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Tuesday, September 30, 2025

किसी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने देंगे, भारतीय किसान यूनियन ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा

किसी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने देंगे, भारतीय किसान यूनियन ने भी टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ खोला मोर्चा


मुजफ्फरनगर । भारतीय किसान यूनियन (बीकेयू) के शैक्षिक प्रकोष्ठ ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) की अनिवार्यता के खिलाफ शुक्रवार को एक बड़ा मोर्चा खोलते हुए यहां ऐतिहासिक शिक्षक महापंचायत का आयोजन किया। इस दौरान बीकेयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने मंच से ऐलान किया कि शिक्षक अब चुप नहीं बैठेंगे और किसी भी शिक्षक की नौकरी नहीं जाने दी जाएगी।


नारायण ग्रैंड रिसॉर्ट पर आयोजित इस महापंचायत में मुख्य वक्ता के तौर पर बोलते हुए राकेश टिकैत ने शिक्षकों को एकजुट होकर संगठित संघर्ष का आशन किया। इस मौके पर पूर्वांची चेयरमैन व बीकेयू महासचिव जहीर फारूकी ने टीईटी लागू करने के फैसले को गलत ठहराया।


 भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह ने सर्वोच्च न्यायालय के 1 सितंबर, 2025 के आदेश और एनसीटीई की 29 मई, 2017 की गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा कि बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संचालित परिषदीय स्कूलों में कार्यरत शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य करना अव्यवहारिक है। उन्होंने 29 जुलाई 2011 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों को इस परीक्षा से मुक्त रखने की मांग की।


महापंचायत में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित करके प्रधानमंत्री और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से अनुरोध किया गया कि टीईटी के मुद्दे पर शिक्षक समुदाय के हित में शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाए। इसी मंच से राकेश टिकैत ने रविंद्र सिंह को भारतीय किसान यूनियन शिक्षक प्रकोष्ठ उत्तर प्रदेश का प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया।


महापंचायत की अध्यक्षता गुर्जर खिलारी सिंह ने की, जबकि मंच संचालन अनु चौधरी, मेराज खालिद रिजवी, डॉ. संजीव कुमार वर्मा और विनेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। जिला अध्यक्ष रामरतन बालियान ने सभी अध्यापकों को टीईटी से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया।


मंच पर प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र सिंह, महामंत्री ज्योति चौधरी, महासचिव मनीष गोयल, कार्यालय प्रमुख विनेश कुमार के अलावा सहारनपुर मंडल अध्यक्ष रोहित जटराणा, मेरठ जिला अध्यक्ष कवीन्द्र तोमर, शामली जिला अध्यक्ष प्रमेन्द्र तोमर, बागपत जिला अध्यक्ष हरेन्द्र तोमर, बुलन्दशहर जिला अध्यक्ष शक्ति प्रताप सिंह, अमरोहा जिला अध्यक्ष राकेश चहल, हापुड़ जिला अध्यक्ष अशु सिद्धू और सम्भल जिला अध्यक्ष रुकमेश चहल मौजूद रहे।


 मुजफ्फरनगर से कार्यकारी जिलाध्यक्ष अमित तोमर के नेतृत्व में नरेंद्र गोस्वामी, विवेक कुमार, क्षितिज नेगी, रविंद्र कोठारी, कैलाश चंद, सपना सिंह सहित हजारों शिक्षक अपने-अपने ब्लॉक से पहुंचे। मोहित बालियान, जसराज सिंह, शिवम शर्मा, सुधीर कुमार, प्रवीण कुमार, बालकिशोर, तुषार गोयल, सील विश्नोई, संजय राठी, नीरज कुमार, रणवीर सिंह, रामकुमार, अमित कुमार त्यागी, सुशील कुमार, सुमन सैनी, रितु त्यागी, पूजा शर्मा, रितु रतु वालियां, वालियां, गौरव गौरव कुमार, कु ओमपाल सिंह, पूनम पवार, इरफान अहमद, खुशनुद अहमद, मुस्तफा अहमद, प्रियंका त्यागी, शिखा शर्मा, मधु वर्मा, रश्मि पवार, वंदना शर्मा, निशु, अरुण कुमार, राजेश कुमार, चरण सिंह, अरविंद कुमार, उपासना सिंह सहित हजारों अध्यापक-अध्यापिकाएं महापंचायत में शामिल हुए। विभिन्न जनपदों से आए शिक्षकों ने टीईटी के खिलाफ एकजुटता दिखाई और अधिकारों की आवाज बनकर इतिहास रच दिया

हाईकोर्ट ने पूछा : बीएसए बताएं... किस नियम के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित नहीं किया?

हाईकोर्ट ने पूछा : बीएसए बताएं... किस नियम के तहत अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित नहीं किया? 

बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत एटा निवासी ने दाखिल की है याचिका, नियुक्ति के बाद भी मिल रहा 2550 रुपये मानदेय


बड़ी संख्या में अनुकंपा के आधार पर कई आश्रितों की निश्चित मानदेय पर नियुक्तियां की गई हैं। यह उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक की मृत्यु के उपरांत उसके आश्रितों की भर्ती नियमावली-1974 की अवहेलना है। - इलाहाबाद हाईकोर्ट


प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अनुकंपा के आधार पर की गई नियुक्ति को नियमित करने में कथित मनमानी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने एटा के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) को तलब कर उनसे पूछा है कि किस प्रावधान के तहत अनुकंपा नियुक्ति निश्चित वेतन पर की जा रही है।


याची की अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति को नियमित करने में क्या कानूनी अड़चन आ रही है। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की पीठ ने आशीष कुमार की याचिका पर दिया है। आशीष कुमार सिंह ने चतुर्थ श्रेणी पद पर अनुकंपा नियुक्ति को नियमित करने और 15 सितंबर 2007की प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से सभी परिणामी लाभ दिए जाने की मांग कर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है।


अधिवक्ता ने दलील दी कि बीएसए ने याची के समान मामले में दिनेश कुमार नाम के एक व्यक्ति का मर्जी के अनुसार उसकी सेवाओं को प्रारंभिक नियुक्ति की तारीख से नियमित कर दिया है। सभी परिणामी लाभ दिए। वहीं, याची को उसके वैध हक से वंचित किया जा रहा है। याची को करीब 18 साल बाद भी केवल 2550 रुपये के अल्प निश्चित वेतन पर जीवनयापन करने के लिए छोड़ दिया गया है।


हाईकोर्ट ने बीएसए को 15 अक्तूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष स्पष्टीकरण के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया है। साथ ही रजिस्ट्रार अनुपालन व प्रतिवादी वकील को इस आदेश को तत्काल बीएसए को प्रेषित करने का निर्देश दिया है।

टीईटी अनिवार्यता को लेकर NMOPS ने की 25 नवंबर को दिल्ली कूच की घोषणा

टीईटी अनिवार्यता को लेकर NMOPS ने की 25 नवंबर को दिल्ली कूच की घोषणा


लखनऊ। नेशनल मूवमेंट फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम (एनएमओपीएस) ने प्राथमिक शिक्षकों के लिए टीईटी अनिवार्य किए जाने के मुद्दे पर शिक्षकों-कर्मचारियों के 25 नवंबर को दिल्ली कूच की घोषणा की है। इस आंदोलन के माध्यम से विभागों में निजीकरण समाप्त करने व पुरानी पेंशन बहाली का भी मुद्दा उठाया जाएगा। 


संगठन की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सोमवार को हुई वर्चुअल बैठक में यह निर्णय लिया गया। राष्ट्रीय अध्यक्ष विजय कुमार बंधु ने बताया कि इससे पहले एक अक्तूबर को सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर देशव्यापी अभियान चलाया जाएगा। 25 अक्तूबर को देश की सभी राजधानियों में एक साथ दिल्ली रैली के लिए सामूहिक प्रेसवार्ता होगी। 


वहीं आठ नवंबर को दिल्ली में सभी प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्रियों की बैठक भी होगी। इसमें रैली की सफलता की रणनीति बनाई जाएगी। बैठक में राष्ट्रीय महासचिव स्थित प्रज्ञा ने कहा कि शिक्षकों पर टीईटी अनिवार्यता थोपे जाने के मुद्दे को भी प्रमुखता से रखा जाएगा। 

Monday, September 29, 2025

पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा लाखों शिक्षकों का भविष्य, TET अनिवार्यता पर टिकी निगाहें

पुनर्विचार याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा लाखों शिक्षकों का भविष्य,  TET अनिवार्यता पर टिकी निगाहें


सुप्रीम कोर्ट में लंबित पुनर्विचार याचिकाओं ने देशभर के लाखों शिक्षकों की उम्मीदें जगा दी हैं। अदालत के हालिया आदेश के बाद अब सभी शिक्षकों के लिए टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य हो गया है, जिससे लाखों शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इस फैसले से नाराज कई शिक्षक संगठनों और राज्य सरकारों ने न्यायालय में पुनर्विचार याचिकाएं दाखिल की हैं।  

सुप्रीम कोर्ट में बड़ा मामला  
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों ने 2017 में आरटीई अधिनियम में किए गए संशोधन को चुनौती दी है। शिक्षकों का कहना है कि यदि सरकार ठोस कदम नहीं उठाती है तो वे जंतर-मंतर पर बड़े पैमाने पर आंदोलन करेंगे। उनका तर्क है कि अचानक नियम बदलने से उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।  

याचिका खारिज हुई तो लाखों शिक्षकों पर खतरा  
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और शिक्षकों की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी जाती है तो पूरे देश में लाखों शिक्षकों पर टीईटी पास करने का नियम लागू हो जाएगा। सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही करीब 1,86,000 शिक्षक इस फैसले से प्रभावित होंगे। प्रभावित होने वालों में बीएड, बीपीएड और पुराने बीटीसी धारक शिक्षक शामिल हैं। वहीं मृतक आश्रित कोटे से चयनित इंटरमीडिएट योग्यता वाले शिक्षक भी इसके दायरे में आ जाएंगे।  

एनसीटीई की भूमिका सबसे अहम  
विशेषज्ञों के अनुसार, राहत तभी मिल सकती है जब एनसीटीई आरटीई अधिनियम की धारा 23(2) की स्पष्ट व्याख्या करे। यदि एनसीटीई पुराने शिक्षकों के लिए 2010 से पहले टीईटी पास करने की अनिवार्यता को हटा देता है तो याचिका में संशोधन की संभावना बनी रहेगी।  

