्षण के उपरांत प्रकाशन कराया जा सके।


 प्रक्रिया इसलिए तेजी से शुरू की गई है, ताकि अगले सत्र के आरंभ में ही विद्यार्थियों को नई पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध कराई जा सकें। कक्षा चार में एनसीईआरटी की सात पाठ्यपुस्तकें पढ़ाई जाती हैं, लेकिन इसमें से शारीरिक शिक्षा व कला वर्तमान में परिषदीय स्कूल में संचालित नहीं है।

कंपोजिट ग्रांट में हिस्सा मांगना पड़ा भारी, भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रयागराज जिले के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित

कंपोजिट ग्रांट में हिस्सा मांगना पड़ा भारी, भ्रष्टाचार की शिकायत पर प्रयागराज जिले के खंड शिक्षा अधिकारी निलंबित

घूस लेने के मामले में तीन अप्रैल को आरोपी से मांगा गया था स्पष्टीकरण


प्रयागराज/मेजा। भ्रष्टाचार के आरोप में खंड शिक्षा अधिकारी उरुवा राजेश यादव को निलंबित कर दिया गया। कार्रवाई अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) ने की है। इससे पहले प्राथमिक विद्यालय मिश्रपुर के प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रदीप पाल ने शिक्षा निदेशक (बेसिक) को शपथ पत्र देकर खंड शिक्षा अधिकारी उरुवा राजेश यादव पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

यही नहीं उच्च प्राथमिक विद्यालय कुंवरपट्टी, उच्च प्राथमिक विद्यालय जेरा, प्राथमिक विद्यालय पकरी की ओर से भी खंड शिक्षा अधिकारी पर भ्रष्टाचार के अलावा कई आरोप लगाए गए थे।

अपर शिक्षा निदेशक (बेसिक) कामता राम पाल ने पदीय दायित्वों के निर्वहन न करने, भ्रष्टाचार करने, उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना करने, अनुशासनहीनता बरतने, शिक्षकों का उत्पीड़न करने आदि आरोपों में खंड शिक्षा अधिकारी राजेश यादव को प्रथम दृष्टया दोषी पाया है। मामले में खंड शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया। यह भी कहा गया है कि निलंबन की अवधि में कार्यालय मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक (बेसिक) प्रयागराज मंडल प्रयागराज से संबद्ध रहेंगे।

दरअसल, शिकायतों के संबंध में शिक्षा निदेशालय ने बीईओ राजेश यादव से तीन अप्रैल को स्पष्टीकरण मांगा था। इस पर बीईओ ने 12 अप्रैल को प्रार्थना पत्र देकर शिकायतों के सापेक्ष साक्ष्य दिखाने का अनुरोध किया। इसके बाद 28 अप्रैल को सभी शिकायतकर्ताओं से सबूत मांगा गया था।

सभी शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्कूल में मरम्मत व साफ-सफाई के लिए मिली 25 से 50 हजार की कम्पोजिट ग्रांट में से राजेश यादव पांच-पांच हजार रुपये ले चुके हैं। इसके बाद भी वेतन और इंक्रीमेंट रुकवाने के साथ निलंबित करवाने की धमकी देकर और रुपयों की मांग करते हैं।


आय-व्यय का ब्योरा मांगा, की 50 हजार की डिमांड

प्रभारी प्रधानाध्यापक प्रदीप कुमार पाल ने पांच मई को सबूत देते हुए बताया कि 17 जनवरी 2025 को सहायक अध्यापक आशीष कुमार संतोषी के सामने पांच हजार रुपये बीईओ को दिए। इसके बाद बीईओ ने मार्च 2025 को उनसे पांच वर्ष का आय-व्यय का ब्यौरा मांगा। इसके बाद एक वर्ष के लिए दस हजार रुपये की दर से कुल 50 हजार रुपये की मांग की।


परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा

परिषदीय स्कूल के बच्चों को DBT के रुपयों का इंतजार, सत्र शुरू हुए 47 दिन बीते, 70 फीसदी बच्चों का ही आधार सत्यापन पूरा


