तबादले में वरिष्ठता की अनदेखी पर शिक्षकों का प्रदर्शन,
निदेशालय पहुंचे 36 जिलों के शिक्षकों ने वरिष्ठता के आधार पर तबादले की मांग उठाई
12 से 15 वर्ष से एक ही जिले में तैनात शिक्षक बोले- 25 हजार वरिष्ठ शिक्षक तबादले से वंचित
लखनऊ। तबादले के लिए वर्षों से इंतजार कर रहे परिषदीय शिक्षकों का धैर्य सोमवार को जवाब दे गया। वरिष्ठता को स्थानांतरण का आधार बनाने की मांग को लेकर 36 जिलों से आए शिक्षक निशातगंज स्थित बेसिक शिक्षा निदेशालय शिविर कार्यालय पहुंचे और धरने पर बैठ गए। उनका आरोप है कि हर बार तबादला नीति में बदलाव होने से लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षक लगातार पीछे छूट रहे हैं।
धरने पर बैठे शिक्षकों ने बताया कि वे 12 से 15 वर्ष से विभिन्न जिलों में सेवाएं दे रहे हैं और हर वर्ष स्थानांतरण की उम्मीद करते हैं लेकिन हर बार नीति में बदलाव उनकी उम्मीदों पर पानी फेर देता है। इस बार भी तबादला नीति में दिए गए पांच विकल्पों के चलते वरिष्ठ शिक्षकों के लिए स्थानांतरण का लाभ मिलना मुश्किल हो गया है।
प्रदर्शन के दौरान जब निदेशालय के अधिकारी शिक्षकों से बातचीत करने नहीं पहुंचे तो कुछ शिक्षकों ने निदेशालय में प्रवेश करने का प्रयास किया। हालांकि पुलिस और सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इसके बाद शिक्षकों ने शिक्षा महानिदेशक के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा।
शिक्षक विजय पांडेय, राजीव गौड़, महेश पाल, आनंद सिंह, अमृत पांडेय और विजय कुमार ने कहा कि पिछले छह वर्षों से स्थानांतरण प्रक्रिया में वरिष्ठता को आधार नहीं बनाया जा रहा है। नतीजतन लंबे समय से सेवाएं दे रहे शिक्षकों में निराशा बढ़ रही है। उनका कहना है कि गृह जनपद से वर्षों दूर रहने के कारण न केवल वे स्वयं बल्कि उनके परिवार भी प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों की देखभाल व परवरिश में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षकों ने मांग की कि स्थानांतरण प्रक्रिया में वरिष्ठता को प्राथमिक आधार बनाया जाए ताकि लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे शिक्षकों को राहत मिल सके। शिक्षक विजय पांडेय ने अमर उजाला से कहा कि जनपदों में करीब 25 हजार वरिष्ठ शिक्षक अब तक तबादले के लाभ से वंचित हैं।
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