पुनर्विचार याचिका की प्रक्रिया  
पुनर्विचार याचिकाएं पहले जजों के चेंबर में जाती हैं। यदि न्यायालय को इसमें नए तथ्य या साक्ष्य मिलते हैं तो इसे ओपन कोर्ट में सुनवाई के लिए लाया जाता है, अन्यथा चेंबर में ही खारिज कर दिया जाता है। इस प्रक्रिया में अधिवक्ताओं को मौखिक बहस का अवसर नहीं मिलता और निर्णय पूरी तरह लिखित याचिका पर आधारित होता है।  

अक्टूबर तक आ सकता है फैसला  
कानूनी जानकारों का अनुमान है कि अक्टूबर तक सुप्रीम कोर्ट इस पुनर्विचार याचिका पर अपना फैसला सुना सकता है। यदि याचिका खारिज होती है तो लाखों शिक्षकों को टीईटी पास करना अनिवार्य हो जाएगा। वहीं, शिक्षक संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें राहत नहीं मिलती तो वे बड़े स्तर पर आंदोलन करने और अपनी नौकरी की सुरक्षा के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।




टीईटी प्रकरण में शिक्षक संगठन पहुंचे सुप्रीम कोर्ट, दाखिल की याचिका, अन्य राज्यों के शिक्षक संगठनों से संपर्क में हैं उत्तर प्रदेश के शिक्षक नेता

प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षक सुप्रीम कोर्ट के निर्णय से हो रहे प्रभावित

उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (तिवारी गुट) के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी ने बताया कि संगठन ने टीईटी मामले में सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू याचिका दाखिल की है। इस अवसर पर उनके साथ संरक्षक व एमएलसी देवेंद्र प्रताप सिंह, अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष वासवराज गुरिकर व महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी भी उपस्थित थे।


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) की अनिवार्यता के निर्णय से प्रभावित शिक्षक भी सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने लगे हैं। प्रदेश सरकार के पुनर्विचार याचिका दाखिल करने के बाद यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी है। जबकि कुछ और संगठन इसके लिए तैयारी कर रहे हैं।

यूटा के प्रदेश अध्यक्ष राजेन्द्र सिंह राठौर ने बताया कि बृहस्पतिवार को यह याचिका दाखिल की गई है। याचिका में केंद्र सरकार के 2017 के उस संशोधन अधिनियम को वजह माना है जिसके माध्यम से वर्तमान में कार्यरत सभी शिक्षकों के लिए आज की न्यूनतम अर्हता आवश्यक की गई है। उन्होंने इस अधिनियम संशोधन को मौलिक अधिकारों के विरुद्ध तथा असंवैधानिक बताया है।


उन्होंने बताया कि प्रदेश के काफी शिक्षक ऐसे हैं जो टीईटी के लिए आवेदन ही नहीं कर सकते हैं। 2001 से पहले इंटर, बीटीसी के आधार पर नियुक्त काफी शिक्षक जिनकी सेवा अभी 5 वर्ष से अधिक है। मृतक आश्रित कोटे में अनुकम्पा के तहत इंटर शैक्षिक योग्यता के आधार पर नौकरी पाने वाले अध्यापक टीईटी के लिए आवेदन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में पहले के नियुक्त शिक्षकों को इससे राहत दी जानी चाहिए।

संगठन के सतेन्द्र पाल सिंह ने कहा कि यूटा इस लड़ाई को न्यायालय के साथ-साथ सड़क पर भी लड़ेगा। जल्द ही बड़े आंदोलन की घोषणा की जाएगी। बता दें कि टीईटी मामले में प्रदेश के 1.86 लाख शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन की ओर से पीएम व शिक्षामंत्री को पत्र भेजकर इस मामले में पुनर्विचार याचिका दाखिल करने की मांग की गई है।


पांच को दिल्ली में शिक्षक संगठनों की बैठक : उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र शर्मा ने बताया कि संगठन भी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करेगा। इस मामले में आगे की रणनीति बनाने व दिल्ली में होने वाले आंदोलन की रूपरेखा तैय करने के लिए पांच अक्तूबर को दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में एक बैठक बुलाई गई है। इसमें झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, महाराष्ट्र आदि प्रदेश के शिक्षक संगठन व नेता शामिल होंगे। तब तक केंद्र सरकार इस मामले में सकारात्मक पहल नहीं करती है तो दिल्ली कूच की तिथि तय की जाएगी।


झारखंड सरकार नहीं जाएगी सुप्रीम कोर्ट: उत्तर प्रदेश सरकार ने शिक्षकों के हित में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दाखिल कर दी है। लेकिन अन्य राज्यों में इसे लेकर मतभेद है। झारखंड सरकार ने हाल ही में इस मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका न दाखिल करने का निर्णय लिया है। सरकार ने कहा है कि अधिकतर मामलों में पुनर्विचार याचिका खारिज हो जाती है। शिक्षक टीईटी की तैयारी करें। उन्हें साल में दो बार टीईटी का अवसर मिलेगा।

स्कूल में दो वर्ष से शिक्षक नहीं, कारण बताए सरकार : हाईकोर्ट

स्कूल में दो वर्ष से शिक्षक नहीं, कारण बताए सरकार : हाईकोर्ट

चित्रकूट के जूनियर हाईस्कूल रैपुरा का मामला


प्रयागराज। शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 के तहत 6-14 साल के बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा उपलब्ध होना मौलिक अधिकार है लेकिन चित्रकूट के मानिकपुर तहसील के रैपुरा गांव स्थित जूनियर हाईस्कूल में दो साल से एक भी अध्यापक नहीं है। इसे लेकर दाखिल जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से 27 अक्तूबर तक जवाब मांगा है।


यह आदेश मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ ने दिया है। रैपुरा निवासी राहुल सिंह पटेल ने जनहित याचिका दायर की है कि उनके गांव में सरदार वल्लभभाई पटेल जूनियर हाईस्कूल विद्यालय राज्य सरकार से मान्यता प्राप्त एडेड है। इसमें शिक्षकों के नौ पद स्वीकृत हैं लेकिन दो साल एक भी अध्यापक नहीं हैं।

विद्यालय में शैक्षिक सत्र 2025-26 में कक्षा छह में 35, कक्षा सात में 46 और कक्षा आठ में 65 बच्चों का दाखिला है। विद्यालय में तीन चपरासी के पद स्वीकृत हैं जिनमें से दो रिक्त हैं। सिर्फ रामभवन नाम का एक चपरासी कार्यरत है उसी के भरोसे विद्यालय चल रहा है।

याचिका में कहा है कि 11 अगस्त 2025 को चित्रकूट के डीएम और बेसिक शिक्षा अधिकारी को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा गया था। प्रदेश सरकार की समन्वित शिकायत निवारण प्रणाली/आईजीआरएस पर भी शिकायत दर्ज कराई थी लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अधिवक्ता जगदीश सिंह बुंदेला के माध्यम से जनहित याचिका हाईकोर्ट में दाखिल कर अध्यापकों की नियुक्ति की मांग की। 

Saturday, September 27, 2025

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन, कई अन्य प्रदेशों के शिक्षक संगठन भी शामिल

टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन, कई अन्य प्रदेशों के शिक्षक संगठन भी शामिल

तीन से दस अक्तूबर तक स्थानीय सांसद को देंगे ज्ञापन


लखनऊ। सुप्रीम कोर्ट द्वारा परिषदीय शिक्षकों के लिए शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) करना अनिवार्य किए जाने के बाद इस मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक संगठन एकजुटता बना रहे हैं। इसी क्रम में अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षक संगठनों को एक मंच पर लाने के लिए अखिल भारतीय शिक्षक संघर्ष मोर्चा का गठन किया गया है।


शुक्रवार को दिल्ली में शिक्षक भवन पर अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बासवराज गुरिकर, राष्ट्रीय महासचिव कमलाकांत त्रिपाठी, उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष विनय तिवारी, अखिल भारतीय जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष योगेश त्यागी आदि ने बैठक कर आंदोलन की आगे की रणनीति बनाई। 


पदाधिकारियों ने कहा कि केंद्र सरकार 2017 में शिक्षा अधिकार अधिनियम में किए गए संशोधन को निरस्त कर देश के सभी शिक्षकों की सेवा सुरक्षित करें। तय हुआ कि राष्ट्रीय और प्रांतीय नेताओं की मौजूदगी में देश के सभी राज्यों में अभियान चलाकर शिक्षकों को एक मंच पर लाया जाएगा। यदि केंद्र सरकार शिक्षकों की सेवा सुरक्षित करने के लिए कदम नहीं बढ़ाती है तो संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान शिक्षक जंतर-मंतर पर विशाल प्रदर्शन करेंगे।


वहीं अखिल भारतीय प्राथमिक शिक्षक संघ ने निर्देश दिया है कि तीन से 10 अक्तूबर तक प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन अपने-अपने सांसद को देंगे। जिलाध्यक्ष व मंत्री के नेतृत्व में टीईटी मामले में अध्यादेश लाने की मांग की जाएगी। यदि केंद्र इस पर जल्द निर्णय नहीं लेता है तो दिल्ली में आंदोलन किया जाएगा।

Friday, September 26, 2025

विवि में शिक्षकों की नियुक्तियों वाली कमेटी में होगा शासन का प्रतिनिधि, उच्च शिक्षा विभाग जल्द शुरू करेगा शिक्षक पुरस्कार, विवि शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा

विवि शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मियों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा


 लखनऊ : उच्च शिक्षा मंत्री योगेन्द्र उपाध्याय ने विश्वविद्यालयों के शिक्षक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान करने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया है। वह विधान भवन स्थित कार्यालय में गुरुवार को विभागीय समीक्षा बैठक कर रहे थे। विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों की नियुक्तियों में समय-समय पर गड़बड़ी की मिल रही शिकायत के संदर्भ में मंत्री ने नियुक्ति प्रक्रिया को निष्पक्ष

और पारदर्शी बनाने का निर्देश दिया। इसके लिए सभी विश्वविद्यालयों में नियुक्तियों के लिए शासन का एक प्रतिनिधि नामित किया जाएगा।

बैठक में यह भी तय हुआ कि विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों की स्थापना, नए पाठ्यक्रमों की मान्यता के लिए अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) जारी करने की प्रक्रिया में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाएगी। इसके लिए समिति गठित की जाएगी। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शैक्षणिक कैलेंडर का

