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Wednesday, December 31, 2025

तीसरे समायोजन में हो रही व्यापक अनियमितताओं तथा SIR में लगे BLO को शीत अवकाश का प्रतिकर अवकाश दिए जाने के सम्बंध में की मांग

तीसरे समायोजन में हो रही व्यापक अनियमितताओं तथा SIR में लगे BLO को शीत अवकाश का प्रतिकर अवकाश दिए जाने के सम्बंध में की मांग 


यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए 8033 परीक्षा केंद्र फाइनल, अंतिम सूची जारी

यूपी बोर्ड परीक्षा के लिए 8033 परीक्षा केंद्र फाइनल, अंतिम सूची जारी, देखें और करें डाउनलोड 


प्रयागराज : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी कर दी है। परीक्षा प्रदेश के 8033 केंद्रों पर होगी। परिषदीय केंद्र निर्धारण समिति की 24 दिसंबर को हुई बैठक में अनुमोदन के बाद राज्यभर में 8033 परीक्षा केंद्र अंतिम रूप से निर्धारित किए गए हैं। इसको लेकर परिषद के सचिव भगवती सिंह द्वारा पत्र जारी कर दिया गया है।

पहले चरण में प्रदेशभर में 7448 परीक्षा केंद्र प्रस्तावित किए गए थे। इन पर विभिन्न स्तरों से 3053 आपत्तियां प्राप्त हुईं। जिला स्तरीय समितियों ने इन आपत्तियों की जांच की और उनका समाधान किया।

ज्यादातर केंद्रों का समाधान दूर बनाए गए केंद्र और क्षमता से अधिक परीक्षार्थियों के आवंटन जैसे प्रकरणों पर हुआ। जारी सूची में न केंद्र बढ़ाए गए और न ही काटे गए हैं। अंतिम रूप से तय किए गए परीक्षा केंद्रों की सूची परिषद की आधिकारिक वेबसाइट के साथ-साथ परिषद के एक्स (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट और फेसबुक अकाउंट पर भी अपलोड कर दी गई है।

यूपी बोर्ड परीक्षा 18 फरवरी से प्रारंभ होकर 12 मार्च तक आयोजित की जाएगी। इस वर्ष हाईस्कूल परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए 27,50,945 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया है, जबकि इंटरमीडिएट परीक्षा के लिए 24,79,352 विद्यार्थी पंजीकृत हैं। इस प्रकार कुल 52,30,297 छात्र-छात्राएं यूपी बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होंगे।



यूपी बोर्ड को मिलीं तीन हजार से अधिक शिकायतें, 28 दिसंबर तक इनका निस्तारण कर 30 दिसंबर को परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची जारी करने की तैयारी

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए कई जिलों में परीक्षा केंद्र बीस से लेकर 49 किमी दूर तक भेज दिया है। इसके अलावा अधिक छात्र आवंटित करने, छात्रों की कम संख्या देने, परीक्षा केंद्र न बनाए जाने की तीन हजार से अधिक शिकायतें माध्यमिक शिक्षा परिषद को प्राप्त हुई हैं।

इनका निस्तारण 28 दिसंबर तक करने के बाद 30 दिसंबर को परीक्षा केंद्रों की फाइनल सूची जारी करने की तैयारी में यूपी बोर्ड जुट गया है। यूपी बोर्ड ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए 7448 विद्यालयों को ऑनलाइन परीक्षा केंद्र घोषित किया था। इनमें 910 राजकीय, 3484 एडेड और 3054 वित्त विहीन विद्यालय शामिल थे। छात्रों की कुल संख्या 52,30,297 है।

उधर, जनपदीय समितियों ने ऑनलाइन बनाए गए केंद्रों की संख्या बढ़ा कर 8033 कर दी जिसमें 910 राजकीय स्कूलों की संख्या कम कर 596, एडेड 3484 स्कूलों की संख्या कम कर 3453 कर दी। जबकि, 3054 वित्त विहीन स्कूलों की संख्या बढ़ाकर 3984 कर दी गई।

माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के प्रदेश संरक्षक हरि प्रकाश यादव का कहना है कि प्रयागराज में परीक्षा केंद्र बनाए गए एडेड स्कूलों को बिना किसी कारण के काट कर वित्त विहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया है। उन्होंने कहा कि छात्र संख्या एडेड स्कूलों में कम कर वित्त विहीन में बढ़ाने का खेल हुआ है।


परीक्षा केंद्र बनाए जाने, लंबी दूरी पर केंद्र भेजे जाने, छात्र संख्या कम करने सहित प्रदेश भर से 3053 शिकायतें प्राप्त हुई हैं। प्रयास है कि 28 दिसंबर तक इनका निस्तारण कर 30 दिसंबर को केंद्रों की अंतिम सूची जारी कर दी जाए। –भगवती सिंह, सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद


केस एक 
प्रदेश के लगभग हर जिले से लंबी दूरी पर सेंटर भेजे जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। हालांकि, इसमें एक जिले में इंटरमीडिएट कॉलेज के छात्रों का सेंटर 49 किमी दूर भेजे जाने की शिकायत आई है। आरोप है कि तीन किमी की दूरी पर परीक्षा केंद्र होने के बावजूद भी इतनी दूर केंद्र बना दिया गया है। यह माध्यमिक शिक्षा परिषद के मानकों के विपरीत है।

केस दो
प्रयागराज जिले में ऑनलाइन केंद्रों के निर्धारण में एडेड स्कूल परीक्षा केंद्र बनाए गए। इसमें 15 से अधिक स्कूल ऐसे हैं जिन्हें बिना किसी कारण के दूसरी सूची में हटाकर वित्त विहीन स्कूलों को परीक्षा केंद्र बना दिया गया। इसकी शिकायत माध्यमिक शिक्षक संघ एकजुट के नेताओं ने की है।

केस तीन
 प्रयागराज जिले में ऑनलाइन सेंटर निर्धारण में एडेड स्कूलों में छात्र संख्या को दूसरी सूची में कम कर वित्त विहीन स्कूलों में छात्र संख्या बढ़ा दी गई। चर्चा है कि ऐसा विभागीय अधिकारियों व वित्त विहीन स्कूलों के प्रबंधकों की साठगांठ की वजह से हुआ है। इसकी शिकायत भी प्राप्त हुई है।

केस चार
 गाजीपुर, आजमगढ़, बलिया जिलों से परीक्षा केंद्र न बनाए जाने की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। कोई अधिक छात्र आवंटित होने की शिकायत कर रहा है तो कोई इस बार विद्यालय को परीक्षा केंद्र न बनाए जाने का मुद्दा उठा रहा है। शिकायत करने वालों में अधिकतर वित्त विहीन स्कूलों के प्रधानाचार्य शामिल हैं।




यूपी बोर्ड परीक्षा: जनपदीय समितियों ने केंद्र की सूची में बढ़ा दिए 930 वित्तविहीन स्कूल

बोर्ड परीक्षा में छात्रों की संख्या दो लाख कम होने के बावजूद भी 585 केंद्रों की बढ़ोतरी

प्रयागराज। यूपी बोर्ड परीक्षा-2026 के लिए ऑनलाइन बनाए गए 7448 केंद्रों के लिए 8707 आपत्तियां दर्ज की गई हैं। डीएम की अध्यक्षता में जनपदीय परीक्षा निर्धारण समितियों ने आपत्तियों के निस्तारण के बहाने 314 राजकीय और 31 एडेड स्कूलों के केंद्रों की संख्या कम कर 930 वित्तविहीन अन्य स्कूलों की संख्या बढ़ा दी हैं। ऐसे में वर्ष 2026 की बोर्ड परीक्षा में छात्रों की संख्या दो लाख कम होने के बावजूद भी 585 केंद्र बढ़ गए हैं।

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने वर्ष 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए 7448 विद्यालयों को केंद्र घोषित किया है। इनमें 910 राजकीय, 3484 एडेड तथा 3054 वित्त-विहीन स्कूल शामिल थे। छात्रों की संख्या 52,30,297 हैं।

वर्ष 2025 के 54,37,174 विद्यार्थी होने के बावजूद भी 7,657 ही सेंटर बनाए गए थे। इसमें 940 राजकीय, 3,512 एडेड और 3,205 वित्तविहीन स्कूलों की संख्या शामिल हैं। इस बार छात्रों की संख्या कम होने के बावजूद भी केंद्रों की संख्या बढ़ाने पर जनपदीय समितियों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

केंद्रों की संशोधित सूची बोर्ड की वेबसाइट पर अपलोड हो चुकी है। 22 दिसंबर तक विद्यालयों, छात्रों, अभिभावकों, प्रधानाचार्यों और प्रबंधकों को दोबारा आपत्तियां दर्ज करने का अवसर परिषद ने दिया है।

सचिव भगवती सिंह ने बताया कि निर्धारित प्रक्रिया पूरी करने के बाद 30 दिसंबर को अंतिम केंद्रों की फाइनल सूची जारी कर दी जाएगी।




8033 केंद्रों पर होगी यूपी बोर्ड हाईस्कूल और इंटर की परीक्षा

हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा 2026 के लिए 8033 केंद्र बनाए गए हैं। आपत्तियों के निस्तारण के बाद जिलों से 585 केंद्र बढ़ा दिए गए हैं। यही नहीं ऑफलाइन माध्यम से सर्वाधिक निजी स्कूलों के केंद्र बढ़े हैं।

यूपी बोर्ड ने 30 नवंबर को जारी ऑनलाइन सूची में 7448 केंद्र बनाए थे जिनमें 910 राजकीय, 3484 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 3054 वित्तविहीन स्कूल शामिल थे। इन ऑनलाइन केंद्रों पर छात्रों, प्रधानाचार्यों, अभिभावकों और प्रबंधकों से आपत्तियां मांगी गई थी। सभी 75 जिलों से आठ हजार से अधिक आपत्तियां मिली थी। इनके निस्तारण के लिए बोर्ड ने जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति को अधिकृत करते हुए केंद्र बनाने की जिम्मेदारी सौंपी थी। 