लखनऊ । प्राइमरी स्कूल में सत्र शुरू हुए 47 दिन बीत गए हैं लेकिन अभी तक यूनीफार्म के पैसे अभिभावकों के खाते नहीं पहुंचे हैं। कक्षा एक से आठवीं तक के विद्यार्थियों की यूनीफार्म, स्वेटर, जूते, मोजे व स्टेशनरी के प्रति छात्र 1200 रुपये अभिभावकों के खाते में आने हैं।


 प्रेरणा पोर्टल पर एक लाख से अधिक छात्रों (70 फीसदी) और अभिभावकों के बैंक अकाउंट नंबर, आधार नंबर, आईएफएससी कोड की फीडिंग पूरी हो चुकी है। अभिभावक स्कूल आकर शिक्षकों से यूनीफार्म के पैसे भेजने का दबाव बना रहे हैं।


प्रधानाध्यापकों का कहना है कि स्कूल के पास आउट, प्रोन्नत और नव प्रवेशित करीब 70 फीसदी छात्र-छात्राओं का विवरण प्रेरणा पोर्टल पर अपलोड किया जा चुका है। जो बचे हैं उनका ब्योरा अपलोड किया जा रहा है। 


एडी बेसिक श्याम किशोर तिवारी बताते हैं कि किसी भी दिन अभिभावकों के खाते में यूनीफार्म के पैसे भेजे जा सकते हैं। विभाग की ओर से तैयारियां पूरी हैं। कक्षा वार ब्योरा अपलोड हो गया है

हर मंडल में खुलेंगे इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय, नेचुरोपैथी और योग सहित आयुष की सभी विधाएं एक कैम्पस में होगी उपलब्ध

हर मंडल में खुलेंगे इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय, नेचुरोपैथी और योग सहित आयुष की सभी विधाएं एक कैम्पस में होगी उपलब्ध 


लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को आयुष विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में निर्देश दिया कि प्रदेश के प्रत्येक मंडल में एक इंटीग्रेटेड आयुष महाविद्यालय की स्थापना सुनिश्चित की जाए, जिसमें आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी समेत आयुष की सभी पद्धतियों को एक ही परिसर में मुहैया कराएं।


 उन्होंने कहा कि यह कदम आयुष चिकित्सा पद्धति को सुदृढ़ करेगा, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य-आधारित शिक्षा प्रणाली को भी सशक्त बनाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार आयुष चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड में कार्य कर रही है। 


उन्होंने निर्देश दिया कि सभी आयुष संस्थानों में नेचुरोपैथी और योग सेंटर की स्थापना अनिवार्य रूप से की जाए। कहा कि प्रदेश के हर जनपद में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर प्रारंभ किए जाएं, जो सरकारी या पीपीपी (पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड में संचालित हो सकते हैं।

Friday, May 16, 2025

एक शिक्षक के सहारे चल रहे समाज कल्याण के 109 विद्यालय, मान्यता पर लटकी तलवार

एक शिक्षक के सहारे चल रहे समाज कल्याण के 109 विद्यालय, मान्यता पर लटकी तलवार


प्रयागराज। समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित प्रदेश के 109 विद्यालयों की मान्यता पर तलवार लटकी है। यह विद्यालय वर्षों से एक ही शिक्षक के दम पर संचालित हैं जबकि यहां छात्र संख्या बहुत अधिक है। ऐसे में बेसिक शिक्षा की नियमावली का पालन नहीं हो पा रहा है। विद्यालयों को पूर्व में शासन स्तर से दो नोटिस दिया जा चुका है। अब तीसरे नोटिस के बाद भर्ती या समायोजन न करने पर इनकी मान्यता रद्द की जा सकती है। ऐसे सर्वाधिक 14 विद्यालय प्रयागराज में संचालित हैं।


