DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Tuesday, October 27, 2026

अभिलेखों में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना धोखाधड़ी नहीं - हाईकोर्ट, मऊ के सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों का मामला

अभिलेखों में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना धोखाधड़ी नहीं - हाईकोर्ट,  मऊ के सहायक अध्यापकों की नियुक्तियों का मामला


प्रयागराज। हाईकोर्ट ने कहा कि विभागीय अभिलेखों में नियुक्ति का अनुमोदन आदेश नहीं मिलना धोखाधड़ी का सबूत नहीं है।  इस आधार पर नहीं माना जा सकता कि कर्मचारी ने हेराफेरी से नौकरी हासिल की है। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकल पीठ ने मऊ के 15 सहायक अध्यापकों के याचिकाओं पर की।


कोर्ट ने कहा कि धोखाधड़ी के आरोप पर सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि याची शिक्षकों ने क्या गलत तथ्य पेश किया और कौन से दस्तावेज जाली है और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। मामला वर्ष 2010 से 2016 के बीच समाज कल्याण विभाग से अनुदान प्राप्त निजी प्रबंधन वाले बेसिक विद्यालयों में हुई शिक्षकों की नियुक्ति से जुड़ा है। मामले में वर्ष 2018 में जांच के बाद गठित समिति ने अपनी रिपोर्ट दी। इस आधार पर राज्य सरकार ने 24 जुलाई 2019 को चार शिक्षकों की नियुक्तियों का अनुमोदन रद्द कर दिया।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने विभिन्न पत्रों में बताया कि नियुक्तियों के अनुमोदन संबंधी आदेश कार्यालय के रिकॉर्ड में नहीं मिल रहे हैं। इस आधार पर शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की गई। उनका वेतन भुगतान भी रोक दिया गया।

शिक्षकों ने दलील दी कि पहले उनकी नियुक्तियों की जांच हो चुकी थी। संबंधित अधिकारियों ने अनुमोदन आदेश जारी होने की पुष्टि भी की। इसके बावजूद उन्हें सुनवाई का अवसर दिए बिना उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। 


विधानसभा में सवाल उठना दोष का प्रमाण नहीं: हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि विधानसभा में किसी नियुक्ति को लेकर सवाल उठने से जांच शुरू करने का आधार मिल सकता है लेकिन आरोप कर्मचारियों के दोषी होने का प्रमाण नहीं हैं। यदि कोई रिकॉर्ड नहीं मिल रहा है तो पहले यह जांचना चाहिए कि वह कहां गया और उसकी सकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किस अधिकारी की थी। रिकॉर्ड की अनुपलब्धता के लिए सीधे कर्मचारी को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


वेतन के दावे पर दोबारा निर्णय लेने का आदेश: कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि शिक्षकों के वेतन संबंधी दावों पर दोबारा विचार किया जाए। जिस अवधि में शिक्षकों ने वास्तव में काम किया उस अवधि के वेतन के दावे पर रद्द की गई रिपोर्टों के निष्कर्षों से प्रभावित हुए बिना निर्णय लिया जाए।

No comments:
Write comments