DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा आजमगढ़ इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बागपत बाँदा बांदा बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लख़नऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Wednesday, September 28, 2022

स्कूलों में मातृभाषा में शिक्षा देने को बढ़ाने में जुटा शिक्षा मंत्रालय, निजी विद्यालयों को भी देनी होगी मातृभाषा में शिक्षा

निजी विद्यालयों को भी देनी होगी मातृभाषा में शिक्षा

• स्कूलों में मातृभाषा में शिक्षा देने को बढ़ाने में जुटा शिक्षा मंत्रालय

• राज्यों के साथ जल्द ही इस पर होगी विस्तृत चर्चा बनी रणनीति


नई दिल्ली: छोटे बच्चे अपनी मातृभाषा में अधिक तेजी से सीखते हैं और चीजों को समझने की क्षमता को देखते हुए शिक्षा मंत्रालय अब इस मुहिम को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी में है। जल्द ही वह इसे लेकर राज्यों के साथ भी चर्चा करने की तैयारी में है। 


फिलहाल यह मुहिम सरकारी स्कूलों तक ही सीमित नहीं रहेगी बल्कि इसके दायरे में निजी स्कूलों को भी लाने की योजना बनाई गई है। साथ ही स्कूलों में शिक्षकों की भर्ती में ऐसे शिक्षकों को तरजीह देने की तैयारी है, जो मातृभाषा में भी पढ़ाने में सक्षम हैं।


स्कूलों में बच्चों को कम से कम पांचवीं कक्षा तक की शिक्षा मातृभाषा में देने की सिफारिश वैसे तो नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) में भी की गई है। जिस पर राज्यों को अपने स्तर पर काम करना था, लेकिन अब तक के जो रुझान देखने को मिल रहे हैं, उनमें ज्यादातर राज्यों में अभी तक इसे लेकर कोई हलचल नहीं शुरू हुई है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय अब राज्यों को इसके लिए तैयार करने की रणनीति में जुटा है। पहले तो इसके दायरे में सिर्फ सरकारी स्कूलों को ही रखा गया था, लेकिन अब निजी स्कूलों को भी इसमें शामिल किया गया है। 


माना जा रहा है कि यदि इसे सरकारी और निजी स्कूलों में एक साथ नहीं अपनाया गया तो छात्रों के बीच एक बड़ी खाई बन जाएगी। फिलहाल सरकार इस अंतर को पाटने में जुटी है। इसके तहत निजी और सरकारी स्कूलों के बीच समन्वय कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं। 


गौरतलब है कि देश में मौजूदा समय में 15 लाख से ज्यादा स्कूल हैं। इनमें से करीब 86 प्रतिशत स्कूल सरकारी हैं, जबकि करीब 22 प्रतिशत स्कूल ही निजी स्कूल हैं। इसके अतिरिक्त कुछ स्कूल सरकारी अनुदान प्राप्त भी हैं। हालांकि इनकी संख्या सिर्फ पांच प्रतिशत ही है।

No comments:
Write comments