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Wednesday, September 14, 2022

मदरसों के सर्वे पर तकरार : बोर्ड के चेयरमैन ने स्पष्ट की स्थिति, कहा- सर्वेक्षण कोई जांच नहीं

मदरसों के सर्वे पर तकरार :  बोर्ड के चेयरमैन ने स्पष्ट की स्थिति, कहा- सर्वेक्षण कोई जांच नहीं


उत्तर प्रदेश.मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा.इफ्तेखार जावेद स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ किया कि सर्वेक्षण कोई जांच नहीं है। सर्वेक्षण को लेकर सरकार की मंशा भी स्पष्ट की और इसका कारण भी बताया।


यूपी में मदरसों का सर्वेक्षण शुरू हो चुका है। सर्वेक्षण की घोषणा के बाद से ही सत्ता पक्ष और विपक्ष में इसे लेकर वार-पलटवार चल रहा है। अभी तक राजनीतिक दलों के नेताओं और कुछ मुस्लिम संगठनों की तरफ से बयानबाजी आ रही थी। अब उत्तर प्रदेश.मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा.इफ्तेखार जावेद स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने साफ किया कि सर्वेक्षण कोई जांच नहीं है। सर्वेक्षण को लेकर सरकार की मंशा भी स्पष्ट की।


कहा कि उत्तर प्रदेश में कुल 16,513 मान्यता प्राप्त मदरसे हैं, जिनमें से 560 मदरसों को सरकार उनके शिक्षकों व कर्मचारियों का वेतन देती है। प्रदेश में ऐसे कितने मदरसे हैं जिनकी मान्यता नहीं है, उनकी गिनती नहीं हो पा रही है। समय-समय पर जब मदरसों पर उंगलियां उठती हैं तो फिर सवाल उठते हैं कि यह कौन-सा मदरसा है? क्या यह मान्यता प्राप्त मदरसा है या ग़ैर-मान्यता प्राप्त मदरसा है या फिर अनुदान से चलने वाला मदरसा है? 


उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद रिकॉर्ड ठीक होना चाहिए, इसके लिए सर्वे किया जा रहा है। जिससे मालूम हो सके कि कितने मदरसे और हैं ताकि आने वाले समय में उनको भी हम वो सुविधाएं दे सकें जो हम दूसरे मदरसों के बच्चों को दे रहे हैं। इस सर्वे को जांच बिल्कुल भी न समझा जाए।


उन्होंने गैर मान्यता मदरसों के हो रहे सर्वे में सहयोग की अपील की है। प्रदेश सरकार गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे करा रही है़।  डॉ. जावेद ने कहा कि मदरसों की सारी चीज़ें डिज़िटल हों और सभी जानकारी पोर्टल पर दर्ज़ हो। हमारा प्रयास है़ कि मदरसों की सारी चीज़ें पारदर्शी हों। प्रदेश के सभी मदरसे बेहतरीन तरीक़े से बच्चों को शिक्षित कर रहे हैं।


सामाज के चंदे व जकात के पैसे से चलने वाले  मदरसे समाज के ग़रीब, कमज़ोर, लाचार व यतीम बच्चों को शिक्षित करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बिना किसी बहकावे में आये इस सर्वे में सहयोग करें और यह समझ कर चलें कि यह एक सूचना एकत्र करने का सर्वे है, इसे किसी भी रूप में जांच न समझा जाए। सर्वे से जुड़े सभी अधिकारी भी बड़े संयम और मर्यादित तरीक़े से इस सर्वे को करें ताकि मदरसों समेत आम जनमानस में सरकार की सबका साथ सबका विकास सबका विश्वास सबका प्रयास की सोच व छवि के प्रति कहीं भी कोई ग़लत संदेश ना जाने पाए।

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