पालन न करने पर संबंधित कुलपति की जवाबदेही शासन स्तर पर तय की जाएगी। यह भी तय हुआ कि पिछले कई वर्षों से बंद पड़े शिक्षक पुरस्कार को फिर से शुरू किया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना शीघ्र तैयार होगी। साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत मूल्यांकन समिति गठित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी, विशेष सचिव गिरिजेश त्यागी, निधि श्रीवास्तव सहित अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे।



विवि में शिक्षकों की नियुक्तियों वाली कमेटी में होगा शासन का प्रतिनिधि, उच्च शिक्षा विभाग जल्द शुरू करेगा शिक्षक पुरस्कार

मंत्री ने बैठक में नियुक्ति प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के दिए निर्देश, शिक्षणेतर कर्मचारियों पर भी लागू होगा नियम

लखनऊ। प्रदेश के विश्वविद्यालयों में शैक्षणिक और शिक्षणेत्तर नियुक्तियों की कमेटी में अब शासन का भी प्रतिनिधि नामित किया जाएगा ताकि नियुक्ति प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी हो। इतना ही नहीं विश्वविद्यालयों से संबद्ध महाविद्यालयों, नए पाठ्यक्रमों की मान्यता व नए महाविद्यालयों की स्थापना के लिए एनओसी जारी करने की प्रक्रिया में क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारियों को भी शामिल किया जाए।

उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने बृहस्पतिवार को विधान भवन स्थित कार्यालय में विभागीय समीक्षा बैठक में यह निर्देश दिए। उन्होंने इसके लिए जल्द ही एक समिति गठित करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि शैक्षणिक कैलेंडर का पालन न करने पर संबंधित कुलपति की जिम्मेदारी शासन स्तर पर तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व सर्वोच्च प्राथमिकता है।


मंत्री ने अशासकीय महाविद्यालयों के शिक्षकों की भांति विश्वविद्यालय के शिक्षकों व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को भी कैशलेस चिकित्सा सुविधा प्रदान दिए जाने का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश विभागीय अधिकारियों को दिया। बैठक में विभाग के प्रमुख सचिव एमपी अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी, विशेष सचिव गिरजेश त्यागी व निधि श्रीवास्तव आदि उपस्थित थे।


शिक्षक पुरस्कार जल्द शुरू करने की तैयारी

बैठक में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा दिए जाने वाले शिक्षक पुरस्कार को जल्द शुरू करने पर सहमति बनी। मंत्री ने इसके लिए अधिकारियों को कार्य योजना प्रस्तुत करने को कहा। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत मूल्यांकन समिति का गठन किया जाएगा। बता दें कि अमर उजाला ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने यह तैयारी शुरू की है।


प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के लिए "मिशन शक्ति-5.0" विशेष अभियान संचालित करने के सम्बन्ध में

प्रदेश में महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा, सम्मान एवं स्वावलम्बन के लिए "मिशन शक्ति-5.0" विशेष अभियान संचालित करने के सम्बन्ध में


पहले तबादले हो गए, अब पुराने स्कूल में वापसी, कई जिलों के बीएसए ने किए मूल विद्यालयों में वापसी के आदेश, जॉइनिंग देने के बाद एक बार फिर से शिक्षकों को मूल विद्यालय में वापसी

पहले तबादले हो गए, अब पुराने स्कूल में वापसी, कई जिलों के  बीएसए ने किए मूल विद्यालयों में वापसी के आदेश, जॉइनिंग देने के बाद एक बार फिर से शिक्षकों को मूल विद्यालय में वापसी


लखनऊ: जुलाई-अगस्त में बेसिक शिक्षकों के अंतःजनपदीय (जिले के अंदर) तबादले हुए। उनको दूसरे स्कूल में जॉइनिंग भी दे दी गई। अब कई जिलों में बहुत से शिक्षकों को वापस अपने मूल विद्यालय में भेजा जा रहा है। कई जिलों में बीएसए ने मूल विद्यालयों में वापसी के आदेश भी कर दिए हैं। तर्क दिया जा रहा है कि मूल विद्यालय में एक भी शिक्षक नहीं बचा या फिर एक शिक्षक रह गया है। बेसिक शिक्षा अधिकारियों के ऐसे आदेशों से शिक्षक हैरान हैं।


ऐसे हुआ 5,378 शिक्षकों का तबादला

प्रदेश में बेसिक शिक्षकों के अंतःजनपदीय तबादले की प्रक्रिया जुलाई में शुरू हुई थी। उसके बाद 11 अगस्त को तबादला लिस्ट जारी की गई। इसमें कुल 5,378 शिक्षकों का तबादला किया गया था। शिक्षकों को जॉइनिंग देने से पहले भी यह बात आई थी कि कई स्कूलों में छात्र शिक्षक अनुपात बिगड़ रहा है। उसी समय कुछ बीएसए ने शिक्षकों को कार्यमुक्त न करने के आदेश जारी किए थे। बाद में महानिदेशक स्तर से कहा गया कि जिनका तबादला हो गया है, उनको रोका नहीं जाएगा। सभी को नई जगह जॉइनिंग दी जाएगी। उसके बाद यह जॉइनिंग दे दी गई।


इन जिलों में तबादले निरस्त

के आदेश दिए जा रहे हैं। सुलताननपुर और हमीरपुर के बीएसए ने खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि जिन शिक्षकों के तबादले समायोजन से कोई विद्यालय शिक्षक विहीन या एकल शिक्षक हो रहा है, उनको मूल विद्यालय में वापस किया जाए। औरैया में एक शिक्षक का तबादला निरस्त किया गया है। वहीं बस्ती और जालौन सहित कई जिलों के बीएसए ने नियमों का हवाला दिया है कि कोई विद्यालय एकल या शिक्षक विहीन नहीं होना चाहिए। इन नियमों के तहत ही शिक्षकों को कार्यमुक्त या कार्यभार ग्रहण करवाने की कार्यवाही की जाए।



समायोजन/तबादले से कोई विद्यालय एकल या शिक्षक विहीन होना ही नहीं चाहिए था। बेसिक शिक्षा अधिकारियों को पहले ही यह जांच पड़ताल करनी चाहिए थी। ये स्पष्ट निर्देश थे। अगर ऐसा है तो कार्रवाई की जाएगी। - सुरेंद्र तिवारी, सचिव-बेसिक शिक्षा परिषद


आखिर क्यों आई ये नौबत

यह पहले से नियम है कि कोई विद्यालय एकल या बंद होने की स्थिति में है तो वहां से शिक्षक का तबादला नही किया जाए। जब तबादले किए गए और सरप्लस स्कूलो की लिस्ट डाली गई, तो उस समय शिक्षामित्रों को भी जोड़कर शिक्षकों की संख्या का आकलन किया गया। ऐसे में कई ऐसे स्कूल थे जिनमे शिक्षा मित्र तो है लेकिन शिक्षक एक या दो ही थे। उनको भी सरप्लस मे जोड़ लिया गया। वहां से शिक्षको का तबादला कर दिया गया। प्रक्रिया के बीच में जब यह बात उठी तो यह कहकर मामला संभाल लिया गया कि तबादला पाने वाले किसी शिक्षक की जॉइनिंग रोकी नहीं जाएगी। बाद में पेयरिंग या दोबारा समायोजन से इसको ठीक किया जाएगा। औरैया में कोर्ट के आदेश से संबंधित शिक्षक को मूल जिले में वापस भेज दिया गया। विभाग से यह आदेश कर दिया गया कि कोई स्कूल एकल या शिक्षक विहीन न हो। इसी वजह से बीएसए ऐसे शिक्षको की मूल विद्यालय में वापसी के आदेश कर रहे है जो स्कूल एकल या शिक्षक विहीन हो गए है।


NCERT की गणित में वैदिक गणित की अवधारणा भी पढ़ेंगे विद्यार्थी, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में एनसीईआरटी की गणित व विज्ञान पुस्तक का कस्टमाइजेशन शुरू

NCERT की गणित में वैदिक गणित की अवधारणा भी पढ़ेंगे विद्यार्थी, राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में एनसीईआरटी की गणित व विज्ञान पुस्तक का कस्टमाइजेशन शुरू


प्रयागराजः राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के परिपेक्ष्य में विकसित कक्षा छह, सात एवं आठ की विज्ञान व गणित की पाठ्यपुस्तकों को प्रदेश के संदर्भ में कस्टमाइज किया जाना है। कक्षा सात के गणित विषय के लिए राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान में कार्य शुरू किया गया है। इसमें पुस्तकों की समीक्षा प्रदेश की आवश्यकता, पृष्ठभूमि एवं शैक्षिक परिदृश्य को दृष्टिगत रखते हुए की जा रही है। 


गणित की पाठ्य-पुस्तक में वैदिक गणित की अवधारणाओं एवं अभ्यास प्रश्नों का समावेश किया जा रहा है। आवश्यकतानुसार कठिन भाषा को सरलीकृत करके पुस्तक को उत्तर प्रदेश के छात्रों के लिए रोचक बनाया जा रहा है। अभी वैदिक गणित राज्य शैक्षिक अनुसंधान प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी) के पाठ्यक्रम में तो है, लेकिन एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक में नहीं होने के कारण जोड़ा जा रहा है।


राज्य विज्ञान शिक्षा संस्थान के निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी के निर्देशन में 26 सितंबर तक चलने वाले कस्टमाइजेशन में संस्थान के प्रवक्ता के साथ अन्य विद्यालयों के भी विषय विशेषज्ञ सम्मिलित हैं। संस्थान के गणित के प्रवक्ता अरविंद कुमार गौतम के अनुसार वैदिक गणित का आधार प्राचीन भारतीय ग्रंथ है।


 इस प्रणाली में गणनाओं को तेज और सरल बनाने के लिए सूत्र एवं उप-सूत्र शामिल किए गए हैं। यह अंकगणित, बीजगणित और ज्यामिति के संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए सरल नियम प्रदान करता है। यह विधि मानसिक गणना पर जोर देती है, जिससे मस्तिष्क की क्षमता और गणना करने की गति बढ़ती है। 


वैदिक गणित का अभ्यास छात्रों की स्मृति और एकाग्रता को बढ़ाता है। इसे एनसीईआरटी से अनुमति लेकर उनकी पुस्तक में सम्मिलित किया जाएगा। इसी तरह विज्ञान विषय के प्रवक्ता एवं विशेषज्ञ एनईपी के परिपेक्ष्य में विकसित पुस्तक को उत्तर प्रदेश के अनुकूल बना रहे हैं यानी कस्टमाइज कर रहे हैं।