पिछले दिनों निदेशक समाज कल्याण ने प्रदेश के सभी उप निदेशकों व जिला समाज कल्याण अधिकारियों के साथ बैठक की। इस दौरान प्रयागराज का जिक्र आते ही कहा कि यहां पर एकल विद्यालयों की स्थिति क्या है। उप निदेशक समाज कल्याण सुधीर कुमार ने बताया कि जिले में 14 विद्यालय हैं। इन विद्यालयों को पूर्व में दो नोटिस दिया गया है। जिसमें इन्हें कहा गया है कि या तो यह शिक्षकों की भर्ती करें अन्यथा दो विद्यालयों को समायोजित किए जाए लेकिन इन विद्यालयों ने दोनों ही विकल्पों पर सहमति नहीं दी। अब निदेशक ने प्रदेशभर के ऐसे विद्यालयों को एक और नोटिस देकर उचित कार्रवाई के लिए कहा। साथ ही कहा कि अगर ऐसा नहीं करते हैं तो इन विद्यालयों की मान्यता समाप्त करने के लिए शासन को पत्र लिखा जाए।


चार विद्यालयों में एक भी ट्रेंड शिक्षक नहीं: प्रदेश में चार विद्यालय ऐसे भी हैं जहां एक भी ट्रेंड या नियमित शिक्षक नहीं हैं। यहां पर शिक्षा मित्रों के सहारे काम चल रहा है। इसमें आजमगढ़ गौसपुर घुरी का राष्ट्रीय अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला, देवरिया भीखमपुर का अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला, हरदोई मोहकमपुर का अनुसूचित जाति प्राथमिक पाठशाला और हेमनखेड़ा का मोतीलाल कृषक शिक्षा निकेतन शामिल है।


मंडल के विद्यालयों की स्थिति: बाल विद्यालय नयापुरा में 15, कन्या प्राथमिक पाठशाला रमन का पुरा में 12, शांति शिक्षा सदन राजापुर में नौ, जन सेवा समिति प्राथमिक विद्यालय महाजना हंडिया में आठ, हरिजन कन्या प्राथमिक पाठशाला मलाकराज में सात, वाल्मीकि कन्या प्राथमिक विद्यालय न्याय मार्ग में पांच तथा आदिवासी प्राथमिक पाठशाला खरका, आदिवासी प्राथमिक पाठशाला घोरी, आदिवासी प्राथमिक विद्यालय अकबरशाहपुर, आदिवासी प्राथमिक विद्यालय मंगलपुर, आदिवासी प्राथमिक विद्यालय पटेहरा, आदिवासी प्राथमिक विद्यालय पटेहरी, आदिवासी प्राथमिक विद्यालय कोइहला, कस्तूरबा गांधी कन्या विद्यालय चौखटा में शिक्षकों के दो-दो पद स्वीकृत हैं पर एक ही शिक्षक कार्यरत है। उधर, कौशाम्बी के गौतमबुद्ध प्राथमिक विद्यालय में सात शिक्षकों के सापेक्ष सिर्फ एक शिक्षक की तैनाती है।


जिन एकल विद्यालयों में स्वीकृत पद के सापेक्ष भर्ती नहीं की गई है, उन्हें समायोजन का विकल्प दिया गया है। इस पर जो लोग राजी नहीं होंगे, उनके विद्यालय की मान्यता समाप्त करने के लिए पत्र लिखा जाएगा। –सुधीर कुमार, उप निदेशक समाज कल्याण


क्यों नहीं हो रही है भर्ती

प्रयागराज। अफसरों का कहना है कि भर्ती के लिए रिक्त पदों का विज्ञापन विद्यालय प्रबंध तंत्र को देना होता है। इन विद्यालयों की ओर से कोई विज्ञापन नहीं दिया जा रहा है। अधिकांश मामलों में विज्ञापन जारी होते ही मामला कोर्ट में चला जाता है। इससे बचने के लिए विद्यालय प्रबंध तंत्र कोई भर्ती नहीं निकालता है। 

गीष्मावकाश में प्रदेश के समस्त राजकीय, आशसकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में समर कैम्प आयोजन के सम्बन्ध में।

प्रदेश के एडेड और स्ववित्तपोषित विद्यालयों में समर कैंप की अनिवार्यता नहीं, विरोध के बाद बदला फैसला, पूर्व में जारी आदेश संशोधित 
 