जिला समितियों से आपत्तियां निस्तारण के बाद केंद्रों की संख्या 8033 हो गई है जिसमें 596 राजकीय, 3453 सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय और 3984 वित्तविहीन स्कूल शामिल हैं। साफ है कि सबसे अधिक राजकीय विद्यालयों के केंद्रों में कटौती की गई है। बोर्ड ने 910 राजकीय विद्यालयों को केंद्र बनाया था जबकि जिलों ने 314 स्कूलों का केंद्र खत्म करते हुए वित्तविहीन स्कूलों को सेंटर बना दिया है। 31 एडेड कॉलेजों के केंद्र भी काट दिए गए हैं। 

बोर्ड सचिव भगवती सिंह की ओर से बुधवार देर रात जारी सूचना के मुताबिक ऑनलाइन माध्यम से प्रस्तावित परीक्षा केन्द्रों (विद्यालय छात्र आवंटन सहित) की सूची जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जनपदीय केन्द्र निर्धारण समिति के अनुमोदन के बाद वेबसाइट upmsp.edu.in पर अपलोड कर दी गई है। इन परीक्षा केन्द्रों (विद्यालय छात्र आवंटन सहित) के संबंध में यदि कोई आपत्ति या शिकायत हो तो छात्र, अविभावक, प्रधानाचार्य या प्रबंधक साक्ष्यों के साथ संबंधित विद्यालय की आईडी से अपना ऑनलाइन प्रत्यावेदन पोर्टल upmsp.edu.in पर 22 दिसंबर तक भेज सकते हैं। परीक्षा केंद्रों की अंतिम सूची 30 दिसंबर तक अपलोड की जाएगी।


पिछले साल से कम हो गए 107 परीक्षा केंद्र

पिछले साल की तुलना में परीक्षा केंद्रों की संख्या में 107 की कमी आई है। 2025 की परीक्षा के लिए यूपी बोर्ड ने ऑनलाइन 7657 केंद्र तय किए थे। आपत्तियों के निस्तारण के बाद 8140 स्कूलों को केंद्र बनाना पड़ा था। 2026 की परीक्षा के लिए बोर्ड ने 7446 केंद्र बनाए थे जो बढ़कर 8033 हो गए हैं। 2024 में ऑनलाइन 7864 केंद्र बने थे जो आपत्तियां निस्तारण के बाद 8265 हो गए थे। पिछले लगभग एक दशक से यूपी बोर्ड ऑनलाइन माध्यम से केंद्र निर्धारित करते हुए सूची जारी करता है।

शिक्षक संघ ने प्रदेश में घोषित शीत अवकाश के अनुपालन को लेकर जिला स्तर पर जारी हुए विरोधाभासी आदेशों पर जताई गंभीर आपत्ति

शिक्षक संघ ने प्रदेश में घोषित शीत अवकाश के अनुपालन को लेकर जिला स्तर पर जारी हुए विरोधाभासी आदेशों पर जताई गंभीर आपत्ति 


उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने प्रदेश में घोषित शीत अवकाश के अनुपालन को लेकर जिला स्तर पर जारी हो रहे विरोधाभासी आदेशों पर गंभीर आपत्ति जताई है। संघ ने शिक्षा निदेशक (माध्यमिक), उत्तर प्रदेश को भेजे ज्ञापन में कहा है कि शासन द्वारा 29 दिसंबर 2025 से 1 जनवरी 2026 तक शीतलहर और घने कोहरे को देखते हुए सभी सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया है, किंतु इसके बावजूद कुछ जनपदों में जिला विद्यालय निरीक्षकों द्वारा शिक्षकों को अवकाश अवधि में प्रतिदिन विद्यालय में उपस्थित रहने के आदेश दिए जा रहे हैं। 

संघ का कहना है कि जब विद्यार्थियों के लिए विद्यालय बंद हैं तो शिक्षकों की अनिवार्य उपस्थिति का कोई औचित्य नहीं है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि ऐसे आदेश यह दर्शाते हैं कि जनपदीय अधिकारी शासन के स्पष्ट निर्देशों का मनमाने ढंग से उल्लंघन कर रहे हैं और विभागीय नियंत्रण कमजोर हो चुका है। संघ ने इसे शिक्षक समाज के मानसिक उत्पीड़न की संज्ञा देते हुए कहा है कि बार-बार इस प्रकार के आदेश जारी होना शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों के विपरीत है। 

उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ ने मांग की है कि सभी जनपदों में शीत अवकाश का समान रूप से पालन सुनिश्चित कराया जाए और शिक्षकों को अन्य विभागों की तरह 31 दिसंबर का अवकाश भी प्रदान किया जाए, ताकि कड़ाके की ठंड में उन्हें राहत मिल सके। संघ ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि आदेशों का वास्तविक अनुपालन सुनिश्चित नहीं कराया गया तो शिक्षक समाज में असंतोष और बढ़ेगा।



Run For Swadeshi: दौड़ लगाकर विद्यार्थी आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय एकता का देंगे संदेश, देश के सभी शिक्षण संस्थानों में स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को होगा रन फॉर स्वदेशी का आयोजन

Run For Swadeshi: दौड़ लगाकर विद्यार्थी आत्मनिर्भर भारत और राष्ट्रीय एकता का देंगे संदेश, देश के सभी शिक्षण संस्थानों में स्वामी विवेकानंद की जयंती 12 जनवरी को होगा रन फॉर स्वदेशी का आयोजन


यूजीसी ने शिक्षण संस्थानों को पत्र लिख दिया निर्देश

नई दिल्ली। देश के सभी शिक्षण संस्थानों में 12 जनवरी को रन फॉर स्वदेशी का आयोजन होगा। स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती के मौके पर राष्ट्रीय युवा दिवस के तहत यह राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आयोजित होगा। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने इस संबंध में सभी राज्यों को पत्र लिखा है। इसमें दो से पांच किलोमीटर की दौड़ के माध्यम से युवाओं को स्वदेशी मूल्य, आत्मनिर्भर भारत, शारीरिक फिटनेस, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के प्रति जागरूक किया जाएगा।

यूजीसी के सचिव प्रो. मनीष जोशी ने इस संबंध में राज्यों और विश्वविद्यालयों को पत्र भेजा है। इसमें स्वामी विवेकानंद की 164वीं जयंती (राष्ट्रीय युवा दिवस) के मौके पर सभी उच्च शिक्षण संस्थानों को एक राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम आयोजित करने का निर्देश दिया है।

इसके तहत 12 जनवरी पर रन फॉर स्वदेशी का आयोजन किया जाएगा। इसमें दो, तीन और पांच किलोमीटर दौड़ का आयोजन किया जाएगा। प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी मिलेगा। इसमें कॉलेज के छात्र, एनएसएस, एनसीसी, युवा क्लब, संकाय सदस्यों के अलावा आम लोग भी शामिल हो सकते हैं। सबसे पहले स्वामी विवेकानंद के संदेशों और आत्मनिर्भरता पर आधारित प्रेरक भाषण भी होगा। उच्च शिक्षण संस्थानों को कार्यक्रम से संबंधित जानकारियां यूजीसी को भेजनी अनिवार्य होगी।


UP Madarsa Board Holiday List : वर्ष 2026 में मदरसों में 78 दिन रहेंगी छुट्टियां, अवकाश तालिका जारी, करें डाउनलोड

वर्ष 2026 में मदरसों में 78 दिन रहेंगी छुट्टियां, अवकाश तालिका जारी, करें डाउनलोड 


लखनऊ। प्रदेश के सभी मदरसे 1 से 10 जनवरी तक बंद रहेंगे। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद ने ठंड को देखते हुए 10 दिन का शीतकालीन अवकाश घोषित किया है। साथ ही मदरसा बोर्ड ने साल 2026 की अवकाश तालिका भी जारी कर दी है। सर्दी व गर्मी में मौसम बदलने पर जिलाधिकारी व अन्य सक्षम स्तर से घोषित होने वाले अवकाश मदरसों पर भी लागू होंगे। 

नई अवकाश तालिका के अनुसार 2026 में 78 दिन मदरसे बंद रहेंगे। मदरसा बोर्ड की रजिस्ट्रार अंजना सिरोही ने बताया कि रमजान 18 फरवरी से शुरू होने की संभावना है। इसको देखते हुए मदरसों में वार्षिक अवकाश 16 फरवरी से 30 मार्च तक तय किया गया है। ईद उल फित्र में मदरसों में 4 दिन का अवकाश रहेगा। उन्होंने बताया कि मदरसे के प्रबंधक 3 और प्रधानाचार्य 2 दिन का अवकाश स्वीकृत कर सकेंगे। 





मदरसे में साप्ताहिक अवकाश जुमा (शुक्रवार) को होगा। मदरसे के प्रबन्धक एवं प्रधानाचार्य कमशः 3-2 अर्थात कुल 05 दिन का अवकाश स्वीकृत कर सकते हैं।

उपरोक्त के अतिरिक्त अध्यापकों/ शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को 14 दिवस का आकस्मिक अवकाश देय होगा। 

राष्ट्रीय पर्व में शिक्षण कार्य स्थगित रहेगा, लेकिन शिक्षक / शिक्षणेत्तर कर्मचारी / छात्र-छात्राएं मदरसे में उपस्थित रहकर आयोजित कार्यक्रम में प्रतिभाग करेंगे। 

इस्लामिक त्योहार, स्थानीय चन्द्रदर्शन (रूयते हिलाल) के आधार पर मनायेंगे। 

मदरसा प्रबन्धक मदरसा द्वारा प्रदत्त अवकाश की सूचना एक सप्ताह पूर्व जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को दी जायेगी। 