Thursday, September 25, 2025

सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से, पहली बार 10वीं होगी दो बार परीक्षा, परीक्षा की अनुमानित तिथियां जारी

सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से, पहली बार 10वीं होगी दो बार परीक्षा, परीक्षा की अनुमानित तिथियां जारी


नई दिल्लीः सीबीएसई ने बुधवार को घोषणा की कि कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं अगले वर्ष 17 फरवरी 2026 से शुरू होंगी। बोर्ड ने इसके लिए संभावित शेड्यूल जारी किया है। विशेष बात यह है कि पहली बार 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं एक ही शैक्षणिक सत्र में दो बार आयोजित की जाएंगी।


सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डा. संयम भारद्वाज ने बताया कि कक्षा 10वीं की पहली बार परीक्षा 17 फरवरी से छह मार्च 2026 तक होगी, जबकि दूसरी बार की परीक्षा 15 मई से एक जून 2026 तक होगी। कक्षा 12 वीं की बोर्ड परीक्षा 17 फरवरी से 9 अप्रैल 2026 तक होगी। 

वहीं उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन सामान्यतः प्रत्येक विषय की परीक्षा के 10 दिन बाद शुरू होगा और 12 दिन के अंदर पूरा कर लिया जाएगा। उदाहरण के लिए यदि 12वीं की भौतिकी परीक्षा 20 फरवरी को होती है, तो उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन तीन मार्च से शुरू होकर 15 मार्च तक पूरा कर लिया जाएगा। इन परीक्षाओं में इस बार करीब 45 लाख छात्र शामिल होंगे।



नवोदय विद्यालयों में 9वीं व 11वीं में प्रवेश हेतु अब 7 अक्टूबर कर सकेंगे आवेदन

नवोदय विद्यालयों में 9वीं व 11वीं में प्रवेश हेतु अब 7 अक्टूबर कर सकेंगे आवेदन


सत्र 2025-26 के लिए जवाहर नवोदय स्कूल समिति ने कक्षा 9वीं व 11वीं में खाली सीटों के लिए आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ा दी है। अब योग्य उम्मीदवार 7 अक्टूबर तक आवेदन कर सकते हैं। पहले यह तिथि 23 सितंबर थी।  अभ्यर्थी अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट देख सकते हैं





जवाहर नवोदय विद्यालय की कक्षा 9वीं और 11वीं में रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए आवेदन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अभ्यर्थी 23 सितंबर तक आवेदन कर सकेंगे। नवोदय विद्यालय समिति ने दोनों कक्षाओं की रिक्त सीटों पर प्रवेश के लिए नोटिफिकेशन जारी कर दिया है।


प्रवेश परीक्षा 7 फरवरी 2026 को आयोजित की जाएगी। जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं में आवेदन के लिए विद्यार्थी वर्तमान सत्र 2025-26 में कक्षा 8वीं मे जिले के किसी भी सरकारी या मान्यता प्राप्त विद्यालय में अध्ययनरत होना चाहिए। साथ ही उनकी जन्मतिथि 1 मई 2011 से 31 जुलाई 2013 तक (दोनों तारीख शामिल) के बीच होनी चाहिए। 

कक्षा 11वीं में आवेदन के लिए विद्यार्थी वर्तमान सत्र 2025-26में कक्षा 10वीं में आपके जिले के किसी भी सरकारी या मान्यता प्राप्त विद्यालय में अध्ययनरत होना चाहिए।



जवाहर नवोदय विद्यालयों में सत्र 2026-27 में रिक्त स्थानों के सापेक्ष कक्षा IX व XI में प्रवेश हेतु अधिसूचना जारी, 23 सितंबर तक आवेदन का मौका 


जवाहर नवोदय विद्यालयों में सत्र 2026-27 में पार्श्व प्रवेश परीक्षा के माध्यम से कक्षा IX व XI में रिक्त स्थानों के सापेक्ष प्रवेश हेतु पात्र अभ्यर्थियों के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं।


🔴 आवेदन करने की अंतिम तिथि: 23.09.2025
🔴 चयन परीक्षा की तिथि: 07.02.2026


Wednesday, September 24, 2025

मूक-बधिर छात्रों की आवाज बनेंगे शिक्षक, ऐसे छात्रों की मदद के लिए यूपी बोर्ड हर स्कूल के एक शिक्षक को करेगा प्रशिक्षित

मूक-बधिर छात्रों की आवाज बनेंगे शिक्षक, ऐसे छात्रों की मदद के लिए यूपी बोर्ड हर स्कूल के एक शिक्षक को करेगा प्रशिक्षित


प्रयागराज। प्रदेश के मूक-बधिर छात्रों की परेशानियों को देखते हुए माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने हर माध्यमिक विद्यालय से कम से कम एक अध्यापक को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण देने का प्रस्ताव तैयार किया।

यह प्रस्ताव राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान (आरएमएसए) के निदेशक को भेजा जाएगा। वर्तमान में 29,527 माध्यमिक विद्यालय यूपी बोर्ड से संचालित हैं। इन विद्यालयों में कक्षा नौ से 12 तक के 1.50 करोड़ से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं। इसमें हजारों में मूक-बधिर छात्र हैं।



भाषा समझ सके और उन्हें सहज रूप से पढ़ा सके। उन्हें भूख लगी है या प्यास, वह बीमार हैं, इसकी समझ किसी भी अध्यापक में नहीं होने से उन्हें परेशानी होती है। परिषद का मानना है कि प्रशिक्षित अध्यापक मूक-बधिर छात्रों की समस्याओं को समझ पाएंगे और उन्हें बेहतर तरीके से शिक्षा उपलब्ध करा सकेंगे। इस पहल से विशेष छात्रों को पढ़ाई में किसी तरह की कठिनाई का सामना नहीं करना पड़ेगा।


इन मूक-बधिर विद्यार्थियों की मदद करने वाला एक भी प्रशिक्षित शिक्षक उपलब्ध नहीं है, जो उनकी माध्यमिक स्कूलों में प्रशिक्षण के लिए प्रस्ताव तैयार कराया गया है। इसे राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के डायरेक्टर को भेजा जाएगा। यह कदम मूक-बधिर छात्रों के लिए शिक्षा की राह को सरल बनाएगा। -सत्येंद्र सिंह, अपर सचिव प्रशासन, यूपी बोर्ड


बेसिक शिक्षा परिषद ने दिखाया रास्ता

बेसिक शिक्षा परिषद पहले ही अपने कुछ अध्यापकों को सांकेतिक भाषा का प्रशिक्षण दिला चुका है। इस पहल से प्राथमिक स्तर पर पढ़ रहे मूक-बधिर छात्रों को काफी राहत मिली है। अब माध्यमिक शिक्षा परिषद भी उसी मॉडल को अपनाने जा रहा है, ताकि उच्च कक्षाओं में पढ़ रहे विशेष छात्र पीछे न छूटें। अपर निदेशक माध्यमिक एवं जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी देवब्रत सिंह ने प्रशिक्षण की पुष्टि की है।

रानी लक्ष्मी बाई योजना के तहत प्रदेश में 45 हजार मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दिए जाने की तैयारी

रानी लक्ष्मी बाई योजना के तहत प्रदेश में 45 हजार मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दिए जाने की तैयारी

09 लाख छात्राएं स्नातक प्रथम वर्ष में, इनके पांच प्रतिशत को स्कूटी देंगे

लखनऊ। प्रदेश में पहले चरण में 45 हजार मेधावी छात्राओं को मुफ्त स्कूटी देने की तैयारी की जा रही है। विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में स्नातक द्वितीय वर्ष की छात्राओं को देने पर मंथन किया जा रहा है। रानी लक्ष्मी बाई स्कूटी योजना के तहत यह दी जाएगी। फिलहाल, उच्च शिक्षा विभाग इसके लिए नियम-कानून तैयार करने में जुटा हुआ है।


विश्वविद्यालय व डिग्री कॉलेजों में स्नातक प्रथम वर्ष में कुल नौ लाख छात्राएं हैं। ऐसे में इसमें से टॉप पांच प्रतिशत मेधावी छात्राएं जो उच्च अंकों के लिए परीक्षा पास कर सेकेंड ईयर में पहुंची हैं, उन्हें यह दिया जाएगा। ऐसे में पांच प्रतिशत मेधावी छात्राओं की संख्या 45 हजार होगी। क्योंकि उच्च शिक्षा ग्रहण कर रहीं छात्राओं को मुफ्त स्कूटी दी जानी है, ऐसे में से मेधावी छात्राओं का चयन फर्स्ट ईयर के रिजल्ट के अनुसार ही किया जाएगा। जिससे उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहीं मेधावी छात्राओं को यह उपहार दिया जाएगा।

 स्नातक के परंपरागत पाठ्यक्रमों व प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों में पढ़ रहीं छात्राओं का चयन उनकी संख्या के आधार पर किया जाएगा। जिस कोर्स में अधिक छात्राएं होंगी उन कक्षाओं की अधिक मेधावी छात्राएं स्कूटी पाएंगी


छात्राओं में स्कूटी पाने के लिए बढ़ेगी प्रतियोगिता

छात्राओं के बीच स्कूटी पाने के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में सर्वाधिक मेडल छात्राओं के ही खाते में आते हैं। ऐसे में इनके बीच कड़ा मुकाबला होगा। फिलहाल सरकार की इस योजना से बेटियों के बीच श्रेष्ठ अंक लाने को को लेकर प्रतियोगिता बढ़ेगी।


बजट में सरकार ने की चार सौ करोड़ की व्यवस्था

बजट में राज्य सरकार ने 400 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। फिलहाल चरणबद्ध ढंग से इसका वितरण किया जाएगा। होनहार छात्राओं को स्कूटी दिए जाने का बेसब्री से इंतजार है। वहीं उनकी मेधा का सम्मान स्कूटी देकर जल्द किया जाए, इसकी तैयारी की जा रही है। उम्र शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. मौलीन्दु मिश्रा कहते हैं कि उच्च शिक्षा में बेटियों की न सिर्फ संख्या अधिक है बल्कि मेडल हासिल करने में भी वह आगे रहती हैं। ऐसे में राज्य सरकार की इस योजना से वह और प्रोत्साहित होंगी।


सभी निजी विश्वविद्यालयों और कालेजों में मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की होगी जांच, 15 दिन में शासन को देनी होगी जांच रिपोर्ट, मुख्यमंत्री योगी ने दिया निर्देश