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) व स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में समर कैंप के आयोजन की अनिर्वायता नहीं होगी। यह विद्यालय अपनी स्वेच्छा (ऐच्छिक रूप) से समर कैंप का आयोजन करेंगे। इतना ही नहीं कैंप का आयोजन विद्यार्थियों, अभिभावकों व शिक्षकों की सहमति से ही किया जाएगा। जबकि राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में कैंप का आयोजन पूर्व की भांति 21 मई से किया जाएगा।


शिक्षक संगठनों के विरोध में आने पर विभाग ने अपना पूर्व में जारी आदेश संशोधित कर दिया है। समग्र शिक्षा के अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णुकांत पांडेय की ओर से बृहस्पतिवार को जारी निर्देश में कहा गया है कि एडेड व सेल्फ फाइनेंस विद्यालय अपने भौतिक व वित्तीय संसाधनों को देखते हुए ऐच्छिक रूप से समर कैंप के आयोजन का निर्णय लेंगे। इसकी सूचना डीआईओएस को भी देंगे। समर कैंप का आयोजन विद्यार्थियों, अभिभावकों व शिक्षकों की सहमति से होगा।


जबकि इससे पहले उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (चंदेल गुट) के संरक्षक व विधान परिषद सदस्य राज बहादुर सिंह चंदेल ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र लिखकर समर कैंप को स्थगित करने की मांग किया है। उन्होंने कहा कि इस भीषण गर्मी में समर कैंप अप्रासंगिक है। इससे बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने समर कैंप के आयोजन को असंवैधानिक बताते हुए इसके बहिष्कार की घोषणा की है।


संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार सिंह पटेल ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा से भीषण गर्मी को देखते हुए इसे स्थगित करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि गर्मी को देखते हुए ही स्कूलों में छुट्टी का प्रावधान किया गया है। संघ के प्रादेशिक उपाध्यक्ष ओम प्रकाश त्रिपाठी ने समर कैंप के आयोजन को तत्काल स्थगित करके आगे कार्य दिवसों में ऐसे आयोजन कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि समर कैंप का आदेश जब तक स्थगित नहीं होता है, तब तक शिक्षक इसका क़ाली पट्टी बांधकर अपना विरोध जताएंगे। वहीं माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कुमार त्रिपाठी व महामंत्री नरेंद्र कुमार वर्मा ने भी महानिदेशक स्कूल शिक्षा को पत्र लिखकर प्रदेश के अधिकतर जिलों में 40 डिग्री से अधिक तापमान है। बुंदेलखंड में लू चल रही है। विद्यालयों में न तो कूलर हैं न ही पर्याप्त पंखे ही। ऐसे में समर कैंप का आयोजन बच्चों के स्वास्थ्य के हित में नहीं है। एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर समर कैंप का आदेश वापस लेने की मांग की है।


दिए गए हैं निर्देश

- समर कैंप में आने वाले शिक्षकों को नियमानुसार छुट्टी दी जाएगी
- बिना अभिभावक की सहमति के छात्रों को स्कूल में नहीं रोकेंगे
- धूप में किसी प्रकार की गतिविधि नहीं आयोजित करेंगे
- समर कैंप में छात्रों को किसी तरह का तनाव नहीं देंगे
- किसी भी गतिविधि में शामिल होने के लिए छात्रों को बाध्य नहीं करेंगे


ग्रीष्मावकाश में प्रदेश के समस्त राजकीय, अशासकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में समर कैम्प आयोजन के सम्बन्ध में



समर कैम्प में जो शिक्षक आएंगे उन्हें मिलेगा उपार्जित अवकाश, शिक्षक संगठनों के विरोध को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस बारे में जारी शासनादेश की ओर सभी पक्षों का ध्यान आकृष्ट किया


लखनऊ। स्कूलों में समर कैम्प आयोजित किए जाने को लेकर शिक्षक संगठनों के विरोध को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा विभाग ने इस बारे में जारी शासनादेश की ओर सभी पक्षों का ध्यान आकृष्ट किया है। बीते सात मई को स्कूल शिक्षा महानिदेशक कंचन वर्मा की ओर से जारी आदेश में भी इसका स्पष्ट उल्लेख है कि ग्रीष्मावकाश के दौरान 21 मई से 10 जून तक आयोजित होने वाले समर कैम्प में ड्यूटी करना सभी शिक्षकों के लिए अनिवार्य नहीं है।