शीतकाल व ग्रीष्मकाल में मौसम परिवर्तन के दृष्टिगत जिलाधिकारी अथवा सक्षम स्तर द्वारा घोषित किये जाने वाले अवकाश मदरसों पर लागू होंगे तथा मदरसा संचालन के समय में आवश्यकतानुसार परिवर्तन निर्धारित शैक्षिक घण्टों में कमी न होने के दृष्टिगत किया जावेगा


2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू होगी कक्षा चार की नई किताबें, यूपी के संदर्भ में एनसीईआरटी की पुस्तक में किया बदलाव

2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू होगी कक्षा चार की नई किताबें, यूपी के संदर्भ में एनसीईआरटी की पुस्तक में किया बदलाव

कक्षा चार की किताब में जोड़ी अयोध्या के श्रीराम मंदिर की तस्वीर

कला विषय में छात्र-छात्राएं पढ़ेंगे कजरी, लोरी और गंगा गीत

हिन्दी, अंग्रेजी, गणित, कला, पर्यावरण की किताब में संशोधन


प्रयागराज। यूपी के के एक एक लाख से अधिक परिषदीय स्कूलों के कक्षा चार में 2026-27 शैक्षिक सत्र से लागू हो रही एनसीईआरटी की गणित, हिन्दी, पर्यावरण और कला की किताबों में कई अहम बदलाव किए गए हैं। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव गणित मेला पाठ्यपुस्तक के 'हमारे आसपास हजारों की संख्या' शीर्षक चौथे पाठ में हुआ है जिसमें कर्नाटक के जैन मंदिर के चित्र व संबंधित अभ्यास प्रश्न की जगह अयोध्या के प्रभु श्रीराम मंदिर का चित्र एवं संबंधित अभ्यास प्रश्न जोड़ा गया है। 

राज्य शिक्षा संस्थान के विशेषज्ञों ने दक्षिण भारतीय व्यक्तियों के नाम जैसे गुड़प्पा के स्थान पर गणेश, वृक्षों में नारियल के स्थान पर आंवला, मुनिअम्मा के स्थान पर मीना कर दिया गया है। कक्षा चार हिंदी की पाठ्यपुस्तक वीणा में आसामान गिरा पाठ के स्थान पर बेसिक शिक्षा परिषद की पाठ्यपुस्तक फुलवारी से हौसला, एक पृष्ठीय गोलगप्पा के स्थान पर डेजी की डायरी, एक पृष्ठीय हवा और धूल के स्थान पर सत्य की जीत (सत्यवादी हरिशचन्द्र) जोड़ा गया है।

छन्नू लाल मिश्र एवं गिरिजा देवी का चित्र जोड़ाः कला की पाठ्यपुस्तक बांसुरी में दक्षिण भारतीय कोलम की जानकारी देने के साथ-साथ हमारे प्रदेश में शुभ अवसरों पर चौक पूरना क्यों और कैसे बनाया जाता है? तथा चित्रकूट, वाराणसी, मिर्जापुर और सहारनपुर लकड़ी के खिलौने क्यों प्रसिद्ध है, के बारे में बताया गया है।

 एनसीईआरटी की पुस्तक में दक्षिण भारत के स्थान चन्नापाटना (कर्नाटक) का उल्लेख है। वरिसाई के स्थान पर उत्तर भारतीय संगीत में उपयोग में आने वाले अलंकार अथवा पलटा शब्द जोड़ा गया है। बनारस घराना में पं. छन्नू लाल मिश्र एवं उपशास्त्रीय गायन की विदुषी गिरिजा देवी का चित्र, कन्नड़ गीत आदोना बन्नी के स्थान पर कजरी (पारंपरिक लोकगीत वर्षा गीत एवं संबंधित चित्र), तमिल भाषा में लिखी लोरी को परिवर्तित करके हिन्दी अवधी भोजपुरी मिश्रित पारंपरिक लोरी शामिल की गई है। इसके अतिरिक्त कुमाऊंनी गीत (उत्तराखंड) के स्थान पर प्रदेश के प्रचलित बारहमासा गीत, मिजोरम लोकगीत के स्थान पर गंगा गीत और संबंधित चित्र दर्शाया गया है।

मट्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी को किया शामिल

पर्यावरण की पाठ्यपुस्तक 'हमारा अद्भुत संसार' में उत्तर प्रदेश का राजकीय पुष्प, प्रचलित भोजन (मठ्ठा-आलू, तहरी, पूरी-सब्जी), श्री अन्न जैसे कोदो, रागी (मडुआ) के नाम, अनाज उगाने में सूर्य के प्रकाश का महत्व, प्रबोधनी एकादशी (पर्व), कागज निर्माण के प्रसिद्ध केन्द्र एवं अनुसंधान जालौन एवं सहारनपुर आदि विषयवस्तु भी जोड़ी गई है।

कक्षा चार की की पाठ्यपुस्तकों के परीक्षण एवं कस्टमाइजेशन का काम उत्तर प्रदेश की शैक्षिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं एवं परिवेश के परिप्रेक्ष्य किया गया है। निश्चित रूप से इसका लाभ बच्चों को होगा। – राजेन्द्र प्रताप, प्राचार्य, राज्य शिक्षा संस्थान




उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विकसित की गई एनसीईआरटी की कक्षा 4 की किताबों को मिली मंजूरी, अगले सत्र से होंगी लागू 

कक्षा चार की अंग्रेजी किताब में अब रानी लक्ष्मीबाई भी

एनसीईआरटी की किताब में ईएलटीआई ने किया बदलाव, संगीतकार रवींद्र जैन भी शामिल


प्रयागराज । कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में बच्चों को अंग्रेजों के दांत खट्टे करने वाली रानी लक्ष्मीबाई और मशहूर गायक, गीतकार और संगीतकार पद्मश्री रवीन्द्र जैन के बारे में भी संक्षेप में पढ़ाया जाएगा। 2026-27 सत्र से प्रदेश के एक लाख से अधिक परिषदीय प्राथमिक स्कूलों में कक्षा चार में एनसीईआरटी की किताबें लागू होने जा रही हैं। अंग्रेजी की किताब संतूर को आंग्ल भाषा शिक्षण संस्थान (ईएलटीआई) एलनगंज के विशेषज्ञों ने उत्तर प्रदेश के संदर्भ में विकसित किया है।


महारानी अहिल्याबाई होल्कर के राज्य महेश्वर पर आधारित पाठ में रानी लक्ष्मीबाई के बारे में भी बताया गया है। लिखा है कि उन्होंने 1957 में झांसी किले की रक्षा के लिए अंग्रेजों से बहादुरी से लड़ाई की थी। अलीगढ़ में जन्मे और टीवी धारावाहिक रामायण के जरिए घर-घर में मशहूर हुए दिवंगत रवीन्द्र जैन के बारे में संक्षिप्त जानकारी दी गई है। यूपी के लिए खासतौर से किताब में कई छोटे लेकिन महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। उदाहरण के तौर पर नागालैंड के पारंपरिक खेल हेक्को पर आधारित पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि हेक्को और कबड्डी लगभग एक ही जैसे खेल हैं। जैसे लगौरी/सतोलिया को बताया गया कि वह खेल पिट्ठ है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में उपयोग में आने वाले शब्द चिन्ना को भी समझाया गया है। जैसे तमिल में चिन्ना का अर्थ छोटा जबकि कन्नड़ में चिन्ना का मतलब सोना होता है।

ईएलटीआई के प्राचार्य डॉ. स्कंद शुक्ल ने बताया कि अंग्रेजी की किताब में हिंदी में शब्दार्थ दिए गए हैं जिससे कि किताबें बच्चों और शिक्षकों को भी पढ़ने-पढ़ाने में ज्यादा समस्या न आए। इसके अतिरिक्त छोटी-छोटी चीजें जोड़ी गई हैं। किसी अन्य प्रदेश के संदर्भ में दी गई विषयवस्तु में प्रयुक्त अपरिचित शब्दों के हिंदी अर्थ भी दिए गए हैं, जिससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप बच्चों में अन्य भारतीय भाषाओं में भी रुचि पैदा हो सके।


अंग्रेजी की किताब में जोड़ा हिंदी का शब्दकोष

ईएलटीआई के विशेषज्ञों ने कक्षा चार की अंग्रेजी की किताब में कठिन शब्दों का हिंदी में अर्थ भी दिया है। साथ ही उन शब्दों का उच्चारण करना भी बताया गया है। ग्रामीण परिवेश के जिन बच्चों को अंग्रेजी समझने में कठिनाई होती है, उन्हें कठिन शब्द समझने में आसानी होगी।

सीबीएसई 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से होंगी, डेटशीट जारी

CBSE बोर्ड परीक्षा की तारीख बदली, 3 मार्च को होने वाली 10वीं की परीक्षा 11 मार्च और 12वीं की  परीक्षा 10 अप्रैल को होगी

नई दिल्ली। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने तीन मार्च को होने वाली परीक्षा की तारीख बदल दी है। 3 मार्च को 10वीं की परीक्षा 11 मार्च और 12वीं की  परीक्षा 10 अप्रैल को होगी। सीबीएसई की शेष परीक्षा पहले की घोषित तिथियों के अनुसार ही होगी। यह बदलाव प्रशासनिक कारणों से किया गया है।

10वीं की तीन मार्च को तिब्बती, जर्मन, नेशनल कैडेट कोर, बोडो, तंगखुल, जापानी, भूटिया, स्पेनिश, कश्मीरी, मिजो, ऐलिमेंट्स ऑफ बुक कीपिंग एंड अकाउंटेंसी की परीक्षा होनी थी। अब यह 11 मार्च को होगी। 12वीं की तीन मार्च को लीगल स्टडीज की परीक्षा होनी थी, जो अब 10 अप्रैल को होगी। 






