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Sunday, November 2, 2025

देश के सभी स्कूलों से हटेंगी जहरीली एस्बेस्टस की छतें, NGT का अहम फैसला

देश के सभी स्कूलों से हटेंगी जहरीली एस्बेस्टस की छतें, NGT का अहम फैसला

बच्चों की सांसों को मिलेगी आजादी, एस्बेस्टस से निकलने वाले रेशे फेफड़ों के लिए जानलेवा


नई दिल्ली। देश के स्कूलों में एस्बेस्टस शीट (चादर) की छत से होने वाले वायु प्रदूषण और बच्चों की सेहत बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने इन्हें हटाने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ये शीट फेफड़ों, खासकर बच्चों के लिए खतरनाक बीमारियां पैदा कर सकती हैं। एनजीटी ने देशभर के सरकारी और निजी स्कूलों को एक साल के अंदर इन्हें हटाकर सुरक्षित विकल्प लगाने के लिए कहा है।


न्यायिक सदस्य अरुण कुमार त्यागी और विशेषज्ञ सदस्य डॉ. अफरोज अहमद की पीठ ने स्कूलों की छतों में इस्तेमाल होने वाली जहरीली एस्बेस्टस शीट को पूरी तरह हटाने का आदेश दिया। हालांकि, पीठ ने कहा कि यदि छत की शीट अच्छी स्थिति में है, तो उसे हटाने की जरूरत नहीं, पर उस पर पेंट या सुरक्षात्मक कोटिंग लगाई जानी चाहिए। अगर शीट खराब हो चुकी है, तो उसे तुरंत गीला करके और विशेषज्ञों की मदद से हटाया जाए, ताकि हवा में हानिकारक रेशे न फैलें। 


वहीं, स्कूलों को सिर्फ प्रमाणित पेशेवरों से ही ऐसी सामग्री की मरम्मत या हटाने का कार्य कराना होगा। इसके अलावा, स्कूल कर्मियों को एस्बेस्टस से जुड़े जोखिमों और सुरक्षा उपायों के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। एनजीटी ने खुद निगरानी का जिम्मा लिया है। एनजीटी ने कहा, फैसला पर्यावरण संरक्षण कानून 1986 व प्रदूषण रोकथाम कानून 1981 के तहत है।


राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड करें नियमित निरीक्षण
पीठ ने राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को आदेश दिया कि वे नियमित निरीक्षण करें और निपटान प्रक्रिया का पूरा रिकॉर्ड रखें। एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय, शहरी विकास मंत्रालय और सीपीसीबी को आदेश दिया कि वह छह महीने के अंदर एस्बेस्टस से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्य और वैश्विक प्रथाओं की समीक्षा करें और रिपोर्ट सौंपें। स्कूलों, घरों और अन्य भवनों में इसके उपयोग को बंद करने की नीति तैयार करें।


एस्बेस्टस कचरे का निपटान सीलबंद कंटेनरों में करना होगा
पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 2011 के प्रतिबंध के बावजूद स्कूलों में एस्बेस्टस का इस्तेमाल हो रहा है। ज्यादातर राज्यों ने अभी तक इसे हटाने की योजना नहीं बनाई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) और राज्य बोर्डों की निगरानी भी कमजोर है। एनजीटी ने आदेश दिया कि एस्बेस्टस कचरे का निपटान सीलबंद कंटेनरों में किया जाए। कचरा लाइसेंस प्राप्त खतरनाक अपशिष्ट निपटान स्थलों पर ही डंप किया जाए। इसे ले जाने वाले वाहन ढके हों और उन पर एस्बेस्टस कचरा लिखा हो।

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