साथ ही यह भी प्रावधान किया गया है कि जो शिक्षक समर कैम्प में बुलाए जाएंगे चाहे वे राजकीय विद्यालयों के हों या अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के हों उन्हें नियमानुसार उपार्जित अवकाश दिया जाएगा। समर कैम्प में भाग लेने वाले विद्यार्थियों को लेकर भी बकायदा स्पष्ट निर्देश हैं कि विद्यार्थियों के अभिभावकों से 16 मई से पूर्व लिखित सहमति अवश्य प्राप्त कर ली जाए। तय तिथि के दौरान विद्यालयों में खोज एवं खेल-खेल में सीखने के उद्देश्य से समर कैम्प का आयोजन किया जा रहा है ताकि विद्यार्थी नियमित पढ़ाई से भिन्न रोचक गतिविधियों का आनन्द ले सकें।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि ग्रीष्मावकाश के दौरान प्राइवेट विद्यालयों में समर कैम्प का आयोजन किया जाता है। जिसमें विद्यार्थी जीवन कौशल, खेल, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां सीखते हैं, जबकि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थी इससे वंचित रह जाते हैं। इसी को दृष्टिगत रखते हुए विद्यार्थियों में जीवन कौशल, खेल, आत्मविश्वास, टीम वर्क, कैरियर गाइडेंस आदि की भावना को जागृत करने के लिए समर कैम्प के आयोजन कराया जा रहा है। हालांकि अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में समर कैम्प का आयोजन प्रधानाचार्य/शिक्षक स्वेच्छानुसार कर सकते हैं।



सहायता प्राप्त व स्ववित्तपोषित कॉलेजों में भी होंगे समर कैंपडीएम की अध्यक्षता में बनी कमेटी कराएगी आयोजन, विभाग ने 21 मई से 10 जून का विस्तृत कार्यक्रम भी किया जारी

लखनऊ। प्रदेश में गर्मी की छुट्टियों में राजकीय ही नहीं अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में भी समर कैंप आयोजित किए जाएंगे। खास यह कि शिक्षकों के विरोध को देखते हुए जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली कमेटी को समर कैंप के आयोजन की जिम्मेदारी दी गई है।

कैंप के आयोजन, अनुश्रवण व पर्यवेक्षण के लिए डीएम की अध्यक्षता में सात सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। राज्य परियोजना निदेशालय के अनुसार 21 मई से 10 जून तक समर कैंप का आयोजन किया जा रहा है। निदेशालय ने कहा है कि इस दौरान विद्यार्थियों में रचनात्मक सोच विकसित करने, टीम वर्ग, आत्मविश्वास, जीवन कौशल का विकास, सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्यों की समझ, खेलकूद, कला, विज्ञान व सांस्कृतिक गतिविधियों से छात्रों का समग्र विकास किया जाएगा। निदेशालय ने कहा है कि 13 मई तक सभी कॉलेजों में बैठक कर इसकी तैयारी कर ली जाए। ब्लॉक स्तर पर कम से कम एक राजपत्रित अधिकारी को नोडल बनाया जाए। कैंप की व्यवस्था डीआईओएस के माध्यम से कराई जाए। कैंप न्यूनतम तीन घंटे का होगा।

कैंप में यह होंगी गतिविधियां

निदेशालय के अनुसार कैंप में सुबह योग व व्यायाम। रस्साकशी, म्यूजिकल चेयर व रस्सी कूद, खो-खो, फुटबाल, रंगोली, मिट्टी कला, कॅरिअर गाइडेंस से संबंधित गतिविधि व जानकारी दी जाएगी। वहीं बेसिक लाइफ सपोर्ट, सीपीआर, वीडियो एडिटिंग, साइबर सुरक्षा जैसी तमाम अन्य जानकारियां दी जाएंगी।

शिक्षकों को दिया जाएगा उपार्जित अवकाश: महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा ने कहा है कि कैंप में सभी विद्यालयों के प्रधानाचार्य की उपस्थिति अनिवार्य है। वहीं 100 छात्र संख्या वाले विद्यालयों में एक प्रधानाचार्य और एक शिक्षक स्कूल आएंगे। अगर छात्र संख्या 100 से ज्यादा है तो दो शिक्षकों को बुलाया जाएगा। इस दौरान आने वाले शिक्षकों को नियमानुसार उपार्जित अवकाश दिया जाएगा।