सीबीएसई 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षाएं 17 फरवरी से होंगी, डेटशीट जारी

10वीं में दो बार होंगी परीक्षा, सर्वोत्तम स्कोर को माना जाएगा अंतिम


नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने गुरुवार को शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं की आधिकारिक डेटशीट जारी कर दी है। बोर्ड के अनुसार 10वीं की परीक्षाएं 17 फरवरी से शुरू होकर 10 मार्च 2026 तक चलेंगी, जबकि 12वीं की परीक्षाएं भी 17 फरवरी से शुरू होकर नौ अप्रैल 2026 तक चलेंगी। बोर्ड परीक्षाओं का समय सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 तक होगा।

सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डा. संयम भारद्वाज ने कहा कि परीक्षा और कार्यक्रम इस तरह से तैयार किया गया है कि विद्यार्थियों को मुख्य वैकल्पिक विषयों की परीक्षाओं के बीच तैयारी के लिए पर्याप्त समय मिल सके। वहीं, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत अब विद्यार्थियों को अधिक अवसर देने के उद्देश्य से सीबीएसई ने घोषणा की है कि 10वीं की बोर्ड परीक्षा वर्ष में दो बार कराई जाएगी। इसमें विद्यार्थी चाहें तो फरवरी सत्र की परीक्षा देने के बाद मई में दोबारा परीक्षा देकर अपने अंक सुधार सकते हैं। बोर्ड सर्वोत्तम स्कोर को ही अंतिम मानेगा।


CBSE: कक्षा 10वीं एवं 12वीं की बोर्ड परीक्षा 2026 के लिए डेट शीट जारी 
















Download UP Board Holiday List : प्रदेश के माध्यमिक विद्यालयों हेतु वर्ष 2026 की अवकाश तालिका जारी, करें डाउनलोड


माध्यमिक शिक्षा विभाग का नया कैलेंडर जारी, 28 दिन रहेगा सार्वजनिक अवकाश

238 दिन की पढ़ाई और 112 दिन की छुट्टियां, 15 दिन बोर्ड परीक्षा के लिए निर्धारित


लखनऊ। माध्यमिक शिक्षा विभाग ने 2026 के लिए छुट्टियों का कैलेंडर जारी कर दिया है। इसमें - गर्मी की छुट्टियों सहित कुल 112 दिन विद्यालयों में अवकाश रहेगा, जबकि बोर्ड परीक्षा के लिए 15 दिन निर्धारित किए गए हैं। इस दौरान 238 दिन विद्यालयों में पठन-पाठन व अन्य कार्य होंगे।

कैलेंडर के अनुसार, 21 मई से 30 जून तक गर्मी की छुट्टियां होंगी और पूरे वर्ष में कुल 28 दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किए गए हैं। इसके अलावा, यदि आवश्यक हो तो प्रधानाचार्य विशेष परिस्थितियों में तीन दिन का अवकाश दे सकते हैं, जिसका विवरण विद्यालय के सूचना पट्ट पर चस्पा किया जाएगा और डीआईओएस को भी सूचित किया जाएगा।

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने महिला शिक्षिकाओं के लिए विशेष अवकाश की घोषणा की है। इसके तहत विवाहित महिला शिक्षिकाओं को करवा चौथ की छुट्टी दी जाएगी। इसके साथ ही, क्षेत्र विशेष में हरितालिका तीज या हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी, ललई छठ, जिउतिया व्रत, अहोई अष्टमी व्रत जैसे त्योहारों पर महिला शिक्षिकाओं को उनके प्रार्थना पत्र पर दो दिन की छुट्टी दी जा सकेगी।


महिला शिक्षिकाओं को मिलेगा विशेष अवकाश

माध्यमिक शिक्षा विभाग ने महिला शिक्षिकाओं के लिए विशेष अवकाश की घोषणा की है। इसके तहत विवाहित महिला शिक्षिकाओं को करवा चौथ की छुट्टी दी जाएगी। इसके साथ ही, क्षेत्र विशेष में हरितालिका तीज या हरियाली तीज, संकठा चतुर्थी, हलषष्ठी, ललई छठ, जिउतिया व्रत, अहोई अष्टमी व्रत जैसे त्योहारों पर महिला शिक्षिकाओं को उनके प्रार्थना पत्र पर दो दिन की छु‌ट्टी दी जा सकेगी।



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मदरसा शिक्षकों को बिना प्रावधान वीआरएस, निदेशक ने पूछा- किस नियम में दिया जा रहा लाभ

मदरसा शिक्षकों को बिना प्रावधान वीआरएस, निदेशक ने पूछा- किस नियम में दिया जा रहा लाभ


लखनऊ। मदरसों में कार्यरत शिक्षकों या शिक्षणेत्तर कर्मियों की स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) को लेकर बड़ा पेंच फंस गया है। दरअसल एक्ट में इन शिक्षकों के वीआरएस लेने का कोई प्रावधान ही नहीं है। बावजूद इसके प्रदेश में तमाम मदरसा शिक्षकों को वीआरएस का लाभ और पेंशन भी दी जा रही है।

मामला खुला तो निदेशक अल्पसंख्यक कल्याण ने रजिस्ट्रार और निरीक्षक उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा परिषद को पत्र भेज कर पूछा गया है कि किस नियम के तहत यह लाभ और पेंशन दी जा रही है। 


निदेशक ने कहा है कि उत्तर प्रदेश अशासकीय अरबी और फारसी मदरसा मान्यता प्रशासन और सेवानियमावली-2016 में प्रावधान है कि कोई भी कर्मचारी तीन माह का नोटिस देकर त्यागपत्र दे सकता है। कोई कर्मचारी यदि त्यागपत्र के तीन माह पूर्व इसकी सूचना नहीं देता है तो उसे तीन महीने का वेतन जमा करना होगा। फिर नियुक्ति प्राधिकारी द्वारा संबंधित कर्मचारी को सुनवाई का पूरा अवसर देते हुए और उसके बयान दर्ज करने के बाद अपनी संस्तुति सहित इस्तीफा 15 दिन में निरीक्षक मदरसा शिक्षा परिषद को भेजा जाएगा।


निदेशक ने पूछा- किस नियम में दिया जा रहा लाभ

सवाल उठाया गया है कि इस नियमावली में क्या वीआरएस की व्यवस्था है? यदि नहीं है तो किस नियम के अंतर्गत मदरसों में कार्यरत शिक्षक व शिक्षणेत्तर कर्मचारियों यह लाभ दिया जा रहा है। ऐसे कितने प्रकरणों में पेंशन दी जा रही है। यदि हां, तो किस नियम के तहत ? रजिस्ट्रार व निरीक्षक के साथ ही जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारियों को सेवानियमावली का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं।


रिकवरी के साथ स्वीकृति देने वाले अफसर भी नपेंगे

विभागीय सूत्रों की मानें तो यह मामला बेहद गंभीर है। सवाल यह है कि बिना प्रावधान के आखिर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इसकी स्वीकृति कैसे देते आ रहे हैं। अब विभाग के पास दो ही विकल्प हैं कि जिनको यह लाभ मिल रहे हैं, उन्हें तत्काल रोकने के साथ रिकवरी की जाए। ऐसी स्थिति में संबंधित अधिकारी भी नपेंगे। दूसरा विकल्प मदरसा एक्ट में बदलाव कर वीआरएस का विकल्प देने का है। मगर फिर भी पुराने प्रकरणों का पेंच फंसेगा।

समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी

समायोजन में एक नीति न होने पर बेसिक शिक्षकों में बढ़ी नाराजगी, प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर बढ़ रही नाराजगी


लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ (पांडेय गुट) ने वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न जिलों में चल रही समायोजन की प्रक्रिया को लेकर आपत्ति दर्ज कराई है। संघ ने कहा है कि शिक्षकों के समायोजन में कोई एक नीति नहीं है। कहीं वरिष्ठ तो कहीं जूनियर शिक्षकों का मनमाना तबादला किया जा रहा है। 

संघ के प्रदेश अध्यक्ष सुशील कुमार पांडेय ने कहा कि प्रदेश में बेसिक शिक्षा एक प्रयोगशाला बन गई है। कभी स्कूलों की पेयरिंग, कभी टीईटी अनिवार्यता तो कभी ऑनलाइन हाजिरी की वजह से शिक्षक परेशान रहे हैं। अब सरप्लस शिक्षकों के समायोजन में उनके सामने नई मुसीबत खड़ी है। जिन स्कूलों में मानक से अधिक शिक्षक हैं, उन्हें एकल व बंद स्कूलों में भेजने की प्रक्रिया चल रही है।

उन्होंने कहा कि शिक्षकों ने बताया है कि जिले में सरप्लस की जो सूची बनाई जा रही है, उसमें कुछ जगह जूनियर का तबादला किया जा रहा है। वहीं, कुछ जिलों में वरिष्ठ के तबादले का विकल्प दे रहे हैं। कुछ जगह बिना विकल्प के ही जबरन समायोजन की बात कही जा रही है। उन्होंने कहा कि हर जिले में अलग-अलग नीति से शिक्षकों में काफी नाराजगी है।



कहीं सीनियर तो कहीं जूनियर शिक्षक का कर दिया जा रहा तबादला, परिषदीय शिक्षकों के अंत:जनपदीय तबादलों में मनमानी

लखनऊ: हाथरस के बीएसए में खंड शिक्षाधिकारियों को आदेश दिया है कि शिक्षक विहीन और एकल विद्यालय में जूनियर शिक्षक कर तबादला समायोजन कर दिया जाए। आदेश में यह भी लिखा है कि शिक्षकों से बिना विकल्प लिए तबादला किया जाए। वहीं, हमीरपुर के बीएमए लिखते हैं कि विकल्प लेकर  शिक्षक का तबादला कर दिया जाए। कई तरह की ऐसी असमानताएं केवल  मामला इन दो जिलों का ही नहीं,  पूरे प्रदेश का पही हाल है।

कुछ बीएसए सीनियर शिक्षक का तबादला कर रहे हैं तो कुछ जिलों में जूनियर का तबादला कर दे रहे। इतना ही नहीं, कुछ बीएसए ने विकल्प लेकर तबादला करने की बात लिखी है तो कुछ बिना विकल्प तबादले को कह रहे। वहीं कुछ जिले ऐसे भी है, जहां जूनियर का कोई निक ही नहीं किया गया है। ऐसे में किसी भी शिक्षक का तबादला किया जा सकता है। जिलों  में अलग-अलग नीति अपनाए जाने से शिक्षक परेशान हैं। उनका कहना है कि बिना किसी नियम के जिस शिक्षक को चाहेंगे, तबादला कर दिया जाएगा। कोई विकल्प नहीं भरता है, तो उसका तबादला जबरन करने की बात भी कई जिलों के बीएसए कर रहे हैं। 


कहां कैसे हो रहे तबादले?

