12वीं तक आते-आते पढ़ाई छोड़ देते हैं 73% बच्चे, लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने स्कूली बच्चों के बीच में पढ़ाई छोड़ने पर उठाए सवाल
देश में माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या में तत्काल वृद्धि की जरूरत
नई दिल्लीः नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) आने के बाद देश में शिक्षा से जुड़े सुधार की पहल तो तेज हुई, लेकिन स्कूली शिक्षा की हालत अभी भी काफी खराब है। लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने देश की स्कूली शिक्षा की स्थिति को लेकर आईना दिखाया है। संसदीय समिति ने कहा है कि 12वीं तक आते-आते लगभग 73 प्रतिशत बच्चे सिर्फ इसलिए पढ़ाई छोड़ देते हैं, क्योंकि माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूल उनकी पहुंच से दूर है।
वैसे भी देश में प्राथमिक स्कूलों की तुलना में उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या सिर्फ दस प्रतिशत ही है। ऐसे में प्राथमिक स्कूलों से निकलने वाले सभी बच्चों को उच्च माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाया भी नहीं जा सकता है।
लोकसभा की प्राक्कलन समिति ने स्कूली शिक्षा की इस विसंगति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं और केंद्र व राज्य सरकारों से कहा है कि वह तत्काल माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्कूलों की संख्या में वृद्धि करें। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 12वीं तक आते-आते 73 प्रतिशत बच्चे इसलिए पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं, क्योंकि प्राथमिक स्कूलों से निकलने के बाद उनके आसपास कोई माध्यमिक व उच्च आसपास माध्यमिक स्कूल नहीं है, वहीं ज्यादा दूर रह कर पढ़ाई करना उनके लिए आर्थिक रूप से मुश्किल भी है। ऐसे में वह पढ़ाई छोड़ देते हैं।
समिति ने आंकड़े देकर बताया है कि देश में प्राथमिक कक्षाओं में जहां 6.18 करोड़ छात्रों का नामांकन है, वहीं माध्यमिक कक्षाओं में कम होकर नामांकन 2.36 करोड़ और उच्च माध्यमिक कक्षाओं में नामांकन 1.64 करोड़ ही है। समिति ने बढ़ते शिक्षा स्तर के साथ छात्रों की संख्या में तीव्र गिरावट पर गंभीर चिंता जताई है। साथ ही इसे दूर करने के लिए तत्काल जरूरी कदम उठाने की सिफारिश की है।
गौरतलब है कि मौजूदा समय में देश में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों की कुल संख्या 10.85 लाख है। जिसमें प्राथमिक स्कूल 9.11 लाख, उच्च प्राथमिक 4.12 लाख, माध्यमिक स्कूल 1.61 लाख व उच्च माध्यमिक स्तर के 90 हजार स्कूल है। इनमें बड़ी संख्या में कंपोजिट स्कूल भी है, जहां पहली से 12वीं तक एक ही स्कूल है। इसमें कक्षा एक से 12 वीं के एक ही स्कूल को प्राथमिक, उच्च प्राथमिक, माध्यमिक व उच्च माध्यमिक यानी इन चारों श्रेणियों में अलग-अलग गिना जाता है। ऐसे में कुल स्कूली की संख्या व श्रेणियों में अंतर रहता है।
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