यूपी के माध्यमिक विद्यालयों में भी होगा समर कैंप, 21 मई से 10 जून तक होगा आयोजन, रोजाना होंगी अलग-अलग गतिविधियां

गीष्मावकाश में प्रदेश के समस्त राजकीय, आशसकीय सहायता प्राप्त एवं स्ववित्तपोषित माध्यमिक विद्यालयों में समर कैम्प आयोजन के सम्बन्ध में।

प्रदेश के समस्त माध्यमिक विद्यालयों में 21 मई से 10 जून 2025 तक होगा समर कैंप का आयोजन, देखें आदेश 


Wednesday, May 14, 2025

CBSE Results : 10वीं-12वीं में बेटियों का जलवा, 10वीं में 93.66% और 12वीं में 88.39% विद्यार्थी पास

CBSE  Results : 10वीं-12वीं में बेटियों का जलवा,  10वीं में 93.66% और 12वीं में 88.39% विद्यार्थी पास

10वीं में करीब 2.5% व 12वीं में करीब 6% लड़कियां ज्यादा पास


नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने 10वीं और 12वीं के नतीजे घोषित कर दिए। परिणाम में बेटियों फिर छाई हुई हैं। लड़कों की तुलना में हाईस्कूल में करीब ढाई फीसदी और इंटरमीडिएट में करीब छह फीसदी ज्यादा लड़कियां पास हुई हैं।


10वीं में 93.66 फीसदी विद्यार्थी पास हुए, जो पिछले वर्ष के 93.60 फीसदी से 0.06 फीसदी ज्यादा हैं। वहीं, 12वीं में 88.39 फीसदी परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। यह पिछले साल के 87.98 फीसदी की तुलना में 0.41 फीसदी अधिक है। हालांकि, 12वीं में 90 फीसदी या अधिक अंक लाने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बीते साल के मुकाबले हल्की गिरावट है।


सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज के अनुसार, 10वीं में 95 फीसदी छात्राएं व 92.63 फीसदी छात्र पास हुए हैं। ट्रांसजेंडर अभ्यर्थियों का पास प्रतिशत 95 रहा, जबकि पिछले साल यह 91.30 प्रतिशत था। 12वीं में 91.64 प्रतिशत लड़कियां और 85.70 प्रतिशत लड़के सफल हुए हैं। इस बार सभी ट्रांसजेंडर परीक्षार्थी सफल रहे। उनका पास प्रतिशत पिछले साल के 50 प्रतिशत से दोगुना है।


विजयवाड़ा क्षेत्र अव्वल, प्रयागराज पीछे 
12वीं में विजयवाड़ा क्षेत्र में सबसे अधिक 99.60 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। त्रिवेंद्रम 99.32 प्रतिशत परिणाम के साथ दूसरे स्थान पर रहा। प्रयागराज क्षेत्र में सबसे कम 79.53 प्रतिशत विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। 


पीएम मोदी ने दी बधाई, बढ़ाया हौसला 
सभी विद्यार्थियों को हार्दिक बधाई। यह आपके दृढ़ संकल्प, अनुशासन व कड़ी मेहनत का नतीजा है। आज का दिन माता-पिता, शिक्षकों और अन्य सभी लोगों की भूमिका स्वीकार करने का भी दिन है, जिन्होंने इस उपलब्धि में योगदान दिया है। परीक्षा योद्धाओं को आगे आने वाले सभी अवसरों में सफलता की शुभकामनाएं। नरेंद्र मोदी, पीएम


नीचे दिए लिंक से क्लिक करके रिजल्ट देख सकते हैं


मदरसे के विद्यार्थी पढ़ेंगे विज्ञान व गणित, मदरसा बोर्ड के कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम में होगा बदलाव

मदरसे के विद्यार्थी पढ़ेंगे विज्ञान व गणित, मदरसा बोर्ड के कक्षा 9 से 12 तक के पाठ्यक्रम में होगा बदलाव