शासनादेश में कह स्पष्ट नहीं किया गया कि तबादला जूनियर का होगा या सीनियर का। सीतापुर के बीएसए ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया कि किस शिक्षक का पहले तबादला होगा। कुशीनगर के बीएसए ने यह तो लिखा है कि पहले दिव्यांग सरप्लस, फिर महिला सरप्लस और फिर पुरुष सरप्लस का तबादला होगा। लेकिन उन्होंने यह नहीं स्पष्ट किया कि इनमें भी पहले जूनियर का किया जाएगा या फिर सीनियर का। हमीरपुर के बीएसए ने पहले दिव्यांग महिला, फिर दिव्यांग पुरुष, उसके बाद बरिष्ठ महिला और फिर वरिष्ठ पुरुष अध्यापक का तबादला करने के लिए लिखा है। 

शासन और निदेशक स्तर से जारी आदेश 19 दिसंबर को जो पत्र लिखा है, उसके अनुसार दिव्यांग, महिला, पुरुष विषया और विधुर के साथ ही वरिष्ठता के आधार पा तबादला होगा। वहीं, 26 दिसंबर को बिना किसी विकल्प के जूनियर शिक्षक तबादला करने के लिए लिखा है। 


बड़े अफसरों ने साधा मौन
इस बारे में अपर मुख्य सचिन पार्थ सारथी सेन शर्मा, डीजी स्कूल शिक्षा मोनिका रानी, निदेशक बेसिक शिक्षा से बात करने के लिए फोन किया गया। उनका पक्ष जानने के लिए मेसेज भी किया। अपर मुख्य सचिव ने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। बाकी अधिकारियों ने भी कोई जवाब नहीं दिया।


क्या है असल वजह?
इसके पहले भी बेसिक शिक्षकों के तबादले होते रहे है। प्रदेश स्वर में ऑनलाइन चुनते थे। इस बार तबादला करने के लिए बीएसए पर छोड दिया गया है। वे अपने स्तर से अलग-अलग़ निर्णय ले रहे है। जानकारों के अनुसार इसके पीछे मुख्य वजह यह है कि इसस पहले एक बार सीनियर और एक बार जूनियर का नियम था। तब भी कुछ शिवक कोर्ट चले गए थे। कोर्ट ने ना सिरे से नही बनाने के लिए कहा गया। यही वजह है कि जिला स्तर से कैसे भी तबादला प्रक्रिया पूरी करने की कोशिश की जा रही है। अभी कोर्ट बंद है। ऐसे में शिक्षक अभी कोर्ट भी नहीं सकते।

69000 शिक्षक भर्ती : जानबूझकर अधिक अंक भर चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति वैध नहीं, नियुक्ति रद करने के मामले में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार

69000 शिक्षक भर्ती : जानबूझकर अधिक अंक भर चयनित अभ्यर्थी की नियुक्ति वैध नहीं, नियुक्ति रद करने के मामले में हाईकोर्ट का हस्तक्षेप से इंकार 


प्रयागराजइलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि जो अभ्यर्थी जानबूझकर अपने आवेदन पन्न में अधिक अंक दर्ज करता है, वह मूल रूप से अवैध है और ऐसा व्यक्ति सरकारी नौकरी पाने का हकदार नहीं है। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से अभ्यर्थी को अनुचित लाभ मिलता है और यह शिक्षा और सरकारी सेवाओं की गरिमा को कम करता है। न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने यह टिप्पणी करते हुए सात सहायक शिक्षकों की याचिकाएं खारिज कर दी हैं, जबकि चार के मामले में विवादित आदेश रद कर दिया है।


याचीगण को प्रदेश में वर्ष 2018 में हुई 69 हजार सहायक शिक्षक भर्ती में चयनित होने के बाद नियुक्ति मिली थी, लेकिन बाद में दस्तावेज गलत पाए गए तो इनकी सेवा समाप्त कर दी गई। याचीगण ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी। न्यायमूर्ति ने कहा कि जहां कोई अभ्यर्थी जानबूझकर असल में मिले अंकों से ज्यादा अंक डालता है, जिससे उसे गलत फायदा मिलता है और आखिरकार नौकरी मिल जाती है तो ऐसी नौकरी को कानूनी या वैध नहीं माना जा सकता। ऐसे काम को किसी भी तरह से सिर्फ मानवीय गलती या अनजाने में हुई गलती नहीं माना जा सकता, क्योंकि इससे दूसरे योग्य अभ्यर्थी के नुकसान पर उसको गलत फायदा मिलता है और यह चयन प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता की जड़ पर ही चोट करता है।

एक अभ्यर्थी ने अपने आवेदन पत्र में गलत अंक दर्ज किए थे, वह चयनित हो गया। इससे उसे नौकरी मिल गई। बाद में जब यह मामला अदालत में आया तो अदालत ने कहा कि उसकी नियुक्ति अवैध है और उसे पद से हटाया जाना चाहिए। याचीगण कुशीनगर में नियुक्त हुए थे। राज्य सरकार ने चार दिसंबर 2020 से 15 जनवरी 2021 के बीच नियुक्ति का आदेश दिया था। बीएसए ने व्यक्तिगत शपथ पत्र लेकर नियुक्ति आदेश जारी किए थे। 

याचीगण के अधिवक्ता ने तर्क दिया नियुक्ति रिकार्ड की विस्तृत जांच के बाद हुई थी। कोई धोखाधड़ी या गलतबयानी स्थापित नहीं हुई है। राधे श्याम यादव बनाम यूपी राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का उल्लेख करते हुए कहा गया कि याचीगण को अधिकारियों द्वारा अंकों की गणना में की गई अनियमितता के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।

पांच साल तक नौकरी कर लेने का भी हवाला दिया गया। सरकार की तरफ से कहा गया कि जिन अभ्यर्थियों ने आनलाइन आवेदन पत्र में गलत विवरण भरा और इससे उन्हें लाभ हुआ है, उनका चयन रद किया जाना चाहिए। कोर्ट ने प्रीति, मनीष कुमार महावर, रिंको सिंह और स्वीटी शेखों को राहत दी है लेकिन अन्य वादियों के कोई राहत नहीं दी गई है। अवधेश चौधरी, सुनीत कुमार यादव, अर्जुन सिंह, प्रियवंदा पुष्कर, प्रीती, मनीष कुमार माहुर, रिंकू सिंह, स्वीटी शेखों, प्रियंका श्रीवास्तव, पिंका व पुष्पा ने याचिकाएं दायर की थीं।

Monday, December 29, 2025

शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (SOP) के संबंध में

शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (SOP) के संबंध में



कृपया उपर्युक्त विषयक उ०प्र० शासन, श्रम अनुभाग-02 के पत्र संख्या-1/1186369/2025-1703264 दिनांक 24.12.2025 का सन्दर्भ ग्रहण करने का कष्ट करें, जिसके माध्यम से आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 में बच्चों का प्रवेश लिये जाने हेतु मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पर अनुमोदन प्रदान किया गया है।


उपर्युक्त के क्रम में मा० मुख्यमंत्री जी के निर्देशानुसार अटल आवासीय विद्यालयों में प्रवेश परीक्षा "मण्डल स्तरीय अनुश्रवण समिति" के माध्यम से कराये जाने के क्रम में आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 में अटल आवासीय विद्यालयों में कक्षा-06 व कक्षा-09 की प्रवेश परीक्षा की मानक संचालन प्रकिया (S.O.P) पत्र के साथ संलग्न कर इस अनुरोध के साथ प्रेषित है कि कृपया प्रवेश परीक्षा के सम्बन्ध में आवश्यक कार्यवाही कराने का कष्ट करें। 


प्रदेश के 175 ब्लॉक के बेसिक शिक्षकों को अब भी चयन वेतनमान का इंतज़ार

प्रदेश के 175 ब्लॉक के बेसिक शिक्षकों को अब भी चयन वेतनमान का इंतज़ार

लखनऊ : शिक्षकों के चयन वेतनमान की प्रक्रिया एक साल पहले ऑनलाइन कर दी गई। इसके बावजूद शिक्षकों को चयन वेतनमान का इंतजार है। प्रदेश के 175 ब्लॉक ऐसे हैं, जहां किसी शिक्षक का चयन वेतनमान नहीं लगा। चयन वेतनमान के लिए महानिदेशक मोनिका रानी भी निर्देश दे चुकी हैं। फिर भी ब्लॉक स्तर पर कार्यवाही लटकी है। 

