DISTRICT WISE NEWS

अंबेडकरनगर अमरोहा अमेठी अलीगढ़ आगरा इटावा इलाहाबाद उन्नाव एटा औरैया कन्नौज कानपुर कानपुर देहात कानपुर नगर कासगंज कुशीनगर कौशांबी कौशाम्बी गाजियाबाद गाजीपुर गोंडा गोण्डा गोरखपुर गौतमबुद्ध नगर गौतमबुद्धनगर चंदौली चन्दौली चित्रकूट जालौन जौनपुर ज्योतिबा फुले नगर झाँसी झांसी देवरिया पीलीभीत फतेहपुर फर्रुखाबाद फिरोजाबाद फैजाबाद बदायूं बरेली बलरामपुर बलिया बस्ती बहराइच बाँदा बांदा बागपत बाराबंकी बिजनौर बुलंदशहर बुलन्दशहर भदोही मऊ मथुरा महराजगंज महोबा मिर्जापुर मीरजापुर मुजफ्फरनगर मुरादाबाद मेरठ मैनपुरी रामपुर रायबरेली लखनऊ लखीमपुर खीरी ललितपुर लख़नऊ वाराणसी शामली शाहजहाँपुर श्रावस्ती संतकबीरनगर संभल सहारनपुर सिद्धार्थनगर सीतापुर सुलतानपुर सुल्तानपुर सोनभद्र हमीरपुर हरदोई हाथरस हापुड़

Sunday, July 12, 2026

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादलों पर हाईकोर्ट की रोक

राजकीय माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों के तबादलों पर हाईकोर्ट की रोक


कोर्ट ने आरटीई एक्ट के उल्लंघन पर जताई नाराजगी, कहा- पुराने आश्वासन तोड़ रही है सरकार

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के तबादले और उन्हें सरप्लस (अतिरिक्त) घोषित करने की राज्य सरकार की नीति पर नाराजगी जताई है। साथ ही 2026 की तबादला नीति के उस हिस्से और उसके आधार पर जारी स्थानांतरण आदेशों के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है, जो शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम, 2009 का उल्लंघन करते हैं।


इसके साथ ही प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को दो सप्ताह के भीतर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने विपिन कुमार आर्य की याचिका पर दिया। याची की ओर से बताया गया कि राज्य सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एक जून 2026 को स्थानांतरण संबंधी गाइडलाइन जारी की थी। इसमें सरप्लस शिक्षकों के निर्धारण के लिए 20 नवंबर 1976 के शासनादेश को आधार बनाया गया। जबकि, यह व्यवस्था आरटीई अधिनियम में निर्धारित छात्र-शिक्षक अनुपात के अनुरूप नहीं है। इसी नीति के आधार पर याची को सरप्लस घोषित करते हुए 30 जून को प्रयागराज राजकीय इंटर कॉलेज से स्थानांतरित कर दिया गया।

याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 2017 में राज्य सरकार ने हलफनामा दाखिल कर आश्वासन दिया था कि भविष्य में आरटीई अधिनियम के अनुसार नई स्थानांतरण प्रक्रिया अपनाई जाएगी। 



एक ही पद पर कर दी गई दो-दो शिक्षकों की तैनाती, राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ पहले से तबादले में लगा रहा गड़बड़ी के आरोप

संघ ने सरप्लस शिक्षकों को अपने ही विद्यालय में रखने की उठाई मांग

लखनऊ। प्रदेश के राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में सरप्लस शिक्षकों की घोषणा व उनकी तैनाती में पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। हालत यह है कि विभाग ने एक ही पद पर दो-दो शिक्षकों की तैनाती तक कर दी है। इसे लेकर राजकीय माध्यमिक शिक्षक संघ पहले से गड़बड़ी के आरोप लगा रहा है। वहीं अब इस मामले में हाईकोर्ट ने भी प्रयागराज के कुछ शिक्षकों को राहत दी है।

राजकीय शिक्षक संघ ने बताया कि राजधानी के राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, विकास नगर में अंग्रेजी शिक्षक का एक पद है। जबकि 30 जून को जारी आदेश में यहां पर दो दो शिक्षकों की तैनाती की गई है।

इससे पहले संघ ने कहा था कि वैकल्पिक विषय के शिक्षकों (वाणिज्य) को जहां भेजा गया है, वहां वाणिज्य का पद ही नहीं है। इतना ही नही कहीं-कहीं एक भी छात्र नहीं है। इसके विपरीत जहां से शिक्षकों को हटाया जा रहा है, वहां पर पद भी स्वीकृति है तथा छात्र संख्या भी पर्याप्त है। संघ के प्रांतीय संरक्षक रामेश्वर पांडेय व प्रांतीय महामंत्री अरुण यादव ने कहा है कि विभाग ने सरप्लस शिक्षकों की गलत व मनमानी व्याख्या की है। ऐसे में उच्च न्यायालय द्वारा दिया गया निर्णय शिक्षक हित में है। ऐसे में सरप्लस घोषित शिक्षकों को उनको अपने ही विद्यालय में रखा जाए, उनका तबादला न किया जाए।


281 शिक्षकों का सामान्य तबादला

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सरप्लस शिक्षकों के अतिरिक्त 281 सामान्य शिक्षकों का भी हाल ही में तबादला किया है। इसमें 73 प्रवक्ता पुरुष, सहायक अध्यापक पुरुष 208 व महिला 125 कुल 281 शिक्षकों का तबादला किया गया है। यह तबादला निर्धारित गुणांक के आधार पर शिक्षकों के आवेदन पर किया गया था। बता दें कि पूर्व में विभाग सरप्लस 271 का तबादला किया था।


No comments:
Write comments