प्रदेश में निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की कुंडली खंगालने उतरे अधिकारी, शिक्षण संस्थानों में मची खलबली

एक सप्ताह में जांच की देंगे रिपोर्ट,  उच्च शिक्षा विभाग करेगा कार्रवाई

लखनऊ। प्रदेश भर के निजी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में चल रहे कोर्स, उनकी मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की सच्चाई जानने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने सख्त रुख अपनाते हुए जांच शुरू कर दी है। जिलों में अपर नगर मजिस्ट्रेट, सहायक पुलिस आयुक्त व एक वरिष्ठ शिक्षक वाली तीन सदस्यीय कमेटियों ने संस्थानों की कुंडली खंगालनी शुरू कर दी है, जिससे शिक्षण संस्थानों में हड़कंप मच गया है। टीमों को एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं, जिसके आधार पर आगे कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि उच्च शिक्षा विभाग की ओर से आठ सितंबर को जारी आदेश में सभी मंडलायुक्त व जिलाधिकारी को निर्देश दिया गया था कि प्रशासनिक अधिकारियों व शिक्षकों की कमेटी जिलों में निजी विश्वविद्यालयों व कॉलेजों की हकीकत जानेगी। सिर्फ लखनऊ में ही 25 अलग-अलग टीमें विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में जांच करने के साथ ही उनसे शपथ पत्र भी ले रही हैं।

उच्च शिक्षा विभाग ने इन कमेटियों को अपनी रिपोर्ट एक सप्ताह में देने का निर्देश दिया है। यह रिपोर्ट जिला प्रशासन के माध्यम से विभाग को भेजी जाएगी। इस कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई हुई तो कई कॉलेजों की मान्यता फंसेगी। शायद यही वजह है कि निजी शिक्षण संस्थान अपने यहां कागजात दुरुस्त करने में भी जुट गए हैं।


जांच के मुख्य बिंदु

संस्थान का नाम, कोर्स का नाम, किस नियामक निकाय से मान्यता ली, मान्यता का प्रमाण पत्र, सीट की मान्यता है, कोर्स में वर्तमान में कितने छात्र नामांकित हैं। जांच टीम इन सभी की प्रमाणित प्रति भी लेगी। साथ ही संस्थान में केवल मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम ही चलाए जा रहे हैं, किसी छात्र का बिना मान्यता वाले कोर्स में दाखिला नहीं लिया गया है, इसका शपथ पत्र भी लेंगे।

इनकी भी लेंगे जानकारी

विवि या कॉलेज में चलाया जा रहा पाठ्यक्रम, किस नियामक संस्था से ली मान्यता, किस विवि से संबद्धता, पाठ्यक्रम में स्वीकृत सीट, ईडब्ल्यूएस सीट, कुल सीटों की संख्या, प्रवेशित छात्रों की संख्या, विवि द्वारा दी गई संबद्धता पत्र की स्थिति, बिना मान्यता कोई कोर्स तो नहीं चल रहा, यदि हां तो पाठ्यक्रम का नाम, गैर मान्यता प्राप्त पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने वालों की छात्रों की संख्या।




सभी निजी विश्वविद्यालयों और कालेजों में मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की होगी जांच, 15 दिन में शासन को देनी होगी जांच रिपोर्ट, मुख्यमंत्री योगी ने दिया निर्देश 

छात्रों के साथ खिलवाड़ नहीं

बिना मान्यता के कोर्स संचालित करने व अवैध दाखिलों की शिकायत का मुख्यमंत्री योगी ने लिया संज्ञान

प्रत्येक जिले में गठित की गई विशेष जांच समिति, डीएम करेंगे अध्यक्षता

मंडलायुक्त करेंगे निगरानी की सघन जांच, अनियमितता मिलने पर होगी कठोर कार्रवाई


लखनऊः प्रदेश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी निजी विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में संचालित पाठ्यक्रमों की मान्यता और प्रवेश प्रक्रिया की सघन जांच कराने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए प्रत्येक जिले में विशेष जांच समिति गठित की जाएगी, जिसकी अध्यक्षता जिलाधिकारी करेंगे। उच्च शैक्षणिक संस्थानों की सघन जांच की प्रक्रिया की निगरानी मंडलायुक्त को सौंपी गई है। जांच प्रक्रिया में किसी तरह की लापरवाही न बरतने की हिदायत देते हुए 15 दिन में जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। 


शैक्षणिक संस्थानों में किसी तरह की अनियमितता पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। इससे साफ है कि अब कोई भी संस्थान बिना मान्यता के कोर्स संचालित कर छात्रों के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकेगा। इस संबंध में प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा एमपी अग्रवाल की ओर से जारी शासनादेश के अनुसार जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित समिति में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी होंगे। समिति संबंधित संस्थानों से शपथ पत्र लेगी, जिसमें यह साफ साफ लिखा होगा कि वे केवल मान्यताप्राप्त कोर्स ही संचालित कर रहे हैं। सभी संचालित पाठ्यक्रमों की सूची, सीटों की संख्या देनी होगी। 


साथ ही, संबंधित नियामक संस्थाओं जैसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी), अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (एआइसीटीई), बार काउंसिल आफ इंडिया (बीसीआइ), डिस्टेंस एजुकेशन काउंसिल (डीइसी), डेंटल काउंसिल आफ इंडिया (डीसीआइ), इंडियन नर्सिंग काउंसिल (आइएनसी), मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया (एमसीआइ), नेशनल काउंसिल फार टीचर्स एजुकेशन (एनसीटीई), फार्मेसी काउंसिल आफ इंडिया (पीसीआइ) की मान्यता का स्पष्ट विवरण भी देना होगा। 


सभी जिलाधिकारियों को जांच पूरी कर 15 दिन में शासन को रिपोर्ट भेजनी होगी। यदि किसी संस्था में अवैध प्रवेश या बिना मान्यता के कोर्स संचालित पाए जाएंगे तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में संस्थान को छात्रों से लिया गया पूरा शुल्क ब्याज सहित लौटाना अनिवार्य होगा।


मुख्यमंत्री से मिले थे एबीवीपी के पदाधिकारीः लंबे समय से फर्जी मान्यता और अवैध प्रवेश की शिकायतें सामने आती रही हैं। पिछले दिनों बाराबंकी के श्रीराम स्वरूप विश्वविद्यालय में बिना मान्यता के विधि पाठ्यक्रम चलाए जाने का मामला सामने आया था। छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस द्वारा किए गए लाठी चार्ज में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के कई कार्यकर्ता घायल हुए थे। इस संबंध में रविवार को एबीवीपी के पदाधिकारी मुख्यमंत्री से मिले भी थे। माना जा रहा है कि एबीवीपी पदाधिकारियों द्वारा निजी शैक्षणिक संस्थानों में की जा रही अनियमितताओं की जानकारी दिए जाने के बाद मुख्यमंत्री ने मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। 

योगी के निर्देश के बाद उच्च शिक्षा के अपर सचिव डा. दिनेश सिंह ने विश्वविद्यालय पर धोखाधड़ी का मुकदमा कराया था। प्रशासन ने विश्वविद्यालय के कब्जे सरकारी जमीन से हटा दिए थे। अब तक छह लोग इस मामले में गिरफ्तार किए गए हैं।




वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक भी रहेंगे जांच समिति में

शासनादेश के अनुसार जिलाधिकारी जांच समिति की अध्यक्षता करेंगे। समिति में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक और शिक्षा विभाग के अधिकारी होंगे। समिति संबंधित संस्थानों की मान्यता की जांच करेगी।


47 निजी विवि में हैं 2.80 लाख से अधिक छात्र

प्रदेश में 47 निजी विश्वविद्यालय व 7400 निजी महाविद्यालय संचालित हैं। सिर्फ निजी विवि में ही 2.80 लाख से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। कुछ संस्थानों के खिलाफ मान्यता, फर्जी अंकतालिका और अव्यवस्था की शिकायतें आती रही है। हाल ही में हापुड़ की मोनाड यूनिवर्सिटी में फर्जी अंकतालिका का मामला सामने आया था, जिसकी जांच जारी है। वहीं बाराबंकी के श्रीराम स्वरूप विश्वविद्यालय में विधि कोर्स की मान्यता को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के बाद उच्च शिक्षा परिषद ने जांच टीम गठित की थी लेकिन परिषद की जांच अब तक शुरू नहीं हो सकी है।


उच्च शिक्षा मंत्री बोले, पोर्टल से जुड़ेंगे निजी विश्वविद्यालय

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि सरकार अब इस मामले में सख्त रुख अपना रही है। जांच के साथ अब एक नया पोर्टल तैयार किया जा रहा है। यह पोर्टल समर्थ पोर्टल की तरह होगा और प्रदेश के सभी निजी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों को इससे जोड़ा जाएगा। इसके माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाएगी।

Tuesday, September 23, 2025

प्रधानाध्यापक पद रिक्त, फिर भी उच्च पद पर दी गई नियुक्ति, उच्च पदों पर किए जा रहे पदस्थान पर रोक लगाकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग

प्रधानाध्यापक पद रिक्त, फिर भी उच्च पद पर दी गई नियुक्ति, उच्च पदों पर किए जा रहे पदस्थान पर रोक लगाकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग  


प्रयागराज : राजकीय माध्यमिक शिक्षा के अधीनस्थ राजपत्रित (पुरुष/महिला) के रिक्त पदों पर पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों के पदस्थापन किए जाने में अनियमितता का आरोप लगाकर मुख्यमंत्री से शिकायत की गई है। भेजे पत्र में बताया गया है कि अधीनस्थ राजपत्रित (हाईस्कूल प्रधानाध्यापक) पद पर पदोन्नत शिक्षकों के पदस्थापन में सुनियोजित ढंग से संशोधन किया है। एक तरफ जहां हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक के पद रिक्त हैं, वहां तैनाती न देकर कुछ को बेसिक के निवर्तन पर भेजा गया है तो कुछ को उच्च पद पर नियुक्ति के आदेश किए गए हैं। मांग की गई है कि उच्च पदों पर किए जा रहे पदस्थान पर रोक लगाकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।


शिकायती पत्र में राजकीय शिक्षक संघ के प्रांतीय अध्यक्ष रामेश्वर प्रसाद पाण्डेय एवं कार्यकारी महामंत्री अरुण यादव ने बताया है कि 28 मार्च 2025 को अधीनस्थ राजपत्रित पद पर पदोन्नति प्राप्त पुरुष/महिला शाखा के अधिकांश शिक्षकों ने उन विद्यालयों में कार्यभार ग्रहण नहीं किया, जहां पदस्थापन किया गया था। कुछ दिनों बाद शिक्षा निदेशक के यहां पत्र देकर पदस्थापन में संशोधन किए जाने की मांग की। 