लखनऊ। मदरसे में कक्षा-9 से 12 तक के विद्यार्थियों को विज्ञान और गणित जैसे विषय भी पढ़ाए जाएंगे। यूपी बोर्ड की तर्ज पर इन विषयों को मदरसा बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। इसके लिए शीघ्र ही निदेशक समाज कल्याण की अध्यक्षता में गठित कमेटी की बैठक होगी।


प्रदेश में वर्तमान में 13329 मान्यता प्राप्त मदरसे संचालित हैं। इनमें 1235400 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इन मदरसों में 9,979 प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 1 से 8) और 3,350 माध्यमिक व उच्चतर माध्यमिक स्तर (कक्षा 9 से 12) के हैं। इनमें से 561 मदरसे राज्य सरकार से अनुदानित हैं, जिनमें कुल 231806 छात्र पंजीकृत हैं।


इन मदरसों में कक्षा 1-8 तक का पाठ्यक्रम लगभग बेसिक शिक्षा परिषद के समान है, लेकिन कक्षा-9 से 12 में अभी विज्ञान और गणित जैसे विषय नहीं पढ़ाए जाते हैं। उच्चस्तर पर फैसला किया गया है कि इन विद्यार्थियों को भी उर्दू, अरबी, फारसी और अंग्रेजी भाषा के साथ विज्ञान और गणित जैसे आधुनिक विषय भी अनिवार्य रूप से पढ़ाए जाएं।

सामान्य तबादले शुरू करने के लिए परिषदीय शिक्षकों ने किया प्रदर्शन

सामान्य तबादले शुरू करने के लिए परिषदीय शिक्षकों ने किया प्रदर्शन


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालय के शिक्षकों ने मंगलवार को महानिदेशक स्कूल शिक्षा कार्यालय पर सामान्य तबादले शुरू की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। शिक्षकों ने कहा कि वे कई साल से इसके लिए इंतजार कर रहे हैं लेकिन विभाग इस पर न तो कोई निर्णय ले रहा है न ही कोई सूचना दे रहा है। इससे शिक्षकों के बीच नाराजगी बढ़ रही है।


विभिन्न जिलों से आए शिक्षकों की महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा से मुलाकात हुई। इसमें शिक्षकों ने वरिष्ठता आधारित तबादला नीति जारी करने और इसी मई-जून में गर्मी की छुट्टियों में सामान्य तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने की मांग की।


महानिदेशक ने इस पर सकारात्मक निर्णय का आश्वासन दिया। महानिदेशक से मिलने वालों में राजीव गौड़, तीर्थमणि त्रिपाठी, हंसराज सिंह, अंशु सिंह, धर्मेन्द्र, ज्ञान प्रकाश, योगेन्द्र सिंह, हरेन्द्र सिंह, धर्मेन्द्र सिसोदिया, राहुल पुरोहित आदि शामिल थे।

ऑनलाइन प्रक्रिया की दिक्कतों के चलते बेसिक शिक्षकों को ऑफलाइन चयन वेतनमान स्वीकृत करने की PSPSA की मांग

ऑनलाइन प्रक्रिया की दिक्कतों के चलते बेसिक शिक्षकों को ऑफलाइन चयन वेतनमान स्वीकृत करने की PSPSA की मांग


लखनऊ। प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों के परस्पर तबादलों की तरह ही उनकी चयन वेतनमान की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हो रही है। इसे लेकर शिक्षकों में नाराजगी है। शिक्षकों ने महानिदेशक स्कूल शिक्षा कंचन वर्मा को ज्ञापन भेजकर इसकी प्रक्रिया समय से पूरा कराने की मांग की है।

प्राथमिक शिक्षक प्रशिक्षित स्नातक एसोसिएशन ने महानिदेशक को भेजे पत्र में कहा है कि एक जनवरी 2025 से एक ही पद पर 10 साल की संतोषजनक सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों की ऑनलाइन मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से चयन वेतनमान स्वीकृत करने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसमें विभिन्न स्तर की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बीएसए चयन वेतनमान स्वीकृत करेंगे।

एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष विनय कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रक्रिया में लाभार्थी शिक्षक को अपने स्तर से कोई भी प्रक्रिया नहीं करनी है। इसके लिए पोर्टल पर कोई विकल्प भी नहीं है। वह केवल स्टेटस देख सकता है। उन्होंने बताया कि लगभग चार महीने बाद भी कुछ जगहों पर पहले चरण की ही प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है। न ही इस संबंध में जानकारी दी गई है। कुछ शिक्षकों का इनीशियल कैडर अभी तक अपडेट नहीं किया गया है। इसके कारण भी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है। ऐसे में उन्होंने लंबित चयन वेतनमान की प्रक्रिया पहले की भांति ऑफलाइन स्वीकृत करने के लिए निर्देश जारी करने की मांग की है। 


Tuesday, May 13, 2025

छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई : छात्रों के लिए एकल पंजीकरण होगा अनिवार्य, गड़बड़ियां रोकने को चालू वित्त वर्ष में ही लागू होगी व्यवस्था, हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र पाते हैं योजना का लाभ

छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई : छात्रों के लिए एकल पंजीकरण होगा अनिवार्य, गड़बड़ियां रोकने को चालू वित्त वर्ष में ही लागू होगी व्यवस्था, हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र पाते हैं योजना का लाभ


लखनऊ। छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई योजना में अब छात्रों के लिए एकल पंजीकरण (ओटीआर) अनिवार्य होगा। गड़बड़ियां रोकने के लिए चालू वित्त वर्ष में ही यह व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई गई है। इस योजना में हर साल 50 लाख से ज्यादा छात्र लाभांवित होते हैं।


प्रदेश में छात्रवृत्ति योजनाएं कई विभागों से संचालित होती है। यहां तक कि किसान परिवारों के छात्रों के लिए मंडी परिषद भी यह योजना चलाती है। एक ही वित्त वर्ष में छात्र एक से अधिक योजनाओं में लाभ न पा सके, इसके लिए वन टाइम पंजीकरण (ओटीआर) की व्यवस्था अनिवार्य करने का फैसला किया गया है।


इसके तहत प्रत्येक छात्र को अब योजना का लाभ लेने के लिए राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण (ओटीआर) कराना होगा। राज्य सरकार के पोर्टल पर भी आवेदन करते समय यह ओटीआर बताना होगा। खास बात यह है कि छात्र को पूरे विद्यार्थी जीवन में सिर्फ एक बार ओटीआर लेना होगा। समाज कल्याण विभाग के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में ही सभी छात्रों को ओटीआर लेना अनिवार्य होगा।



छात्रवृत्ति में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर होगी कार्रवाई : 
छात्रवृत्ति और शुल्क भरपाई के भुगतान में देरी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होगी। मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि, गोरखपुर समेत कई संस्थानों के इस तरह के मामलों की जांच की जा रही है। जिलास्तर पर छात्रवृत्ति का डाटा लॉक न किए जाने से इस तरह की दिक्कतें पैदा हुई हैं। प्रदेश सरकार ने इस योजना में शत-प्रतिशत पात्र छात्रों को भुगतान के आदेश दिए हैं। इसके लिए अगले वित्त वर्ष के बजट से भी छूटे छात्रों को भुगतान की व्यवस्था की जा रही है। 


वित्त वर्ष 2024-25 में देखने में आया कि मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विवि, गोरखपुर के तमाम छात्रों का डाटा ही तय तिथि तक लॉक नहीं किया गया। इस वजह से 31 मार्च तक छात्र योजना का लाभ नहीं पा सके। प्रकरण में उच्चस्तर पर शिकायत हुई तो इन छात्रों को नए वित्त वर्ष में दो मई तक भुगतान हो सका। शासन इन मामलों की जांच करा रहा है कि किसी तकनीकी कारण से डाटा पोर्टल पर शो नहीं हुआ या फिर संबंधित अधिकारियों की लापरवाही रही। प्रमुख सचिव, पिछड़ा वर्ग कल्याण सुभाष शर्मा ने बताया कि निदेशालय से रिपोर्ट मांगी गई है। जो भी दोषी होंगे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी।