यूपी डीएलएड : खोजे नहीं मिल रहे छात्र, 25 से ज्यादा कॉलेज मान्यता छोड़ने को तैयार, कई प्राइवेट कॉलेज ऐसे जहां शून्य प्रवेश, एक लाख से अधिक सीटें खाली रहने का अनुमान
प्रयागराज। परिषदीय स्कूलों में शिक्षक बनने के लिए अनिवार्य डीएलएड कोर्स के प्रति छात्र-छात्राओं की रुचि साल दर साल कम होती जा रही है। इस बार कई कॉलेजों को अभी तक एक भी विद्यार्थी नहीं मिला है। ऐसे में गौतमबुद्धनगर, आगरा, उन्नाव, कानपुर समेत अन्य जिलों के 25 से ज्यादा प्राइवेट कॉलेजों ने मान्यता खत्म करने के लिए आवेदन कर दिया है।
इस वर्ष प्रदेश में एक लाख से ज्यादा सीटों के खाली रहने का अनुमान है। आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में डीएलएड की कुल 2,39,500 सीटें हैं जिनमें महज 1,70,332 अभ्यर्थियों ने प्रवेश के लिए पंजीकरण कराया है। इनमें भी 18130 अभ्यर्थियों ने फीस नहीं जमा की है। इससे अब 1,52,202 अभ्यर्थी ही बचे हैं। इस स्थिति में करीब एक लाख सीटों पर दाखिला नहीं हो पाएगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि छात्रों को डीएलएड कोर्स नहीं भा रहा है।
दरअसल, पहले बीटीसी करने के बाद प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षक बनना आसान होता था। मौजूदा समय में प्रदेश भर में लाखों की संख्या में छात्र डीएलएड करने के बाद नौकरी की राह देख रहे हैं।
पिछले वर्ष भी खाली रह गई थीं 1.43 लाख सीटें
वर्ष 2025 में भी यही स्थिति रही। 2,39,500 सीटों के सापेक्ष 1,38, 860 छात्र-छात्राओं ने आवेदन किए थे। इनमें 1.25 लाख अभ्यर्थियों ने फीस जमा की। लेकिन, 95,769 अभ्यर्थियों ने ही कॉलेज में प्रवेश लिया। ये सभी प्रवेश प्रदेश के कुल 3103 प्राइवेट, 66 डायट व राजकीय कॉलेज तथा 253 अल्पसंख्यक कॉलेजों में हुए थे
पहले की अपेक्षा डीएलएड में कम छात्र प्रवेश ले रहे हैं। यही कारण है कि करीब 25 डीएलएड कॉलेज संचालकों ने आवेदन कर कॉलेज से इस कोर्स की मान्यता खत्म करने की बात कही है। - राजेंद्र प्रताप सचिव, उप्र परीक्षा नियामक प्राधिकारी, प्रयागराज
No comments:
Write comments