बीईओ के स्तर से प्रक्रिया लटकी है। लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, संभल, बस्ती सहित कई जिले ऐसे हैं, जहां कई ब्लॉक में अब तक शिक्षकों को चयन वेतनमान नहीं मिला लखनऊ के मलिहाबाद, सरोजनी नगर, मोहनलालगंज और नगर क्षेत्र के जोन चार के शिक्षक शिकायत भी कर रहे हैं, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।



लखनऊ, बाराबंकी समेत डेढ़ दर्जन जिलों में चयन वेतनमान देने की प्रक्रिया सुस्त, विभागीय आदेश के बाद भी सैकड़ों शिक्षकों को नहीं मिला लाभ

कई जिलों में नए बीएसए नहीं कर पा रहे हैं इसकी प्रक्रिया पूरी

लखनऊ। बेसिक शिक्षा विभाग की सख्ती और स्पष्ट निर्देशों के बावजूद लखनऊ, बाराबंकी, उन्नाव, कन्नौज सहित करीब डेढ़ दर्जन जिलों में शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ अब तक नहीं मिल पाया है। यह स्थिति तब है, जब महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने हाल ही में बैठक कर इस प्रक्रिया को शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए थे।

प्रदेश के परिषदीय विद्यालयों में 10 वर्ष की नियमानुसार सेवा पूरी करने वाले शिक्षकों को चयन वेतनमान दिया जाता है। दो भर्ती बैच के सैकड़ों शिक्षक इसके पात्र हैं, लेकिन कई जिलों में इसकी गति बेहद धीमी बनी हुई है। राजधानी लखनऊ में भी शिक्षक लाभ के लिए भटक रहे हैं, जबकि बाराबंकी में अब तक केवल आधा दर्जन शिक्षकों को ही इसका लाभ मिल सका है।

शिक्षक संगठनों की मांग के बाद विभाग हरकत में आया और समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हुआ। परिणामस्वरूप 50 से अधिक जिलों में अब तक 22 हजार से ज्यादा शिक्षकों को चयन वेतनमान का लाभ मिल चुका है। हालांकि अन्य जिलों में शिक्षकों का इंतजार लंबा होता जा रहा है। बताया जा रहा है कि जिन जिलों में नए बीएसए तैनात हुए हैं, वहां प्रक्रिया पूरी करने में अधिक समय लग रहा है।

महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने 29 दिसंबर को मानव संपदा पोर्टल पर चयन वेतनमान स्वीकृति की शत-प्रतिशत प्रगति की समीक्षा बैठक भी तय की है। इस बैठक में स्कूल, शिक्षक और छात्र प्रोफाइल की पूर्ण फीडिंग तथा अन्य राज्यों से प्राप्त स्टूडेंट रिलीज रिक्वेस्ट के मामलों की भी समीक्षा की जाएगी।



बेसिक शिक्षकों के चयन वेतनमान में लापरवाही को लेकर 188 बीईओ व 39 बीएसए DGSE के रडार पर

लखनऊ। चयन वेतनमान प्रकरण में लापरवाह 188 बीईओ (खण्ड शिक्षा अधिकारी) एवं 39 बीएसए (बेसिक शिक्षा अधिकारी) सरकार की रडार पर हैं। स्कूल शिक्षा महानिदेशक की स्पष्ट चेतावनी के बाद भी लापरवाही बरतने वाले इन बीईओ एवं बीएसए के खिलाफ अब कार्रवाई तय मानी जा रही है।



बेसिक शिक्षकों के चयन वेतनमान की राह में अभी भी कई रोड़े, सर्विस बुक ऑनलाइन, फिर भी ऑफलाइन मंगवा रहे 

दो बैच के काफी शिक्षक हैं चयन वेतनमान की लाइन में

लखनऊ। परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों को दस साल की सेवा पूरी करने पर चयन वेतनमान देने की व्यवस्था है। किंतु सैकड़ों शिक्षक पिछले कुछ महीने से इसके लिए भटक रहे हैं। हालत यह है कि 140 से अधिक विकास खंडों में अभी तक इसके लिए काम नहीं शुरू हुए हैं। कई जगह पर शिक्षकों से उनकी सर्विस बुक ऑफलाइन मांगी जा रही है।


इसकी शिकायत जब मुख्यालय में हुई तो कुछ जगह पर आदेश संशोधित किए गए हैं। वहीं, कई जगह पर सर्विस बुक अपडेट न होने की बात कही जा रही है। शिक्षकों ने बताया कि कई जिलों में पिछले तीन महीने में एक भी चयन वेतनमान का आदेश नहीं जारी हुआ है। जबकि 29334 और 72825 बैच के शिक्षकों की चयन वेतनमान के लिए लंबी लाइन है। शिक्षक नेता निर्भय सिंह ने कहा कि लखनऊ, बाराबंकी, हरदोई में न के बराबर शिक्षकों को इसका लाभ मिला है। इसकी वजह से हजारों शिक्षकों का ढाई से पांच हजार रुपये तक हर महीने का नुकसान हो रहा है।


वहीं, विभाग का कहना है कि काफी विकास खंडों में इसकी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। कुछ जगह पर आदेश भी जारी होने शुरू हो गए हैं। महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी ने हाल ही में इसमें रुचि न लेने वाले बीईओ व बीएसए के साथ बैठक कर कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने इस महीने के अंत तक सभी योग्य शिक्षकों को इसका लाभदेने का निर्देश दिया है। 

भीषण ठंड के चलते माध्यमिक विद्यालय का समय बदला

भीषण ठंड के चलते माध्यमिक विद्यालय का समय बदला


लखनऊ। प्रदेश में भीषण ठंड को देखते हुए माध्यमिक विद्यालयों का समय बदल दिया गया है। आगे बदले हुए समय पर विद्यालय खुलेंगे। विद्यालय अब सुबह दस बजे से शाम तीन बजे तक चलेंगे। पहले यह समय साढ़े नौ बजे से साढ़े तीन बजे तक था। इस तरह विद्यालयों का समय एक घंटे कम हो गया है। 

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव की ओर से जारी आदेश प्रदेश के सभी माध्यमिक विद्यालय पर लागू होगा। निदेशक ने सभी डीआईओएस को अगले आदेश तक यही समय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं। 


Sunday, December 28, 2025

राष्ट्रीय पदक विजेता छात्रों को मिलेंगे सीएम खेल पुरस्कार, माध्यमिक शिक्षा विभाग मई जून में करेगा आयोजन, 69वीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के लिए बजट मंजूर

राष्ट्रीय पदक विजेता छात्रों को मिलेंगे सीएम खेल पुरस्कार, माध्यमिक शिक्षा विभाग मई जून में करेगा आयोजन,  69वीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिता के लिए बजट मंजूर

लखनऊ। माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को पढ़ाई के साथ खेलों में भी दक्ष बनाने पर फोकस है। इसके लिए हर मंडल में खेल स्टेडियम और 22 जिलों के विद्यालयों में मिनी स्टेडियम बनाए जा रहे हैं। इसी क्रम में अब 69वीं राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में पदक विजेता छात्र-छात्राओं को मुख्यमंत्री विद्यालयी खेल पुरस्कार से सम्मानित करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए मई-जून में आयोजन किए जाएंगे।


बेसिक व माध्यमिक विद्यालयों में छात्रों को खेलकूद में आगे बढ़ाने के लिए राज्य व राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इस साल प्रदेश में सात खेलों की राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं हुईं। इनका समापन होने के बाद राष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक विजेता छात्रों को सीएम विद्यालय खेल पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से स्वर्ण, रजत व कांस्य पदक एकल विजेताओं को क्रमशः 75000, 50000 व 30000 रुपये बतौर पुरस्कार दिए जाएंगे। स्कूल टीम को क्रमशः 35000, 25000 व 15000 रुपये दिए जाएंगे। इसके लिए विभाग ने डेढ़ करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया है।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक डॉ. महेंद्र देव ने बताया कि स्कूल गेम्स फेडरेशन (एसजीएफआई) की ओर से प्रदेश में खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास किए जा रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हमारे छात्र काफी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में उनको प्रोत्साहित करने के लिए राज्य, मंडल व जिला स्तर पर सम्मानित किया जाएगा।

Friday, December 26, 2025

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में अब शिक्षक डायरी बंद, शिक्षकों को लर्निंग आउटकम पर ही देना होगा ध्यान

हिमाचल प्रदेश के स्कूलों में अब शिक्षक डायरी बंद, शिक्षकों को लर्निंग आउटकम पर ही देना होगा ध्यान

शिक्षा सचिव ने दिए लिखित आदेश


शिमला । हिमाचल सरकार ने शिक्षा विभाग में एक और व्यवस्था परिवर्तन करते हुए स्कूलों में मेंटेन की जा रही टीचर्स डायरी को बंद कर दिया है। शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने इस बारे में अब लिखित ऑर्डर कर दिए हैं। राकेश कंवर ने कुछ समय पहले अपने भाषण में इसके संकेत दिए थे। हिमाचल प्रदेश सेकेंडरी एजुकेशन कोड में टीचर्स डायरी मेंटेन करने का प्रावधान है। अभी एजुकेशन कोड के पैरा 12.9 के तहत टीचर्स डायरी को मैन्युअल फार्म में भरना जरूरी था।


 समय के इस दौर में आईटी में क्रांति अई है। ऐसे में मैनुअल प्रोसेस की खास जरूरत नहीं रह गई थी। इस समय सभी काम ऑनलाइन संभव हैं। टीचिंग लर्निंग एक्टिविटीज को डाक्यूमेंटेशन ऑनलाइन हो जाती है। इसके अलावा राज्य ने विद्या समीक्षा केंद्रों (बीएसके) की शुरुआत की है। इसके जरिए रियल टाइम बेसिस पर शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक गतिविधियों की मॉनिटरिंग हो रही है। वीएसके में अध्यापकों के लिए कई तरह के मॉड्यूल्स हैं। ऐसे में टीचर्स डायरी की प्रासंगिकता नहीं रह गई है। 


