कक्षा छह से आठ तक मनमर्जी से नहीं चुन निजी स्कूल सकते किताबें – हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने किताबें तय करने का का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन का अधिकार बरकरार रखा
केवल बोर्ड की प्रकाशित किताबों को अपनाने का दिया गया था निर्देश
कुछ स्कूलों के खिलाफ अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए मजबूर करने की थीं शिकायतें
जम्मू। जम्मू-कश्मीर में कक्षा छह से आठ तक के निजी स्कूल अब मनमर्जी या पसंद से किताबें नहीं चुन सकेंगे। जम्मू-कश्मीर एवं लद्दाख हाईकोर्ट ने निजी स्कूलों के लिए किताबें तय करने का जम्मू और कश्मीर बोर्ड ऑफ स्कूल एजुकेशन (जेकेबोस) अधिकार बरकरार रखा है। हाईकोर्ट का का फैसला स्कूली बच्चों और अभिभावकों पर सीधा असर डालेगा।
कुछ निजी स्कूलों में जेकेबोस की किताबों के बदले या अन्य प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए अभिभावकों को मजबूर करने की शिकायतें आई थीं। इसके बाद जेकेबोस ने एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें पूरे प्रदेश के निजी स्कूलों को कक्षा छह से आठ तक के लिए केवल बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों को अपनाने और पढ़ाने का निर्देश दिया गया था।
जम्मू-कश्मीर प्राइवेट स्कूल्स यूनाइटेड फ्रंट इसे लेकर हाईकोर्ट में लेटर्स अपील दायर की थी। हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने सुनवाई के दौरान स्कूली शिक्षा बोर्ड से जुड़े निजी स्कूलों में कक्षा छह से आठ के लिए बोर्ड की ओर से प्रकाशित पुस्तिकाओं को आवश्यक किए जाने संबंधी निर्देश दिए गए थे।
हाईकोर्ट के निर्देशों को चुनौती देते हुए लेटर्स पेटेंट अपील दायर की। इसकी सुनवाई करते हुए जस्टिस सिंधु शर्मा और जस्टिस शहजाद अजीम की डिवीजन बेंच ने अपील को खारिज कर दिया है और सिंगल जज के उस फैसले को ठहराया। डिवीजन बेंच ने कहा कि बोर्ड की ओर से पाठ्यक्रम और किताबों संबंधी बाध्यता का मकसद शैक्षिक मानकों को बनाए रखना और प्रदेश में शैक्षिक सामग्री में एकरूपता सुनिश्चित करना है।
कोर्ट का दखल तभी सही है जब उसकी नीति मनमानी, गलत या कानून के खिलाफ हो। माना जा रहा है कि कोर्ट के इस फैसले से एक सिस्टम बनेगा और छात्र-छात्राओं एवं अभिभावकों पर बिना मंजूरी वाली किताबों का बोझ कम होगा। जेएनएफ
इस आधार पर दी गई चुनौती
अपील करने वाले ने इन निर्देशों को चुनौती दी थी। इसमें आधार बनाया गया कि बोर्ड पाठ्यक्रम और किताबें तय कर सकता है लेकिन वह निजी स्कूलों को सिर्फ बोर्ड की ओर से प्रकाशित किताबों का इस्तेमाल करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। तर्क दिया गया कि इससे विद्यार्थी बेहतर शैक्षणिक गुणवत्ता की किताबें अपनाने के विकल्प से वंचित हो जाएंगे।
निजी स्कूलों की दलील को खारिज करते हुए डिवीजन बेंच ने कहा कि एक बार जब कोई शैक्षिक संस्थान अपनी मर्जी से बोर्ड से संबद्धता लेता है तो उसकी शर्तों से जुड़ जाता है। इनमें जेकेबोस की ओर से तय पाठ्यक्रम और किताबें अपनाना भी शामिल है।
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