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Friday, September 23, 2022

एडेड माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन का आदेश जारी

माध्यमिक में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया तय

एडेड माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन का आदेश जारी

माध्यमिक स्कूलों में सबसे बाद में आया शिक्षक माना जाएगा सरप्लस


लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा एडेड स्कूल में सबसे बाद में भर्ती या फिर दूसरे स्कूल से ट्रांसफर होकर आए शिक्षक को सरप्लस माना जाएगा। इन स्कूलों में पहले के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है, ऐसे में छात्र- शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षक समायोजित किए जाएंगे। इन्हें दूसरे विद्यालयों में ट्रांसफर किया जाएगा और इनका पद समाप्त किया जाएगा। अगर स्थानांतरण संभव नहीं है तो विद्यालय की भावी रिक्तियों में इन्हें समायोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश व मंडल स्तर पर दो कमेटियां गठित की गई हैं।


प्रमुख सचिव, माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। मगर ऐसे शिक्षक जो स्वयं कैंसर, लीवर व किडनी जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त शिक्षकों को एम्स, पीजीआइ, मेडिकल कालेज व चिकित्सा बोर्ड द्वारा जारी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर इन्हें सरप्लस की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। 


ऐसे शिक्षक जो खुद दिव्यांग हैं या फिर उनके स्वजन दिव्यांग हैं या फिर गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, विवाहित महिला शिक्षक जिसका बच्चा आटिस्टिक है या 40 प्रतिशत दिव्यांग है, ऐसे शिक्षक जिनके पति या पत्नी सेना में हैं, ऐसी विधवा महिला या विधुर पुरुष जिन्होंने दूसरी शादी नहीं की है और वह एकल अभिभावक उन्हें भी सरप्लस शिक्षकों की श्रेणी से छूट दी जाएगी। 


सरप्लस शिक्षकों को चिह्नित करने के लिए प्रदेश स्तर पर माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय और मंडल स्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है।


लखनऊ। एडेड माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन की प्रक्रिया प्रक्रिया तय कर दी गई है। इसमें सबसे सरप्लस शिक्षक वह होगा जिसने सबसे बाद में स्कूल में कार्यभार ग्रहण किया हो हालांकि कुछ श्रेणियों के शिक्षकों को इससे छूट दी गई है।


माध्यमिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव दीपक कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है। जिन स्कूलों में शिक्षक कम है वहां इन्हें स्थानांतरित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने एडेड स्कूलों के सरप्लस शिक्षकों के समायोजन के निर्देश दिए थे। प्रदेश में लगभग 4500 सहायताप्राप्त स्कूल हैं।


काफी वर्ष पहले सरकार ने यहां जनशक्ति निर्धारण करवाया था। इन स्कूलों में छात्रसंख्या कम हो गई लेकिन पद पहले की संख्या के आधार पर ही रहे। अब जिन स्कूलों में शिक्षक कम हैं वे विषयवार सूची तैयार करेंगे ताकि उन्हें बच्चों की संख्या के मुताबिक शिक्षक मिल सके। 


सरप्लस शिक्षक के निर्धारण के लिए सबसे बाद में आने वाले यानी लास्ट कम फर्स्ट आउट के सिद्धांत का पालन किया जाएगा। लेकिन इसमें स्वयं या पति पत्नी को कैंसर, एड्स, किडनी, लीवर जैसी असाध्य बीमारियों से ग्रसित होने या फिर विधवा या विधुर शिक्षक जिन पर बच्चों के पालने की जिम्मेदारी हो, सेना-वायु सेना समेत अन्य बलों में कार्यरत लोगों के जीवनसाथी और विवाहित महिला शिक्षक जिसका बच्चा ऑटिस्टिक से पीड़ित हो, तो उस पर यह सिद्धांत लागू नहीं होगा। इन सभी के लिए निर्धारित प्रमाणपत्र लगाने पर ही छूट दी जाएगी।


इसके प्रस्तावों पर विचार करने के लिए शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। वहीं मंडल् स्तर पर मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक की अध्याक्षता मे मंडल स्तर कमेटी का गठन किया गया है।



एडेड माध्यमिक स्कूलों में सबसे बाद में आया शिक्षक होगा सरप्लस


लखनऊ : अशासकीय सहायता प्राप्त (एडेड) माध्यमिक स्कूलों में सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण की प्रक्रिया तय कर दी गई है। माध्यमिक शिक्षा विभाग द्वारा एडेड स्कूल में सबसे बाद में भर्ती या फिर दूसरे स्कूल से ट्रांसफर होकर आए शिक्षक को सरप्लस माना जाएगा। इन स्कूलों में पहले के मुकाबले विद्यार्थियों की संख्या कम हुई है, ऐसे में छात्र - शिक्षक अनुपात के अनुसार शिक्षक समायोजित किए जाएंगे। इन्हें दूसरे विद्यालयों में ट्रांसफर किया जाएगा और इनका पद समाप्त किया जाएगा। अगर स्थानांतरण संभव नहीं है तो विद्यालय की भावी रिक्तियों में इन्हें समायोजित किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश व मंडल स्तर पर दो कमेटियां गठित की गई हैं।


प्रमुख सचिव, माध्यमिक शिक्षा दीपक कुमार की ओर से आदेश जारी कर दिए गए हैं। मगर ऐसे शिक्षक जो स्वयं कैंसर, लीवर व किडनी जैसे गंभीर रोगों से ग्रस्त शिक्षकों को प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने पर इन्हें सरप्लस की श्रेणी में नहीं माना जाएगा। ऐसे शिक्षक जो खुद दिव्यांग हैं या फिर उनके स्वजन दिव्यांग हैं या फिर गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, विवाहित महिला शिक्षक जिसका बच्चा आटिस्टिक है या 40 प्रतिशत दिव्यांग है, ऐसे शिक्षक जिनके पति या पत्नी सेना में हैं, उन्हें भी सरप्लस शिक्षकों की श्रेणी से छूट दी जाएगी।


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