वित्तविहीन स्कूल संस्कृत बोर्ड परीक्षा में नहीं बनेंगे परीक्षा केंद्र, 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी नहीं होंगे आवंटित
लखनऊ : उत्तर प्रदेश माध्यमिक संस्कृत शिक्षा परिषद की वर्ष 2027 की परीक्षाओं में वित्तविहीन विद्यालयों को केंद्र नहीं बनाया जाएगा। किसी भी केंद्र पर 100 से कम और 500 से अधिक परीक्षार्थी आवंटित नहीं किए जाएंगे। परीक्षा की शुचिता और नकल पर अंकुश लगाने के लिए परिषद ने केंद्र निर्धारण की नई नीति जारी की है। इसके तहत सरकारी और सहायता प्राप्त संस्कृत माध्यमिक विद्यालयों के साथ राजकीय व सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी।
शिक्षा निदेशक (माध्यमिक) एवं परिषद के अध्यक्ष प्रताप सिंह बघेल ने सभी मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशकों और जिला विद्यालय निरीक्षकों को केंद्र निर्धारण के निर्देश जारी किए हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक या उनके अधीन राजपत्रित अधिकारियों की टीम विद्यालयों की आधारभूत सुविधाओं और संसाधनों का सत्यापन करेगी। सीसी कैमरे, वायस रिकार्डर, डीवीआर, राउटर, मानीटर और हाईस्पीड इंटरनेट का चालू होना अनिवार्य है।
माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए पहले से केंद्र बनाए गए विद्यालयों को संस्कृत बोर्ड की परीक्षा का केंद्र नहीं बनाया जाएगा। प्रश्नपत्र लीक होने, चोरी, गोपनीयता भंग होने या उत्तर पुस्तिकाएं केंद्र के बाहर लिखे जाने के मामले सामने आने वाले विद्यालयों को भी केंद्र नहीं बनाया जाएगा। परीक्षार्थियों को यथासंभव 12 किलोमीटर के दायरे में केंद्र आवंटित किया जाएगा। एक ही प्रबंधक के विद्यालयों के विद्यार्थियों को आपस में केंद्र नहीं दिया जाएगा। निर्धारित केंद्र के अलावा कहीं और परीक्षा देने पर परिणाम निरस्त होगा और संबंधित केंद्र को तीन वर्ष के लिए प्रतिबंधित किया जाएगा।
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