संशोधन किए जाने का प्रकरण शिक्षा अनुभाग-2 को भेज दिया गया। कुछ इंतजार के बाद 18 सितंबर को शासन के विशेष सचिव उमेश चंद्र की ओर से सूची निर्गत की गई, जिसमें तीन पुरुष व दो महिला शिक्षकों के विद्यालयों में संशोधन किया गया है। संशोधित विद्यालय उच्च पद के हैं। दो को बेसिक शिक्षा में निवर्तन पर भेजा गया है तथा एक शिक्षक को प्रभारी सह जिला विद्यालय निरीक्षक बनाया गया है। एक शिक्षक को अलीगढ़ में इंटर कालेज के प्रिंसिपल पद पर नियुक्त किया गया है।


 आरोप लगाया है कि हाईस्कूल में प्रधानाध्यापक पद रिक्त होते हुए पदोन्नत शिक्षकों को उनके मूल पद पर नियुक्त न कर उच्च पद पर नियुक्त करना अवैधानिक है। इसके लिए दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की गई है।

558 मदरसों के खिलाफ जांच पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब, कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत

558 मदरसों के खिलाफ जांच पर हाईकोर्ट की रोक, राज्य सरकार से मांगा जवाब, कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत



प्रयागराज/लखनऊ। इलाहाबाद । हाईकोर्ट ने प्रदेश के 558 अनुदानित मदरसों के खिलाफ आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की जांच पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति अमिताभकुमार राय की खंडपीठ ने वाराणसी के टीचर्स एसोसिएशन मदारिस अरबिया उत्तर प्रदेश और दो अन्य की याचिका पर दिया है।


बाराबंकी निवासी मोहम्मद तलहा अंसारी ने मदरसों में पढ़ाई और अन्य अनियमितता का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को शिकायती पत्र लिखकर जांच की मांग की थी। इसके बाद आयोग के आदेश पर अनुदानित मदरसों के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी थी।

याची के अधिवक्ता प्रशांत शुक्ला ने दलील दी कि मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के अनुसार आयोग किसी भी ऐसे मामले की जांच नहीं करा सकता जिसमें मानवाधिकार उल्लंघन की कथित घटना को एक साल से ज्यादा बीत चुका हो। शिकायत में किसी विशिष्ट तारीख का उल्लेख नहीं है जिससे यह पता चल सके कि शिकायत कब की गई थी। आयोग का जांच आदेश उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है।

खंडपीठ ने मानवाधिकार आयोग और मोहम्मद तलहा अंसारी को नोटिस जारी किया है। आदेश दिया है कि सभी प्रतिवादी चार हफ्तों में जवाबी हलफनामा दाखिल करें। याची उसके बाद चार हफ्तों में जवाबी हलफनामा दाखिल कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगले आदेश तक आयोग और प्रदेश सरकार के 23 अप्रैल 2025 के आदेश का प्रभाव-संचालन रुका रहेगा।



कामिल-फाजिल डिग्री धारक शिक्षकों को बड़ी राहत

याची दीवान साहेब जमां ने बताया कि कोर्ट के आदेश से सबसे बड़ी राहत कामिल और फाजिल प्रमाणपत्रों से नियुक्त शिक्षकों को मिली है। केंद्रीय मानवाधिकार आयोग ने इन शिक्षकों के वेतन भुगतान को वित्तीय भ्रष्टाचार माना था। क्योंकि, इन डिग्रियों को सर्वोच्च न्यायालय ने असांविधानिक घोषित कर दिया है। उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय का यह निर्णय पांच नवंबर 2024 से प्रभावी है लेकिन शिकायत में सभी 558 अनुदानित मदरसों में नियुक्त सभी शिक्षकों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। इसके लिए आयोग ने ईओडब्ल्यू जांच के आदेश दिए थे।

Sunday, September 21, 2025

अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों/महाविद्यालयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्तिक आयु के पूर्व असामयिक मृत्यु होने पर विकल्प पत्र न देने की दशा में आश्रित को अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं बेसिक शिक्षा विभाग की भांति मृत्यु उपादान (ग्रेच्युटी) भुगतान की स्वीकृति प्रदान करने के सम्बन्ध में।

अशासकीय सहायता प्राप्त संस्कृत विद्यालयों/महाविद्यालयों के शिक्षकों की सेवानिवृत्तिक आयु के पूर्व असामयिक मृत्यु होने पर विकल्प पत्र न देने की दशा में आश्रित को अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों एवं बेसिक शिक्षा विभाग की भांति मृत्यु उपादान (ग्रेच्युटी) भुगतान की स्वीकृति प्रदान करने के सम्बन्ध में

अब 27 सितंबर तक भरे जा सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षा के फॉर्म, नौवीं और 11वीं के पंजीकरण की तिथि भी बढ़ाई गई

अब 27 सितंबर तक भरे जा सकेंगे यूपी बोर्ड परीक्षा के फॉर्म, नौवीं और 11वीं के पंजीकरण की तिथि भी बढ़ाई गई

माध्यमिक शिक्षा परिषद ने फिर बढ़ाई तिथि, विद्यार्थियों को सहूलियत, डीआईओएस दफ्तर में 10 अक्तूबर तक जमा होगी नामावली


माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि एक बार फिर बढ़ा दी है। अब 27 सितंबर तक परीक्षा शुल्क के साथ चालान जमा करना होगा।

इसके बाद 30 सितंबर तक वेबसाइट पर विद्यार्थियों के विवरण अपलोड करने होंगे। प्रधानाचार्यों की मांग पर परिषद ने तिथि बढ़ाई है। इससे बोर्ड के फॉर्म भरने से वंचित विद्यार्थियों को राहत मिली है।

यूपी बोर्ड परीक्षा के फॉर्म भरने की प्रक्रिया पहली जुलाई से शुरू हो गई थी। पांच अगस्त तक निर्धारित शुल्क के साथ फॉर्म भरे गए थे। इसके बाद 16 अगस्त तक परीक्षा शुल्क जमा कराया गया।

20 अगस्त तक वेबसाइट पर विवरण अपलोड किए गए। इस बीच कुछ विद्यार्थी आवेदन नहीं कर पाए थे इसलिए शिक्षक नेताओं ने तिथि बढ़ाने की मांग की। परिषद ने एक सितंबर तक फिर तिथि बढ़ा दी। पूर्व के वर्षों से कम छात्र-छात्राओं की संख्या को देखते हुए परिषद ने एक बार फिर परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि बढ़ा दी है। अब 27 सितंबर तक फीस का चालान जमा किया जाएगा।

30 सितंबर तक वेबसाइट पर डाटा अपलोड करना होगा। एक से चार अक्तूबर तक डाटा का सत्यापन होगा। पांच से आठ अक्तूबर तक संशोधन सही कर डाटा अपलोड करना और 10 अक्तूबर तक डीआईओएस कार्यालय में जमा करना होगा। इसी तरह नौवीं और 11वीं की पंजीकरण तिथि भी बढ़ाई गई है। नौवीं और 11वीं के विद्यार्थियों का पंजीकरण 27 सितंबर तक होगा। इस दौरान 10 अक्तूबर तक अन्य प्रक्रियाएं पूरी की जाएंगी।





Friday, September 19, 2025

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष देयकों का निस्तारण ऑनलाइन माध्यम से किए जाने के सम्बन्ध में

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षक एवं शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के अवशेष देयकों का निस्तारण ऑनलाइन माध्यम से किए जाने के सम्बन्ध में



गणित के पाठ्यक्रम मसौदे में गंभीर कमियां, 900 से ज्यादा शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने की यूजीसी से मांग

गणित के पाठ्यक्रम मसौदे में गंभीर कमियां, 900 से ज्यादा शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने की यूजीसी से मांग

900 से ज्यादा गणितज्ञों ने यूजीसी अध्यक्ष को दिए प्रतिवेदन में कहा, इससे छात्रों पर बुरा असर पड़ेगा

पिछले महीने यूजीसी ने गणित समेत नौ विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम का मसौदा जारी कर मांगा था सुझाव


नई दिल्ली । 900 से ज्यादा शोधकर्ताओं और गणितज्ञों ने यूजीसी से गणित के स्नातक पाठ्यक्रम के मसौदे को वापस लेने की अपील की है। उनका कहना है कि इसमें कई गंभीर कमियां हैं और अगर इसे लागू किया गया तो कई पीढ़ियों के छात्रों पर बुरा असर पड़ेगा। पिछले महीने यूजीसी ने गणित सहित नौ विषयों के स्नातक पाठ्यक्रम का मसौदा जारी किया था और इस पर सुझाव मांगा था। 


यूजीसी अध्यक्ष को भेजे गए प्रतिवेदन में कहा गया है कि इसमें बीजगणित, वास्तविक विश्लेषण और व्यावहारिक गणित जैसे विषयों को पर्याप्त रूप से शामिल नहीं किया गया है। बताते चलें, इस मसौदे में चार साल के स्नातक कार्यक्रम की परिकल्पना की गई है, जो छात्रों को दाखिला लेने और पढ़ाई छोड़ने का विभिन्न विकल्प प्रदान करता है। मसौदा पाठ्यक्रम को राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत लर्निंग आउटकम आधारित फ्रेमवर्क के अनुसार तैयार किया गया है।


भारतीय ज्ञान परंपरा पर यूजीसी का जोरः यूजीसी द्वारा जारी स्नातक गणित पाठ्यक्रम में काल गणना (पारंपरिक भारतीय समय गणना), भारतीय बीजगणित, भारतीय परंपरा में पुराणों का महत्व और नारद पुराण में पाए जाने वाले बुनियादी अंकगणित और ज्यामिति से संबंधित गणितीय अवधारणाओं और तकनीकों पर ध्यान दिया गया है। यूजीसी ने भारतीय बीजगणित के इतिहास और विकास तथा परावर्त्य योजयेत सूत्र (एक पारंपरिक वैदिक गणित तकनीक) का उपयोग करके बहुपदों का विभाजन सिखाने की सिफारिश की है।