इन्हीं कारणों को देखते हुए शिक्षा विभाग ने टीचर्स डायरी को मेंटेन करने की प्रक्रिया को बंद करने संबंधी निर्देश जारी किए हैं। नई शिक्षा नीति-2020 में वैसे भी लचीलेपन, नव सृजन और क्षमता आधारित शिक्षण पर फोकस किया गया है, क्योंकि टीचर्स डायरी को मैन्युअल मेंटेन करने की जरूरत नहीं रह गई है। ऐसे में एजुकेशन कोड के पैरा नंबर 12.9 को हटाना सही है। एजुकेशन कोड के पैरा 12.9 के तहत टीचर्स डायरी में शिक्षकों के लिए एक डायरी मेंटेन करना जरूरी था। इसमें सिलेबस बांटने, पढ़ाए जाने वाले अध्याय की योजना का खाका यानी लेसन प्लान आदि का वर्णन करना जरूरी था। अध्यापकों को यह डायरी मेंटेन करना जरूरी था। 


इस डायरी को स्कूल के प्रधानाचार्य देखकर अप्रूव करते थे। यह सारी प्रक्रिया टाइम कंज्यूमिंग थी। साथ ही नए सेकेंडरी एजुकेशन कोड के पैरा 12.9 को हटाया जमाने के अनुसार यह व्यवाहारिक प्रतीत नहीं हो रहा था। हिमाचल में शिक्षा विभाग सबसे बड़ा महकमा है, जिसमें सभी तरह की कैटेगरी के शिक्षक और कर्मचारी करीब एक लाख हैं। बहरहाल इस फैसले को प्रदेश के कई शिक्षकों संगठनों ने शिक्षकों पर पड़ रहे अनावश्यक प्रशासनिक बोझ को कम करने की दिशा में सरकार का एक सराहनीय एवं दूरदर्शी निर्णय बताया है।


सरकार के समक्ष उठाई मांग पूरी
 शिमला। प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ ने शिक्षक डायरी को बंद करने के निर्णय को बेहतरीन करार दिया है और शिक्षा सचिव राकेश कंवर का आभार जताया है। राजकीय अध्यापक संघ पिछले लंबे समय से शिक्षक डायरी को बंद करने की मांग प्रमुखला के साथ प्रदेश सरकार व शिक्षा विभाग के समक्ष उठा रहा था। लिहाजा सोमवार को शिक्षा ने पर फैसला लेकर शिक्षकों कर दिया हादराज आपके प्रदेशाध्यक्षाचीन क राज्य प्रेस सचिव संजय चौधरी ने कहा कि पूर्व में पढ़ाई, पाठ योजना और कामकाज को दर्ज करने के लिए टीचर डायरी को आवश्यक माना जाता था। अध्यापक संघ ने विभाग के इन आदेशों का स्वागत करते हुए शिक्षा सचिव का आभार जताया है।


कम हुआ प्रशासनिक बोझ 
शिमला। हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ ने शिक्षक डायरी को शिक्षा विभाग की शिक्षा संविदा से बाहर करने के फैसले का स्वागत किया है। बदलते शैक्षणिक परिवेश एवं तकनीकी विकास के अनुरूप शिक्षकों पर पड़ रहे अनावश्यक प्रशासनिक बोड़ा को कम करने की दिशा में हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक सराहनीय एवं दूरदर्शी निर्णय लिया है। हिमाचल प्रदेश विद्यालय प्रवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष डा. अश्विनी कुमार, पूर्व अध्यक्ष ठाकुर केसर सिंह, वर्तमान राज्य अध्यक्ष अजय नेगी एवं महासचिव महासचिव इंदर इंदर सिंह ठाकुर, मुख्य संरक्षक लोकेंद्र नेगी, मुख्य मार्गदर्शक राजेश सैनी, राज्य चेयरमैन सुरेंद्र पुडीर सहित समस्त राज्य कार्यकारिणी ने इस निर्णय का स्वागत किया है। वहीं प्रवक्ता संघ के महिला विंग की और से इस अधिसूचना को शिक्षक हित में सकारात्मक कदम बताया है।

दिनांक 27 दिसम्बर 2025 को गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती पर अवकाश घोषित किये जाने के सम्बन्ध में।

दिनांक 27 दिसम्बर 2025 को गुरु गोविन्द सिंह जयन्ती पर अवकाश घोषित किये जाने के सम्बन्ध में।



दशमोत्तर छात्रवृत्ति से वंचित छात्रों को मिला दोबारा अवसर, मास्टर डाटा लॉक न होने से वंचित विद्यार्थियों के लिए समाज कल्याण विभाग ने जारी की संशोधित समय-सारिणी

दशमोत्तर छात्रवृत्ति से वंचित छात्रों को मिला दोबारा अवसर, मास्टर डाटा लॉक न होने से वंचित विद्यार्थियों के लिए समाज कल्याण विभाग ने जारी की संशोधित समय-सारिणी


लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने छात्र हित में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। समाज कल्याण विभाग ने शैक्षिक सत्र 2025-26 के अंतर्गत संचालित दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना में समय पर मास्टर डाटा लॉक न हो पाने के कारण वंचित रह गए पात्र छात्र-छात्राओं को दोबारा अवसर प्रदान किया है। इसके लिए विभाग द्वारा संशोधित समय-सारिणी जारी की गई है।


यह संशोधित व्यवस्था सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक वर्ग के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों पर समान रूप से लागू होगी। योगी सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रह जाए। समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम छात्रवृत्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी, त्रुटिरहित एवं समयबद्ध बनाने की दिशा में एक ठोस पहल है। इससे पात्र विद्यार्थियों को योजना का लाभ समय पर मिल सकेगा।

समाज कल्याण विभाग के उप निदेशक आनंद कुमार सिंह ने बताया कि संशोधित कार्यक्रम के तहत शिक्षण संस्थानों द्वारा मास्टर डाटा तैयार करने की प्रक्रिया 23 दिसंबर 2025 से 2 जनवरी 2026 तक की जाएगी। विश्वविद्यालयों एवं एफिलिएटिंग एजेंसियों द्वारा फीस एवं छात्र संख्या का सत्यापन 23 दिसंबर से 9 जनवरी तक तथा जिला समाज कल्याण अधिकारी द्वारा मास्टर डाटा और फीस का अंतिम सत्यापन 15 जनवरी 2026 तक पूरा किया जाएगा।

सामान्य, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक वर्ग के छात्र 14 जनवरी 2026 तक ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। आवश्यक अभिलेखों सहित हार्ड कॉपी 21 जनवरी 2026 तक शिक्षण संस्थानों में जमा करनी होगी। संस्थान स्तर पर सत्यापन 27 जनवरी तक, विश्वविद्यालय स्तर पर वास्तविक छात्र सत्यापन 28 जनवरी से 7 फरवरी 2026 तक तथा एनआईसी द्वारा डाटा स्क्रूटनी 9 फरवरी 2026 तक की जाएगी।

छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति की धनराशि 18 मार्च 2026 तक पीएफएमएस के माध्यम से आधार-सीडेड बैंक खातों में अंतरित की जाएगी। अनुसूचित जाति एवं जनजाति वर्ग के छात्र 31 मार्च 2026 तक आवेदन कर सकेंगे। सभी प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद अंतिम भुगतान 22 जून 2026 तक किया जाएगा।

Thursday, December 25, 2025

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयो से दिनांक-01-04-2024 से 31.03.2025 तक सेवानिवृत्त हुये शिक्षक तथा दिनांक-01-04-2024 से 31.03.2025 के मध्य सेवानिवृत्त हुये शिक्षणेत्तर कर्मचारियो तथा मृतक शिक्षक एवं कर्मचारियो के परिवारजनों को मिलने वाले देयको के भुगतान की निस्तारित सूचना निर्धारित प्रारूप क, ख एवं ग पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध मे

प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयो से दिनांक-01-04-2024 से 31.03.2025 तक सेवानिवृत्त हुये शिक्षक तथा दिनांक-01-04-2024 से 31.03.2025 के मध्य सेवानिवृत्त हुये शिक्षणेत्तर कर्मचारियो तथा मृतक शिक्षक एवं कर्मचारियो के परिवारजनों को मिलने वाले देयको के भुगतान की निस्तारित सूचना निर्धारित प्रारूप क, ख एवं ग पर उपलब्ध कराने के सम्बन्ध मे

उच्च शिक्षा ने 957, व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने नहीं लौटाए 402 करोड़ रुपये, योजनाओं को लागू करने में लापरवाही का उल्लेख करते हुए अनुपूरक अनुदान लेकर खर्च न करने पर कैग ने जताई आपत्ति

उच्च शिक्षा ने 957, व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने नहीं लौटाए 402 करोड़ रुपये, योजनाओं को लागू करने में लापरवाही का उल्लेख करते हुए अनुपूरक अनुदान लेकर खर्च न करने पर कैग ने जताई आपत्ति


लखनऊ। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2024-25 की रिपोर्ट में उच्च शिक्षा व व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने योजनाओं को लागू करने में लापरवाही का उल्लेख किया है। यह विभाग कई योजनाओं में बजट पूरा खर्च नहीं कर पाया। उच्च शिक्षा ने 957 करोड़ व व्यावसायिक शिक्षा ने मूल बजट के बचे हुए 402 करोड़ वित्त विभाग को वापस नहीं किए।


यही नहीं उच्च शिक्षा ने 3.92 करोड़ और व्यावसायिक शिक्षा विभाग ने अनुपूरक अनुदान में 300 करोड़ ले लिए। यह राशि विभागों के पास बेकार पड़ी रही। कैग रिपोर्ट में व्यावसायिक शिक्षा विभाग की ओर से 402.24 करोड़ की राशि वित्त विभाग को वापस न करने पर आपत्ति जताई गई है। जुलाई 2024 में 300 करोड़ का अनुपूरक अनुदान लेना विभाग के लिए अनावश्यक साबित हुआ।


