DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, June 8, 2021

नवीन पेंशन योजना के अंतर्गत कटौती के बाद राज्यांश को शिक्षकों के खाते में नियत समय पर न भेजने पर शिक्षक खफा

नवीन पेंशन योजना के अंतर्गत कटौती के बाद राज्यांश को शिक्षकों के खाते में नियत समय पर न भेजने पर शिक्षक खफा


प्रयागराज:- उत्तर प्रदेशीय जूनियर हाई स्कूल (पूमा) शिक्षक संघ की ओर से मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय पेंशन योजना से आच्छादित शिक्षकों के वेतन से दस प्रतिशत की कटौती नियमित हो रही है। वह राशि शिक्षकों के खाते में नहीं भेजी जा रही। यह समस्या लगभग प्रत्येक जिले में है। कुछ जगहों पर इसके लिए एनएसडीएल को जिम्मेदार बनाया गया है।


कई माह तक शिक्षकों के खाते में राशि नहीं आती

संघ का कहना है कि योजना के तहत 14 प्रतिशत धनराशि राज्यांश के तहत उस शिक्षक के प्रान खाते में हस्तांतरित होने का भी प्रावधान है। हालांकि इस राज्यांश के हस्तांतरण होने में लगभग आठ से दस महीने तक का समय लगता है। इसके लिए बजट का न होना बताया जाता है। कभी कभी देखा गया है कि बजट की घोषणा होने के बाद भी कई महीने तक खाते में राशि नहीं दिखाई देती।



आर्थिक क्षति वाली योजना साबित हो रही 

शिक्षक नेता बृजेंद्र सिंह ने बताया कि जब राज्यांश प्रेषित किया जाता है तो उसका ब्याज नियत तिथि से न देकर राशि के प्रेषण तिथि से दिया जाता है। इन समस्याओं से इस योजना का लाभ मिलना तो दूर बल्कि अत्यधिक आर्थिक क्षति वाली योजना साबित हो रही है। कई शिक्षक कर्मचारी पुरानी पेंशन योजना का लाभ ले रहे हैं। कुछ  नई पेंशन स्कीम से आच्छादित हैं। वे जब अपने लाभ को पुरानी पेंशन स्कीम से तुलना करते हैं तो नई पेशन स्कीम उन्हें घाटे की प्रतीत होती है। यही वजह है कि नई पेशन स्कीम को शिक्षक, कर्मचारी स्वीकार करने को तैयार नहीं है।

No comments:
Write comments