नौकरी की उम्मीदें धुंधली इसलिए डीएलएड से पीछे हट रहे छात्र, वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू हो रही
5 जून 2026
◾वर्ष 2025 में 86 हजार से भी कम रह गई संख्या
◾वर्ष 2024 में 1.91 लाख अभ्यर्थियों ने कराया था पंजीकरण
प्रयागराज। प्रदेश में शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं में लंबे अंतराल और सीमित रोजगार अवसरों का असर अब शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों पर भी दिखाई देने लगा है। डीएलएड जैसे पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों की रुचि लगातार घट रही है। स्थिति यह है कि जिन पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए कभी भारी प्रतिस्पर्धा होती थी, वहां अब बड़ी संख्या में सीटें खाली रहने लगी हैं।
परीक्षा नियामक प्राधिकारी के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश के 3,046 निजी कॉलेजों और 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में डीएलएड की लगभग 2.39 लाख सीटें हैं। वर्ष 2024 में जहां करीब 1.91 लाख अभ्यर्थियों ने डीएलएड प्रशिक्षण के लिए पंजीकरण कराया था, वहीं वर्ष 2025 में यह संख्या घटकर 86 हजार से भी कम कम रह गई। वर्ष 2026 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 15 जून से शुरू होगी।
शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद भी लंबे समय तक भर्ती न निकलने से छात्रों का भरोसा कम हुआ है। प्रदेश में बीएड, डीएलएड और अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों से जुड़े अभ्यर्थियों की संख्या 28 से 30 लाख के बीच बताई जाती है, जो विभिन्न शिक्षक भर्तियों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
वर्ष 2017 में 72,825 और वर्ष 2019 में लगभग 69 हजार सहायक अध्यापक पदों की भर्ती से प्रशिक्षित अभ्यर्थियों को अवसर मिला था, लेकिन इसके बाद से नई भर्तियों का इंतजार लगातार लंबा होता गया है।
प्रतियोगिता बढ़ी, अवसर सीमित
वर्ष 2019 की शिक्षक भर्ती में लगभग 15 लाख अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। हाल में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी टीईटी) के लिए 20 लाख आवेदन प्राप्त हुए हैं।
अभ्यर्थी और संगठन की पीडा
उत्तर प्रदेश बीटीसी शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष अनिल यादव का कहना है कि प्रदेश में प्रशिक्षित करीब 30 लाख छात्र रोजगार के अवसरों की प्रतीक्षा कर रहे हैं। शिक्षक भर्ती प्रक्रियाओं को नियमित और समयबद्ध बनाए जाने की आवश्यकता है। वहीं प्रतियोगी छात्र प्रतिनिधि शीतला प्रसाद ओझा का कहना है कि लंबे समय से पर्याप्त संख्या में भर्तियां न होने के कारण डीएलएड सहित अन्य शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में अभ्यर्थियों की रुचि प्रभावित हुई है।
डीएलएड से घटा प्रतियोगियों का मोह किसी डायट में नहीं भरी सभी सीटें, प्रदेश के 67 डायट में से 14 में आधी से ज्यादा रिक्त सीटें
निजी डीएलएड संस्थानों को मिलाकर डेढ़ लाख सीटों पर नहीं मिले अभ्यर्थी
29 मई 2026
प्रयागराजः प्राथमिक शिक्षक भर्ती के लिए अनिवार्य डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन (डीएलएड) प्रशिक्षण के प्रति छात्र-छात्राओं का रुझान लगातार कम हो रहा है। यही कारण है कि पिछले कई वर्ष से डीएलएड की सभी सीटें नहीं भर पा रही हैं। सत्र विलंबित होने के कारण वर्ष 2025 के लिए प्रवेश प्रक्रिया 2026 में पूरी हुई और प्रवेश की स्थिति यह है कि प्रदेश के 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (डायट) में से कोई ऐसा नहीं है, जिसकी सभी सीटें भरी हों। 14 डायट ऐसे हैं, जिनमें आधी से ज्यादा सीटों पर अभ्यर्थी नहीं मिले। इस तरह डायट और निजी डीएलएड प्रशिक्षण संस्थानों को मिलाकर 2,39,500 सीटों में से करीब 90 हजार सीटों पर ही प्रवेश हुए हैं।
प्रदेश में 67 जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) संचालित हैं। इसमें वाराणसी में संचालित कालेज आफ टीचर एजुकेशन (सीटीई) भी सम्मिलित है। इसके अलावा 3,046 निजी डीएलएड संस्थान एवं 258 अल्पसंख्यक कालेज चल रहे हैं। इस तरह इन सभी संस्थानों को मिलाकर कुल 2,39,500 सीटों में से करीब 1.49 लाख खाली रह गई हैं।
स्थिति यह है कि डायट के रूप में संचालित सरकारी प्रशिक्षण संस्थानों की सभी सीटों के लिए भी अभ्यर्थी नहीं मिले। डायट में प्रवेश के मामले में सबसे अच्छी स्थिति बांदा और श्रावस्ती की है। इनमें स्वीकृत कुल 50-50 सीटों में से 49-49 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। दोनों में केवल एक-एक सीटें रिक्त हैं। इसके बाद दूसरे नंबर पर फर्रुखाबाद और महराजगंज है, जहां 50-50 सीटों में से केवल दो-दो खाली हैं। तीसरे नंबर पर इटावा, कुशीनगर, बलिया हैं। इटावा में 50 में 47 तथा बलिया एवं कुशीनगर में 100-100 सीटों के सापेक्ष 97-97 पर प्रवेश हुए हैं। इनमें तीन-तीन सीटें खाली हैं।
इसके विपरीत मथुरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, एटा, बदायूं, अमरोहा, बिजनौर, कन्नौज, औरैया, मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर, ललितपुर, वाराणसी में आधी से ज्यादा सीटें रिक्त हैं। इनमें अधिकांश में 200 सीटें सृजित हैं। इस तरह प्रदेश के डायट संस्थानों में कुल 10,600 सीटें हैं, जिनमें 7,198 सीटों पर प्रवेश हुए हैं। 3,402 सीटें रिक्त रह गई हैं। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि 2018 के बाद से बेसिक शिक्षक भर्ती नहीं आने से डीएलएड पाठ्यक्रम के प्रति आकर्षण कम हुआ है।
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