प्रोजेक्ट प्रवीण में AI की पढ़ाई से दो लाख छात्रों को मिलेगा लाभ, कक्षा नौ से 12 तक AI 4 All कोर्स अनिवार्य, 1200 स्कूलों में लागू होगी व्यवस्था
28 मार्च को मिशन मुख्यालय की ओर से आयोजित होगी आनलाइन कार्यशाला
लखनऊ : अब माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ) की पढ़ाई कराई जाएगी। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत कक्षा नौ से 12 तक चलने वाले सभी वोकेशनल कोर्स में 'एआइ फार आल' को अनिवार्य कर दिया है। इससे प्रदेश के 1200 से ज्यादा स्कूलों के करीब दो लाख विद्यार्थियों को सीधे लाभमिलेगा। सभी प्रशिक्षकों को भी इसे पूरा करना होगा। इसके लिए 28 मार्च को मिशन मुख्यालय की ओर से एक दिन की आनलाइन कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, जिसमें एआइ विशेषज्ञ प्रशिक्षकों को तकनीकी जानकारी देंगे।
यह नई व्यवस्था वित्तीय वर्ष 2026-27 से लागू होगी। इसके तहत छात्रों और प्रशिक्षकों के लिए चार घंटे का विशेष एआइ कोर्स अनिवार्य किया गया है। इसे स्कूली शिक्षा में तकनीक जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण मान जा रहा है। 'प्रोजेक्ट प्रवीण' के तहत पहले से नौंवी से 12वीं तक के छात्रों को 210 घंटे का मुफ्त कौशल प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें आइटी, ब्यूटी, हेल्थकेयर और इलेक्ट्रानिक्स जैसे क्षेत्र शामिल हैं। अब इसमें एआइ को जोड़कर छात्रों को आधुनिक तकनीक से भी जोड़ा जाएगा।
इस कोर्स के जरिये छात्रों में समस्या सुलझाने की क्षमता, रचनात्मक सोच, डेटा समझने की योग्यता और डिजिटल स्किल विकसित की जाएंगी, जिससे वे भविष्य की नौकरियों के लिए तैयार हो सकें। जरूरत और बाजार की मांग को देखते हुए अलग-अलग जाब रोल के लिए एआइ के विशेष माड्यूल भी बनाए गए हैं। इनमें आइटी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव, टेलरिंग, हेल्थकेयर और डिजिटल मित्र जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
सिर्फ सर्टिफिकेट नहीं, नौकरी तक रहेगी नजर, एडेड कालेजों तक भी पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण
प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों में चल रही 'प्रवीण' कौशल योजना को लेकर सरकार ने अब सख्त निगरानी का ब्लूप्रिंट तैयार किया है। अपर मुख्य सचिव, माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर साफ कर दिया है कि कौशल प्रशिक्षण अब सिर्फ कागजी उपलब्धि नहीं, बल्कि छात्रों के रोजगार तक का सफर तय करेगी।
कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों को रोज 90 मिनट का कौशल प्रशिक्षण देने वाली इस योजना का दायरा तेजी से बढ़ा है। 2022-23 में 150 स्कूलों से शुरू होकर 2025-26 में यह संख्या 500 से अधिक राजकीय विद्यालयों तक पहुंच चुकी है, जबकि सहायताप्राप्त स्कूलों में भी सर्वे जारी है।
नई व्यवस्था के तहत जिलाधिकारी के स्तर से स्कूलों में जाकर प्रशिक्षण की हकीकत परखी जाएगी। लैब में लगे उपकरण, ट्रेनिंग पार्टनर द्वारा उपलब्ध कराए गए प्रशिक्षक, उनकी उपस्थिति और पढ़ाने की गुणवत्ता, सबका भौतिक सत्यापन होगा। स्कूल प्रशासन और कौशल विकास मिशन के बीच तालमेल सुनिश्चित करने के लिए नियमित बैठकें भी कराई जाएंगी। सबसे अहम फोकस प्रशिक्षण के बाद का परिणाम होगा। कितने छात्रों को प्रमाणपत्र मिले, कितने रोजगार या स्वरोजगार से जुड़े हैं, अब यह भी प्रशासनिक निगरानी का हिस्सा बनेगा। इसके माध्यम से स्कूलों की पढ़ाई को सीधे रोजगार से जोड़ना और युवाओं को सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि हुनर के साथ आत्मनिर्भर बनाना है।
एडेड कालेजों तक पहुंचेगा प्रोजेक्ट प्रवीण
अगले शैक्षणिक सत्र से प्रोजेक्ट प्रवीण का दायरा बढ़ाया जाएगा। इसके तहत एडेड माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों को भी कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जाएगा। अभी तक यह योजना केवल राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में लागू थी। धीरे-धीरे इसे अन्य कालेजों तक भी विस्तारित किया जा रहा है। एडेड कालेजों के बाद यूपी बोर्ड के निजी विद्यालयों के छात्रों को भी इससे जोड़ा जाएगा। कौशल विकास मिशन ने अगले शैक्षणिक सत्र में पांच लाख विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य तय किया है।
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