यूपी बोर्ड में छह बिंदुओं पर होगा विद्यार्थियों का मूल्यांकन, विश्लेषण, मूल्यांकन व सूजन पर जोर, रटने की जगह चिंतन और नार्किक क्षमता बढ़ाने का प्रयास
11 व 12 के इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र विषय के माडल प्रश्नपत्र तैयार
प्रयागराज: यूपी बोर्ड ने विद्यार्थियों के मूल्यांकन के लिए तैयार होने वाले प्रश्नपत्रों के आधारभूत बिंदुओं के मानक में बदलाव किया है। अब छह बिंदुओं को लेकर माडल प्रश्नपत्र तैयार कर लिए गए हैं, जो आने वाली मुख्य परीक्षा के समान हैं। यह बलदाव भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की ओर से स्थापित परख मूल्यांकन केंद्र के निर्देशों के अनुरूप है।
पहले चरण में कक्षा 11 और 12 के इतिहास, भूगोल, अर्थशास्त्र और नागरिक शास्त्र विषय के माडल प्रश्नपत्र बनाए गए हैं। इनमें विद्यार्थी के ज्ञान व बोध को परखने वाले 17.5 प्रतिशत, अनुप्रयोग क्षमता की जांच के लिए 35 प्रतिशत, विश्लेषण की समझ संबंधी 22 प्रतिशत, मूल्यांकन व सृजन क्षमता को जांचने के लिए चार-चार प्रतिशत प्रश्न हैं। इससे पूर्व सिर्फ ज्ञान, बोध, अनुप्रयोग और कौशल की समझ का मूल्यांकन किया जाता था। इसमें ज्ञान के 20 प्रतिशत, बोध व अनुप्रयोग संबंधी समझ के लिए 30-30 प्रतिशत और कौशल की परख के लिए 20 प्रतिशत प्रश्न रहते थे। ज्ञान और बोध पर अधिक बल दिया जाता था। नए माडाल में विश्लेषण, मूल्यांकन, सूजन पर जोर है।
यूपी बोर्ड सचिव भगवती सिंह के अनुसार विद्यार्थियों में रटने की जगह चिंतन, तर्क, मूल्यांकन शक्ति, विश्लेषण व सृजनात्मकता का विकास कराने का प्रयास है।
प्रायोगिक विषयों को छोड़कर यूपी बोर्ड में प्रत्येक विषयों की लिखित परीक्षा 100 अंक की हो रही है, जबकि नए प्रश्नपत्रों में लिखित परीक्षा के लिए पूर्णांक 80 निर्धारित है। वर्णनात्मक प्रश्नों की संख्या में भी कमी की गई है। प्रत्येक विस्तृत उत्तरीय प्रश्नों में आंतरिक विकल्प के रूप में प्रश्न दिए गए हैं जो उसी यूनिट, उसी उद्देश्य व उसी कठिनाई स्तर के रहेंगे।
पाठ्यक्रम के सभी खंड से प्रश्न पूछना अनिवार्य कर दिया गया है। प्रत्येक यूनिट का अधिभार भी निश्चित है। वाह्य विकल्प के प्रश्न नहीं रहेंगे, जिससे छात्रों को पुस्तक के सभी खंड को पढ़ना आवश्यक है। 30 प्रतिशत प्रश्न सरल, 50 प्रतिशत प्रश्न सामान्य और 20 प्रतिशत प्रश्न कठिन श्रेणी के होंगे। यह बदलाव नई शिक्षा नीति 2020 व परख विद्यार्थियों के समग्र विकास जो पंचकोश विकास के अनुरूप है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पंचकोश विकास पर केंद्रित
पंचकोश विकास भारतीय और योग दर्शन (तैत्तिरीयक उपनिषद) पर आधारित है। यह समग्र अर्थात शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक विकास की ओर ले जाने वाला है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा इसी के अनुरूप है। पंचकोश के पांच चरणों में अन्नमय कोश अर्थात भौतिक परतु, प्राणमय कोश-ऊर्जा परत, मनोमय कोश-मानसिक परत, विज्ञानमय कोश-बौद्धिक परत, आनंदमय कोश-आंतरिक आनंद से जोड़ने वाला है।
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