कई योजनाओं में वह पूरी राशि नहीं खर्च कर पाया। दस्तकार प्रशिक्षण योजना में 26 करोड़ में से 16.75 करोड़ ही खर्च हुए, प्रदेश में दो मेगा राजकीय आईटीआई खोलने के लिए एक करोड़ में से शून्य और मुख्यमंत्री शिक्षुता प्रोत्साहन योजना में 70 करोड़ से मात्र 1.49 करोड़ खर्च किए गए। वित्त विभाग को समय पर राशि वापस नहीं की गई।



प्राविधिक शिक्षा विभाग ने नहीं लौटाए 26.92 करोड़

लखनऊ। कैग रिपोर्ट में प्राविधिक शिक्षा विभाग की बजट प्रबंधन में लापरवाही सामने आई है। विभाग ने बजट में बची 26.92 करोड़ रुपये की राशि वित्त विभाग को वापस नहीं की, जबकि मूल बजट से कम खर्च होने के बावजूद 10 करोड़ रुपये का अनुपूरक अनुदान मांगा गया, जो अनावश्यक पाया गया। कम प्रवेश के कारण फीस से आय घटने पर कई पॉलीटेक्निक संस्थानों का बजट बढ़ाना पड़ा। वहीं मैनपुरी इंजीनियरिंग कॉलेज में अनुमान से अधिक खर्च हुआ और कन्नौज इंजीनियरिंग कॉलेज में बजट निर्धारण व व्यय में भारी असंतुलन सामने आया। कैग ने बजट योजना और खर्च में बेहतर समन्वय की जरूरत बताई है। 


वित्त विभाग को नहीं लौटाई गई पूरी रकम

लखनऊ। समाज कल्याण विभाग ने बचत की राशि वित्त विभाग को नहीं लौटाई। सीएजी की रिपोर्ट में इसपर आपत्ति जताई गई है। उसके पास मूल बजट में से 342 करोड़बचे, मगर वित्त विभाग को 40 करोड़ ही वापस किए। रिपोर्ट को सदन के पटल पर रखा गया। सीएजी की रिपोर्ट में बाकी राशि का ब्योरा न मिलने पर सवाल उठाए हैं। विभाग की ओर से अनुदान व्यय मूल बजट से कम होने की वजह से अनुपूरक अनुदान अनावश्यक साबित हुआ। अनुपूरक अनुदान के रूप में मिले 115 करोड़ रुपये का उपयोगी साबित नहीं हुआ। कुछ योजनाओं में समय पर केंद्रांश न मिलने के कारण राशि वापस लौटाना पड़ा। 19 करोड़ रुपये इस वजह से वापस किए गए। 

बीएड शिक्षकों को ब्रिज कोर्स पर अंतरिम राहत, हाईकोर्ट से सशर्त आवेदन की अनुमति, सेवाएं समाप्त करने पर लगी अस्थायी रोक

बीएड शिक्षकों को ब्रिज कोर्स पर अंतरिम राहत, हाईकोर्ट से सशर्त आवेदन की अनुमति, सेवाएं समाप्त करने पर लगी अस्थायी रोक


 लखनऊः इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत बीएड डिग्रीधारक शिक्षकों को अंतरिम राहत दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याची शिक्षकों को अस्थायी रूप से ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए, ताकि उनके विरुद्ध कोई दंडात्मक कार्रवाई न हो।

यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने पंकज शर्मा व 24 अन्य शिक्षकों की याचिका पर पारित किया। मामला राज्य सरकार की ओर से छह अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश और 13 दिसंबर 2025 के आदेश से जुड़ा है, जिसमें बीएड डिग्रीधारक सहायक अध्यापकों को छह माह के ब्रिज कोर्स में नामांकन करने का निर्देश दिया गया था। शासनादेश में यह भी प्रविधान था कि यदि कोई शिक्षक ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन नहीं करता है, तो उसकी सेवा समाप्त की जा सकती है।

याचियों की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने पहले ही राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद की अधिसूचना के अनुरूप राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान से छह माह का ब्रिज कोर्स सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। यह प्रशिक्षण वैध योग्यता के रूप में मान्य है, ऐसे में दोबारा ब्रिज कोर्स करने के लिए बाध्य करना न केवल अनुचित बल्कि मनमाना भी है।

वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि उक्त शासनादेश सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है और विभाग उसी के अनुसार कार्य कर रहा है। सभी शिक्षकों के लिए समान रूप से ब्रिज कोर्स अनिवार्य किया गया है।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कहा कि अगली सुनवाई तक याचियों को अंतरिम संरक्षण दिया जाना आवश्यक है। कोर्ट ने नौ जनवरी 2026 को मामले की अगली सुनवाई तय करते हुए निर्देश दिया कि तब तक याचियों को सशर्त रूप से ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने दिया जाए और विभाग उनके आवेदन स्वीकार करने के लिए हर संभव प्रयास करे।



ब्रिज कोर्स के लिए सशर्त आवेदन की अनुमति दे सरकार : हाईकोर्ट, बीएड डिग्रीधारक प्राथमिक शिक्षकों को मिली अंतरिम राहत


लखनऊ। हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बीएड डिग्रीधारक प्राथमिक शिक्षकों के ब्रिज कोर्स से जुड़े मामले में राज्य सरकार को आदेश दिया है कि याची शिक्षकों को अंतरिम रूप से ब्रिज कोर्स के लिए आवेदन करने की अनुमति दी जाए।

न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश पंकज शर्मा व 24 अन्य की ओर से दाखिल याचिका पर दिया। मामला राज्य सरकार द्वारा 6 अक्टूबर 2025 को जारी शासनादेश और 13 दिसंबर 2025 को पारित आदेश से जुड़ा है, जिसमें बीएड डिग्रीधारक सहायक अध्यापकों को छह माह के ब्रिज कोर्स में नामांकन करने का निर्देश दिया गया था।

 शासनादेश में यह भी उल्लेख था कि प्रशिक्षण में आवेदन न करने पर सेवाएं समाप्त की जा सकती हैं। याचियों की ओर से दलील दी गई कि उन्होंने पहले ही एनसीटीई की अधिसूचना के अनुसार राष्ट्रीय मुक्त विद्यालयी शिक्षा संस्थान (एनआईओएस) से छह माह का ब्रिज कोर्स पूरा कर लिया है, जिसे वैध योग्यता माना जा चुका है।

ऐसे में दोबारा प्रशिक्षण के लिए बाध्य करना अनुचित है। वहीं राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि यह शासनादेश सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुपालन में जारी किया गया है और विभाग उसी के अनुसार कार्य कर रहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 9 जनवरी 2026 को तय करते हुए कहा कि तब तक याचियों को अस्थायी रूप से आवेदन करने दिया जाए और विभाग उनके आवेदनों को स्वीकार करने के लिए हर संभव प्रयास करे। 


Wednesday, December 24, 2025

आने वाले बजट में सभी जिलों में बालिका छात्रावास बनाने का हो सकता है एलान, उच्च शिक्षा के GER को बढ़ाने में जुटे शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया प्रस्ताव

आने वाले बजट में सभी जिलों में बालिका छात्रावास बनाने का हो सकता है एलान, उच्च शिक्षा के GER को बढ़ाने में जुटे शिक्षा मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को दिया प्रस्ताव


नई दिल्लीः आने वाले बजट में केंद्र सरकार बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कुछ बड़ा एलान कर सकती है। जो संकेत मिले है, उसमें देश के सभी जिलों में बालिकाओं के लिए एक-एक छात्रावास बनाए जा सकते है। जहां वह सुरक्षित तरीके से रह कर उच्च शिक्षा की अपनी पढ़ाई पूरी कर सकती है। 


अभी ग्रामीण और दूर-दराज क्षेत्रों में रहने वाली बालिकाएं सिर्फ इसलिए उच्च शिक्षा से वंचित रह जाती है, क्योंकि उच्च शिक्षण संस्थान उनके घरों से दूर है। साथ ही जहां संस्थान है, वहां उनके पास रहकर पढ़ाई करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में शिक्षा मंत्रालय इस दिशा में आगे बढ़ा है। 


शिक्षा मंत्रालय से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, मंत्रालय की ओर से वित्त मंत्रालय को इसे लेकर प्रस्ताव दिया गया है। जिस पर वित्त मंत्रालय के साथ ही कई दौर की चर्चा भी चुकी है। ऐसे में माना जा रहा है कि बजट में इसे लेकर घोषणा हो सकती है। मंत्रालय वैसे भी उच्च शिक्षा के जीईआर को 2035 तक 50 प्रतिशत पहुंचाने के लक्ष्य को लेकर तेजी से बढ़ा है। ऐसे में बगैर बालिकाओं को जोड़े यह लक्ष्य हासिल भी नहीं होने वाला है। मौजूदा समय में देश में उच्च शिक्षा का जीइआर करीब 29 प्रतिशत है।

उच्च शिक्षा के जीइआर को बढ़ाने की इस मुहिम में केंद्र ने सभी राज्यों को भी जोड़ने की योजना बनाई है। जिसके तहत 26, 27 और 28 दिसंबर को सभी राज्यों के मुख्य सचिवों के साथ एक बैठक रखी गई है। जिसमें उच्च शिक्षा के जीइआर को बढ़ाने के मुद्दे पर प्रमुखता से चर्चा होगी। इसके लिए सभी राज्यों को जरूरी संसाधन जुटाने जैसी पहलों के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

वीर बाल दिवस के आयोजन के सम्बन्ध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी आदेश देखें

वीर बाल दिवस के आयोजन के सम्बन्ध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा जारी आदेश देखें