पंचांग और शुभ मुहूर्त को भी शामिल किया गया है: स्नातक गणित पाठ्यक्रम में पंचांग (भारतीय कैलेंडर) जैसी अवधारणाओं को सिखाने का प्रस्ताव है। यह भी बताया गया है कि यह रीति-रिवाजों और त्योहारों में इस्तेमाल होने वाले शुभ समय (मुहूर्त) का निर्धारण कैसे करता है। प्रस्तावित पाठ्यक्रम खगोल विज्ञान, पौराणिक कथाओं और संस्कृति का मिश्रण है, जो भारत के समृद्ध समय-विज्ञान को जीवंत बनाता है।


गणितज्ञों की ये हैं आपत्तियां

गणितज्ञों ने प्रतिवेदन में कहा है-व्यावहारिक गणित और बीजगणित को उचित महत्व नहीं दिया गया है। स्नातक पाठ्यक्रम में बीजगणित के कम से कम तीन कोर्स होने चाहिए। देश में गणित और सभी वैज्ञानिक गतिविधियों का भविष्य खतरे में है।

प्रोग्रामिंग, संख्यात्मक विधियों व सांख्यिकी जैसे व्यावहारिक विषयों का मुख्य पाठ्यक्रम में अभाव है या उन्हें बिना व्यावहारिक प्रशिक्षण के सतही तौर पर प्रस्तुत किया गया है।

सांख्यिकी को एक ही पाठ्यक्रम में जबरदस्ती ठूंस दिया गया है। सांख्यिकी, मशीन लर्निंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे पाठ्यक्रमों में व्यावहारिक और अनुप्रयोग-आधारित घटक होना स्वाभाविक और सामान्य बात है। इस अवसर को बर्बाद कर दिया गया है।

Thursday, September 18, 2025

आंगनबाड़ी मिलेगा बढ़ा मानदेय और स्मार्टफोन, सीएम योगी का बड़ा ऐलान

आंगनबाड़ी मिलेगा बढ़ा मानदेय और स्मार्टफोन, सीएम योगी का बड़ा ऐलान 


लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घोषणा की है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को स्मार्ट फोन दिया जाएगा व उनके मानदेय में वृद्धि की जाएगी। इस अभियान के तहत यूपी में 75 जिलों में व्यापक स्वास्थ्य शिविरों की शुरुआत भी हुई, जिसमें महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा बुधवार को मध्य प्रदेश के धार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से 'स्वस्थ नारी सशक्त परिवार अभियान' और आठवें राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ के अटल बिहारी वाजपेयी साइंटिफिक कन्वेंशन सेंटर, केजीएमयू में प्रदेशस्तरीय कार्यक्रमों की शुरुआत की और इस दौरान मानदेय बढ़ाने की घोषणा की।

मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में बच्चों को तिलक लगाकर अन्नप्राशन कराया और गर्भवती महिलाओं की गोदभराई के साथ पोषाहार वितरित किया। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश पीएम मोदी के 75वें जन्मदिन पर उनके साथ जुड़ रहा है। 

Wednesday, September 17, 2025

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिक्षा निदेशालय में बीएसए तलब, जानिए! विस्तार से, क्या है पूरा मामला?

भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर शिक्षा निदेशालय में बीएसए तलब


हरदोई: बेसिक शिक्षा विभाग में खंड शिक्षा अधिकारियों की बातचीत के वायरल हुए ऑडियो बीएसए के लिए मुसीबत बन गए हैं। मामले को शासन नें संज्ञान में लेते हुए उच्चस्तरीय जाँच कराई जा रही है, जिसमें बीएसए को शिक्षा निदेशक नें वायरल ऑडियो के सम्बन्ध में अपना पक्ष रखने के लिए तलब किया है। 

अपर शिक्षा निदेशक कामता राम पाल नें बीएसए हरदोई को पत्र जारी करते हुए बताया कि खंड शिक्षा अधिकारी सीमा गौतम द्वारा एक शिक्षक से रिश्वत के पैसे मांगने का ऑडियो, व बीएसए के लिए बीईओ अनिल झा द्वारा सीमा गौतम से रुपये की मांग करने का दूसरा ऑडियो सामने आया है, जिसकी जाँच डीएम हरदोई के निर्देश पर सीडीओ हरदोई से कराई गई है। जाँच के बाद बीएसए की मुसीबत और बढ़ गई है, उन्हें 18 सितंबर को दोपहर 01 बजे शिक्षा निदेशक के प्रयागराज स्थित कार्यालय में तलब किया गया है।


क्या है पूरा मामला, जानिए! विस्तार से

हरदोई।  जिले के बेसिक शिक्षा विभाग में चल रही साजिशों के ऑडियो वायरल हो रहे हैं। कुछ माह पहले वायरल हुए एक ऑडियों की जांच के बाद एक खंड शिक्षा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति शासन में की गई।

इसके बाद संबंधित खंड शिक्षा अधिकारी ने भी ऑडियो वायरल कर दिया। इस ऑडियो में कथित तौर पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के नाम पर एक लाख रुपये की मांग दूसरे खंड शिक्षा अधिकारी कर रहे हैं। हालांकि बीएसए और खंड शिक्षा अधिकारी ने इसका खंडन किया है।

सुरसा में खंड शिक्षा अधिकारी के पद पर सीमा गौतम की तैनाती थीं। लगभग तीन माह पहले कथित रूप से एक ऑडियो वायरल हुआ। दावा है कि सुरसा के एक प्राथमिक विद्यालय में तैनात मुनिंद्र कुमार के निलंबन के कई माह बाद भी न तो जांच पूरी की गई और न ही आरोप पत्र दिया गया। आरोप था कि सीमा गौतम ने दस हजार रुपये लिए थे।

काम न होने पर यही रुपये वापस मांगे जाने का ऑडियो होने का दावा था। मामला डीएम तक पहुंचा, तो उन्होंने जांच कराई। बीएसए विजय प्रताप सिंह ने अगस्त में 13 खंड शिक्षा अधिकारियों की तैनाती में फेरबदल किया। सीमा गौतम को सुरसा से हटाकर जिला मुख्यालय संबद्ध कर दिया गया। बीएसए का दावा है कि तीन दिन पहले सीमा गौतम के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

दूसरी ओर बृहस्पतिवार शाम से एक ऑडियो वायरल हो गया। सीमा गौतम का दावा है कि ऑडियो में उनकी और हरियावां के खंड शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार झा के बीच बातचीत है। सीमा गौतम का दावा है कि अनिल झा बीएसए के नाम पर उनसे एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं। यह मांग कंपोजिट ग्रांट से मिले बजट को लेकर की जा रही है। उनका दावा यह भी है कि सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से कंपोजिट ग्रांट के बजट से एक-एक लाख रुपये की वसूली अनिल कुमार झा ने बीएसए के लिए की है।


किसने क्या कहा

ऑडियो पुराना लग रहा है। इसमें कहीं भी रुपये की मांग नहीं की गई है। मेरा नाम या पदनाम इसमें कहीं नहीं आया है। किसी भी खंड शिक्षा अधिकारी से कोई वसूली नहीं की गई है।-विजय प्रताप सिंह, बीएसए 

-जिलाधिकारी महोदय ने प्रत्येक विकास खंड में एक कंपोजिट विद्यालय को मॉडल विद्यालय बनाने के लिए कहा था। इसी क्रम में खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय के रूप में सभी खंड शिक्षा अधिकारियों से बात की थी। इसी क्रम में सुरसा की तत्कालीन बीईओ सीमा गौतम से भी बात हुई थी। रुपये मांगे जाने की बात बिल्कुल गलत है।-अनिल कुमार झा, खंड शिक्षा अधिकारी, हरियावां

बीएसए ने सभी बीईओ मुख्यालय के माध्यम से प्रति ब्लॉक एक लाख रुपये की मांग की थी। जिन्होंने नहीं दिया बारी-बारी से उन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। मेरे खिलाफ भी शासन को पत्र लिखा गया है। कई और साजिश कर आईजीआरएस पर भी मेरी शिकायतें कराई गईं। एडिटेड ऑडियो भी वायरल कराए गए। -सीमा गौतम, खंड शिक्षा अधिकारी, (मुख्यालय से संबद्ध)

मनमाने ढंग से फीस वसूली पर लगेगा ब्रेक, डिग्री कॉलेजों में मेडिकल व इंजीनियरिंग की तर्ज पर बीएससी बीए की भी फीस तय होगी

मनमाने ढंग से फीस वसूली पर लगेगा ब्रेक, डिग्री कॉलेजों में मेडिकल व इंजीनियरिंग की तर्ज पर बीएससी बीए की भी फीस तय होगी

प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की तर्ज पर शुल्क निर्धारण

7925 डिग्री कॉलेजों में 54.76 लाख छात्र पढ़ रहे


लखनऊ। अब मेडिकल व इंजीनियरिंग की तर्ज पर परंपरागत पाठ्यक्रमों की भी मानक फीस निर्धारित की जाएगी। बीए, बीएससी व बीकॉम के समान्य और ऑनर्स पाठ्यक्रमों का शुल्क निर्धारण प्रोफेशनल कोर्सों की तर्ज पर किया जाएगा। उपलब्ध संसाधनों व सुविधाओं के अनुसार एक निश्चित शुल्क से अधिक कॉलेज नहीं वसूल सकेंगे। उच्च शिक्षा विभाग इसकी तैयारी में जुट गया है।


अभी बीए, बीएससी व बीकॉम की प्रोफेशनल पाठ्यक्रमों की तरह कोई मानक फीस निर्धारित न होने से कॉलेज मनमाने ढंग से फीस वसूलते हैं। खासकर सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में स्थिति और खराब है। राजकीय, एडेड व सेल्फ फाइनेंस कॉलेजों में फीस को लेकर काफी असमानता है। किसी कॉलेज में बीए व बीएससी की फीस तीन हजार से लेकर आठ हजार रुपये है तो कहीं यह 15-20 हजार रुपये प्रति सेमेस्टर तक है।

Tuesday, September 16, 2025

CBSE : 10वीं-12वीं में 75% हाजिरी वाले ही दे सकेंगे परीक्षा, हर विषय में लगातार दो वर्ष पढ़ाई भी हुई अनिवार्य

CBSE : 10वीं-12वीं में 75% हाजिरी वाले ही दे सकेंगे परीक्षा,  हर विषय में लगातार दो वर्ष पढ़ाई भी हुई अनिवार्य


नौवीं के विषय 10वीं में नहीं बदले जा सकेंगे, 11वीं के विषय 12वीं में नहीं बदलेंगे

बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव, 75% हाजिरी अनिवार्य

ट्यूशन पर निर्भर रहने वाले विद्यार्थियों को होगी मुश्किल


नई दिल्ली। सीबीएसई की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए अब छात्रों की 75 फीसदी हाजिरी जरूरी है। साथ ही छात्र का सभी चयनित विषयों में दो साल तक लगातार पढ़ाई करना और आंतरिक मूल्यांकन भी अनिवार्य होगा। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) के तहत ये नियम तय किए हैं।


सीबीएसई बोर्ड के परीक्षा नियंत्रक संयम भारद्वाज की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना के तहत अब यदि किसी ने नौवीं कक्षा में कंप्यूटर और संगीत को वैकल्पिक विषय के तौर पर रखा होगा तो दसवीं तक दोनों विषय पढ़ना जरूरी होगा। इनके मूल्यांकन के आधार पर आगे बोर्ड परीक्षा में शामिल हो सकेंगे। इसी तरह 11वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा में भी चयनित विषयों की पढ़ाई जरूरी होगी।


नौंवी-दसवीं और 11वीं-12वीं कक्षा को दो वर्षीय शैक्षणिक कार्यक्रमों के तौर पर माना जाएगा। दोनों कक्षाओं के छात्र विषय नहीं बदल सकेंगे। दसवीं कक्षा में पांच मुख्य विषयों के साथ दो अतिरिक्त विषय रख सकेंगे। 11वीं व 12वीं कक्षा में भी पांच मुख्य विषयों के साथ एक अतिरिक्त विषय लेने की अनुमति होगी। 



नौवीं व 11वीं में लिए विषय को दो वर्ष पढ़ना होगा अनिवार्य : सीबीएसई

 नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने बोर्ड परीक्षाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। अब 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं दो वर्षीय कार्यक्रम के रूप में मान्य होंगी। इसका अर्थ है कि किसी भी विषय में बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए छात्रों को उस विषय की दो वर्षों तक पढ़ाई करना अनिवार्य होगा। उदाहरण के लिए, यदि विद्यार्थी ने नौवीं कक्षा में फैशन डिजाइनिंग और पेंटिंग को वैकल्पिक विषय के रूप में चुना है, तो उसे ये दोनों विषय नौवीं के साथ-साथ 10वीं में भी पढ़ने होंगे। 10वीं में विषय बदला नहीं जा सकेगा। यही नियम 11वीं और 12वीं के लिए भी लागू होगा।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डा. संयम भारद्वाज ने बताया कि ये बदलाव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के अनुरूप हैं, जिसका उद्देश्य शिक्षा व्यवस्था को और पारदर्शी और प्रभावी बनाना है। स्पष्ट किया है कि नौवीं-10वीं में छात्र पांच मुख्य विषयों के साथ दो अतिरिक्त विषय और 11वीं-12वीं में पांच मुख्य विषयों के साथ एक अतिरिक्त विषय लेने की अनुमति होगी। इसके अतिरिक्त, बोर्ड परीक्षाओं में शामिल होने के लिए छात्रों को कम से कम 75 प्रतिशत हाजिरी बनाए रखनी होगी और सभी विषयों में आंतरिक मूल्यांकन अनिवार्य होगा। यदि छात्र स्कुल नहीं आते हैं, तो उनका आंतरिक मूल्यांकन नहीं हो पाएगा और परिणाम घोषित नहीं किया जाएगा। नियमों का पालन न करने वाले छात्रों को आवश्यक दोहराव श्रेणी में रखा जाएगा।

सीबीएसई ने चेतावनी दी है कि वे बिना बोर्ड की अनुमति नए विषय शुरू नहीं कर सकते हैं। स्कूल के पास मान्यता प्राप्त शिक्षक, लैब और संसाधन नहीं हैं, तो वे किसी विषय को मुख्य या अतिरिक्त के रूप में नहीं पढ़ा पाएंगे। वहीं, जिन विद्यार्थियों ने अतिरिक्त विषय लिया था और वे कंपार्टमेंट या आवश्यक दोहराव की श्रेणी में हैं, उन्हें निजी तौर पर परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी।

राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति में अधिक से अधिक आवेदन हेतु माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी डीआईओएस को लिखा पत्र

राष्ट्रीय आय एवं योग्यता छात्रवृत्ति के लिए आवेदन 24 सितंबर तक, 9 नवंबर को परीक्षा


लखनऊ। राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति योजना परीक्षा 2026-27 के लिए ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तिथि 24 सितंबर है। जबकि परीक्षा का आयोजन नौ नवंबर को जिला स्तर पर होगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को पत्र भेजकर इसमें ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराने के निर्देश दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से उत्तर प्रदेश के लिए 15143 सीटों का कोटा निर्धारित किया गया है। ऐसे में विभाग का यह लक्ष्य है कि इस बार ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराए जाएं। 



राष्ट्रीय आय एवं योग्यता आधारित छात्रवृत्ति में अधिक से अधिक आवेदन हेतु माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने सभी डीआईओएस को लिखा पत्र
 


Sunday, September 14, 2025

2425 आंगनबाड़ी मुख्य सेविकाओं को जिले आवंटित

2425 आंगनबाड़ी मुख्य सेविकाओं को जिले आवंटित

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में नव चयनित 2425 मुख्य सेविकाओं को जिले आवंटित कर दिए गए हैं। अब सभी जिला कार्यक्रम अधिकारियों (डीपीओ) को भी इन्हें तत्काल परियोजना पर तैनाती के निर्देश दिए गए हैं। 

हालांकि विकल्प भरने के लिए जारी जिलों की सूची को लेकर तमाम सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन विभाग का दावा है कि ऑनलाइन वरीयता और मेरिट के आधार पर पारदर्शी प्रक्रिया को अपनाते हुए जिले आवंटित किए गए हैं। 

विभाग की ओर से बताया गया कि पोर्टल के माध्यम से 69 जिलों में से 2425 मुख्य सेविकाओं द्वारा अपनी जिला आवंटन प्राथमिकता दर्ज कराई गयी थी। इसमें से 2403 मुख्य सेविकाओं को उनकी प्राथमिकता के आधार पर जिलों का आवंटन किया गया जबकि शेष 22 मुख्य सेविकाओं को रैंडम आवंटन के माध्यम से जिले आवंटित किए गए हैं। 



मुख्य सेविकाओं की तैनाती के विकल्प में भी किया गया खेल, लखनऊ समेत कई जिले गायब, सीडीपीओ पद पर प्रोन्नति वाली मुख्य सेविकाओं की पोस्टिंग नहीं


लखनऊ। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग में नव चयनित 2425 मुख्य सेविकाओं की पोस्टिंग के लिए दिए गए ऑनलाइन विकल्प में जिलों की सूची में भी खेल होने की आशंका है। इसे लेकर सवाल उठने लगे हैं कि विकल्प वाले जिलों की सूची में लखनऊ समेत पांच अन्य जिलों के नाम गायब हैं। इनमें बाराबंकी, कानपुर, गाजियाबाद, फतेहपुर व मऊ भी शामिल हैं।

वहीं, सूत्रों का कहना है कि इन जिलों में तैनात तमाम मुख्य सेविकाओं का बाल विकास परियोजना अधिकारी (सीडीपीओ) के पद पर प्रमोशन हो चुका है, लेकिन उनको जानबूझकर इसलिए तैनाती नहीं दी जा रही है कि पहले वल चयनित मुख्य सेविकाओं की तैनाती करने के बाद ही नव प्रोन्नत सीडीपीओ को तैनाती दी जाएगी। ताकि इन जिलों में रिक्त होने वाले मुख्य सेविका के पदों पर सिफारिशी मुख्य सेविकाओं को तैनात किया जा सके।

दरअसल लखनऊ व उसके नजदीक होने की वजह से बाराबंकी में तैनाती के लिए तमाम मुख्य सेविकाओं ने अर्जी लगा रखी थी। उनके लिए तमाम लोगों की मंत्री से लेकर उच्चाधिकारियों तक से सिफारिश की गई थी। इसलिए आईसीडीएस निदेशालय में बाबुओं के कॉकस ने यह फार्मूला निकाला कि नव प्रोन्नति सीडीपीओ को तैनाती न देकर इन जिलों में मुख्य सेविका के पदों को भरा दिखा दिया और 69 जिलों में तैनाती के लिए ऑनलाइन विकल्प दे दिया। जबकि कहा जा रहा है कि यदि नव प्रोन्नत सीडीपीओ की पहले तैनाती कर दी जाती इन जिलों में भी मुख्य सेविका के पद रिक्त हो जाते। लेकिन ऐसा न करने को लेकर तमाम तरह के सवाल उठ रहे हैं।


अंतिम तिथि समाप्त अब होगी तैनाती

बता दें कि आईसीडीएस निदेशालय की ओर से नवचयनित मुख्य सेविकाओं को जिलों के चयन के लिए दिए गए विकल्प को भरने का रविवार को अंतिम दिन था। जो रात 12 बजे समाप्त हो गया है। सोमवार से मुख्यालय पर सभी विकल्पों को फाइनल करके जल्द ही तैनाती के आदेश जारी किए जाएंगे।

जहां अधिक आवेदन वही जिले गायब

सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति पत्र पाने के बाद से ही मुख्य सेविकाओं द्वारा तैनाती के लिए अपने-अपने आवेदन जमा किए गए थे। जिसमें इन 6 जिलों में तैनाती के लिए अधिक सिफारिशें थी। उधर उच्च स्तर से भी इन जिलों में तैनाती की सिफारिश थी। खास तौर लखनऊ, गाजियाबाद, कानपुर और बाराबंकी में तैनाती के लिए अधिद दबाव था। इसलिए इन जिलों में इस संवर्ग के पदों को रिक्त ही नहीं किया गया।





नवचयनित मुख्य सेविकाओं की जनपद में तैनाती हेतु ऑनलाइन विकल्प भरे जाने के संबंध में आदेश जारी



अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयो के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियो के GPF लेखाशीर्षक 8338 के अन्तर्गत जमा धनराशि पर दिनांकः 01.4.2002 से लेखाशीर्ष 8009 में स्थानान्तरित किये जाने की अवधि तक देय अद्यतन ब्याज के सम्बन्ध में

अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयो के शिक्षक/शिक्षणेत्तर कर्मचारियो के GPF लेखाशीर्षक 8338 के अन्तर्गत जमा धनराशि पर दिनांकः 01.4.2002 से लेखाशीर्ष 8009 में स्थानान्तरित किये जाने की अवधि तक देय अद्यतन ब्याज के सम्बन्ध में